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आज सीएम करेंगे 60 मेगावॉट सोलर प्लांट का लोकार्पण:जलूद में तैयार 271.16 करोड़ की लागत से प्लांट, हर महीने 4 से 4.50 करोड़ बिजली की बचत

आज सीएम करेंगे 60 मेगावॉट सोलर प्लांट का लोकार्पण:जलूद में तैयार 271.16 करोड़ की लागत से प्लांट, हर महीने 4 से 4.50 करोड़ बिजली की बचत

जलूद क्षेत्र में स्थापित 271.16 करोड़ रुपए की लागत से 60 मेगावॉट क्षमता वाले सोलर पावर प्लांट का लोकार्पण 29 अप्रैल को सीएम डॉ.मोहन यादव जलूद में करेंगे। शाम 4.30 लोकार्पण किया जाएगा। इस मौके पर मंत्री, सांसद, विधायक, एमआईसी मेंबर, पार्षद सहित कई लोग शामिल होंगे। महापौर पुष्यमित्र भार्गव एवं आयुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि सोलर प्लांट ट्रायल के दौरान इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और मार्च महीने में ही पंपिंग स्टेशन के बिजली खर्च में लगभग 3.64 करोड़ रुपए की बचत दर्ज की गई है। अनुमान है कि आने वाले समय में यह बचत और बढ़ेगी। वर्तमान में नगर निगम हर महीने केवल जलूद से पानी की सप्लाई और पंपिंग सिस्टम के लिए बिजली पर करीब 22 से 25 करोड़ रुपए खर्च करता है। सोलर ऊर्जा के उपयोग से बिजली खर्च में हर महीने 4 से 4 .50 करोड़ से अधिक की बचत होगी बचत जिससे खर्च में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इंदौर देश का पहला नगरीय निकाय बन गया है, जिसने ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से 244 करोड़ रुपए जुटाकर इस सोलर प्लांट की स्थापना की है। महापौर ने बताया कि सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से नगर निगम का बिजली बिल लगातार कम होगा और जल आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाएं अधिक भरोसेमंद बनेंगी। यह 60 मेगावॉट क्षमता का सोलर प्लांट भारत सरकार की CPSU योजना (फेज-2, ट्रेंच-2) के अंतर्गत तैयार किया गया है, जो शहर को स्वच्छ और सस्टेनेबल ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दांतों में दर्द और सेंसिटिविटी से हैं परेशान, तो ये आयुर्वेदिक घरेलू उपाय दे सकते हैं तुरंत राहत

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Last Updated:April 29, 2026, 06:15 IST हरियाणा के अंबाला शहर स्थित नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने लोकल 18 को बताया है कि अचानक ठंडी चीजों के संपर्क में आने से दांतों की बाहरी परत (इनैमल) प्रभावित होती है, जिससे अंदर की नसें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं. यही कारण है कि ठंडा या गर्म कुछ भी खाते-पीते समय दांतों में झनझनाहट या तेज दर्द महसूस होता है. अंबाला: देशभर में गर्मी का पारा बढ़ने के साथ ही लोगों की खान-पान की आदतों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए लोग आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और बर्फ जैसे ठंडे पेय पदार्थों का जमकर सेवन कर रहे हैं. हालांकि, यह तात्कालिक राहत अब दांतों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है, क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ठंडी और मीठी चीजों के सेवन से दांतों में संवेदनशीलता (सेंसिटिविटी) और दर्द के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. अक्सर लोग गर्मी से बचाव के लिए मीठी व ठंडी चीजों का सेवन तो करने लगते हैं, लेकिन अपने दांतों का ख्याल रखना भूल जाते हैं. कैसे पहुंचता है दांतों को नुकसान हरियाणा के अंबाला शहर स्थित नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि अचानक ठंडी चीजों के संपर्क में आने से दांतों की बाहरी परत (इनैमल) प्रभावित होती है, जिससे अंदर की नसें अधिक संवेदनशील हो जाती हैं. यही कारण है कि ठंडा या गर्म कुछ भी खाते-पीते समय दांतों में झनझनाहट या तेज दर्द महसूस होता है. उन्होंने बताया कि इन दिनों ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, हालांकि कुछ सावधानियां अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है. दांतों के लिए घरेलू रामबाण आयुर्वेदिक उपाय उन्होंने बताया कि दांतों के लिए घरेलू रामबाण आयुर्वेदिक उपाय के रूप में त्रिफला चूर्ण उपयोगी है. यह सरल नुस्खा दांतों की सफाई, मसूड़ों की मजबूती और मुंह की दुर्गंध को दूर करने में सहायक माना जाता है. त्रिफला हरड़ (हरितकी), बहेड़ा (विभीतकी) और आंवला (आमलकी) से मिलकर बनता है. इसके चूर्ण का काढ़ा बनाकर भोजन के बाद कुल्ले के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जिससे दांतों पर जमी गंदगी और प्लाक की सफाई में मदद मिलती है. इसके अलावा, सरसों के तेल में दो चम्मच नमक मिलाकर रात में दांतों और मसूड़ों की हल्के हाथों से 1-2 मिनट मालिश करने से सूजन और खून आने की समस्या में राहत मिलती है. इसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला कर लेना चाहिए. उन्होंने बताया कि फिटकरी को भूनकर उसका पाउडर बनाकर रात को सोने से पहले हल्की मालिश करने से कैविटी की समस्या में भी लाभ मिलता है. उन्होंने यह भी बताया कि अमरूद, जामुन और आम के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर उससे कुल्ला करना आयुर्वेद में लाभकारी माना गया है. आंवले का माउथ फ्रेशनर यदि मुंह से दुर्गंध आती है, तो घर पर बना आंवले का माउथ फ्रेशनर उपयोगी हो सकता है. आंवले में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो मुंह की बदबू दूर करने के साथ शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करते हैं. इसे बनाने के लिए 500 ग्राम आंवले को धोकर पानी में उबाल लें. उबालने के बाद उसकी फांकों को अलग कर लें और पानी निकाल दें. फिर इसमें 500 ग्राम मिश्री पाउडर मिलाकर ढककर रख दें. कुछ समय बाद आंवला पानी छोड़ देगा, उस पानी को निकालकर 2 से 3 दिन तक यही प्रक्रिया दोहराएं. अंत में छानकर इसमें भुना जीरा पाउडर, अमचूर पाउडर, काली मिर्च पाउडर और काला नमक मिलाकर अच्छी तरह मिश्रित करें और एयरटाइट कंटेनर में रख लें. यह माउथ फ्रेशनर काफी लाभकारी माना जाता है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ambala,Ambala,Haryana First Published : April 29, 2026, 06:15 IST

22 किमी का टाइगर कॉरिडोर:758 करोड़ का फोरलेन, मामला कोर्ट में; इसलिए अभी टू-लेन की मरम्मत

22 किमी का टाइगर कॉरिडोर:758 करोड़ का फोरलेन, मामला कोर्ट में; इसलिए अभी टू-लेन की मरम्मत

​ नेशनल हाईवे-46 पर इटारसी-बैतूल सेक्शन में स्थित 22 किमी में टाइगर कॉरिडोर (फोरलेन) बनेगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने 758 करोड़ का बजट दिया है। इटारसी बाघदेव से बैतूल के डांडीवाड़ा तक ये हिस्सा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में है। यहां निर्माण पर हाईकोर्ट का स्टे है, इसलिए फोरलेन का काम 15 साल से अधूरा है। जब तक फोरलेन निर्माण की अनुमति नहीं मिलती, तब तक पुरानी टू-लेन सड़क की 5.5 करोड़ से मरम्मत की जा रही है। एमपीआरडीसी के प्रबंधक वेद प्रकाश के अनुसार- निर्माण कंपनी को 4 माह का समय दिया है। 5.5 करोड़ से सड़क का पूरी तरह से डामरीकरण किया जाएगा। उत्तर से दक्षिण की कनेक्टिविटी बढ़ेगी 22 किमी कॉरिडोर बनने से पूरा ग्वालियर-बैतूल कॉरिडोर फोरलेन हो जाएगा, जिससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सीधा संपर्क मजबूत होगा। महत्व: यह कॉरिडोर नर्मदापुरम और बैतूल जिलों के बीच आर्थिक सेतु का काम करेगा, जिससे कृषि और खनिज संपदा के परिवहन में आसानी होगी और स्थानीय रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। कोर्ट का फैसला आने के बाद ही फोरलेन का स्थायी निर्माण कार्य आगे बढ़ सकेगा। कानूनी लड़ाई के बीच सड़क की हालत बेहद खस्ता हो चुकी है। आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। फिलहाल टू-लेन मार्ग की मरम्मत कराई जा रही है। मनीष मीणा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई

दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई-टली… अब 29 जुलाई को होगी:जेल से राहत, सजा पर "स्टे' का इंतजार, सुनवाई पर टिकी भारती की विधायकी

दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई-टली... अब 29 जुलाई को होगी:जेल से राहत, सजा पर "स्टे' का इंतजार, सुनवाई पर टिकी भारती की विधायकी

दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती का कानूनी मामला अब दतिया विधानसभा के भविष्य पर भी असर डाल रहा है। मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई टल गई और अगली तारीख 29 जुलाई तय हुई। इसके बाद शहर में उपचुनाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। नियमों के हिसाब से अगर जुलाई में फैसला आता है, तो निर्वाचन आयोग के पास चुनाव कराने के लिए करीब 60 दिन ही बचेंगे, क्योंकि 6 महीने की संवैधानिक समय-सीमा लागू होती है। तीन माह बाद सुनवाई, दतिया में तेज हुई सियासी हलचल तीन माह बाद की नई तारीख सामने आते ही दतिया में उपचुनाव की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। दरअसल, 3 अप्रैल को दतिया विधानसभा सीट रिक्त हो चुकी है और 3 अक्टूबर को 6 माह की समय सीमा पूरी होगी। नियम के अनुसार इस अवधि में चुनाव कराना अनिवार्य है। जानकारों का मानना है कि अभी सुनवाई की तारीख और आगे बढ़ सकती है, क्योंकि अदालत ने सजा पर कोई स्टे नहीं दिया है। कोर्ट ने कहा- मामला लंबित रहने तक जमानत जारी रहेगी एफडी में गड़बड़ी के मामले में 2 अप्रैल को एमपी एमएलए कोर्ट ने भारती को 3 साल की सजा और एक लाख रुपए जुर्माने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की है। भारती के बेटे अनुज के अनुसार, भारती की ओर से मामले की सुनवाई सीनियर एडवोकेट माधव खुराना ने की। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि मामला लंबित रहने तक भारती की जमानत जारी रहेगी। वहीं, सजा पर स्टे की मांग पर अब 29 जुलाई को सुनवाई होगी।

कनाडा में निहंग को पीटा, दाढ़ी खींची,VIDEO:ड्राइवर की हिमायत में पैसे मांगने गया था, बहस के बाद ट्रांसपोर्ट कंपनी मालिक ने हमला किया

कनाडा में निहंग को पीटा, दाढ़ी खींची,VIDEO:ड्राइवर की हिमायत में पैसे मांगने गया था, बहस के बाद ट्रांसपोर्ट कंपनी मालिक ने हमला किया

कनाडा में ट्रांसपोर्ट कंपनी के ऑफिस में निहंग के साथ मारपीट की गई। इस दौरान निहंग की दाढ़ी खींची गई। ्इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दो लोगों के बीच झड़प होते हुए दिख रही है। मारपीट का करण एक ट्रक ड्राइवर के पैसों को लेकर बताया जा रहा है। ड्राइवर का आरोप कि हाल ही में हुए एक्सीडेंट में उसकी गलती न होने के बावजूद कंपनी ने पैसे काटने की बात कही। इसके बाद उसने निहंग को मामला बताया। ड्राइवर के मुताबिक, बातचीत के दौरान कंपनी मालिक ने निहंग की दाढ़ी पकड़ ली और उसकी पत्नी के साथ भी मारपीट की। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद ट्रांसपोर्ट कंपनी का मालिक भी सामने आया है। उसने विवाद बढ़ने पर माफी मांग ली है। ट्रांसपोर्ट कंपनी मालिक ने कहा कि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था कि निहंग के केशों को छुएं या किसी भी तरह की बेअदबी करें। उसने ट्रक ड्राइवर के आरोपों भी गलत बताया है। पहले जानिए विवाद क्यों हुआ… मारपीट की इस घटना का कारण ट्रक ड्राइवर के पैसे न मिलने को बताया जा रहा है। इसी कंपनी में काम करने वाले एक ट्रक ड्राइवर ने कहा कि वह दिसंबर से इस कंपनी में काम कर रहा था, लेकिन कंपनी उसे उसका पैसा नहीं दे रही। ड्राइवर ने बताया कि कुछ दिन पहले ट्रक का एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उसी कंपनी का दूसरा ड्राइवर ट्रक चला रहा था और वह खुद ट्रक के पीछे सो रहा था। नियमों के अनुसार उसकी कोई गलती नहीं थी, फिर भी कंपनी ने कहा कि उसके पैसे भी काट लिए जाएंगे। इसके बाद मैंनें यह बात निहंग सिंह को बताई। जब वह इस मामले में बात करने गया, तो वहां के मालिक रमन ने उस निहंग की दाढ़ी को पकड़ लिया और साथ ही मेरी पत्नी के साथ भी मारपीट की। ट्रांसपोर्ट कंपनी मालिक ने सफाई में क्या कहा.. वीडियो बनाने के बाद कहासुनी हुई: रैपिडएक्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक रमन ने वीडियो जारी कर कहा- 23 अप्रैल को जब मैं अपने ऑफिस से बाहर जा रहा, इस वक्त अपने ड्राइवर के साथ बातचीत कर रहा था। तभी निहंग वहां आया और वीडियो बनाने लगा, जिसके बाद कहासुनी शुरू हो गई। ऑफिस में महिलाओं से अभद्रता की: रमन ने कहा कि इसके बाद मैं वहां से चला गया। इसके बाद वही निहंग उनके ऑफिस आया और वहां गलत व्यवहार करने लगा। उसने ऑफिस के फ्रंट गेट को भी नुकसान पहुंचाया और महिला कर्मचारियों के सामने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। रोकने की कोशिश, पर झड़प हो गई: रमन ने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए मैंने उसे रोकने की कोशिश की, जिसके दौरान हम दोनों के बीच झड़प हो गई। वे उस व्यक्ति को न तो जानते हैं और न ही पहचानते हैं। अगर कोई इस तरह से ऑफिस में आकर हंगामा करेगा, तो कोई भी व्यक्ति आत्मरक्षा में कदम उठाएगा। ट्रक ड्राइवर के आरोप झूठे: रमन ने ट्रक ड्राइवर के पैसों के विवाद को लेकर कहा कि ये सक झूठ है और कहा कि मैंने कभी भी यह नहीं कहा कि मैं तुम्हारे पैसे काटूगा। मैंने सिर्फ इतना कहा था कि घटना की रिपोर्ट भर दो। क्योंकि जो ट्रक चलाया जा रहा था, उसके अंदर लगा कैमरा टूटकर गिर गया था, जिसकी वजह से हमें कोई वीडियो या फोटो नहीं मिल पाई। ड्राइवर को सिर्फ रिपोर्ट भरने के लिए कहा: रमन ने कहा कि मैंने ड्राइवर भाई से कहा था कि आप रिपोर्ट भर दें और उसमें लिख दें कि मैं पीछे सो रहा था। यह सब बीमा (इंश्योरेंस) के उद्देश्य के लिए जरूरी था, क्योंकि ड्राइवर का बयान होना आवश्यक होता है। मैंने केवल इतना ही कहा था कि आप अपना बयान दे दें और जो आपके बनते पैसे हैं, उनका चेक ले लें। मैंने इसके अलावा कोई भी गलत बात नहीं कही। मुझे समझ नहीं आया कि यह मुद्दा इतना बड़ा कैसे बन गया। और जो ड्राइवर उस समय ट्रक चला रहा था, वह आज भी मेरी कंपनी में काम कर रहा है।

शिमला-मंडी और कांगड़ा में बारिश:तापमान में गिरावट; सोलन का पारा 12॰C गिरा, 4 जिलों में आज भारी ओलावृष्टि की चेतावनी

शिमला-मंडी और कांगड़ा में बारिश:तापमान में गिरावट; सोलन का पारा 12॰C गिरा, 4 जिलों में आज भारी ओलावृष्टि की चेतावनी

हिमाचल की राजधानी शिमला और मंडी में बारिश हो रही है। कांगड़ा में भी सुबह के वक्त बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया। राज्य के अन्य भागों में भी मौसम खराब बना हुआ है। मौसम विभाग (IMD) ने आज कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में भारी ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट दे रखा है। इस दौरान कुछेक क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज तूफान भी चल सकता है। राज्य में अगले छह दिन भी बारिश जारी रहने के आसार हैं। IMD ने मध्यम ऊंचाई वाले कुछेक क्षेत्रों में तेज बारिश का पूर्वानुमान लगाया है, जबकि लाहौल-स्पीति व किन्नौर को छोड़कर अन्य सभी जिलों में ओलावृष्टि और तूफान का येलो अलर्ट जारी किया है। कल व परसों (30 अप्रैल और 1 मई को) भी चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में ओलावृष्टि व तूफान का येलो अलर्ट जारी किया गया है। दो मई को वेस्टर्न डिस्टर्बेंस थोड़ा कमजोर जरूर पड़ेगा, लेकिन इस दिन भी ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले भागों में हल्की बारिश के आसार हैं। मगर तीन और चार मई को फिर से राज्य के ज्यादातर भागों में अच्छी बारिश का पूर्वानुमान है। इससे अगले पांच-छह दिनों के दौरान तापमान में गिरावट आएगी। तापमान में भारी गिरावट, सोलन का पारा 12 डिग्री लुढ़का कल (28 अप्रैल) भी हल्की बारिश के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। कई शहरों का तापमान पिछले कल (सोमवार) की तुलना में आज 12 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिरा है। इससे राज्य का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 4.8 डिग्री नीचे गिर गया है। सोलन के अधिकतम तापमान में सबसे ज्यादा 12.5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और यहां का तापमान गिरकर 20.5 डिग्री सेल्सियस रह गया। सुंदरनगर का पारा 12.0 डिग्री लुढ़कने के बाद 24.5 डिग्री, भुंतर का 10.4 डिग्री गिरने के बाद 24.0 डिग्री, मंडी का 10.4 डिग्री कम होने के बाद 25.6 डिग्री और ऊना का अधिकतम तापमान 9.4 डिग्री नीचे लुढ़कने के बाद 32.6 डिग्री रह गया है। बीते सोमवार को ऊना का तापमान 42 डिग्री पहुंच गया था। पहाड़ों पर सुहावना हुआ मौसम राज्य के अन्य शहरों के तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। पहाड़ों पर इससे मौसम सुहावना हो गया है। प्रदेशवासियों ने मौसम में बदलाव के बाद भीषण गर्मी से राहत की सांस ली है। सोलन में 2.2 मिमी, शिमला में 0.4 मिमी, कल्पा में 0.7 मिमी, भुंतर में 0.2 मिमी, मनाली में 1 मिमी और जुब्बड़हट्टी में 2 मिमी बारिश हुई है।

भोपाल में पारा 43.6°C, 10 साल में दूसरा सबसे ज्यादा:खजुराहो MP का सबसे गर्म; ग्वालियर समेत 15 जिलों में आज लू चलेगी

भोपाल में पारा 43.6°C, 10 साल में दूसरा सबसे ज्यादा:खजुराहो MP का सबसे गर्म; ग्वालियर समेत 15 जिलों में आज लू चलेगी

मध्य प्रदेश का टूरिस्ट स्पॉट खजुराहो सबसे ‘हॉट’ बना हुआ है। मंगलवार को यहां तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा। भोपाल में पारा 43.6 डिग्री पहुंच गया, जो 10 साल में दूसरा और सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) के एक्टिव होने से उत्तरी हिस्से यानी, ग्वालियर, चंबल-सागर संभाग में पारे में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, विदिशा, सागर, रायसेन, मंडला और छिंदवाड़ा में लू का अलर्ट है। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा में दिन में लू चलेगी और शाम के बाद मौसम बदलेगा। यहां गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, बालाघाट, सिवनी और बैतूल में भी बारिश होने की संभावना है। दिन में जरूरी होने पर ही निकले लोग प्रदेश में लू के अलर्ट के बीच मौसम विभाग ने लोगों को चेताया है कि दोपहर 12 से 3 बजे के बीच जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। इसी समय लू का असर सबसे ज्यादा रहता है। भोपाल में गर्मी का असर बरकरार रहेगा। खजुराहो, सीधी-श्योपुर में पारा 44 डिग्री पार इससे पहले मंगलवार को खजुराहो समेत कई शहरों में तापमान 44 डिग्री के पार ही रहा। टूरिस्ट स्पॉट खजुराहो में तापमान सबसे ज्यादा 44.8 डिग्री रहा। हालांकि, सोमवार की तुलना में 1.2 डिग्री की गिरावट हुई है। सीधी में 44.6 डिग्री, श्योपुर में पारा 44 डिग्री रहा। इसी तरह रायसेन में 43.8 डिग्री, उमरिया में 43.5 डिग्री, खंडवा में 43.4 डिग्री, मुरैना में 43.3 डिग्री, मंडला में 43.2 डिग्री, रतलाम-दमोह में 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 43.6 डिग्री, इंदौर में 42.2 डिग्री, ग्वालियर-उज्जैन में 41 डिग्री और जबलपुर में पारा 42.7 डिग्री सेल्सियस रहा। भोपाल में ऐसे दूसरा सबसे गर्म दिन रहा भोपाल में गर्मी के रिकॉर्ड की बात करें तो साल 2017 से 2025 के बीच एक बार ही पारा 43.7 डिग्री पर गया है, जो 30 अप्रैल 2019 को दर्ज किया गया था। इस हिसाब से इस साल 28 अप्रैल का दिन 10 साल में दूसरा सबसे गर्म दिन रहा। भोपाल में अप्रैल का ओवरऑल रिकॉर्ड 29 अप्रैल 1996 को बना था। तब पारा 44.4 डिग्री सेल्सियस रहा था। गर्मी की देखिए तस्वीरें… अगले 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम… गर्मी से बचाव के लिए एडवाइजरी गर्मी का असर बढ़ते ही मौसम विभाग ने लोगों के लिए बचाव एडवाइजरी भी जारी की है। लोगों से कहा गया है कि वे दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। दोपहर के समय लंबे समय तक धूप में न रहें। हलके वजन और रंग के सूती कपड़े पहनें। बच्चे और बुजुर्ग खासतौर पर अपना ध्यान रखें। अप्रैल में पड़ती है तेज गर्मी मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। अप्रैल में तेज गर्मी पड़ती है। MP के 5 बड़े शहरों में अप्रैल में मौसम का ऐसा ट्रेंड… एमपी में अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से गर्मी का असर तेज होने लगता है। महीने के आखिरी दिनों में तो तापमान रिकॉर्ड तोड़ देता है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के 10 साल की डेटा बेस्ड स्टडी में सामने आया कि भोपाल-इंदौर में पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, जबकि जबलपुर में इसने 44 डिग्री सेल्सियस को छू लिया। ग्वालियर में तो तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। तीन साल इन शहरों में तेज गर्मी पड़ी। इस बार भी तापमान में बढ़ोतरी की संभावना है। भोपाल में 1996 में पड़ी थी सबसे ज्यादा गर्मी अप्रैल में गर्मी के ट्रेंड की बात करें तो भोपाल में 29 अप्रैल 1996 को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। इस महीने भोपाल में बारिश-आंधी के आसार भी बनते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ साल से अप्रैल में बारिश का दौर चल रहा है। इस पर पारा 43 डिग्री तक पहुंच गया है। 20 अप्रैल 2013 को भोपाल में 24 घंटे के भीतर 30.8 मिमी, यानी एक इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 2023 में 22.6 मिमी पानी गिरा था। इंदौर में पिछले साल गिरा था 22.3 मिमी पानी इंदौर में भी अप्रैल में पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, 25 अप्रैल 1958 को सर्वाधिक 44.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। इस महीने यहां भी मौसम में बदलाव देखने को मिलता है। गर्मी के साथ बादल छाए रहते हैं तो बौछारें भी गिरती हैं। हर साल बारिश का दौर भी बनता है। जबलपुर में तेज गर्मी का ट्रेंड जबलपुर में अप्रैल में एक बार पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, 28 अप्रैल 1970 को दिन का तापमान 45.4 डिग्री रहा था। अप्रैल में यहां भी बारिश होने की संभावना रहती है। इस बार भी ऐसा ही मौसम है। रिकॉर्ड के अनुसार, जबलपुर में 3 अप्रैल 1935 को 24 घंटे के भीतर 50.3 मिमी बारिश हुई थी। 2023 में 20.2 मिमी पानी गिरा था। इस साल 19 अप्रैल को अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। ग्वालियर में पड़ती है सबसे ज्यादा गर्मी ग्वालियर में अप्रैल की गर्मी का ट्रेंड बाकी शहरों से अलग रहता है। यहां ज्यादा गर्मी पड़ती है। 10 साल में यहां पारा एक बार 45 डिग्री और 3 बार 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। 28 अप्रैल 1958 को तापमान 46.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। एक दिन में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड वर्ष 1909 में बना था, जब 22 अप्रैल को कुल 67.6 मिमी बारिश हुई थी। इसी साल अप्रैल महीने में साढ़े 4 इंच पानी गिरा था। उज्जैन में भी गर्मी, बारिश का ट्रेंड उज्जैन में भी अप्रैल महीने में गर्मी और बारिश का ट्रेंड रहता है। 18 अप्रैल 2010 को तापमान रिकॉर्ड 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। वहीं, 2014 से 2025 के बीच दो बार पारा 43 डिग्री के पार जा चुका है। पिछले साल यह रिकॉर्ड 48.8 डिग्री पहुंच चुका है, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी है।

22 से 28 साल के लड़के बन रहे लड़की:भोपाल एम्स में एक साल में 5 सर्जरी; डॉक्टर बोले-भविष्य में ‘मां’ भी बन सकते हैं

22 से 28 साल के लड़के बन रहे लड़की:भोपाल एम्स में एक साल में 5 सर्जरी; डॉक्टर बोले-भविष्य में ‘मां’ भी बन सकते हैं

एमपी के राजगढ़ का रहने वाला सोमेश जैसे ही 10 साल का हुआ, वह लड़कियों की तरह व्यवहार करता और उनके तरह कपड़े पहनना पसंद करने लगा। परिवार को भी अहसास हो गया कि वह अंदर से एक लड़की है। 24 साल के होने पर उसने अपना जेंडर चेंज करवाया और सर्जरी करवाकर लड़की बन गया। यह एक अकेले सोमेश का केस नहीं है। मध्य प्रदेश में ऐसे और भी केस सामने आए हैं, जिनमें लड़के जेंडर चेंज करवाकर लड़की बन रहे हैं। एम्स में आए सभी मरीज 22 से 28 वर्ष के एम्स भोपाल में सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि जेंडर आइडेंटिटी का सवाल छोटे शहरों और कस्बों तक पहुंच चुका है। बीते एक साल में एम्स भोपाल में 5 जेंडर कंवर्जन सर्जरी हुई हैं। इनमें शामिल सभी मरीज 22 से 28 वर्ष की आयु के बीच के युवक हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि लंबी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक प्रक्रिया है। भविष्य में ऐसी तकनीक विकसित हो सकती है, जिससे ये मरीज मां बनने का अनुभव भी कर सकें। डॉक्टर से समझें बॉटम सर्जरी की जटिलताएं एम्स भोपाल के स्त्री रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरुण कुमार डोरा ने बताया कि अब तक 5 सर्जरी की गई हैं, जिनमें मरीज को पुरुष से महिला बनाया गया है। यह बेहद जटिल सर्जरी होती है। हमारी पढ़ाई के समय इस तरह की सर्जरी का एक्सपोजर नहीं था। हमने बाद में कॉन्फ्रेंस और स्किल डेवलपमेंट कोर्स से इनकी ट्रेनिंग ली है। डॉ. डोरा ने बताया कि बॉटम सर्जरी में सबसे पहला चैलेंज होता है कि पुरुष के प्राइवेट पार्ट को हटाना होता है। एम्स में यह सर्जरी अभी नि:शुल्क की जा रही है। प्राइवेट अस्पतालों में इसका 8 से 10 लाख रुपए का खर्च आता है। सर्जरी से पहले काउंसलिंग जरूरी डॉक्टरों का कहना है कि जेंडर कंवर्जन सिर्फ सर्जरी नहीं है। इसके पहले लंबी काउंसलिंग, मानसिक मूल्यांकन और हार्मोन थेरेपी की प्रक्रिया होती है। कई बार मरीजों को यह समझाया भी जाता है कि वे भावनात्मक दबाव में कोई निर्णय न लें। केस 1- दोस्तों ने किया शोषण तो लड़की बनने की जागी इच्छा मध्य प्रदेश के रीवा जिले के एक छोटे से गांव के अनुराग का जन्म साल 2000 में हुआ। जब वह 9 साल का हुआ, तब उसे उसके व्यवहार के कारण पहला सदमा मिला। वह अक्सर अपनी बड़ी बहन की कुर्ती पहनकर घर से बाहर निकल जाता था। लोग उसका मजाक बनाते थे, जिसे वह हंसकर भुला देता था। एक दिन उसके साथ के लड़कों ने उसे अकेला देखकर ना केवल मौखिक बल्कि शारीरिक रूप से शोषण किया। इसके बाद उसका परिवार रीवा शिफ्ट हो गया। तब से ही उसके मन में यह इच्छा जागी कि काश वह लड़की के रूप में जन्म लेता तो उसके साथ ऐसा व्यवहार नहीं होता। नौकरी के बाद जब वह आर्थिक रूप से मजबूत हुआ, तो उसने अपना जेंडर बदलवाने का फैसला लिया। परिवार की सहमति के बाद वह अक्टूबर 2025 में एम्स भोपाल आया, जहां उसका सफल इलाज हुआ। केस 2 – परिवार के तानों ने लड़की बनने को किया मोटिवेट भोपाल के पास के गांव के 24 वर्षीय आनंद (बदला हुआ नाम) बीते 4 माह से औरत की जिंदगी जी रहे हैं। जब वे एम्स भोपाल स्थित ट्रांसजेंडर क्लीनिक पहली बार पहुंचे थे, तो उन्होंने डॉक्टरों को बताया था कि वे अंदर से एक महिला ही हैं। उनके इस व्यवहार के कारण परिवार उन्हें खुद से दूर रखता है। बचपन से लेकर आज तक जब भी वे मिलते हैं, तो उन्हें ताने पड़ते हैं। इसी व्यवहार ने उन्हें पूरी तरह औरत बन जाने के लिए मोटिवेट किया। केस 3 – महिला बनने की चाह बनी मुसीबत, चल रहा इलाज इंदौर निवासी 28 वर्षीय युवक के लिए महिला बनने की चाह मुसीबत बन गई। बीते तीन साल से वह इलाज ही करा रहे हैं। वह एम्स भोपाल में भर्ती हैं। उन्होंने जेंडर कन्वर्जन सर्जरी के बारे में ऑनलाइन पढ़ा था। उत्तर प्रदेश के कानपुर में वे सर्जरी के लिए गए थे। वहां उनकी पहले टॉप सर्जरी यानी छाती को महिलाओं की तरह बनाया गया। उनकी बॉटम सर्जरी यानी मेल प्राइवेट पार्ट को हटाकर फीमेल प्राइवेट पार्ट बनाया गया। यह सर्जरी फेल हो गई। बेहतर इलाज की तलाश में वह अहमदाबाद गए, वहां भी उन्हें निराशा ही मिली। वे एम्स भोपाल के ट्रांसजेंडर क्लीनिक पहुंचे। उनकी स्थिति को देखते हुए एम्स भोपाल की टीम ने 24 अप्रैल को उनकी 8 घंटे चली बॉटम सर्जरी की। डॉक्टर बोले- जरा सी गलती बड़ी समस्या बन सकती है डॉ. अरुण कमार डोरा के अनुसार, इन प्रक्रियाओं में जरा सी गलती मरीज के लिए एक बड़ी समस्या बन सकती है। कुछ ऐसे मरीज हमारे पास आए, जिन्होंने बाहर से सर्जरी कराई और वह फेल हो गई। ऐसे ही एक मरीज का इलाज चल रहा है, जिसमें उसके पुरुष अंग को पूरी तरह से हटा दिया गया था। ऐसे में उसे अब भविष्य में सेंसेशन का अनुभव नहीं होगा। यही नहीं, सर्जरी के दौरान अंदरूनी अंगों में भी इंजरी हुई। इन सभी समस्याओं का इलाज करने के बाद उस मरीज में नए सिरे से महिलाओं वाले अंग बनाए गए हैं। महिलाओं की तरह अंग के अंदर रास्ता बनाने के लिए करीब एक सप्ताह तक एक फॉरेन ऑब्जेक्ट लगाना पड़ा, जिससे उसके शरीर के अंदरूनी अंग नई जगह पर फिक्स हो जाएं और जो रास्ता बनाया गया है, वह हमेशा के लिए उसी पोजिशन पर रहे। एम्स में दो दिन चलती है विशेष क्लीनिक एम्स भोपाल में ट्रांसजेंडर हेल्थ क्लीनिक की शुरुआत दो साल पहले की गई थी। यहां मनोचिकित्सा, एंडोक्रिनोलॉजी, यूरोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी विभाग मिलकर मरीजों का इलाज करते हैं। हर महीने पहले और तीसरे गुरुवार को ओपीडी लगती है, जहां मरीज बिना झिझक अपनी समस्या साझा कर सकते हैं। सामाजिक कलंक अब भी सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों का मानना है कि मेडिकल सुविधाएं बढ़ने के बावजूद समाज की सोच अभी पूरी तरह नहीं बदली है। ट्रांसजेंडर लोगों को आज भी भेदभाव और अस्वीकार का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीजों को सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि सामाजिक समर्थन

यूपी के बांदा में 45.6°C तापमान, देश में सबसे गर्म:राजस्थान-बिहार में आंधी-बारिश का अलर्ट; दिल्ली, मध्य प्रदेश में भी गर्मी से मिलेगी राहत

यूपी के बांदा में 45.6°C तापमान, देश में सबसे गर्म:राजस्थान-बिहार में आंधी-बारिश का अलर्ट; दिल्ली, मध्य प्रदेश में भी गर्मी से मिलेगी राहत

देश के कई शहर हीटवेव की चपेट में हैं। यूपी का बांदा मंगलवार को भी सबसे दर्म शहर रहा। यहां 45.6°C पारा दर्ज हुआ। इसके अलावा ओडिशा के झारसुगड़ा में 45.3°C, महाराष्ट्र के अकोला और अमरावती में 45.2°C तापमान रहा। IMD के मुताबिक, बुधवार से यूपी, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में हीटवेव से राहत की उम्मीद है। यूपी के 58 जिलों में तेज आंधी के साथ बारिश हो सकती है। बिजली गिरने की भी आशंका है। बिहार में 30 अप्रैल तक आंधी-बारिश की स्थिति बन सकती है। इस दौरान तापमान में तीन से पांच डिग्री तक की गिरावट की संभावना है। बिहार में 1 मई से फिर से तापमान बढ़ेगा। कई जिलों में लू चल सकती है। हरियाणा में मंगलवार से ही बारिश का दौर शुरू हो गया। यमुनानगर और पंचकूला में हल्की बारिश हुई। बुधवार को 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से धूल भरी आंधी के साथ बारिश की संभावना है। अगले 2 दिन के मौसम का हाल 30 अप्रैल: 1 मई: देशभर से गर्मी की 5 तस्वीरें मिजोरम में बारिश-लैंडस्लाइड से 77 घर क्षतिग्रस्त, कई स्कूल बंद मिजोरम में पिछले दो दिनों से जारी भारी बारिश, आंधी और लैंडस्लाइड के कारण चार जिलों में 77 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। आइजोल में 39 और लुंगलेई में 31 घरों को नुकसान पहुंचा है, जबकि सियाहा और कोलासिब जिलों में भी नुकसान की खबर है। इसके अलावा कई स्कूल बिल्डिंग, चर्च हॉल, अस्पताल, आंगनवाड़ी और एक लाइब्रेरी भी डैमेज हुई है। भारी बारिश के चलते राज्य के नौ जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश, आंधी और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है।

जब इरफान खान डकैत बने, एड़ी में चोट लगी थी:लंगड़ाते हुए 'पान सिंह तोमर' की शूटिंग करने पहुंचे, एक्शन सुन लगा देते थे दौड़

जब इरफान खान डकैत बने, एड़ी में चोट लगी थी:लंगड़ाते हुए 'पान सिंह तोमर' की शूटिंग करने पहुंचे, एक्शन सुन लगा देते थे दौड़

29 अप्रैल को इरफान खान की 6वीं पुण्यतिथि सिर्फ तारीख नहीं, बल्कि यादों का सैलाब है- एक ऐसे कलाकार की, जिसने अभिनय को सच्चाई की तरह जिया। उनकी जिंदगी, किरदार और सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। इस सफर को रंजीता कौर ने अपनी डॉक्यूमेंट्री ‘अ स्टोरी दैट रिफ्यूज्ड टू डाई’ में सहेजा है, जो पान सिंह तोमर की मेकिंग और इरफान की अनदेखी दुनिया दिखाती है। आज इसकी स्क्रीनिंग मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में रखी गई है। यह सिर्फ डॉक्यूमेंट्री नहीं, बल्कि उन पलों की विरासत है। चोट के बावजूद इरफान शूटिंग करते रहे। वो बकरी के बच्चे के साथ खेलते नजर आए। हर छोटी चीज में खुशी ढूंढते थे और किरदार की सच्चाई के लिए खुद को मिटा देते थे। रंजीता के शब्दों में, इरफान सिर्फ एक्टर नहीं, बल्कि एक एहसास थे, जिन्होंने हर दिल में जगह बनाई। उनकी कहानी सच में मरने से इंकार करती है, क्योंकि इरफान आज भी अपने काम, सादगी और गहराई के जरिए हमारे बीच जिंदा हैं। इरफान खान की 6वीं डेथ एनिवर्सरी पर रंजीता कौर ने उनके जीवन के कुछ अनसुने किस्से सुनाए ‘स्टोरी दैट रिफ्यूज्ड टू डाई’– एक टाइटल, जो इरफान की सोच से जन्मा रंजीता कौर कहती हैं कि डॉक्यूमेंट्री का टाइटल सिर्फ क्रिएटिव नाम नहीं, बल्कि इरफान खान की सोच और फिल्म की जर्नी का सार है। उनके मुताबिक, पान सिंह तोमर बनाना आसान नहीं था। फिल्म ने कई मुश्किलें देखीं- लोकेशन की चुनौतियां, सीमित संसाधन और शूटिंग की बाधाएं। रंजीता कहती हैं कि वो इस प्रक्रिया को बाहर से देख रही थीं, लेकिन हर दिन महसूस कर रही थीं कि फिल्म हार मानने वाली नहीं है। हर दिक्कत के बाद टीम और मजबूत होती थी। इंटरव्यू के दौरान इरफान ने कहा- “यह कहानी मरने को तैयार नहीं थी।” यही पल रंजीता को झकझोर गया। उन्हें लगा, मन की भावना को शब्द इरफान ने दे दिए। इसलिए वह टाइटल का श्रेय इरफान को देती हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ डॉक्यूमेंट्री नहीं, बल्कि इरफान की जिंदगी का प्रतीक है- एक ऐसी यात्रा, जिसने हर मुश्किल के बावजूद हार नहीं मानी। इरफान खान क्यों थे सबसे अलग? आम लोगों के दिल में बसने वाले कलाकार रंजीता के अनुसार, इरफान खान की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्हें समझने के लिए सिनेमा एक्सपर्ट होना जरूरी नहीं था। वो ऐसे कलाकार थे, जिनकी छाप हर वर्ग पर पड़ती थी- चाहे गहराई से समझने वाला दर्शक हो या मनोरंजन के लिए फिल्म देखने वाला आम इंसान। वह कहती हैं कि घर-परिवार या आसपास के लोगों से पूछें, तो हर कोई कहेगा कि यह आदमी अलग था। यह अलगपन अभिनय से ज्यादा उनकी सच्चाई में था। इरफान ने दिखावा नहीं किया, न स्टारडम के पीछे भागे। उन्होंने अपने आर्ट को समय दिया, निखारा और ईमानदारी से काम किया। उनकी यात्रा अचानक नहीं बनी थी। उन्होंने सालों तक छोटे रोल किए, संघर्ष किया, रिजेक्शन झेले और खुद को साबित किया। इसलिए सफलता सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि मेहनत और सच्चाई का परिणाम थी। चोट के बावजूद शूटिंग: पेनकिलर लेकर दौड़ते थे इरफान ‘पान सिंह तोमर’ की शूटिंग के दौरान एक दौर आया, जिसे रंजीता आज भी नहीं भूल पातीं। फिल्म के बीच में इरफान खान को एड़ी में गंभीर चोट लगी। आमतौर पर ऐसे हालात में शूटिंग रोक दी जाती है, लेकिन यहां कहानी अलग थी। रंजीता बताती हैं कि उन्होंने देखा कि इरफान लंगड़ाते हुए सेट पर आते थे। कई बार सहारे के लिए उनके हाथ में डंडा होता था। लेकिन कैमरा रोल होते ही वो दर्द छोड़कर किरदार में उतर जाते। सबसे चुनौतीपूर्ण यह था कि फिल्म के कई अहम सीन, जैसे रनिंग सीक्वेंस और एक्शन बाकी थे। इसके बावजूद उन्होंने शूटिंग नहीं रोकी। पेनकिलर लेकर सीन करते थे और दर्द बढ़ने पर थोड़ा ब्रेक लेकर लौट आते थे। रंजीता कहती हैं कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि मैं नहीं कर पाऊंगा या बाद में करेंगे। उनकी प्रतिबद्धता टीम के लिए प्रेरणा बनी। यही समर्पण ‘पान सिंह तोमर’ को असली और असरदार बनाता है। छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढने वाला बड़ा कलाकार रंजीता कौर के लिए इरफान खान का एक पहलू खास था- उनका बच्चा-सा स्वभाव। वह बताती हैं कि इरफान जितने बड़े कलाकार थे, उतने ही सरल इंसान थे। सेट पर उनका व्यवहार स्टार जैसा नहीं लगता था। वो हर किसी से बात करते थे- चाहे टेक्नीशियन, लाइटमैन या जूनियर आर्टिस्ट। उनके अंदर सहजता थी, जो माहौल को हल्का और खुशनुमा बनाती थी। रंजीता याद करती हैं कि उनका सेंस ऑफ ह्यूमर प्यारा था। वो छोटी बातों में मजाक करते थे और सेट हंसी से भर जाता था। वो हर चीज में दिलचस्पी लेते थे- किताबें, बातचीत या छोटी घटनाएं। उनके लिए खुशी बड़ी चीजों में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के पलों में थी। उनके साथ काम करना प्रोफेशनल अनुभव से बढ़कर भावनात्मक जुड़ाव था। किरदार में डूब जाने की कला: इरफान का अनोखा प्रोसेस रंजीता बताती हैं कि इरफान खान का एक्टिंग प्रोसेस बेहद इंटरनल था। वो इसे शब्दों में पूरी तरह नहीं समझा सकतीं, लेकिन उसे महसूस किया जा सकता था। उनके मुताबिक, इरफान किरदार की सच्चाई पकड़ते थे। जब तक उन्हें नहीं लगता था कि वो उसे समझ गए हैं, तब तक खुद को उसमें नहीं डालते थे। लेकिन उस स्तर तक पहुंचते ही किरदार उनका हिस्सा बन जाता था। रंजीता ने नोटिस किया कि शूट खत्म होने के बाद भी वो पूरी तरह किरदार से बाहर नहीं आते थे। बातचीत और चलते-फिरते भी वह लेयर बनी रहती थी। इसका असर उनके परफॉर्मेंस में दिखता था। वो एक्टिंग करते नहीं लगते थे। ऐसा लगता था कि वो वही इंसान हैं, जिसकी कहानी पर्दे पर दिखाई जा रही है। उनकी सबसे बड़ी ताकत सच्चाई से जुड़ना और उसे दर्शकों तक पहुंचाना थी। हर चीज जानने की बेचैन जिज्ञासा: इरफान का ‘लर्निंग मोड’ हमेशा ऑन था रंजीता कौर बताती हैं कि इरफान खान की खास बातों में एक उनकी असीम जिज्ञासा थी। वो सिर्फ किरदार तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि हर छोटी-बड़ी चीज को समझने की कोशिश करते थे। धौलपुर में शूटिंग के दौरान टीम को पास की एक दरगाह के बारे में पता चला। रंजीता