Wednesday, 16 Sep 2026 | 05:26 PM

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नेपाल PM बालेन सोमवार को पहले भारतीय राजदूत से मिलेंगे:बाद में चीन के दूत से बात होगी, अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से वन-टू-वन बैठक

नेपाल PM बालेन सोमवार को पहले भारतीय राजदूत से मिलेंगे:बाद में चीन के दूत से बात होगी, अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से वन-टू-वन बैठक

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सोमवार को सबसे पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे चीन के राजदूत झांग माओमिंग से बातचीत करेंगे। मंगलवार को शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम से वन-टू-वन बैठक करेंगे। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा, जब बालेन किसी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात करेंगे। इससे पहले वे विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं।। एक ही दिन भारत और चीन के राजदूतों से बैठक के बाद अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से बातचीत होगी। इन बैठकों में नेपाल के इन तीनों देशों के साथ रिश्तों और मौजूदा मुद्दों पर बात होने की संभावना है। दो हफ्ते पहले होनी थी मुलाकात, हिंसा के बाद टली शाह की इन राजदूतों से मुलाकात करीब दो हफ्ते पहले ही तय थी। लेकिन सुनसरी और दूसरे जिलों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद कार्यक्रम टाल दिया गया था। अब सरकार ने फिर से इन मुलाकातों का कार्यक्रम बनाया है। प्रधानमंत्री के एक सलाहकार के मुताबिक, दोनों देशों के दूतावासों को मुलाकात का समय बता दिया गया है। शाह पहले अकेले में मुलाकात से बचते रहे प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह ने विदेशी राजदूतों और बड़े विदेशी अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात नहीं करने का तरीका अपनाया था। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी दूतावास की कई मुलाकात की रिक्वेस्ट भी नहीं मानीं। इनमें अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत सर्जियो गोर से मुलाकात शामिल थी। अमेरिकी विदेश विभाग की पब्लिक डिप्लोमेसी की अंडर सेक्रेटरी सारा बी. रोजर्स भी नेपाल दौरे पर आई थीं, लेकिन शाह से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बजाय शाह ने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ साथ बैठकर बैठकें की थीं। ऐसी बैठकें 9 अप्रैल और 26 मई को हुई थीं। अकेले विदेशी राजदूतों से क्यों नहीं मिलते थे बालेन? बालेन की राजदूतों के साथ सामूहिक बैठक करने की नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने अच्छा कदम बताया था। उनका मानना था कि सभी राजदूतों से एक साथ मिलने पर किसी एक देश को ज्यादा तवज्जो देने का संदेश नहीं जाता। इससे नेपाल सभी देशों के साथ बराबरी का व्यवहार करता दिखता था और बातचीत भी ज्यादा साफ तरीके से होती थी। हालांकि, बाद में बालेन ने नेपाल के घरेलू मामलों से जुड़े लोगों से अलग-अलग मुलाकातें शुरू कर दीं। ऐसे में विदेशी राजदूतों के साथ भी पहले वाली सामूहिक बैठक की नीति को लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो गया। 100 दिन बाद बालेन ने बदला अपना तरीका शाह की सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद उनके राजनीतिक सलाहकार आसिम शाह और दूसरे सलाहकारों ने उन्हें देश के अंदर भी अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इनमें कारोबारी, मीडिया से जुड़े लोग, ठेकेदार और दूसरे बड़े लोग शामिल थे। इसके साथ ही काठमांडू में तैनात विदेशी राजदूतों से भी अलग-अलग मुलाकात शुरू करने की तैयारी हुई। हाल के हफ्तों में शाह का तरीका बदला हुआ नजर आया है। वे अब अलग-अलग लोगों से मिलकर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने मधेश के राजनीतिक दलों और सांसदों के साथ बैठकें की हैं। इसके अलावा कारोबारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों और निर्यातकों से भी अलग-अलग मुलाकात की है। अब विदेशी राजदूतों से वन-टू-वन मुलाकात भी इसी बदले हुए तरीके का हिस्सा मानी जा रही है।

प्रीति जिंटा बोलीं-मोहाली मेरा घर, यहां मिला प्यार खास:अभिनेत्री ने पोस्ट की शेयर; मोहाली में सनी देयोल के साथ फिल्म की प्रमोशन को पहुंचीं

प्रीति जिंटा बोलीं-मोहाली मेरा घर, यहां मिला प्यार खास:अभिनेत्री ने पोस्ट की शेयर; मोहाली में सनी देयोल के साथ फिल्म की प्रमोशन को पहुंचीं

बॉलीवुड अभिनेत्री और किंग्स पंजाब की सह-मालकिन प्रीति जिंटा अपनी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के प्रमोशन के लिए गत दिनों मोहाली पहुंची थीं। इस दौरान उनके साथ अभिनेता सनी देओल भी मौजूद थे। दोनों ने मोहाली की एक निजी यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स से मुलाकात की और उन्हें फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों में पहुंचने का न्योता दिया। इस मौके पर प्रीति जिंटा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “मोहाली मेरा घर है और यहां वापस आकर जिस तरह का प्यार मिला, वह बेहद खास रहा।” सूट में एयरपोर्ट पर हुई स्पॉट प्रीति जिंटा का पंजाब से लगाव किसी से छिपा नहीं है। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पहुंचने के दौरान भी उनके अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने नारंगी रंग का बेहद खूबसूरत और वाइब्रेंट सलवार सूट पहना हुआ था। कानों में बड़े गोल्डन हूप्स इयररिंग्स, हाथों में कंगन और कलाई पर एलिगेंट वॉच पहनी थी। उन्होंने बाल खुले रखे थे और मेकअप काफी नेचुरल और मिनिमल रखा था। एयरपोर्ट पर कई फैंस ने उन्हें अपने कैमरे में कैद किया। वहीं, उन्होंने फैंस का अपनी स्माइल से दिल जीता। सनी देओल बेटे के साथ आए थे वहीं, सनी देओल के साथ उनके बड़े बेटे करण देओल भी मौजूद थे। दोनों ने चंडीगढ़ और मोहाली में फिल्म का प्रमोशन किया। फिल्म के प्रमोशन के लिए सनी देओल पंजाब में रोड ट्रिप कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने जालंधर और अमृतसर का भी दौरा किया।

ट्रोलिंग पर भड़की प्रिया रेवाड़ी बोलीं- गलत कहने पर पीटूंगी:मुझे गंदा बताने वाले चुपचाप बुलाकर पैसे उड़ाते हैं; डांस में 2 स्टेप जोड़ूंगी

ट्रोलिंग पर भड़की प्रिया रेवाड़ी बोलीं- गलत कहने पर पीटूंगी:मुझे गंदा बताने वाले चुपचाप बुलाकर पैसे उड़ाते हैं; डांस में 2 स्टेप जोड़ूंगी

हरियाणवी स्टेज डांसर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रिया रेवाड़ी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। प्रिया ने कहा, झज्जर के मांडोठी गांव की अभ्रदता से जुड़ी पुरानी वीडियो शेयर की जा रही है। ट्रोलर्स ने ये बंद नहीं किया तो उन्हें पीटूंगी। ट्रोलिंग से कोई फर्क नहीं पड़ता, दर्शकों में मेरी अभी भी डिमांड बनी हुई है। कार्यक्रमों में डांस को गंदा बताने वाले लोग ही वहां आकर पैसे उड़ाते हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर गंदी बातें बोलते हैं। फ्यूचर प्लानिंग पर प्रिया ने कहा, अब मैंने अपने डांस में दो नए स्टेप भी जोड़े हैं। अपना पुराना बैक स्टैप बंद नहीं करूंगी। मेरे प्रोग्राम घर में बैठीं महिलाएं भी देखती हैं। प्रिया ने आगे कहा… जो लोग कहते हैं डांस गंदा हैं, वहीं लोग चुपचाप शो करने के लिए बुलाते हैं। वे कहते हैं बस डांस चाहिए। मुझे अब भी कई प्रोग्राम करने के लिए फोन आ रहे हैं, मगर व्यस्तता के चलते कोई प्रोग्राम नहीं कर पा रही हूं। ट्रोलिंग पर क्या बोलीं प्रिया फ्यूचर प्लान के बारे में क्या बताया… दो नए डांस स्टेप लॉन्च किए: दैनिक भास्कर से बातचीत में प्रिया ने बताया कि मैंने कुछ ही दिन पहले अपनी स्किल में दो नए डांस स्टेप जोड़े हैं। इसके साथ ही मैं अपने पुराने बैक स्टेप ज्यों के त्यों रखूंगी और किसी के कहने पर उन्हें बदलने वाली नहीं हूं। अब अधिक काम मिल रहा: प्रिया ने कहा कि अब मेरे पास और अधिक काम आ रहा है। हरियाणा के साथ पंजाब से भी शो मिल रहे हैं। कुछ दिन बाद गुरुग्राम में भी एक शो होने वाला है। जिसमें मुझे विशेष रूप से बुलाया गया है। घरेलू महिलाएं भी डांस देख रही: प्रिया का कहना है कि अब घरेलू महिलाएं भी मेरा शो देख रही है। महिलाओं में भी डांस का क्रेज धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कुछ लोग मेरे शरीर को लेकर चर्चा करते हैं कि मैंने कोई इंजेक्शन लिया है, मगर मेरा शरीर नेचुरचल है। कोई सर्जरी तक नहीं कराई। शरीर काटकर नहीं फेंक सकती प्रिया ने कहा- मेरे पहनावे और ट्रोलिंग पर लगातार टिप्पणी की जाती है। मैं शरीर को बदल नहीं सकती, जैसे है वैसा ही रहेगा। इसे काटकर तो फेंक नहीं सकती। वहीं, ट्रोलिंग पर कहा, मेरा शरीर है, मेरी मरजी। मैं चाहे कैसे भी वीडियो बनाऊ। प्रिया ने आगे कहा कि अब डांस प्रोग्राम की वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करना कम कर दिया है। शो के दौरान भी वीडियो बनाने पर डांस बंद कर देती हूं। ————- यह खबर भी पढ़ें… हरियाणवी डांसर प्रिया का खुलासा, हुड्‌डा ने धमकाया:बोला-मयूरी को गोलियां मरवा दूंगा, तुझे निकर नहीं कफन पहनाऊंगा; सपना को कह चुका लड़कियां बिगाड़ने वाली हरियाणवी कलाकारों को विदेशों से धमकियां मिल रही हैं। इसकी चर्चा लंबे समय से थी, लेकिन कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं था। अब हरियाणी स्टेज परफॉर्मर प्रिया रेवाड़ी ने खुद सामने आकर इसका खुलासा किया। (पूरी खबर पढ़ें)

सोनाक्षी सिन्हा पर बीजेपी-सनातन विरोधी एजेंडा चलाने का दावा:पोस्ट में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को अनफॉलो करने का जिक्र; जानें वायरल दावे की सच्चाई

सोनाक्षी सिन्हा पर बीजेपी-सनातन विरोधी एजेंडा चलाने का दावा:पोस्ट में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को अनफॉलो करने का जिक्र; जानें वायरल दावे की सच्चाई

सोनाक्षी सिन्हा को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि एक्ट्रेस बीजेपी और सनातन धर्म को बदनाम करने का एजेंडा चला रही हैं। पोस्ट में सीजेपी के छात्र प्रदर्शन को समर्थन देने, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को कथित तौर पर धार्मिक वजह से अनफॉलो करने और फिल्ममेकर आदित्य धर के उनके बर्गर वाले पोस्ट पर हंसने वाले रिएक्शन का जिक्र है। साथ ही दावा है कि सोनाक्षी झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर चुप हैं। हालांकि, फैक्ट-चेक में सामने आया कि इन घटनाओं में कुछ बातें सही हैं, लेकिन इन्हें जोड़कर सोनाक्षी के किसी बीजेपी या सनातन विरोधी एजेंडे का ठोस सबूत नहीं मिलता। पहले जानिए क्या है वायरल पोस्ट में दावा वायरल पोस्ट में सोनाक्षी सिन्हा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पोस्ट के मुताबिक, सोनाक्षी ने सीजेपी के छात्र प्रदर्शन का समर्थन इसलिए किया क्योंकि मामला कथित तौर पर बीजेपी के खिलाफ था। वहीं, झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर उनकी चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाया गया है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि सोनाक्षी ने विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को सिर्फ इसलिए अनफॉलो किया, क्योंकि दोनों अपनी धार्मिक आस्था को फॉलो करते हैं। इसके अलावा फिल्ममेकर आदित्य धर के सोनाक्षी के बर्गर खाने वाले पोस्ट पर लाफिंग रिएक्शन को भी उनके खिलाफ जोड़कर पेश किया गया है। लेकिन क्या वायरल पोस्ट में किए गए ये सभी दावे सच हैं? सीजेपी के प्रदर्शन में सोनाक्षी ने किया था छात्रों का समर्थन फैक्ट-चेक में सामने आया कि सोनाक्षी सिन्हा ने सीजेपी यानी सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस से जुड़े छात्र प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी थी। जुलाई 2026 में दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें सामने आई थीं। इसके बाद सोनाक्षी ने प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई पर चिंता जताई थी। इससे यह बात सही साबित होती है कि सोनाक्षी ने उस प्रदर्शन को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी थी। हालांकि, इस पोस्ट का मकसद बीजेपी या सनातन धर्म को बदनाम करना था, इसका कोई प्रमाण नहीं मिला। क्या सोनाक्षी झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर चुप हैं? वायरल पोस्ट में दूसरा बड़ा दावा यही है कि सोनाक्षी ने सीजेपी के छात्रों के लिए आवाज उठाई, लेकिन झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। झारखंड में छात्रों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और JPSC-JSSC से जुड़े विवादों को लेकर चल रहा है। सीजेपी से जुड़े लोगों की ओर से इस आंदोलन को समर्थन दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, सोनाक्षी सिन्हा ने इस मुद्दे पर कोई पोस्ट किया या नहीं, इसकी विश्वसनीय पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए यह कहना कि सोनाक्षी ने जानबूझकर झारखंड के छात्रों का समर्थन नहीं किया या राजनीतिक वजह से चुप रहीं, फिलहाल साबित नहीं होता। विराट-अनुष्का को अनफॉलो करने का दावा कितना सही? वायरल पोस्ट में सोनाक्षी सिन्हा के अनुष्का शर्मा को अनफॉलो करने का दावा किया गया है। आजतक की 5 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में भी सोनाक्षी और अनुष्का के बीच फॉलो-अनफॉलो को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोनाक्षी लंबे समय से अनुष्का को फॉलो करती रही हैं और दोनों के बीच सोशल मीडिया पर इंटरैक्शन भी रहा है। अनुष्का की डॉग-वेलफेयर से जुड़ी पोस्ट पर सोनाक्षी ने स्टोरी भी शेयर की थी। अब सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया है कि सोनाक्षी ने अनुष्का को दोबारा अनफॉलो किया है। कुछ यूजर्स इसे विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के सनातन धर्म और आध्यात्म से जुड़े पोस्ट से जोड़ रहे हैं। खास तौर पर विराट-अनुष्का के वृंदावन जाने और स्वामी प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के बाद इस थ्योरी ने जोर पकड़ा है। हालांकि, सोनाक्षी ने खुद यह नहीं बताया है कि उन्होंने अनुष्का को क्यों अनफॉलो किया। इसलिए यह कहना कि उन्होंने विराट-अनुष्का की सनातन आस्था की वजह से ऐसा किया, अभी सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रही एक थ्योरी है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि अनुष्का शर्मा अब भी सोनाक्षी को फॉलो कर रही हैं। वहीं, 2021 में सोनाक्षी ने विराट कोहली के मोहम्मद शमी के समर्थन में लिए गए स्टैंड की तारीफ भी की थी। इसलिए पुराने सोशल मीडिया इंटरैक्शन को देखते हुए सोनाक्षी के मौजूदा अनफॉलो की वजह को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आदित्य धर के लाफिंग रिएक्शन का सच वायरल पोस्ट में फिल्ममेकर आदित्य धर का भी जिक्र है। दावा है कि उन्होंने सोनाक्षी के बर्गर खाने वाले पोस्ट पर लाफिंग रिएक्शन दिया। सोशल मीडिया पर इस रिएक्शन का दावा मौजूद है। लेकिन सिर्फ किसी पोस्ट पर लाफिंग रिएक्शन देने से यह साबित नहीं होता कि आदित्य धर सोनाक्षी के किसी राजनीतिक या धार्मिक एजेंडे को ‘एक्सपोज’ कर रहे हैं। ऐसा कोई विश्वसनीय बयान भी सामने नहीं आया है जिसमें आदित्य धर ने सोनाक्षी पर BJP या सनातन धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया हो। कंगना ने भी सोनाक्षी पर साधा था निशाना? सोनाक्षी सिन्हा और उनके पति जहीर इकबाल की शादी को लेकर पहले भी सोशल मीडिया पर विवाद हुआ है। कंगना रनोट के कुछ बयानों को सोशल मीडिया यूजर्स ने सोनाक्षी की शादी से जोड़कर देखा है। हालांकि, कंगना ने जिस बयान में हिंदू लड़कियों और अंतरधार्मिक शादी को लेकर टिप्पणी की, उसमें सोनाक्षी का नाम सीधे नहीं लिया था। इसलिए इसे सोनाक्षी के खिलाफ कंगना का सीधा ‘एक्सपोज’ कहना भी सही नहीं होगा। सोनाक्षी की शादी को भी राजनीतिक रंग देने की कोशिश सोनाक्षी ने जहीर इकबाल से 2024 में शादी की थी। दोनों ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की थी। शादी के बाद सोनाक्षी ने कई बार कहा है कि दोनों एक-दूसरे के धर्म और परिवार का सम्मान करते हैं। ऐसे में उनकी शादी को उनके राजनीतिक विचारों से जोड़कर देखना भी अपने आप में किसी राजनीतिक एजेंडे का सबूत नहीं है। फैक्ट-चेक में क्या निकला? वायरल पोस्ट में बताई गई घटनाओं को अलग-अलग देखें तो कुछ बातें

सोनाक्षी सिन्हा पर बीजेपी-सनातन विरोधी एजेंडा चलाने का दावा:पोस्ट में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को अनफॉलो करने का जिक्र; जानें वायरल दावे की सच्चाई

सोनाक्षी सिन्हा पर बीजेपी-सनातन विरोधी एजेंडा चलाने का दावा:पोस्ट में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को अनफॉलो करने का जिक्र; जानें वायरल दावे की सच्चाई

सोनाक्षी सिन्हा को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि एक्ट्रेस बीजेपी और सनातन धर्म को बदनाम करने का एजेंडा चला रही हैं। पोस्ट में सीजेपी के छात्र प्रदर्शन को समर्थन देने, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को कथित तौर पर धार्मिक वजह से अनफॉलो करने और फिल्ममेकर आदित्य धर के उनके बर्गर वाले पोस्ट पर हंसने वाले रिएक्शन का जिक्र है। साथ ही दावा है कि सोनाक्षी झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर चुप हैं। हालांकि, फैक्ट-चेक में सामने आया कि इन घटनाओं में कुछ बातें सही हैं, लेकिन इन्हें जोड़कर सोनाक्षी के किसी बीजेपी या सनातन विरोधी एजेंडे का ठोस सबूत नहीं मिलता। पहले जानिए क्या है वायरल पोस्ट में दावा वायरल पोस्ट में सोनाक्षी सिन्हा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पोस्ट के मुताबिक, सोनाक्षी ने सीजेपी के छात्र प्रदर्शन का समर्थन इसलिए किया क्योंकि मामला कथित तौर पर बीजेपी के खिलाफ था। वहीं, झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर उनकी चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाया गया है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि सोनाक्षी ने विराट कोहली और अनुष्का शर्मा को सिर्फ इसलिए अनफॉलो किया, क्योंकि दोनों अपनी धार्मिक आस्था को फॉलो करते हैं। इसके अलावा फिल्ममेकर आदित्य धर के सोनाक्षी के बर्गर खाने वाले पोस्ट पर लाफिंग रिएक्शन को भी उनके खिलाफ जोड़कर पेश किया गया है। लेकिन क्या वायरल पोस्ट में किए गए ये सभी दावे सच हैं? सीजेपी के प्रदर्शन में सोनाक्षी ने किया था छात्रों का समर्थन फैक्ट-चेक में सामने आया कि सोनाक्षी सिन्हा ने सीजेपी यानी सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस से जुड़े छात्र प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी थी। जुलाई 2026 में दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की तस्वीरें सामने आई थीं। इसके बाद सोनाक्षी ने प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई पर चिंता जताई थी। इससे यह बात सही साबित होती है कि सोनाक्षी ने उस प्रदर्शन को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी थी। हालांकि, इस पोस्ट का मकसद बीजेपी या सनातन धर्म को बदनाम करना था, इसका कोई प्रमाण नहीं मिला। क्या सोनाक्षी झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर चुप हैं? वायरल पोस्ट में दूसरा बड़ा दावा यही है कि सोनाक्षी ने सीजेपी के छात्रों के लिए आवाज उठाई, लेकिन झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। झारखंड में छात्रों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और JPSC-JSSC से जुड़े विवादों को लेकर चल रहा है। सीजेपी से जुड़े लोगों की ओर से इस आंदोलन को समर्थन दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, सोनाक्षी सिन्हा ने इस मुद्दे पर कोई पोस्ट किया या नहीं, इसकी विश्वसनीय पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए यह कहना कि सोनाक्षी ने जानबूझकर झारखंड के छात्रों का समर्थन नहीं किया या राजनीतिक वजह से चुप रहीं, फिलहाल साबित नहीं होता। विराट-अनुष्का को अनफॉलो करने का दावा कितना सही? वायरल पोस्ट में सोनाक्षी सिन्हा के अनुष्का शर्मा को अनफॉलो करने का दावा किया गया है। आजतक की 5 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में भी सोनाक्षी और अनुष्का के बीच फॉलो-अनफॉलो को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोनाक्षी लंबे समय से अनुष्का को फॉलो करती रही हैं और दोनों के बीच सोशल मीडिया पर इंटरैक्शन भी रहा है। अनुष्का की डॉग-वेलफेयर से जुड़ी पोस्ट पर सोनाक्षी ने स्टोरी भी शेयर की थी। अब सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया है कि सोनाक्षी ने अनुष्का को दोबारा अनफॉलो किया है। कुछ यूजर्स इसे विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के सनातन धर्म और आध्यात्म से जुड़े पोस्ट से जोड़ रहे हैं। खास तौर पर विराट-अनुष्का के वृंदावन जाने और स्वामी प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के बाद इस थ्योरी ने जोर पकड़ा है। हालांकि, सोनाक्षी ने खुद यह नहीं बताया है कि उन्होंने अनुष्का को क्यों अनफॉलो किया। इसलिए यह कहना कि उन्होंने विराट-अनुष्का की सनातन आस्था की वजह से ऐसा किया, अभी सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रही एक थ्योरी है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि अनुष्का शर्मा अब भी सोनाक्षी को फॉलो कर रही हैं। वहीं, 2021 में सोनाक्षी ने विराट कोहली के मोहम्मद शमी के समर्थन में लिए गए स्टैंड की तारीफ भी की थी। इसलिए पुराने सोशल मीडिया इंटरैक्शन को देखते हुए सोनाक्षी के मौजूदा अनफॉलो की वजह को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आदित्य धर के लाफिंग रिएक्शन का सच वायरल पोस्ट में फिल्ममेकर आदित्य धर का भी जिक्र है। दावा है कि उन्होंने सोनाक्षी के बर्गर खाने वाले पोस्ट पर लाफिंग रिएक्शन दिया। सोशल मीडिया पर इस रिएक्शन का दावा मौजूद है। लेकिन सिर्फ किसी पोस्ट पर लाफिंग रिएक्शन देने से यह साबित नहीं होता कि आदित्य धर सोनाक्षी के किसी राजनीतिक या धार्मिक एजेंडे को ‘एक्सपोज’ कर रहे हैं। ऐसा कोई विश्वसनीय बयान भी सामने नहीं आया है जिसमें आदित्य धर ने सोनाक्षी पर BJP या सनातन धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया हो। कंगना ने भी सोनाक्षी पर साधा था निशाना? सोनाक्षी सिन्हा और उनके पति जहीर इकबाल की शादी को लेकर पहले भी सोशल मीडिया पर विवाद हुआ है। कंगना रनोट के कुछ बयानों को सोशल मीडिया यूजर्स ने सोनाक्षी की शादी से जोड़कर देखा है। हालांकि, कंगना ने जिस बयान में हिंदू लड़कियों और अंतरधार्मिक शादी को लेकर टिप्पणी की, उसमें सोनाक्षी का नाम सीधे नहीं लिया था। इसलिए इसे सोनाक्षी के खिलाफ कंगना का सीधा ‘एक्सपोज’ कहना भी सही नहीं होगा। सोनाक्षी की शादी को भी राजनीतिक रंग देने की कोशिश सोनाक्षी ने जहीर इकबाल से 2024 में शादी की थी। दोनों ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की थी। शादी के बाद सोनाक्षी ने कई बार कहा है कि दोनों एक-दूसरे के धर्म और परिवार का सम्मान करते हैं। ऐसे में उनकी शादी को उनके राजनीतिक विचारों से जोड़कर देखना भी अपने आप में किसी राजनीतिक एजेंडे का सबूत नहीं है। फैक्ट-चेक में क्या निकला? वायरल पोस्ट में बताई गई घटनाओं को अलग-अलग देखें तो कुछ बातें

मूड खराब तो छुट्टी; मानसिक सेहत का इलाज या कामचोरी?:चीन की 'अनहैप्पी लीव' से छिड़ी बहस, उद्योगपति गोयनका बोले- भारत में भी बहस जरूरी

मूड खराब तो छुट्टी; मानसिक सेहत का इलाज या कामचोरी?:चीन की 'अनहैप्पी लीव' से छिड़ी बहस, उद्योगपति गोयनका बोले- भारत में भी बहस जरूरी

क्या दफ्तर न आने के लिए सिर्फ ‘मन नहीं है’ कहना काफी है? न मेडिकल सर्टिफिकेट, न परिवार में इमरजेंसी, न बॉस को लंबी सफाई- बस इतना कहना कि आज मूड ठीक नहीं, और छुट्टी मंजूर। यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन चीन की एक रिटेल कंपनी ने ऐसी व्यवस्था लागू कर रखी है। अब यह आइडिया भारत में भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि उद्योगपति हर्ष गोयनका ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सवाल किया- क्या भारत को भी ऐसी ‘अनहैप्पी लीव’ की जरूरत है? गोयनका ने अपनी पोस्ट में लिखा कि चीनी रिटेलर पैंग डॉन्ग लाई अपने कर्मचारियों को 10 दिन की पेड ‘अनहैप्पी लीव’ देती है। कंपनी के संस्थापक यू डोंगलाई का फलसफा सीधा है- ‘अगर खुश नहीं हो, तो काम पर मत आओ।’ सबसे दिलचस्प बात यह कि मैनेजर इस छुट्टी को मना नहीं कर सकते। ने आगे लिखा कि यह भले ही गैर-व्यावहारिक कदम नजर आए, लेकिन भारतीय संदर्भ में इस पर व्यापक बहस जरूरी है- या फिर बर्नआउट रोकने और लोगों को दफ्तर आने के लिए उत्साहित करने का कोई बेहतर तरीका खोजा जाए। पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स बंट गए। एक यूजर ने दिलचस्प तर्क दिया कि दफ्तर की नाखुशी हमेशा दफ्तर की वजह से नहीं होती- निजी जिंदगी भी साथ चलती है। ऐसे में कुछ दिन का ब्रेक दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो सकता है। एक और यूजर ने इसे ‘जीनियस आइडिया’ बताते हुए कहा कि अगर भारतीय कंपनियां यह लागू करें, तो आधे कर्मचारी पहले से ज्यादा खुश होकर दफ्तर आएंगे, क्योंकि बर्नआउट को वफादारी नहीं समझा जाना चाहिए। एक यूजर ने प्रैक्टिकल एंगल दिया- यह पॉलिसी असल में इसलिए बनाई जाती है, ताकि कर्मचारी छुट्टी के लिए झूठे बहाने न गढ़ें; ईमानदारी से बताने पर कोई सवाल नहीं पूछा जाता। लेकिन हर कोई इससे सहमत नहीं। एक यूजर ने तीखा जवाब दिया कि 10 दिन की छुट्टी साल भर की खराब वर्क कल्चर को ठीक नहीं कर सकती। कर्मचारी इसकी जगह बेहतर काम के घंटे और समय की इज्जत करने वाले मैनेजर चुनना पसंद करेंगे। पैंग डॉन्ग लाई की ‘अनहैप्पी लीव’ पॉलिसी में काम के घंटे 7 साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, यह पॉलिसी 2024 में कंपनी के संस्थापक यू डोंगलाई ने शुरू की थी। कर्मचारी बिना विस्तृत वजह बताए साल में 10 अतिरिक्त ‘पेड लीव’ ले सकते हैं, और मैनेजर इसे मना नहीं कर सकते। मना करना नियम का उल्लंघन माना जाता है। यही नहीं, कर्मचारी एक दिन में सिर्फ सात घंटे काम करते हैं, वीकेंड पर पूरी छुट्टी मिलती है, सालाना 30-40 दिन की छुट्टियां मिलती हैं, और चीनी नववर्ष पर पांच अतिरिक्त दिन अलग से दिए जाते हैं।

खतरे में फेसबुक-इंस्टाग्राम की कानूनी सुरक्षा:पब्लिशर माना गया तो होगी सीधी कार्रवाई, मेटा को इंसानी निगरानी बढ़ाने के निर्देश

खतरे में फेसबुक-इंस्टाग्राम की कानूनी सुरक्षा:पब्लिशर माना गया तो होगी सीधी कार्रवाई, मेटा को इंसानी निगरानी बढ़ाने के निर्देश

सोशल मीडिया कंपनी मेटा और भारत सरकार के बीच चल रही बैठकों के बाद एक बड़ा कानूनी और तकनीकी सवाल खड़ा हो गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक मुख्य मुद्दा यह है कि क्या मेटा के रिकमेंडेशन सिस्टम और पैसों के बदले कंटेंट का प्रमोशन उसे एक साधारण प्लेटफॉर्म बनाए रखते हैं या फिर वह पब्लिशर की भूमिका में आ जाती है। यदि कोई प्लेटफॉर्म यह खुद तय करता है कि किस यूजर को क्या कंटेंट दिखाया जाएगा और पैसे लेकर कंटेंट को प्रमोट करता है, तो उसे पब्लिशर माना जा सकता है। ऐसा होने पर कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाले कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और IT एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी छूट यानी सेफ हार्बर स्टेटस गंवाना पड़ सकता है। क्या है ‘सेफ हार्बर’ प्रोटेक्शन और क्यों खतरे में है मेटा का स्टेटस? IT एक्ट की धारा 79 सोशल मीडिया कंपनियों को ‘सेफ हार्बर’ यानी कानूनी सुरक्षा कवच देती है। इसके तहत किसी यूजर द्वारा पोस्ट की गई विवादित या गलत जानकारी के लिए प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक या इंस्टाग्राम को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता। हालांकि, यह छूट तभी तक मिलती है जब तक कंपनी पूरी तरह ‘ड्यू डिलिजेंस’ यानी कानूनी नियमों और सावधानियों का पालन करे। सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगर प्लेटफॉर्म खुद एल्गोरिदम के जरिए यह तय कर रहा है कि क्या कंटेंट किसको दिखेगा, तो यह पब्लिशिंग यानी प्रकाशन के दायरे में आता है। नियमों का पालन न करने पर आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत कंपनी पर सीधी कार्रवाई की जा सकती है। पीएम मोदी की पोस्ट हटाने पर मार्क जुकरबर्ग की तरफ से मांगी गई माफी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को अस्थायी रूप से हटाने यानी रिस्ट्रिक्ट करने के बाद सरकार ने मेटा के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कपलान को समन भेजा था। इसके बाद कपलान की टीम ने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, पीएम की पोस्ट हटने और प्लेटफॉर्म पर डीपफेक व अन्य गड़बड़ियों को लेकर मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग की ओर से माफी मांगी गई है। संसदीय स्थायी समिति ने भी इस घटना पर नाराजगी जताते हुए जुकरबर्ग से 3 दिनों के भीतर माफी मांगने को कहा था और ऐसा न करने पर कानूनी सुरक्षा वापस लेने की चेतावनी दी थी। डीपफेक और चाइल्ड अब्यूज कंटेंट पर सरकार का सख्त रुख दो दिनों तक चले कड़े सवालों-जवाबों के बाद शुक्रवार को सरकार और मेटा के अधिकारियों के बीच तकनीकी चर्चा हुई। सरकार ने मेटा से पूछा कि फ्लैग (रिपोर्ट) किए जाने के बाद भी एआई-जनरेटेड हानिकारक कंटेंट और डीपफेक वीडियो बार-बार प्लेटफॉर्म पर क्यों दिखने लगते हैं। साथ ही, आईटी नियमों के तहत एआई या सिंथेटिक कंटेंट पर ‘लेबल’ लगाना अनिवार्य है, लेकिन बिना लेबल वाले एआई वीडियो अभी भी कैसे सर्कुलेट हो रहे हैं? मेटा ने माना कि ये गंभीर मुद्दे हैं और इन्हें सुलझाने के लिए लगातार काम करने का भरोसा दिया है। भारतीय भाषाओं को समझने के लिए ‘ह्यूमन ओवरसाइट’ बढ़ाने के निर्देश बैठक के दौरान सरकार ने मेटा से स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह केवल ऑटोमेटेड या एआई सिस्टम पर निर्भर न रहे। कंटेंट मॉडरेशन के लिए इंसानी निगरानी यानी ह्यूमन ओवरसाइ को बढ़ाया जाए। सरकार ने कहा कि मेटा को भारत की स्थानीय बारीकियों, संस्कृतियों और विभिन्न भारतीय भाषाओं की बेहतर समझ रखने वाली टीमों को तैनात करना होगा, ताकि सही समय पर आपत्तिजनक कंटेंट को हटाया जा सके।

सैफ अली खान बहन के पर्स से पैसे निकालते थे:सबा पटौदी ने बताया- रक्षा बंधन पर वही रकम गिफ्ट में दे देते थे

सैफ अली खान बहन के पर्स से पैसे निकालते थे:सबा पटौदी ने बताया- रक्षा बंधन पर वही रकम गिफ्ट में दे देते थे

सैफ अली खान की बहन सबा पटौदी ने हाल ही में बताया कि सैफ कई बार उनके पर्स से पैसे निकाल लेते थे और बाद में वही रकम रक्षा बंधन पर गिफ्ट के रूप में दे देते थे। यह बात उन्होंने नेहा धूपिया और अंगद बेदी के यूट्यूब शो में बताई। सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा पटौदी ने अपने बचपन का बड़ा हिस्सा पटौदी परिवार के महल में बिताया। हालांकि, सोहा ने बताया कि घर में उन्हें कभी शाही जिंदगी जैसा एहसास नहीं कराया गया। उनके पिता पूर्व क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी बच्चों को खर्चों की अहमियत समझाते थे। सोहा ने कहा कि उनके पिता घर में बिजली बचाने पर जोर देते थे और पीले रंग के पोस्ट-इट नोट्स पर लाइट बंद करने की याद दिलाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि बचपन में दोस्तों के घर जाने की अनुमति कई बार इसलिए नहीं मिलती थी क्योंकि उनके पिता का मानना था कि पेट्रोल पर फालतू का खर्च नहीं होना चाहिए। 100 रुपए पॉकेट मनी मिलती थी बातचीत के दौरान सबा पटौदी ने पॉकेट मनी का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें और सोहा को 100 रुपए मिलते थे। वहीं, उस समय सैफ अली खान इंग्लैंड में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान सोहा ने हंसते हुए कहा कि सैफ पैसे चुरा लेते थे। इस पर सबा ने मजाकिया अंदाज में बताया कि जब वे इंग्लैंड जाती थीं, तो उन्हें 5 पाउंड मिलते थे, जिन्हें सैफ अक्सर उधार ले लेते थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार सैफ उनके पर्स से पैसे निकाल लेते थे और बाद में वही रकम रक्षा बंधन पर गिफ्ट के रूप में वापस दे देते थे। सैफ की पहली शादी में नहीं पहुंचीं बहनें इसी इंटरव्यू में सोहा और सबा ने बताया कि वे भाई सैफ अली खान की पहली शादी में नहीं पहुंची थीं। सबा पटौदी ने बताया कि जब सैफ और अमृता की शादी हुई, तब वह और सोहा दोनों ही स्कूल में थीं। सोहा ने भी बताया कि शादी बहुत जल्दबाजी में हुई थी, इसलिए दोनों बहनें इसका हिस्सा नहीं बन सकीं। प्रिंसिपल ऑफिस से आया था फोन सबा ने आगे बताया कि शादी की अचानक आई मीडिया खबरों के कारण स्कूल प्रशासन को दखल देना पड़ा था। सबा के मुताबिक, प्रिंसिपल के ऑफिस से उन्हें फोन आया था। उनसे कहा गया था कि जब तक पुष्टि न हो जाए, वे इस बारे में किसी से कोई बात न करें। सबा ने याद करते हुए कहा कि उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे किसी को कुछ न बताएं, क्योंकि यह खबर मीडिया में आ चुकी थी और उन्हें इसकी सच्चाई नहीं पता थी।

सैफ अली खान बहन के पर्स से पैसे निकालते थे:सबा पटौदी ने बताया- रक्षा बंधन पर वही रकम गिफ्ट में दे देते थे

सैफ अली खान बहन के पर्स से पैसे निकालते थे:सबा पटौदी ने बताया- रक्षा बंधन पर वही रकम गिफ्ट में दे देते थे

सैफ अली खान की बहन सबा पटौदी ने हाल ही में बताया कि सैफ कई बार उनके पर्स से पैसे निकाल लेते थे और बाद में वही रकम रक्षा बंधन पर गिफ्ट के रूप में दे देते थे। यह बात उन्होंने नेहा धूपिया और अंगद बेदी के यूट्यूब शो में बताई। सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा पटौदी ने अपने बचपन का बड़ा हिस्सा पटौदी परिवार के महल में बिताया। हालांकि, सोहा ने बताया कि घर में उन्हें कभी शाही जिंदगी जैसा एहसास नहीं कराया गया। उनके पिता पूर्व क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी बच्चों को खर्चों की अहमियत समझाते थे। सोहा ने कहा कि उनके पिता घर में बिजली बचाने पर जोर देते थे और पीले रंग के पोस्ट-इट नोट्स पर लाइट बंद करने की याद दिलाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि बचपन में दोस्तों के घर जाने की अनुमति कई बार इसलिए नहीं मिलती थी क्योंकि उनके पिता का मानना था कि पेट्रोल पर फालतू का खर्च नहीं होना चाहिए। 100 रुपए पॉकेट मनी मिलती थी बातचीत के दौरान सबा पटौदी ने पॉकेट मनी का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें और सोहा को 100 रुपए मिलते थे। वहीं, उस समय सैफ अली खान इंग्लैंड में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान सोहा ने हंसते हुए कहा कि सैफ पैसे चुरा लेते थे। इस पर सबा ने मजाकिया अंदाज में बताया कि जब वे इंग्लैंड जाती थीं, तो उन्हें 5 पाउंड मिलते थे, जिन्हें सैफ अक्सर उधार ले लेते थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार सैफ उनके पर्स से पैसे निकाल लेते थे और बाद में वही रकम रक्षा बंधन पर गिफ्ट के रूप में वापस दे देते थे। सैफ की पहली शादी में नहीं पहुंचीं बहनें इसी इंटरव्यू में सोहा और सबा ने बताया कि वे भाई सैफ अली खान की पहली शादी में नहीं पहुंची थीं। सबा पटौदी ने बताया कि जब सैफ और अमृता की शादी हुई, तब वह और सोहा दोनों ही स्कूल में थीं। सोहा ने भी बताया कि शादी बहुत जल्दबाजी में हुई थी, इसलिए दोनों बहनें इसका हिस्सा नहीं बन सकीं। प्रिंसिपल ऑफिस से आया था फोन सबा ने आगे बताया कि शादी की अचानक आई मीडिया खबरों के कारण स्कूल प्रशासन को दखल देना पड़ा था। सबा के मुताबिक, प्रिंसिपल के ऑफिस से उन्हें फोन आया था। उनसे कहा गया था कि जब तक पुष्टि न हो जाए, वे इस बारे में किसी से कोई बात न करें। सबा ने याद करते हुए कहा कि उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे किसी को कुछ न बताएं, क्योंकि यह खबर मीडिया में आ चुकी थी और उन्हें इसकी सच्चाई नहीं पता थी।

भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में

भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में

अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया गया। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। 23 जुलाई को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके तहत रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक और सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। पहले बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। भारत ने पिछले महीने आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।