पिछले 5 महीने में दाल ₹8, तेल ₹6 महंगा हुआ:दूध-चीनी समेत राशन की 99% चीजों के दाम बढ़े; त्योहारों में और बढ़ेगी महंगाई

28 फरवरी से 3 अगस्त तक, यानी पिछले 5 महीनों में आम आदमी के खाने-पीने का खर्च तेजी से बढ़ा है। 28 फरवरी वही दिन है, जब अमेरिका-ईरान-इजराइल में जंग शुरू हुई थी। उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के मुताबिक इन 5 महीनों में 16 मुख्य खाद्य वस्तुओं में से 15 के दाम बढ़े हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा तेजी दालों और तेल में रही। इसके अलावा चना दाल ₹4.65 प्रति किलो, अरहर दाल ₹5.96, उड़द ₹5.71, चीनी ₹2.25, मूंग दाल ₹4.55 प्रति किलो और दूध ₹3, सरसों तेल ₹7.56 प्रति लीटर महंगा हुआ। चावल के दाम ₹1.57 और नमक के ₹0.85 प्रति किलो बढ़े, जबकि आटे की कीमतों में ₹0.22 की मामूली बढ़ोतरी हुई है। देखें 5 महीनों में बढ़े हुए दाम की लिस्ट… चीनी के दाम बढ़ने के पीछे एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की लगातार ऊंची मांग और चीनी उत्पादन में अपेक्षाकृत कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। वहीं, गेहूं के पर्याप्त सरकारी भंडार और बाजार में बेहतर उपलब्धता से इसके दाम दबाव में रहे, जिससे आटे की कीमत भी लगभग स्थिर बनी रही। अगस्त से त्योहारी सीजन बढ़ाएगा दाम विशेषज्ञों का कहना है कि दालों की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह इस बार कमजोर और असमान मानसून है। जुलाई के अंत तक खरीफ दालों का रकबा पिछले साल से करीब 7% कम रहा, जिससे उत्पादन घटने और आयात बढ़ने की आशंका से बाजार में कीमतें चढ़ीं। अब अगस्त से शुरू हो रहे रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान दाल और खाद्य तेलों की मांग बढ़ने की संभावना है। अगर वैश्विक स्तर पर कीमतों और आयात लागत में नरमी नहीं आती है, तो इन दोनों कैटेगरी की कीमतों पर आगे भी दबाव बने रहने की आशंका दिख रही है। बड़ी वजह- ईरान जंग, कमजोर मानसून और दुनिया में बढ़े दाम इंफोमेरिक रेटिंग में चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा के मुताबिक दालों और खाद्य तेलों की कीमतों पर अभी दबाव बना हुआ है। कमजोर मानसून के कारण खरीफ बुवाई का रकबा घटने से दालों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं, खाद्य तेलों में भारत की आयात निर्भरता, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम और सोया तेल की कीमतों में तेजी, पश्चिम एशिया में जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण आयात की लागत बढ़ गई है।
काजोल@52, पिता चाहते थे नाम हो मर्सिडीज:हीरोइन बनने से पहले अक्षय पर था क्रश, पहली मुलाकात में शाहरुख ने की बेइज्जती, गिरने से याद्दाश्त गई

एक लड़की, जिनकी शरारतों से मां इतनी परेशान थीं कि गुस्से में कह देती थीं, “हाय… काश, तुझे भी एक बेटी हो, बिल्कुल तेरे जैसी।” पिता उनका ऑफिशियल नाम ‘मर्सिडीज’ रखना चाहते थे, लेकिन मां ने साफ मना कर दिया। इनकी दोस्ती की भी मिसाल दी जाती है। 15 साल की उम्र में उसने करण जौहर का ऐसा मजाक उड़ाया कि वो पार्टी छोड़कर ही निकल गए। वहीं उन्हें पहली फिल्म भी एक सहेली की मदद से ही मिली। लेकिन शूटिंग के पहले ही दिन सेट पर गिर पड़ीं। ये गिरने-पड़ने में भी पीछे नहीं थीं। जिस फिल्म का हिस्सा बनतीं, वहां गिरना तय था। बेस्ट फ्रेंड शाहरुख और करण का मानना था कि ये जिस भी फिल्म के सेट पर गिरती हैं, वो हिट हो जाती हैं। ऐसे ही एक बार कुछ कुछ होता है की शूटिंग में ये साइकिल से ऐसी गिरीं कि याद्दाश्त ही चली गई। दोस्तों ने पुरानी शरारत का बदला लिया और ये साबित कर दिया कि वो फिल्म की हीरोइ नहीं बल्कि बैकग्राउंड डांसर थीं। शरारत, बेबाकी, हाजिरजवाबी और दमदार एक्टिंग, इन चार शब्दों में अगर किसी एक एक्ट्रेस को बयां किया जा सकता है, तो वो हैं काजोल। बॉलीवुड की इस चुलबुली सुपरस्टार ने अपनी हंसी, अपने अंदाज और अपनी फिल्मों से तीन दशकों से दर्शकों का दिल जीता है। आज, उनके 52वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी के कुछ ऐसे मजेदार किस्से, जो उनकी शख्सियत का सार हैं- किस्सा- 1 पिता चाहते थे नाम हो मर्सिडीज, 11 की उम्र में बोर्डिंग स्कूल से भागीं, रास्ते में पकड़ी गईं 5 अगस्त 1974 में काजोल का जन्म मुंबई के समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ। मां तनुजा, जानी-मानी एक्ट्रेस थीं और पिता शोमू मुखर्जी फिल्ममेकर। उनके पिता मर्सिडीज कार के शौकीन थे। उन्हें पता चला कि ये कार बनाने वाले शख्स की बेटी का असल नाम मर्सिडीज था। बात में उसने बेटी के नाम पर मर्सिडीज कार बनाई। शोमू चाहते थे कि उनकी बेटी का नाम भी मर्सिडीज हो। वो अड़ गए, लेकिन तनुजा ने साफ कहा- मैं ऐसा नहीं होने दूंगी। उन्होंने बेटी का नाम काजल रखा, लेकिन बंगाली परिवार में इसे ही धीरे-धीरे काजोल कर दिया गया। काजोल बचपन में इतनी शरारती थीं कि मां उनकी अक्सर पिटाई करती थीं। कभी बैडमिंटन रैकेट से मारतीं तो कभी जो हाथ आया उससे। काजोल कम उम्र की थीं, जब पेरेंट्स का तलाक हो गया। मां तनुजा फिल्मों में व्यस्त रहती थीं, तो काजोल कई सालों तक नानी शोभना समर्थ के साथ रहीं। शोभना भी अपने दौर की मशहूर एक्ट्रेस थीं। कुछ समय बाद उनका दाखिला पंचगनी के सेंट जोसेफ बोर्डिंग स्कूल में करवा दिया गया। एक दिन बोर्डिंग स्कूल में उन्हें पता चला कि उनकी नानी की मां काफी बीमार हैं। काजोल ने जिद पकड़ ली कि वो उनसे मिलने जाएंगी। मां ने इनकार कर दिया कि सीधे क्रिसमस की छुट्टियों में ही आना। काजोल ने अपनी एक दोस्त के साथ बोर्डिंग स्कूल से भागने का प्लान बनाया। वो लोगों की नजरों से बचते हुए गेट से बाहर निकलीं और अपने लोकल गार्डियन के घर पहुंच गईं। उन्होंने कहा- मामा जी, मां ने मुझे घर बुलाया है, आप मुझे बस में बैठा दीजिए। मामा कुछ समझ नहीं सके और बस में बैठा दिया। काजोल बस चलने का इंतजार कर रही थीं कि तभी स्कूल की नन ने उन्हें पकड़ लिया। काजोल को डांट के बाद दोबारा बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया। देखिए काजोल के बचपन की चुनिंदा तस्वीरें- किस्सा-2 15 की उम्र में करण जौहर को देखकर उड़ाया मजाक, पार्टी छोड़कर निकले काजोल महज 15 साल की थीं, जब वो मां एक्ट्रेस तनुजा के साथ एक फिल्मी पार्टी में गईं। डिस्को थीम वाली पार्टी में फिल्म इंडस्ट्री के कई और सेलेब्स भी आए थे। काजोल मस्ती कर रही थीं कि तभी पार्टी में फिल्ममेकर यश जौहर अपने 17 साल के बेटे करण जौहर के साथ आए। ये करण और काजोल की पहली मुलाकात थी। जैसे ही पेरेंट्स ने दोनों का परिचय करवाया, थ्री-पीस सूट, टाई लगाए हुए टीनएज करण को ऊपर से नीचे देखकर काजोल जोर-जोर से हंस पड़ीं। करण मजाक उड़ता देख उदास हो गए, तभी काजोल की मां ने फिर कहा- तुम दोनों बच्चे जाकर साथ डांस क्यों नहीं करते। दोनों डांस फ्लोर पर गए तो करण हिचकते हुए डांस करने लगे, लेकिन काजोल हंसी नहीं रोक पाईं और करीब आधे घंटे तक हंसती रहीं। करण का दिल टूट गया और वो पार्टी छोड़कर चले गए। लेकिन समय के साथ दोनों की दोस्ती ऐसी होती गई कि जब करण ने 21 की उम्र में दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे बनाईं तो काजोल को ही कास्ट किया। आगे वो करण के साथ कभी खुशी कभी गम, कल हो न हो (कैमियो), माय नेम इज खान जैसी फिल्मों में नजर आईं। किस्सा- 3 अक्षय कुमार पर था क्रश, देखने के लिए दोस्त करण को किया परेशान काजोल को फिल्मों में आने से पहले अक्षय कुमार पर क्रश था। अक्षय कुमार 1987 में फिल्मों में आए थे और कई हिट फिल्में दे रहे थे। तब काजोल महज 16-17 साल की थीं। एक बार काजोल मां के साथ फिल्म हिना के प्रीमियर में पहुंची। तब तक उनकी करण जौहर से दोस्ती हो चुकी थी। प्रीमियर में जैसे ही काजोल को पता चला कि अक्षय कुमार भी आए हैं, तो वो करण का हाथ पकड़कर पूरे प्रीमियर में अक्षय को ढूंढती रहीं। ये किस्सा करण जौहर ने कपिल शर्मा के शो में सुनाया था। किस्सा- 4 दोस्त का फोटोशूट करवाने पहुंचीं, मिल गई पहली फिल्म, छुट्टियों के टाइमपास के लिए हामी भरी काजोल की तीन पीढ़ियां फिल्मों में काम कर चुकी हैं। ऐसे में तनुजा चाहती थीं कि वह भी फिल्मों में आएं, लेकिन काजोल इसके खिलाफ थीं। उन्हें लगता था कि हीरोइन बनने के लिए काफी मेहनत करनी होगी। तनुजा ने उनकी मर्जी के खिलाफ उनके लिए फिल्म बनाना भी शुरू किया, लेकिन किसी कारण वो बंद पड़ गई। काजोल की एक करीबी दोस्त हीरोइन बनना चाहती थीं। एक दिन वो पोर्टफोलियो बनवाने के लिए गौतम राजाध्यक्ष के पास गईं। साथ देने के लिए वो काजोल को भी साथ ले गईं। दोस्त का फोटोशूट चल ही
काजोल@52, पिता चाहते थे नाम हो मर्सिडीज:हीरोइन बनने से पहले अक्षय पर था क्रश, पहली मुलाकात में शाहरुख ने की बेइज्जती, गिरने से याददाश्त गई

एक लड़की, जिनकी शरारतों से मां इतनी परेशान थीं कि गुस्से में कह देती थीं, “हाय… काश, तुझे भी एक बेटी हो, बिल्कुल तेरे जैसी।” पिता उनका ऑफिशियल नाम ‘मर्सिडीज’ रखना चाहते थे, लेकिन मां ने साफ मना कर दिया। इनकी दोस्ती की भी मिसाल दी जाती है। 15 साल की उम्र में उसने करण जौहर का ऐसा मजाक उड़ाया कि वो पार्टी छोड़कर ही निकल गए। वहीं उन्हें पहली फिल्म भी एक सहेली की मदद से ही मिली। लेकिन शूटिंग के पहले ही दिन सेट पर गिर पड़ीं। ये गिरने-पड़ने में भी पीछे नहीं थीं। जिस फिल्म का हिस्सा बनतीं, वहां गिरना तय था। बेस्ट फ्रेंड शाहरुख और करण का मानना था कि ये जिस भी फिल्म के सेट पर गिरती हैं, वो हिट हो जाती हैं। ऐसे ही एक बार कुछ कुछ होता है की शूटिंग में ये साइकिल से ऐसी गिरीं कि याददाश्त ही चली गई। दोस्तों ने पुरानी शरारत का बदला लिया और ये साबित कर दिया कि वो फिल्म की हीरोइन नहीं बल्कि बैकग्राउंड डांसर थीं। शरारत, बेबाकी, हाजिरजवाबी और दमदार एक्टिंग, इन चार शब्दों में अगर किसी एक एक्ट्रेस को बयां किया जा सकता है, तो वो हैं काजोल। बॉलीवुड की इस चुलबुली सुपरस्टार ने अपनी हंसी, अपने अंदाज और अपनी फिल्मों से तीन दशकों से दर्शकों का दिल जीता है। आज, उनके 52वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी के कुछ ऐसे मजेदार किस्से, जो उनकी शख्सियत का सार हैं- किस्सा- 1 पिता चाहते थे नाम हो मर्सिडीज, 11 की उम्र में बोर्डिंग स्कूल से भागीं, रास्ते में पकड़ी गईं 5 अगस्त 1974 में काजोल का जन्म मुंबई के समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ। मां तनुजा, जानी-मानी एक्ट्रेस थीं और पिता शोमू मुखर्जी फिल्ममेकर। उनके पिता मर्सिडीज कार के शौकीन थे। उन्हें पता चला कि ये कार बनाने वाले शख्स की बेटी का असल नाम मर्सिडीज था। बात में उसने बेटी के नाम पर मर्सिडीज कार बनाई। शोमू चाहते थे कि उनकी बेटी का नाम भी मर्सिडीज हो। वो अड़ गए, लेकिन तनुजा ने साफ कहा- मैं ऐसा नहीं होने दूंगी। उन्होंने बेटी का नाम काजल रखा, लेकिन बंगाली परिवार में इसे ही धीरे-धीरे काजोल कर दिया गया। काजोल बचपन में इतनी शरारती थीं कि मां उनकी अक्सर पिटाई करती थीं। कभी बैडमिंटन रैकेट से मारतीं तो कभी जो हाथ आया उससे। काजोल कम उम्र की थीं, जब पेरेंट्स का तलाक हो गया। मां तनुजा फिल्मों में व्यस्त रहती थीं, तो काजोल कई सालों तक नानी शोभना समर्थ के साथ रहीं। शोभना भी अपने दौर की मशहूर एक्ट्रेस थीं। कुछ समय बाद उनका दाखिला पंचगनी के सेंट जोसेफ बोर्डिंग स्कूल में करवा दिया गया। एक दिन बोर्डिंग स्कूल में उन्हें पता चला कि उनकी नानी की मां काफी बीमार हैं। काजोल ने जिद पकड़ ली कि वो उनसे मिलने जाएंगी। मां ने इनकार कर दिया कि सीधे क्रिसमस की छुट्टियों में ही आना। काजोल ने अपनी एक दोस्त के साथ बोर्डिंग स्कूल से भागने का प्लान बनाया। वो लोगों की नजरों से बचते हुए गेट से बाहर निकलीं और अपने लोकल गार्डियन के घर पहुंच गईं। उन्होंने कहा- मामा जी, मां ने मुझे घर बुलाया है, आप मुझे बस में बैठा दीजिए। मामा कुछ समझ नहीं सके और बस में बैठा दिया। काजोल बस चलने का इंतजार कर रही थीं कि तभी स्कूल की नन ने उन्हें पकड़ लिया। काजोल को डांट के बाद दोबारा बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया। देखिए काजोल के बचपन की चुनिंदा तस्वीरें- किस्सा-2 15 की उम्र में करण जौहर को देखकर उड़ाया मजाक, पार्टी छोड़कर निकले काजोल महज 15 साल की थीं, जब वो मां एक्ट्रेस तनुजा के साथ एक फिल्मी पार्टी में गईं। डिस्को थीम वाली पार्टी में फिल्म इंडस्ट्री के कई और सेलेब्स भी आए थे। काजोल मस्ती कर रही थीं कि तभी पार्टी में फिल्ममेकर यश जौहर अपने 17 साल के बेटे करण जौहर के साथ आए। ये करण और काजोल की पहली मुलाकात थी। जैसे ही पेरेंट्स ने दोनों का परिचय करवाया, थ्री-पीस सूट, टाई लगाए हुए टीनएज करण को ऊपर से नीचे देखकर काजोल जोर-जोर से हंस पड़ीं। करण मजाक उड़ता देख उदास हो गए, तभी काजोल की मां ने फिर कहा- तुम दोनों बच्चे जाकर साथ डांस क्यों नहीं करते। दोनों डांस फ्लोर पर गए तो करण हिचकते हुए डांस करने लगे, लेकिन काजोल हंसी नहीं रोक पाईं और करीब आधे घंटे तक हंसती रहीं। करण का दिल टूट गया और वो पार्टी छोड़कर चले गए। लेकिन समय के साथ दोनों की दोस्ती ऐसी होती गई कि जब करण ने 21 की उम्र में दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे बनाईं तो काजोल को ही कास्ट किया। आगे वो करण के साथ कभी खुशी कभी गम, कल हो न हो (कैमियो), माय नेम इज खान जैसी फिल्मों में नजर आईं। किस्सा- 3 अक्षय कुमार पर था क्रश, देखने के लिए दोस्त करण को किया परेशान काजोल को फिल्मों में आने से पहले अक्षय कुमार पर क्रश था। अक्षय कुमार 1987 में फिल्मों में आए थे और कई हिट फिल्में दे रहे थे। तब काजोल महज 16-17 साल की थीं। एक बार काजोल मां के साथ फिल्म हिना के प्रीमियर में पहुंची। तब तक उनकी करण जौहर से दोस्ती हो चुकी थी। प्रीमियर में जैसे ही काजोल को पता चला कि अक्षय कुमार भी आए हैं, तो वो करण का हाथ पकड़कर पूरे प्रीमियर में अक्षय को ढूंढती रहीं। ये किस्सा करण जौहर ने कपिल शर्मा के शो में सुनाया था। किस्सा- 4 दोस्त का फोटोशूट करवाने पहुंचीं, मिल गई पहली फिल्म, छुट्टियों के टाइमपास के लिए हामी भरी काजोल की तीन पीढ़ियां फिल्मों में काम कर चुकी हैं। ऐसे में तनुजा चाहती थीं कि वह भी फिल्मों में आएं, लेकिन काजोल इसके खिलाफ थीं। उन्हें लगता था कि हीरोइन बनने के लिए काफी मेहनत करनी होगी। तनुजा ने उनकी मर्जी के खिलाफ उनके लिए फिल्म बनाना भी शुरू किया, लेकिन किसी कारण वो बंद पड़ गई। काजोल की एक करीबी दोस्त हीरोइन बनना चाहती थीं। एक दिन वो पोर्टफोलियो बनवाने के लिए गौतम राजाध्यक्ष के पास गईं। साथ देने के लिए वो काजोल को भी साथ ले गईं। दोस्त का फोटोशूट चल ही
लगान-गजनी फेम एक्टर प्रदीप रावत का निधन:74 साल के थे, दोबारा कैंसर हुआ था; महाभारत में अश्वत्थामा बने थे

लगान और गजनी समेत कई फिल्मों में नजर आने वाले अभिनेता प्रदीप रावत का 74 साल की उम्र में मंगलवार को निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी लगान में उनके साथ काम करने वाले अभिनेता यशपाल शर्मा ने इंस्टाग्राम पर श्रद्धांजलि देते हुए शेयर की। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदीप रावत के मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने उनके निधन की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि एक्टर कैंसर से पीड़ित थे और बीमारी दोबारा लौट आई थी। पिछले एक महीने से उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था। महाभारत में अश्वत्थामा का रोल निभाया था प्रदीप रावत ने एक्टिंग करियर की शुरुआत बी.आर. चोपड़ा के टीवी शो महाभारत में अश्वत्थामा की भूमिका से की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और भोजपुरी फिल्मों में काम किया। हिंदी सिनेमा में उन्होंने लगान, सरफरोश, गजनी, बैजू बावरा, आवारापन और ग्रैंड मस्ती जैसी फिल्मों में दिखाई दिए। वहीं, तेलुगु फिल्म सई (Sye) से उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में कदम रखा और कई यादगार विलेन के किरदार निभाए। तमिल फिल्म गजनी (2005) में उनके डबल रोल को काफी पसंद किया गया। बाद में उन्होंने इसी भूमिका को हिंदी रीमेक गजनी में भी निभाया। इसके अलावा उन्होंने कन्नड़ फिल्म पैरोडी, मलयालम फिल्म ‘चाइना टाउन’, बंगाली फिल्म हीरो 420 और भोजपुरी फिल्म क्रैक फाइटर में भी एक्टिंग की थी। यह खबर हम लगातार अपडेट कर रहे हैं…
दुनियाभर में फूड कंपनियों की मुकदमेबाजी में लगे 600 साल:डब्ल्यूएचओ का आरोप; अदालती चक्करों में फंसाकर मोटापे की मुहिम कमजोर कर रहे ब्रांड्स

दुनिया की सबसे बड़ी अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (पैकेज्ड चिप्स, नम्कीन, क्रिस्प्स) कंपनियां सेहतमंद खान-पान को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों को अदालतों में घसीटकर मोटापे के खिलाफ वैश्विक मुहिम को कमजोर कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम गेब्रेयेसस का तो कम से कम यही मानना है। उनका कहना है कि इन कंपनियों की मुकदमेबाजी की वजह से देशों को स्वास्थ्य और कानूनी खर्च के मद में हजारों करोड़ रुपए गंवाने पड़ रहे हैं। दिलचस्प यह है कि ज्यादातर मुकदमे कंपनियां हार जाती हैं। फिर भी मुकदमा ठोकना नहीं छोड़तीं। एक नई मल्टी-कंट्री (कई देश) जांच के मुताबिक, जितने भी मुकदमों का फैसला आ चुका है, उनमें से तीन-चौथाई में सरकारों की ही जीत हुई। लेकिन गेब्रेयेसस के मुताबिक, हारी हुई कंपनियां भी असल में बड़ा दांव जीत जाती हैं क्योंकि मुकदमा लड़ते-लड़ते ही नीति वर्षों तक अटकी रहती है। जांच में सामने आया कि दुनियाभर में इस तरह की मुकदमेबाजी में अब तक 600 साल लग हो चुके हैं, यानी हर मुकदमे में औसतन ढाई साल लग रहे हैं। यह जांच ‘द गार्जियन’ ने रॉबर्ट एंड एथेल कैनेडी ह्यूमन राइट्स सेंटर, सिडनी यूनिवर्सिटी, साओ पाउलो यूनिवर्सिटी और काल्डास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर की। जांच के मुताबिक, पैकेट के आगे लगने वाले वॉर्निंग लेबल पर सबसे ज्यादा, फिर जंक फूड पर टैक्स और इसके बाद विज्ञापन-मार्केटिंग पर लगी पाबंदियों को लेकर कंपनियों ने सबसे ज्यादा सरकारों को अदालत तक घसीटा। गेब्रेयेसस ने कहा, ‘अगर कंपनियां सच में मोटापे से लड़ने में मदद करना चाहती हैं, तो उन्हें मुकदमेबाजी छोड़नी होगी।’ 2024 में दुनियाभर में करीब 1 अरब लोग, यानी हर सातवां इंसान, मोटापे का शिकार था। गेब्रेयेसस के मुताबिक, जिन देशों ने वॉर्निंग लेबल, टैक्स और विज्ञापन पाबंदी जैसी नीतियां लागू कीं, वहां नतीजे बेहतर मिले हैं। 38% मुकदमे कोका-कोला, पेप्सिको जैसी सिर्फ 8 कंपनियों ने किए जिन मुकदमों में कंपनी की पहचान जाहिर हुई, उनमें से 38% सिर्फ आठ बड़ी पैरेंट कंपनियों से जुड़े थे। कोका-कोला, पेप्सिको, मोंडेलेज, केलॉग्स, डैनोन, फेरेरो, जिग्नक्स और हार्टलैंड फूड प्रोडक्ट्स ग्रुप इनमें शामिल हैं। यानी दुनिया की मुट्ठीभर बड़ी फूड कंपनियां ही सरकारों के खिलाफ सबसे ज्यादा कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने तो अदालत से अपनी पहचान गुप्त रखने की गुजारिश भी की, ताकि जनता को यह पता ही न चले कि मुकदमा किसने दायर किया है।
दुनियाभर में फूड कंपनियों की मुकदमेबाजी में लगे 600 साल:डब्ल्यूएचओ का आरोप; अदालती चक्करों में फंसाकर मोटापे की मुहिम कमजोर कर रहे ब्रांड्स

दुनिया की सबसे बड़ी अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (पैकेज्ड चिप्स, नम्कीन, क्रिस्प्स) कंपनियां सेहतमंद खान-पान को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों को अदालतों में घसीटकर मोटापे के खिलाफ वैश्विक मुहिम को कमजोर कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम गेब्रेयेसस का तो कम से कम यही मानना है। उनका कहना है कि इन कंपनियों की मुकदमेबाजी की वजह से देशों को स्वास्थ्य और कानूनी खर्च के मद में हजारों करोड़ रुपए गंवाने पड़ रहे हैं। दिलचस्प यह है कि ज्यादातर मुकदमे कंपनियां हार जाती हैं। फिर भी मुकदमा ठोकना नहीं छोड़तीं। एक नई मल्टी-कंट्री (कई देश) जांच के मुताबिक, जितने भी मुकदमों का फैसला आ चुका है, उनमें से तीन-चौथाई में सरकारों की ही जीत हुई। लेकिन गेब्रेयेसस के मुताबिक, हारी हुई कंपनियां भी असल में बड़ा दांव जीत जाती हैं क्योंकि मुकदमा लड़ते-लड़ते ही नीति वर्षों तक अटकी रहती है। जांच में सामने आया कि दुनियाभर में इस तरह की मुकदमेबाजी में अब तक 600 साल लग हो चुके हैं, यानी हर मुकदमे में औसतन ढाई साल लग रहे हैं। यह जांच ‘द गार्जियन’ ने रॉबर्ट एंड एथेल कैनेडी ह्यूमन राइट्स सेंटर, सिडनी यूनिवर्सिटी, साओ पाउलो यूनिवर्सिटी और काल्डास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर की। जांच के मुताबिक, पैकेट के आगे लगने वाले वॉर्निंग लेबल पर सबसे ज्यादा, फिर जंक फूड पर टैक्स और इसके बाद विज्ञापन-मार्केटिंग पर लगी पाबंदियों को लेकर कंपनियों ने सबसे ज्यादा सरकारों को अदालत तक घसीटा। गेब्रेयेसस ने कहा, ‘अगर कंपनियां सच में मोटापे से लड़ने में मदद करना चाहती हैं, तो उन्हें मुकदमेबाजी छोड़नी होगी।’ 2024 में दुनियाभर में करीब 1 अरब लोग, यानी हर सातवां इंसान, मोटापे का शिकार था। गेब्रेयेसस के मुताबिक, जिन देशों ने वॉर्निंग लेबल, टैक्स और विज्ञापन पाबंदी जैसी नीतियां लागू कीं, वहां नतीजे बेहतर मिले हैं। 38% मुकदमे कोका-कोला, पेप्सिको जैसी सिर्फ 8 कंपनियों ने किए जिन मुकदमों में कंपनी की पहचान जाहिर हुई, उनमें से 38% सिर्फ आठ बड़ी पैरेंट कंपनियों से जुड़े थे। कोका-कोला, पेप्सिको, मोंडेलेज, केलॉग्स, डैनोन, फेरेरो, जिग्नक्स और हार्टलैंड फूड प्रोडक्ट्स ग्रुप इनमें शामिल हैं। यानी दुनिया की मुट्ठीभर बड़ी फूड कंपनियां ही सरकारों के खिलाफ सबसे ज्यादा कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने तो अदालत से अपनी पहचान गुप्त रखने की गुजारिश भी की, ताकि जनता को यह पता ही न चले कि मुकदमा किसने दायर किया है।
वॉट्सएप भारत में एज वेरिफिकेशन टेस्ट कर रहा:डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के नियमों के पालन की तैयारी, जानें क्या है मामला

अगर आपके वॉट्सएप पर हाल ही में उम्र या डेट ऑफ बर्थ दर्ज करने का ऑप्शन दिखा है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। वॉट्सएप डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन यानी DPDP कानून का पालन करने के लिए यूजर्स की उम्र की पुष्टि करने का टेस्ट कर रहा है। इसके साथ ही, एप के प्रस्तावित ‘यूजरनेम’ फीचर को लेकर भारत सरकार और मेटा के बीच सख्त बातचीत चल रही है। इस पूरे मामले को सवाल-जवाब में समझते हैं… सवाल 1: वॉट्सएप पर डेट ऑफ बर्थ दर्ज करने का मैसेज क्यों आ रहा है? जवाब: वॉट्सएप ने भारत में कुछ चुनिंदा यूजर्स के साथ एक नया प्राइवेसी-टेस्टिंग फीचर शुरू किया है। इसमें यूजर्स को अपनी जन्मतिथि दर्ज करने का प्रॉम्प्ट मिल रहा है। कंपनी का कहना है कि भारत में लागू होने जा रहे ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP)’ के तहत उम्र से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए यह तैयारी की जा रही है। सवाल 2: क्या अपनी उम्र या जन्मतिथि बताना अनिवार्य है, और क्या यह डेटा दूसरों को दिखेगा? जवाब: नहीं, वॉट्सएप ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक ऑप्शनल टेस्ट है। अगर यूजर अपनी उम्र कन्फर्म नहीं भी करते हैं, तब भी वे वॉट्सएप का इस्तेमाल पहले की तरह जारी रख सकेंगे। वॉट्सएप ने कहा कि हम समझते हैं कि किसी व्यक्ति की उम्र की जानकारी बेहद पर्सनल होती है। यह जानकारी अन्य वॉट्सएप यूजर्स के साथ किसी भी सूरत में शेयर नहीं की जाएगी। इस टेस्ट से वॉट्सएप के काम करने के तरीके या यूजर एक्सपीरियंस में कोई बदलाव नहीं आएगा। सवाल 3: इस उम्र सत्यापन प्रक्रिया पर भारत सरकार का क्या रुख है? जवाब: आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि वॉट्सएप का यह कदम DPDP एक्ट के संदर्भ में हो सकता है, जहां उम्र से जुड़े प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। आईटी सचिव ने स्पष्ट किया कि हम इस नियम की डेडलाइन के करीब पहुंच रहे हैं, इसलिए हमें वॉट्सएप से इस प्रक्रिया की बारीकियों को समझना और चेक करना होगा। सवाल 4: यह DPDP एक्ट क्या है और वॉट्सएप को इसमें उम्र पूछने की जरूरत क्यों पड़ रही है? जवाब: DPDP एक्ट 2023 भारत का नया डेटा प्राइवेसी कानून है। इसमें बच्चों और नाबालिगों के पर्सनल डेटा की सुरक्षा के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। इसके तहत टेक कंपनियों को 18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने से पहले माता-पिता की सहमति लेना या उम्र सत्यापित करना अनिवार्य किया गया है। सवाल 5: हाल ही में वॉट्सएप के ‘यूजरनेम’ फीचर को लेकर क्या विवाद शुरू हुआ था? जवाब: वॉट्सएप एक ऐसा फीचर टेस्ट कर रहा था जिससे यूजर्स बिना अपना फोन नंबर शेयर किए केवल ‘यूजरनेम’ के जरिए एक-दूसरे से कनेक्ट हो सकें। हालांकि, पिछले महीने भारत सरकार ने मेटा (Meta) को एक सख्त नोटिस जारी किया और इस फीचर की लॉन्चिंग पर तुरंत रोक लगा दी। सवाल 6: आईटी मंत्रालय को वॉट्सएप के यूजरनेम फीचर पर क्या-क्या आपत्तियां थीं? जवाब: सरकार ने आशंका जताई थी कि बिना फोन नंबर वाले यूजरनेम से साइबर क्राइम को बढ़ावा मिल सकता है। आईटी मंत्रालय के नोटिस के अनुसार: सवाल 7: क्या वॉट्सएप ने यूजरनेम विवाद पर सरकार के नोटिस का जवाब दे दिया है? जवाब: हां, वॉट्सएप ने आईटी मंत्रालय को अपना आधिकारिक जवाब सौंप दिया है। मेटा ने सरकार को आश्वासन दिया है कि जब तक सरकार के साथ बातचीत और परामर्श पूरी तरह से संतोषजनक ढंग से समाप्त नहीं हो जाते, तब तक वह भारत में ‘यूजरनेम’ फीचर को रोलआउट नहीं करेगा।
वॉट्सएप भारत में एज वेरिफिकेशन टेस्ट कर रहा:कुछ चुनिंदा यूजर्स के साथ नया फीचर शुरू, डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के नियमों के पालन की तैयारी

अगर आपके वॉट्सएप पर हाल ही में उम्र या डेट ऑफ बर्थ दर्ज करने का ऑप्शन दिखा है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। वॉट्सएप डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन यानी DPDP कानून का पालन करने के लिए यूजर्स की उम्र की पुष्टि करने का टेस्ट कर रहा है। इसके साथ ही, एप के नए प्रस्तावित ‘यूजरनेम’ फीचर को लेकर भारत सरकार और मेटा के बीच सख्त बातचीत चल रही है। इस पूरे मामले को सवाल-जवाब में समझते हैं… सवाल 1: वॉट्सएप पर डेट ऑफ बर्थ दर्ज करने का मैसेज क्यों आ रहा है? जवाब: वॉट्सएप ने भारत में कुछ चुनिंदा यूजर्स के साथ एक नया प्राइवेसी-टेस्टिंग फीचर शुरू किया है। इसमें यूजर्स को अपनी जन्मतिथि दर्ज करने का प्रॉम्प्ट मिल रहा है। कंपनी का कहना है कि भारत में लागू होने जा रहे ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP)’ के तहत उम्र से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए यह तैयारी की जा रही है। सवाल 2: क्या अपनी उम्र या जन्मतिथि बताना अनिवार्य है, और क्या यह डेटा दूसरों को दिखेगा? जवाब: नहीं, वॉट्सएप ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक ऑप्शनल टेस्ट है। अगर यूजर अपनी उम्र कन्फर्म नहीं भी करते हैं, तब भी वे वॉट्सएप का इस्तेमाल पहले की तरह जारी रख सकेंगे। वॉट्सएप ने कहा कि हम समझते हैं कि किसी व्यक्ति की उम्र की जानकारी बेहद पर्सनल होती है। यह जानकारी अन्य वॉट्सएप यूजर्स के साथ किसी भी सूरत में शेयर नहीं की जाएगी। इस टेस्ट से वॉट्सएप के काम करने के तरीके या यूजर एक्सपीरियंस में कोई बदलाव नहीं आएगा। सवाल 3: इस एज वेरिफिकेशन पर भारत सरकार का क्या रुख है? जवाब: आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि वॉट्सएप का यह कदम DPDP एक्ट के संदर्भ में हो सकता है, जहां उम्र से जुड़े प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। आईटी सचिव ने स्पष्ट किया कि हम इस नियम की डेडलाइन के करीब पहुंच रहे हैं, इसलिए हमें वॉट्सएप से इस प्रक्रिया की बारीकियों को समझना और चेक करना होगा। सवाल 4: यह DPDP एक्ट क्या है और वॉट्सएप को इसमें उम्र पूछने की जरूरत क्यों पड़ रही है? जवाब: DPDP एक्ट 2023 भारत का नया डेटा प्राइवेसी कानून है। इसमें बच्चों और नाबालिगों के पर्सनल डेटा की सुरक्षा के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। इसके तहत टेक कंपनियों को 18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने से पहले माता-पिता की सहमति लेना या उम्र सत्यापित करना अनिवार्य किया गया है। सवाल 5: हाल ही में वॉट्सएप के ‘यूजरनेम’ फीचर को लेकर क्या विवाद शुरू हुआ था? जवाब: वॉट्सएप एक ऐसा फीचर टेस्ट कर रहा था जिससे यूजर्स बिना अपना फोन नंबर शेयर किए केवल ‘यूजरनेम’ के जरिए एक-दूसरे से कनेक्ट हो सकें। हालांकि, पिछले महीने भारत सरकार ने मेटा (Meta) को एक सख्त नोटिस जारी किया और इस फीचर की लॉन्चिंग पर तुरंत रोक लगा दी। सवाल 6: आईटी मंत्रालय को वॉट्सएप के यूजरनेम फीचर पर क्या-क्या आपत्तियां थीं? जवाब: सरकार ने आशंका जताई थी कि बिना फोन नंबर वाले यूजरनेम से साइबर क्राइम को बढ़ावा मिल सकता है। आईटी मंत्रालय के नोटिस के अनुसार: सवाल 7: क्या वॉट्सएप ने यूजरनेम विवाद पर सरकार के नोटिस का जवाब दे दिया है? जवाब: हां, वॉट्सएप ने आईटी मंत्रालय को अपना आधिकारिक जवाब सौंप दिया है। मेटा ने सरकार को आश्वासन दिया है कि जब तक सरकार के साथ बातचीत और परामर्श पूरी तरह से संतोषजनक ढंग से समाप्त नहीं हो जाते, तब तक वह भारत में ‘यूजरनेम’ फीचर को रोलआउट नहीं करेगा।
सरकार LIC में बेचेगी 6.5% तक हिस्सेदारी:OFS के जरिए बिक्री होगी, फ्लोर प्राइस ₹382 तय; रिटेल निवेशकों को ₹15 का डिस्काउंट

केंद्र सरकार LIC में ऑफर फॉर सेल के जरिए 6.5% तक हिस्सेदारी बेचने जा रही है। सरकार ने इस बिक्री के लिए फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया है। इस OFS का मुख्य उद्देश्य मई 2027 की समय सीमा से पहले सेबी के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों को पूरा करना है। कुल 41.11 करोड़ शेयर बेचेगी सरकार LIC की ओर से दी गई एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, यह ऑफर 2% इक्विटी हिस्सेदारी की बेस सेल के साथ शुरू होगा। इसके तहत वित्त मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रपति 12.65 करोड़ शेयर बेचेंगे। सरकार के पास अतिरिक्त 4.5% हिस्सेदारी यानी 28.46 करोड़ शेयर बेचने का ओवरसब्स्क्रिप्शन विकल्प भी रहेगा। यदि ओवरसब्स्क्रिप्शन विकल्प का पूरी तरह से इस्तेमाल किया जाता है, तो कुल ऑफर साइज बढ़कर 41.11 करोड़ शेयर (6.5% हिस्सेदारी) हो जाएगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लोर प्राइस पर पूरे 6.5% हिस्सेदारी की बिक्री से सरकार को लगभग ₹31,410 करोड़ रुपये मिलेंगे। हिस्सेदारी क्यों बेच रही है सरकार? OFS का प्राथमिक उद्देश्य LIC को सेबी के मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों का पालन करने में मदद करना है। दीपम सचिव अरुणिष चावला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “यह OFS तय समय से पहले MPS के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।” वर्तमान में LIC में पब्लिक शेयरहोल्डिंग लगभग 3.5% है। अगर सरकार पूरी 6.5% हिस्सेदारी बेच देती है, तो बीमा कंपनी की पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़कर 10% हो जाएगी। इससे LIC मई 2027 की समय सीमा से काफी पहले नियामक आवश्यकता को पूरा कर लेगी। IPO के बाद पहला स्टेक सेल LIC मई 2022 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी, जब सरकार ने देश के सबसे बड़े IPO के जरिए 3.5% हिस्सेदारी बेची थी। उस लिस्टिंग के बाद यह बीमा कंपनी में सरकार का पहला स्टेक सेल है। कब खुलेगा OFS और बिडिंग के नियम एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, OFS गैर-रिटेल यानी संस्थागत निवेशकों के लिए मंगलवार, 4 अगस्त को खुल गया है। रिटेल निवेशक और योग्य कर्मचारी बुधवार, 5 अगस्त को अपनी बोलियां लगा सकेंगे। जिन गैर-रिटेल निवेशकों की बोलियों को पहले दिन अलॉटमेंट नहीं मिलेगा, वे सेबी के नियमों के मुताबिक दूसरे दिन अपनी बोलियों को आगे बढ़ा सकते हैं या संशोधित कर सकते हैं। फ्लोर प्राइस और बाजार कीमत की तुलना सरकार ने OFS के लिए ₹382 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। सोमवार को कारोबार के अंत में LIC का शेयर 0.9% चढ़कर ₹428.50 पर बंद हुआ। इसका मतलब है कि तय किया गया फ्लोर प्राइस सोमवार के बंद भाव से लगभग 11% कम है। रिटेल निवेशकों और कर्मचारियों को ₹15 की छूट OFS में हिस्सा लेने वाले रिटेल निवेशकों और पात्र कर्मचारियों को तय की गई अंतिम कीमत पर ₹15 प्रति शेयर का डिस्काउंट दिया जाएगा। नियमों के तहत आवंटन की मुख्य बातें: नॉलेज बॉक्स:
सेंसेक्स 150 अंक चढ़कर 78,800 पर पहुंचा:निफ्टी में 150 अंक की गिरावट, यह 24,600 पर कारोबार कर रहा

शेयर बाजार में आज यानी 04 अगस्त को सेंसेक्स 150 अंक चढ़कर 78,800 पर पहुंचा। वहीं निफ्टी में 150 अंक की गिरावट है, यह 24,600 पर कारोबार कर रहा है। एशियाई बाजारों में भी गिरावट 3 अगस्त को अमेरिकी बाजार में तेजी रही 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹7,805 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल भारतीय शेयर बाजार में रही थी तेजी शेयर बाजार में आज यानी 03 अगस्त को तेजी रही थी। सेंसेक्स 544 अंक चढ़कर 78,639 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 390 अंक की तेजी रही, यह 24,774 के स्तर पर बंद हुआ था।








