देवास में उपमुख्यमंत्री, अंबेडकर जयंती पर दिया समानता का संदेश:वंदे मातरम विवाद और ब्लैकमेलिंग-भ्रूण हत्या मामले पर बोले- दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी

मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा रविवार को देवास पहुंचे। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित हितग्राही सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि बाबा साहब का जन्म मध्यप्रदेश की धरती पर हुआ। उन्होंने बाबा साहब के योगदान को याद करते हुए समाज में समानता और न्याय के संदेश को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इस अवसर पर, उपमुख्यमंत्री ने इंदौर नगर निगम के सदन में वंदे मातरम गायन को लेकर हुए विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सभी को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने इस घटना को गलत और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। देवास में सामने आए ब्लैकमेलिंग और कन्या भ्रूण हत्या से जुड़े वायरल वीडियो मामले पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कानून अपना काम करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने न्याय का आश्वासन देते हुए कहा कि गुनहगारों को बख्शा नहीं जाएगा।
धार में अंबेडकर जयंती समारोह कल, प्रभारी मंत्री विजयवर्गीय आएंगे:पीजी कॉलेज के ऑडिटोरियम में होगा जिला स्तरीय कार्यक्रम

मध्य प्रदेश शासन के अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के निर्देशानुसार धार जिले में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती कल (13 अप्रैल) मनाई जाएगी। जिला स्तरीय मुख्य समारोह में जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह जिला स्तरीय कार्यक्रम पीजी कॉलेज धार के ऑडिटोरियम हॉल में सुबह 11 बजे से आयोजित होगा। इसमें बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के जीवन, विचारों और समाज में उनके योगदान पर आधारित विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। जिला मुख्यालय के साथ-साथ धार जिले के सभी विकासखंड मुख्यालयों पर भी डॉ. अम्बेडकर जयंती समारोह आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहेंगे। जिले की विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में डॉ. अम्बेडकर जयंती के उपलक्ष्य में साप्ताहिक कार्यक्रमों की श्रृंखला 8 अप्रैल से जारी है। ये कार्यक्रम 14 अप्रैल तक चलेंगे, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को बाबा साहब के विचारों और आदर्शों से अवगत कराया जा रहा है। जिले में आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। समारोह को सफल बनाने हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
कहीं भी सूजन हो या दांत दर्द…चुटकियों में आराम दिलाएगा संगजराहत, आयुष डॉक्टर से जानिए तरीका

Last Updated:April 12, 2026, 18:50 IST Sanjrahat benefits : संगजराहत के फायदे जादुई हैं. लोकल 18 से बागपत के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र चौधरी बताते हैं कि संगजराहत न सिर्फ पेट की बीमारियों में राहत देती है, दांत, त्वचा, बाल और शरीर की सूजन जैसी परेशानियों में भी बेहद फायदेमंद है. इसका पाउडर दर्द में राहत देता है. मसूड़ों को मजबूत करता है. यह शरीर में कहीं भी आई सूजन को भी कम करने में आगे है. हालांकि इसका उपयोग चिकित्सक की देखरेख में जरूरी मात्रा में ही करना चाहिए. बागपत. संगजराहत एक चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि है, जो कई रोगों में शरीर के लिए रामबाण है. इसका उपयोग करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है. पाचन शक्ति बढ़ने से शरीर को ताकत मिलती है. ये हड्डियों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. हालांकि इसका उपयोग चिकित्सक की देखरेख में जरूरी मात्रा में ही करना चाहिए. लोकल 18 से बागपत के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र चौधरी बताते हैं कि संगजराहत का इस्तेमाल करने से शरीर पर चौंकाने वाले फायदे देखने को मिलते हैं. इनमें भी आराम डॉ. राघवेंद्र के मुताबिक, संगजराहत से पेट की गंभीर से गंभीर बीमारी में तेजी से राहत मिलती है. पेट में होने वाले अल्सर और किसी भी तरह के इन्फेक्शन में तेजी से आराम मिलता है, जिससे पाचन शक्ति मजबूत होती है और शरीर ताकतवर बनता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी बढ़ती है. संगजराहत का उपयोग करने से हड्डी मजबूत होती है. शरीर में किसी भी हिस्से में सूजन ठीक हो जाती है. कील-मुंहासों की छुट्टी डॉ. राघवेंद्र कहते हैं कि संगजराहत से त्वचा चमकदार बनती है. त्वचा पर होने वाले विकारों में तेजी से आराम मिलता है. कील-मुंहासे जैसी समस्या चेहरे पर नहीं पनपती और चेहरा चमकदार बना रहता है. दांतों में होने वाली समस्या में भी तेजी से आराम मिलता है. दांतों में में संक्रमण और पायरिया तेजी से ठीक होती है. संगजराहत का तासीर ठंडा होता है. इसका गर्मियों में उपयोग लाभकारी है. डॉ. राघवेंद्र के मुताबिक, संगजराहत का इस्तेमाल आप चूर्ण बनाकर, दही या मक्खन में मिलाकर कर सकते हैं. हालांकि इसका इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक से परामर्श जरूर लें. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Baghpat,Uttar Pradesh First Published : April 12, 2026, 18:50 IST
सागर में 20 फीट गहरे कुएं में गिरा चीतल:मर्गा दरारिया का मामला, वन विभाग ने रेस्क्यू कर बाहर निकाला, इलाज जारी

सागर जिले के गढ़ाकोटा क्षेत्र के ग्राम मुर्गा दरारिया में एक चीतल कुएं में गिर गया। करीब 20 फीट गहरे कुएं में वह पानी में तैरता नजर आया, जिसे देखकर ग्रामीणों में हलचल मच गई। चीतल को कुएं में गिरा देख ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही गढ़ाकोटा वन रेंज की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद रस्सियों की मदद से चीतल को सुरक्षित कुएं से बाहर निकाल लिया गया। गिरने से घायल हुआ चीतल कुएं में गिरने के कारण चीतल घायल हो गया। वन अधिकारियों ने उसे इलाज के लिए गढ़ाकोटा पशु चिकित्सालय भेजा है, जहां उसका उपचार जारी है। वन विभाग के अनुसार, चीतल के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
सिवनी में मादा तेंदुआ शावकों संग दिखी:पेंच टाइगर रिजर्व में पर्यटकों ने बनाएं VIDEO

सिवनी के पेंच टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को एक मादा तेंदुआ अपने दो शावकों के साथ दिखाई दी। यह दुर्लभ नजारा एक वन मार्ग पर हुआ, जिसका वीडियो रविवार को सामने आया है। देश-विदेश से आए पर्यटकों के लिए यह अनुभव बेहद खास रहा। जानकारी के अनुसार, सफारी के दौरान पर्यटकों की जिप्सी एक कच्चे वन मार्ग से गुजर रही थी। तभी मादा तेंदुआ और उसके दोनों शावक सड़क पार करते हुए जंगल की ओर बढ़ते नजर आए। इस दृश्य को देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। पेंच नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में फैला हुआ है। इसका कुछ हिस्सा महाराष्ट्र के नागपुर जिले तक भी विस्तृत है। पेंच नदी के नाम पर बने इस राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 1975 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला था, जिसे बाद में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।
निवाड़ी में ध्वज पूजन के साथ महायज्ञ की शुरूआत:22 अप्रैल से कथा और 1 मई को कन्या विवाह सम्मेलन होगा

निवाड़ी जिले के ग्राम कलुआ में श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ और कन्या विवाह सम्मेलन की तैयारी शुरू हो गई है। रविवार को झंडा पूजन (ध्वज पूजन) के साथ इस धार्मिक आयोजन की शुरुआत हुई। श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पंडितों ने मंत्र पढ़कर झंडे की स्थापना की। इस मौके पर गांव के सैकड़ों लोग मौजूद रहे और पूरे श्रद्धा भाव से पूजा में शामिल हुए। 22 अप्रैल से निकलेगी कलश यात्रा यह महोत्सव असली रूप में 22 अप्रैल से शुरू होगा। उस दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ गांव की गलियों में कलश यात्रा निकाली जाएगी और भागवत कथा की शुरुआत होगी। 10 दिनों तक चलेंगे धार्मिक कार्यक्रम यह महायज्ञ 10 दिनों तक चलेगा। इस दौरान हर दिन पूजा-पाठ, संतों के प्रवचन और भजन-कीर्तन होंगे। आयोजन में शामिल होने के लिए दूर-दूर से साधु-संत और श्रद्धालु गांव पहुंचेंगे। कन्या विवाह और भंडारे के साथ समापन इस महोत्सव का समापन 1 मई को होगा। आखिरी दिन यज्ञ की पूर्ण आहुति दी जाएगी, जिसके बाद कन्या विवाह सम्मेलन होगा। इसमें गरीब और जरूरतमंद बेटियों की शादी करवाई जाएगी। साथ ही एक विशाल भंडारा भी होगा, जिसमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
Health Tips: छूते ही जलन, लेकिन फायदे हैरान कर देंगे! गजब है बिच्छू बूटी गठिया से लेकर पथरी तक में देती है राहत

Last Updated:April 12, 2026, 17:53 IST Bichchu Booti Health Benefits: पहाड़ों में पाई जाने वाली बिच्छू बूटी आयुर्वेद का एक अनमोल खजाना है. यह चमत्कारी पौधा गठिया (अर्थराइटिस), मांसपेशियों के दर्द और किडनी की पथरी जैसी गंभीर समस्याओं में रामबाण की तरह काम करता है. विटामिन और पोषक तत्वों से भरपूर इस बूटी का सही इस्तेमाल शरीर को लंबे समय तक निरोग रख सकता है. हालांकि, इसके उपयोग को लेकर कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. जानिए कैसे यह साधारण सी दिखने वाली बूटी आपकी सेहत के लिए वरदान साबित हो सकती है. बागपत: प्रकृति ने हमें अपने खजाने से कई ऐसी जड़ी-बूटियां दी हैं, जो बड़ी से बड़ी बीमारियों को मात देने की ताकत रखती हैं. इन्हीं में से एक है बिच्छू बूटी. पहाड़ों की दुर्गम वादियों में मिलने वाला यह पौधा आज के समय में किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है. आयुर्वेद में इसे एक चमत्कारी औषधि का दर्जा दिया गया है, जो शरीर के कई रोगों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है. घने पहाड़ों के बीच उगने वाली यह बूटी अपनी खास खूबियों के कारण काफी पसंद की जाती है. पोषक तत्वों का भंडार है यह पहाड़ी औषधिआयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर राघवेंद्र चौधरी ने इस बूटी के बारे में बताया कि बिच्छू बूटी आयरन और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है. यही वजह है कि यह हड्डियों को लोहे जैसी मजबूती देने का काम करती है. अगर आप अर्थराइटिस यानी गठिया के पुराने दर्द से परेशान हैं या आपकी मांसपेशियों में अक्सर खिंचाव और तकलीफ रहती है, तो बिच्छू बूटी आपके लिए बेहद असरदार साबित हो सकती है. किडनी की पथरी को बाहर निकालने में मददगारसिर्फ हड्डियों का दर्द ही नहीं, बल्कि यह बूटी शरीर के अंदरूनी अंगों की सफाई में भी कमाल का काम करती है. बिच्छू बूटी में विटामिन A, C और K भरपूर मात्रा में पाया जाता है. डॉक्टर के अनुसार, इसका सही तरीके से उपयोग करने पर गुर्दे (किडनी) में होने वाली पथरी को आसानी से गलाकर शरीर से बाहर निकाला जा सकता है. इसके साथ ही, यह पेशाब से जुड़ी समस्याओं (यूरिन इन्फेक्शन आदि) में भी तेजी से राहत पहुंचाने का काम करती है. चाय और सूप के जरिए भी ले सकते हैं फायदेइस चमत्कारी बूटी को डाइट में शामिल करना भी काफी आसान है. डॉक्टर राघवेंद्र चौधरी बताते हैं कि बिच्छू बूटी का इस्तेमाल आप कई तरह से कर सकते हैं. आप इसकी हर्बल चाय बनाकर पी सकते हैं, या फिर इसका गरमा-गरम सूप बनाकर डाइट में शामिल कर सकते हैं. इतना ही नहीं, कुछ लोग इसे सब्जी में डालकर भी इस्तेमाल करते हैं. अफ्रीका के पहाड़ों से लेकर भारत के पहाड़ी इलाकों तक मिलने वाली यह औषधि अब बाजार में भी आसानी से उपलब्ध होने लगी है. बरतना न भूलें ये जरूरी सावधानीबिच्छू बूटी जितनी फायदेमंद है, इसका इस्तेमाल करते समय उतनी ही सावधानी की भी जरूरत होती है. डॉक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस औषधि का गलत तरीके से या जरूरत से ज्यादा उपयोग करने पर शरीर में इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है. इसलिए, जब भी आप इस पहाड़ी बूटी का सेवन शुरू करें, तो पहले किसी अनुभवी चिकित्सक या एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Baghpat,Uttar Pradesh First Published : April 12, 2026, 17:53 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
आशा भोसले ने राजस्थानी फिल्मों में भी गाए थे गाने:शब्दों की ट्रेनिंग हुई, डायरेक्टर ने 25 हजार बोलकर 7 हजार दिए फिर भी कुछ नहीं बोलीं

सिंगर आशा भोसले का शुक्रवार को 92 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कई भाषाओं में गाने गए। इनमें से राजस्थानी भी एक है। उन्होंने अपने करियर में 14 राजस्थानी फिल्मों के 45 गाने गाए। 8 से ज्यादा राजस्थानी भजनों को भी अपनी आवाज दी। वहीं, 2019 में वे जयपुर में हुए एक कार्यक्रम में भी आई थीं। जहां उन्होंने गीतकार प्रसून जोशी के साथ अपने दिल की बात की थी। आशा भोसले को याद करते हुए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- मेरी राजस्थानी फिल्म के लिए उन्होंने गाना गाया था। गाने से पहले मुंबई में राजस्थानी शब्दों को लेकर उनकी ट्रेनिंग हुई। इसके लिए मैंने उन्हें सिर्फ 7 हजार रुपए दिए थे, लेकिन उन्होंने बिना रोक टोक के वो ले लिए। जानिए कैसे राजस्थानी फिल्मों में शुरू हुआ आशा भोसले का सफर… राजस्थानी फिल्मों में आशा भोसले की गायकी का श्रेय संगीतकार पंडित शिवराम को जाता है। उन्होंने 1961 में फिल्म ‘बाबासा री लाडली’ में आशाजी से पहली बार राजस्थानी भाषा में पांच गीत गवाए। इनमें ‘ओ रंग रंगीलो आलीजो…’, ‘बोल पंछीड़ा रे…’, ‘सूती थी रंग म्हैल में…’ और महेंद्र कपूर के साथ सुपरहिट डुएट ‘हिवड़ै सूं दूर मत जा….’ गीत गाए। इसके बाद ‘नानीबाई को मायरो’ में भी आशाजी ने अपनी आवाज दी। इसमें “म्हारो छैलभंवर केसरियो बनड़ो…” और “म्हाने चूनड़ी ओढ़ाजा…” जैसे गीत लोकप्रिय हुए। कभी रीजनल के रूप मे नहीं देखा राजस्थानी फिल्म विशेषज्ञ एमडी सोनी ने बताया- उस दौर में आशाजी ने ‘धणी लुगाई’, ‘गणगौर’, ‘गोपीचंद भरथरी’ और ‘ढोला मरवण’ जैसी फिल्मों में भी अपनी गायकी से चार चांद लगाए। राजस्थानी सिनेमा के दूसरे दौर में संगीतकार नारायण दत्त ने फिल्म ‘म्हारी प्यारी चनणा’ (1983) के सभी आठ गीत आशाजी से गवाकर इतिहास रच दिया। इनमें ‘सावण आयो रे…’, ‘चांदड़लो चढ़ आयो गिगनार…’ और ‘झिरमिर झिरमिर रे…’ जैसे गीत श्रोताओं की जुबां पर कई साल तक रहे। आशा भोसले ने कभी राजस्थानी सिनेमा को रीजनल के रूप में नहीं देखा, वे हमेशा अच्छी कंपोजिशन के साथ जुड़ना चाहती थीं। 14 राजस्थानी फिल्मों में 45 गाने गाए इसके बाद ‘थारी म्हारी’, ‘घर में राज लुगायां को’, ‘चूनड़ी’, ‘बेटी हुई पराई रे’, ‘बीनणी होवै तो इसी’ और ‘राधू की लिछमी’ (1996) जैसी फिल्मों में भी उनकी आवाज ने राजस्थानी सिनेमा को समृद्ध किया। कुल मिलाकर 14 फिल्मों में करीब 45 गीतों को आशाजी ने अपनी आवाज दी। फिल्मों के अलावा आशाजी ने राजस्थानी भजनों में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। वर्ष 1981 में जारी एलपी रिकॉर्ड ‘म्हारा थे ही धणी हो गोपाल’ को मास्टरपीस माना जाता है, जिसमें गीतकार भरत व्यास के लिखे भजनों को उन्होंने अपनी आवाज दी। गाने के लिए दिए थे सात हजार रुपए राजस्थानी एक्टर-डायरेक्टर क्षितिज कुमार ने बताया- 1996 में आई मेरी राजस्थानी फिल्म राधू की लक्ष्मी का गाना ‘रात ढलती जाए’ आशा जी ने गाया था। आरडी बर्मन साहब की डेथ हो गई थी, उसी समय में आशाजी से मिलने के लिए डेट ले रहा था। एक महीने बाद उनकी तरफ से समय दिया, जब वहां गया तो मैंने इस गाने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पूछा- क्या यह बच्चों का गाना है। मैंने मना कर दिया। हारमोनियम पर गाकर बताया तो वे गाने की कंपोजिशन से बेहद प्रभावित हुईं। इस गाने पर दो घंटे तक हमारी बातचीत चली। मुम्बई में ही इसे रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने एक-एक शब्द की जानकारी ली। घर पर कई दिनों तक राजस्थानी शब्दों की ट्रेनिंग भी हुई। कंपोजिंग पसंद आ जाती तो वह किसी भी इंडस्ट्री को छोटा बड़ा नहीं समझती। रिेकॉडिंग के बाद मुझे कहा- तुम मुम्बई में नए हो, किसी प्रकार की कोई परेशानी हो तो सीधे बताना। अब मैं आपको एक रोचक बात बताता हूं। इस गाने के लिए हमारी 25 हजार पर बात हुई थी, लेकिन मैंने सात हजार रुपए ही दिए। उन्होंने बिना किसी रोक-टोक के वह ले लिए। गाने की दी सहमति, रिकॉर्ड नहीं करने का मलाल वीणा म्यूजिक के डायरेक्टर केसी मालू ने बताया- मैं गाना उनके साथ करना चाहता था। इसी सिलसिले में आशाजी से मिलने भी गया था। उन्होंने राजस्थानी गाने के लिए हामी भी भरी थी, लेकिन मैं ही गाना तैयार नहीं कर पाया। उन्होंने मुझे बताया कि जयपुर से महिपाल और भरत व्यास उनके मित्र थे। आशाजी ने ही मुझे बताया था कि राजस्थानी में आठ भजन उन्होंने गाए थे। मैं यह सुनकर हैरान था। ये भजन भरत व्यास ने लिखे थे। उन्होंने कहा कि आशाजी के हामी भरने के बाद भी मैं काम नहीं कर पाया। मैं उनके लिए गाना बनवा नहीं पाया। इसका आज तक अफसोस रहेगा। उन्होंने कई राजस्थानी फिल्मों में गाने गाए है। जब भी किसी ने गाने के लिए कहा, किसी को उन्होंने कभी मना नहीं किया। हमारी मैग्जीन स्वर सरिता लगातार पढ़ती थीं, उसी आधार पर मेरी मुलाकात हुई थी। ये भी पढ़ें… दोस्तों ने रुपए दिए, घर से भागकर मुंबई गए असरानी:जयपुर में काम किया, अजमेर में कहा था- सिंधी ने कभी भी भीख नहीं मांगी बॉलीवुड के हास्य अभिनेता असरानी का मुंबई में निधन हो गया। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और कला के प्रति गहरी लगन की मिसाल रहा है। उनका असली नाम गोवर्धन असरानी था। वे एक मध्यमवर्गीय सिंधी परिवार से थे। उनके पिता भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से जयपुर आ बसे और यहां कालीन की दुकान खोली। (पूरी खबर पढ़ें)
कांग्रेस बोली-सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती:जयराम रमेश ने कहा- महिला आरक्षण में बदलाव से देश को गुमराह किया जा रहा

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है। साथ ही महिला आरक्षण कानून में बदलाव के जरिए देश को गुमराह कर रही है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन की बात कर रही है। यह तर्क दे रही है कि जाति जनगणना के नतीजे आने में समय लगेगा। लेकिन बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने 6 महीने से कम समय में जाति सर्वे पूरा किया है। उन्होंने कहा कि ये सरकार का छिपा हुई एजेंडा है। सरकार का असल मकसद जाति जनगणना नहीं कराना है। अनुच्छेद 334-A में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने को जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है। सरकार अब इसे अलग करने की कोशिश कर रही है, ताकि इसे जल्द लागू किया जा सके। जयराम रमेश ने पोस्ट में चार मुख्य सवाल उठाए… महिला आरक्षण बिल के लिए 3 दिन का विशेष सत्र जयराम रमेश का बयान ऐसे समय आया है, जब 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र प्रस्तावित है। इसमें महिला आरक्षण कानून लागू करने और लोकसभा सीटें बढ़ाने से जुड़े बिल लाए जा सकते हैं। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। 1 अप्रैल से जनगणना का पहला फेज शुरू हुआ जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से शुरू हुआ। यह 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। जनगणना के पहले फेज में ‘हाउस लिस्टिंग’ यानी मकानों की गिनती की जा रही है। दूसरा फेज ‘जनसंख्या गणना’ फरवरी 2027 में होगा। इसमें लोगों से उनकी जाति पूछी जाएगी। आजादी के बाद पहली बार जाति का डेटा जुटाया जाएगा। इससे पहले 1931 में ऐसा हुआ था। पहली बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से होगी। कर्मचारी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा सीधे अपने स्मार्टफोन पर कलेक्ट करेंगे। जनगणना करने वाले आपसे कुल 33 सवाल पूछेंगे। ————- ये खबर भी पढ़ें… BJP ने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया:16-18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहना होगा; महिला आरक्षण के लिए विशेष सत्र; PM ने पत्र लिखा BJP ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों को 3 लाइन का व्हिप जारी कर 16 से 18 अप्रैल तक संसद में मौजूद रहने को कहा है। इस दौरान किसी को भी छुट्टी नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई थी। पूरी खबर पढ़ें…
2 एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल जली:उमरिया में टूटी 11 केवी लाइन से भड़की आग, ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

उमरिया जिले की चंदिया तहसील के मझगंवा गांव में गेहूं के खेत में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप ले लिया और कई किसानों की तैयार खड़ी 2 एकड़ की फसल को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते, काफी नुकसान हो चुका था। इस हादसे में किसान सोनेलाल, दादुराम, कल्ली बाई, भीम्मा और धोरी लाल की गेहूं की फसल पूरी तरह जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। बिजली विभाग की लापरवाही पर गुस्सा गांव के रहने वाले विजय ने बताया कि खेत के पास से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन का तार टूटकर जमीन पर पड़ा था। माना जा रहा है कि इसी तार से निकली चिंगारी की वजह से फसल में आग लगी। ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर बिजली विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। फायर ब्रिगेड ने पाया काबू सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि, जब तक आग बुझती, तब तक बड़े इलाके की फसल जल चुकी थी। मुआवजे की मांग अपनी मेहनत की कमाई आंखों के सामने जलता देख किसानों में गहरा दुख और गुस्सा है। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि बिजली कंपनी की लापरवाही की जांच की जाए और उन्हें हुए भारी नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।








