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होंडा-निसान घाटे की ओर बढ़ रही‎:ट्रम्प टैरिफ और चीनी कारों से‎ जापानी ऑटो इंडस्ट्री खतरे में‎

होंडा-निसान घाटे की ओर बढ़ रही‎:ट्रम्प टैरिफ और चीनी कारों से‎ जापानी ऑटो इंडस्ट्री खतरे में‎

पिछले माह होंडा के चीफ मिबे तोशिहिरो ने‎एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कंपनी 1957 ‎के बाद पहली बार घाटा उठाने की ओर बढ़ रही ‎‎है। उन्होंने नाकामी की जिम्मेदारी लेते हुए ‎अपनी और अपने डिप्टी की तनख्वाह में‎ 30% कटौती की जानकारी दी। हालांकि होंडा ‎‎गंभीर मुश्किलों का सामना कर रही अकेली ‎‎जापानी कार कंपनी नहीं है। पिछले सप्ताह मिबे‎ने आगाह किया कि जापान की ऑटोमोबाइल ‎‎इंडस्ट्री अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। ‎‎अमेरिका में आयातित कारों पर 25% टैरिफ‎ से इंडस्ट्री का मुनाफा घटा है। सबसे अधिक ‎‎असर चीनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों ने डाला है।‎ बिक्री के हिसाब से दुनिया की छठी बड़ी ‎‎कंपनी निसान में लगातार दूसरे साल कटौती‎ चल रही है। 2028 तक सात फैक्ट्रियां बंद ‎करने की योजना है। 2019 में दुनियाभर में‎ कारों की बिक्री में जापानी कार कंपनियों का ‎‎हिस्सा 31% था। यह पिछले साल गिरकर ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎26% हो गया। वहीं दक्षिण पूर्व एशिया में‎ मार्केट शेयर 2023 के 68% से गिरकर‎ 2025 में 57% रह गया। पड़ोस में बढ़ रही ईवी‎ पिछले साल ग्लोबल कार मार्केट में हाईब्रिड‎ सहित 26% इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री हुई‎ थी। यह 2019 से 3% अधिक है। जापान के पड़ोस में बिक्री अधिक है। पिछले साल ‎एशिया में बिकी एक तिहाई कारें इलेक्ट्रिक हैं।‎

नवविवाहिता ने सुसाइड से पहले बनाए VIDEO:बोली- मैं ऐसे लोगों के बीच नहीं जी सकती, सास ने शरीर पर जो खरोंचें मारी

नवविवाहिता ने सुसाइड से पहले बनाए VIDEO:बोली- मैं ऐसे लोगों के बीच नहीं जी सकती, सास ने शरीर पर जो खरोंचें मारी

बालाघाट में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका प्रशांति पति ललित राणा ने आत्महत्या से पहले दो वीडियो बनाए थे, जिनमें उसने अपनी सास पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। ये वीडियो रविवार को सामने आए। यह घटना शनिवार को नवेगांव में हुई। पति ललित राणा ने पुलिस को बताया कि प्रशांति ने अपने बेडरूम में फांसी लगाकर आत्महत्या की है। एक वीडियो में प्रशांति रोते हुए कह रही है कि उसकी सास उसे बहुत परेशान करती थी, कपड़ों से लेकर हर बात पर। उसने बताया कि जब वह आठ महीने की गर्भवती थी, तब भी सास उसे मारने दौड़ी थी। प्रशांति ने कहा, “मैं ऐसे लोगों के बीच नहीं जी सकती। मेरे शरीर पर जो खरोंचें हैं, वह मेरी सास ने मारी हैं।” 56 सेकंड के दूसरे वीडियो में प्रशांति ने बताया कि वह बहुत परेशान है और उसकी सास उसे प्रताड़ित करती है। उसने कहा कि पुराने सूट पहनने को लेकर सास ने उसे ताना मारा कि वह उसके बेटे के पैसे उड़ाती है। प्रशांति ने वीडियो में कहा, “मैं सुसाइड करने जा रही हूं, मैं अब नहीं जी सकती। शादी के चार साल होने को आए लेकिन इन्होंने मुझे हर समय परेशान किया। जा रही हूं, बाय।” यह वीडियो उसने अपने मासूम बेटे को गोद में लेकर बनाया था। जानकारी के अनुसार, लालबर्रा थाना क्षेत्र के बल्लारपुर निवासी प्रशांति उर्फ मोनिका का विवाह लगभग 3 वर्ष पूर्व नवेगांव निवासी ललित राणा के साथ हुआ था। उनकी एक वर्षीय बेटी गायत्री भी है। प्रशांति की मौत से नाराज परिजनों ने अस्पताल में पति ललित राणा के परिचित की कार में तोड़फोड़ की और उसके साथ मारपीट भी की। इस घटना के बाद अस्पताल में घंटों तक गहमागहमी का माहौल रहा। बाद में प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक पदाधिकारियों की समझाईश पर मायके पक्ष वाले माना और मृतिका प्रशांति का पीएम कराया गया था। जिसके बाद पुलिस सुरक्षा में उसका अंतिम संस्कार किया गया था। इस मामले में मृतिका के पिता रेवनलाल पटले ने बताया कि बेटी को दामाद और सास, मायके से दहेज लाने के लिए परेशान करते थे। बीच में हमने एक लाख रूपए भी दिए थे। पिता का आरोप है कि बेटी की हत्या की गई है। जिसके जिम्मेदार, उसकी सास और पति है। सीएसपी मयंक तिवारी ने बताया कि मामले में परिजनो के बयान दर्ज किए जा रहे है, जिसके बाद मामले में प्रकरण दर्ज कर अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।

क्या डेंगू और चिकनगुनिया के एक ही लक्षण होते हैं, दोनों में क्या है फर्क? जानिए बचाव के घरेलू उपाय

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मच्छरों के काटने से कई गंभीर रोग होते हैं जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया. कब संक्रमित मच्छर आपको काट ले, ये पता ही नहीं चलता है. एक दिन अचानक आपको तेज बुखार, कपकपी, सिहरन, सिर दर्द, आंख दर्द, बदन दर्द की समस्या शुरू हो जाती है. संक्रमित मच्छरों के काटने के कई दिनों बाद ये लक्षण नजर आते हैं. डेंगू, चिकनगुनिया के लक्षण लगभग एक से होते हैं, ऐसे में ये समझ नहीं आता है कि आखिर आपको क्या हुआ है. लगातार दो-तीन दिन तेज बुखार रहने पर ही आमतौर पर लोग डॉक्टर के पास जाते हैं, लेकिन एक बात याद रखें कि डेंगू हो या चिकनगुनिया, इनमें काफी तेज बुखार होता है. 103-104 डिग्री सेल्सियस बुखार आता-जाता रहता है. दवा खाने के 3-4 घंटे में ही दोबारा बुखार चढ़ जाता है. ऐसे में आपको कभी इतनी हाई फीवर हो या कोई अन्य लक्षण नजर आए तो कैसे पहचाने कि आपको डेंगू हुआ है या चिकनगुनिया? यहां जानें डेंगू और चिकनगुनिया में अंतर, इनमें नजर आने वाले लक्षणों के बारे में… डेंगू और चिकनगुनिया में क्या है फर्क?चिकनगुनिया और डेंगू दोनों ही मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारी है, जिसमें यदि आपने लापरवाही बरती तो जान भी जा सकती है. अक्सर लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग वायरस से होने वाली बीमारियां हैं. इनके लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं, लेकिन कुछ लक्षण अलग भी नजर आते हैं. सही समय पर पहचान कर लें, तो इलाज काफी आसान हो सकता है. मरीज जल्दी ठीक हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. क्या है डेंगू?डेंगू एक वायरल बीमारी है. इसमें अचानक तेज बुखार आता है, जो 102 से 104 डिग्री तक पहुंच जाता है. इसके लक्षणों में तेज सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी महसूस होना, गंभीर होने पर शरीर पर लाल चकत्ते भी हो जाते हैं. कुछ लोगों को उल्टी, जी मिचलाना और भूख न लगने की भी समस्या होती है. मुख्य बात ये है कि इसमें मरीज का प्लेटलेट्स काउंट कम होने लगता है. नॉर्मल रूप से प्लटेलेट्स काउंट डेढ़ लाख से ऊपर होना चाहिए, लेकिन डेंगू में जब यह घट कर 20 हजार पहुंच जाए तो ये घातक हो सकता है. इसमें तुरंत हॉस्टिपल एडमिट कराने की जरूरत होती है वरना मरीज की जान जा सकती है. प्लेटलेट्स कम होने पर शरीर कमजोर हो सकता है. गंभीर स्थिति में खून बहने का खतरा भी रहता है. क्या है चिकनगुनिया?चिकनगुनिया होने पर भी बुखार बहुत हाई रहता है, लेकिन इसमें जोड़ों में तेज दर्द होता है. यह दर्द इतना ज्यादा हो सकता है कि मरीज को चलने-फिरने में भी परेशानी हो जाती है. हाथ, पैर, घुटने और टखनों में सूजन और अकड़न हो सकती है. कई लोगों को थकान, सिर दर्द, उल्टी और हल्के दाने भी हो जाते हैं. चिकनगुनिया में बुखार ठीक होने के बाद भी जोड़ों का दर्द हफ्तों या महीनों तक रह सकता है, जो इसे डेंगू से अलग बनाता है. कैसे करें बचावडेंगू और चिकनगुनिया से बचने के लिए तरीके लगभग एक जैसे ही होते हैं. इसके लिए आप मच्छरों से पहले अपने परिवार के सदस्यों को बचाकर रखें. आपका घर पार्क के पास है या घर के बाहर नाला है, जहां मच्छर बहुत पनपते हैं, तो रात में मच्छरदानी लगाकर सोएं. घर के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि ये मच्छर पानी में ही पैदा होते हैं. कूलर, गमले, टायर और बाल्टी में पानी न रुकने दें. डेंगू और चिकनगुनिया के मच्छर दिन में अधिक एक्टिव रहते हैं और काटते हैं, इसलिए शरीर को कवर करके रखें. मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का इस्तेमाल करें. डेंगू, चिकनगुनिया से बचने के घरेलू उपायघरेलू उपायों की बात करें तो शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी है.डेंगू होने पर शरीर को हाइड्रेटेड रखें. पानी खूब पिएं. नारियल पानी और ओआरएस लें ताकि शरीर में कमजोरी न आए.डेंगू में पपीते के पत्तों का रस पीने से लाभ होता है.हल्का और सुपाच्य खाना खाएं. अधिक तेल मसालेदार वाली चीजों, बाहर के फूड्स को अवॉएड करें.चिकनगुनिया में हल्दी वाला दूध पिएं. गर्म सिकाई जोड़ों के दर्द में राहत देती है.डेंगू हो या चिकनगुनिया, दोनों के होने पर भरपूर आराम करें.बुखार लगातार 2-3 दिन से ज्यादा रहे, तो डॉक्टर से जरूर दिखाएं.शरीर में बहुत ज्यादा दर्द हो, उल्टी बार-बार हो, खून निकलने जैसे लक्षण नजर आएं तो गलती से भी इग्नोर न करें.खुद से कोई भी दवाई ना खाते रहें वरना खतरनाक साबित हो सकता है.

gym heart attack reason: कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया जिम में हार्ट अटैक का कारण, दी मेंबरशिप से पहले 2 टेस्ट कराने की सलाह

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Last Updated:April 11, 2026, 17:08 IST Heart Attacks in Gym: जिम में वर्कआउट अब फिटनेस से ज्यादा शॉ आफ बन गया है. रील को वायरल करने के लिए लोग अपनी बॉडी की कपेसिटी से ज्यादा वेट लिफ्टिंग कर रहे हैं. कार्डियोलॉजिस्ट ने इसे ईगो लिफ्टिंग बताते हुए जिम में हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण बताया है. ऐसे में यहां बताए गए लक्षणों और बचाव के उपायों को ध्यान में रखना जरूरी है. ख़बरें फटाफट Gym Heart Attack Reason: आजकल जिम जाना सिर्फ सेहत की जरूरत नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल स्टेटमेंट बन गया है. लेकिन पिछले कुछ समय में जिम के फर्श पर गिरते और दम तोड़ते युवाओं की खबरों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या हम फिट होने के चक्कर में खुद को खत्म कर रहे हैं? न्यूज 18 की इस खास रिपोर्ट में विशेषज्ञों से समझिए कि आखिर गलती कहां हो रही है. हार्ट डिजीज स्पेशलिस्ट डॉ. रिपेन गुप्ता, वाइस चेयरमैन एवं यूनिट हेड – कार्डियोलॉजी, मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत का मानना है कि युवाओं में बढ़ता ‘ईगो लिफ्टिंग’ (दूसरों को देखकर क्षमता से अधिक वजन उठाना) का चलन सबसे खतरनाक है. सोशल मीडिया के लिए रील बनाने के चक्कर में युवा अपनी सीमाओं को पार कर रहे हैं. ज्यादा वेट उठाने का शरीर पर असरएक्सपर्ट बताते हैं कि जब आप अचानक भारी वजन उठाते हैं, तो ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ता है, जिससे दिल की धमनियों में दरार आ सकती है और अचानक हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट हो सकता है. क्यों फेल हो रहा है युवाओं का दिल?– बिना जांच के भारी वर्कआउट. ज्यादातर युवा जिम जॉइन करने से पहले बेसिक हार्ट चेकअप नहीं कराते. कई लोगों को जन्मजात दिल की बीमारियां होती हैं जो सामान्य जीवन में पता नहीं चलतीं, लेकिन भारी एक्सरसाइज के दौरान ‘ट्रिगर’ हो जाती हैं. – शॉर्टकट का लालच. रातों-रात मसल्स बनाने के लिए सप्लीमेंट्स, फैट बर्नर और स्टेरॉयड का बढ़ता इस्तेमाल दिल की धड़कन को बिगाड़ता है. -नींद और रिकवरी की कमी. दिन भर की नौकरी का तनाव, रात को देर तक जागना और फिर सुबह उठकर बिना रिकवरी के इंटेंस वर्कआउट करना. ऐसे में थकान के कारण दिल पर प्रेशर पड़ता है, जिससे वो बर्दास्त नहीं कर पाता है. कोविड का साइड इफेक्टडॉक्टर्स चेतावनी दे रहे हैं कि कोविड के बाद कई लोगों की नसों में खून के थक्के जमने या दिल की मांसपेशियों में सूजन की समस्या देखी गई है. ऐसे में बिना ‘ग्रैजुअल प्रोग्रेस’ के भारी जिमिंग जानलेवा साबित हो रही है. क्या हैं खतरे के संकेत? वर्कआउट के दौरान अगर शरीर ये इशारे दे, तो उसे ‘चुनौती’ न समझें, बल्कि तुरंत रुक जाएं-– सीने के बीचों-बीच दबाव या जलन महसूस होना.– बहुत ज्यादा पसीना आना और अचानक घबराहट होना.– गर्दन, जबड़े या बाएं कंधे में खिंचाव महसूस होना.– आंखों के सामने अंधेरा छाना या चक्कर आना. कैसे रहें सुरक्षित?अगर आप जिम की शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले कुछ हफ्ते केवल लाइट कार्डियो और बॉडी-वेट एक्सरसाइज करें. 30 की उम्र पार कर चुके हैं, तो जिम जाने से पहले एक TMT और ECG जरूर कराएं. जिम ट्रेनर के कहने पर कोई भी अनकही गोलियां या पाउडर न लें. किसी क्वालीफाइड न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह ही मानें. अगर किसी दिन नींद पूरी नहीं हुई या आप बीमार महसूस कर रहे हैं, तो उस दिन जिम स्किप करना ही समझदारी है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 11, 2026, 17:08 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

गर्मियों में दिल के मरीज जरूर खाएं ये 5 फल, हेल्दी रहेगा हार्ट, जानें क्या-क्या होंगे फायदे

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  Summer Fruits for healthy heart: गर्मियों के मौसम में शरीर को अंदर से हाइड्रेटेड, शीतल रखना जरूरी है. आग बरसाने वाली धूप, लू के थपेड़े न सिर्फ आपकी स्किन और बालों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि शरीर के अंदर के अंगों को भी हानि पहुंचाते हैं. अगर आप गर्मियों के सीजन में पर्याप्त लिक्विड डाइट नहीं लेते तो डिहाइड्रेशन हो सकता है. शरीर में पानी की कमी से आंतें, लिवर, किडनी सभी प्रभावित होते हैं. गर्मियों में कुछ खास अंगों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को भी अपनी डाइट पर ध्यान देना जरूरी होता है. बात करें हार्ट पेशेंट की तो उन्हें गर्मियों में कुछ फ्रू्ट्स जरूर खाएं. आप बेरीज खाएं जैसे स्ट्ऱॉबेरी, ब्लैक बेरी, ब्लू बेरी खाएं, क्योंकि ये सभी ब्लड प्रेशर, इंफ्लेमेशन को गर्मियों में कम करते हैं. इसके साथ ही खरबूज, तरबूजा, खीरा, ककड़ी, संतरा आदि पानी, विटामिन सी के साथ ही कई पोषक तत्वों से भरपूर फल खाएं. Dr Navin Agrawal नाम के यू्ट्यूब चैनल पर डॉ. नवीन बता रहे हैं कि गर्मियों में दिल के मरीजों को कौन-कौन से फल खाने चाहिए, इनके फायदे क्या हैं और इन्हें किस तरीके से डाइट में शामिल करें.

Pregnancy Care: गर्भवती महिलाएं सावधान!… प्रेगनेंसी में कुछ भी खा लेना मां और शिशु, दोनों के लिए हो सकता है हानिकारक

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Last Updated:April 11, 2026, 16:35 IST Pregnancy Care: गर्भावस्था के दौरान, पोषण के स्रोतों के संबंध में सही चुनाव करना एक कुशल योजना का हिस्सा है यह न केवल मां के लिए, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए भी ज़रूरी है. खान-पान की गलत आदतों का शिशु के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है; इसलिए, सावधानी बरतना ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है. गर्भावस्था में मां जो खाना खाती है, उसका सीधा असर बच्चे की सेहत पर पड़ता है. इस समय गर्भवती महिलाओं को हेल्दी और सुरक्षित खाना खाना बहुत जरूरी है. क्योंकि खराब खाने की आदतें संक्रमण, जन्म दोष और दूसरी सेहत की समस्याएं पैदा कर सकती हैं. आज हम जानेंगे कि गर्भवती महिलाओं को क्या नहीं खाना चाहिए और कौन सा खाना सुरक्षित है. कच्चा या ठीक से पका हुआ खाना: गर्भावस्था में कच्चा या अधपका मांस, अंडा और सीफूड खाने से बचें. इनमें ऐसे बैक्टीरिया या परजीवी हो सकते हैं जो मां और बच्चे दोनों को संक्रमण दे सकते हैं. खासकर लिस्टेरिया और सैल्मोनेला जैसे संक्रमण भ्रूण में गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं. इसलिए हमेशा अच्छी तरह पका हुआ मांस ही खाएं. बहुत ज्यादा कैफीन और कोला ड्रिंक्स: गर्भावस्था में चाय, कॉफी और कोला जैसे कैफीन वाले पेय का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए. ज्यादा कैफीन लेने से पेट में पल रहे बच्चे की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है और समय से पहले डिलीवरी का खतरा बढ़ सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google शराब और सिगरेट: गर्भावस्था में शराब और सिगरेट से पूरी तरह दूर रहना चाहिए. क्योंकि शराब से होने वाले बच्चे में दिल की बीमारी या न्यूरोलॉजिकल समस्याएं जैसी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं. सिगरेट पीने से बच्चे का वजन कम हो सकता है और गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है. असुरक्षित डेयरी उत्पाद: बिना पाश्चराइज किया हुआ दूध, क्रीम और चीज़ से बचें. ये गर्भावस्था में संक्रमण का कारण बनने वाले बैक्टीरिया हो सकते हैं. हमेशा प्रोसेस्ड और अच्छी क्वालिटी के डेयरी उत्पाद ही चुनें. बहुत ज्यादा तेल वाला और अनहेल्दी खाना जैसे तला हुआ खाना, फास्ट फूड और ज्यादा मसालेदार चीजें गर्भावस्था में आपके लिए नुकसानदायक हैं. ये खाने पेट की समस्या, एसिडिटी और मोटापे की परेशानी बढ़ा सकते हैं. बहुत ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड शुगर: ज्यादा शुगर खाने से गर्भावस्था में डायबिटीज या बच्चे का वजन असामान्य रूप से बढ़ सकता है. इसलिए मीठी चीजें और पैक्ड फूड कम ही खाएं. कुछ फल और जड़ी-बूटियां: कुछ जड़ी-बूटियां और खट्टे फल होने वाले बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. इसलिए डॉक्टर से सलाह लिए बिना कोई जड़ी-बूटी (आयुर्वेदिक) दवा न लें. गर्भावस्था में संतुलित और पौष्टिक खाना खाना बहुत जरूरी है. इसलिए कच्चा खाना, शराब, फास्ट फूड और ज्यादा कैफीन से बचें. हमेशा ताजा, साफ और पौष्टिक खाना ही खाएं. इससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहेंगे और गर्भावस्था की समस्याएं भी कम होंगी. (डिस्क्लेमर: यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध रिपोर्ट्स और जानकारी पर आधारित है. इसका News18 से कोई संबंध नहीं है और News18 इसके लिए किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं है.) First Published : April 11, 2026, 16:29 IST

दिल्ली में 50 हजार की इनामी महिला ड्रग तस्कर अरेस्ट:पुलिस ने 200 CCTV और 100 मोबाइल खंगाले; 11 केस दर्ज; अपराध में बेटियां भी शामिल

दिल्ली में 50 हजार की इनामी महिला ड्रग तस्कर अरेस्ट:पुलिस ने 200 CCTV और 100 मोबाइल खंगाले; 11 केस दर्ज; अपराध में बेटियां भी शामिल

दिल्ली पुलिस ने शाहदरा से ‘ड्रग्स क्वीन’ के नाम से मशहूर कुसुम को अरेस्ट किया। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम था। शाहदरा पुलिस के मुताबिक, वह दो महीने से कुसुम की तलाश कर रही थी और गुरुवार को जब वह शाहदरा आई, तो पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। मीडिया को जानकारी शनिवार को दी। इसे अरेस्ट करने के लिए पुलिस ने 200 से अधिक CCTV और 100 से ज्यादा मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड तलाशे। कुसुम पर 2003 से 2024 के बीच NDPS एक्ट (ड्रग्स से जुड़े मामलों) के तहत 11 केस दर्ज हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि कुसुम लगातार ठिकाने बदलती रहती थी। कई बार पुलिस के पहुंचने से कुछ मिनट पहले ही वह फरार हो जाती थी। वह स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करती थी और बार-बार सिम कार्ड बदलती रहती थी। बेटियां भी ड्रग्स व्यापार में शामिल ड्रग्स के व्यापार में कुसुम के साथ उसकी बेटियां भी शामिल थीं। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी बेटियां दीपा और चीकू को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। इसके अलावा उसका भाई हरिओम और सहयोगी रवि भी उसके साथ पकड़े गए। कुसुम ने दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके से छोटे स्तर पर ड्रग्स बेचने का काम शुरू किया था। रोहिणी कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित किया था। कुसुम दिल्ली से कई राज्यों में ड्रग्स का नेटवर्क चला रही थी। गिरफ्तारी के बाद भी उसने भागने की कोशिश की, लेकिन उसे पकड़ लिया गया। NDPS एक्ट के तहत 20 साल तक की सजा NDPS एक्ट (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985) के जरिए नशीली दवाओं और ड्रग्स के सेवन, उत्पादन, बिक्री और तस्करी पर कार्रवाई की जाती है। ये कानून गांजा, अफीम,चरस और हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों पर पूरी तरह पाबंदी लगाता है। इस कानून तहत दोषी साबित होने तक निर्दोष मानने के बजाय, यह मान लिया जाता है कि आरोपी को नशीले पदार्थ की जानकारी थी, और खुद को बेगुनाह साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी की होती है। NDPS एक्ट के तहत 1 साल से 20 साल की जेल, जुर्माना और फांसी की सजा हो सकती है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… पंजाब में CCTV, लाइव फीड पाकिस्तान में दिख रही:दिल्ली पुलिस ने 11 आरोपी पकड़े, ISI एजेंटों ने सैन्य ठिकानों के पास लगवाए थे कैमरे पंजाब में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) के इशारे पर सेना और बीएसएफ के संवेदनशील ठिकानों की जानकारी इस्लामाबाद भेजने वाले 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एजेंटों ने पंजाब के सैन्य और संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी लगा रखे थे। इसका लाइव फुटेज पाकिस्तान भेजा जा रहा था। पूरी खबर पढे़ं…

महाराष्ट्र के मंत्री का हेलिकॉप्टर कार पार्किंग में उतरा:पायलट ने गलती से हेलिपैड से 1km दूर लैंडिग की; भुजबल पुणे में पहुंचे थे

महाराष्ट्र के मंत्री का हेलिकॉप्टर कार पार्किंग में उतरा:पायलट ने गलती से हेलिपैड से 1km दूर लैंडिग की; भुजबल पुणे में पहुंचे थे

महाराष्ट्र में मंत्री छगन भुजबल के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग एक कार पार्किंग में हुई। पायलट ने गलती से हेलिकॉप्टर को हेलिपैड से करीब 1 किलोमीटर दूर एक पार्किंग में उतार दिया गया। यह जगह हेलिपैड के लिए तय नहीं थी, जिससे सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना उस समय हुई जब भुजबल पुणे में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। घटना की सटीक तारीख रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं बताई गई है। मंत्री के हेलिकॉप्टर की गलत जगह लैंडिंग ने सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने पायलट के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। इसी बीच, अधिकारियों ने कहा है कि इस मामले में पायलट की जिम्मेदारी तय की जाएगी। नियमों का पालन न करने को गंभीर चूक माना जा रहा है और पायलट के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस घटना के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर हेलिकॉप्टर तय जगह से हटकर दूसरी जगह क्यों उतरा। इससे पहले भी वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। ऐसे में इस तरह की घटना ने अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने या अन्य नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

यूएन प्रमुख की रेस में 4 नाम, 2 महिलाएं:जेल में पिटाई, बिजली के झटके सहे, नहीं झुकीं मिशेल; रेबेका ने अनाज संकट से बचाया

यूएन प्रमुख की रेस में 4 नाम, 2 महिलाएं:जेल में पिटाई, बिजली के झटके सहे, नहीं झुकीं मिशेल; रेबेका ने अनाज संकट से बचाया

संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में पहली बार शीर्ष पद पर महिला नेतृत्व की उम्मीद बनी है। मौजूदा प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल दिसंबर में खत्म होगा। इस बार चार उम्मीदवार शार्ट लिस्ट हुए हैं। इनमें दो महिलाएं मिशेल बैचलेट (74) व रेबेका ग्रिनस्पैन (70) हैं। न्यूयॉर्क में 21-22 अप्रैल को दोनों की डिबेट होगी। मिशेल चिली की पहली महिला राष्ट्रपति रहीं जबकि रेबेका कोस्टा रिका की उप राष्ट्रपति रह चुकी हैं। मिशेल – संसाधनों की कमी से मरीज को तड़पते देख डॉक्टरी की पढ़ाई की 1973 में चिली में जनरल ऑगस्टो पिनोशे ने सैन्य तख्तापलट किया, तब मिशेल पैडिएट्रिक्स की पढ़ाई कर रही थीं। उस दौरान राष्ट्रपति सल्वाडोर से करीबी संबंध के चलते मिशेल के परिवार को बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं। जेल में हाथ बांध लात-घूसे मारे गए। तब बंदियों को लोहे की ग्रिल से बिजली के झटके तक दिए जाते। यातनाओं से पिता की मौत के बाद भी मिशेल नहीं झुकीं। स्वास्थ्य मंत्री व रक्षा मंत्री के बाद 2006 में पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। तब शॉपिंग के लिए मॉल जाती तो प्रशंसक घेर लेते। उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई का फैसला क्लीनिक में संसाधनों की कमी से तड़पते मरीज को देखकर ली। रेबेका – एक कॉल से कोस्टा रिका के उपराष्ट्रपति पद तक पहुंची थीं 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होते ही वैश्विक खाद्य संकट गहराने लगा। यूक्रेन से गेहूं, मक्का, जौ का निर्यात ठप हुआ, दाम बढ़े व भुखमरी का खतरा पैदा हुआ। तब रेबेका यूएन व्यापार-विकास सम्मेलन की महासचिव थीं। उन्होंने मुख्य वार्ताकार बन रूस, तुर्किए व यूक्रेन में बातचीत कराई। नतीजा काला सागर से निर्यात का समझौता हुआ, जिससे 3.3 करोड़ टन अनाज बाजार पहुंचा। कीमतें 23% तक घटीं। उनकी राजनीति 80 के दशक में राष्ट्रपति ऑफिस से एक फोन कॉल से शुरू हुई, जिसने उन्हें आर्थिक सलाहकार बनाया फिर वित्त उप मंत्री होते हुए 1994 में मध्य अमेरिकी देश कोस्टा रिका की उपराष्ट्रपति बनीं।

बालाघाट में ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती मनाई:मरार माली समाज ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रैली निकाली

बालाघाट में ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती मनाई:मरार माली समाज ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रैली निकाली

बालाघाट में शनिवार को समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा राव फुले की 199वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर नगर के सरेखा चौक स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले और माता सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा पर सामाजिक लोगों ने माल्यार्पण किया। जयंती समारोह समिति ने आंबेडकर चौक से सरेखा चौक तक एक बाइक रैली निकाली। रैली से पहले समिति पदाधिकारियों ने आंबेडकर चौक पर झंडावंदन कर बाबा साहेब आंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले को नमन किया। मरार माली समाज के अध्यक्ष रमेश पंचे ने बताया कि ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती उनके जीवन समर्पण, त्याग और तपस्या की थीम पर मनाई जा रही है। सरेखा चौक पर प्रतिमा माल्यार्पण के बाद महात्मा फुले चौक से रैली निकाली गई। यह रैली हनुमान चौक, नया सराफा, सुभाष चौक, महावीर चौक, राजघाट चौक, काली पुतली होते हुए आंबेडकर चौक से रानी अवंतीबाई चौक पहुंची, जहां शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। रानी अवंतीबाई चौक पर मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें वक्ताओं ने ज्योतिबा फुले के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना में ज्योतिबा फुले का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने जाति प्रथा और छुआछूत के खिलाफ काम किया। वक्ताओं ने यह भी बताया कि महात्मा ज्योतिबा फुले ने देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर शिक्षा और समाज की उन्नति के लिए कार्य किया। उन्होंने ऐसे समय में शिक्षा की अलख जगाई, जब लड़कियों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल था। ज्योतिबा राव फुले के जयंती कार्यक्रम की अन्य तस्वीरें…