Thursday, 08 Oct 2026 | 10:27 PM

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अक्षय कुमार के इवेंट में बेकाबू भीड़, बड़ा हादसा टला:मॉल में फैंस एस्केलेटर पर चढ़े और जान जोखिम में डाली, सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल उठे

अक्षय कुमार के इवेंट में बेकाबू भीड़, बड़ा हादसा टला:मॉल में फैंस एस्केलेटर पर चढ़े और जान जोखिम में डाली, सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल उठे

अक्षय कुमार के इवेंट में फैंस की दीवानगी खतरनाक दिखी। शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा के गौर सिटी मॉल में फिल्म ‘भूत बंगला’ के प्रमोशन के दौरान हुई घटनाओं ने फैंस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए। अक्षय कुमार अपने को-स्टार्स राजपाल यादव और वामिका गब्बी के साथ प्रमोशन के लिए मॉल पहुंचे थे। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई। हालात बिगड़े और भगदड़ जैसी स्थिति बनी। लोग जान जोखिम में डालते नजर आए। वायरल वीडियो में दिखा कि कुछ फैंस बेहतर व्यू के लिए एस्केलेटर की रेलिंग पर चढ़ गए। ग्राउंड फ्लोर पर बैरिकेड्स टूटे और लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए आगे बढ़े। यह स्थिति बड़े हादसे में बदल सकती थी। सबसे बड़ा सवाल है कि क्या ऐसे पब्लिक इवेंट्स के लिए सही सुरक्षा इंतजाम थे? बंद जगह में हजारों की भीड़ जुटना और कंट्रोल का टूटना, मॉल मैनेजमेंट और इवेंट ऑर्गनाइजर्स की तैयारियों पर सवाल उठाता है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स नाराज दिखे। कई लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि स्टार्स और उनकी टीम को ऐसे इवेंट्स में फैंस की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, इस दौरान अक्षय कुमार स्टेज पर शांत नजर आए और फैंस से बातचीत करते रहे। लेकिन भीड़ का बेकाबू होना बड़ी चेतावनी है। फिल्म ‘भूत बंगला’ 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली है। लेकिन प्रमोशन के दौरान सामने आई तस्वीरें सवाल छोड़ती हैं कि क्या स्टारडम के नाम पर लोगों की जान जोखिम में डालना सही है?

सतना में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव:पुलिस ने दागे अश्रुगैस, हवाई फायरिंग भी की; कोर्ट के आदेश पर अवैध कब्जा ढहाया

सतना में अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर पथराव:पुलिस ने दागे अश्रुगैस, हवाई फायरिंग भी की; कोर्ट के आदेश पर अवैध कब्जा ढहाया

सतना के डालीबाबा इलाके में शुक्रवार को अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम पर पथराव किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अश्रुगैस के गोले दागने पड़े और हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी। यह घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई, जहां एक निजी भूमि पर हुए अवैध कब्जे को हटाने के लिए प्रशासन की टीम पहुंची थी। कोर्ट के आदेश पर नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर मौजूद थी। मकानों की आड़ लेकर किया पथराव जैसे ही टीम ने एक भवन को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की, आसपास के मकानों की आड़ लेकर कुछ अज्ञात लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव इतना तेज था कि मौके पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। इस घटना में एसडीएम राहुल सिलाड़िया और थाना प्रभारी रावेंद्र द्विवेदी बाल-बाल बच गए। स्थिति बिगड़ते देख तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। भारी संख्या में पुलिस बल ने पूरे इलाके को घेर लिया। पुलिस ने अश्रुगैस के गोले दागे हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने अश्रुगैस के गोले दागे और दो हवाई फायर भी किए। इसके बाद धीरे-धीरे स्थिति नियंत्रण में आई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पथराव में शामिल दो पुरुषों और एक महिला को हिरासत में लिया है। अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। घटना के बाद प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा के बीच दोबारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की और अवैध कब्जे को हटाया। क्षेत्र में फिलहाल पुलिस बल तैनात है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है।

चेस में ‘चीटिंग’ का सस्पेंस:हार से बौखलाए कार्लसन 19 साल के नीमन से भिड़ने पहुंच गए थे

चेस में ‘चीटिंग’ का सस्पेंस:हार से बौखलाए कार्लसन 19 साल के नीमन से भिड़ने पहुंच गए थे

शतरंज की बिसात पर मोहरे अक्सर गहरी खामोशी व एकाग्रता के साथ चले जाते हैं। लेकिन 2022 में एक ऐसी चाल चली गई, जिसने कोहराम मचा दिया। वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन ने अमेरिका के 19 वर्षीय ग्रैंडमास्टर हंस नीमन पर चीटिंग का आरोप लगाया था। यह शतरंज के इतिहास का सबसे बड़ा, गंभीर और चर्चित विवाद बन गया। अब चार साल बाद, नेटफ्लिक्स की नई डॉक्यूमेंट्री ‘अनटोल्ड: चेस मेट्स’ ने इस विवाद को फिर से कुरेदा है। 74 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में कई ऐसे छिपे हुए पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की गई है, जो दबे थे। डॉक्यूमेंट्री में मैग्नस कार्लसन के पिता हेनरिक कार्लसन ने एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा साझा किया है। अमेरिका में चल रहे प्रतिष्ठित सिंकफील्ड कप में जब नीमन ने कार्लसन को हराया, तो वह कार्लसन की लगातार दूसरे टूर्नामेंट में नीमन के हाथों हार थी। इस हार के बाद कार्लसन इस कदर गुस्से और हताशा में थे कि वे सीधे नीमन के होटल के कमरे का दरवाजा खटखटाना चाहते थे। हेनरिक बताते हैं, ‘मैग्नस उस रात नीमन के कमरे में जाकर उससे सीधे पूछना चाहते थे कि आखिर यह सब क्या चल रहा है? तुम मुझे कैसे हरा रहे हो?’ नीमन रैंकिंग और खेल कौशल में कार्लसन से काफी नीचे थे। इसके बावजूद वे बिना कोई खास मेहनत के, बिल्कुल सहजता से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को मात दे रहे थे। पिता के समझाने पर कार्लसन नीमन के कमरे तक नहीं गए, लेकिन उन्होंने शतरंज के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘चेस डॉट कॉम’ का रुख किया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में यह प्लेटफॉर्म ही मुख्य गवाह था, जिसने सबसे पहले इशारा किया कि नीमन ने अतीत में बेईमानी की है। कार्लसन टूर्नामेंट से हट गए और चेस डॉट कॉम ने तत्काल नीमन को बैन कर दिया। इतना ही नहीं, प्लेटफॉर्म के सीईओ एरिक एलेबेस्ट ने जांच शुरू कर दी। अंततः इसी प्लेटफॉर्म ने 72 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया कि नीमन के खिलाफ ‘आमने-सामने बैठकर खेले गए’ मैच में बेईमानी का कोई सुराग या प्रमाण नहीं मिला है। कार्लसन ने कभी सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें नीमन पर किस खास तरीके से चीटिंग करने का शक था, इसलिए इंटरनेट की दुनिया में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। इनमें सबसे चर्चित थ्योरी यह थी कि नीमन ने अपने शरीर में कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छिपा रखी थी, जो उन्हें बाहर किसी कंप्यूटर से सही चाल बता रहा था। डॉक्यूमेंट्री में नीमन इस बात को लेकर बेहद भावुक और गहरे अवसाद में नजर आते हैं। डॉक्यूमेंट्री के आखिरी हिस्से में कार्लसन खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि प्लेटफॉर्म ने उन्हें गुमराह किया। चार साल बीत जाने के बाद भी यह पूरा स्कैंडल एक ऐसे अंधे मोड़ पर खड़ा है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं। सटीक जवाब किसी के पास नहीं है। नीमन ने स्वीकारी चीटिंग डॉक्यूमेंट्री में चेस डॉट कॉम के चीफ चेस ऑफिसर डैनी रेंच ने बताया कि नीमन ने 100 से ज्यादा ऑनलाइन मैचों में अनुचित साधनों का प्रयोग किया था। नीमन ने स्वीकार किया कि उन्होंने 12 व 16 साल की उम्र में कुछ ऑनलाइन मैचों में रेटिंग बढ़ाने के लिए चीटिंग की थी।

चेस में ‘चीटिंग’ का सस्पेंस:हार से बौखलाए कार्लसन भिड़ने पहुंच गए थे नीमन से, 4 साल बाद भी नहीं मिला बेईमानी का सबूत

चेस में ‘चीटिंग’ का सस्पेंस:हार से बौखलाए कार्लसन भिड़ने पहुंच गए थे नीमन से, 4 साल बाद भी नहीं मिला बेईमानी का सबूत

शतरंज की बिसात पर मोहरे अक्सर गहरी खामोशी व एकाग्रता के साथ चले जाते हैं। लेकिन 2022 में एक ऐसी चाल चली गई, जिसने कोहराम मचा दिया। वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन ने अमेरिका के 19 वर्षीय ग्रैंडमास्टर हंस नीमन पर चीटिंग का आरोप लगाया था। यह शतरंज के इतिहास का सबसे बड़ा, गंभीर और चर्चित विवाद बन गया। अब चार साल बाद, नेटफ्लिक्स की नई डॉक्यूमेंट्री ‘अनटोल्ड: चेस मेट्स’ ने इस विवाद को फिर से कुरेदा है। 74 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में कई ऐसे छिपे हुए पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की गई है, जो दबे थे। डॉक्यूमेंट्री में मैग्नस कार्लसन के पिता हेनरिक कार्लसन ने एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा साझा किया है। अमेरिका में चल रहे प्रतिष्ठित सिंकफील्ड कप में जब नीमन ने कार्लसन को हराया, तो वह कार्लसन की लगातार दूसरे टूर्नामेंट में नीमन के हाथों हार थी। इस हार के बाद कार्लसन इस कदर गुस्से और हताशा में थे कि वे सीधे नीमन के होटल के कमरे का दरवाजा खटखटाना चाहते थे। हेनरिक बताते हैं, ‘मैग्नस उस रात नीमन के कमरे में जाकर उससे सीधे पूछना चाहते थे कि आखिर यह सब क्या चल रहा है? तुम मुझे कैसे हरा रहे हो?’ नीमन रैंकिंग और खेल कौशल में कार्लसन से काफी नीचे थे। इसके बावजूद वे बिना कोई खास मेहनत के, बिल्कुल सहजता से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को मात दे रहे थे। पिता के समझाने पर कार्लसन नीमन के कमरे तक नहीं गए, लेकिन उन्होंने शतरंज के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘चेस डॉट कॉम’ का रुख किया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में यह प्लेटफॉर्म ही मुख्य गवाह था, जिसने सबसे पहले इशारा किया कि नीमन ने अतीत में बेईमानी की है। कार्लसन टूर्नामेंट से हट गए और चेस डॉट कॉम ने तत्काल नीमन को बैन कर दिया। इतना ही नहीं, प्लेटफॉर्म के सीईओ एरिक एलेबेस्ट ने जांच शुरू कर दी। अंततः इसी प्लेटफॉर्म ने 72 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की, जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया कि नीमन के खिलाफ ‘आमने-सामने बैठकर खेले गए’ मैच में बेईमानी का कोई सुराग या प्रमाण नहीं मिला है। कार्लसन ने कभी सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें नीमन पर किस खास तरीके से चीटिंग करने का शक था, इसलिए इंटरनेट की दुनिया में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया। इनमें सबसे चर्चित थ्योरी यह थी कि नीमन ने अपने शरीर में कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस छिपा रखी थी, जो उन्हें बाहर किसी कंप्यूटर से सही चाल बता रहा था। डॉक्यूमेंट्री में नीमन इस बात को लेकर बेहद भावुक और गहरे अवसाद में नजर आते हैं। डॉक्यूमेंट्री के आखिरी हिस्से में कार्लसन खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि प्लेटफॉर्म ने उन्हें गुमराह किया। चार साल बीत जाने के बाद भी यह पूरा स्कैंडल एक ऐसे अंधे मोड़ पर खड़ा है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं। सटीक जवाब किसी के पास नहीं है। नीमन ने स्वीकारी चीटिंग डॉक्यूमेंट्री में चेस डॉट कॉम के चीफ चेस ऑफिसर डैनी रेंच ने बताया कि नीमन ने 100 से ज्यादा ऑनलाइन मैचों में अनुचित साधनों का प्रयोग किया था। नीमन ने स्वीकार किया कि उन्होंने 12 व 16 साल की उम्र में कुछ ऑनलाइन मैचों में रेटिंग बढ़ाने के लिए चीटिंग की थी।

थरूर बोले- महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार न बनाएं:बिल के साथ परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से राज्यों का लोकतांत्रिक संतुलन बिगडे़गा

थरूर बोले- महिला आरक्षण कानून को राजनीतिक हथियार न बनाएं:बिल के साथ परिसीमन प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से राज्यों का लोकतांत्रिक संतुलन बिगडे़गा

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण कानून में होने वाले संशोधन को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। ताकि संघवाद कमजोर न हो और संसद की गरिमा को ठेस न पहुंचे। संसद में 16 अप्रैल से होने वाले विशेष सत्र से पहले थरूर ने आरोप लगाया कि सरकार 3 दिन के सत्र का इस्तेमाल राज्य चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ लेने और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन की तैयारी के लिए कर रही है। थरूर ने X पर लिखा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की समर्थक रही है। 2013 में कांग्रेस ने ही यह बिल पेश कर राज्यसभा से पास कराया था, लेकिन मौजूदा सरकार का रवैया चिंताजनक है। इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसमें सरकार के प्रस्तावित संशोधनों पर आपत्ति जताई गई। थरूर ने दक्षिण के राज्यों का मुद्दा क्यों उठाया 2023 के कानून में साफ लिखा है कि महिला आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा। परिसीमन यानी जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाएं तय करना। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर एक आयोग सीटों का बंटवारा तय करता है। आखिरी बार परिसीमन 2002-2008 के बीच हुआ था, जो 1971 की जनगणना के आधार पर था। सरकार लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करना चाहती है। इससे ज्यादा आबादी वाले राज्यों (UP, बिहार, मध्य प्रदेश) की सीटें बढ़ेंगी। दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल) को डर है कि उनकी सीटों का अनुपात कम हो जाएगा। अगर कुछ राज्यों की सीटें ज्यादा बढ़ती हैं, तो संसद में उनका प्रभाव भी बढ़ेगा। इससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है। यही विपक्ष की बड़ी चिंता है। बिल पर चर्चा के लिए कांग्रेस ने वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई कांग्रेस ने शुक्रवार को वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई। इस दौरान पार्टी ने मोदी सरकार पर महिला आरक्षण कानून के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। साथ ही यह भी कहा कि इससे जुड़ा प्रस्तावित परिसीमन संवैधानिक नहीं है। इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं। इस पर 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद विचार-विमर्श किए जाने की जरूरत है। CWC की बैठक के दौरान, पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि वे अब सभी विपक्षी दलों के बड़े नेताओं की एक बैठक बुलाएंगे, जो 15 अप्रैल को हो सकती है, ताकि 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले संसद के विशेष सत्र के लिए चर्चा की जा सके और एक संयुक्त रणनीति बनाई जा सके। महिला आरक्षण संशोधन बिल पर विशेष सत्र क्यों केंद्र सरकार लोकसभा की सीटें बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर करीब 816 किया जाना है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए सीटें भी तय की जाएंगी, यानी लगभग 273 सीटें (करीब 33%) महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह बदलाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन करके लागू किया जाएगा। इस कानून का मकसद संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है, जिसमें SC/ST महिलाओं का हिस्सा भी शामिल रहेगा। सरकार चाहती है कि यह व्यवस्था 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू हो जाए, ताकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ सके। —————————- ये खबर भी पढ़ें… खड़गे बोले- महिला आरक्षण संशोधन जल्दबाजी में लाया जा रहा: सरकार आचार संहिता का उल्लंघन कर रही खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि सरकार महिला आरक्षण संशोधन और लोकसभा में सीटें बढ़ाने की बिल जल्दबाजी में ला रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान संसद सत्र बुलाना अचार संहिता का उल्लंघन है। सरकार बिल को जल्द से जल्द पास कराना चाहती है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सके। पढ़ें पूरी खबर…

‘बीजेपी सत्ता में ऐ तो हमलावर…’, ममता सरकार ने भड़के तंज, कहा- हिंसा करने वालों पर मोदी करेंगे एक्शन

'बीजेपी सत्ता में ऐ तो हमलावर...', ममता सरकार ने भड़के तंज, कहा- हिंसा करने वालों पर मोदी करेंगे एक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में मतुआ और नामशूद्र दल के सहयोगियों पर भाजपा का रुख स्पष्ट करते हुए अपना वादा निभाया है। पूर्व बर्धमान जिले के कटवा में एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नागरिकता के लिए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) लागू किया है। उन्होंने कहा, ”मैं मतुआ और नामशूद्र समुदाय से चाहता हूं कि वे देश के संविधान की रक्षा करें. उन्होंने कहा कि मोदी ने वोटुआ, नामशूद्र और सभी नामशूद्र आदिवासियों को शांति मिल सके, इसके लिए वहां का गणतंत्र कानून बनाया.” पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों का आरोप प्रधानमंत्री ने कहा, ”भाजपा सरकार बनी हुई है तो सभी पात्र यात्रियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।” दक्षिण बंगाल के कई सजावटी में विस्तारित मतुआ समुदाय के मुसलमानों को एक प्रभावशाली वर्ग माना जाता है और नागरिकता का समुदाय लंबे समय से राजनीतिक रूप से प्रेरित है। मोदी ने अवैध घुसपैठियों के मुद्दे पर तेज हमला करते हुए कहा कि भाजपा सत्ता में है तो घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल में ले जाना चाहती है। उन्होंने कहा, “अब जाने का समय आ गया है और घुसपैठियों को अपना सामान बांधना शुरू कर देना चाहिए। जो लोग घुसपैठियों की मदद कर रहे हैं, उन्हें भी नहीं बचाया जाएगा।” बंगाल में भय का माहौल-मोदी बंगाल सरकार पर पीएम मोदी ने कहा कि 15 साल के शासन में सीएम ममता बनर्जी का जन्म हुआ है. यह इलेक्शन डेमोक्रेसी डार को ख़त्म करने के लिए है। मोदी ने परमाणु के भय से मुक्ति और भाजपा के विश्वास से अभिन्न पश्चिम बंगाल का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा बदलाव एक विकसित पश्चिम बंगाल के निर्माण की दिशा में पहला कदम होगा। आलू किसानों को लेकर क्या कहा प्रधानमंत्री ने कहा, ”भाजपा, वैष्णव कांग्रेस की ‘निर्मम सरकार’ के श्वेतपत्र जारी करने वाली है। उन्होंने कहा, ”हम पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।” प्रधानमंत्री ने कहा, ”पश्चिम बंगाल में अगर भाजपा की सरकार बनी तो पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना लागू की जाएगी।” बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 रांची विधानसभा के चरण 2 चरण 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। तीसरी 4 मई को की जाएगी. ये भी पढ़ें ‘बंगला में घुसपैठ के लिए टीएमसी जिम्मेदार’, अमित शाह ने भड़के अभिषेक बनर्जी पर तंज कसते हुए शेख हसीना को लेकर क्या कहा?

‘परफेक्ट मां’ बनने का प्रेशर:देश की 22% माताएं डिप्रेशन में, हर समय खुश रहने का दबाव खतरनाक

‘परफेक्ट मां’ बनने का प्रेशर:देश की 22% माताएं डिप्रेशन में, हर समय खुश रहने का दबाव खतरनाक

भारत में मां बनना अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो गया है। आंकड़ों के अनुसार मातृ मृत्यु दर में गिरावट आई है। 2014-16 में जहां एक लाख जन्म पर 130 मौतें होती थीं, जो कि अब घटकर 88 पर आ गई हैं। 89 प्रतिशत से ज्यादा डिलीवरी अब अस्पतालों में हो रही हैं। लेकिन क्या एक मां मानसिक रूप से भी उतनी ही स्वस्थ हैं, जितनी शारीरिक रूप से? नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, अमेरिका के मुताबिक भारत में लगभग 22 फीसदी महिलाएं गर्भावस्था के दौरान या बच्चे के जन्म के बाद गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि मां की शारीरिक सुरक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना उतना ही जरूरी है। ‘नेशनल सेफ मदरहुड डे’ (11 अप्रैल) पर यह समझना जरूरी है कि सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ बच्चे के जन्म के साथ ही मां की मानसिक सेहत से भी जुड़ा है। आइए मेडिकल तथ्यों के नजरिए से समझते हैं मातृत्व का वह अनदेखा पहलू, जिस पर समाज आज भी बात नहीं करता। जानते हैं महिलाओं की मानसिक स्थिति से जुड़े खतरों के 4 संकेत और उनसे निपटने के उपाय भास्कर एक्सपर्ट तीन विशेषज्ञों से जानें सेफ मदरहुड के सही मायने, डॉ. सुनीला खंडेलवाल(स्त्री और प्रसूती रोग विशेषज्ञ), डॉ. स्मिता वैद कंसल्टेंट गाइनी और रोबोटिक सर्जन, डॉ. स्तुति कैलिफोर्निया (बर्कले यूनि. में एसोसिएट प्रोफेसर) 1. पॉजिटिव टॉक्सिसिटी – 23 फीसदी माताएं प्रभावित प्रेगनेंसी में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रॉन का उतार-चढ़ाव दिमाग पर असर डालता है, जिससे और एंग्जायटी बढ़ती है। जबरदस्ती खुश रहने के दबाव में नई मां असली भावनाएं दबा देती हैं, जिससे चिंता, थकान, इमोशनल डिस्कनेक्ट महसूस होता है। 14-23% महिलाएं क्लीनिकल एंग्जायटी से प्रभावित होती हैं। एक्सपर्ट टिप – गर्भवती महिला पर ‘हर वक्त खुश रहने’ का दबाव न डालें। एंग्जायटी ज्यादा हो तो गाइनेकोलॉजिस्ट के साथ मनोवैज्ञानिक की भी मदद लें। 2. टोकोफोबिया – 14 से 16.5% महिलाओं में डिलीवरी का डर करीब 14-16% महिलाएं टोकोफोबिया यानी डिलीवरी के डर से जूझती हैं। यह डर पिछले खराब अनुभव या लेबर पेन के कारण हो सकता है। ऐसे में कई महिलाएं सी-सेक्शन चुनती हैं। परिवार का कम सपोर्ट, अनप्लान्ड प्रेग्नेंसी, लड़का होने का दबाव और 35 साल की उम्र के बाद तनाव और बढ़ जाता है। एक्सपर्ट टिप – डॉक्टर से डिलीवरी की प्रक्रिया और पेन मैनेजमेंट पर बात करें। एंटीनेटल क्लासेस, काउंसलिंग और ब्रीदिंग एक्सरसाइज से डर कम किया जा सकता है। 3. ब्रेस्टफीडिंग न करा पाना – मां के लिए तनाव का बड़ा कारण शिशु के लिए पहले 6 महीने केवल स्तनपान की सलाह दी जाती है। लेकिन डिलीवरी के बाद कई महिलाएं चाहकर भी ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा पाती। इसके पीछे अच्छी डाइट की कमी, पीसीओएस, थायरॉयड, डायबिटीज, ब्रेस्ट सर्जरी, प्रोलैक्टिन हॉर्मोन की कमी, तनाव, डिलीवरी के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग जैसे मेडिकल कारण हो सकते हैं। साथ ही डिलीवरी के बाद कम पानी पीना भी इसकी एक बड़ी वजह है। एक्सपर्ट टिप – ब्रेस्टीफीडिंग में दिक्कत हो, तो फॉर्मूला फीडिंग एक विकल्प है। बस, बच्चा भूखा नहीं रहना चाहिए। इसकी मात्रा और देने का तरीका पीडियाट्रिशियन से डिस्कस कर लें। 4. प्रेगनेंसी के बाद डिप्रेशन – नवजात से दूरी और अलगाव डिलीवरी के बाद करीब 70-80% मांएं मानसिक अस्थिरता से गुजरती हैं, जिसे ‘बेबी ब्लूज’ कहा जाता है। इसमें शुरुआती 2-3 दिनों तक थकान, नींद की कमी और चिड़चिड़ापन रहता है, जो आमतौर पर 1-2 हफ्तों में ठीक हो जाता है। लेकिन अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन (PPD) हो सकता है, जो करीब 15-20% महिलाओं में देखा जाता है। इसमें उदासी, तनाव, नींद और भूख में बदलाव, बच्चे से दूरी, परिवार और दोस्तों से अलगाव जैसे लक्षण होते हैं। गंभीर स्थिति में मां खुद को या बच्चे को नुकसान भी पहुंचा सकती है। एक्सपर्ट के अनुसार, अमेरिका में PPD के मामले ज्यादा देखे जाते हैं, क्योंकि वहां न्यूक्लियर फैमिली, देर से शादी और देर से मां बनने का ट्रेंड है। PPD के लक्षण अक्सर 6-8 हफ्तों बाद सामने आते हैं, जिनका इलाज काउंसलिंग, दवाइयों और बॉडी-माइंड थेरेपी से किया जाता है। एक्सपर्ट टिप – इसका सबसे बड़ा फैक्टर सोशल सपोर्ट की कमी है। इसलिए मां के लिए परिवार का साथ बहुत जरूरी है। अगर इनमें से कोई लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

बेटी के निकाह का कार्ड बांटकर लौट रहा था दंपती:खंडवा में बाइक से टकराया जंगली जानवर, पत्नी की मौत; 13 अप्रैल को होनी थी शादी

बेटी के निकाह का कार्ड बांटकर लौट रहा था दंपती:खंडवा में बाइक से टकराया जंगली जानवर, पत्नी की मौत; 13 अप्रैल को होनी थी शादी

खंडवा जिले में शुक्रवार को बेटी के निकाह का निमंत्रण कार्ड बांटकर लौट रहे दंपती की बाइक से एक जंगली जानवर टकरा गया, जिससे 40 वर्षीय पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई और 45 वर्षीय पति गंभीर रूप से घायल हो गया। वर्तमान में घायल पति का जिला अस्पताल में इलाज जारी है, वहीं पुलिस ने शनिवार को जिला अस्पताल में पत्नी के शव का पोस्टमार्टम कराया है और हादसे के बाद परिवार ने 13 अप्रैल को होने वाली शादी को फिलहाल निरस्त कर दिया है। शेखपुरा से लौटते समय रास्ते में हुआ हादसा पुलिस के अनुसार, चारखेड़ा निवासी अयूब खान (45) अपनी पत्नी बिलकिस (40) के साथ शुक्रवार को रिश्तेदारों के घर शेखपुरा क्षेत्र में बेटी के निकाह का कार्ड देने गए थे। वापसी के दौरान अचानक सड़क पार कर रहे एक जंगली जानवर से उनकी बाइक टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बाइक समेत सड़क पर गिर पड़े। हादसे में बिलकिस के सिर में गंभीर चोट आई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं अयूब खान घायल हो गए, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 13 को था बेटी का निकाह, परिवार ने निरस्त की तारीख परिजनों के मुताबिक, अयूब खान की बेटी का निकाह 13 अप्रैल को तय था और घर में शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। पूरा परिवार निमंत्रण बांटने में जुटा हुआ था, लेकिन इस हादसे ने सारी खुशियों को गम में बदल दिया। रिश्तेदार शेख करीम ने बताया कि इस दुखद घटना के बाद परिवार ने फिलहाल निकाह की तारीख को निरस्त कर दिया है। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।

मधुबाला की बायोपिक में धुरंधर फेम एक्ट्रेस की चर्चा:दावा- लीड रोल में सारा अर्जुन नजर आ सकती हैं, आधिकारिक घोषणा बाकी

मधुबाला की बायोपिक में धुरंधर फेम एक्ट्रेस की चर्चा:दावा- लीड रोल में सारा अर्जुन नजर आ सकती हैं, आधिकारिक घोषणा बाकी

हिंदी सिनेमा की खूबसूरत अदाकाराओं में गिनी जाने वाली मधुबाला की बायोपिक को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। फिल्म में उनकी भूमिका कौन निभाएगा, इसे लेकर नए नाम सामने आ रहे हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, लीड रोल के लिए सारा अर्जुन का नाम सबसे आगे है। फिल्म को संजय लीला भंसाली प्रोड्यूस करेंगे, जबकि निर्देशन जसमीत के रीन करेंगे। सारा अर्जुन इन दिनों अपनी फिल्म धुरंधर को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है। इसी के बाद उनके करियर को नया मोड़ मिला और अब उन्हें मधुबाला जैसी आइकॉनिक शख्सियत निभाने का मौका मिल सकता है। टाइम्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म फिलहाल प्री-प्रोडक्शन स्टेज में है। 2026 के आखिर तक इसकी शूटिंग शुरू हो सकती है। फिल्म 50-60 के दशक के गोल्डन एरा को बड़े स्तर पर दिखाएगी। इसमें मधुबाला की फिल्मों के साथ उनकी निजी जिंदगी, खासकर रिश्ते, संघर्ष और कम उम्र में हुई मौत को विस्तार से दिखाया जाएगा। इस किरदार के लिए सारा अर्जुन को खास तैयारी करनी होगी। वह लुक टेस्ट, डायलॉग डिलीवरी और बॉडी लैंग्वेज पर काम करेंगी, ताकि मधुबाला की ग्रेस और स्क्रीन प्रेजेंस को सही तरीके से पर्दे पर उतार सकें। मधुबाला की बायोपिक के लिए पिछले कुछ समय में कई बड़ी एक्ट्रेसेस के नाम सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में कियारा आडवाणी का नाम जोड़ा गया था। हाल ही में अनीत पड्डा को लेकर भी खबरें आई थीं कि वह इस रोल के लिए चुनी जा सकती हैं। अब ताजा रिपोर्ट्स में सारा अर्जुन का नाम सबसे मजबूत दावेदार के तौर पर सामने आया है। अगर कास्टिंग फाइनल होती है, तो यह उनके करियर का बड़ा ब्रेक साबित हो सकता है। दर्शकों को हिंदी सिनेमा के ग्लैमरस और रहस्यमयी दौर को करीब से देखने का मौका मिलेगा। हालांकि, आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।

सिंगरौली में पत्रकार विकास दुबे छेड़छाड़ मामले में गिरफ्तार:गिरफ्तारी से पहले मारपीट का आरोप, अज्ञात पर केस दर्ज

सिंगरौली में पत्रकार विकास दुबे छेड़छाड़ मामले में गिरफ्तार:गिरफ्तारी से पहले मारपीट का आरोप, अज्ञात पर केस दर्ज

सिंगरौली जिले में भाजपा की एक महिला पदाधिकारी से छेड़छाड़ और मानसिक प्रताड़ना के मामले में नया मोड़ आया है। विंध्यनगर थाना पुलिस ने इस मामले में आरोपी पत्रकार विकास दुबे को बीती रात गिरफ्तार कर लिया। महिला पदाधिकारी की शिकायत पर विकास दुबे के खिलाफ पहले ही गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया। गिरफ्तारी से पहले पत्रकार विकास दुबे ने खुद को पीड़ित बताया। उन्होंने दावा किया कि तीन अज्ञात लोगों ने उनके साथ मारपीट की है। दुबे ने अपने शरीर पर चोट के निशान भी दिखाए और आरोप लगाया कि यह हमला महिला नेत्री की साजिश का हिस्सा था। मारपीट मामले की जांच शुरू विंध्यनगर थाना प्रभारी अर्चना द्विवेदी ने बताया कि महिला नेत्री द्वारा दर्ज कराए गए प्रकरण में गंभीर धाराएं लागू होने के कारण आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि विकास दुबे की मारपीट की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट का आरोप महिला पदाधिकारी ने आरोप लगाया था कि विकास दुबे पिछले एक महीने से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट कर मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक दिन दुबे ने कथित तौर पर अश्लील हरकत की थी। फिलहाल, पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है। एक तरफ छेड़छाड़ और प्रताड़ना के आरोपों की पड़ताल की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पत्रकार विकास दुबे के साथ हुई मारपीट के मामले में भी सच्चाई सामने लाने के प्रयास जारी हैं। अपनी चोट दिखाता घायल विकास