सिर्फ 5 मिनट में पेट की गैस से मिलेगा छुटकारा, डॉक्टर शुभम वत्स से जानें आसान ट्रिक्स, जरूर करें ट्राई

Stomach Gas Relief Tips: पेट में गैस और ब्लोटिंग की समस्या आजकल बहुत आम हो गई है, जो गलत खान-पान, अनियमित दिनचर्या और खराब पाचन के कारण होती है. गैस्ट्रो डॉक्टर शुभम वत्स ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में बताया है कि कुछ ऐसे फूड्स हैं जो बहुत कम समय में गैस की समस्या से राहत दिला सकते हैं. ये फूड्स पेट में बनने वाली गैस को जल्दी बाहर निकालने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि ये सभी चीजें आसानी से घर में उपलब्ध होती हैं और इन्हें तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. इन फूड्स का सही तरीके से सेवन करने से न सिर्फ गैस से राहत मिलती है, बल्कि पाचन तंत्र भी मजबूत होता है. हालांकि अगर गैस की समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह लेना भी जरूरी है.
रात में भूख कम? ये हल्के डिनर देंगे पेट और नींद दोनों की राहत, मोटापा भी नहीं बढ़ाएंगे!

Last Updated:April 08, 2026, 15:52 IST रात का भोजन हल्का होना चाहिए. अगर आप देर रात भारी खाना खा लेते हैं तो नींद और पाचन पर असर पड़ सकता है. पोहा, दलिया, सूप, मूंग दाल की खिचड़ी और दही-रोटी जैसे विकल्प न केवल हल्के हैं बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं. पोहा हल्का और जल्दी पचने वाला भोजन है. इसमें कम तेल का इस्तेमाल होता है और सब्जियों के साथ बनाने पर यह और भी पौष्टिक बन जाता है. रात में भूख कम होने पर हल्का पोहा खाने से पेट भरता है और भारीपन नहीं होता. यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ पाचन को भी आसान बनाता है. गेहूं का दलिया रात के लिए बेहतरीन विकल्प माना जाता है. यह फाइबर से भरपूर होता है और पेट को लंबे समय तक भरा रखता है. इसे सब्जियों के साथ नमकीन या हल्का मीठा भी बनाया जा सकता है. दलिया हल्का होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होता है, जिससे यह रात के खाने का अच्छा विकल्प बन जाता है. अगर बिल्कुल हल्का खाना चाहते हैं तो वेजिटेबल सूप सबसे बेहतर विकल्प है. इसमें कई तरह की सब्जियां शामिल की जा सकती हैं, जो शरीर को जरूरी पोषक तत्व देती हैं. सूप गर्म और हल्का होता है, जिससे पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता. रात में भूख कम हो तो एक कटोरी सूप काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google मूंग दाल की खिचड़ी पाचन के लिए सबसे हल्का भोजन माना जाता है. इसमें चावल और मूंग दाल का संतुलन होता है, जो शरीर को प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट दोनों देता है. हल्के मसालों के साथ बनाई गई खिचड़ी रात के लिए आदर्श भोजन है. यह पेट को आराम देती है और नींद भी बेहतर करती है. दही-रोटी भी हल्का और आसान डिनर विकल्प है. दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन को बेहतर बनाते हैं. अगर भूख कम हो तो एक-दो रोटी के साथ दही लेना काफी होता है. यह पेट को ठंडक देता है और रात में भारीपन नहीं होने देता. बहराइच मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद शुक्ला के अनुसार, भोजन का समय रात 8:00 बजे से 9:00 बजे के बीच रखना चाहिए और सोने जाने से कम से कम 2 घंटे पहले ही भोजन कर लेना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार भी सूर्यास्त के बाद भोजन करना उचित माना जाता है. ऐसा करने से पाचन सुचारू रहता है और लंबे समय तक कोई समस्या नहीं होती. First Published : April 08, 2026, 15:52 IST
trikonasana worl record: इस योगासन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, ABR में हुआ दर्ज, क्या हैं त्रिकोणासन करने के फायदे? एक्सपर्ट से समझिए

होमताजा खबरदेश इस योगासन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, ABR में हुआ दर्ज, कौन सा है आसन? Last Updated:April 08, 2026, 15:28 IST Trikonasana world record: योगासनों में से एक त्रिकोणासन ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. महाराष्ट्र के बुलढाणा में 5000 लोगों ने एक साथ त्रिकोणासन कर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में यह उपलब्धि दर्ज कराई है. आइए जानते हैं कि इस आसन को करने के क्या फायदे हैं? त्रिकोणासन कर भारतीयों ने बनाया विश्व रिकॉर्ड. Trikonasana World Record: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अब 74 दिन बाकी बचे हैं लेकिन उससे पहले ही एक योगासन ने ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है, जो एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है. यह योगासन है त्रिकोणासन.आयुष मंत्रालय के तहत मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा (MDNIY) के भव्य योग महोत्सव-2026 में इस योगासन ने नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. आयुष मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार 7 अप्रैल को महाराष्ट्र के बुलढाणा में सुबह 6 बजे से 8 बजे तक चले योग महोत्सव में शामिल हुए 5000 योग प्रेमियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) का सामूहिक अभ्यास करते हुए त्रिकोणासन (Trikonasana) किया. यह पहली बार था जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने एक जगह पर इकठ्ठे होकर त्रिकोणासन का अभ्यास किया. अब इस उपलब्धि को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में बतौर नया विश्व रिकॉर्ड दर्ज कर लिया गया है. आइए जानते हैं इस योगासन के बारे में और इसके फायदे क्या हैं? कैसे किया जाता है त्रिकोणासन 5000 लोगों ने त्रिकोणासन कर वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है. तस्वीर- MDNIY त्रिकोणासन (Triangle Pose) एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है. इसमें पैरों, हाथों और रीढ़ की मदद से शरीर एक त्रिकोण (Triangle) जैसी आकृति बनाता है, जिससे पैरों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आता है और वे मजबूत बनते हैं. यह एक सामान्य आसन हैं जो कॉमन योग प्रोटोकॉल में शामिल है लेकिन इसके फायदे जानकर आपको हैरानी होगी. इस योगासन के क्या फायदे हैं? मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली में योग प्रशिक्षक, वसुधा राजावत बताती हैं, ‘त्रिकोणासन का अभ्यास महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है. इस आसन का अभ्यास पेट की चर्बी को कम करने में सहायक है. जिन महिलाओं को इन्फर्टिलिटी की समस्या है, उन्हें इसका अभ्यास विशेष रूप से करना चाहिए. मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली में योग प्रशिक्षक,वसुधा राजावत वे बताती हैं कि यह कमर का लचीलापन बढ़ाता है, अकड़न को कम करता है. यह अभ्यास पिंडली, जंघा और कटिभाग की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है. यह मेटाबॉलिज्म को मजबूत करता है, पाचन शक्ति को सक्रिय करता है, पूरे शरीर में रक्तसंचार को बढ़ाता है. साथ ही यह अभ्यास श्वास के आवागमन को सक्रिय कर शरीर में स्फूर्ति लाता है. क्या बरतें सावधानियांराजावत आगे कहती हैं कि इस योगासन का अभ्यास करते हुए हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि पीठ, गर्दन और घुटने की गंभीर चोट होने पर इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए. चक्कर आने या उल्टी जैसा महसूस होने पर भी इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए. इस अभ्यास को क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 15:28 IST
गर्मियों में ठंडक चाहिए? यह खास सौंफ वाली ठंडाई कर देगी कमाल, जानिए घर पर बनाने की आसान रेसिपी

Last Updated:April 08, 2026, 15:15 IST गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडा और तरोताजा रखना जरूरी होता है. भरतपुर के गांवों में सौंफ से बनी देसी ठंडाई पारंपरिक रूप से सबसे ज्यादा पसंद की जाती है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है, बल्कि ऊर्जा और पाचन में भी मदद करती है, और पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है. भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में गर्मियों के दिनों में एक पारंपरिक पेय लोगों की पहली पसंद बन जाता है. यह पेय है सौंफ से तैयार की जाने वाली देसी ठंडाई, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करती है. गांवों में लोग इसे पीकर खुद को तरोताजा महसूस करते हैं और गर्मी के असर से बचने के लिए इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना चुके हैं. ग्रामीण लोगों के अनुसार सौंफ की तासीर ठंडी होती है, जिससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में सौंफ वाली ठंडाई का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह पेय पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है और शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद करता है. ग्रामीण इलाकों में खेतों पर काम करने वाले लोग इसे खास तौर पर पसंद करते हैं. क्योंकि यह उन्हें लंबे समय तक ऊर्जा देता है. इस देसी ठंडाई को बनाना भी बेहद आसान है और इसके लिए किसी महंगे सामान की जरूरत नहीं होती. सबसे पहले ठंडा पानी लिया जाता है, फिर सौंफ को अच्छी तरह साफ करके बारीक पीस लिया जाता है. इसके बाद पिसी हुई सौंफ को पानी में डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें चीनी डाली जाती है, जिससे इसका स्वाद मीठा और लाजवाब हो जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google इसके बाद इसमें थोड़ी सी काली मिर्च मिलाई जाती है, जो इसे हल्का तीखापन और अलग स्वाद देती है. कुछ लोग इसमें बर्फ भी डालते हैं, जिससे यह और ज्यादा ठंडी और ताजगी भरी बन जाती है. ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि यह ठंडाई पूरी तरह प्राकृतिक होती है और इसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है. बाजार में मिलने वाले ठंडे पेय पदार्थों के मुकाबले यह सस्ती और ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है. सौंफ वाली यह देसी ठंडाई न केवल गर्मी से राहत देती है, बल्कि परंपरा और स्वाद का भी बेहतरीन उदाहरण है. यही कारण है कि भरतपुर के गांवों में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है और ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसे खूब पसंद करते हैं. First Published : April 08, 2026, 15:15 IST
अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद कच्चा तेल 100 डॉलर के नीचे:15 प्रतिशत सस्ता हुआ, 6 साल में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट

अमेरिका-ईरान जंग में 2 हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 15% सस्ता हुआ है। बुधवार को दाम करीब 15 डॉलर गिरकर 94.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह करीब 6 साल में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। एक दिन पहले क्रूड ऑयल की कीमत 109.27 डॉलर प्रति बैरल थी। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल था। जंग के दौरान दाम बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए थे। तब से पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तेल सस्ता होने से अब यह आशंकाएं खत्म हो गई हैं। सीजफायर के चलते होर्मुज खुलने की उम्मीद सीजफायर से ग्लोबल मार्केट उछले, डॉलर गिरा युद्ध थमने की खबरों से ग्लोबल शेयर बाजारों में तेजी आई है। अमेरिका का SP 500 फ्यूचर्स 2% और यूरोपीय बाजार 5% तक चढ़े। भारत के सेंसेक्स और निफ्टी भी करीब 4% चढ़े हैं। निवेशकों का भरोसा बढ़ने से रूपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है। RBI के मुताबिक, बुधवार के शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 41 पैसे मजबूत होकर 92.55 पर पहुंच गया है। कल यह 92.96 पर बंद हुआ था। जंग फिर शुरू हुई तो तेल के दाम दोबारा बढ़ेंगे एनालिस्ट्स का कहना है कि अभी जो राहत दिख रही है, वह ज्यादा समय तक नहीं रह सकती। आईजी के टोनी सिकामोर के अनुसार, यह एक अच्छी शुरुआत जरूर है, लेकिन अभी कई बातें साफ नहीं हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर दो हफ्ते में पूरी तरह समझौता नहीं हुआ, तो कीमतें फिर से 100 डॉलर के ऊपर जा सकती हैं। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को क्या फायदे होंगे? कच्चा तेल भारत के लिए जरूरी है, क्योंकि हम करीब 85% तेल आयात करते हैं। तेल की कीमतें गिरने पर अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर राहत मिलती है। 1. पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ेंगे: कच्चा तेल सस्ता होने पर IOC, BPCL, HPCL जैसी कंपनियों के तेल की कीमत बढ़ाने की आशंका कम हो जाएगी। इससे ट्रांसपोर्ट लागत घटती है और आम आदमी के बजट पर असर पड़ता है। 2. महंगाई पर असर: डीजल के रेट न बढ़ने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी नहीं। इससे फल, सब्जियां, अनाज और अन्य रोजमर्रा के खाने-पीने के सामानों के दाम नहीं बढ़ेंगे। 3. CAD में सुधार: कच्चा तेल सस्ता होने से इंपोर्ट बिल घटता है। विदेशी मुद्रा भंडार बचता है और करंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD कम होता है। 4. रुपये को मजबूती: कच्चे तेल का बिल घटने से डॉलर की मांग कम होती है। इससे रुपया मजबूत होता है और आयात सस्ता होता है। 5. सब्सिडी बोझ कम: कच्चा तेल सस्ता होने से सरकार का सब्सिडी खर्च घटता है। बचा पैसा सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सेक्टर में लगा सकती है। 6. कॉर्पोरेट प्रॉफिट: तेल सस्ता होने से लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है। इससे शेयर बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चा तेल 10 डॉलर सस्ता होने पर करंट अकाउंट डेफिसिट में 9-10 बिलियन डॉलर की कमी और महंगाई में करीब 0.5% राहत मिल सकती है। होर्मुज प्रभावित होने से तेल महंगा हुआ था जंग के बाद ईरान ने होर्मुज रूट लगभग बंद कर दिया था। दुनिया का करीब 20% तेल-गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से तेल, LPG, एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक महंगे हुए। ब्रिटेन-यूरोप में दवाओं और जरूरी चीजों की कमी का खतरा बढ़ा, क्योंकि शिपिंग खर्च कई गुना बढ़ गया था। मार्च में क्रूड ऑयल 60% महंगा हुआ था मार्च में कच्चे तेल में 60% उछाल आया था। यह 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद एक महीने में सबसे बड़ी बढ़ोतरी थी। फरवरी अंत में 72.48 डॉलर से बढ़कर मार्च में 120 डॉलर पार पहुंच गया था। इससे पहले सितंबर 1990 में सद्दाम हुसैन के कुवैत पर हमले के समय तेल की कीमतें एक महीने में 46% बढ़ी थीं। भारत के कुल तेल आयात का 51% खाड़ी देशों से आता है भारत कच्चे तेल के लिए सबसे ज्यादा पश्चिम एशिया पर निर्भर है। FY2025-26 के पहले 10 महीनों में कुल आयात में 51% हिस्सा इसी क्षेत्र का था। कीमत बढ़ने से आयात बिल तेजी से बढ़ रहा था। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 3000 अंक चढ़कर 77,600 पर कारोबार कर रहा: निफ्टी भी 900 अंक ऊपर; ऑटो, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद आज यानी बुधवार 8 अप्रैल को शेयर बाजार में तेजी है। सेंसेक्स 3000 अंक (3.95%) चढ़कर 77,600 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी 900 अंक (3.80%) ऊपर है, ये 24,000 पर पहुंच गया है। आज ऑटो, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में ज्यादा खरीदारी है। निफ्टी का ऑटो और रियल्टी इंडेक्स करीब 5% ऊपर है। सरकारी बैंकों के इंडेक्स और मेटल इंडेक्स में भी 3% से ज्यादा तेजी है। FMCG और ऑयल एंड गैस इंडेक्स 2% से ज्यादा ऊपर कारोबार कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
पाली में 380 बेड का हाईटेक अस्पताल तैयार, हादसों में अब ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज, बचेगी हर कीमती जान

Last Updated:April 08, 2026, 14:51 IST Health story : पाली-जोधपुर हाईवे पर होने वाले हादसों में अब घायलों को समय पर इलाज मिल सकेगा. रामासिया में बन रहा 380 बेड का छह मंजिला अस्पताल इमरजेंसी हब बनेगा. यहां क्रिटिकल केयर और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं मिलेंगी. शहर से दूर होने के कारण एम्बुलेंस सीधे पहुंच सकेगी, जिससे गोल्डन ऑवर में मरीजों की जान बचाना आसान होगा. पाली-जोधपुर नेशनल हाईवे और आसपास के व्यस्त मार्गो पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में अब कीमती जान बचाना और आसान होगा. रामासिया स्थित मेडिकल कॉलेज के पास बन रहा 380 बेड का छह मंजिला अस्पताल न केवल पाली जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि यह हाईवे पर होने वाले हादसों के लिए एक ‘इमरजेंसी हब’ के रूप में उभरेगा. शहर के बाहर होने के कारण एम्बुलेंस को ट्रैफिक में फंसे बिना सीधे अस्पताल पहुंचने में सुविधा होगी, जिससे घायल को ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज मिल सकेगा. शुरुआत में यह अस्पताल चार मंजिला प्रस्तावित था, लेकिन सरकार ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसमें क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए दो और मंजिलें जोड़ने की मंजूरी दी है. इसके लिए कुल 195 करोड़ रुपये (179 करोड़ + 16 करोड़ अतिरिक्त) का भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है. अस्पताल की पांचवीं और छठी मंजिल विशेष रूप से गंभीर मरीजों और आईसीयू सेवाओं के लिए समर्पित होगी, जिससे पाली के लोगों को अब बड़े ऑपरेशन या क्रिटिकल केयर के लिए दूसरे शहरों की ओर नहीं दौड़ना पड़ेगा. आमजन की सुविधा का ध्यान रखते हुए प्रशासन ने एक व्यावहारिक निर्णय लिया है. मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग को रामासिया शिफ्ट करने के बजाय शहर के बीचों-बीच स्थित बांगड़ अस्पताल में ही रखा गया है. इससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इलाज के लिए शहर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जबकि गंभीर बीमारियों और सर्जरी के बड़े केस रामासिया के नए कैंपस में हैंडल किए जाएंगे. Add News18 as Preferred Source on Google भवन में सुपर स्पेशिएलिटी में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी और गेस्ट्रोलॉजी की सुविधा अलग से शुरू होगी. पाली मेडिकल कॉलेज का यह अस्पताल राजमेस के 17 मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों का रोल मॉडल होगा. राजमेस ने निर्माण के लिए आरएसआरडीसी को जिम्मेदारी सौंपी है. शहर से 6 किमी दूर मेडिकल कॉलेज के पास 380 बेड का नया अस्पताल बनने के बाद बांगड़ अस्पताल में गायनिक और पीडियाट्रिक विभाग यथावत रहेंगे. इसके अलावा शहर के मरीजों के लिए जनरल सर्जरी, जनरल मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक, ईएनटी, दंत रोग विभाग की एक- एक यूनिट यहां यथावत रहेगी. मरीजों के बैठने के लिए 1 हजार की क्षमता का सभागार तैयार करवाया जाएगा. हर बेड को अत्याधुनिक क्लीनिकल इक्यूपमेंट से लैस किया जाएगा. पुराना प्लान : बांगड़ में शुरू होने वाली थी सुपर स्पेशियलिटी पाली मेडिकल कॉलेज को करीब पांच साल पहले सुपर स्पेशियलिटी की मंजूरी मिली थी. क्लीनिकल यूनिट नहीं होने के कारण अभी तक यह सुविधा बांगड़ अस्पताल में शुरू नहीं हो पाई थी. First Published : April 08, 2026, 14:51 IST
घर में पड़ी सूखी तुलसी से बनाएं हेल्दी काढ़ा, जानिए आसान तरीका

Last Updated:April 08, 2026, 14:49 IST तुलसी का पौधा लगभग हर घर में होता है, लेकिन उसकी सूखी टहनियों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. जबकि विशेषज्ञों के अनुसार, इन्हीं टहनियों से आसानी से काढ़ा-मसाला तैयार किया जा सकता है, जो चाय का स्वाद बढ़ाने के साथ गले की खराश और कफ में भी राहत दे सकता है. पारंपरिक घरेलू नुस्खों में शामिल यह तरीका न सिर्फ सरल है, बल्कि रोजमर्रा की छोटी स्वास्थ्य समस्याओं में भी काफी उपयोगी साबित हो सकता है. रिपोर्ट- अभिनव कुमार घर-आंगन में तुलसी का पौधा लगभग हर घर में देखा जाता है. इसकी पत्तियां पूजा-पाठ से लेकर चाय तक में उपयोग की जाती हैं, लेकिन सूख जाने के बाद इसकी टहनियों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि तुलसी की सूखी टहनियां भी बेहद उपयोगी होती हैं और इन्हें घरेलू काढ़ा-मसाला बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है. तुलसी की सूखी टहनियों से काढ़ा-मसाला तैयार करने का तरीका काफी आसान है. इसके लिए सूखी टहनियों के साथ लौंग, इलायची और तेजपत्ता को हल्का दरदरा पीस लें और इसे किसी साफ-सुथरे डिब्बे में सुरक्षित रख लें. जब भी चाय बनाएं, इसमें एक चम्मच यह मिश्रण मिलाने से चाय का स्वाद बेहतर हो जाता है और यह शरीर को सुकून भी देता है. गले में खराश या कफ की समस्या होने पर इसी मिश्रण को एक चम्मच मात्रा में गर्म पानी में उबालकर छानकर पीने से राहत मिल सकती है. पारंपरिक रूप से तुलसी को श्वसन तंत्र के लिए लाभकारी माना जाता है, वहीं मसालों की गर्म तासीर गले को आराम पहुंचाने में मदद करती है. Add News18 as Preferred Source on Google हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक घरेलू उपाय है, कोई चिकित्सीय इलाज नहीं. यदि किसी को एलर्जी है, गर्भावस्था है, छोटे बच्चों को देना हो या किसी दवा के साथ इसका सेवन करना हो, तो पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. साथ ही टहनियों को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह साफ और पूरी तरह सूखा कर ही रखें. किसी भी चीज का अत्यधिक उपयोग नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है. तुलसी की महत्ता नई नहीं है. यह उपाय इस बात का उदाहरण है कि रसोई और आंगन में मौजूद सामान्य चीजों का भी सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो वे बेहद काम की साबित हो सकती हैं. सूखी टहनियों को फेंकने के बजाय संभालकर रख लें, क्योंकि सर्दी-खांसी के समय यह छोटा सा घरेलू नुस्खा काफी फायदेमंद हो सकता है. दरअसल, बचपन में दादी-नानी द्वारा तुलसी का काढ़ा पिलाने की परंपरा लगभग हर घर में रही है. तुलसी में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं और यही कारण है कि यह आज भी घरेलू उपचार का अहम हिस्सा बनी हुई है. First Published : April 08, 2026, 14:49 IST
सलमान खान का सपोर्ट मिलने से खुश हैं राजपाल यादव:कहा- भाईजान का आशीर्वाद साथ है; अवॉर्ड शो में मजाक बनाने पर एक्टर ने दी थी प्रतिक्रिया

अवॉर्ड शो में मजाक उड़ाए जाने के मामले में सलमान खान का सपोर्ट मिलने से राजपाल यादव बेहद खुश हैं। दरअसल, हाल ही में स्क्रीन अवॉर्ड में होस्ट जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी ने राजपाल यादव के चेक बाउंस केस और उधार पर तंज कसते हुए एक कमेंट किया था, जिसके बाद कई फैंस ने इसे एक्टर का अपमान माना। वीडियो वायरल होने के बाद सलमान खान ने राजपाल के सपोर्ट में पोस्ट की थी। राजपाल यादव मंगलवार रात फिल्ममेकर रामगोपाल वर्मा के बर्थडे में शामिल हुए थे। इस दौरान पैपराजी से बात करते हुए उन्होंने सलमान खान का सपोर्ट मिलने पर खुशी जताते हुए कहा, आज खुश भी बहुत हूं, क्योंकि आज आशीर्वाद साथ में है। आगे राम गोपाल वर्मा का भी आभार व्यक्त करते हुए राजपाल यादव ने कहा, ‘आज यहां राम गोपाल वर्मा सर के बर्थडे में आने का सौभाग्य मिला है। ये हमारी जिंदगी के ऐसे डेयरिंग डायरेक्टर रहे हैं, जिन्होंने मुझे कॉमेडियन बनाया, जिन्होंने मुझे विलेन बनाया, जिन्होंने मुझे मैन लीड बनाया। एक नहीं 17-17 फिल्में आपके डायरेक्शन में करने का मौका मिला।’ सलमान खान ने मजाक बनाए जाने पर किया था सपोर्ट 5 अप्रैल को मुंबई में स्क्रीन अवॉर्ड आयोजित किया गया था।जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी और कॉमेडियन जाकिर खान ने अवॉर्ड का एक हिस्सा होस्ट किया। इस दौरान राजपाल यादव से बात करते हुए सौरभ द्विवेदी ने उनके चेक बाउंस केस का मजाक उड़ाया। राजपाल यादव माइक पर डॉलर के रेट बढ़ने-घटने और यूथ पर एक बयान दे रहे थे। तभी सौरभ द्विवेदी ने तंज कंसने के अंदाज में कहा, ‘डॉलर का रेट चाहे बढ़े या घटे, आपको उतने ही पैसे लौटाने हैं जितने आपने उधार लिए थे।’ जल्द ही ये वीडियो वायरल हो गया और फैंस राजपाल यादव का मजाक बनाए जाने से नाराज हो गए। इसी बीच सलमान खान ने राजपाल यादव के इस वीडियो पर रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा, “राजपाल भाई, आप 30 साल से काम कर रहे हो और हम सबने आपको बार-बार रिपीट किया है क्योंकि आप अपना काम जानते हो और एक वैल्यू लाते हो। हकीकत यह है कि काम तो आपको बहुत मिलेगा और इसी डॉलर रेट पर मिलता रहेगा।” आगे सलमान ने लिखा “ये याद रखना कि कभी-कभी फ्लो में कुछ बातें निकल आती हैं। अगर कुछ देना ही है तो दिमाग में रखो और दिल से काम करो। डॉलर ऊपर हो या नीचे, क्या फर्क पड़ता है, पैसा तो इंडिया में ही देना है।” राजपाल यादव ने सलमान की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा “सलमान भाई मेरे तीस साल के सफर को सराहने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया। आप हमेशा बड़े भाई की तरह रास्ता दिखाते आए हैं, लव यू भाई।” इसके अलावा राजपाल यादव ने एक वीडियो जारी कर फैंस से अपील की कि उनका मजाक उड़ाने वाले सौरभ द्विवेदी की निंदा न की जाए, क्योंकि वो उनके लिए छोटे भाई की तरह हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अवॉर्ड शो में सौरभ ने उनके लिए खड़े होकर तालियां बजवाई थीं।
केन-बेतवा परियोजना का काम दूसरे दिन भी ठप:छतरपुर में आदिवासी-किसानों ने बांध स्थल पर किया प्रदर्शन

सूखे बुंदेलखंड की प्यास बुझाने के लिए शुरू की गई केन-बेतवा लिंक परियोजना अब बड़े जनविरोध का केंद्र बन गई है। अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जा रहे आदिवासी, किसानों और ग्रामीणों को प्रशासन द्वारा रास्ते में रोके जाने के बाद आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया है। इसके चलते 44 हजार करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का काम लगातार दूसरे दिन भी ठप रहा। बिजावर अनुविभाग में चल रहे निर्माण कार्य को रोकने के लिए हजारों की संख्या में आदिवासी किसान, महिलाएं और ग्रामीण ढोढन बांध स्थल पर धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने काम कर रही मशीनों के सामने खड़े होकर निर्माण कार्य रुकवा दिया। आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, जो हाथों में तख्तियां लेकर “जल, जंगल, जमीन” की लड़ाई का ऐलान कर रही हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर ने बताया कि 5 अप्रैल से ही आदिवासी महिलाएं बांध स्थल पर डटी हुई हैं और तभी से निर्माण कार्य पूरी तरह बंद है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों को दिल्ली जाकर अपनी बात रखने से रोका गया, रास्ते में प्रताड़ित किया गया और उनके द्वारा इकट्ठा किया गया राशन भी छीन लिया गया। भटनागर के अनुसार, “यह अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई है। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक निर्माण कार्य नहीं होने देंगे।” उन्होंने प्रशासन पर झूठे आश्वासन देने और कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया। यह विरोध केन नदी पर प्रस्तावित 77 मीटर ऊंचे और 213 किलोमीटर लंबे ढोढन बांध के निर्माण को लेकर हो रहा है। परियोजना के तहत केन और बेतवा नदियों को जोड़ने के लिए 221 किलोमीटर लंबी नहर और 2 किलोमीटर की टनल भी बनाई जानी है। पन्ना नेशनल पार्क के कोर क्षेत्र के पास चल रहे इस निर्माण को लेकर पर्यावरण और विस्थापन के मुद्दे भी उठ रहे हैं। प्रशासन की समझाइश नाकाम, पुलिस बल तैनात.. स्थिति को संभालने के लिए सटई तहसील के तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर समझाइश देने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी नहीं माने। गौतम ने कहा कि प्रशासन लगातार संवाद कर रहा है और जल्द ही समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल बांध स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन प्रदर्शनकारी अपने रुख पर अड़े हुए हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा। देखें मौके की तस्वीरें
गर्मियों में बिना एसी के भी शरीर रहेगा ठंडा, चना पीसकर बना लें यह देसी ड्रिंक, 2 मिनट में ऐसे करें तैयार

Last Updated:April 08, 2026, 14:03 IST Sattu Drink Health Benefits: सत्तू एक पारंपरिक देसी ड्रिंक है, जो गर्मियों में शरीर के लिए वरदान हो सकता है. यह शरीर को ठंडा रखने और एनर्जी देने में बेहद फायदेमंद है. यह पाचन को बेहतर बनाता है, शरीर को हाइड्रेट रखता है और ताकत बढ़ाने में मदद करता है. इसकी आसान रेसिपी और पोषण गुण इसे गर्मी के लिए एक बेहतरीन ड्रिंक बनाते हैं. गर्मियों में सत्तू पीने से सेहत को गजब के फायदे मिल सकते हैं. Homemade Sattu Drink Recipe: गर्मी में मौसम में अक्सर लोग कोल्ड ड्रिंक पीना पसंद करते हैं, लेकिन इससे सेहत को नुकसान होता है. गर्मी में शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. हर किसी के पास एसी या कूलर की सुविधा नहीं होती. ऐसे में लोग प्राकृतिक और देसी उपायों की ओर रुख करते हैं. इन्हीं में से एक है सत्तू, जो भुने हुए चने को पीसकर बनाया जाता है. यह न सिर्फ शरीर को तुरंत ठंडक देता है, बल्कि एनर्जी का बेहतरीन सोर्स है. ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक सत्तू को देसी एनर्जी ड्रिंक के रूप में जाना जाता है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया कि सत्तू मुख्य रूप से भुने हुए चने को पीसकर तैयार किया जाता है. इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह गर्मियों में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद करता है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. सत्तू पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और थकान दूर होती है. यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे वजन कंट्रोल में भी मदद मिलती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. सत्तू पीने के फायदे जान लीजिए एक्सपर्ट ने बताया कि सत्तू शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाता है और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में सहायक होता है. नियमित सेवन से यह शरीर की ताकत बढ़ाता है और नस-नस में एनर्जी भर देता है. सत्तू का सेवन लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालता है. यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी सहायक माना जाता है. इसमें कम फैट और ज्यादा पोषण होने के कारण यह दिल की सेहत के लिए भी अच्छा होता है. घर पर कैसे तैयार करें सत्तू ड्रिंक सत्तू की ड्रिंक बनाना बहुत आसान है. एक गिलास ठंडे पानी में 2-3 चम्मच सत्तू मिलाएं. इसमें स्वाद के अनुसार नमक, भुना जीरा पाउडर, नींबू का रस और थोड़ा सा काला नमक डालें. चाहें तो इसमें बारीक कटा प्याज और हरी मिर्च भी डाल सकते हैं. इसे अच्छी तरह घोलकर ठंडा-ठंडा पिएं. मीठा पसंद करने वाले लोग इसमें चीनी या गुड़ भी मिला सकते हैं. सत्तू एक सस्ता, आसान और बेहद फायदेमंद पेय है, जो गर्मियों में शरीर को ठंडा रखता है, प्यास बुझाता है और शरीर को पोषण देकर मजबूत भी बनाता है. इसलिए इस गर्मी में महंगे ड्रिंक्स की बजाय सत्तू को अपनी डाइट में शामिल करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 14:03 IST






