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पाली में 380 बेड का हाईटेक अस्पताल तैयार, हादसों में अब ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज, बचेगी हर कीमती जान

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Health story : पाली-जोधपुर हाईवे पर होने वाले हादसों में अब घायलों को समय पर इलाज मिल सकेगा. रामासिया में बन रहा 380 बेड का छह मंजिला अस्पताल इमरजेंसी हब बनेगा. यहां क्रिटिकल केयर और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं मिलेंगी. शहर से दूर होने के कारण एम्बुलेंस सीधे पहुंच सकेगी, जिससे गोल्डन ऑवर में मरीजों की जान बचाना आसान होगा.

पाली-जोधपुर नेशनल हाईवे और आसपास के व्यस्त मार्गो पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में अब कीमती जान बचाना और आसान होगा. रामासिया स्थित मेडिकल कॉलेज के पास बन रहा 380 बेड का छह मंजिला अस्पताल न केवल पाली जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि यह हाईवे पर होने वाले हादसों के लिए एक ‘इमरजेंसी हब’ के रूप में उभरेगा. शहर के बाहर होने के कारण एम्बुलेंस को ट्रैफिक में फंसे बिना सीधे अस्पताल पहुंचने में सुविधा होगी, जिससे घायल को ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज मिल सकेगा.

पाली

शुरुआत में यह अस्पताल चार मंजिला प्रस्तावित था, लेकिन सरकार ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसमें क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए दो और मंजिलें जोड़ने की मंजूरी दी है. इसके लिए कुल 195 करोड़ रुपये (179 करोड़ + 16 करोड़ अतिरिक्त) का भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है. अस्पताल की पांचवीं और छठी मंजिल विशेष रूप से गंभीर मरीजों और आईसीयू सेवाओं के लिए समर्पित होगी, जिससे पाली के लोगों को अब बड़े ऑपरेशन या क्रिटिकल केयर के लिए दूसरे शहरों की ओर नहीं दौड़ना पड़ेगा.

पाली

आमजन की सुविधा का ध्यान रखते हुए प्रशासन ने एक व्यावहारिक निर्णय लिया है. मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग को रामासिया शिफ्ट करने के बजाय शहर के बीचों-बीच स्थित बांगड़ अस्पताल में ही रखा गया है. इससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इलाज के लिए शहर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जबकि गंभीर बीमारियों और सर्जरी के बड़े केस रामासिया के नए कैंपस में हैंडल किए जाएंगे.

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पाली

भवन में सुपर स्पेशिएलिटी में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी और गेस्ट्रोलॉजी की सुविधा अलग से शुरू होगी. पाली मेडिकल कॉलेज का यह अस्पताल राजमेस के 17 मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों का रोल मॉडल होगा. राजमेस ने निर्माण के लिए आरएसआरडीसी को जिम्मेदारी सौंपी है. शहर से 6 किमी दूर मेडिकल कॉलेज के पास 380 बेड का नया अस्पताल बनने के बाद बांगड़ अस्पताल में गायनिक और पीडियाट्रिक विभाग यथावत रहेंगे. इसके अलावा शहर के मरीजों के लिए जनरल सर्जरी, जनरल मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक, ईएनटी, दंत रोग विभाग की एक- एक यूनिट यहां यथावत रहेगी. मरीजों के बैठने के लिए 1 हजार की क्षमता का सभागार तैयार करवाया जाएगा.

पाली

हर बेड को अत्याधुनिक क्लीनिकल इक्यूपमेंट से लैस किया जाएगा. पुराना प्लान : बांगड़ में शुरू होने वाली थी सुपर स्पेशियलिटी पाली मेडिकल कॉलेज को करीब पांच साल पहले सुपर स्पेशियलिटी की मंजूरी मिली थी. क्लीनिकल यूनिट नहीं होने के कारण अभी तक यह सुविधा बांगड़ अस्पताल में शुरू नहीं हो पाई थी.

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पाली-जोधपुर नेशनल हाईवे और आसपास के व्यस्त मार्गो पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में अब कीमती जान बचाना और आसान होगा. रामासिया स्थित मेडिकल कॉलेज के पास बन रहा 380 बेड का छह मंजिला अस्पताल न केवल पाली जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि यह हाईवे पर होने वाले हादसों के लिए एक ‘इमरजेंसी हब’ के रूप में उभरेगा. शहर के बाहर होने के कारण एम्बुलेंस को ट्रैफिक में फंसे बिना सीधे अस्पताल पहुंचने में सुविधा होगी, जिससे घायल को ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज मिल सकेगा.

पाली

शुरुआत में यह अस्पताल चार मंजिला प्रस्तावित था, लेकिन सरकार ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसमें क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए दो और मंजिलें जोड़ने की मंजूरी दी है. इसके लिए कुल 195 करोड़ रुपये (179 करोड़ + 16 करोड़ अतिरिक्त) का भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है. अस्पताल की पांचवीं और छठी मंजिल विशेष रूप से गंभीर मरीजों और आईसीयू सेवाओं के लिए समर्पित होगी, जिससे पाली के लोगों को अब बड़े ऑपरेशन या क्रिटिकल केयर के लिए दूसरे शहरों की ओर नहीं दौड़ना पड़ेगा.

पाली

आमजन की सुविधा का ध्यान रखते हुए प्रशासन ने एक व्यावहारिक निर्णय लिया है. मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग को रामासिया शिफ्ट करने के बजाय शहर के बीचों-बीच स्थित बांगड़ अस्पताल में ही रखा गया है. इससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इलाज के लिए शहर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जबकि गंभीर बीमारियों और सर्जरी के बड़े केस रामासिया के नए कैंपस में हैंडल किए जाएंगे.

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हर बेड को अत्याधुनिक क्लीनिकल इक्यूपमेंट से लैस किया जाएगा. पुराना प्लान : बांगड़ में शुरू होने वाली थी सुपर स्पेशियलिटी पाली मेडिकल कॉलेज को करीब पांच साल पहले सुपर स्पेशियलिटी की मंजूरी मिली थी. क्लीनिकल यूनिट नहीं होने के कारण अभी तक यह सुविधा बांगड़ अस्पताल में शुरू नहीं हो पाई थी.

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