रजनीकांत की 'जेलर 2' में नहीं दिखेंगे शाहरुख:कैमियो ऑफर ठुकराया; बेटी सुहाना की 'किंग' पर फोकस, नहीं चाहते फिल्म से पहले बड़े पर्दे पर दिखें

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान ने रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर 2’ में कैमियो करने से मना कर दिया है। पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक, शाहरुख फिलहाल अपनी आने वाली फिल्म ‘किंग’ पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं। वे नहीं चाहते कि ‘किंग’ की रिलीज से पहले वे किसी भी फिल्म में बड़े पर्दे पर नजर आएं। शाहरुख ने रजनीकांत और फिल्म के मेकर्स से बात कर इस ऑफर को विनम्रता के साथ ठुकरा दिया है। बेटी सुहाना के डेब्यू की वजह से लिया फैसला शाहरुख खान के लिए फिल्म ‘किंग’ कई मायनों में खास है। इसी फिल्म के जरिए उनकी बेटी सुहाना खान बड़े पर्दे पर अपना डेब्यू करने जा रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘जेलर 2’ के मेकर्स चाहते थे कि शाहरुख 5 दिनों का कैमियो शूट करें। शाहरुख को यह आइडिया पसंद भी आया था, लेकिन वे ‘किंग’ की एक्सक्लूसिविटी बनाए रखना चाहते हैं। ‘किंग’ में शाहरुख का एक खास लुक है और वे नहीं चाहते कि उस फिल्म से पहले उनका वही लुक किसी और मूवी में दिखे। अगस्त में रिलीज होनी है ‘जेलर 2’ फिल्म ‘जेलर 2’ के मेकर्स इसे अगस्त 2026 में रिलीज करने का प्लान बना रहे हैं, जबकि शाहरुख की फिल्म ‘किंग’ दिसंबर 2026 के लिए शेड्यूल है। दोनों फिल्मों की टाइमलाइन अलग होने की वजह से शाहरुख और मेकर्स ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया। शाहरुख ने खुद रजनीकांत से फोन पर बात की और उनके प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। शाहरुख ने आश्वासन दिया कि वे भविष्य में उनके साथ काम करने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। रजनीकांत की फिल्म का काम लगभग पूरा नेल्सन दिलीपकुमार के निर्देशन में बन रही ‘जेलर 2’ का काम काफी तेजी से चल रहा है। खुद रजनीकांत ने अप्रैल 2026 में कन्फर्म किया था कि फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है और अब यह पोस्ट-प्रोडक्शन के आखिरी फेज में है। शाहरुख के मना करने के बाद अब मेकर्स इस खास कैमियो के लिए किसी दूसरे बड़े एक्टर के नाम पर विचार कर रहे हैं। ‘किंग’ में नजर आएगी बड़ी स्टारकास्ट सिद्धार्थ आनंद द्वारा निर्देशित फिल्म ‘किंग’ में शाहरुख और सुहाना के अलावा अभिषेक बच्चन, दीपिका पादुकोण, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ और अरशद वारसी जैसे कलाकार नजर आएंगे। शाहरुख इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी सीरियस हैं और अपनी बेटी के लॉन्च में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते। यही वजह है कि उन्होंने पिछले कुछ समय से किसी भी दूसरी फिल्म का हिस्सा बनने से दूरी बनाई हुई है।
15 महीने में 635 मोबाइल बरामद:बैतूल पुलिस ने साइबर ट्रैकिंग से कई राज्यों से की तलाश

बैतूल पुलिस ने पिछले एक साल में गुम हुए 635 मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए हैं। मंगलवार को एक कार्यक्रम में इन मोबाइलों को उनके असली मालिकों को सौंपा गया। पुलिस के अनुसार, यह सफलता साइबर ट्रैकिंग और विभिन्न थानों की संयुक्त टीम के प्रयासों से मिली है। गुम हुए इन मोबाइलों को अलग-अलग राज्यों और जिलों से ट्रेस कर बैतूल लाया गया। बरामद किए गए फोनों में सैमसंग, वीवो, ओप्पो, रेडमी और रियलमी जैसी विभिन्न कंपनियों के स्मार्टफोन शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मार्च 2024 के बीच 100 मोबाइल बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 9 लाख रुपए है। पिछले एक साल में बरामद किए गए कुल 635 मोबाइलों की कीमत लगभग 80 लाख रुपए आंकी गई है। इनमें से 535 से अधिक मोबाइल पहले ही उनके मालिकों को लौटाए जा चुके थे। मोबाइल प्राप्त करने वालों में छात्र, मजदूर, किसान और गृहणियां शामिल हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से लोगों में अपने खोए हुए सामान की वापसी को लेकर विश्वास बढ़ा है। पुलिस ने बताया कि CEIR पोर्टल मोबाइल ट्रैकिंग में काफी सहायक सिद्ध हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, मोबाइल मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। इस पूरे अभियान में साइबर सेल और विभिन्न थानों के पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी लगातार ट्रैकिंग और फॉलोअप के प्रयासों से यह सफलता संभव हो पाई। पुलिस ने जनता से अपील की कि मोबाइल गुम होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत नजदीकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं और CEIR पोर्टल पर शिकायत करें। इससे समय रहते मोबाइल को ट्रैक करने में मदद मिलेगी।
गर्मी में ये शरबत बनेगा रामबाण, लू से बचाव के साथ पाचन रखेगा दुरुस्त, जानें फायदे

Last Updated:April 07, 2026, 16:14 IST आयुर्वेद के जानकर पुरुषार्थी पवन आर्य ने बताया कि गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी होना आम बात है. वहीं नियमित रूप से सौंफ का शरबत पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. दो चम्मच सौंफ को पानी में भिगोकर मिश्री के साथ तैयार किया गया शरबत शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है. जो कि थकान दूर करता है और दिनभर तरोताजा महसूस कराता है गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक और ताजगी देने वाले पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है. आमतौर पर लोग नींबू पानी, शर्बत या ग्लूकोज जैसे पेय का सेवन करते हैं, लेकिन सौंफ का शरबत भी एक बेहतरीन और सेहतमंद विकल्प है. यह न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है. इसकी खुशबूदार महक शरीर को तरोताजा रखती है और गर्मी के दिनों में लू से बचाव में भी मदद करती है. शरीर में बनाए रखता है पानी का संतुलनआयुर्वेद के जानकर पुरुषार्थी पवन आर्य ने बताया कि गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी होना आम बात है. वहीं नियमित रूप से सौंफ का शरबत पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. दो चम्मच सौंफ को पानी में भिगोकर मिश्री के साथ तैयार किया गया शरबत शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है. जो कि थकान दूर करता है और दिनभर तरोताजा महसूस कराता है. इसके सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और लू लगने का खतरा भी कम हो जाता है. पाचन तंत्र को करता है मजबूतआगे कहा कि सौंफ का शरबत पेट के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. जिन लोगों को गैस, अपच या पेट फूलने की समस्या रहती है, उनके लिए यह शरबत काफी फायदेमंद है. इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है और भूख भी बढ़ती है. यह आलसपन दूर कर शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है. ठंडक का देता है प्राकृतिक एहसाससौंफ में कैल्शियम, फाइबर और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करते हैं. रोजाना एक गिलास सौंफ का शरबत पीने से शरीर में ठंडक बनी रहती है. यह हृदय और मस्तिष्क के लिए भी लाभकारी माना जाता है और गर्मी से होने वाली परेशानियों को कम करता है. सौंफ का शरबत बनाने की विधि सौंफ का शरबत बनाना बेहद आसान है. सबसे पहले सौंफ को धोकर लगभग 30 मिनट तक पानी में भिगो दें. इसके बाद एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें भीगी हुई सौंफ, इलायची और केसर डालें. इस मिश्रण को 5 से 10 मिनट तक उबालें और फिर गैस बंद कर ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसे छान लें. अब इसमें स्वादानुसार चीनी और थोड़ा नींबू का रस मिलाएं. तैयार शरबत को गिलास में ठंडा-ठंडा परोसें. गर्मी के मौसम में यह पेय स्वाद के साथ सेहत भी देगा. Location : Palamu,Jharkhand First Published : April 07, 2026, 16:14 IST
पहाड़ों में छिपा नेचुरल माउथ फ्रेशनर, बस चबाएं इसकी पत्तियां, मुंह की बदबू और पाचन समस्याओं का रामबाण

Last Updated:April 07, 2026, 16:01 IST अगर आप कभी पहाड़ों की यात्रा पर जाएं, तो आपको वहां एक खास पौधा मिलेगा जिसे लोग “पेपर मिंट वाला पौधा” कहते हैं. यह पूरी तरह प्राकृतिक और हेल्दी माउथ फ्रेशनर है, जिसकी पत्तियों को चबाने से मुंह तुरंत ताजा महसूस होता है और हल्की पाचन समस्याओं, सिरदर्द और थकान में भी आराम मिलता है. अगर आप कभी पहाड़ों की यात्रा पर जाए तो, वहां आपको ताजी हवा और प्राकृतिक खुशबू जरूर महसूस की होगी. इन्हीं पहाड़ी इलाकों में एक खास तरह का पौधा पाया जाता है, जिसे लोग आमतौर पर “पेपर मिंट वाला पौधा” कहते हैं. यह कोई पैकेट वाला माउथ फ्रेशनर नहीं, बल्कि पूरी तरह नेचुरल और फ्रेश विकल्प है. इस पौधे की सबसे खास बात है इसकी खुशबू. जैसे ही आप इसकी पत्तियों को हल्का सा मसलते हैं या फिर तोड़ते हैं, तो इसमें से बिल्कुल पेपरमिंट जैसी तेज और ठंडी खुशबू आती है. यही वजह है कि इसे प्राकृतिक माउथ फ्रेशनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसका स्वाद भी हल्का ठंडा और बहुत रिफ्रेशिंग होता है, जिससे मुंह तुरंत ताजा महसूस करने लगता है. पहाड़ों में रहने वाले लोग इस पौधे की पत्तियों को सीधे तोड़कर चबाते हैं. इसे चबाने से मुंह की बदबू दूर होती है और एक नैचुरल फ्रेशनेस मिलती है. इसकी खास बात ये है कि इसमें किसी भी प्रकार का कोई केमिकल या अन्य कोई भी चीजें न ही होतीं है और ना ही डाली जाती है, ये पूरी तरीके से प्राकृतिक है. इसलिए ये पूरी तरह सुरक्षित और हेल्दी विकल्प माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google जब आप पहाड़ों में घूम रहे होते हैं, तो हर समय माउथ फ्रेशनर या च्युइंग गम साथ रखना जरूरी नहीं होता, और जब आप पहाड़ो में आ रहे है तो ये जरूरी नहीं कि आपको हर जगह दुकानें और ये सभी सुविधाएं मिले. ऐसे में ये पौधा एकदम काम आता है. रास्ते में अगर ये दिख जाए, तो बस इसकी कुछ पत्तियां तोड़िए और चबा लीजिए, तुरंत फ्रेश महसूस करेंगे. यह खासकर लंबे ट्रेक या सफर के दौरान बहुत मददगार होता है. हालांकि यह पौधा प्राकृतिक है, फिर भी हर पौधा खाने योग्य नहीं होता. किसी व्यक्ति को अगर किसी चीज की एलर्जी हो तो वो व्यक्ति इस चीज का ध्यान रखे. इसलिए अगर आपको इस पौधे की सही पहचान नहीं है, तो किसी स्थानीय व्यक्ति से जरूर पूछ लें. बिना पहचान के किसी भी पौधे को खाना या फिर किसी भी चीज के लिए इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है. पहाड़ के बुजुर्ग, 70 वर्षीय राम सिंह जो औषधीय पौधों की जानकारी के धनी है, वे लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि पहाड़ों में मिलने वाला यह पेपर मिंट जैसा पौधा सिर्फ एक साधारण जड़ी-बूटी नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो आपको प्रकृति के और करीब ले जाता है, हम बचपन से ही इन पौधों को देखते और इस्तेमाल करते आ रहे है. अगली बार जब आप पहाड़ों की सैर पर जाएं, तो इस छोटे से नैचुरल माउथ फ्रेशनर को जरूर ट्राई करें, आपको इसकी ताजगी जरूर पसंद आएगी. इस पौधे में प्राकृतिक ठंडक होती है, जो मुंह को ठंडा रखने में मदद करती है. साथ ही, यह हल्की पाचन संबंधी समस्याओं में भी राहत दे सकता है. कई बार इसे सिरदर्द या थकान में भी सूंघने से आराम मिलता है, क्योंकि इसकी खुशबू काफी ताजगी देती है. First Published : April 07, 2026, 16:01 IST
लिवर फंक्शन टेस्ट में SGPT और SGOT बढ़ जाए, तो क्या करें? डॉक्टर ने बताया बेस्ट ट्रीटमेंट, देखें वीडियो

Liver Function Test Explained: लिवर फंक्शन टेस्ट में SGPT और SGOT का बढ़ना इस बात का संकेत है कि लिवर पर किसी कारण से दबाव या सूजन हो रही है, जो अक्सर फैटी लिवर, वायरल इंफेक्शन, शराब के सेवन, दवाइयों के साइड इफेक्ट, मोटापा या डायबिटीज जैसी समस्याओं से जुड़ा होता है. यह अपने आपमें बीमारी नहीं बल्कि एक चेतावनी संकेत है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय रहते डॉक्टर से जांच कराकर सही कारण पता लगाना जरूरी है, क्योंकि लापरवाही से यह सिरोसिस या लिवर फेलियर जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है. मशहूर लिवर डॉक्टर पीयूष रंजन ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड वीडियो में बताया है कि एसजीपीटी और एसजीओटी क्यों बढ़ता है और इसका क्या इलाज है.
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: 5 प्रमुख आंकड़े जो तय करेंगे कि पुदुचेरी में कौन जीतेगा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 15:56 IST पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा। यहां 5 प्रमुख संख्याएं हैं जो तय करेंगी कि कौन जीतेगा। पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: 9.44 लाख मतदाता, 16 सीटों का बहुमत, 5 लाख महिला मतदाता, उच्च मतदान और 30 सीटें: प्रमुख संख्याएं जो पुडुचेरी विजेता का निर्धारण करेंगी। पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा जो इसकी 30 सदस्यीय विधानसभा के भाग्य का फैसला करेगा। इस सघन केंद्र शासित प्रदेश में जहां हर सीट मायने रखती है, पांच प्रमुख संख्याएं अंततः यह निर्धारित कर सकती हैं कि कौन सा गठबंधन या पार्टी अगली सरकार बनाएगी। यहां पांच संख्याएं हैं जो मतदान के दिन नतीजे तय करेंगी: 1) 9,44,211 – कुल पंजीकृत मतदाता यह अंतिम मतदाता सूची के अनुसार पुडुचेरी के मतदाताओं का सटीक आकार है। 30 सीटों वाले एक छोटे से मुकाबले में, मतदाता की प्राथमिकता या मतदान प्रतिशत में मामूली बदलाव भी कई सीटों को प्रभावित कर सकता है और सरकार को बदल सकता है। 2)16 – जादुई बहुमत चिह्न पुडुचेरी की 30 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को सिर्फ 16 सीटों की जरूरत है। यह कम सीमा चुनाव को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बनाती है – केवल तीन या चार सीटों का उतार-चढ़ाव निर्णायक साबित हो सकता है। 3) 5,00,477- महिला मतदाताओं की संख्या 5,00,477 मतदाताओं के साथ महिलाएं सबसे बड़ा मतदान समूह हैं, जो पुरुषों से लगभग 57,000 अधिक हैं। कुल मतदाताओं का 53% से अधिक, कल्याण, स्वास्थ्य देखभाल और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर उनकी पसंद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह भी पढ़ें: पुडुचेरी में 2026 में मतदान कैसे करें: बूथ लोकेटर, समय, मतदाता पहचान नियम: एक संपूर्ण गाइड 4) 83.42% – 2021 में मतदान प्रतिशत पुडुचेरी में उच्च मतदाता भागीदारी का इतिहास रहा है। 2021 विधानसभा चुनाव में 83.42% मतदान हुआ। इस बार इसी तरह का उच्च मतदान मजबूत जमीनी स्तर की लामबंदी वाले पक्ष को फायदा पहुंचा सकता है, जबकि ध्यान देने योग्य गिरावट से बेहतर संगठित पार्टियों को फायदा हो सकता है। यह भी पढ़ें: पुडुचेरी की फ्रांसीसी विरासत: मतदाता मतपेटी में इसकी परवाह क्यों करते हैं 5) 30 – खेल में कुल सीटें केवल 30 निर्वाचित सीटों के साथ, त्रुटि की संभावना बहुत कम है। ऐसे छोटे युद्धक्षेत्र में, प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र महत्वपूर्ण हो जाता है, और कुछ सीटों पर मामूली आश्चर्य भी यह तय कर सकता है कि बहुमत रेखा को कौन पार करेगा। ये पाँच संख्याएँ – 9.44 लाख मतदाता, 16-सीट बहुमत सीमा, 5 लाख से अधिक महिला मतदाता, ऐतिहासिक रूप से उच्च मतदान, और 30-सीटों वाला कॉम्पैक्ट क्षेत्र – यह तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे कि सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन सत्ता बरकरार रखेगा या विपक्ष सफलता हासिल करेगा। यह भी पढ़ें: राज्य का दर्जा या स्थिरता? पुडुचेरी के 9.44 लाख मतदाताओं के लिए नाजुक संतुलन अधिनियम मतदान 9 अप्रैल को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा और नतीजे 4 मई को आने की उम्मीद है। जगह : पुडुचेरी (पांडिचेरी), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 07 अप्रैल, 2026, 15:56 IST न्यूज़ इंडिया पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026: 5 प्रमुख आंकड़े जो तय करेंगे कि पुदुचेरी में कौन जीतेगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
केसर दूध और नारियल पानी पीने से बच्चा सच में गोरा पैदा होता है! सच है या मिथ?

saffron milk coconut water fair baby myth vs reality: ‘वंदना ने जैसे ही कंसीव किया उसे हर तरफ से सलाहें मिलने लगीं. कभी बड़ी बहन फोन पर कहती कि नारियल पानी पीना शुरू कर दे और आखिरी तक नहीं छोड़ना, बच्च दूध सा सफेद होगा. कभी जेठानी और ननद सलाह देने लगती कि संतरा और सौंफ खाती रहना बच्चे रंग एकदम सफेद होगा. तो कभी बैंगन की सब्जी या काले रंग का कोई फल जैसे जामुन या आलू-बुखारा खाती तो सासू मां ही टोक देतीं कि ये क्यों खाया काला बच्चा पैदा करोगी क्या? पहले तो वंदना को ये बातें काफी अच्छी लगीं कि चलो सभी बहुत केयर कर रहे हैं, लेकिन फिर उसे अचानक झुंझलाहट होने लगी कि खाने-पीने से कैसे बच्चे का रंग गोरा या काला हो सकता है? हालांकि वह कई बार अपने लाख मन करने के बाद भी कुछ चीजों से परहेज करने लग गई तो कुछ चीजों को जबदस्ती अपनी डाइट में शामिल कर लिया. ये कहानी सिर्फ वंदना की नहीं है, ऐसी लाखों वंदनाएं हैं जो प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसी सलाहों को झेलती हैं या एक बार इससे गुजरने के बाद खुद भी दूसरों को देने लगती हैं.’ लेकिन सवाल उठता है कि क्या वास्तव में नारियल का पानी पीने, संतरा खाने, केसर का दूध पीने, सफेद चीजें खाने से बच्चा गोरा पैदा होता है और काली चीजें खाने से बच्चा काला पैदा होता है? क्या खाने पीने से बच्चे का रंग निर्धारित होता है? ये मिथ है या हकीकत? मेडिकल साइंस क्या कहता है? आइए जानते हैं. आमतौर पर दादी-नानी और महिलाओं की बातों से लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी सलाह भरी पड़ी हैं लेकिन मेडिकल रिसर्च और वैज्ञानिक अध्ययनों की मानें तो रंग की बात पूरी तरह मिथक (myth) है. बच्चे का रंग जीन (genetics) से तय होता है, न कि मां के आहार से. हालांकि कुछ रिसर्च बताती हैं कि अगर मां पोषणयुक्त आहार लेती है या प्रोटीन इंटेक ठीक रहता है तो बच्चे के चेहरे की बनावट पर इसका असर पड़ता है. नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाशित एक स्टडी कहती है कि mTOR सिग्नलिंग पाथवे जानवरों और मनुष्यों में चेहरे की संरचना के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है, जो प्रोटीन और अमीनो एसिड्स के प्रति संवेदनशील होता है. स्टडी कहती है कि ऐसा चूहों और इंसानों में देखा गया है कि गर्भावस्था में प्रोटीन का इंटेक अच्छा रखने से पेट में पल रहे बच्चे के चेहरे का निर्माण काफी बेहतर होता है और उसमें कमियां नहीं रहतीं. बच्चे के बालों पर भी पड़ता है खान-पान का असर अमेरिका में हुई एक अन्य स्टडी दावा करती है कि चूहों पर हुए अध्ययन में देखा गया कि मां द्वारा गर्भ में लिया गया पोषणयुक्त आहार बच्चे के बालों पर भी असर डालता है. इसमें बच्चे के बालों की ग्रोथ से लेकर उसका रंग तक शामिल है. स्टडी कहती है कि जो माएं प्रेग्नेंसी में विटामिन बी12, फॉलिक एसिड, कॉलिन और बीटाइन ठीक मात्रा में लेती हैं तो उनके गर्भ में पल रहे बच्चों के बालों का रंग ज्यादा गहरा और चमकदार हो सकता है. बच्चे के रंग को लेकर क्या है हालांकि अगर बच्चे की त्वचा के रंग की बात करें तो मेलानिन नामक पिगमेंट पर निर्भर करता है, जो माता-पिता दोनों के जीन से आता है. साइंस कहती है कि बच्चे की त्वचा का रंग मां और पिता की त्वचा के रंग का मिला-जुला होता है. गर्भावस्था में कोई भी आहार या पेय बच्चे के जीन को बदल नहीं सकता. अभी तक ऐसा कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो केसर या नारियल पानी को बच्चे के रंग से जोड़ता हो. हालांकि केसर (सैफरन) के बारे में कई मान्यताएं कहती हैं कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो मूड बेहतर कर सकते हैं और पाचन सुधार सकते हैं, इसका सीधा असर बच्चे की ग्रोथ पर पड़ता है और बच्चा स्वस्थ होता है लेकिन त्वचा का रंग जेनेटिक फैक्टर से तय हो ऐसा नहीं है. हेल्थलाइन (2021) की एक रिपोर्ट भी लिखती है कि केसर से बच्चे का रंग गोरा होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. उल्टा, ज्यादा मात्रा में केसर लेने से गर्मी बढ़ने और गर्भपात का खतरा बढ़ा सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह से ही सीमित मात्रा (आमतौर पर 2-3 धागे) लेनी चाहिए. नारियल पानी के हैं ये फायदे नारियल पानी की बात करें तो यह गर्भावस्था में हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए अच्छा है.वहीं संतरा विटामिन सी का अच्छा सोर्स है. एक रिसर्च (PMC, 2024) में पाया गया कि ये दोनों मॉर्निंग सिकनेस कम कर सकते हैं लेकिन बच्चे के रंग पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता. कई डॉक्टरों ने इसे साफ तौर पर मिथक बताया है. किसी भी स्टडी में नारियल पानी को फेयर बेबी से जोड़ने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. फिर नारियल पानी, संतरा, केसर दूध क्यों लें? वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्भावस्था में आहार बच्चे के समग्र विकास, वजन, दिमाग और इम्यूनिटी के लिए जरूरी है. विटामिन सी, ई, ओमेगा-3, फोलिक एसिड युक्त संतुलित डाइट (फल, सब्जियां, दालें, ड्राई फ्रूट्स) बच्चे की त्वचा को स्वस्थ बनाती हैं, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपने स्वास्थ्य के लिए और बच्चे के लिए न्यूट्रीशनल फूड के साथ इन चीजों को लिया जा सकता है, लेकिन ध्यान रहे कि इससे गोरे होने का कोई प्रमाण नहीं है. मिथकों के चक्कर में न छोड़ें पोषणयुक्त फूड इसलिए जरूरी है कि ऐसे मिथकों पर भरोसा करके महिलाएं जरूरी पोषण और न्यूट्रीशनल फूड लेना न छोड़ें, ऐसा करने से नुकसान हो सकता है. आप ये सब भी ले सकती हैं लेकिन अपनी पूरी डाइट लेने के साथ. गर्भवती महिला को डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए.
गुड़ शरबत रेसिपी: लू और थकान को कहें बाय-बाय, सिर्फ 5 मिनट में तैयार करें यह देसी एनर्जी ड्रिंक

गुड़ शरबत रेसिपी: बढ़ती धूप और बढ़ती तापमान के बीच बॉडी को चिपकाना टैप करना बेहद जरूरी है। ऐसे में बाजार में मिलने वाले उत्पाद वाले कोल्ड ड्रिंक्स न पीने के बजाय नोबेल से बनी हुई शरबत ही स्वादिष्ट साबित होते हैं। ये सेहत के लिए सबसे अच्छे माने जाते हैं, मूंगफली में गुड़ का शरबत, एक ऐसा ही समय के साथ खाया जाने वाला देसी ड्रिंक। ये सिर्फ शरीर को ही ठंड़ा नहीं करता है, बल्कि इसमें आयरन और कैल्शियम जैसे तत्व लू लगने से बचाते हैं। यह ड्रिंक उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है, जो फिट के शौकीन हैं लेकिन सेहत से समझौता नहीं करना चाहते हैं। आइये जानते हैं कि इस ड्रिंक को कैसे तैयार करना सबसे बेहतर तरीका माना जाता है। गुड़ का शरबत बनाने के लिए आवश्यक सामग्री घर पर ये हैं स्वादिष्ट गुड़ के शर्बत बनाने के लिए जरूरी चीजें, उस लिस्ट में सबसे पहले 3 से 4 टेबलस्पून गुड़ के टुकड़े, 1 मोटा स्वादिष्ट ठंडा पानी, आधा छोटा नारियल का रस, एक चुटकी काला नमक, एक चौथाई स्तर का जीरा पाउडर, स्वादिष्ट पुदीने के पत्ते और आवश्यकता अनुसार टुकड़ों के टुकड़े शामिल हैं। गुड़ को चबाने का तरीका रेसिपी की शुरुआत के लिए सबसे पहले एक पेस्टिल जैसे पॉट में पानी लें और इसमें कद्दूकस किया हुआ गुड़ डाल दें। गुड़ को पानी में अच्छी तरह से थपथपाने के लिए कम से कम 5 से 10 मिनट का समय निकालें। इससे गुड़ का स्वादिष्ट फ्लेवर पानी में अच्छा स्वाद मिलता है। मूर्तियाँ या नामचीन कण्ठ को हटा दिया गया जब गुड़ पानी में पूरी तरह से ठंडा हो जाए, तो एक इलेक्ट्रिक चटनी की मदद से इस मिश्रण को दूसरे बर्तन में अच्छा लें। ऐसा करने से गुड़ में मौजूद किसी भी तरह की कलाकृतियां या हीरा कान निकल जाते हैं और आपको एक साफ शरबत मिल जाता है। प्रोडक्ट का ज़ानकारी अब इसमें गुड़ के पानी में नींबू का रस, काला नमक और साथ में जीरा पाउडर मिला हुआ है। नींबू के खटास और काले नमक का स्वाद गुड़ की मिलावट करने का काम करता है, जिससे शरबत का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। ताजगी का खास तड़का अगर आप शरबत में और भी ज्यादा ताजगी चाहते हैं तो पुदीने के टुकड़ों को हाथों से पीसकर दाल दें। पुदीने की चटनी और गुड़ से बनी हुई ये ड्रिंक, एक अलग ही स्तर का तैयार होता है। आदत बनाने का तरीका आखिरी में एक सर्विंग टिलर लें और इसमें अपनी पसंद के हिसाब से बर्फ के टुकड़े डालें। तैयार किए गए मिश्रण को बोतलों में पलटें और ठंडा-ठंडा बनाएं। यह शरबत सिर्फ प्यासा ही नहीं है, बल्कि आपको दिन भर के फ़ुर्टिला भी लेना है। यह भी पढ़ें: दिशा वकानी ने दुखों का पहाड़ तोड़ा, पिता का हुआ निधन
दमोह में कुत्तों ने किया हिरण पर हमला:फुटेरा तालाब पर पानी पीने आया था, बचने के लिए तालाब में लगाई छलांग

दमोह के फुटेरा तालाब पर मंगलवार दोपहर पानी पीने आए एक हिरण पर आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। इस हमले में हिरण गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने उसे बचाया और वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद हिरण को पशु अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, फुटेरा मोहल्ला स्थित रेलवे क्रॉसिंग के पास फुटेरा तालाब पर हिरण पानी पीने पहुंचा था। तभी आवारा कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया और कई जगह काट कर घायल कर दिया। अपनी जान बचाने के लिए हिरण तालाब में छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने निकाला बाहर स्थानीय निवासी ऐलू रैकवार ने बताया कि बच्चों ने उन्हें हिरण पर कुत्तों के हमले की सूचना दी। वह तुरंत अपने पड़ोसियों के साथ तालाब पर पहुंचे और कुत्तों को भगाकर हिरण को तालाब से बाहर निकाला। उन्होंने वन विभाग और कोतवाली पुलिस को घटना की जानकारी दी। दो घंटे बाद पहुंचे वनकर्मी रैकवार के अनुसार, वनकर्मी करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंचे। तब तक स्थानीय लोगों ने हिरण को तालाब से बाहर निकाल लिया था और उसके घावों पर प्राथमिक उपचार भी किया था। कुत्तों के काटने से हिरण के शरीर पर कई गहरे घाव हो गए थे। वन विभाग की टीम बाद में घायल हिरण को अपने साथ ले गई। दमोह के डीएफओ ईश्वर जरांडे ने बताया कि घायल हिरण को पशु अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि हिरण की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
अवॉर्ड शो में राजपाल का अपमान; सपोर्ट में आए सलमान:कहा- दिल से काम करो, डॉलर ऊपर हो या नीचे, क्या फर्क पड़ता है

मुंबई में हुए एक अवॉर्ड फंक्शन के दौरान एक्टर राजपाल यादव पर कसे गए तंज के बाद अब सुपरस्टार सलमान खान उनके समर्थन में उतर आए हैं। सलमान ने सोशल मीडिया के जरिए राजपाल यादव को भरोसा दिलाया कि उनके टैलेंट और अनुभव की वजह से इंडस्ट्री में उन्हें हमेशा काम मिलता रहेगा। सलमान का यह बयान उस वीडियो के वायरल होने के बाद आया है, जिसमें एक जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी राजपाल यादव के कर्ज और डॉलर के रेट को लेकर मजाक उड़ाते नजर आ रहे हैं। अवॉर्ड शो में राजपाल पर कसा गया था तंज हाल ही में मुंबई में एक अवॉर्ड इवेंट आयोजित किया गया था। इस दौरान जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी ने राजपाल यादव के कर्ज के मामले पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि डॉलर का रेट चाहे बढ़े या घटे, आपको उतने ही पैसे लौटाने हैं जितने आपने उधार लिए थे। इस कमेंट पर वहां मौजूद कई लोग हंसते हुए नजर आए, जबकि राजपाल यादव स्टेज पर काफी असहज दिखे। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के आने के बाद लोगों ने इसे ‘बुली’ करना बताया था। सलमान ने X पर लिखा- आप एक वैल्यू लाते हो सलमान खान ने राजपाल यादव का बचाव करते हुए X (ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की। सलमान ने लिखा, “राजपाल भाई, आप 30 साल से काम कर रहे हो और हम सबने आपको बार-बार रिपीट किया है क्योंकि आप अपना काम जानते हो और एक वैल्यू लाते हो। हकीकत यह है कि काम तो आपको बहुत मिलेगा और इसी डॉलर रेट पर मिलता रहेगा।” ‘डॉलर ऊपर हो या नीचे, पैसा तो इंडिया में ही रहना है’ सलमान खान ने डॉलर और रुपए के उतार-चढ़ाव वाले मजाक पर भी अपनी राय दी। उन्होंने लिखा, “ये याद रखना कि कभी-कभी फ्लो में कुछ बातें निकल आती हैं। अगर कुछ देना ही है तो दिमाग में रखो और दिल से काम करो। डॉलर ऊपर हो या नीचे, क्या फर्क पड़ता है, पैसा तो इंडिया में ही देना है।” कर्ज और कानूनी विवादों में घिरे हैं राजपाल राजपाल यादव पिछले काफी समय से कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन पर एक पुरानी फिल्म के निर्माण के लिए लिए गए कर्ज को न चुकाने का आरोप है। चेक बाउंस से जुड़े मामले में उन्हें हाल ही में जेल भी जाना पड़ा। इसी बैकग्राउंड को लेकर अवॉर्ड शो में उन पर तंज कसा गया था। हालांकि, राजपाल ने अब तक इस विवाद पर खुद कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी है।






