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ओपिनियन पोल 2026: बंगाल, असम, तमिलनाडु से लेकर केरल तक… किसकी सरकार? सर्वे में हैरान करने वाले आंकड़े

ओपिनियन पोल 2026: बंगाल, असम, तमिलनाडु से लेकर केरल तक... किसकी सरकार? सर्वे में हैरान करने वाले आंकड़े

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित जनमत सर्वेक्षण 2026: भारत के चार राज्यों- पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर विधानसभा चुनाव काफी तेज है। इस बीच उत्तर-पूर्वी राज्यों के ओपिनियन पोल आ गए हैं, जिसमें उत्तर-पूर्वी राज्यों में किस पार्टी या गठबंधन को बढ़त मिल रही है, यह साफ हो गया है। पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में चुनाव होने वाले हैं, जहां सीएम ममता बनर्जी की सत्तारूढ़ पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी (टीएमसी) का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ है, वहीं 126 विधानसभा सीटों पर विपक्ष के खिलाफ असम में बीजेपी की कांग्रेस पार्टी विपक्षी मैदान में सामने है। तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए केरल की 234 विधानसभा सीटों पर बीजेपी और एआईएडीएमके वाली एनडीए गठबंधन के साथ सीएम स्टालिन की पार्टी गठबंधन एलडीएफ, कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों के साथ यूडीएफ गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन मैदान में है। ओपिनियन पोल बंगाल में किसकी बन रही सरकार? मैट्रिज़ के ताज़ा ओपिनियन पोल के अनुसार, पश्चिम बंगाल की नागरिकता चुनाव से पहले ही मुकाबला काफी दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। ओपीनियन पोल में सामने आए आंकड़े सभी राजनीतिक आश्रमों की सांसे अटकाने वाली हैं। मैट्रिस के सर्वेक्षण के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में फूड डिपो कांग्रेस (टीएमसी) को 43 प्रतिशत वोट के साथ 140 से 160 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 41 प्रतिशत वोट के साथ 130 से 150 प्रतिशत पर जीत हासिल कर सकती है, जबकि राज्य की अन्य पार्टियां 16 प्रतिशत वोट के साथ राज्य में 8 से 16 प्रतिशत वोट हासिल कर सकती है। पश्चिम बंगाल में बहुमत का आंकड़ा 148 है। ऐसे में अपॉइंटमेंट के पास ओपिनियन पोल में 2 प्रतिशत की मामूली बढ़त जरूर है, लेकिन अंतर इतना कम है कि किसी भी समय विक्सित पिक्चर्स में बदलाव हो सकता है। ओपीनियन पोल में असम में बीजेपी को साफ करें मैत्रिज (मैट्रिज) और चाणक्य (चाणक्य) की ओर से किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, असम में होने वाले चुनाव में बीजेपी-नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन मजबूत स्थिति में है और उनकी संस्था सत्ता में आने या सत्ता बनाए रखने की संभावना ज्यादा दिख रही है। मैट्रिज के मुताबिक, वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी+ गठबंधन को 46 फीसदी, कांग्रेस+ गठबंधन को 36 फीसदी और अन्य को 18 फीसदी वोट मिल सकते हैं. भाजपा+ गठबंधन को 92 से 102 पायदान, कांग्रेस+ गठबंधन को 22 से 32 पायदान और अन्य को 4 से 7 पायदान मिलने की संभावना है। वहीं, चाणक के सर्वे के मुताबिक, असम में जनता पार्टी का गठबंधन 83 से 90 सीट, कांग्रेस+ गठबंधन 30 से 36 सीट और अन्य को 3 से 6 सीट मिल सकती है। तमिल में एनडीए का चमकता सितारा हो सकता है इंडिया टीवी पर दिए गए मैट्रिज ओपिनियन पोल के मुताबिक, इस बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके नेतृत्व वाली एनडीए का सितारा चमक सकता है। ओपनियन पोल के मुताबिक, चुनाव में एमके स्टालिन की पार्टी टीचर्स को 102 से 115 बेस मिल सकते हैं। जबकि बीजेपी और एआईएडीएमके के एनडीए गठबंधन को 107 से 120 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं, अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय की तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके) को 5 से 12 तक प्रवेश मिल सकता है और अन्य के टिकट में एक से छह प्रवेश की संभावना है। केरल के तीन तरफा चर्च में कौन सी स्थितियाँ होंगी? इंडिया टीवी पर दिए गए MATRIZE ओपिनियन पोल के अनुसार, केरल में 62 से 68 प्रतिशत गठबंधन के साथ 68 प्रतिशत की भागीदारी वाले यूडीएफ गठबंधन की संभावना है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के 67 से 73 के नामांकन के साथ चुनावी नतीजे सामने आ रहे हैं। जबकि राज्य में भारतीय जनता पार्टी 15 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 5 से 8 प्रतिशत पर जीत हासिल कर सकती है और अन्य के मुकाबले शून्य से तीन प्रवेश की संभावना है। यह भी पढ़ेंः ‘ईडी, सीबीआई, एनआईए के बाद धार्मिक अधिकारी और अब सीआरपीएफ…’, बीजेपी, टीएमसी को ‘भड़काऊ भाईजान कमेटी’ पर ममता का बयान (टैग्सटूट्रांसलेट)ओपिनियन पोल 2026(टी)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)असम चुनाव 2026(टी)केरल(टी)तमिलनाडु(टी)मैट्रिज(टी)मैट्रिज ओपिनियन पोल(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल ओपिनियन पोल 2026(टी)बंगाल ओपिनियन पोल 2026(टी)बंगाल चुनाव ओपिनियन पोल(टी)ओपिनियन पोल 2026(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)ममता बनर्जी(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम ओपिनियन पोल 2026(टी)असम चुनाव ओपिनियन पोल 2026(टी)असम चुनाव ओपिनियन पोल(टी)ओपिनियन पोल 2026(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)एआईयूडीएफ(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026(टी)केरल विधानसभा चुनाव 2026(टी)ओपिनियन पोल 2026

14 साल की किशोरी का शव फंदे पर लटका मिला:छतरपुर में साड़ी से बनाया फंदा, पिता बाड़े में कर रहे थे काम, घर पर अकेली थी

14 साल की किशोरी का शव फंदे पर लटका मिला:छतरपुर में साड़ी से बनाया फंदा, पिता बाड़े में कर रहे थे काम, घर पर अकेली थी

छतरपुर जिले के हरपालपुर थाना क्षेत्र के परेथा गांव में एक 14 वर्षीय किशोरी का शव फंदे पर लटका मिला। किशोरी का नाम नम्रता रैकवार (14) पुत्री सुनील रैकवार है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह नम्रता के पिता सुनील रैकवार अपने बाड़े में थे। इसी दौरान गांव के एक व्यक्ति ने उन्हें सूचना दी कि उनकी बेटी ने घर के अंदर फांसी लगा ली है। साड़ी के फंदे पर लटका मिला शव सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी हरपालपुर थाना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कमरे में साड़ी के फंदे से लटके शव को नीचे उतरवाया। शव को पोस्टमार्टम के लिए नौगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मौत के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किशोरी ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही मामले के कारणों का खुलासा हो सकेगा।

रोटी और चावल का आदर्श सेवन: एक दिन में कितनी रोटी और चावल खाना स्वास्थ्यवर्धक है? ज्यादातर खाने से क्या होता है नुकसान

रोटी और चावल का आदर्श सेवन: एक दिन में कितनी रोटी और चावल खाना स्वास्थ्यवर्धक है? ज्यादातर खाने से क्या होता है नुकसान

रोटी और चावल का आदर्श सेवन: भारतीय थाली बिना रोटी और चावल के अधूरी मानी जाती है। उत्तर भारत में जहां खेतों की रोटियां मुख्य हैं, वहीं दक्षिण और पूर्वी भारत में चावल को प्राथमिकता दी जाती है। अक्सर वजन या फिटनेस की बात आती है तो लोग सबसे पहले रोटी या चावल को छोड़ने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या वास्तव में पूरी तरह से सही है? या फिर मात्रा तय करना अत्यंत आवश्यक है? आइए जानते हैं कि एक कार्मिक को दिन भर में कितनी रोटी और चावल खाना चाहिए? एक विशेषज्ञ व्यक्ति को अपनी कैलोरी का लगभग 50-60% भाग कार्बोहाइड्रेट लेना चाहिए। रोटी और चावल दोनों ही कार्बोहाइड्रेट के मुख्य स्रोत हैं। आपको बता दें, एक रोटी में लगभग 70-100 कैलोरी होती है। एक स्वस्थ व्यक्ति दिन में 4 से 6 रोटियां, दोपहर और रात का भोजन आसानी से खा सकता है। एक दिन में कितना चावल खाना चाहिए? एक छोटी कटोरी में पके चावल की कीमत लगभग 120-150 कैलोरी होती है। अगर आप रोटी और चावल दोनों एक साथ खा रहे हैं तो एक कटोरी चावल और दो रोटीयां पूरी तरह से खायी जाती हैं। अगर आपका वजन घटाना है, तो रात के समय चावल की जगह से भरपूर रोटी या ‘ब्राउन राइस’ खाना जरूरी है। ज्यादा चावल और रोटी से हो सकता है ये नुकसान चावल और अनाज दोनों में कार्बोहाइड्रेट अधिक होता है। यदि आप शारीरिक श्रम कम करते हैं और अधिक सेवन करते हैं, तो शरीर में अतिरिक्त कार्ब्स वसा के रूप में जमा हो जाते हैं, जिससे पेट का मोटापा बढ़ जाता है।सफेद चावल का ‘ग्लाइसेमिक स्टॉकर’ (जीआई) काफी अधिक होता है। इसे खाने से शरीर में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के लिए खतरनाक हो सकता है।अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट लेने से शरीर में ‘इंसुलिन’ की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे भोजन के बाद भारीपन और नींद महसूस होने लगती है।मैदा युक्त रोटियां या पूरी तरह से नमक युक्त चावल खाने से कब्ज और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है क्योंकि इनमें पोषक तत्वों की कमी होती है। अपनी थाली में रोटी-चावल के मोर्टार और हरी चावल की मात्रा की मात्रा रखें। इससे आपका पोषण भी जरूरी होगा और पेट भी जल्दी भरेगा।रि फाइन आटे के स्थान पर चोकरयुक्त आटे और सफेद चावल की जगह कभी-कभी ब्राउन चावल या लाल चावल का प्रयोग करें।कार्बोहाइड्रेट के साथ पनीर, दही, अंडा या दालें जरूर लें। प्रोटीन कार्ब्स के पाचन को धीमा कर देता है, जिससे ग्लूकोज स्तर स्थिर रहता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)वजन घटाने के लिए प्रतिदिन कितनी रोटियां खानी चाहिए(टी)प्रति दिन कितना चावल स्वस्थ है(टी)मधुमेह के लिए चावल या रोटी(टी)रोटी और चावल के साथ संतुलित आहार(टी)चावल और रोटी खाने का सबसे अच्छा समय(टी)भारतीय आहार में स्वस्थ कार्ब्स(टी)एक दिन में कितनी रोटी खानी चाहिए(टी)एक दिन में कितनी रोटी खानी चाहिए(टी)वजन गणना के लिए रोटी स्वस्थ या स्वादिष्ट(टी)वेट लॉस के लिए

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव खारिज:लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष लेकर आया था महाभियोग प्रस्ताव, 193 सांसदों ने साइन किए थे

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव खारिज:लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष लेकर आया था महाभियोग प्रस्ताव, 193 सांसदों ने साइन किए थे

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया है। इस प्रस्ताव पर 12 मार्च को 193 विपक्षी सांसदों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) ने साइन किए थे। कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर विचार के बाद स्पीकर बिरला और राधाकृष्णन ने इसे न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत मंजूरी नहीं दी। इस फैसले के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी, जब तक नए सिरे से संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पहल न की जाए। नियम के अनुसार 100 सांसदों के दस्तखत जरूरी यह नोटिस INDIA गठबंधन के सभी दलों के सांसदों ने मिलकर साइन किया था। यह पहली बार है जब मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए ऐसा नोटिस दिया जा रहा है। राज्यसभा में इसके लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। वहीं लोकसभा में CEC को हटाने के प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। विपक्ष का आरोप-SIR केंद्र सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए विपक्ष का आरोप है कि CEC कई मौकों पर सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुंचाने में मदद कर रहे हैं, खासकर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) नाम की मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया को लेकर। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया केंद्र की सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा रहा है। कानून के अनुसार प्रस्ताव मंजूर होने पर ही जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश जरूरी होती है। जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट 1968 के अनुसार, अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है, तो जांच समिति तभी बनेगी जब दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाएंगे।

इंदौर में फायर सेफ्टी में कमी पर इमारतें होंगी सील:लापरवाही पर अधिकारियों पर जुर्माना, नोटिस जारी; कलेक्टर की समीक्षा बैठक में एक्शन

इंदौर में फायर सेफ्टी में कमी पर इमारतें होंगी सील:लापरवाही पर अधिकारियों पर जुर्माना, नोटिस जारी; कलेक्टर की समीक्षा बैठक में एक्शन

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित समय-सीमा (टीएल) बैठक में सीएम हेल्पलाइन, राजस्व प्रकरणों और शहरी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। बैठक में फायर सेफ्टी, ट्रैफिक प्रबंधन, बेसमेंट पार्किंग, नागरिक सुविधाएं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि शहर की जी+3 व्यावसायिक इमारतों, जहां अधिक भीड़ रहती है, वहां अनिवार्य रूप से फायर सेफ्टी सिस्टम, उपकरण और नियमित मॉक ड्रिल होना चाहिए। इस संबंध में पूर्व में जारी सार्वजनिक सूचना के तहत 15 दिन की समय-सीमा लगभग पूरी हो चुकी है। निरीक्षण में कमी पाए जाने पर संबंधित इमारतों को सील किया जाएगा और बिल्डिंग बायलॉज के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन द्वारा लगातार निरीक्षण, नोटिस और फायर ड्रिल आयोजित की जा रही हैं। कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन के लंबित पांच प्रकरणों के आवेदकों को सीधे बुलाकर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। लापरवाही पाए जाने पर नगर निगम अधिकारी वसीम खान पर 5 हजार रुपए, सब इंजीनियर सिद्धार्थ बरावलिया पर 5 हजार रुपए और देपालपुर-बेटमा की मुख्य नगर पालिका अधिकारी रंजना गोयल पर 10 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया गया। निगम अधिकारी मोहित पवार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। हातोद क्षेत्र के सीमांकन प्रकरण में गंभीर लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर नवजीवन पवार को सौंपी गई है।

मंदसौर पुलिस ने गुजरात से पकड़ा ड्रग तस्कर:डेढ़ किलो एमडी की तस्करी के मामले में था फरार, एसपी ने बनाई थी टीम

मंदसौर पुलिस ने गुजरात से पकड़ा ड्रग तस्कर:डेढ़ किलो एमडी की तस्करी के मामले में था फरार, एसपी ने बनाई थी टीम

मंदसौर सिटी कोतवाली पुलिस ने एमडी ड्रग्स तस्करी के एक बड़े मामले में फरार चल रहे आरोपी को गुजरात से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस द्वारा नशे के सौदागरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। एसपी के निर्देश पर थाना प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह राठौर के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई करते हुए गुजरात निवासी आरोपी गोविंद भाई को पकड़ लिया। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश जारी थी। 1.5 किलो एमडी ड्रग्स के साथ पकड़े गए थे आरोपी जानकारी के अनुसार, 1 फरवरी 2026 को कोतवाली पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों गुलशेर खान पठान और नंदकिशोर उर्फ नंदू को गिरफ्तार किया था। दोनों के कब्जे से 1 किलो 500 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की गई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये बताई गई। इसके अलावा आरोपियों से डोडाचूरा और दो मोटरसाइकिल भी जब्त की गई थीं। कुल जब्ती की कीमत 1 करोड़ 51 लाख 22 हजार रुपये आंकी गई। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए पहले ही आरोपी अजय सिंह शक्तावत को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने बताया कि मादक पदार्थ गुजरात निवासी गोविंद भाई को सप्लाई किया जाना था। इसी आधार पर पुलिस टीम को गुजरात भेजा गया, जहां कार्रवाई करते हुए आरोपी को सुरेंद्रनगर जिले के मूली थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। यह आरोपी गिरफ्तार अजय सिंह शक्तावत, निवासी सेमलिया हीरा, थाना दलौदा, जिला मंदसौर गोविंद भाई कोडी पटेल, निवासी जैपर, तहसील मूली, जिला सुरेंद्रनगर (गुजरात) पुलिस की सतर्कता से तस्करी पर बड़ा प्रहार कोतवाली पुलिस की इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है और अभियान लगातार जारी रहेगा।

कान में दर्द से हो रहे हैं परेशान? अदरक और इस पाउडर से बनाएं देसी तेल, तुरंत मिलेगा राहत

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Last Updated:April 06, 2026, 20:02 IST आजकल हेडफोन और ईयरबड्स के ज्यादा इस्तेमाल से कान दर्द बढ़ रहा है और आयुर्वेद इसे वात दोष से जोड़ता है. इस दर्द से बचने के लिए होममेड नुस्खा अपनाया जा सकता है. इसके लिए अदरक, सेंधा नमक और सरसों तेल की बूंदें हल्के दर्द में राहत दे सकती हैं. आइए जानते हैं इसके फायदे… ख़बरें फटाफट कान के दर्द से राहत आज के समय में कान का दर्द एक आम समस्या बनता जा रहा है, जिसका एक बड़ा कारण लगातार हेडफोन और ईयरबड्स का इस्तेमाल है. लंबे समय तक तेज आवाज में सुनने से न सिर्फ कानों पर दबाव पड़ता है, बल्कि सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है. कई बार यह समस्या धीरे-धीरे शुरू होती है और लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय के साथ यह दर्द बढ़ सकता है. आयुर्वेद के अनुसार, कान से जुड़ी अधिकतर समस्याएं शरीर में वात दोष के असंतुलन से जुड़ी होती हैं. जब वात बढ़ जाता है, तो कानों में सूखापन, जकड़न और हल्का दर्द महसूस होने लगता है, जो आगे चलकर ज्यादा परेशानी पैदा कर सकता है. ऐसे में आयुर्वेद में कुछ घरेलू उपाय बताए गए हैं, जो शुरुआती और हल्के कान दर्द में राहत देने में मदद कर सकते हैं. पुराने समय से एक खास तेल का इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है. इसके लिए अदरक का रस, सेंधा नमक और नींबू की कुछ बूंदों को सरसों के तेल में डालकर हल्का गर्म किया जाता है. जब यह मिश्रण अच्छे से पक जाए, तो इसे छानकर ठंडा कर लिया जाता है. इसके बाद इस तेल की दो-दो बूंद प्रभावित कान में डाली जाती है. यह उपाय धीरे-धीरे दर्द को कम करने में सहायक माना जाता है और कानों को आराम पहुंचाता है. आयुर्वेद के अनुसार क्यों होता है कान दर्दआयुर्वेद में कान दर्द को वात दोष की वृद्धि से जोड़ा जाता है. जब शरीर में वात बढ़ता है, तो इसका असर कानों पर भी पड़ता है. इससे सूखापन, खिंचाव और दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं. इसलिए वात को संतुलित रखना जरूरी माना जाता है. अदरक को आयुर्वेद में प्राकृतिक दर्द निवारक माना जाता है. इसकी गर्म तासीर दर्द को कम करने में मदद करती है. साथ ही यह वात को शांत करने में भी सहायक होता है, जिससे कानों में होने वाली परेशानी धीरे-धीरे कम हो सकती है. सेंधा नमक का असरसेंधा नमक भी दर्द और सूजन को कम करने में मददगार माना जाता है. जब इसे अदरक के साथ इस्तेमाल किया जाता है, तो यह मिश्रण और भी प्रभावी हो जाता है और कान के दर्द में राहत देने में सहायक बनता है. इस तेल को इस्तेमाल करने से पहले उसे हल्का गुनगुना कर लें. फिर साफ ड्रॉपर की मदद से प्रभावित कान में एक से दो बूंद डालें. इससे धीरे-धीरे आराम महसूस हो सकता है. इस्तेमाल से पहले रखें सावधानीअगर कान में किसी तरह का घाव है, पस आ रहा है या कान बह रहा है, तो इस तेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में पहले चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है. कान के दर्द से बचने के लिए साफ-सफाई बहुत जरूरी है. नहाते समय ध्यान रखें कि साबुन या पानी कान के अंदर न जाए. इसके अलावा समय-समय पर कानों की हल्की सफाई करते रहें, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 06, 2026, 20:02 IST

देवास में सिविल लाइन थाने के निर्माण का विरोध:हिंदू समाज के लोगों ने धार्मिक स्थान को बचाने की मांग की, अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

देवास में सिविल लाइन थाने के निर्माण का विरोध:हिंदू समाज के लोगों ने धार्मिक स्थान को बचाने की मांग की, अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

देवास में प्राचीन मेढकी वाटर वर्क्स बावड़ी और धार्मिक स्थल को बचाने के लिए हिंदू समाज ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सिविल लाइन थाने के निर्माण को तुरंत रोकने की मांग की। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल सिंह ठाकुर ने बताया कि शहर की यह अति प्राचीन बावड़ी खतरे में है। यह बावड़ी कभी देवास शहर की प्यास बुझाती थी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि इसकी साफ-सफाई की जाए तो इसमें आज भी पर्याप्त पानी उपलब्ध है। बावड़ी में लगा बोरिंग आसपास के किसानों के बोरिंग को रिचार्ज कर रहा है, जो इसकी जल संरक्षण क्षमता को दर्शाता है। परिसर में धार्मिक स्थान भी है परिसर में एक प्राचीन आंकड़े के पेड़ से गणेश जी की प्रतिमा निकली थी, जिसके बाद एक भक्त ने मंदिर की स्थापना की। प्रत्येक बुधवार को श्री गणेश मंदिर में पूजा-पाठ और भजन होते हैं। साथ ही, हनुमान मंदिर में भजन, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी परिसर में पीपल के पेड़ की परिक्रमा कर प्रतिदिन जल भी चढ़ाया जाता है। विगत कुछ दिनों से मेढकी बावड़ी के आसपास मिट्टी एकत्रित कर उसे बावड़ी में डालने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह प्राचीन धरोहर को समाप्त कर सिविल लाइन थाना बनाने की तैयारी है। मेढकी चक और आसपास की कॉलोनियों के निवासियों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विधायक ने पार्क बनावाने की कही थी बात स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले विधायक गायत्री राजे पंवार और महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल ने यहां आमजन और बच्चों के मनोरंजन के लिए एक पार्क का भूमि पूजन किया था। नगर निगम परिषद में इसका प्रस्ताव भी पारित हुआ था। 22 सितंबर 2025 को यह भूमि शिव शक्ति सेवा मंडल को अस्थायी गार्डन के लिए सौंपी गई थी। निवासियों ने सवाल उठाया है कि नगर निगम ने किस नियम के तहत गार्डन की जमीन पर पक्का निर्माण की अनुमति दी, जबकि यह नियमानुसार अवैध है। उन्होंने यह भी पूछा कि नगर निगम ने गार्डन की जमीन राजस्व विभाग को कैसे सौंप दी।

एसएटीआई कॉलेज में 7 माह वेतन न मिलने पर हड़ताल:120 कर्मचारी अनिश्चितकालीन आंदोलन पर, फंड होने के बावजूद भुगतान न होने के आरोप

एसएटीआई कॉलेज में 7 माह वेतन न मिलने पर हड़ताल:120 कर्मचारी अनिश्चितकालीन आंदोलन पर, फंड होने के बावजूद भुगतान न होने के आरोप

विदिशा के एसएटीआई कॉलेज में गंभीर आर्थिक संकट के कारण लगभग 120 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों को पिछले सात महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे कॉलेज की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की फीस, बैंक ऋण की किश्तें और दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आवेदन और ज्ञापन दिए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कॉलेज के पास पर्याप्त फंड होने के बावजूद वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि संस्था को करोड़ों रुपए का अनुदान और विद्यार्थियों से फीस के रूप में अच्छी-खासी राशि प्राप्त होती है, लेकिन प्रबंधन भवन निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल रहा। जब तक वेतन नहीं, तब तक आंदोलन का ऐलान एसएटीआई कॉलेज 1956 में स्थापित एक प्रतिष्ठित संस्था है, जिसे सिंधिया रियासत ने शुरू किया था और वर्तमान में यह शासन द्वारा वित्तपोषित है। कर्मचारियों के अनुसार, पिछले एक वर्ष से अनुदान की राशि नहीं मिलने से स्थिति बिगड़ती चली गई, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें सात महीने से वेतन नहीं मिल पाया है। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें पूरा बकाया वेतन नहीं मिल जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की और पत्राचार भी किया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। कर्मचारियों ने बताया कि वे कल (मंगलवार) जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखेंगे।

‘भूत बंगला’ के इवेंट में प्रियदर्शन-परेश रावल गिरते-गिरते बचे:अक्षय कुमार कहा- टीम के साथ ऐसे छोटे-मोटे हॉरर मोमेंट्स चलते रहते हैं

‘भूत बंगला’ के इवेंट में प्रियदर्शन-परेश रावल गिरते-गिरते बचे:अक्षय कुमार कहा- टीम के साथ ऐसे छोटे-मोटे हॉरर मोमेंट्स चलते रहते हैं

मुंबई में आज अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर लॉन्च इवेंट काफी चर्चा में रहा। इवेंट के दौरान एक छोटा सा हादसा होते-होते टल गया, जब फिल्म के डायरेक्टर प्रियदर्शन और अभिनेता परेश रावल स्टेज पर गिरते-गिरते बच गए। हालांकि मौके पर मौजूद टीम की सतर्कता से दोनों संभल गए और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस घटना ने कुछ पल के लिए माहौल को थोड़ा तनावपूर्ण बना दिया, लेकिन जल्द ही सब सामान्य हो गया। अक्षय कुमार ने माहौल हल्का करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि उनकी टीम के साथ ऐसे छोटे-मोटे ‘हॉरर मोमेंट्स’ तो चलते रहते हैं। इसी बीच इवेंट में अक्षय कुमार ने अपने को-स्टार राजपाल यादव को लेकर भी मजेदार टिप्पणी की। उन्होंने हंसते हुए कहा, “राजपाल को देखते ही अपने आप हंसी आ जाती है, कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।” अक्षय की इस बात पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। ‘भूत बंगला’ एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म है, जिसमें अक्षय कुमार के साथ परेश रावल और राजपाल यादव की जोड़ी एक बार फिर दर्शकों को हंसाने और डराने के लिए तैयार है। ट्रेलर में भी डर और कॉमेडी का अनोखा मिश्रण देखने को मिला, जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। डायरेक्टर प्रियदर्शन ने बताया कि फिल्म में पुरानी हॉरर फिल्मों की झलक के साथ नई कहानी और ताजगी देखने को मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह फिल्म दर्शकों को एंटरटेन करने में सफल रहेगी। कुल मिलाकर, ट्रेलर लॉन्च इवेंट में जहां एक तरफ हल्की अफरा-तफरी देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर कलाकारों की मस्ती और केमिस्ट्री ने माहौल को खुशनुमा बना दिया। अब दर्शकों को फिल्म के रिलीज का बेसब्री से इंतजार है।