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डिंडौरी में शिकारियों पर वन विभाग का शिकंजा, सर्चिंग अभियान:डॉग स्क्वाड ने चार गांवों में ली तलाशी, तार बरामद

डिंडौरी में शिकारियों पर वन विभाग का शिकंजा, सर्चिंग अभियान:डॉग स्क्वाड ने चार गांवों में ली तलाशी, तार बरामद

डिंडौरी जिले में वन्यजीवों के अवैध शिकार पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को डिंडौरी वन परिक्षेत्र के चार गांवों में शहडोल से बुलाए गए डॉग स्क्वाड की मदद से एक व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य शिकारियों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना था। यह तलाशी अभियान सारस ताल, कुई, रामगुडा और त्यागपुर गांवों के संदिग्ध ठिकानों पर केंद्रित रहा। सर्चिंग के दौरान वन अमले को लगभग दो किलोग्राम जीआई तार और लकड़ी के खूंटे बरामद हुए। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन सामग्रियों का उपयोग आमतौर पर जंगली जानवरों के शिकार में किया जाता है। विभाग कुछ संदिग्ध शिकारियों की तलाश भी कर रहा है। वन विभाग की यह कार्रवाई हाल ही में हुई एक गिरफ्तारी के बाद और अधिक सक्रिय हो गई है। दो दिन पहले कुई मॉल गांव से आरोपी दरबार सिंह मरकाम को गिरफ्तार किया गया था। उसके घर से जंगली सुअर का कटा हुआ सिर और शिकार में इस्तेमाल की गई सामग्री जब्त की गई थी, जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। रेंजर अतुल सिंह बघेल ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रहेंगे। इस पूरी कार्रवाई में परिक्षेत्र सहायक ईश्वर सिंह परस्ते, वनरक्षक सुनील कोरी, संजय मार्को, मान सिंह, उदय सिंह, अनीता धुर्वे, गीता और आलोक यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

युवक की ट्रेन की चपेट में आया युवक, मौत:शाजापुर के बेरछा स्टेशन के पास हादसा, ट्रेन से गिरने की जताई आशंका

युवक की ट्रेन की चपेट में आया युवक, मौत:शाजापुर के बेरछा स्टेशन के पास हादसा, ट्रेन से गिरने की जताई आशंका

शाजापुर के बेरछा रेलवे स्टेशन के पास शुक्रवार को एक युवक की ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। घटना सुबह करीब 11 से 12 बजे के बीच हुई। सोनकच्छ का रहने वाला था मृतक सूचना मिलने पर बेरछा थाना पुलिस और रेलवे पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू की। मृतक की पहचान दौलतपुर, थाना सोनकच्छ निवासी गोपाल पिता हिम्मत सिंह के रूप में हुई है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए शाजापुर जिला अस्पताल भेजा गया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। ट्रेन से गिरकर मौत की आशंका बेरछा थाना प्रभारी भरत किरण ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृतक दो दिन पहले बारात में शामिल होने के लिए इलाहाबाद प्रयागराज गया था। पुलिस को आशंका है कि वापस आते समय ट्रेन से गिरने के कारण उसकी मौत हुई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।

ऋषिकेश में बनेगा दिव्यांगों के लिए हाईटेक इंडोर बैडमिंटन हॉल:62.67 लाख का फंड मंजूर; प्रतिभाओं को मिलेगा नेशनल-इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म

ऋषिकेश में बनेगा दिव्यांगों के लिए हाईटेक इंडोर बैडमिंटन हॉल:62.67 लाख का फंड मंजूर; प्रतिभाओं को मिलेगा नेशनल-इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म

उत्तराखंड के मेधावी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य में पहली बार खास तौर पर दिव्यांगजनों के लिए एक आधुनिक (हाईटेक) इंडोर बैडमिंटन हॉल का निर्माण किया जा रहा है। यह हॉल ऋषिकेश में बनेगा। सुविधाओं के अभाव में अपनी प्रतिभा न दिखा पाने वाले खिलाड़ियों को अब नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर चमकने का मौका मिलेगा। जिलाधिकारी सविन बंसल की इस संवेदनशील पहल पर काम भी शुरू हो गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड से 62.67 लाख रुपए की राशि मंजूर की गई है। प्रोजेक्ट की 3 अहम बातें सुविधाओं के अभाव में नहीं छिपेगा टैलेंट कई बार ऐसा होता है कि दिव्यांग खिलाड़ियों में गजब की प्रतिभा होती है, लेकिन बुनियादी ढांचे और खेल सुविधाओं के अभाव में उनका टैलेंट दुनिया के सामने नहीं आ पाता। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन की इस पहल से अब ऐसे ‘छुपे हुए सितारों’ को तराशा जाएगा। इस हॉल के जरिए खिलाड़ी अपनी खेल स्किल्स को निखारेंगे और राज्य व देश का नाम रोशन करेंगे। दिव्यांगों को मुख्यधारा से जोड़ना प्राथमिकता डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि दिव्यांगजनों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रशासन की टॉप प्रायोरिटी (प्राथमिकता) में है। यह इंडोर बैडमिंटन हॉल न सिर्फ उनके शारीरिक विकास और स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में सशक्त रूप से जोड़ने का काम भी करेगा। प्रशासन ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर और पूरी गुणवत्ता (Quality) के साथ पूरा किया जाए।

देहरादून में कल से शुरू होगी अंडर-20 स्टेट एथलेटिक्स मीट:महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में होंगे इवेंट, सभी जिलों के खिलाड़ी करेंगे प्रतिभाग; पढ़ें शेड्यूल

देहरादून में कल से शुरू होगी अंडर-20 स्टेट एथलेटिक्स मीट:महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में होंगे इवेंट, सभी जिलों के खिलाड़ी करेंगे प्रतिभाग; पढ़ें शेड्यूल

उत्तराखंड के युवा और होनहार एथलीट्स के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच तैयार है। उत्तराखंड एथलेटिक्स एसोसिएशन के तत्वावधान में 4 और 5 अप्रैल को उत्तराखंड राज्य जूनियर (अंडर-20) एथलेटिक्स मीट का आयोजन होने जा रहा है। प्रतियोगिता देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में आयोजित होगी। उत्तराखंड एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव केजेएस कलसी ने इस खेल महाकुंभ की जानकारी देते हुए बताया कि दो दिनों तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में प्रदेश भर से अंडर-20 आयु वर्ग के लड़के और लड़कियां ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में अपना दम-खम दिखाएंगे। प्रतियोगिता की मुख्य बातें (एक नज़र में) 4 अप्रैल को होने वाले इवेंट का शेड्यूल दिन 2: 5 अप्रैल 2026 (रविवार) मल्टी-इवेंट्स में होंगे डेकाथलॉन और हेप्टाथलॉन इस प्रतियोगिता में एथलीटों के धैर्य और समग्र कौशल को परखने वाले मल्टी-इवेंट्स भी आकर्षण का केंद्र होंगे। डेकाथलॉन (लड़कों के लिए 10 इवेंट्स): 4 अप्रैल: 100 मीटर, लंबी कूद, शॉट पुट, ऊंची कूद, 400 मीटर। 5 अप्रैल: 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस, पोल वॉल्ट, जेवलिन, 1500 मीटर। हेप्टाथलॉन (लड़कियों के लिए 7 इवेंट्स): दिन 1: 100 मीटर बाधा दौड़, ऊंची कूद, शॉट पुट, 200 मीटर। दिन 2: लंबी कूद, जेवलिन, 800 मीटर। एथलीट्स के लिए जरूरी निर्देश आयोजकों ने खिलाड़ियों के लिए कुछ सख्त नियम बनाए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है। स्पोर्ट्स कॉलेज पहुंचने पर सबसे पहले खिलाड़ियों के दस्तावेजों की जांच होगी। जांच में सफल होने के बाद ही मौके पर बिब नंबर आवंटित किया जाएगा। 4 अप्रैल को एथलीटों को अपने इवेंट से 3 घंटे पहले रिपोर्ट करना होगा। जबकि 5 अप्रैल को एथलीटों को अपने इवेंट से 1 घंटे पहले रिपोर्ट करना अनिवार्य है।

दतिया में आंधी-बारिश के बाद निकली तेज धूप:रात को बारिश, दिन में 38॰ पहुंचा पारा; बारिश से गेहूं फसल को नुकसान की आशंका

दतिया में आंधी-बारिश के बाद निकली तेज धूप:रात को बारिश, दिन में 38॰ पहुंचा पारा; बारिश से गेहूं फसल को नुकसान की आशंका

अप्रैल की शुरुआत के साथ ही मौसम ने अपने कई रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात दतिया जिले में तेज हवा के साथ बारिश हुई, जिससे रात का मौसम अचानक बदल गया। तेज आंधी के कारण कई जगह धूल उड़ती नजर आई, वहीं सुबह करीब 4 बजे हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सुबह होते ही आसमान में बादल छा गए और मौसम सुहावना बना रहा, लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, बादल छंटने लगे और तेज धूप निकल आई। दोपहर तक सूरज की तपिश इतनी बढ़ गई कि लोगों को उमस और गर्मी का अहसास होने लगा। मौसम विभाग के अनुसार दिन का अधिकतम तापमान करीब 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। जिससे गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज मौसम में आए इस बदलाव के बीच न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तापमान में 1.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है और यह 1.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो सामान्य से करीब 3.5 डिग्री अधिक है। इससे रात में भी हल्की गर्मी का असर महसूस किया जा रहा है। बारिश के आंकड़ों की बात करें तो एयरपोर्ट क्षेत्र में 0.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि दतिया जिले के सेवड़ा क्षेत्र में राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार 15 मिमी बारिश हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों में हुई इस असमान बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, आंधी और बूंदाबांदी का असर गेहूं की फसल पर पड़ सकता है। कटाई के लिए तैयार फसल को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। तेज हवा से फसल गिरने और बारिश से दाने खराब होने का खतरा बना हुआ है।

गर्मी में पेट की जलन से परेशान? ये देसी उपाय देगा तुरंत राहत, पाचन और लिवर रहेगा फिट

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Last Updated:April 03, 2026, 17:36 IST Health Tips: दोपहर के खाने के बाद एक गिलास छाछ पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. वहीं अगर इसमें भुना हुआ जीरा, काला नमक और पुदीना मिलाकर पीया जाए, तो इसका असर और भी बढ़ जाता है. खंडवा. गर्मी के मौसम में अक्सर लोगों को पेट में जलन, गैस, अपच और भारीपन की शिकायत होने लगती है. इसकी वजह तला-भुना और मसालेदार खाना, कम पानी पीना और बिगड़ी लाइफस्टाइल होती है. आयुर्वेद के अनुसार, जब पाचन तंत्र ज्यादा सक्रिय हो जाता है, तो शरीर में गर्मी बढ़ जाती है, जिससे भूख कम लगना, सिरदर्द और स्किन पर भी असर दिखने लगता है.लोकल 18 से बातचीत में मध्य प्रदेश के खंडवा के डॉ अनिल पटेल बताते हैं कि पेट की गर्मी को शांत करने के लिए सबसे आसान और असरदार उपाय छाछ (बटर मिल्क) है. यह एक ऐसा घरेलू नुस्खा है, जो सस्ता भी है और पूरी तरह सुरक्षित भी. उन्होंने कहा कि छाछ की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर और पेट को अंदर से ठंडक देती है. इसमें मौजूद पाचन एंजाइम्स खाना जल्दी पचाने में मदद करते हैं, जिससे गैस और अपच की समस्या कम होती है. साथ ही इसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाते हैं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं. गर्मियों में यह शरीर को हाइड्रेट भी रखती है, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती है. छाछ कब और कैसे पिएं?दोपहर के भोजन के बाद एक गिलास छाछ पीना सबसे फायदेमंद माना जाता है. अगर इसमें भुना जीरा, काला नमक और पुदीना मिलाकर पीया जाए, तो इसका असर और बढ़ जाता है. गर्मियों में रोजाना एक बार छाछ का सेवन करने से पेट की गर्मी कंट्रोल में रहती है. पेट की गर्मी से बचने के अन्य आसान उपायदिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं ताकि शरीर ठंडा रहे. तले-भुने और ज्यादा मसालेदार खाने से दूरी बनाएं. अपनी डाइट में पुदीना, खीरा और तरबूज जैसे ठंडक देने वाले फूड्स शामिल करें. एलोवेरा जूस और नारियल पानी भी पेट के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. साथ ही शीतली प्राणायाम करने से भी शरीर और पेट को ठंडक मिलती है. पेट की गर्मी एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है. अगर आप रोजाना छाछ का सेवन और कुछ आसान आदतें अपनाएं, तो इससे आसानी से राहत पाई जा सकती है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. Location : Khandwa,Madhya Pradesh First Published : April 03, 2026, 17:36 IST

असम चुनाव 2026: ‘डबल इंजन नहीं, डबल लूट और डबल धोखे की सरकार’, असम में नाकाम दंगल से पहले कांग्रेस का बीजेपी सरकार पर बड़ा आरोप

असम चुनाव 2026: 'डबल इंजन नहीं, डबल लूट और डबल धोखे की सरकार', असम में नाकाम दंगल से पहले कांग्रेस का बीजेपी सरकार पर बड़ा आरोप

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित असम के जोरहाट में उग्रवादियों के बीच कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार (3 अप्रैल, 2026) को राज्य की सतारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर उग्र दबाव बनाया है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार को लेकर कहा कि यह सरकार डबल इंजन की नहीं, बल्कि डबल लूट और डबल धोखे की सरकार बनी है, जो जनता के विश्वास को पहुंचाती है। बीजेपी पर जनता की आवाज का आरोप बिहार के ज़ोराहाट स्थित कांग्रेस भवन में शुक्रवार (3 अप्रैल, 2026) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस प्रेस वार्ता में राजस्थान के पूर्व विधायक और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की राष्ट्रीय सचिव दिव्या मदेरणा ने राज्य की अंतिम स्थिति पर विस्तार से अपनी बात रखी। इस दौरान उनके साथ एआईसीसी के मीडिया को-ऑर्डिनेटर हरमीत बवेजा और जोरहाट मीडिया के सुपरस्टार त्रिशंकु शर्मा भी मौजूद रहे। प्रेस वार्ता को स्पष्ट करते हुए दिव्या मदेरणा ने असम के संकल्प को दोगुना करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सरकार डबल इंजन की नहीं, बल्कि डबल लूट और डबल धोखे की सरकार बनी है, जिसे जनता का विश्वास दिलाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि असम की करीब 3.5 करोड़ जनता की आवाज छीनी जा रही है। विशेष रूप से युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं, भविष्य का साथ दे रहे हैं। उन्होंने राज्य में मजबूत स्थिरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इसे समेकित करने के बजाय निजीकरण में लगी है। शासन व्यवस्था एवं विकास पर प्रश्न उन्होंने पिछले एक दशक से राज्य में बीजेपी सरकार के शासनकाल में पार्टी की हिस्सेदारी पर कहा कि असम का ढांचा कमजोर हो गया है और सरकार केवल जुमलेबाजी तक सीमित रह गई है. उनके अनुसार, राज्य में गुड कन्वेंशन की कमी है और विकास के सिद्धांतों के बजाय धार्मिक और राजनीतिक विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे वास्तविक उद्देश्यों को पीछे छोड़ दिया जा रहा है। सिंडिकेट राज और विकास स्टूडियो में गिरावट दिव्या मदेरणा ने आरोप लगाया कि असम में सिंडिकेट राज का कब्जा है, जहां क्षेत्र में कोयला, सुपारी और रेत जैसे अवैध नेटवर्क सक्रिय हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि असम के 23 वें स्थान पर पहुंच वाले राज्य की वास्तविक स्थिति का विवरण दिया गया है। आर्थिक संकट और भारी कर्ज राज्य की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि असम की इंडस्ट्री आईसीयू (इंटेसिव केयर यूनिट) में है। राज्य पर कर्ज़ का बोझ लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक नवजात बच्चे पर औसतन 57,000 रुपये का कर्ज है, जो सरकार की आर्थिक अर्थव्यवस्था की विफलता है। बेरोजगारी और सामाजिक संकट रोज़गार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में 21 लाख से अधिक युवा आबाद हैं, जबकि रोज़गार के अवसर बहुत सीमित हैं। उन्होंने युवाओं में बढ़ती आत्महत्या के मामलों पर भी चिंता जताई और इसे गंभीर सामाजिक संकट के बारे में बताया। शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव दिव्या मदेरणा ने आरोप लगाया कि असम में 8,000 से 9,000 सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इससे गरीब और ग्रामीण छात्र शिक्षा प्रभावित हो रहे हैं। इसके निजी दस्तावेजों का विखंडन बढ़ रहा है और शैक्षिक दस्तावेजों का चलन जारी है। स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मियों में 97% तक मेडिकल स्टाफ की कमी है। साथ ही, मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति को दर्शाता है। चाय बागान की स्थिति उन्होंने कहा कि चाइ लेबल्स के लेबल 351 रुपये प्रतिदिन के होते हैं, लेकिन आज भी वे लगभग 250 रुपये ही मिल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चाय बागानों में 57% महिलाएँ विकलांग हैं, जो एक गंभीर सामाजिक समस्या है। प्रधानमंत्री के दौरे और मधुमेह समस्या पर प्रश्न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरों पर तंज कसते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ये केवल फोटो सत्र तक सीमित रह जाते हैं और ज़मीन पर स्तर की समस्याओं का समाधान नहीं होता। बाढ़ के मुद्दे पर उन्होंने सरकार के 2031 तक असम को बाढ़ मुक्त बनाने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या तब तक बाढ़ प्रभावित लोग इंतजार करना चाहेंगे? बदलाव की मांग और सुरक्षित असम का संकल्प कांग्रेस नेताओं ने कहा कि स्थिर सरकार ने असम के विकास और जनता के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने असम के अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और आने वाले समय में इसका स्पष्ट जवाब है। कांग्रेस पार्टी के इस बयान में कहा गया है कि असम की राजनीति में एक बार फिर विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे समर्थकों को केंद्र में लाया गया है। इससे आने वाले समय में राजनीतिक माहौल और गरमी की संभावना है। यह भी पढ़ें: असम विधानसभा चुनाव 2026: ‘कांग्रेस की सरकार आई तो घुसपैठिये भी आएंगे’, ग्वालपाड़ा में गृह मंत्री अमित शाह का तीखा वार (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)कांग्रेस(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)जोरहाट(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)बीजेपी(टी)गौरव गोगोई(टी)असम(टी)कांग्रेस(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)जोरहाट(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)भाजपा(टी)गौरव गोगोई

रीवा में घर में घुसकर नाबालिग से रेप की कोशिश:पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा, सामान लेने के बहाने पहुंचा था

रीवा में घर में घुसकर नाबालिग से रेप की कोशिश:पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा, सामान लेने के बहाने पहुंचा था

रीवा में एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म के प्रयास का मामला सामने आया है। घटना उस समय की है जब 12 वर्षीय किशोरी अपने घर पर स्थित किराने की दुकान पर अकेली बैठी थी और उसके माता-पिता किसी काम से बाहर गए हुए थे। पुलिस के अनुसार, सकील खान नाम का आरोपी फूटी लेने के बहाने दुकान पर पहुंचा। थाना प्रभारी श्रृंगेश राजपूत ने बताया कि आरोपी ने किशोरी से फ्रूटी मांगी, लेकिन दुकान में फ्रूटी खत्म होने की बात कहने पर किशोरी उसे लेने घर के अंदर चली गई। इसी दौरान आरोपी भी पीछे से घर के भीतर पहुंच गया और मौका पाकर किशोरी को पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की, लेकिन किशोरी ने साहस दिखाते हुए शोर मचाया। उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग सतर्क हो गए, जिससे आरोपी घबरा गया और मौके से भागने की कोशिश की। इस दौरान किशोरी किसी तरह खुद को छुड़ाकर सुरक्षित बाहर आ गई। घटना की जानकारी परिजनों द्वारा पुलिस को दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तत्काल टीम गठित की गई और आरोपी की तलाश शुरू की गई। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराकर बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

AAP के राघव चड्ढा संसदीय अधर में: क्या होता है जब एक सांसद को अपनी ही पार्टी द्वारा चुप करा दिया जाता है? | राजनीति समाचार

Kerala Lottery Result Today: The first prize winner of Suvarna Keralam SK-47 will take home Rs 1 crore. (Image: Shutterstock)

आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 17:13 IST फिलहाल, राघव चड्ढा पंजाब से आप सांसद बने हुए हैं, लेकिन राज्यसभा में उनकी कोई औपचारिक आवाज नहीं है वरिष्ठ नेताओं से जुड़े हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम के दौरान चड्ढा की कथित चुप्पी और हालिया स्टार प्रचारक सूची से उनकी अनुपस्थिति ने पहले ही नतीजों की अफवाहों को हवा दे दी थी। फ़ाइल चित्र/पीटीआई 2 अप्रैल को राघव चड्ढा की अचानक पदावनति ने आम आदमी पार्टी (आप) और व्यापक भारतीय राजनीतिक परिदृश्य को सदमे में डाल दिया है। एक समय पार्टी के विस्तार के प्रमुख वास्तुकार और अरविंद केजरीवाल के करीबी विश्वासपात्र माने जाने वाले चड्ढा को औपचारिक रूप से पंजाब के सांसद अशोक मित्तल द्वारा राज्यसभा में आप के उपनेता के रूप में प्रतिस्थापित किया गया था। हालाँकि, इस फेरबदल का सबसे महत्वपूर्ण विवरण सिर्फ शीर्षक में बदलाव नहीं था, बल्कि पार्टी का राज्यसभा सचिवालय से यह सुनिश्चित करने का औपचारिक अनुरोध था कि चड्ढा को अब AAP के संसदीय कोटे से बोलने का समय आवंटित नहीं किया जाए। क्या कोई पार्टी अपने ही सांसद को कानूनी तौर पर बोलने से रोक सकती है? भारतीय संसदीय प्रणाली में, उत्तर सूक्ष्म रूप से “हाँ” है, विशेष रूप से किसी राजनीतिक दल को आवंटित समय के संबंध में। राज्यसभा में बोलने का समय सदन में उनकी संख्या के आधार पर विभिन्न दलों के बीच वितरित किया जाता है। चूंकि AAP के पास वर्तमान में 10 सीटें हैं, यह चौथी सबसे बड़ी पार्टी है और धन्यवाद प्रस्ताव या बजट चर्चा जैसी बहस के दौरान मिनटों के एक विशिष्ट “कोटा” की हकदार है। सदन में पार्टी के नेता – वर्तमान में आप के लिए संजय सिंह – के पास यह तय करने का प्राथमिक अधिकार है कि उनके रैंक के कौन से सांसद उस समय का उपयोग करेंगे। चड्ढा को आप के कोटे से समय आवंटित न करने का अनुरोध करने के लिए सचिवालय को पत्र लिखकर, पार्टी नेतृत्व एक सदस्य को किनारे करने के अपने प्रशासनिक अधिकार का प्रभावी ढंग से प्रयोग कर रहा है। हालांकि राज्यसभा के सभापति के पास किसी भी सदस्य को बोलने की अनुमति देने का अंतिम विवेकाधिकार है, लेकिन सभापति के लिए अपने आवंटित मिनटों का उपयोग करने के तरीके पर पार्टी के आंतरिक निर्णय को रद्द करना बेहद अपरंपरागत है। उन सांसदों का क्या होता है जिन्हें अपनी पार्टी की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करने से रोक दिया जाता है? जब कोई संसद सदस्य पार्टी का सदस्य बना रहता है, लेकिन उससे बोलने का समय और नेतृत्व की भूमिका छीन ली जाती है, तो वह “संसदीय अधर में लटकी” स्थिति में प्रवेश कर जाता है। कानूनी तौर पर, राघव चड्ढा सभी संबंधित विशेषाधिकारों के साथ एक सांसद बने रहेंगे, जिसमें बिलों पर वोट देने, समिति की बैठकों में भाग लेने और वेतन प्राप्त करने का अधिकार शामिल है। हालाँकि, सदन के पटल से सार्वजनिक चर्चा को प्रभावित करने की उनकी क्षमता गंभीर रूप से कम हो गई है। यह स्थिति अक्सर गहरी आंतरिक दरार का संकेत देती है जहां पार्टी “दलबदल” से बचना चाहती है लेकिन सदस्य के प्रभाव को बेअसर करना चाहती है। यदि चड्ढा इस्तीफा देते हैं या किसी अन्य पार्टी में शामिल होते हैं, तो उन्हें दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्यता का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें पार्टी में रखकर लेकिन उन्हें चुप कराकर, नेतृत्व यह सुनिश्चित करता है कि वह आधिकारिक तौर पर सदन में पार्टी लाइन के खिलाफ नहीं बोल सकते हैं, साथ ही उन्हें अपनी सीट खोए बिना आसानी से प्रतिद्वंद्वी खेमे में जाने से भी रोकते हैं। अब AAP ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम? विभिन्न कानूनी मामलों में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दोषमुक्त किए जाने के ठीक बाद पदावनति का समय, आंतरिक पदानुक्रम की रणनीतिक “वसंत सफाई” का सुझाव देता है। सूत्रों से संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व चड्ढा के “नरम” सार्वजनिक मुद्दों – जैसे उच्च हवाई किराया, गिग श्रमिकों के अधिकार और यहां तक ​​​​कि संसदीय कैंटीन भोजन – पर ध्यान केंद्रित करने से निराश था, जिसे केंद्र सरकार के खिलाफ पार्टी के अधिक आक्रामक राजनीतिक संदेश से ध्यान भटकाने वाला माना गया था। इसके अलावा, वरिष्ठ नेताओं से जुड़े हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम के दौरान चड्ढा की कथित चुप्पी और हालिया स्टार प्रचारक सूची से उनकी अनुपस्थिति ने पहले ही नतीजों की अफवाहों को हवा दे दी थी। जबकि उनके प्रतिस्थापन, अशोक मित्तल ने इस कदम को जिम्मेदारियों को बदलने के लिए एक “नियमित संगठनात्मक निर्णय” कहा है, चड्ढा से उनके बोलने का समय छीनने का विशिष्ट अनुरोध एक साधारण प्रशासनिक फेरबदल की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण अनुशासनात्मक या रणनीतिक बदलाव का सुझाव देता है। राघव चड्ढा के लिए आगे की राह क्या है? फिलहाल, राघव चड्ढा पंजाब से आप सांसद बने हुए हैं, लेकिन उच्च सदन में उनकी कोई औपचारिक आवाज नहीं है। अपनी पदावनति के तुरंत बाद पोस्ट किए गए एक अपमानजनक वीडियो संदेश में, चड्ढा ने नागरिक-केंद्रित मुद्दों को उठाने के अपने हालिया प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए दावा किया कि उन्हें “चुप कर दिया गया था, लेकिन हराया नहीं गया”। जैसे ही राज्यसभा अप्रैल 2026 में अपने वर्तमान सत्र के अंत की ओर बढ़ रही है, ध्यान इस बात पर होगा कि क्या सभापति एक व्यक्तिगत सदस्य के रूप में चड्ढा को समय देने के लिए हस्तक्षेप करते हैं या क्या 37 वर्षीय नेता को अपनी राजनीतिक लड़ाई पूरी तरह से संसद के हॉल के बाहर “लोगों की अदालत” में ले जाने के लिए मजबूर किया जाएगा। AAP के लिए, चुनौती यह होगी कि क्या उसके सबसे मुखर राष्ट्रीय चेहरों में से एक को चुप कराने से पार्टी का अनुशासन मजबूत होगा या उसके भीतर असंतोष का एक नया केंद्र बनेगा। पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 17:13 IST समाचार राजनीति AAP के राघव चड्ढा संसदीय अधर में: क्या होता है जब एक सांसद को अपनी ही पार्टी द्वारा चुप करा दिया जाता है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं।

रणबीर कपूर की फिल्म रामायण के टीजर पर विवाद:भारत से पहले विदेश में दिखाने पर भड़के फैंस, प्रोड्यूसर बोले- बंटवारा मत कीजिए, राम सबके हैं

रणबीर कपूर की फिल्म रामायण के टीजर पर विवाद:भारत से पहले विदेश में दिखाने पर भड़के फैंस, प्रोड्यूसर बोले- बंटवारा मत कीजिए, राम सबके हैं

हनुमान जयंती के मौके पर 2 अप्रैल को फिल्म रामायण का टीजर रिलीज कर दिया गया। रिलीज के साथ ही टीजर विवादों में घिर गया है। दरअसल, मेकर्स ने भारत से दो दिन पहले इसका टीजर न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स में रिलीज किया था। भारतीय फैंस इस बात से नाराज हैं कि रामायण पर बनी फिल्म का टीजर पहले विदेश में क्यों दिखाया गया। अब फिल्म के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने इस पर सफाई दी है। नमित बोले- बंटवारा मत कीजिए सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि रामायण पर बनी इस फिल्म पर पहला हक भारतीय दर्शकों का है। इसी दौरान नमित मल्होत्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा, प्लीज, बंटवारा मत कीजिए। यह बांटने का समय नहीं है। अमेरिका में रहने वाले भारतीय हमारा शुक्रिया अदा कर रहे हैं और तारीफ कर रहे हैं। आपको वहां रहने वाले भारतीयों की भावनाओं को भी समझना होगा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में भारतीय रहते हैं और राम सबके लिए एक ही हैं। रणबीर कपूर के गायब रहने पर उठे सवाल रामायण का टीजर रिलीज करने के लिए मुंबई और दिल्ली समेत देश के 8 बड़े शहरों में कार्यक्रम हुए। लेकिन इस बीच रणबीर कपूर की गैरमौजूदगी की चर्चा रही। फिल्म में भगवान राम का किरदार निभा रहे रणबीर खुद अपनी ही फिल्म के इतने बड़े इवेंट में नहीं पहुंचे। 2 अप्रैल की सुबह रणबीर कपूर का भगवान राम के रूप में पहला लुक सोशल मीडिया पर जारी किया गया। इसके बाद मुंबई में एक बड़ा मीडिया इवेंट रखा गया था। डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा मंच पर मौजूद थे मगर पूरी शाम बीत जाने के बाद भी रणबीर वहां नजर नहीं आए। संजय गुप्ता बोले- खोदा पहाड़, निकली चुहिया ‘रामायण’ का टीजर रिलीज होते ही फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक क्रिप्टिक पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने लिखा- ‘खोदा पहाड़… निकली चुहिया’। हालांकि गुप्ता ने अपनी पोस्ट में किसी फिल्म का नाम नहीं लिया, लेकिन लोग इसे सीधे तौर पर नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ से जोड़कर देख रहे हैं। फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें-