इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड पर गंभीर आरोप:डिसेबिलिटी प्रीमियर लीग के मैचों में दिव्यांग खिलाड़ी तो पानी पिला रहे, जो दिव्यांग नहीं वे खेलने उतरे

इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) पर आरोप है कि वह अपनी शीर्ष घरेलू प्रतियोगिता ‘डिसेबिलिटी प्रीमियर लीग’ में ऐसे खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति दे रहा है, जो तय मानकों के अनुसार दिव्यांग नहीं हैं। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना देखने वाले असली दिव्यांग क्रिकेटरों का रास्ता बंद हो रहा है। जय चरण और एलेक्स जर्विस जैसे इंग्लैंड के पूर्व इंटरनेशनल खिलाड़ियों के माता-पिता ने यह मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि लीग में उनके बेटों की जगह ऐसे खिलाड़ियों ने ले ली है, जो ईसीबी की लर्निंग डिसेबिलिटी (एलडी) यानी ‘सीखने की अक्षमता’ के मेडिकल मानदंड को पूरा ही नहीं करते हैं। एक अभिभावक का अनुमान है कि हालिया ड्राफ्ट में चुने गए 64 में से 12 खिलाड़ी बिना किसी दिव्यांगता के हैं। नियमों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस श्रेणी में खेलने के लिए खिलाड़ी का आईक्यू 75 या उससे कम होना चाहिए। लेकिन आरोप है कि ईसीबी ने लीग में ऐसे कई खिलाड़ियों को शामिल कर लिया है, जो इस सख्त पैमाने पर खरे नहीं उतरते। इनमें से कई तो मुख्यधारा का पेशेवर क्रिकेट खेलते हैं। उदाहरण के तौर पर इंग्लैंड की गेंदबाज एम्म अर्लोट, जिन्हें 2023 में ऑटिज्म और एडीएचडी डायग्नोज हुआ था, वो सामान्य क्रिकेट खेलती हैं। इस गड़बड़ी का सीधा असर होनहार खिलाड़ियों पर पड़ रहा है। लीग इतिहास में सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग एवरेज और स्ट्राइक रेट वाले जय चरण और एक दशक से खेल रहे एलेक्स जर्विस को सिर्फ ‘ड्रिंक्स कैरियर’ (पानी पिलाने वाले) की भूमिका तक सीमित कर दिया गया। हताश होकर जय ने टूर्नामेंट ही छोड़ दिया। यॉर्कशायर डिसेबिलिटी टीम के मैनेजर ओवेन जर्विस का कहना है कि गलत तरीके से एलडी श्रेणी में रखे गए नए खिलाड़ी ही सारी बैटिंग और बॉलिंग कर रहे हैं। असली खिलाड़ियों को सिर्फ फील्डिंग करने के लिए छोड़ दिया गया है, जिससे उनका मनोबल टूट रहा है। ईसीबी के डिसेबिलिटी क्रिकेट मैनेजर रिचर्ड हिल ने भी एक ईमेल में माना था कि ‘हाई-फंक्शनिंग’ (बेहतर क्षमता वाले) खिलाड़ियों के लीग में आने से चुनौतियां बढ़ रही हैं। हालांकि, ईसीबी के एक प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में कहा है कि लीग में सिर्फ 60 जगहें हैं, जिसके लिए कड़ा मुकाबला होता है। बोर्ड ने माना है कि पात्रता नियमों को लेकर बहस चल रही है और वे 2027 के सीजन तक इन पैमानों की समीक्षा करेंगे।
‘डब्बा इंजन’: तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने इरोड में चुनावी रैली के दौरान बीजेपी का मजाक उड़ाया | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:02 अप्रैल, 2026, 13:06 IST तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इरोड रैली में भाजपा की डबल इंजन सरकार का डब्बा इंजन कहकर मजाक उड़ाया, कहा कि एनडीए हार जाएगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (क्रेडिट: एक्स) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की डबल इंजन सरकार पर तीखा हमला किया और इसे “डब्बा इंजन” कहा। उनकी यह टिप्पणी तब आई जब वह विधानसभा चुनाव से पहले इरोड में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर निशाना साधते हुए स्टालिन ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पर भरोसा जताते हुए कहा कि चुनाव में एनडीए की हार होगी। रैली के दौरान, तमिलनाडु के सीएम ने एनडीए पर पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच एमएसएमई का “गला घोंटने” सहित “विश्वासघात” की एक श्रृंखला का भी आरोप लगाया। स्टालिन ने अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन की विफलताओं को गिनाया। उन्होंने कहा कि एनईईटी को रद्द करने में विफलता और सीएए को लागू करना लोगों के हितों के खिलाफ जाने वाले फैसले थे। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “अमेरिकी टैरिफ के मुकाबले बुनकरों की रक्षा करने में असफल होना और पश्चिम एशिया संकट के दौरान एमएसएमई का गला घोंटना” एनडीए के साथ विश्वासघात था। स्टालिन ने एडप्पादी के पलानीस्वामी पर भी कटाक्ष किया और उन्हें “अपने करीबी रिश्तेदार को ठेका देने वाले व्यक्ति” (संबांडी) के रूप में संदर्भित किया। उन्होंने सीधे नाम लिए बिना टीटीवी दिनाकरन, अंबुमणि रामदास और अन्य एआईएडीएमके नेताओं पर भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निशाना साधा। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 तमिलनाडु में चुनाव 23 अप्रैल, 2026 को होंगे और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। चुनाव में एक महीने से भी कम समय रह गया है और राज्य में चुनाव प्रचार जोरों पर है। 2121 विधानसभा चुनाव में क्या हुआ? पिछला तमिलनाडु विधानसभा चुनाव (2021) एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने जीता था। डीएमके ने 234 में से 133 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार कर लिया। इसके गठबंधन (सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस) को कुल 159 सीटें हासिल हुईं। एडप्पादी के पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने 66 सीटें जीतीं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 02 अप्रैल, 2026, 12:51 IST समाचार चुनाव ‘डब्बा इंजन’: तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने इरोड में चुनावी रैली के दौरान बीजेपी का मजाक उड़ाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)एमके स्टालिन बीजेपी आलोचना(टी)एमके स्टालिन रैली(टी)तमिलनाडु राजनीति(टी)डबल इंजन सरकार(टी)डब्बा इंजन टिप्पणी(टी)बीजेपी एनडीए गठबंधन(टी)इरोड चुनाव रैली(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव
‘क्वीन 2’ में कंगना रनोट नजर आएंगी:अप्रैल के आखिर तक शुरू होगी शूटिंग, जानिए कैसी होगी कहानी

कंगना रनोट की फिल्म ‘क्वीन’ के सीक्वल की तैयारी शुरू हो गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कंगना और डायरेक्टर विकास बहल ‘क्वीन 2’ की शूटिंग अप्रैल के अंत तक शुरू करेंगे। मिड डे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि फिल्म की कहानी पहली फिल्म का सीधा सीक्वल नहीं होगी, बल्कि यह खुद को खोजने और आत्मनिर्भरता के विषयों को दिखाएगी। इस बार कंगना का किरदार रानी छोटे शहर की नहीं, बल्कि शहर में रहने वाली लड़की होगी। कहानी में रानी एक ऐसी स्थिति का सामना करेगी, जो उसे खुद को खोजने के सफर पर ले जाएगी। फिल्म में दिखाया जाएगा कि वह अपनी पहचान, समझ और हिम्मत से जिंदगी की मुश्किलों का सामना कैसे करती है। इस बार उसका सफर उसे भारत के अलग-अलग शहरों में ले जाएगा। पहली फिल्म के कलाकार इस बार नजर नहीं आएंगे फिल्म में कंगना के अलावा पहली फिल्म के कलाकार जैसे राजकुमार राव और लीजा हेडन नजर नहीं आएंगे। बताया जा रहा है कि सपोर्टिंग रोल्स के लिए थिएटर कलाकारों को चुना गया है। शूटिंग की शुरुआत मुंबई के एक स्टूडियो में होगी, जहां उत्तर भारतीय शहर और रानी के घर के सेट तैयार किए जाएंगे। इसके बाद टीम अन्य मेट्रो शहरों में शूटिंग करेगी। फिल्म की शूटिंग लगभग तीन महीने में पूरी की जाएगी। ‘क्वीन’ (2014) को फैंटम फिल्म्स और वायकॉम18 मोशन पिक्चर्स ने प्रोड्यूस किया था। फैंटम फिल्म्स के 2018 में बंद होने के बाद, ‘क्वीन 2’ को विकास बहल अपने बैनर तले बना रहे हैं। वे फिल्म के राइटर भी हैं। इस फिल्म के बाद कंगना रनौत ‘तनु वेड्स मनु 3’ की शूटिंग शुरू करेंगी, जिसका डायरेक्शन आनंद एल राय करेंगे।
ब्रिटेन की जेलों में चोरी के फोन से ऑर्डर:जेलों में ड्रोन से ड्रग्स-हथियारों की डिलीवरी; कैदियों के परिवारों से पैसे वसूल रहे गैंग

ब्रिटेन की जेलों में ड्रोन के जरिए प्रतिबंधित सामान पहुंचाने का नया संकट बढ़ रहा है। कैदी जेल के अंदर से मोबाइल, ड्रग्स, चार्जर और चाकू जैसे हथियार तक ऑर्डर कर रहे हैं। ड्रोन ये पैकेट सीधे सेल की खिड़की या जेल के मैदान में गिरा रहे हैं। जज ने इसे उबर ईट्स जैसी डिलीवरी बताया है। 29 साल के शफकत उल्लाह मोहसेनी को 140 से ज्यादा अवैध ड्रोन उड़ानें का दोषी पाया गया है। उसने दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच इंग्लैंड की 9 जेलों में सप्लाई की और कैदियों के परिजनों से करीब 30 लाख रुपए वसूले। मार्च 2025 तक जेलों में ड्रोन देखे जाने की रिकॉर्ड 1,712 घटनाएं दर्ज हुईं। विशेषज्ञों के मुताबिक असली संख्या इससे ज्यादा हो सकती है, क्योंकि ड्रोन अक्सर रात में उड़ाए जाते हैं। पहले तस्करी के लिए दीवार के ऊपर से सामान फेंका जाता था। अब कमर्शियल ड्रोन सबसे आसान तरीका बन गए हैं। कैदी चोरी से रखे फोन से बाहर के गैंग को ऑर्डर देते हैं और भुगतान अक्सर उनके डरे हुए परिवार वाले करते हैं। गैंग द्वारा परिवार को डराया-धमकाया जाता है कि उन्होंने सामान का भुगतान नहीं किया, तो जेल में बंद उनके परिजन को नुकसान पहुंचाया जाएगा। खतरे से निपटने के लिए ब्रिटिश सरकार यूक्रेन में रूसी ड्रोन रोकने वाली तकनीक का अध्ययन कर रही है। जेलों की खिड़कियों पर ग्रिल और इमारतों के ऊपर जालियां लगाई जा रही हैं। साथ ही डिजिटल फॉरेंसिक, फिंगरप्रिंट और मेटाडाटा के जरिए तस्करों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। जेल के अंदर सामानों की कीमत 10 गुना तक जेल में सामानों की कीमत बाजार से 5-10 गुना तक वसूली जा रही है। इससे हिंसा, नशे की लत और वसूली का दबाव बढ़ा है। नेशनल ऑडिट ऑफिस के मुताबिक ड्रोन बड़े पैकेट सटीक तरीके से पहुंचा सकते हैं, इसलिए जेलों में नशा बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
सुबह उठकर सबसे पहले चाय पीते हैं आप? आयुर्वेद में इसकी सख्त मनाही, इन समस्याओं को हो जाएंगे शिकार

Last Updated:April 02, 2026, 12:54 IST Morning Tea Side Effects: सुबह उठकर खाली पेट चाय पीना एक कॉमन आदत है, लेकिन यह सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है. आयुर्वेद के अनुसार खाली पेट चाय पीने से शरीर में पित्त दोष बढ़ सकता है, जिससे एसिडिटी और जलन पैदा हो सकती है. चाय में मौजूद कैफीन और टैनिन पेट की अंदरूनी परत को प्रभावित करते हैं. इससे गैस, भारीपन और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. सुबह पहले गुनगुना पानी लें और नाश्ते के बाद ही चाय पिएं, ताकि इसके साइड इफेक्ट न हों. सुबह खाली पेट चाय पीने से एसिडिटी और जलन की समस्या हो सकती है. Tea Health Risks in Morning: चाय हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है. कई लोग सुबह उठकर सबसे पहले चाय पीना पसंद करते हैं. चाय के बिना उनकी आंख ही नहीं खुलती है. चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं है, बल्कि लोगों के लिए एक फीलिंग बन चुकी है. भारत में करोड़ों लोग सुबह की शुरुआत चाय के साथ करते हैं. माना जाता है कि सुबह के वक्त चाय पीने से शरीर अलर्ट हो जाता है और सुस्ती दूर हो जाती है, लेकिन आयुर्वेद इस आदत को सेहत के लिए नुकसानदायक मानता है. आयुर्वेद एक्सपर्ट्स की मानें तो चाय पीने की टाइमिंग बहुत जरूरी होती है. अगर आप खाली पेट चाय पीते हैं, तो इससे सेहत से जुड़ी कई परेशानियां पैदा हो सकती हैं. अगर आप सही समय पर चाय पिएंगे, तो इससे शरीर को नुकसान नहीं होगा. आयुर्वेद के अनुसार सुबह का समय शरीर में पित्त के संतुलन के लिए सबसे अच्छा होता है. अगर इस समय खाली पेट चाय पी जाती है, तो यह पित्त दोष को बढ़ा सकती है. पित्त बढ़ने का मतलब है शरीर में गर्मी और एसिडिटी का बढ़ना. इससे पेट में जलन, खट्टापन और बेचैनी महसूस हो सकती है. इसलिए सुबह सबसे पहले शरीर को हल्का और पौष्टिक आहार देना चाहिए, ताकि पाचन तंत्र धीरे-धीरे सक्रिय हो सके. चाय इस प्रक्रिया को बिगाड़ सकती है और पाचन पर बुरा असर डाल सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. आयुर्वेद ही नहीं, बल्कि मॉडर्न साइंस भी खाली पेट चाय को नुकसानदेह मानता है. चाय में मौजूद कैफीन और टैनिन पेट के खालीपन के चलते अंदरूनी परत पर असर डालते हैं. जब पेट खाली होता है, तब ये तत्व एसिड के स्तर को बढ़ा सकते हैं. इससे गैस, एसिडिटी और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जो लोग पहले से ही पेट से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह आदत और ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकती है. धीरे-धीरे यह समस्या क्रॉनिक भी बन सकती है. कई रिसर्च में पता चला है कि कैफीन का असर दिल और दिमाग पर भी असर डालता है. खाली पेट चाय पीने से कुछ लोगों को दिल की धड़कन तेज होने का अनुभव हो सकता है. कई लोग सोचते हैं कि चाय पीने से उन्हें एनर्जी मिल रही है, लेकिन असल में यह कुछ समय के लिए ही असर दिखाती है और बाद में थकान बढ़ सकती है. कुछ लोगों में खाली पेट चाय पीने की आदत कमजोरी, चक्कर या सिरदर्द जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है. कई बार यह आदत भूख को भी कम कर देती है, जिससे दिनभर सही मात्रा में भोजन नहीं हो पाता और शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता. आयुर्वेद एक्सपर्ट्स का मानना है कि चाय को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन इसे सही समय पर लेना बेहद जरूरी है. सुबह उठने के बाद पहले हल्का गुनगुना पानी पीना बेहतर माना जाता है. इसके बाद जब आप थोड़ा नाश्ता कर लें, तब चाय पी सकते हैं. इससे चाय का शरीर पर नकारात्मक असर काफी हद तक कम हो जाता है और आप इसके स्वाद का आनंद ले सकते हैं. अगर आपको पेट से जुड़ी कोई समस्या है, तो चाय का सेवन कम करें और इस बारे में डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य की सलाह लें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 02, 2026, 12:54 IST
नई घड़ा सफाई युक्तियाँ: गर्मियों में घड़ा का उपयोग करने से पहले जान सफाई का तरीका, इन युक्तियों से प्राप्त करें ठंडा और शुद्ध पानी

2 अप्रैल 2026 को 12:32 IST पर अपडेट किया गया नई घड़ा सफाई युक्तियाँ: गर्मियों के मौसम में ठंडे पानी के लिए अक्सर लोग मिट्टी के घड़े का उपयोग करते हैं। लेकिन इससे पहले जान लें इसे साफ करने का सही तरीका के बारे में… (टैग्सटूट्रांसलेट) नए मिट्टी के बर्तनों की सफाई के टिप्स (टी) मिट्टी के बर्तनों को कैसे साफ करें (टी) घड़ा सफाई टिप्स (टी) मिट्टी के बर्तनों की देखभाल (टी) गर्मियों में पानी के भंडारण के टिप्स (टी) प्राकृतिक जल शीतलन के तरीके (टी) मिट्टी के बर्तनों की स्वच्छता (टी) घरेलू उपचार सफाई
अगर शरीर में एक किडनी और एक आंख – कान ही होते तो क्या होता…साइंस क्या कहती है

होमफोटोनॉलेज अगर शरीर में एक किडनी और एक आंख – कान ही होते तो क्या होता-साइंस क्या कहती है Last Updated:April 02, 2026, 12:30 IST शरीर से एक किडनी निकालने के मामले अक्सर चर्चा में आ जाते हैं. धोखाधड़ी से एक किडनी निकाल लेने का गैंग देशभर में सक्रिय रहता आया है. ये कहा जाता है कि दूसरी किडनी का शरीर में होना बैकअप है. जानते हैं कि शरीर में जो अंग दो हैं, क्या उनके एक होने पर भी काम चल सकता है. आखिर ये दो क्यों दिए गए. विज्ञान कहता है कि दो आंख, दो कान, दो किडनी होना एक “इवोल्यूशनरी डिजाइन” है, जिसमें बैकअप + काम करने में बेहतरी + बॉडी सिमेट्री यानि शरीर का अपने सभी अंगों के साथ संतुलन का खास रोल होता है. इवोल्यूनरी डिजाइन इंसान द्वारा बनाया गया डिज़ाइन नहीं है, बल्कि यह एक लंबी प्राकृतिक प्रक्रिया का नतीजा है. (AI News18 IMAGE) करोड़ों सालों में जीवों का शरीर धीरे-धीरे बदलकर ऐसा बनता है जो उसके जीवित रहने और प्रजनन के लिए सबसे बेहतर हो. इसे सबसे बेहतर चार्ल्स डार्विन ने समझाया था. आप इसे इस तरह भी कह सकते हैं कि शरीर हमारे शरीर में ऐसा सिस्टम समय के साथ विकसित करती है, जो हमें जिंदा रखने में मदद करे. (AI News18 Image) अगर साइंस की भाषा में समझें तो इंसानी शरीर में कई अंग “अतिरिक्त क्षमता” के साथ आते हैं, यानी शरीर इस तरह बना है कि अगर एक खराब हो जाए तो दूसरा काम संभाल सके. वैसे आपको बता दें कि आप एक किडनी के साथ पूरी जिंदगी जी सकते हैं. एक आंख या एक कान से भी जीवन संभव है. हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार शरीर में ऐसी क्षमता होती है कि ताकि बीमारी और चोट में भी जीवित रह सकें. (AI News18 Image) Add News18 as Preferred Source on Google इवोल्यूशनरी का सिद्धांत कहता है, जिन लोगों के शरीर में बैकअप था, उनके बचने की संभावना ज्यादा थी, लिहाजा प्रकृति और शरीर में भी वही जीन आगे बढ़े हमारा शरीर दो हिस्सों में बनाकर जोड़ा हुआ ज्यादा लगता है. तकरीबन सभी जटिल इसी तरह बने हैं. यानी शरीर दो बराबर हिस्सों में बंटा होता है. (AI news18 image) बीबीसी साइंस फोकस का कहना है कि अधिकांश जानवर बाएं और दाएं दोनों ओर एक जैसे तरीके से बने होते हैं. इसी वजह से शरीर में दो आंख, दो कान, दो किडनी विकसित हुए. इसी वजह से शरीर के बीच में अंगर जैसे हृदय और लिवर एक होते हैं. (ai news18 image) वैसे दो अंग होने से शरीर का काम बेहतर” भी होता है. दो आंखें थ्री डी विजन की क्षमता रखती हैं, दूरी का अंदाज बेहतर तरीके से लगा लेती हैं. अगर एक ही आंख होती तो दुनिया फ्लैट दिखती, ड्राइविंग, खेल, चलना सभी कुछ मुश्किल होता. साइंस कहती है कि दो आंखों से हमारा दूरी और गहराई को ज्यादा बेहतर तरीके से समझता है. (ai news18 image) दो कान आवाज की दिशा को ज्यादा सटीक तरीके से समझ पाते हैं. तुरंत पता लग जाता है कि आवाज किधर से आ रही है. अगर एक कान होता तो आवाज तो सुनाई पड़ती लेकिन दिशा नहीं पता चलती. (ai news18 image) शरीर में दो किडनी होने से खून का फिटलर और बैकअप का काम बेहतर तरीके से होता है. अगर एक खराब हो जाए तो दूसरी काम संभाल लेती है. इसीलिए किडनी डोनेट भी कर सकते हैं. और इसके बाद भी सामान्य जीवन जीते हैं. वैज्ञानिक रिसर्च कहती हैं कि एक किडनी से जीवन संभव है, लेकिन दो होने से सुरक्षा बढ़ती है. (ai news18 image) अब मान लीजिए कि हमारी एक ही आंख, कान और किडनी होते तो क्या होता. एक आंख होने की सूरत में दुर्घटनाओं का जोखिम ज्यादा रहता. कान आवाज सुन पाते लेकिन उसकी दिशा का अंदाज नहीं लगा पाते. अगर एक किडनी होती और वो भी खराब हो जाती तो सीधे जीवन मरण की स्थिति बन जाती. मतलब शरीर ज्यादा असुरक्षित और नाजुक हो जाता. (news18 ai image) ऐसे में ये सवाल हो जाता है कि जब ऐसी ही बात है तो दिल और लिवर दो क्यों नहीं हैं. दिल एक ही होता है लेकिन उसमें पॉवरफुल पंप होता है. फिर ये भी कह सकते हैं कि दिल भी दो पंप जैसा ही है, क्योंकि इसकी दोनों साइड होती हैं. अगर दो दिल होते तो उनमें तालमेल मुश्किल होता. शरीर को उनसे काम लने के लिए ज्यादा एनर्जी खर्च करनी होती. (news18 ai image) लिवर के साथ खास बात ये है कि वो बहुत बड़ा और क्षमतावान होता है. और ये खुद को दोबारा पैदा भी कर सकता है. यानि उसको बैकअप की जरूरत ही नहीं है. तो आप कह सकते हैं कि दो आंख, दो कान और दो किडनी हमारे शरीर में अतिरिक्त लग्जरी नहीं है बल्कि स्मार्ट बॉयोलॉजिकल डिजाइन है. जो जीवन को बचाने वाला बैकअप देते हैं. इनके एक होने पर इंसान का जीवन ज्यादा जोखिम वाला और कम सक्षम होता. (news18 ai image) न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : April 02, 2026, 12:30 IST
हाई ब्लड प्रेशर में नजर आते हैं ये 3 लक्षण, तुरंत भागें डॉक्टर के पास, लापरवाही करने से चली जाएगी जान !

Last Updated:April 02, 2026, 12:11 IST Hypertension Symptoms: हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर समस्या है और अधिकतर लोगों में इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं. इस वजह से धीरे-धीरे शरीर को नुकसान होता रहता है और लोगों को पता ही नहीं चलता है. कुछ सीवियर मामलों में सिरदर्द, सांस फूलना और नाक से खून आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. ये लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. ब्लड प्रेशर लंबे समय तक ज्यादा रहे, तो यह हार्ट, ब्रेन और अन्य ऑर्गन्स को नुकसान पहुंचा सकता है. हाई ब्लड प्रेशर जब सीवियर हो जाता है, तब नाक से खून, तेज सिरदर्द और सांस फूलने जैसे संकेत नजर आते हैं. Hypertension Warning Signs: हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है और भारत में करोड़ों लोग इस परेशानी से जूझ रहे हैं. चिंता की बात यह है कि हाई बीपी के अधिकतर मरीजों को अपनी बीमारी के बारे में पता ही नहीं है. मेडिकल की भाषा में इस परेशानी को हाइपरटेंशन कहा जाता है. डॉक्टर्स हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर मानते हैं, क्योंकि इसके लक्षण आमतौर पर नजर नहीं आते हैं और लोगों को अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ जाता है. ऐसे में हाई बीपी को कंट्रोल करना जरूरी होता है, वरना यह मौत की वजह बन सकता है. कुछ मरीजों में हाई बीपी के लक्षण दिखते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. ये लक्षण अक्सर तब नजर आते हैं, जब बीपी खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है. अमेरिका के मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक जब शरीर की धमनियों में बहने वाले खून का दबाव लगातार ज्यादा रहता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है. सामान्य रूप से ब्लड प्रेशर 120/80 mm Hg से कम होना चाहिए. जब यह 120–129/
हिमाचल में अयोग्य घोषित विधायकों को नहीं मिलेगी पेंशन:विधानसभा में संशोधन विधेयक पारित, दल-बदल पर सख्ती, चैतन्य-देवेंद्र भुट्टो की पेंशन बंद

हिमाचल प्रदेश में अयोग्य घोषित विधायकों को पेंशन नहीं मिलेगी। कांग्रेस सरकार ने विधानसभा बजट सेशन में आज विपक्ष के विरोध के बावजूद संशोधन विधेयक पारित कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह व्यवस्था 14वीं विधानसभा या उसके बाद निर्वाचित होने वाले विधायकों पर लागू होगी। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और बीजेपी विधायक रणधीर शर्मा ने सदन में इसका विरोध किया था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को ‘हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026’ सदन में पेश किया था। इससे पहले, उन्होंने 2024 में इसी सदन में पारित पेंशन बंद करने वाले उस विधेयक को वापस लिया, जिसे राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं मिल पाई। लिहाजा दोबारा यह संशोधक विधेयक लाया गया। इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई विधायक दल-बदल के चलते संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करार दिया जाता है, तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह संशोधन विधेयक वर्ष 1971 के मूल अधिनियम में बदलाव से जुड़ा है, जिसके तहत विधायकों को भत्ते और पेंशन दी जाती है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 5 वर्ष तक विधायक रहने वाले सदस्य को 50 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलती है और अतिरिक्त कार्यकाल पर प्रत्येक वर्ष के लिए एक हजार रुपए की बढ़ोतरी का प्रावधान है। चैतन्य और देवेंद्र भुट्टों की पेंशन बंद इस विधेयक को मंजूरी के बाद पूर्व में गगरेट से कांग्रेस के विधायक चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ से पूर्व MLA देवेंद्र कुमार भुट्टो की पेंशन भी बंद हो जाएगी, क्योंकि इन दोनों पूर्व विधायकों ने फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट और पार्टी व्हिप का भी उल्लंघन किया। इसके बाद, स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने दोनों को अयोग्य घोषित ठहराया। दोनों पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे थे, जबकि दलबदल करने वाले अन्य 4 विधायक पहले भी हिमाचल विधानसभा में सदस्य रहे हैं। इस वजह से उनकी पेंशन पर कोई संकट नहीं है। मगर भविष्य में यदि कोई विधायक दल बदल करता है तो उस पर कानून के ने प्रावधान लागू होंगे। दल-बदल को हतोत्साहित करने के मकसद से संशोधन सीएम सुक्खू ने कहा- विधेयक का उद्देश्य दल-बदल को हतोत्साहित करना है। ऐसे में जनादेश की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और दलबदल जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए यह संशोधन आवश्यक माना गया है। सरकार का मानना है कि पेंशन जैसे दीर्घकालिक लाभ को जोड़कर दलबदल पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस संशोधन से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। हिमाचल में बनेगा किसान आयोग राज्य में किसानों की समस्याओं के समाधान और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ‘हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग विधेयक, 2026’ लाया गया है। इस विधेयक के जरिए राज्य में एक संस्थागत तंत्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, जो कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में नीतिगत सुझाव देगा। विधेयक के अनुसार, राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से राज्य किसान आयोग का गठन करेगी। यह आयोग कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा कर उनके विकास के लिए रणनीति तैयार करेगा। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव देगा। आयोग में एक अध्यक्ष और अधिकतम तीन गैर-सरकारी सदस्य होंगे। इसके अलावा कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य विभागों के निदेशक तथा कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों के कुलपति भी इसमें पदेन सदस्य के रूप में शामिल होंगे। आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा।
सुप्रीम कोर्ट नाराज- पश्चिम बंगाल में 7 न्यायिक अधिकारी बंधक:कहा- उन्हें खाना-पानी तक नहीं मिला, होम सेक्रेटरी-डीजीपी से संपर्क भी नहीं हुआ

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने पर नाराजगी जताई है। कहा कि उन्हें खाना-पानी तक नहीं मिला, होम सेक्रेटरी और डीजीपी से संपर्क भी नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस घटना की जांच CBI या NIA जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। एजेंसी सीधे कोर्ट को रिपोर्ट देगी। दरअसल, बुधवार रात को मालदा के माताबारी में वोटर लिस्ट में नाम कटने के बाद हजारों की संख्या में लोगों ने 7 न्यायिक अधिकारियों के ऑफिस को घेर लिया। उन्होंने 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा। पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप से उन्हें मुश्किल से बाहर निकाला गया। यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि SIR में इस इलाके में कितने लोगों ने नाम वोटर लिस्ट हटाए गए हैं। बीती रात क्या हुआ, 3 पॉइंट में जानें…. समय: दोपहर 2:00 बजे; न्यायिक अधिकारी मालदा के BDO ऑफिस पहुंचे एक अप्रैल को घटना से जुड़ी 5 तस्वीरें… हम खबर लगातार अपडेट कर रहे हैं








