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हिमाचल में अयोग्य घोषित विधायकों को नहीं मिलेगी पेंशन:विधानसभा में संशोधन विधेयक पारित, दल-बदल पर सख्ती, चैतन्य-देवेंद्र भुट्टो की पेंशन बंद

हिमाचल में अयोग्य घोषित विधायकों को नहीं मिलेगी पेंशन:विधानसभा में संशोधन विधेयक पारित, दल-बदल पर सख्ती, चैतन्य-देवेंद्र भुट्टो की पेंशन बंद

हिमाचल प्रदेश में अयोग्य घोषित विधायकों को पेंशन नहीं मिलेगी। कांग्रेस सरकार ने विधानसभा बजट सेशन में आज विपक्ष के विरोध के बावजूद संशोधन विधेयक पारित कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह व्यवस्था 14वीं विधानसभा या उसके बाद निर्वाचित होने वाले विधायकों पर लागू होगी। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और बीजेपी विधायक रणधीर शर्मा ने सदन में इसका विरोध किया था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को ‘हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026’ सदन में पेश किया था। इससे पहले, उन्होंने 2024 में इसी सदन में पारित पेंशन बंद करने वाले उस विधेयक को वापस लिया, जिसे राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं मिल पाई। लिहाजा दोबारा यह संशोधक विधेयक लाया गया। इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई विधायक दल-बदल के चलते संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करार दिया जाता है, तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह संशोधन विधेयक वर्ष 1971 के मूल अधिनियम में बदलाव से जुड़ा है, जिसके तहत विधायकों को भत्ते और पेंशन दी जाती है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 5 वर्ष तक विधायक रहने वाले सदस्य को 50 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलती है और अतिरिक्त कार्यकाल पर प्रत्येक वर्ष के लिए एक हजार रुपए की बढ़ोतरी का प्रावधान है। चैतन्य और देवेंद्र भुट्‌टों की पेंशन बंद इस विधेयक को मंजूरी के बाद पूर्व में गगरेट से कांग्रेस के विधायक चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ से पूर्व MLA देवेंद्र कुमार भुट्टो की पेंशन भी बंद हो जाएगी, क्योंकि इन दोनों पूर्व विधायकों ने फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट और पार्टी व्हिप का भी उल्लंघन किया। इसके बाद, स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने दोनों को अयोग्य घोषित ठहराया। दोनों पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे थे, जबकि दलबदल करने वाले अन्य 4 विधायक पहले भी हिमाचल विधानसभा में सदस्य रहे हैं। इस वजह से उनकी पेंशन पर कोई संकट नहीं है। मगर भविष्य में यदि कोई विधायक दल बदल करता है तो उस पर कानून के ने प्रावधान लागू होंगे। दल-बदल को हतोत्साहित करने के मकसद से संशोधन सीएम सुक्खू ने कहा- विधेयक का उद्देश्य दल-बदल को हतोत्साहित करना है। ऐसे में जनादेश की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और दलबदल जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए यह संशोधन आवश्यक माना गया है। सरकार का मानना है कि पेंशन जैसे दीर्घकालिक लाभ को जोड़कर दलबदल पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस संशोधन से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। हिमाचल में बनेगा किसान आयोग राज्य में किसानों की समस्याओं के समाधान और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ‘हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग विधेयक, 2026’ लाया गया है। इस विधेयक के जरिए राज्य में एक संस्थागत तंत्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, जो कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में नीतिगत सुझाव देगा। विधेयक के अनुसार, राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से राज्य किसान आयोग का गठन करेगी। यह आयोग कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा कर उनके विकास के लिए रणनीति तैयार करेगा। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव देगा। आयोग में एक अध्यक्ष और अधिकतम तीन गैर-सरकारी सदस्य होंगे। इसके अलावा कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य विभागों के निदेशक तथा कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों के कुलपति भी इसमें पदेन सदस्य के रूप में शामिल होंगे। आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा।

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हिमाचल प्रदेश में अयोग्य घोषित विधायकों को पेंशन नहीं मिलेगी। कांग्रेस सरकार ने विधानसभा बजट सेशन में आज विपक्ष के विरोध के बावजूद संशोधन विधेयक पारित कर दिया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह व्यवस्था 14वीं विधानसभा या उसके बाद निर्वाचित होने वाले विधायकों पर लागू होगी। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और बीजेपी विधायक रणधीर शर्मा ने सदन में इसका विरोध किया था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को ‘हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026’ सदन में पेश किया था। इससे पहले, उन्होंने 2024 में इसी सदन में पारित पेंशन बंद करने वाले उस विधेयक को वापस लिया, जिसे राष्ट्रपति से मंजूरी नहीं मिल पाई। लिहाजा दोबारा यह संशोधक विधेयक लाया गया। इस विधेयक में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई विधायक दल-बदल के चलते संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित करार दिया जाता है, तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। यह संशोधन विधेयक वर्ष 1971 के मूल अधिनियम में बदलाव से जुड़ा है, जिसके तहत विधायकों को भत्ते और पेंशन दी जाती है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 5 वर्ष तक विधायक रहने वाले सदस्य को 50 हजार रुपए मासिक पेंशन मिलती है और अतिरिक्त कार्यकाल पर प्रत्येक वर्ष के लिए एक हजार रुपए की बढ़ोतरी का प्रावधान है। चैतन्य और देवेंद्र भुट्‌टों की पेंशन बंद इस विधेयक को मंजूरी के बाद पूर्व में गगरेट से कांग्रेस के विधायक चैतन्य शर्मा और कुटलैहड़ से पूर्व MLA देवेंद्र कुमार भुट्टो की पेंशन भी बंद हो जाएगी, क्योंकि इन दोनों पूर्व विधायकों ने फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट और पार्टी व्हिप का भी उल्लंघन किया। इसके बाद, स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने दोनों को अयोग्य घोषित ठहराया। दोनों पहली बार चुनकर विधानसभा पहुंचे थे, जबकि दलबदल करने वाले अन्य 4 विधायक पहले भी हिमाचल विधानसभा में सदस्य रहे हैं। इस वजह से उनकी पेंशन पर कोई संकट नहीं है। मगर भविष्य में यदि कोई विधायक दल बदल करता है तो उस पर कानून के ने प्रावधान लागू होंगे। दल-बदल को हतोत्साहित करने के मकसद से संशोधन सीएम सुक्खू ने कहा- विधेयक का उद्देश्य दल-बदल को हतोत्साहित करना है। ऐसे में जनादेश की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और दलबदल जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए यह संशोधन आवश्यक माना गया है। सरकार का मानना है कि पेंशन जैसे दीर्घकालिक लाभ को जोड़कर दलबदल पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस संशोधन से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। हिमाचल में बनेगा किसान आयोग राज्य में किसानों की समस्याओं के समाधान और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ‘हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग विधेयक, 2026’ लाया गया है। इस विधेयक के जरिए राज्य में एक संस्थागत तंत्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, जो कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में नीतिगत सुझाव देगा। विधेयक के अनुसार, राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से राज्य किसान आयोग का गठन करेगी। यह आयोग कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा कर उनके विकास के लिए रणनीति तैयार करेगा। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव देगा। आयोग में एक अध्यक्ष और अधिकतम तीन गैर-सरकारी सदस्य होंगे। इसके अलावा कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य विभागों के निदेशक तथा कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों के कुलपति भी इसमें पदेन सदस्य के रूप में शामिल होंगे। आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा।

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