धुरंधर 2 का वर्ल्डवाइड कलेक्शन ₹1,466.47 करोड़ हुआ:14वें दिन भारत में फिल्म ने ₹20.10 करोड़ कमाए

रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 का दुनिया भर में कलेक्शन करीब 1,466.47 करोड़ हो गया है। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, रिलीज के चौदहवें दिन (बुधवार) फिल्म ने भारत में 20.10 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। बता दें कि फिल्म पहले से ही दुनिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली चौथी भारतीय फिल्म बन चुकी है। अब फिल्म के आगे दंगल, बाहुबली 2 और पुष्पा 2 हैं। धुरंधर 2 का भारत में कुल नेट कलेक्शन 920.02 करोड़ रुपए और ग्रॉस कलेक्शन 1,101.47 करोड़ रुपए हो गया। ग्रॉस कलेक्शन टिकट से कुल कमाई और नेट कलेक्शन टैक्स के बाद की कमाई होती है। ओवरसीज में फिल्म ने 365.00 करोड़ रुपए कमाए, जिससे वर्ल्डवाइड ग्रॉस 1,466.47 करोड़ रुपए पहुंच गया। चौदहवें दिन फिल्म के हिंदी वर्जन ने 18.75 करोड़ रुपए की सबसे ज्यादा कमाई की। वहीं, तेलुगु में 85 लाख रुपए, तमिल में 30 लाख रुपए, कन्नड़ में 15 लाख रुपए और मलयालम में 5 लाख रुपए का कलेक्शन हुआ। धुरंधर को शानदार रिस्पॉन्स मिला था धुरंधर के पहले पार्ट ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और दुनियाभर में करीब 1,307 करोड़ रुपए कमाए। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 1,005.85 करोड़ रुपए रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग 840 करोड़ रुपए हुआ। वहीं, 894.49 करोड़ रुपए की कमाई के साथ ही यह हिंदी भाषा में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। विदेशी बाजारों में भी फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब 299.5 करोड़ रुपए कमाए। अमेरिका और कनाडा में 193.06 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर बाहुबली 2 का रिकॉर्ड भी तोड़ा। दिलचस्प बात यह थी कि फिल्म को खाड़ी देशों में रिलीज की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद शानदार सफलता मिली। साथ ही यह भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ‘A’ रेटेड फिल्म बनी। ……..……..……..…….. धुरंधर 2 से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… धुरंधर 2 रिव्यू; रणवीर की फिर दमदार परफॉर्मेंस: नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
हनुमान जयंती पर खैरुआ सरकार धाम में उमड़ी भारी भीड़:दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें, करीब 2 एकड़ क्षेत्र में फैला मंदिर

सतना में हनुमान जयंती के अवसर पर गुरुवार को जिले के हनुमान मंदिरों में सुबह से भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। खैरुआ सरकार धाम में भी सुबह 5 बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुबह की आरती में शामिल होकर भक्तों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया, वहीं मंदिर परिसर में कई जगह भंडारे का आयोजन भी किया गया। 500 साल पुरानी प्रतिमा से जुड़ी मान्यता नागौद विकासखंड मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर दूर खैरुआ गांव में स्थित खैरुआ सरकार हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा करीब 500 साल पुरानी मानी जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस स्थान पर आज मंदिर स्थित है, वहां हनुमान जी के स्वयं प्रकट होने की मान्यता प्रचलित है। मंदिर के पुजारी, जिनका परिवार चार पीढ़ियों से यहां सेवा दे रहा है, बताते हैं कि यह आस्था वर्षों से चली आ रही है और श्रद्धालु इसी विश्वास के साथ यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। हर मंगलवार-शनिवार को लगती है भीड़ मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुले रहते हैं। यहां रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जबकि मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से भारी भीड़ उमड़ती है। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त भंडारे का आयोजन भी करते हैं। मान्यता है कि जो श्रद्धालु लगातार पांच से सात मंगलवार तक 11 परिक्रमा लगाकर सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। करीब 2 एकड़ क्षेत्र में फैला यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के कारण क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है।
मां बनना और भी आसान और सस्ता, भारत के IVF में पहली बार AI की हुई एंट्री, इन कारणों से बढ़ रहा बांझपन

Last Updated:April 02, 2026, 11:00 IST आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब आईवीएफ में भी आ गया है. एआई की सहायता से अब मां बनाना और भी आसान हो जाएगा. यह जानकारी गौडियम आईवीएफ की निदेशक डॉ. मनिका खन्ना न दी है. इस उपलब्धि का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सैयद शाहनवाज हुसैन ने किया. इस टेक्नोलॉजी के बाद इलाज की कीमत लगभग 15 से 20% तक कम हो जाएगी. नई दिल्ली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब आईवीएफ में भी आ गया है. इसके जरिए मां बनना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है. सरल होने के साथ-साथ अब आईवीएफ का इलाज सस्ता भी होने जा रहा है. लगभग 15 से 20% तक आईवीएफ का इलाज सस्ता हो जाएगा. यह जानकारी दी है देश में पहली बार आईवीएफ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दो टूल्स जोकि एसआईडी यानी स्पर्म आइडेंटिफिकेशन डिवाइस और एरिका यानी एम्ब्रियो रैंकिंग इंटेलिजेंट क्लासिफिकेशन असिस्टेंट को लॉन्च करने वाले सेंटर गौडियम आईवीएफ की निदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने. गौडियम आईवीएफ की इस उपलब्धि का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सैयद शाहनवाज हुसैन जोकि पूर्व लोकसभा सदस्य हैं उन्होंने किया. आईवीएफ 2.0 के क्लीनिक साइंटिस्ट और ग्लोबल कम्युनिकेशंस के निदेशक जाइल्स पामर ने भी इस कदम की सराहना की. निदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने खास बातचीत में बताया कि स्पर्म आइडेंटिफिकेशन डिवाइस और एम्ब्रियो रैंकिंग इंटेलिजेंट क्लासिफिकेशन असिस्टेंट के जरिए सही एम्ब्रियो को चुनना आसान हो जाएगा जिससे सक्सेस रेट बढ़ेगा. इसकी कीमत भी घट जाएगी. इलाज की कीमत लगभग 15 से 20% तक कम हो जाएगी. बात करें इसके दुष्प्रभाव की तो इसका दुष्प्रभाव कोई भी नहीं है, क्योंकि हम शरीर के अंदर इसके जरिए कोई सुई या कुछ डाल नहीं रहे हैं. ऐसे में यह एकदम सुरक्षित है. तमाम रिसर्च और टेस्टिंग के बाद ही इसे लाया गया है. उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इन दो टूल्स को आईवीएफ में लाने वाला उनका सेंटर देश का पहला सेंटर है. यकीनन इसके जरिए आईवीएफ पर लोगों का विश्वास और बढ़ेगा क्योंकि इलाज सरल, सस्ता और आसान हो जाएगा. उन्होंने बताया कि यूनाइटेड स्टेट में इसके जरिए ट्रीटमेंट चल रहा है जोकि सफल है. भारत में 15% लोग बांझपन का शिकारनिदेशक डॉ. मनिका खन्ना ने खास बातचीत में बताया कि भारत देश में 15% लोग बांझपन का शिकार है. सबसे हैरानी की बात यह है कि उसमें सिर्फ दो प्रतिशत लोग ही आगे आकर आईवीएफ का इलाज करवा रहे हैं, ताकि वो मां-बाप बनने का सुख प्राप्त कर सकें. उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं है कि बांझपन सिर्फ महिला में ही है, बांझपन पुरुषों में भी है. शादी के बाद अगर बच्चा नहीं हो रहा है तो 2009 से लेकर अब तक उन्होंने देखा है कि ऐसे मामलों में 40% महिलाएं और 40% पुरुष में बांझपन पाया जाता है. जबकि 20% मामलों में दोनों ही बांझपन का शिकार होते हैं, जिस वजह से यह कहना गलत है कि सिर्फ महिला में ही कमी है. कमी दोनों तरफ से होती है. इन कारणों से बढ़ रहा बांझपनडॉ. मनिका खन्ना ने बताया कि बांझपन जेनेटिक नहीं होता है. बल्कि इसका प्रमुख कारण तनाव है और मिलावट खाना है. इसके अलावा प्रदूषण और बढ़ता हुआ नशा भी इसके कारण बन रहे हैं. आजकल महिलाएं और लड़कियां देर से शादी कर रही है जोकि अच्छा फैसला है क्योंकि वो पहले आत्मनिर्भर बनकर ही शादी करना चाह रही है. इसके लिए एक अच्छा विकल्प है कि वह अपने आगे यानी अंडों को फ्रिज करवा लें. अंडों को 10 साल तक फ्रीजिंग में रखा जा सकता है. इसके लिए मामूली सा मेंटेनेंस चार्ज देना होता है. इसके बाद दोबारा अपने अंडों के जरिए लड़कियां मां बन सकती हैं. About the Author Mohd Majid with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें First Published : April 02, 2026, 11:00 IST
आजकल कम उम्र में छाती के बाल क्यों हो जाते हैं सफेद? क्या होती है इसकी वजह, डॉक्टर से जानें कैसे करें बचाव

Premature Greying of Body Hair: आजकल युवाओं के बाल तेजी से सफेद हो रहे हैं. सिर और दाढ़ी के बाल ही नहीं, बल्कि कम उम्र में छाती के बाल भी सफेद होने लगे हैं. इसे मेडिकल भाषा में प्रीमेच्योर ग्रेइंग कहा जाता है. आमतौर पर 50-60 साल की उम्र के बाद लोगों पर यह सफेदी आती थी, लेकिन अब युवा इस समस्या से परेशान नजर आ रहे हैं. कई लोग मानते हैं कि छाती के बाल सफेद होना कोई बीमारी है, जबकि कुछ लोग इसे प्रीमेच्योर ग्रेइंग से जोड़ते हैं. अब सवाल है कि कम उम्र में छाती के बाल क्यों सफेद हो रहे हैं, इसकी क्या वजह है और इससे किस तरह बचा जा सकता है? चलिए इसके जवाब डॉक्टर से जान लेते हैं. यूपी के कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर और डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. युगल राजपूत ने News18 को बताया कि हमारे बालों का काला रंग मेलानिन नामक पिगमेंट के कारण होता है. जब शरीर में इसकी कमी होने लगती है, तो बाल सफेद होने लगते हैं. यह पिगमेंट शरीर के सभी हिस्सों पर असर डालता है. इसकी वजह से सिर और दाढ़ी ही नहीं, बल्कि छाती के बाल भी सफेद होने लगते हैं. यह पिगमेंट कई कारणों से कम हो सकता है. इनमें विटामिन्स की कमी, अत्यधिक तनाव, खराब खानपान, जेनेटिक और हार्मोनल फैक्टर्स शामिल हो सकते हैं. हेल्थ चेकअप से सही वजह का पता लगाया जा सकता है. छाती के बाल सफेद होने की बड़ी वजह पोषक तत्वों की कमी : डॉक्टर ने बताया कि आजकल की डाइट में पोषक तत्वों की कमी सफेद बालों का एक बड़ा कारण है. विटामिन B12 की कमी से एनीमिया हो सकता है, जो सीधे तौर पर बालों के सफेद होने से जुड़ा है. शरीर में आयरन और कॉपर की कमी मेलानिन के उत्पादन को प्रभावित करती है. इसकी कमी बालों की रंगत छीन लेती है. खराब लाइफस्टाइल और स्मोकिंग : बीड़ी-सिगरेट पीने से हमारी ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे बालों के फॉलिकल्स तक सही मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते हैं. इसकी वजह से बाल सफेद होने लगते हैं. स्मोकिंग करने वालों में समय से पहले बाल सफेद होने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. क्रोनिक स्ट्रेस : अगर आप लंबे समय से तनाव से जूझ रहे हैं, तो इससे आपके बाल समय से पहले सफेद हो सकते हैं. तनाव केवल दिमाग को ही नहीं, बल्कि शरीर के सेल्स को भी प्रभावित करता है. स्ट्रेस की वजह से शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जो मेलानोसाइट्स यानी मेलानिन बनाने वाले सेल्स को नुकसान पहुंचाता है. हार्मोनल असंतुलन : शरीर में अगर हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ जाए, तो इससे भी सफेद बालों की समस्या पैदा हो सकती है. थायराइड की समस्या या शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में बदलाव भी छाती के बालों के सफेद होने का कारण बन सकता है. अगर आपको हार्मोनल समस्या है, तो इससे आपके बालों का रंग बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. जेनेटिक्स : अगर आपके परिवार में पिता या दादा को कम उम्र में बाल सफेद होने की समस्या रही है, तो आपके साथ भी ऐसा होने की संभावना बढ़ जाती है. यह आपके DNA में होता है और इसे रोकना थोड़ा मुश्किल होता है. हालांकि आप सही डाइट और लाइफस्टाइल अपनाएं, तो इसे रोकने में मदद मिल सकती है. सफेद बालों से बचाव कैसे करें? डॉक्टर युगर राजपूत के अनुसार सफेद हो चुके बालों को प्राकृतिक रूप से वापस काला करना मुश्किल है, लेकिन इस प्रक्रिया को धीमा जरूर किया जा सकता है. अपनी डाइट में अंडा, मशरूम, हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स और डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल करें, ताकि विटामिन B12 और जिंक की पूर्ति हो सके. आप स्मोकिंग बंद कर दें. यह न केवल आपके फेफड़ों बल्कि आपके लुक्स के लिए भी जरूरी है. योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि स्ट्रेस कम हो. रात में 7-8 घंटे की नींद लेना भी जरूरी है. छाती के बालों पर हार्श साबुन या बॉडी वॉश का इस्तेमाल कम करें, क्योंकि इनमें मौजूद सल्फेट बालों को डैमेज कर सकते हैं. अगर आपके बाल बहुत तेजी से सफेद हो रहे हैं और साथ में कमजोरी या थकान महसूस होती है, तो एक बार डर्मेटोलॉजिस्ट से जरूर मिलें. वे ब्लड टेस्ट के जरिए सही वजह का पता लगाकर ट्रीटमेंट कर सकते हैं.
ईरान जंग में ट्रम्प अपने 5 मकसद से कितने दूर:पहले ही दिन खामेनेई की हत्या, मिसाइल इंडस्ट्री तबाह की, लेकिन परमाणु खतरा बरकरार

अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया। इसके कुछ ही देर बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने 8 मिनट का वीडियो जारी करके जंग के टारगेट बताए। उन्होंने कहा कि उनका मकसद अमेरिकी लोगों की रक्षा करना और ईरान से आने वाले खतरों को खत्म करना है। अब ट्रम्प के बताए टारगेट्स के मुताबिक समझते हैं कि अमेरिका को जंग में अब तक कितनी कामयाबी मिली है। उसे क्या हासिल हुआ है और क्या अब भी अधूरा है। 1. मिसाइल और हथियार इंडस्ट्री खत्म करना अमेरिका और इजराइल का अहम मकसद था कि ईरान की मिसाइल ताकत को कमजोर कर दिया जाए, ताकि वह दूर तक हमला न कर सके। इसके लिए दोनों देशों ने बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च करने वाले ठिकाने (लॉन्चर), मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों, मिसाइल स्टोर करने के गोदाम और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर हमले किए। इन हमलों से ईरान की मिसाइल क्षमता को काफी नुकसान हुआ है। कई लॉन्चर और फैक्ट्रियां नष्ट हो चुकी हैं। इससे उसकी नई मिसाइल बनाने की रफ्तार धीमी पड़ी है। लेकिन अभी भी ईरान के पास काफी मिसाइलें बची हुई हैं और वह हमले कर रहा है। ईरान ने अपनी मिसाइलें अलग-अलग जगहों पर छिपाकर रखी हैं। कई ठिकाने जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) हैं, जिन्हें पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल है। कुछ मोबाइल लॉन्चर होते हैं, जिन्हें जल्दी-जल्दी जगह बदलकर इस्तेमाल किया जा सकता है। ईरान अब सिर्फ मिसाइलों पर निर्भर नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में ड्रोन (मानवरहित विमान) का भी इस्तेमाल कर रहा है। 2. नौसेना को खत्म करना अमेरिका और इजराइल का टारगेट था कि ईरान की नौसेना को कमजोर या लगभग खत्म कर दिया जाए, ताकि वह समुद्र के रास्ते कोई बड़ा हमला या बाधा न डाल सके। इसके लिए युद्धपोत, पनडुब्बियां, नौसैनिक ठिकाने और बंदरगाह और हथियार और मिसाइल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाया गया। मार्च की शुरुआत में अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागकर श्रीलंका के पास मौजूद ईरानी वॉरशिप IRIS डेना को डुबो दिया। इस जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 80 लोगों की मौत हुई। यह हमला इसलिए अहम था क्योंकि यह जहाज लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने में सक्षम था और हाल ही में भारत के साथ एक नौसैनिक अभ्यास में भी शामिल हुआ था। इन हमलों से ईरान के कई बड़े जहाज और संसाधन नष्ट हो गए। समुद्र में उसकी ताकत पहले से कमजोर हो गई। लंबी दूरी पर ऑपरेशन करने की क्षमता घट गई। हालांकि वह अब भी समुद्र में खतरा पैदा करने की क्षमता रखता है। ईरान के पास छोटी-छोटी तेज नावें (स्पीड बोट्स) हैं, जिनका इस्तेमाल वह अब भी कर सकता है। वह समुद्र में बारूदी सुरंग (माइन) बिछाने जैसी रणनीति अपना सकता है जो होर्मुज जैसे संकरे समुद्री रास्तों में छोटी ताकत भी बड़ा असर डाल सकती है। 3. ईरान समर्थित मिलिशिया को कमजोर करना अमेरिका और इजराइल चाहते थे कि ईरान जिन हथियारबंद ग्रुप्स को समर्थन देता है, उन्हें कमजोर कर दिया जाए। ये ग्रुप्स अलग-अलग देशों में ईरान के लिए काम करते हैं और जरूरत पड़ने पर हमले भी करते हैं। इसलिए इन्हें ‘प्रॉक्सी’ ताकत कहा जाता है। जंग के दौरान इन्हें निशाना बनाया गया। इजराइल ने खास तौर पर लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए। कई कमांडरों और लड़ाकों को मार गिराया। इससे इनकी ताकत कमजोर हुई, लेकिन उनका असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका के लिए असल चुनौती यह है कि ये मिलिशिया किसी एक देश या एक जगह तक सीमित नहीं हैं। इराक, लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों के अलग-अलग इलाकों में इनके नेटवर्क फैले हुए हैं। इनके पास स्थानीय सपोर्ट भी होता है और अपनी अलग व्यवस्था भी होती है। ऊपर से ईरान इनकी मदद करता रहता है, जिससे ये जल्दी संभल जाते हैं। इसी वजह से, हमलों के बावजूद ये पूरी तरह खत्म नहीं हुए। इराक में अब भी कुछ गुट अमेरिकी ठिकानों पर रॉकेट से हमले कर रहे हैं। हिज्बुल्लाह पर लगातार हमले हुए हैं, लेकिन वह अब भी एक मजबूत ताकत बना हुआ है और पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। 4. ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का सबसे बड़ा मकसद यह था कि ईरान किसी भी हालत में परमाणु हथियार न बना सके। ट्रम्प बार-बार कह चुके हैं कि ईरान के पास कभी परमाणु बम नहीं होना चाहिए। अमेरिका ने पिछले साल ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ। फिर भी अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कुछ समृद्ध यूरेनियम अब भी मौजूद है। यह यूरेनियम जमीन के नीचे गहरी सुरंगों या बंकर जैसे ठिकानों में छिपा हो सकता है, जहां तक हवाई हमलों का असर पूरी तरह नहीं होता। अगर इन्हें पूरी तरह नष्ट करना हो, तो जमीन पर सेना भेजनी पड़ सकती है, जो बेहद जोखिम भरा कदम होगा और जंग को और बड़ा बना सकता है। 5. ईरान में सत्ता परिवर्तन ट्रम्प ने ईरान की जनता से सरकार के खिलाफ उठने की अपील भी की थी। लेकिन अभी तक ऐसा कोई बड़ा जन आंदोलन नहीं हुआ है। हालांकि ट्रम्प का दावा है कि उन्होंने रेजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन कर दिया है, क्योंकि हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े अधिकारी मारे गए। लेकिन जमीन पर अलग स्थिति दिखाई देती है। अब नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई बने हैं, जो सख्त रुख वाले माने जाते हैं और सेना के ताकतवर हिस्से के करीब हैं। कुल मिलाकर, ईरान की सरकार अब भी पहले जैसी ही है। ईरान की सरकार अब भी धार्मिक और कड़े नियंत्रण वाली है। अमेरिका के खिलाफ उसका रुख भी पहले जैसा ही है। ——————————— ईरान जंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरान पर 850 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं: 2 साल में बनता है 34 करोड़ का यह हथियार, जंग खिंची तो स्टॉक खत्म होने की आशंका ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका ने बड़े पैमाने पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इसे अमेरिकी हथियारों के जखीरे का अहम हथियार माना जाता है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक चार हफ्तों में 850 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं। अनुमान है
तमिलनाडु चुनाव पोल: तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की बंपर रैली, इस प्री पोल सर्वे का अनुमान एआईएडीएमके-बीजेपी की उड़ी नींद

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले आए लोकपाल के ताजा सर्वे में राज्य की राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी गई है। इस सर्वे के मुताबिक, जनता के बीच अभी किस पार्टी का मनोबल है, इसका आकलन किया जा सकता है। लोक पोल के इस सर्वे में बताया गया है कि राज्य में एक बार फिर डीएमके गठबंधन की सरकार पर नजरें टिकी हुई हैं. तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभाएं हैं और सरकार बनाने के लिए 118 विधानसभाओं की जरूरत है। सर्वे के मुताबिक डीएमके और कांग्रेस गठबंधन को 181 से 189 सीटें मिल सकती हैं। इसका मतलब यह है कि इस गठबंधन के बहुमत के आंकड़ों को बहुत आसानी से पार किया जा सकता है और स्थिर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार बन सकती है। वहीं एआईएडीएमके और बीजेपी का गठबंधन इस दौड़ में काफी पीछे दिख रहा है. इस गठबंधन को सिर्फ 38 से 42 सदस्यों की मुलाकात का अनुमान है, जो बहुमत से काफी दूर है। विजय थलापति की पार्टी को लेकर सर्वेक्षण के नतीजे इस बार चुनाव में एक नया चेहरा भी चर्चा में है. अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की पार्टी टीवीके पहली बार चुनाव लड़ रही है। सर्वे के मुताबिक इस पार्टी को 8 से 10 टिकटें मिल सकती हैं. हालाँकि पर्वतारोहण कम दिख रहे हैं, लेकिन उनके आगमन ने राजनीति का माहौल जरूर बदल दिया है। अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो डीएमके गठबंधन को करीब 40.1% वोट मिल रहे हैं। एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन को करीब 29% वोट मिल सकते हैं। वहीं टीवीके को 23.9% वोट मिलने का अनुमान है, जो एक नई पार्टी के लिए काफी बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। थलापति की पार्टी का वोट शेयर खास बात यह है कि सर्वे में पहली बार चुनाव में जीत थलापति की पार्टी का वोट शेयर एआईएडीएमके के काफी करीब पहुंच रही है। इससे साफ है कि युवाओं और नए मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ बन रही है। मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी सर्वे में लोगों की राय सामने आई है. इसमें एमके स्टाइल सबसे आगे हैं और इन्हें 41% लोगों ने पसंद किया है। दूसरे नंबर पर एआईएडीएमके के ई पलानीस्वामी हैं, जिनमें 24.1% लोगों का समर्थन मिला है। वहीं विजय थलापति को 27.1% लोग मुख्यमंत्री की तरह पसंद कर रहे हैं, जो उन्हें एक मजबूत नए नेता के रूप में जीत दिलाते हैं। तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन की स्थिति मजबूत लोकपाल के सर्वेक्षण से साफ संकेत मिल रहा है कि तमिलनाडु में ब्लॉक डीएमके गठबंधन मजबूत स्थिति में है और कंपनी सरकार बना सकती है। लेकिन विजय थलापति की शुरूआत ने भविष्य की राजनीति को नई दिशा जरूर दी है। असली नतीजे चुनाव के बाद ही साफ होंगे, लेकिन अभी के मोन्ट में दिलचस्प मुकाबला बन गया है। ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल ओपिनियन पोल: बीजेपी को मिल सकती है बढ़त? कितने प्रतिशत लोग ममता बनर्जी को सीएम बनाना चाहते हैं, प्री पोल सर्वे का आकलन वाला (टैग्सटूट्रांसलेट)टीएन चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु चुनाव सर्वेक्षण(टी)डीएमके बनाम एआईएडीएमके(टी)विजय थलापति टीवीके(टी)एमके स्टालिन(टी)तमिलनाडु राजनीति हिंदी(टी)टीएन चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु चुनाव सर्वे(टी)डीएमके बनाम एआईएडीएमके(टी)विजय थलपति टीवीके(टी)एमके स्टालिन(टी)तमिलनाडु राजनीति
तेजाजी नगर इलाके में बाइक में आग:पूरी जलकर हुई खाक,बदमाशो ने दो बाइको को किया आग के हवाले

इंदौर के तेजाजी नगर में लिबोंदी गेट के सामने एक बाइक में देर रात आग लग गई। आग की सूचना के बाद पुलिस की गाडी वहां पहुंची। आसपास के लोगो ने आग पर काबू करने का प्रयास किया। लेकिन आग पूरी तरह से जलकर खाक हो गई। तेजाजी नगर पुलिस के मुताबिक लिंबोदी गेट पर रात डेढ बजे के लगभग एक बाइक में आग लगने की सूचना मिली थी। जानकारी के बाद यहां पुलिस की गाडी पहुंची थी। लेकिन फायर ब्रिगेड को मामले की सूचना नही दी गई। बिल्डीग के रहवासियो ने यहां आग को बुझाने का प्रयास किया। लेकिन आग से पूरी बाइक जलकर खाक हो गई। बदमाशो ने लगाई आग बाणगंगा में भी रविन्द्र पाल निवासी वृंदावन कॉलोनी किला मैदान में भी अज्ञात बदमाशो ने उनके यहां खडी दो बाइक में आग लगा दी। रविद्र पाल ने बताया कि बाइक भागवत राव और प्रेमसिंह कीर की थी। रात में उन्हें आग लगने की जानकारी लगी तो वह उठे। इस दौरान आसपास के लोगो की मदद से आग पर काबू किया गया। पुलिस के मुताबिक आसपास के सीसीटीवी कैमरो से आग लगाने वाले बदमाशो की जानकारी निकाली जा रही है।
हिमाचल में चिट्टा तस्करों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक:प्रधान की जाएगी कुर्सी, सरकार ने कानून बदला; डिफाल्टर-ऑडिट रिकवरी वाले भी अयोग्य

हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी में शामिल लोग पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। विधानसभा में आज (गुरुवार को) हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 बिना चर्चा के पारित कर दिया गया। अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलते ही यह प्रावधान प्रभावी हो जाएगा और चिट्टा तस्करी से जुड़े लोग चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह द्वारा बीते बुधवार को इस विधेयक को सदन में पेश किया था। चुने जाने के बाद भी जाएगी कुर्सी इस संशोधन के तहत पंचायत जनप्रतिनिधियों पर भी सख्त प्रावधान लागू होंगे। यदि कोई प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, बीडीसी सदस्य या जिला परिषद सदस्य चुने जाने के बाद चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाया जाता है और उस पर आरोप तय हो जाते हैं, तो उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी। ग्राम सभाओं के कोरम में बड़ा बदलाव विधेयक में ग्राम सभाओं के कोरम को लेकर भी अहम संशोधन किया गया है। अब तक ग्राम सभा के लिए 25 प्रतिशत परिवारों की उपस्थिति अनिवार्य थी, लेकिन नए प्रावधान के तहत इसे बदल दिया गया है। अब कुल परिवारों की बजाय कुल मतदाताओं में से 10 प्रतिशत की उपस्थिति को कोरम माना जाएगा। डिफाल्टर भी नहीं लड़ सकेंगे चुनाव संशोधन में सहकारी बैंकों और सोसाइटियों के डिफाल्टरों को भी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा जिन लोगों पर पंचायत ऑडिट में रिकवरी लंबित है, वे भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। सरकार का उद्देश्य पंचायतों में वित्तीय अनुशासन लाना और साफ-सुथरी छवि वाले प्रतिनिधियों को बढ़ावा देना है। 3600 पंचायतों में चुनाव से पहले बड़ा असर प्रदेश की करीब 3600 पंचायतों में 31 मई से पहले चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके लिए 7 अप्रैल तक आरक्षण रोस्टर तय किया जाना है। हर चुनाव में 60 हजार से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं। ऐसे में यह संशोधन बड़ी संख्या में संभावित उम्मीदवारों को प्रभावित करेगा और पंचायत चुनाव की तस्वीर बदल सकता है।गों को प्रभावित करेगा।
बंगाल में एसआईआर हटाने का विरोध: मालदा में 7 न्यायिक अधिकारियों का 8 घंटे तक घेराव | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:02 अप्रैल, 2026, 08:53 IST विरोध प्रदर्शन कालियाचक 2 खंड विकास कार्यालय के बाहर दिन में शुरू हुआ और देर रात तक जारी रहा। बंगाल के मालदा में 7 न्यायिक अधिकारियों का घंटों तक घेराव. चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में 60 लाख से अधिक मतदाताओं के रिकॉर्ड में कथित विसंगतियों से संबंधित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामलों को संभालने वाले सात न्यायिक अधिकारियों को बुधवार शाम को मालदा जिले के कालियाचौक क्षेत्र में एक बीडीओ कार्यालय के अंदर सीमित कर दिया गया, जब स्थानीय निवासियों ने विरोध में परिसर को घेर लिया। सूत्रों के मुताबिक, सात अधिकारियों में से तीन महिलाएं हैं। पुलिस अधिकारियों की एक टीम ने करीब आठ घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें बचाया. जब उन्हें पुलिस वैन में ले जाया जा रहा था तो भीड़ ने पथराव कर दिया. घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। विरोध प्रदर्शन कालियाचक 2 खंड विकास कार्यालय के बाहर दिन में शुरू हुआ और देर रात तक जारी रहा। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने शुरू में न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक की मांग की; हालाँकि, उन्होंने शाम लगभग 4 बजे प्रदर्शन शुरू किया और प्रवेश से इनकार किए जाने के बाद परिसर को घेर लिया। अधिकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यालय के अंदर फंसे लोगों में तीन महिला न्यायिक अधिकारी भी शामिल थीं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमने अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को तुरंत मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया गया है।” उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से भी घटना पर रिपोर्ट मांगी गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, न्यायिक अधिकारी वर्तमान में उन मतदाताओं के मामलों की जांच कर रहे हैं जिनके नाम 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में “न्यायाधीन” के रूप में चिह्नित किए गए थे ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उन्हें बरकरार रखा जाना चाहिए या हटा दिया जाना चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, वोटों की गिनती 4 मई को होगी। जगह : पश्चिम बंगाल, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 02 अप्रैल, 2026, 08:53 IST समाचार राजनीति बंगाल में SIR विलोपन का विरोध: मालदा में 7 न्यायिक अधिकारियों का 8 घंटे तक घेराव अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)मालदा(टी)सर
कोटा में स्टूडेंट्स के लिए हॉस्टल का किराया घटाया:2 से 4 हजार में मिल रहे PG, कोचिंग संस्थान दे रहे 50% तक स्कॉलरशिप

डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना लेकर कोटा आने वाले देश भर के लाखों स्टूडेंट्स के लिए इस बार राहत भरी खबर है। नया सेशन शुरू होते ही स्टूडेंट्स का कोटा पहुंचना शुरू हो गया है, लेकिन इस बार उन्हें न तो महंगे कमरों की चिंता है और न ही बढ़ती फीस की। कोचिंग संस्थान इस बार 50 फीसदी तक स्कॉलरशिप दे रहे हैं। करीब 3 साल पहले तक जिस कोटा में स्टूडेंट्स को 15 हजार रुपए में भी कमरा मिलना मुश्किल हो रहा था, वहां अब 9 से 11 हजार रुपए में एसी, खाना और लॉन्ड्री जैसी सुविधां के साथ बेहतरीन विकल्प उपलब्ध हैं। कोटा में हॉस्टलों के अलावा कई पीजी भी हैं। पीजी में पहले किराया 5 से 6 हजार रुपए था। वर्तमान में 2 से 4 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। 4 हजार रुपए भी बड़े हॉलनुमा कमरे का किराया है, जिसमें बिजली-पानी भी शामिल है। हॉस्टल एसोसिएशन का फैसला- 11 हजार से ज्यादा किराया नहीं हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल ने बताया कि कोरोना के बाद अचानक स्टूडेंट्स की संख्या 1.90 लाख तक पहुंच गई थी, जिससे डिमांड बढ़ने पर रेट 15 हजार तक चले गए थे। अब स्थिति नियंत्रण में है। हॉस्टल संचालकों को 9 हजार से 11 हजार रुपए तक किराया रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें रूम, एसी, खाना, लॉन्ड्री और सफाई शामिल है। कभी सबसे महंगा रहने वाले राजीव गांधी नगर इलाके में अब 3 हजार रुपए तक में कमरे उपलब्ध हैं। कोचिंग संस्थानों ने भी बढ़ाया हाथ, नहीं बढ़ेगी फीस मिडिल क्लास परिवारों को राहत देने के लिए इस साल कोचिंग संस्थानों ने अपनी फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं करने का निर्णय लिया है। साथ ही, अब हॉस्टलों में महीनों का एडवांस किराया लेने की प्रथा पर भी रोक लगा दी गई है। स्टूडेंट्स की काउंसिलिंग से लेकर 24 घंटे की हेल्पलाइन सेवा भी दी जा रही है। टेस्ट में अच्छे नंबर लाइए, फीस में छूट पाइए कोटा में 50 से ज्यादा छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान हैं। इनमें NEET और JEE की तैयारी करवाई जाती है। स्टूडेंट्स को राहत देते हुए इंस्टीट्यूट्स ने इस बार फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इसके अलावा स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप टेस्ट भी करवाए जा रहे हैं। इसमें बच्चों को 50 प्रतिशत तक स्कॉलरशिप दी जा रही है। सामाजिक सारोकार के तहत चुनिंदा बच्चों को फ्री में रहने, खाने और पढ़ाने की सुविधा भी दी जा रही है। कोचिंग इंस्टीट्यूट्स में कोर्स के हिसाब से अलग-अलग फीस है, जो 80 हजार से लेकर 1.50 लाख रुपए तक है। सामान्यत: बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट में NEET स्टूडेंट्स से एक लाख 35 हजार और IIT की तैयारी करवाने के लिए डेढ़ लाख की फीस ली जा रही है। तीन साल पहले 15 हजार में भी नहीं मिलते थे कमरे कोटा में 3 साल पहले ऐसा समय आया था, जब स्टूडेंट्स को हॉस्टलों में 15 हजार रुपए तक में भी कमरे नहीं मिल रहे थे। अब स्टूडेंटस के लिए हॉस्टल में कमरों के कई विकल्प (ऑपशन) मौजूद हैं। स्टूडेंट अपने बजट के अनुसार कमरा ले सकता है। हॉस्टल एसोसिएशन अध्यक्ष नवीन मित्तल ने बताया कि कोटा में वर्तमान में स्टूडेंट्स के बजट में हॉस्टल में कमरे मिल रहे है। उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद स्टूडेंट्स की संख्या काफी बढ़ गई थी। उस समय करीब 1 लाख 90 हजार स्टूडेंट्स कोटा में थे। काफी डिमांड होने की वजह से कई हॉस्टल काफी महंगे हो गए थे। स्टूडेंट्स से 15 हजार रुपए तक वसूले जा रहे थे। अब जब स्टूडेंट्स की संख्या कम हुई है तो उनकी सहूलियत को ध्यान में रखते हुए हॉस्टल संचालकों को कहा गया है कि हॉस्टल में 9 हजार से लेकर 11 हजार रुपए तक किराया ही तय रखें। राजीव गांधी नगर एरिया में कई हॉस्टलों में 3 हजार रुपए तक में कमरा किराए पर लेने के बोर्ड लगे हुए हैं। पहले यहां कमरे के लिए 11 हजार रुपए तक वसूले जाते थे। हॉस्टल्स में बायोमीट्रिक अटेंडेंस, सुरक्षा का पूरा ध्यान हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल बताते हैं- बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। ज्यादातर हॉस्टल्स में बायोमीट्रिक अटेडेंस सिस्टम है। यहां हॉस्टल में आने और जाने का समय रिकॉर्ड रहता है। इसके अलावा इसकी सूचना बच्चों के माता-पिता को भी दी जाती है। कमरों में एंटी हैंगिग डिवाइस पहले से ही इंस्टॉल है। रात 10 बजे बाद बच्चों को बाहर जाने की अनुमति नहीं रहती है। हर स्टूडेंटस से वार्डन रोज संपर्क करते हैं। कॉशन (सिक्योरिटी) मनी लेना बंद कर दिया गया है। मेस में मेन्यू के आधार पर कीमत कोटा में हॉस्टल मेस के अलावा ओपन मेस भी चलते हैं। इनमें 3 हजार से 3500 रुपए तक में बच्चों को आसानी से खाना मिल रहा है। मेस की रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मेन्यू के आधार पर अलग-अलग मेस का अलग-अलग रेट है। बच्चे मेस में आकर खाना खा सकते हैं या उनके पीजी रूम तक मेस की तरफ से टिफिन भिजवाया जाता है। बच्चों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन कोचिंग स्टूडेंट्स के लिए ASWS (ऑल स्टूडेंटस वेलफेयर सोसायटी) भी काम कर रही है, जिसमें कोचिंग संस्थानों के मेंटर्स काम करते है। जैसे- एमपी–हरियाणा से आए स्टूडेंट्स कोटा में पिछले एक साल से NEET की तैयारी कर रहे हरियाणा के हर्ष मलिक ने अपने छोटे भाई रक्षित को भी कोचिंग के लिए कोटा बुलाया है। हर्ष ने बताया यहां पर फैकल्टी दूसरी जगह से काफी अच्छी है। टीचर्स का सपोर्ट रहता है ताकि बच्चा अपना बेस्ट दे सके। हरियाणा में इतनी अच्छी व्यवस्था नहीं है, जितनी यहां है। निगेटिव बातों को लेकर हर्ष ने कहा- ऐसी बात तब आती है, जब स्टूडेंट अपना 100 फीसदी नहीं दे रहा होता है। रीवा (मध्य प्रदेश) के नमन ने भी इसी साल कोटा में एडमिशन लिया है। उसके साथ दोस्त श्रीकांत भी कोटा पहली बार आया है। नमन ने बताया कि कोटा का रिव्यू बहुत अच्छा है। यहां पढ़ाई का माहौल है। यहां हॉस्टल के ऑप्शन हैं और खाने की भी कोई दिक्कत नहीं है। एक स्टूडेंट साल में साढ़े 3 से 4 लाख रुपए खर्च करता है। पेरेंट्स बोले– कोटा में अच्छा माहौल,








