महाकाल के दरबार में अक्षय-टाइगर:नंदी के कान में कही मनोकामना, बोले- देश की तरक्की की कामना की; डिंपल कपाड़िया भी साथ थीं

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के बॉलीवुड सितारों की आस्था देखने को मिली। प्रसिद्ध अभिनेता अक्षय कुमार, टाइगर श्रॉफ और वरिष्ठ अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। नंदी हाल में बैठकर किया जाप, जल अर्पित कर लिया आशीर्वाद तीनों कलाकार सुबह करीब 6 बजे मंदिर पहुंचे। यहां नंदी हाल में बैठकर भगवान महाकाल के दर्शन किए और जाप करते नजर आए। अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ ने नंदी जी का पूजन कर उनके कान में अपनी मनोकामना भी कही। इसके बाद तीनों ने गर्भगृह की देहरी से दर्शन कर भगवान को जल अर्पित किया। मंदिर से बाहर निकलते ही लगी फैंस की भीड़ दर्शन के बाद जैसे ही तीनों मंदिर से बाहर निकले, प्रशंसकों ने उन्हें घेर लिया। बड़ी संख्या में लोग सेल्फी और फोटो लेने के लिए उमड़ पड़े। मंदिर समिति ने किया सम्मान दर्शन के बाद मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उप प्रशासक एसएन सोनी ने अक्षय कुमार, टाइगर श्रॉफ और डिंपल कपाड़िया का स्वागत और सत्कार किया।
फूल है या चमत्कार? पी लें एक गिलास शरबत, पूरे दिन रहें कूल-कूल, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर में भी फायदेमंद

Last Updated:April 01, 2026, 07:21 IST Palash Flower Benefits: पाचन तंत्र के लिए भी पलाश के फूलों का शरबत बेहद लाभकारी माना जाता है. यह गैस, कब्ज, दस्त और पेट में जलन जैसी दिक्कतों में राहत देता है. जिन लोगों को पेट में ज्यादा गर्मी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह प्राकृतिक उपाय काफी लाभकारी साबित हो सकता है. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में इन दिनों टेसू यानी पलाश के फूलों की बहार छाई है. लाल-नारंगी रंग के ये फूल जहां प्रकृति की खूबसूरती बढ़ाते हैं, वहीं आयुर्वेद में भी बेहद उपयोगी माने जाते हैं. खासकर गर्मियों में इनसे बना शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत पहुंचाता है. सीधी के आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि पलाश के फूलों का शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करता है. तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच यह शरबत लू से बचाव में सहायक होता है. इसके सेवन से थकान, सिरदर्द और बेचैनी जैसी समस्याएं भी कम होती हैं. गर्मी के मौसम में इसे नियमित रूप से पीने से शरीर को तरावट मिलती है और ऊर्जा बनी रहती है. उन्होंने कहा कि पाचन तंत्र के लिए भी पलाश का शरबत बेहद लाभकारी माना जाता है. यह गैस, कब्ज, दस्त और पेट में जलन जैसी समस्याओं में राहत देता है. जिन लोगों को पेट में अधिक गर्मी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह प्राकृतिक उपाय काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. इसके अलावा यह शरीर में पित्त दोष को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे हाथ-पैरों में जलन और शरीर की अधिक गर्मी से राहत मिलती है. ब्लड शुगर नियंत्रित करने में सहायकडॉक्टर के अनुसार, पलाश के फूलों में एंटी-फंगल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-डायबिटिक गुण पाए जाते हैं. यह शरबत ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है, बवासीर के लक्षणों में राहत देता है, त्वचा रोगों में लाभकारी है और लिवर को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है. साथ ही यह शरीर के वात और कफ दोष को संतुलित करने में भी सहायक माना जाता है. शरबत बनाने की आसान विधिपलाश का शरबत बनाने की विधि भी बेहद आसान है. सूखे फूलों को रातभर पानी में भिगो दें. वहीं ताजे फूलों को 2-3 घंटे तक भिगोना पर्याप्त होता है. इसके बाद उसी पानी को 5-10 मिनट तक हल्का उबाल लें. फिर इसे छानकर ठंडा कर लें और स्वाद के लिए इसमें मिश्री, नींबू का रस और थोड़ा भुना हुआ जीरा मिलाकर सेवन करें. सीमित मात्रा में करें सेवनहालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अधिक मात्रा में पीने से पेट दर्द या दस्त की समस्या हो सकती है. यदि कोई व्यक्ति पहले से किसी बीमारी से ग्रसित है या दवा ले रहा है, तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. टेसू के फूलों को छाया में सुखाकर एयरटाइट डिब्बे में स्टोर किया जा सकता है, जिससे इन्हें सालभर तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इन सूखे फूलों का उपयोग प्राकृतिक रंग, काढ़ा या शरबत बनाने में किया जा सकता है. गर्मी के मौसम में यह देसी और असरदार नुस्खा लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : April 01, 2026, 07:21 IST
हनुमान जन्मोत्सव भंडारों में सिंगल यूज प्लास्टिक बैन:बुरहानपुर निगम आयुक्त ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर दिए निर्देश, शहर में आज कई जगह कार्यक्रम

बुरहानपुर नगर पालिक निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर सार्वजनिक भंडारों में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आयुक्त श्रीवास्तव ने बताया कि हर साल की तरह इस साल भी शहर में हनुमान जन्मोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। इस दौरान विभिन्न मंदिरों और स्थानों पर भंडारों का आयोजन होगा। उन्होंने भंडारे आयोजित करने वाली सभी समितियों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि इन आयोजनों में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री, जैसे गिलास, प्लेट और दोने का उपयोग बिल्कुल न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या समिति इसका उपयोग करते हुए पाई जाती है, तो नगर निगम द्वारा नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह प्रतिबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। वर्तनों और पत्तों वाले विकल्प का उपयोग करने के सलाह पर्यावरण अनुकूल विकल्पों के रूप में भंडारों में पानी पीने के लिए स्टील या तांबे के लोटे और ग्लास का उपयोग करने की सलाह दी गई है। प्रसादी वितरण के लिए केले के पत्तल, अन्य वृक्षों के पत्तल या पुनः उपयोग में आने वाले बर्तनों का प्रयोग करने को प्राथमिकता देने को कहा गया है। नगर निगम ने सार्वजनिक भंडारों, धार्मिक आयोजनों और सड़क किनारे लगने वाले लंगरों में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लागू किया है। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों या समितियों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पीएलएफएस सर्वे-2025 में दावा- देश में बेरोजगारी घट रही है:61.3 करोड़ लोगों के पास काम; महिलाओं का इंक्रीमेंट पुरुषों से ज्यादा बढ़ा, लेकिन कुल वेतन 31% कम

देश में बेरोजगारी घट रही है और श्रम भागीदारी बढ़ी है। यानी अर्थव्यवस्था ‘क्राइसिस मोड’ में नहीं है। महिलाओं की आय तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी पुरुषों से उनका वेतन करीब 5,900 रुपए या 31% तक कम है। इसका मतलब है कि समान अवसर अभी भी पूरी तरह नहीं मिले हैं। महिलाएं या तो कम वेतन वाले सेक्टर में हैं या समान काम के लिए कम पेमेंट पा रही हैं। यह जानकारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2025 (पीएलएफएस) में दी गई है। सर्वे बताता है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच नियमित वेतनभोगी बढ़े हैं। ऐसे वेतनभोगी पुरुषों का औसत वेतन 5.80% तो महिलाओं का 7.16% बढ़ा। पिछले एक साल में महिलाओं की औसत दैनिक मजदूरी 16 रु. बढ़कर 315 रु. हो गई, जबकि इस दौरान पुरुषों की मजदूरी 1 रु. घटकर 455 रु. रह गई है। स्वरोजगार में लगे पुरुष महिलाओं से 3 गुना ज्यादा मासिक कमाई कर रहे हैं। एक महिला जहां अपने काम के लिए 6,374 रु. महीना कमा रही है, वहीं पुरुष 17,914 रु. तक कमा ले रहे हैं। सर्वे के मुताबिक देश की श्रमशक्ति में एक साल में मामूली 0.3% की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान बेरोजगारी की दर 3.3% से घटकर 3.1% रह गई। शिक्षित लोगों के मध्य बेरोजगारी 0.5% घटकर 6.5% पर आ चुकी है। युवा बेरोजगारी दर भी अब सिंगल डिजिट में आ गई। स्किल गैप: 4.2% के पास ही तकनीकी ज्ञान सर्वे बताता है कि देश में अभी 67.8% आबादी कम से कम माध्यमिक स्तर तक शिक्षित है। इसके बावजूद केवल 4.2% लोगों को ही औपचारिक तकनीकी या व्यावसायिक प्रशिक्षण मिला है। यह बड़े स्किल गैप को दर्शाता है। चिंता की बात यह है कि 15–29 आयु वर्ग के 25% युवा न रोजगार में हैं, न शिक्षा में और न ही प्रशिक्षण में शामिल हैं। देश में 61.6 करोड़ कार्यरत आबादी होने के बावजूद यह स्थिति बताती है कि शिक्षा और रोजगार के बीच संतुलन अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पीएलएफएस सर्वे-2025 में दावा- देश में बेरोजगारी घट रही है:61.3 करोड़ लोगों के पास काम; महिलाओं का इंक्रीमेंट पुरुषों से ज्यादा बढ़ा, लेकिन कुल वेतन 31% कम

देश में बेरोजगारी घट रही है और श्रम भागीदारी बढ़ी है। यानी अर्थव्यवस्था ‘क्राइसिस मोड’ में नहीं है। महिलाओं की आय तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी पुरुषों से उनका वेतन करीब 5,900 रुपए या 31% तक कम है। इसका मतलब है कि समान अवसर अभी भी पूरी तरह नहीं मिले हैं। महिलाएं या तो कम वेतन वाले सेक्टर में हैं या समान काम के लिए कम पेमेंट पा रही हैं। यह जानकारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2025 (पीएलएफएस) में दी गई है। सर्वे बताता है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच नियमित वेतनभोगी बढ़े हैं। ऐसे वेतनभोगी पुरुषों का औसत वेतन 5.80% तो महिलाओं का 7.16% बढ़ा। पिछले एक साल में महिलाओं की औसत दैनिक मजदूरी 16 रु. बढ़कर 315 रु. हो गई, जबकि इस दौरान पुरुषों की मजदूरी 1 रु. घटकर 455 रु. रह गई है। स्वरोजगार में लगे पुरुष महिलाओं से 3 गुना ज्यादा मासिक कमाई कर रहे हैं। एक महिला जहां अपने काम के लिए 6,374 रु. महीना कमा रही है, वहीं पुरुष 17,914 रु. तक कमा ले रहे हैं। सर्वे के मुताबिक देश की श्रमशक्ति में एक साल में मामूली 0.3% की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान बेरोजगारी की दर 3.3% से घटकर 3.1% रह गई। शिक्षित लोगों के मध्य बेरोजगारी 0.5% घटकर 6.5% पर आ चुकी है। युवा बेरोजगारी दर भी अब सिंगल डिजिट में आ गई। स्किल गैप: 4.2% के पास ही तकनीकी ज्ञान सर्वे बताता है कि देश में अभी 67.8% आबादी कम से कम माध्यमिक स्तर तक शिक्षित है। इसके बावजूद केवल 4.2% लोगों को ही औपचारिक तकनीकी या व्यावसायिक प्रशिक्षण मिला है। यह बड़े स्किल गैप को दर्शाता है। चिंता की बात यह है कि 15–29 आयु वर्ग के 25% युवा न रोजगार में हैं, न शिक्षा में और न ही प्रशिक्षण में शामिल हैं। देश में 61.6 करोड़ कार्यरत आबादी होने के बावजूद यह स्थिति बताती है कि शिक्षा और रोजगार के बीच संतुलन अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कई बीमारियों में लाभकारी है ये हरा पत्ता… दांत, बाल और त्वचा के लिए रामबाण, जानें फायदे

X कई बीमारियों में लाभकारी है ये हरा पत्ता… दांत, बाल और त्वचा के लिए रामबाण Neem ke Fayde: नीम को आयुर्वेद में प्राकृतिक औषधि माना गया है जो शरीर की कई समस्याओं में लाभकारी होता है. पेट की दिक्कत, शुगर, त्वचा रोग, डैंड्रफ और संक्रमण जैसी परेशानियों में इसका उपयोग फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. हर्ष के अनुसार नीम एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और ब्लड प्यूरीफायर के रूप में काम करता है. नीम की दातून करने से दांत और मसूड़े मजबूत होते है, जबकि पत्तों का काढ़ा पाचन सुधारने और खून साफ करने में मदद करता है. नीम का तेल बालों में लगाने से डैंड्रफ कम होता है और घाव भरने में भी सहायक होता है. मधुमेह के मरीजों के लिए भी नीम उपयोगी बताया गया है. नियमित और सही तरीके से उपयोग करने पर नीम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है.
ईरान पर 24 घंटे में इजराइल के 230 हवाई हमले:अब तक 4800 ईरानी सुरक्षाकर्मियों की मौत; चीन-PAK ने 5 सूत्री सीजफायर प्लान बनाया

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 33वां दिन है। इजराइली सेना ने दावा किया है कि उसने मंगलवार को 24 घंटों में ईरान में 230 से ज्यादा हवाई हमले किए। इजराइल का कहना है कि ये हमले प्लांड ऑपरेशन का हिस्सा हैं, जिसका मकसद ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना है। ईरान का कहना है कि इजराइल और अमेरिका सिर्फ सैन्य ठिकानों पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़ी जगहों पर भी हमला कर रहे हैं। वहीं, तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के कम से कम 4,770 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो चुकी है। इस दौरान करीब 21 हजार लोग घायल भी हुए हैं। दूसरी तरफ चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बीजिंग में बैठक के बाद एक 5 पॉइंट वाली योजना जारी की है। इस योजना का मकसद ईरान जंग रोकना है। चीन-PAK का 5 पॉइंट का सीजफायर प्लान… जंग से मिडिल ईस्ट को ₹18 लाख करोड़ का नुकसान यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) ने कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक यह संघर्ष अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा संकट बन गया है। ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… ईरान-इजराइल जंग से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
तमिलनाडु CM स्टालिन बोले-भाजपा ने राज्य को फंड नहीं दिया:बंगाल में BDO सस्पेंड, असम में बुजुर्ग-दिव्यांगों को घर से वोटिंग की सुविधा

देश के 5 राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव हैं। तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली पहुंचे सीएम स्टालिन ने चुनावी सभा में कहा- भाजपा ने तमिलनाडु को कोई फंड नहीं दिया है। मैं करुणानिधि का बेटा हूं, हम वही करते हैं जो कहते हैं और वही कहते हैं जो करते हैं। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने नादिया जिले के हंसखाली ब्लॉक के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) सयंतन भट्टाचार्य को सस्पेंड करने के आदेश दिए। एक शिक्षक ने आरोप लगाया था कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद सीएम ममता की तस्वीर वाला सरकारी विज्ञापन दिखाया जा रहा था, जिसका विरोध करने 27 मार्च को उस पर हमला हुआ। असम में वोट फ्रॉम की सुविधा असम विधानसभा चुनाव 2026 में चुनाव आयोग ने वोट फ्रॉम होम सुविधा शुरू की है। इसके तहत 85 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता घर बैठे अपना वोट डाल सकेंगे। राज्य में 19,774 बुजुर्ग और 6,638 दिव्यांग मतदाताओं को यह सुविधा दी गई है। मतदान दल उनके घर जाकर वोट डलवा रहे हैं। यह प्रक्रिया 5 अप्रैल तक चलेगी, जबकि 126 सीटों पर मतदान 9 अप्रैल को और मतगणना 4 मई को होगी। चुनाव से जुड़े बड़े अपडेट्स: 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव से जुड़ी पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं…
हाथी चले बाजार…हरभजन सिंह के जवाब से बवाल:IPL-2026 में कमेंट्री पर ट्रोल करने वालों को कहा- कुत्ता; हटाने की मांग ट्रेंड

जालंधर के पूर्व क्रिकेटर और ‘टर्बिनेटर’ के नाम से मशहूर हरभजन सिंह उर्फ भज्जी ट्रोलर्स को दिए जवाब पर फंस गए हैं। यह पूरा मामला IPL 2026 से जुड़ा है। इस सीजन में हरभजन सिंह हिंदी कमेंट्री पैनल का हिस्सा हैं, जिसमें उनके साथ वीरेंद्र सहवाग और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे दिग्गज शामिल हैं। 28 और 29 मार्च को खेले गए मैचों के दौरान सोशल मीडिया पर दर्शकों ने हरभजन सिंह और हिंदी कमेंट्री टीम को ट्रोल करना शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि हिंदी कमेंट्री का स्तर गिर रहा है। फैंस ने कहा कि कमेंटेटर्स खेल की तकनीकी बातों पर चर्चा करने के बजाय शायरी, मजाक और बेवजह की बातें ज्यादा कर रहे हैं। विवाद तब और बढ़ गया जब एक मीम अकाउंट ने कमेंट्री पैनल की फोटो शेयर कर उन्हें “3 जोकर” कह दिया। कई दर्शकों ने तुलना करते हुए कहा कि इंग्लिश कमेंट्री में इयान बिशप जैसे एक्सपर्ट खेल की गहराई समझाते हैं, जबकि हिंदी पैनल केवल मनोरंजन तक सीमित रह गया है। ट्रोलर्स ने हरभजन सिंह को लेकर सैकड़ों कमेंट किए। इस पर हरभजन सिंह ने भी ट्रोलर्स को जवाब दिया। उन्होंने एक कमेंट में लिखा— हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार। इसके अलावा उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि यह कहावत ट्रोलर्स पर लागू होती है और अगर समझ न आए तो अपनी “पेड सेना” से मदद ले लें, साथ ही ‘गेट लॉस्ट’ भी लिखा। भज्जी अब कमेंट्री बॉक्स में अपनी टिप्पणियों और सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स को दिए गए तीखे जवाबों के कारण बुरी तरह फंस गए हैं। आलम यह है कि सोशल मीडिया पर उन्हें कमेंट्री पैनल से हटाने की मांग ट्रेंड कर रही है। पहले जानिए ट्रोलर्स ने क्या कहा… हरभजन सिंह ने दिया जवाब हरभजन सिंह ने ट्रोलर्स के खिलाफ फ्रंट फुट पर आकर जवाब दिया। 29 मार्च को एक एक्स यूजर @होमलेंडर ने हरभजन को टैग करते हुए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। ट्रोलर ने लिखा कि हरभजन को धोनी ने टीम से लात मारकर निकाला था और अब उन्हें कमेंट्री में भी भौंकना बंद कर देना चाहिए। हरभजन सिंह ने इस ट्रोल को नजरअंदाज करने के बजाय आक्रामक जवाब दिया। उन्होंने लिखा, यह अंग्रेजी की एक अच्छी कहावत है- जो तेरे पर लागू होती है। अगर ना समझे तो अपनी पेड सेना की मदद ले लेना। गेट लॉस्ट नाउ। और हां अपनी असली शकल और आईडी से कर ना ट्वीट। इसके साथ ही उन्होंने एक इमेज शेयर की- जिस पर लिखा- हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार। हरभजन सिंह ने ये पोस्ट की फैंस ने पुराने विवादों को फिर से हवा दी हरभजन सिंह की पोस्ट पर लाखों व्यूज आ गए और लोगों ने हरभजन को उनकी अमर्यादित भाषा के लिए ट्रोल किया। लोगों का कहना था कि एक राज्यसभा सांसद और पद्म श्री सम्मानित खिलाड़ी को एक गुमनाम ट्रोल के स्तर पर गिरकर फट्टू जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। फैंस की नाराजगी यहीं तक सीमित नहीं रही। हरभजन के इस व्यवहार ने उनके पुराने विवादों को फिर से हवा दे दी। ट्रोल्स ने याद दिलाया कि कैसे IPL 2025 में उन्होंने जोफ्रा आर्चर की तुलना काली टैक्सी से करके नस्लीय टिप्पणी की थी। साथ ही आर अश्विन के साथ उनके कथित कंपीटिशन और एमएस धोनी के प्रशंसकों के साथ उनके पुराने मतभेदों को भी दोबारा कुरेदा गया। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग यह आरोप लगा रहा है कि हरभजन अपनी कमेंट्री में कुछ खास खिलाड़ियों के प्रति बायस्ड रहते हैं। हरभजन को कमेंट्री से निकालने पर नहीं हुआ फैसला अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हरभजन सिंह को IPL कमेंट्री पैनल से निकाल दिया गया है? आधिकारिक तौर पर ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स और जियो सिनेमा ने अभी तक कोई टर्मिनेशन लेटर जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो बीसीसीआई और ब्रॉडकास्टिंग टीम इस पूरे घटनाक्रम से बेहद नाराज है। निकाले जाने की चर्चा के 3 मुख्य कारण
जरूरत की खबर- गर्मियों में स्ट्रीट फूड न खाएं:8 हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क, अगर खाने की मजबूरी हो तो ये 12 बातें ध्यान रखें

गर्मियों में तापमान बढ़ने से डिहाइड्रेशन और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। गर्मियों में स्ट्रीट फूड या बाहर का खाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। तापमान बढ़ने पर बैक्टीरिया और फंगस जल्दी पनपते हैं। इसलिए इस मौसम में खाना जल्दी खराब होता है। कई बार इसका पता भी नहीं चल पाता है। इसे खाने से फूड पॉइजनिंग, डायरिया, उल्टी और टाइफाइड हो सकते हैं। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज बात करेंगे कि गर्मियों में स्ट्रीट फूड क्यों नहीं खाना चाहिए। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- क्या गर्मी के मौसम में बाहर का खाना ज्यादा नुकसानदायक होता है? जवाब- हां, गर्मियों में तापमान ज्यादा होता है। इसलिए बैक्टीरिया और फंगस जल्दी पनपते हैं। इससे खाना जल्दी खराब होता है। इसे खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। स्ट्रीट फूड या बासी खाना ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है। हाइजीन की कमी भी संक्रमण का एक बड़ा कारण है। सवाल- गर्मी के मौसम में स्ट्रीट फूड क्यों नहीं खाना चाहिए? जवाब- इसके कई कारण हैं- सवाल- गर्मियों में स्ट्रीट फूड से किन बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- स्ट्रीट फूड से संक्रमण का रिस्क बढ़ता है। इससे होने वाले सभी हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या ये सच है कि टाइफाइड का एक बड़ा कारण स्ट्रीट फूड है? जवाब- हां, सीनियर कंसल्टेंट डॉ. संचयन रॉय बताते हैं कि टाइफाइड ‘साल्मोनेला टाइफी’ नामक बैक्टीरिया से होता है। ये बैक्टीरिया मुख्य रूप से दूषित भोजन-पानी से फैलता है। स्ट्रीट वेंडर हाइजीन का ख्याल नहीं रखते हैं। इसीलिए मई-जून के महीनों में टाइफाइड के केस बढ़ जाते हैं। सवाल- गर्मियों में बाहर के खाने से फूड पॉइजनिंग का खतरा क्यों बढ़ जाता है? जवाब- इसके कई कारण हैं- सवाल- क्या गर्मियों में बाहर का खुला पानी पीना सेफ है? जवाब- बिल्कुल नहीं, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया, वायरस या पैरासाइट हो सकते हैं, जो पेट के इन्फेक्शन, डायरिया और टाइफाइड का कारण बन सकते हैं। इसलिए हमेशा साफ, पैक्ड या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं। सवाल- क्या खुले में बन रहा गन्ने का रस पीना सेफ है? जवाब- गन्ने का रस फायदेमंद है, लेकिन खुले में बिक रहा कोई भी जूस पीना रिस्की हो सकता है। इसके कई कारण हैं- सवाल- क्या जूस में डाली गई बर्फ सुरक्षित होती है? जवाब- स्ट्रीट वेंडर ‘कमर्शियल बर्फ’ यूज करते हैं। यह बर्फ फिल्टर्ड पानी से नहीं बनती है। इसमें हानिकारक केमिकल्स हो सकते हैं। यह थ्रोट इन्फेक्शन, टाइफाइड और हेपेटाइटिस का कारण बन सकती है। सवाल- गर्मियों में बाजार में बिक रहे कटे फल खाना सेफ है? जवाब- नहीं। उन फलों पर धूल, मक्खियां बैठती हैं। कटे फल जल्दी खराब होते हैं। हमेशा पूरा फल खरीदें। घर पर ही काटें, बचा हुआ कटा फल पॉली रैप में लपेटकर तुरंत फ्रिज में रखें। सवाल- गर्मी में बाहर का खाना पेट और पाचन पर कैसे असर डालता है? जवाब- डॉ. संचयन रॉय बताते हैं कि गर्मियों में डाइजेस्टिव सिस्टम स्लो हो जाता है। बाहर का हैवी, डीप फ्राइड और मसालेदार फूड पचाने के लिए शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे पेट में भारीपन, गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग हो सकती है। साथ ही दूषित भोजन आंतों के गुड बैक्टीरिया को खत्म कर देता है, जिससे मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है। सवाल- किन लोगों को गर्मियों में स्ट्रीट फूड से खासतौर पर बचना चाहिए? जवाब- वैसे तो स्ट्रीट फूड हर किसी के लिए नुकसानदायक है, लेकिन कुछ लोगों के लिए ये ज्यादा खतरनाक हो सकता है। नीचे ग्राफिक में देखिए- सवाल- बाहर के खाने के अलावा फूड के और क्या हेल्दी ऑप्शन हो सकते हैं? जवाब- गर्मियों में पेट को हल्का रखने के लिए डाइट में कुछ चीजें शामिल कर सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- सवाल- गर्मी में कौन-से स्ट्रीट फूड ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं? जवाब- ये स्ट्रीट फूड ज्यादा रिस्की होते हैं- सवाल- अगर बाहर खाना मजबूरी हो तो किन बातों का ध्यान रखें? जवाब– इसे पॉइंटर्स से समझिए- सही जगह का चुनाव करें ताजा और गरम खाना खाएं फिल्टर्ड पानी पिएं कच्ची चीजें खाने में सावधानी बरतें पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखें पकाने के तरीका देखें हाई रिस्क फूड न लें हल्का फूड खाएं टाइमिंग का ख्याल रखें खाने के बाद टहलें इमरजेंसी के लिए तैयार रहें शरीर के संकेत समझें ……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- गैस स्टोव से घर की हवा प्रदूषित: जानें नुकसान, हवा साफ रखने के लिए करें ये 8 काम, बरतें 7 सावधानियां भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) उपभोक्ता देश है। भारत सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में 33 करोड़ घरेलू एलपीजी कंज्यूमर्स हैं। यानी कुल आबादी का बड़ा हिस्सा खाना पकाने के लिए इस पर निर्भर है। आगे पढ़िए…







