Wednesday, 16 Sep 2026 | 10:21 AM

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जयपुर एयरपोर्ट पर ग्लैमरस अंदाज में दिखीं उर्वशी रौतेला:रवि शास्त्री को देख फैन्स में उत्साह; अजय देवगन से हनी सिंह तक के डुप्लिकेट भी पहुंचे

जयपुर एयरपोर्ट पर ग्लैमरस अंदाज में दिखीं उर्वशी रौतेला:रवि शास्त्री को देख फैन्स में उत्साह; अजय देवगन से हनी सिंह तक के डुप्लिकेट भी पहुंचे

जयपुर में शुक्रवार को जयपुर एयरपोर्ट पर बॉलीवुड, क्रिकेट और मनोरंजन जगत की हस्तियों की आवाजाही से माहौल खास नजर आया। दोपहर की फ्लाइट से बॉलीवुड अभिनेत्री उर्वशी रौतेला जयपुर पहुंचीं। इसके बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रवि शास्त्री भी एयरपोर्ट पर नजर आए। वहीं, कुछ समय बाद अजय देवगन, हनी सिंह, गोविंदा और अनिल कपूर जैसे बॉलीवुड सितारों के लुक लाइक डुप्लिकेट्स ने भी जयपुर में दस्तक दी। ये कलाकार जयपुर के एक होटल में परफॉर्म करेंगे। सेलिब्रिटीज जैसे लुक वाले इन कलाकारों की मौजूदगी ने एयरपोर्ट पर यात्रियों और प्रशंसकों का ध्यान खींचा। ग्लैमरस अंदाज में पहुंचीं उर्वशी रौतेला दोपहर की फ्लाइट से अभिनेत्री उर्वशी रौतेला जयपुर पहुंचीं। एयरपोर्ट पर उन्होंने ग्लैमरस लुक में एंट्री ली। उन्हें देखते ही कुछ प्रशंसक उनके साथ तस्वीर लेने के लिए आगे आए। उर्वशी ने भी फैंस को निराश नहीं किया और उनके साथ फोटो क्लिक करवाए। एयरपोर्ट से बाहर निकलने के बाद वे सीधे अपने होटल के लिए रवाना हो गईं। उनके जयपुर आने को लेकर शहर में उनके प्रशंसकों के बीच भी उत्सुकता देखने को मिली। क्रिकेटर रवि शास्त्री को देख प्रशंसकों में खासा उत्साह इसके बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे। शास्त्री जयपुर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आए हैं। एयरपोर्ट पर उनकी मौजूदगी ने क्रिकेट प्रशंसकों का भी ध्यान खींचा। क्रिकेट से जुड़े लंबे और सफल करियर के कारण रवि शास्त्री की जयपुर में भी बड़ी फैन फॉलोइंग है। एयरपोर्ट पर उन्हें देखकर क्रिकेट से जुड़े लोगों और प्रशंसकों में खास उत्साह नजर आया। सितारों के हमशक्लों ने भी बढ़ाई चमक शुक्रवार को जयपुर एयरपोर्ट पर सिर्फ फिल्म और क्रिकेट जगत की हस्तियां ही आकर्षण का केंद्र नहीं रहीं। बॉलीवुड के लोकप्रिय सितारों के लुक लाइक डुप्लिकेट्स भी जयपुर पहुंचे। अजय देवगन, हनी सिंह, गोविंदा, अनिल कपूर और सलमान खान के लुक लाइक डुप्लिकेट्स जयपुर आए हैं। ये सभी कूकस स्थित एक 5 सितारा होटल में होने वाले कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुतियां देने के लिए पहुंचे हैं। इन कलाकारों का अंदाज और हावभाव संबंधित बॉलीवुड सितारों से काफी मेल खाने के कारण ये लुक लाइक कलाकार अक्सर मनोरंजन कार्यक्रमों में आकर्षण का केंद्र रहते हैं। जयपुर में भी इनके पहुंचने के बाद कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।

चीन में आय में असमानता बढ़ी, माओ की किताबें लोकप्रिय:नौकरी और बढ़ती स्पर्धा से परेशान जेन-जी इसे संघर्षों से निपटने का तरीका मान रहे

चीन में आय में असमानता बढ़ी, माओ की किताबें लोकप्रिय:नौकरी और बढ़ती स्पर्धा से परेशान जेन-जी इसे संघर्षों से निपटने का तरीका मान रहे

आधुनिक चीन के संस्थापक माओत्से तुंग (माओ जेदांग) की मृत्यु के 50 साल बाद उनकी किताबें और भाषण फिर चर्चा में हैं। खासकर जेन-जी और युवा प्रोफेशनल के बीच। वजहें साफ हैं। अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी है। नौकरियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। शिक्षा और रोजगार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। आय असमानता की चिंता बढ़ी है। ऐसे में कुछ युवा माओ की रचनाओं को सिर्फ राजनीतिक दस्तावेज नहीं मान रहे। वे इसे संघर्षों से निपटने का तरीका मान रहे हैं। चीनी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, माओ के विचार कई युवाओं के लिए ‘संकट से निपटने की ताकत का स्रोत’ बन रहे हैं। यह वापसी इसलिए भी खास है, क्योंकि जेन-जी माओ को निजी स्मृति की तरह नहीं जानती। वह उन्हें इतिहास के एक बड़े किरदार की तरह देखती है। उनके शब्दों को आज के दबाव के हिसाब से नए अर्थ में पढ़ती है। भविष्य को लेकर अनिश्चितता से जूझ रहे युवाओं का बड़ा वर्ग माओ के पुराने विचारों को आज की मुश्किलों को समझने, उनसे जूझने और समाधान खोजने के तौर पर देख रहा है। मार्क्स ऑफ माओत्से तुंग’ रही। यह किताब सबसे ज्यादा बिकी भी है। वहीं, ई-कॉमर्स साइट ताओबाओ पर माओ के चित्रों और विचारों वाले 20,000 से ज्यादा मग बिक चुके हैं। सोशल मीडिया पर माओ के भाषणों और लेखों को नौकरी, निजी संघर्ष और रिश्तों की समस्याओं से जोड़कर पेश किया जा रहा है। ऑनलाइन रीडिंग ग्रुप और एआई से बने ऑडियो-वीडियो भी युवा पीढ़ी तक पहुंच रहे हैं। युवाओं को माओ में ऐसा क्या मिल रहा एडिलेड यूनिवर्सिटी के चीनी अध्ययन के प्रोफेसर मोबो गाओ के अनुसार, कड़ी प्रतिस्पर्धा, संपत्ति की असमानता और रोजगार की सीमित संभावनाओं के बीच कुछ युवाओं को माओ के वर्ग और संघर्ष से जुड़े विचार अपने अनुभवों को समझने का तरीका दे सकते हैं। जेन-जी के लिए माओ एक ऐतिहासिक नेता से ज्यादा ऐसे व्यक्ति हैं, जिसके लेखन में मुश्किल हालात से लड़ने और असफलता के बाद आगे बढ़ने की बातें खोजी जा सकती हैं। गाओ कहते हैं कि जेन-जी माओ के कार्यों को जीवन की चुनौतियों से निपटने की गाइडबुक के रूप में पढ़ रहे हैं, न कि राजनीतिक दस्तावेज के तौर पर। अमेरिका से तनाव बढ़ा तो माओ के विचार फिर वायरल हुए – माओ ने 1946 में कहा था कि साम्राज्यवाद और परमाणु बम ‘पेपर टाइगर’ हैं- यानी वे ऊपर से खतरनाक लगते हैं, लेकिन असल में कमजोर हैं। हाल के ​वर्षों में जब अमेरिका से व्यापार तनाव बढ़ा तो माओ के साम्राज्यवाद संबंधी ‘पेपर टाइगर’ जैसा विचार चीन के सोशल मीडिया पर प्रमुखता से छाया रहा। -1938 में लिखी माओ की किताब ‘ऑन प्रोट्रैक्टेड वॉर’ के संदर्भ भी ऑनलाइन चर्चा में रहे। इससे माओ की छवि के दो पहलू सामने आते हैं- एक ओर निजी मुश्किलों में संघर्ष का प्रतीक और दूसरा- बाहरी दबाव के सामने चीन की ताकत और राष्ट्रीय स्वतंत्रता का प्रतीक। यह युवाओं को लुभा रहा है।

नशा मुक्त हरियाणा थीम पर क्रिकेट लीग में शराब पार्टी,VIDEO:देहरादून स्टेडियम में सिंगर ने कोहनी से खोली बोतल, साथी बोले- वाह भाई के मारा है

नशा मुक्त हरियाणा थीम पर क्रिकेट लीग में शराब पार्टी,VIDEO:देहरादून स्टेडियम में सिंगर ने कोहनी से खोली बोतल, साथी बोले- वाह भाई के मारा है

देहरादून में ‘नशा मुक्त हरियाणा और खेलों को बढ़ावा’ देने की थीम पर चल ही हरियाणवी आर्टिस्ट क्रिकेट लीग (ACL) में शराब पार्टी का वीडियो सामने आया है। इसमें कलाकार योगेश उर्फ योगी दहिया कोहनी मारकर शराब की बोतल खोलते नजर आ रहे हैं। उनके आसपास कुछ अन्य कलाकार भी खड़े नजर आ रहे हैं। पीछे से एक शख्स की आवाज भी सुनाई देती है, जो योगी के बोतल खोलने के अंदाज पर कहता है- ‘वाह भाई वाह… के मारा है रै।’ इसके बाद कलाकार बोतल के साथ एंजॉय करते नजर आते हैं। आयोजक साहिल सोहरडा के अनुसार, देहरादून के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 9 सितंबर को ओपनिंग सेरेमनी के बाद 10 सितंबर से लीग के मैच शुरू हुए थे। ओपनिंग सेरेमनी में प्रांजल दहिया और खासा आला चाहर समेत कई कलाकार पहुंचे थे। दैनिक भास्कर ने जब योगी दहिया से बात की तो उन्होंने इस पर सफाई दी। बोले-ये सेलिब्रेशन का वीडियो किसी ने वायरल कर दिया। शराब बोतल खोलने की 2 तस्वीरें:- पहले जानिए, वीडियो में क्या दिख रहा… योगी के हाथ में शराब की बोतल देहरादून के रायपुर स्थित राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम में हरियाणवी आर्टिस्ट क्रिकेट लीग चल रही है। इस लीग में खेल रहे कलाकार योगी दहिया का 15 सेकेंड का एक वीडियो सामने आया है। इसमें योगी कई कलाकारों के बीच खड़े दिखाई दे रहे हैं। उनके हाथ में शराब की बोतल है। कोहनी मारकर ढक्कर खोला योगी कोहनी मारकर बोतल खोलते हैं। इसके बाद ढक्कन खोलकर बोतल को ऊपर उठाते हैं। यहां एक टेबल पर कुछ ग्लास और खाना भी नजर आ रहा है। इसके बाद योगी ग्लास में शराब डालते हैं। स्टेडियम के अंदर कुछ प्लेयर भी खड़े नजर आ रहे हैं। योगेश दहिया की सफाई-बोले सेलिब्रेशन का वीडियो वायरल हुआ जीत का जश्न मना रहे थेः सोनीपत के बढ़खालसा निवासी योगेश उर्फ योगी दहिया ने दैनिक भास्कर से बातचीत में वायरल वीडियो पर सफाई दी। बोले-हर साल आर्टिस्ट की क्रिकेट लीग होती है। मैच जीत के बाद खिलाड़ियों ने सेलिब्रेशन किया था। सेलिब्रेशन का वीडियो किसी ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वे टीम में खिलाड़ी के तौर पर शामिल हुए थे और जीत के बाद टीम के अन्य खिलाड़ियों के साथ सेलिब्रेशन कर रहे थे। 3 विकेट से जीती थी जगन्नाथ टीमः योगेश दहिया ने बताया कि 9 सितंबर को जगन्नाथ टीम का मुकाबला मांगेराम लीजेंड टीम से हुआ था। मांगेराम लीजेंड की टीम ने 163 रन बनाए थे। इसके जवाब में जगन्नाथ टीम ने लक्ष्य हासिल करते हुए 3 विकेट से मुकाबला जीत लिया था। जीत के बाद टीम के खिलाड़ियों ने सेलिब्रेशन किया। 2015 से हरियाणवी इंडस्ट्री में कामः दहिया ने बताया कि वह बॉडी बिल्डर होने के साथ-साथ हरियाणवी कलाकार, मॉडल और एक्टर भी हैं। वे वर्ष 2015 से हरियाणवी इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। 100 से ज्यादा हरियाणवी सॉन्ग कर चुके हैं। प्रोफेशनल क्रिकेटर नहीं हैं, बल्कि शौक के तौर पर क्रिकेट खेलते हैं। आर्टिस्ट की क्रिकेट लीग में भी वे इसी शौक के चलते हिस्सा लेते हैं। अब क्रिकेट लीग के बारे में जानिए… 90 हरियाणवी कलाकार बने क्रिकेटर लीग के आयोजक कलाकार पिंटू पाबड़ा और साहिल सेहरडा हैं। साहिल ने बताया कि 9 से 13 सितंबर तक आर्टिस्ट चैंपियन लीग (ACL) का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ‘नशा मुक्त हरियाणा और खेलों को बढ़ावा’ देना है। इस लीग में हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री से जुड़े करीब 90 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। कलाकारों को 6 टीमों में बांटा गया है और 5 दिन तक क्रिकेट मैच खेले जा रहे हैं। हरियाणा के कवियों के नाम पर टीमें लीग की 6 टीमों के नाम हरियाणा के प्रसिद्ध कवियों और कलाकारों के नाम पर रखे गए हैं। इनमें जाट मेहर सिंह लीजेंड, धनपत लीजेंड, बाजे भगत लीजेंड, मांगेराम लीजेंड, लख्मीचंद लीजेंड और जगन्नाथ लीजेंड शामिल हैं। सभी टीमों के बीच क्रिकेट मुकाबले कराए जा रहे हैं। ये कलाकार लीग में शामिल इस लीग में योगी दहिया, रोमी हुडा, एचडी कुंडू, अमित ढूल, जीत घनघस और आर मान सहित कई कलाकार खेल रहे हैं। लीग की ओपनिंग में केडी देसी रॉक, प्रांजल दहिया, खासा आला चाहर समेत हरियाणा के कई कलाकार पहुंचे थे।

मूवी रिव्यू- हैवान:अक्षय-सैफ की इस टक्कर में आंखों से ज्यादा दिमाग का खेल, जानिए प्रियदर्शन ने कितना चौंकाया और क्या रह गई कमी

मूवी रिव्यू- हैवान:अक्षय-सैफ की इस टक्कर में आंखों से ज्यादा दिमाग का खेल, जानिए प्रियदर्शन ने कितना चौंकाया और क्या रह गई कमी

कास्ट- अक्षय कुमार, सैफ अली खान डायरेक्टर- प्रियदर्शन ड्यूरेशन- 2 घंटे 44 मिनट रेटिंग- 3/5 प्रियदर्शन, अक्षय कुमार और सैफ अली खान, नाम सुनकर ही लगता है कि मामला कुछ बड़ा होने वाला है। ऊपर से कहानी में एक ऐसा नेत्रहीन किरदार है, जिसकी आंखें भले दुनिया नहीं देख पातीं, लेकिन उसके कान, नाक और दिमाग कमाल का काम करते हैं। सामने है अक्षय कुमार का खूंखार परशुराम का किरदार, जो बदले की आग में जल रहा है। यानी एक तरफ ऐसा आदमी जिसे दिखाई नहीं देता और दूसरी तरफ ऐसा आदमी जिसे रोकना आसान नहीं। ‘हैवान’ का यह मुकाबला कागज पर काफी दिलचस्प है और फिल्म कई जगह इस दिलचस्पी को पर्दे पर भी उतारती है। बस दिक्कत यह है कि फिल्म अपने असली खेल तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा वक्त लेती है। कैसी है फिल्म की कहानी? श्याम राणे जन्म से नेत्रहीन है। परिवार की जिम्मेदारियां उठाते हुए वह मुंबई की एक बड़ी बिल्डिंग में काम करता है। आंखों की रोशनी नहीं है, लेकिन आवाज, खुशबू और स्पर्श से आसपास की दुनिया को समझने की उसकी क्षमता असाधारण है। दूसरी तरफ है परशुराम गोखले। जेल से बाहर आने के बाद उसके पास गुस्सा है, पुराना हिसाब है और बदला लेने की पूरी तैयारी। श्याम की जिंदगी में एक बच्ची से जुड़ा ऐसा राज आता है, जो उसे सीधे परशुराम के निशाने पर ला खड़ा करता है। इसके बाद शुरू होता है असली बिल्ली-चूहे का खेल, जहां श्याम को उस दुश्मन से बचना है जिसे वह देख नहीं सकता, और परशुराम को उस आदमी से निपटना है जो उसकी हर आहट सुन सकता है। कहानी का आइडिया मजेदार है और खासकर श्याम के सेंसेस को जिस तरह इस्तेमाल किया गया है, उसमें काफी गुंजाइश है। लेकिन फिल्म को वहां तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। कहानी में दम है, बस रफ्तार थोड़ी और तेज होती तो मजा दोगुना हो जाता। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? सैफ अली खान श्याम के किरदार में काफी सहज नजर आते हैं। उन्होंने नेत्रहीन किरदार को बेचारा बनाने की गलती नहीं की। श्याम शांत है, जिम्मेदार है और जरूरत पड़ने पर खतरनाक भी हो सकता है। सैफ की अंडरप्ले की गई एक्टिंग इस किरदार को विश्वसनीय बनाती है। अक्षय कुमार के लिए यह रोल अलग है। परशुराम में हीरो वाली चमक नहीं, बल्कि एक अजीब बेचैनी और गुस्सा है। अक्षय ने किरदार को पूरी एनर्जी के साथ निभाया है। हालांकि कुछ जगह उनका गुस्सा इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि डर पैदा होने के बजाय सीन थोड़ा ओवर-द-टॉप लगने लगता है। जिस ‘हैवान’ से खौफ पैदा होना चाहिए, वह हर बार उतना डरावना नहीं बन पाता। शारिब हाशमी पुलिस वाले के रोल में फिल्म के तनाव के बीच हंसी की खिड़की खोलते हैं और कई जगह खूब मजा देते हैं। बोमन ईरानी भरोसेमंद हैं। असरानी की मौजूदगी फिल्म में गर्माहट लाती है। सैयामी खेर और श्रिया पिलगांवकर को अच्छे कलाकार होने के बावजूद सीमित जगह मिली है। और मोहनलाल की झलक ‘ओप्पम’ देखने वालों के लिए खास तोहफा है। कैसा है डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष? कॉमेडी के लिए मशहूर प्रियदर्शन यहां एक डार्क थ्रिलर लेकर आए हैं। उनका यह नया रंग देखने में अच्छा लगता है। फिल्म में माहौल बनाने की कोशिश साफ दिखाई देती है। स्क्रीनप्ले की सबसे बड़ी कमी इसकी रफ्तार है। कुछ हिस्से कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय उसे रोकते हुए लगते हैं। गाने और कुछ लंबे भावनात्मक हिस्से थ्रिलर की गति को तोड़ते हैं। जब फिल्म श्याम और परशुराम के बीच आमने-सामने का खेल शुरू करती है, तब इसका असर बेहतर होता है। श्याम की सुनने और सूंघने की क्षमता को कहानी में इस्तेमाल करना भी दिलचस्प है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म के मूड के साथ जाती है। मुंबई की ऊंची इमारतें, बंद गलियां और रात के दृश्य कहानी को जरूरी अंधेरा देते हैं। खासकर तनाव वाले सीन्स में कैमरा और साउंड मिलकर माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म के मजबूत हिस्सों में है। कई जगह संगीत से ज्यादा आवाजें और खामोशी तनाव पैदा करती हैं, जो श्याम के किरदार को देखते हुए फिल्म की कहानी के लिए बिल्कुल सही चुनाव है। बस एडिटिंग टेबल पर थोड़ी और सख्ती होती तो फिल्म ज्यादा चुस्त हो सकती थी। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? प्रीतम का म्यूजिक फिल्म के मूड को सपोर्ट करता है, लेकिन कोई गाना ऐसा नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद भी कानों में घूमता रहे। ‘मेरे हीरो हैं’ भावनात्मक हिस्सों में ठीक बैठता है और ‘रंगियारा’ थोड़ा हल्कापन देता है। लेकिन इस फिल्म में असली काम गानों से ज्यादा बैकग्राउंड स्कोर करता है। ‘ओप्पम’ का असर: पुरानी कहानी, नया तड़का ‘हैवान’ प्रियदर्शन की ही मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रूपांतरण है। मूल फिल्म में मोहनलाल ने नेत्रहीन श्याम जैसे किरदार को निभाया था। यहां सैफ अपनी अलग छाप छोड़ने की कोशिश करते हैं और काफी हद तक सफल भी होते हैं। हिंदी संस्करण में एक्शन, इमोशन, कॉमेडी और स्टारडम का मसाला थोड़ा ज्यादा है। यही इसे ‘ओप्पम’ से अलग बनाता है, लेकिन कभी-कभी यही मसाला थ्रिलर की कसावट कम भी करता है। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? ‘हैवान’ में आइडिया है, बड़े सितारे हैं और प्रियदर्शन का अलग अंदाज भी। सैफ का शांत श्याम और अक्षय का बेचैन परशुराम आमने-सामने आते हैं तो फिल्म में असली मजा शुरू होता है। समस्या सिर्फ इतनी है कि जिस थ्रिल के लिए दर्शक टिकट खरीदता है, फिल्म उसे थोड़ा इंतजार करवाकर देती है। अगर आपको डार्क थ्रिलर में थोड़ा मसाला, इमोशन और कॉमेडी पसंद है तो ‘हैवान’ आपको निराश नहीं करेगी। लेकिन अगर उम्मीद है कि फिल्म शुरू से आखिर तक सीट की पकड़ मजबूत रखेगी, तो मामला थोड़ा ढीला पड़ता है। कुल मिलाकर, ‘हैवान’ में काटने वाले दांत जरूर हैं, बस हमला थोड़ा देर से होता है।

मूवी रिव्यू- हैवान:अक्षय-सैफ की इस टक्कर में आंखों से ज्यादा दिमाग का खेल, जानिए प्रियदर्शन ने कितना चौंकाया और क्या रह गई कमी

मूवी रिव्यू- हैवान:अक्षय-सैफ की इस टक्कर में आंखों से ज्यादा दिमाग का खेल, जानिए प्रियदर्शन ने कितना चौंकाया और क्या रह गई कमी

कास्ट- अक्षय कुमार, सैफ अली खान डायरेक्टर- प्रियदर्शन ड्यूरेशन- 2 घंटे 44 मिनट रेटिंग- 3/5 प्रियदर्शन, अक्षय कुमार और सैफ अली खान, नाम सुनकर ही लगता है कि मामला कुछ बड़ा होने वाला है। ऊपर से कहानी में एक ऐसा नेत्रहीन किरदार है, जिसकी आंखें भले दुनिया नहीं देख पातीं, लेकिन उसके कान, नाक और दिमाग कमाल का काम करते हैं। सामने है अक्षय कुमार का खूंखार परशुराम का किरदार, जो बदले की आग में जल रहा है। यानी एक तरफ ऐसा आदमी जिसे दिखाई नहीं देता और दूसरी तरफ ऐसा आदमी जिसे रोकना आसान नहीं। ‘हैवान’ का यह मुकाबला कागज पर काफी दिलचस्प है और फिल्म कई जगह इस दिलचस्पी को पर्दे पर भी उतारती है। बस दिक्कत यह है कि फिल्म अपने असली खेल तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा वक्त लेती है। कैसी है फिल्म की कहानी? श्याम राणे जन्म से नेत्रहीन है। परिवार की जिम्मेदारियां उठाते हुए वह मुंबई की एक बड़ी बिल्डिंग में काम करता है। आंखों की रोशनी नहीं है, लेकिन आवाज, खुशबू और स्पर्श से आसपास की दुनिया को समझने की उसकी क्षमता असाधारण है। दूसरी तरफ है परशुराम गोखले। जेल से बाहर आने के बाद उसके पास गुस्सा है, पुराना हिसाब है और बदला लेने की पूरी तैयारी। श्याम की जिंदगी में एक बच्ची से जुड़ा ऐसा राज आता है, जो उसे सीधे परशुराम के निशाने पर ला खड़ा करता है। इसके बाद शुरू होता है असली बिल्ली-चूहे का खेल, जहां श्याम को उस दुश्मन से बचना है जिसे वह देख नहीं सकता, और परशुराम को उस आदमी से निपटना है जो उसकी हर आहट सुन सकता है। कहानी का आइडिया मजेदार है और खासकर श्याम के सेंसेस को जिस तरह इस्तेमाल किया गया है, उसमें काफी गुंजाइश है। लेकिन फिल्म को वहां तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। कहानी में दम है, बस रफ्तार थोड़ी और तेज होती तो मजा दोगुना हो जाता। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? सैफ अली खान श्याम के किरदार में काफी सहज नजर आते हैं। उन्होंने नेत्रहीन किरदार को बेचारा बनाने की गलती नहीं की। श्याम शांत है, जिम्मेदार है और जरूरत पड़ने पर खतरनाक भी हो सकता है। सैफ की अंडरप्ले की गई एक्टिंग इस किरदार को विश्वसनीय बनाती है। अक्षय कुमार के लिए यह रोल अलग है। परशुराम में हीरो वाली चमक नहीं, बल्कि एक अजीब बेचैनी और गुस्सा है। अक्षय ने किरदार को पूरी एनर्जी के साथ निभाया है। हालांकि कुछ जगह उनका गुस्सा इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि डर पैदा होने के बजाय सीन थोड़ा ओवर-द-टॉप लगने लगता है। जिस ‘हैवान’ से खौफ पैदा होना चाहिए, वह हर बार उतना डरावना नहीं बन पाता। शारिब हाशमी पुलिस वाले के रोल में फिल्म के तनाव के बीच हंसी की खिड़की खोलते हैं और कई जगह खूब मजा देते हैं। बोमन ईरानी भरोसेमंद हैं। असरानी की मौजूदगी फिल्म में गर्माहट लाती है। सैयामी खेर और श्रिया पिलगांवकर को अच्छे कलाकार होने के बावजूद सीमित जगह मिली है। और मोहनलाल की झलक ‘ओप्पम’ देखने वालों के लिए खास तोहफा है। कैसा है डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष? कॉमेडी के लिए मशहूर प्रियदर्शन यहां एक डार्क थ्रिलर लेकर आए हैं। उनका यह नया रंग देखने में अच्छा लगता है। फिल्म में माहौल बनाने की कोशिश साफ दिखाई देती है। स्क्रीनप्ले की सबसे बड़ी कमी इसकी रफ्तार है। कुछ हिस्से कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय उसे रोकते हुए लगते हैं। गाने और कुछ लंबे भावनात्मक हिस्से थ्रिलर की गति को तोड़ते हैं। जब फिल्म श्याम और परशुराम के बीच आमने-सामने का खेल शुरू करती है, तब इसका असर बेहतर होता है। श्याम की सुनने और सूंघने की क्षमता को कहानी में इस्तेमाल करना भी दिलचस्प है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म के मूड के साथ जाती है। मुंबई की ऊंची इमारतें, बंद गलियां और रात के दृश्य कहानी को जरूरी अंधेरा देते हैं। खासकर तनाव वाले सीन्स में कैमरा और साउंड मिलकर माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म के मजबूत हिस्सों में है। कई जगह संगीत से ज्यादा आवाजें और खामोशी तनाव पैदा करती हैं, जो श्याम के किरदार को देखते हुए फिल्म की कहानी के लिए बिल्कुल सही चुनाव है। बस एडिटिंग टेबल पर थोड़ी और सख्ती होती तो फिल्म ज्यादा चुस्त हो सकती थी। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? प्रीतम का म्यूजिक फिल्म के मूड को सपोर्ट करता है, लेकिन कोई गाना ऐसा नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद भी कानों में घूमता रहे। ‘मेरे हीरो हैं’ भावनात्मक हिस्सों में ठीक बैठता है और ‘रंगियारा’ थोड़ा हल्कापन देता है। लेकिन इस फिल्म में असली काम गानों से ज्यादा बैकग्राउंड स्कोर करता है। ‘ओप्पम’ का असर: पुरानी कहानी, नया तड़का ‘हैवान’ प्रियदर्शन की ही मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रूपांतरण है। मूल फिल्म में मोहनलाल ने नेत्रहीन श्याम जैसे किरदार को निभाया था। यहां सैफ अपनी अलग छाप छोड़ने की कोशिश करते हैं और काफी हद तक सफल भी होते हैं। हिंदी संस्करण में एक्शन, इमोशन, कॉमेडी और स्टारडम का मसाला थोड़ा ज्यादा है। यही इसे ‘ओप्पम’ से अलग बनाता है, लेकिन कभी-कभी यही मसाला थ्रिलर की कसावट कम भी करता है। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? ‘हैवान’ में आइडिया है, बड़े सितारे हैं और प्रियदर्शन का अलग अंदाज भी। सैफ का शांत श्याम और अक्षय का बेचैन परशुराम आमने-सामने आते हैं तो फिल्म में असली मजा शुरू होता है। समस्या सिर्फ इतनी है कि जिस थ्रिल के लिए दर्शक टिकट खरीदता है, फिल्म उसे थोड़ा इंतजार करवाकर देती है। अगर आपको डार्क थ्रिलर में थोड़ा मसाला, इमोशन और कॉमेडी पसंद है तो ‘हैवान’ आपको निराश नहीं करेगी। लेकिन अगर उम्मीद है कि फिल्म शुरू से आखिर तक सीट की पकड़ मजबूत रखेगी, तो मामला थोड़ा ढीला पड़ता है। कुल मिलाकर, ‘हैवान’ में काटने वाले दांत जरूर हैं, बस हमला थोड़ा देर से होता है।

बिपाशा बसु की प्रोटीन ड्रिंक में दिखे कीड़े:तुकाराम मुंढे से मांगी मदद, कहा- आप हमारी इकलौती उम्मीद हैं

बिपाशा बसु की प्रोटीन ड्रिंक में दिखे कीड़े:तुकाराम मुंढे से मांगी मदद, कहा- आप हमारी इकलौती उम्मीद हैं

एक्ट्रेस बिपाशा बसु को प्रोटीन पाउडर के नए खुले जार में छोटे-छोटे कीड़े मिले हैं। उन्होंने इसका वीडियो इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया। बिपाशा ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को टैग किया और मामले में दखल देने की अपील की। बिपाशा ने लिखा ड्रिंक के वीडियो के साथ लिखा है, ‘तुकाराम मुंढे आप ही हमारी एकमात्र उम्मीद हैं। ताकि हम जो भी चीजें खरीदें, उनमें खराब या मिलावटी सामान न मिले।’ वीडियो में बिपाशा ने अपनी उंगली पर एक छोटा सा कीड़ा दिखाया। उन्होंने कहा, ‘इस आइसोप्योर में छोटे-छोटे कीड़े भरे हुए हैं। बहुत ही छोटे कीड़े। यह नया डिब्बा है, जिसे हमने अभी खोला है।’ इसके बाद उन्होंने उंगली पर कीड़ा दिखाते हुए कहा, ‘ये रहे कीड़े, इसमें ऐसे ही कीड़े भरे हुए हैं।’ महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर लोगों का ध्यान बढ़ रहा है। तुकाराम मुंढे राज्यभर में फूड बिजनेस के खिलाफ कई तरह की जांच और कार्रवाई कर रहे हैं। श्वेता तिवारी ने डिलीवरी में कॉकरोच आने पर मांगी थी तुकाराम मुंढे से मदद श्वेता तिवारी ने हाल ही में ऑनलाइन एनर्जी ड्रिंक ऑर्डर की थी। जब ऑर्डर खोला गया, तो उसमें कॉकरोच मिलने से एक्ट्रेस घबरा गईं। एक्ट्रेस ने वीडियो जारी कर महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी कार्रवाई से चर्चा में बने हुए FDA ऑफिसर तुकाराम मुंढे से सवाल किया है। ऑफिशियल इंस्टाग्राम से शेयर किए गए वीडियो में श्वेता तिवारी ने कहा, ‘हमने इंस्टामार्ट से रेडबुल मंगवाया। लेकिन इंस्टामार्ट से हमारे घर में ये (कॉकरोच) भी आया। कॉकरोच पूरे घर में भाग रहा है।’ दूसरे वीडियो में श्वेता ने कॉकरोच दिखाया और कहा, ‘क्या हमें तुकाराम मुंढे जी को टैग करना चाहिए। मुंढे जी ये हमारे घर में इंस्टामार्ट से कॉकरोच आ रहे हैं। आप कहां हैं, ध्यान दीजिए।’ प्रीति जिंटा और ट्विंकल खन्ना ने भी बात रखी हाल ही में मुंबई में एक्ट्रेस प्रीति जिंटा को काली टी-शर्ट पहने देखा गया। इस टी-शर्ट पर ‘टीम तुकाराम मुंढे’ लिखा था। उनके इस कपड़े को अधिकारी के फूड सेफ्टी अभियान के समर्थन के तौर पर देखा गया। मुंढे की इंस्पेक्शन पर हो रही चर्चा को लेकर ट्विंकल खन्ना ने भी अपनी बात रखी थी। एक पोस्ट में एक्ट्रेस से लेखिका बनीं ट्विंकल ने लिखा, ‘क्या किसी सरकारी अधिकारी को बस अपना काम करते हुए देखना इतनी अनोखी बात है कि यह खबर बन गई है?’ सलमान खान ने भी दोस्त की तुकाराम मुंढे के नाम से फिरकी ली सलमान खान ने अपनी दोस्त सृष्टि साहनी के मुंबई के बांद्रा में खुले नए कैफे ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शेयर किया। साथ ही सलमान ने दोस्त को कैफे की हाइजीन बनाए रखने की मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी। सलमान ने लिखा, “सृष्टि मेरी कॉफी रिफिल करना प्लीज। कीमत मत बढ़ाना, क्वालिटी मेंटेन करना। हाइजीन मेंटेन रखना, वरना मैं HIM को भेज दूंगा और काम हो जाएगा, बहन।” सलमान ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन “HIM” का इशारा महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ओर माना जा रहा है। यह बात ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर कार्रवाई तेज है।

बिपाशा बसु की प्रोटीन ड्रिंक में दिखे कीड़े:तुकाराम मुंढे से मांगी मदद, कहा- आप हमारी इकलौती उम्मीद हैं

बिपाशा बसु की प्रोटीन ड्रिंक में दिखे कीड़े:तुकाराम मुंढे से मांगी मदद, कहा- आप हमारी इकलौती उम्मीद हैं

एक्ट्रेस बिपाशा बसु को प्रोटीन पाउडर के नए खुले जार में छोटे-छोटे कीड़े मिले हैं। उन्होंने इसका वीडियो इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया। बिपाशा ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को टैग किया और मामले में दखल देने की अपील की। बिपाशा ने लिखा ड्रिंक के वीडियो के साथ लिखा है, ‘तुकाराम मुंढे आप ही हमारी एकमात्र उम्मीद हैं। ताकि हम जो भी चीजें खरीदें, उनमें खराब या मिलावटी सामान न मिले।’ वीडियो में बिपाशा ने अपनी उंगली पर एक छोटा सा कीड़ा दिखाया। उन्होंने कहा, ‘इस आइसोप्योर में छोटे-छोटे कीड़े भरे हुए हैं। बहुत ही छोटे कीड़े। यह नया डिब्बा है, जिसे हमने अभी खोला है।’ इसके बाद उन्होंने उंगली पर कीड़ा दिखाते हुए कहा, ‘ये रहे कीड़े, इसमें ऐसे ही कीड़े भरे हुए हैं।’ महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर लोगों का ध्यान बढ़ रहा है। तुकाराम मुंढे राज्यभर में फूड बिजनेस के खिलाफ कई तरह की जांच और कार्रवाई कर रहे हैं। श्वेता तिवारी ने डिलीवरी में कॉकरोच आने पर मांगी थी तुकाराम मुंढे से मदद श्वेता तिवारी ने हाल ही में ऑनलाइन एनर्जी ड्रिंक ऑर्डर की थी। जब ऑर्डर खोला गया, तो उसमें कॉकरोच मिलने से एक्ट्रेस घबरा गईं। एक्ट्रेस ने वीडियो जारी कर महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी कार्रवाई से चर्चा में बने हुए FDA ऑफिसर तुकाराम मुंढे से सवाल किया है। ऑफिशियल इंस्टाग्राम से शेयर किए गए वीडियो में श्वेता तिवारी ने कहा, ‘हमने इंस्टामार्ट से रेडबुल मंगवाया। लेकिन इंस्टामार्ट से हमारे घर में ये (कॉकरोच) भी आया। कॉकरोच पूरे घर में भाग रहा है।’ दूसरे वीडियो में श्वेता ने कॉकरोच दिखाया और कहा, ‘क्या हमें तुकाराम मुंढे जी को टैग करना चाहिए। मुंढे जी ये हमारे घर में इंस्टामार्ट से कॉकरोच आ रहे हैं। आप कहां हैं, ध्यान दीजिए।’ प्रीति जिंटा और ट्विंकल खन्ना ने भी बात रखी हाल ही में मुंबई में एक्ट्रेस प्रीति जिंटा को काली टी-शर्ट पहने देखा गया। इस टी-शर्ट पर ‘टीम तुकाराम मुंढे’ लिखा था। उनके इस कपड़े को अधिकारी के फूड सेफ्टी अभियान के समर्थन के तौर पर देखा गया। मुंढे की इंस्पेक्शन पर हो रही चर्चा को लेकर ट्विंकल खन्ना ने भी अपनी बात रखी थी। एक पोस्ट में एक्ट्रेस से लेखिका बनीं ट्विंकल ने लिखा, ‘क्या किसी सरकारी अधिकारी को बस अपना काम करते हुए देखना इतनी अनोखी बात है कि यह खबर बन गई है?’ सलमान खान ने भी दोस्त की तुकाराम मुंढे के नाम से फिरकी ली सलमान खान ने अपनी दोस्त सृष्टि साहनी के मुंबई के बांद्रा में खुले नए कैफे ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शेयर किया। साथ ही सलमान ने दोस्त को कैफे की हाइजीन बनाए रखने की मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी। सलमान ने लिखा, “सृष्टि मेरी कॉफी रिफिल करना प्लीज। कीमत मत बढ़ाना, क्वालिटी मेंटेन करना। हाइजीन मेंटेन रखना, वरना मैं HIM को भेज दूंगा और काम हो जाएगा, बहन।” सलमान ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन “HIM” का इशारा महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ओर माना जा रहा है। यह बात ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर कार्रवाई तेज है।

इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह की 2 किमी-लंबी सुरंग उड़ाई:विस्फोट के बाद 4.1 तीव्रता का भूकंप आया; PM नेतन्याहू बोले- हैप्पी न्यू ईयर

इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह की 2 किमी-लंबी सुरंग उड़ाई:विस्फोट के बाद 4.1 तीव्रता का भूकंप आया; PM नेतन्याहू बोले- हैप्पी न्यू ईयर

इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सुरंग को ब्लास्ट कर तबाह कर दिया। यह विस्फोट इतना तेज था कि इलाके में 4.1 तीव्रता का भूकंप आ गया। लेबनान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, धमाक से आसपास के इलाकों में जमीन हिलने लगी। कार्रवाई के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, “मिशन पूरा हुआ। हैप्पी न्यू ईयर!” इजराइली सेना के मुताबिक, सुरंग नेटवर्क में ईरान में बने दर्जनों रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन रखे थे। यहां मशीनगन, दर्जनों एंटी-टैंक मिसाइल और सैकड़ों बारूदी सुरंगें व विस्फोटक भी मिले। सेना ने बताया कि इस परिसर में हिजबुल्लाह की ‘बद्र’ यूनिट का कमांड सेंटर भी था। 2 दशक में तैयार किया गया था टनल नेटवर्क नेतन्याहू और इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इस टनल नेटवर्क आतंकी ढांचा बताया। उनके मुताबिक, इसे ईरान की फंडिंग और योजना से करीब दो दशक में तैयार किया गया था। इजराइल का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद अली अल-ताहेर पहाड़ी पर जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह उसका ऑपरेशनल कंट्रोल हो गया है। इजराइल ने पिछले हफ्ते अली अल-ताहेर पहाड़ी पर कब्जा करने का दावा किया था। सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, वहां हिजबुल्लाह के कुछ लड़ाके इलाके से निकल गए, जबकि कुछ को हवाई हमलों और तोपखाने की कार्रवाई में मार गिराया गया। लेबनान में इजराइली हमले फिर तेज हो रहे ईरान और अमेरिका के बीच जून में समझ बनने और उसके बाद लेबनान-इजराइल समझौते के बाद कुछ समय के लिए हिंसा कम हुई थी। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमले फिर तेज हुए हैं। AFP के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका ने प्रस्ताव दिया था कि अली अल-ताहेर पहाड़ी का नियंत्रण लेबनानी सेना को दिया जाए, लेकिन हिजबुल्लाह ने इसे स्वीकार नहीं किया। लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक, मार्च से अब तक इजराइली हमलों में 4,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान के एक हिस्से में बनाए गए तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में भी मौजूद है। खबर अपडेट हो रही है…

‘सुशांत सिंह मामले में मेरे बयान आज भी दर्ज नहीं':सुरजीत सिंह बोले- मानवाधिकार आयोग को दोबारा जांच के लिए पत्र लिखा; रिया को सॉरी बाबू कहते सुना

‘सुशांत सिंह मामले में मेरे बयान आज भी दर्ज नहीं':सुरजीत सिंह बोले- मानवाधिकार आयोग को दोबारा जांच के लिए पत्र लिखा; रिया को सॉरी बाबू कहते सुना

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत को छह साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन यह मामला आज भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। करणी सेना मुंबई के अध्यक्ष सुरजीत सिंह राठौड़ जयपुर आए। निकाय चुनाव में मतदान के लिए जयपुर पहुंचे राठौड़ ने दैनिक भास्कर से बातचीत में सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े अपने दावों, कूपर अस्पताल की मॉर्च्युरी में उनके पार्थिव शरीर को देखने के दौरान सामने आई बातों, दिशा सालियान से जुड़े कथित कनेक्शन और मामले की जांच को लेकर अपनी मांगों पर बात की। राठौड़ का दावा है कि सुशांत के पार्थिव शरीर को देखने के दौरान मैंने शरीर पर कुछ ऐसी चीजें देखीं, जिन्हें लेकर मेरे मन में सवाल पैदा हुए। उनका कहना है कि मैंने उस समय पुलिस और संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी दी, लेकिन मेरा बयान दर्ज नहीं किया गया। मैं अब महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग से दोबारा जांच की मांग करूंगा। राठौड़ ने कहा- सुशांत के पार्थिव शरीर को देखकर उस समय रिया के मुंह से सिर्फ एक शब्द निकला- ‘सॉरी बाबू।’ सवाल: आखिर छह साल बाद सुशांत सिंह राजपूत केस को आप क्यों उठा रहे हैं? सुरजीत सिंह राठौड़: मेरे लिए यह सिर्फ एक मामला नहीं है। जब किसी परिवार को लगता है कि उसे न्याय नहीं मिला है तो उसकी आवाज उठाना जरूरी है। मैं 15 जून 2020 को कूपर अस्पताल पहुंचा था। वहां मैंने जो कुछ देखा, उसके बाद मेरे मन में कई सवाल पैदा हुए। मैंने उस समय भी अपनी बात रखी और आज भी उसी बात पर कायम हूं। मेरा कहना है कि अगर किसी व्यक्ति ने कोई गंभीर बात सामने रखी है तो कम से कम उसका बयान तो दर्ज होना चाहिए। मेरा बयान ही दर्ज नहीं किया गया। आज भी मैं चाहता हूं कि मेरी बात सुनी जाए और तथ्यों की दोबारा जांच हो। 15 जून 2020 को मैं कूपर अस्पताल पहुंचा था। वहां धोनी एंटरटेनमेंट के निर्माता संदीप सिंह भी आए थे। इसी दौरान रिया चक्रवर्ती वहां आईं और उन्होंने सुशांत के अंतिम दर्शन की इच्छा जताई। मॉर्च्युरी के स्टाफ से अनुमति लेने के बाद मैं और रिया अंदर गए। सुशांत का पार्थिव शरीर डीप फ्रीजर से बाहर निकाला गया। मैंने उनके चेहरे से कपड़ा हटाया। उस समय रिया के मुंह से सिर्फ एक शब्द निकला- ‘सॉरी बाबू।’ मैं उस समय हैरान हुआ कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा। मेरे मन में सवाल आया कि आखिर वह किस बात के लिए माफी मांग रही थीं? हालांकि यह उनकी व्यक्तिगत भावना हो सकती है और इसका अर्थ मैं निश्चित तौर पर नहीं बता सकता। उस वक्त मेरे मन में यह बात जरूर आई थी। जब हम मॉर्च्युरी से बाहर आए तो रिया की मां, पिता और भाई अंदर जाना चाहते थे, लेकिन मॉर्च्युरी स्टाफ ने उन्हें अनुमति नहीं दी। इसके बाद वे वहां से चले गए। बाद में एक चैनल के माध्यम से रिया की ओर से यह कहा गया कि उन्होंने मॉर्च्युरी के अंदर सुशांत को नहीं देखा था। मेरा कहना है कि मैं उनके साथ अंदर गया था, इसलिए इस बात को लेकर मेरे मन में सवाल है। सवाल: महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग को लेकर भी आपने सवाल उठाए हैं। अब आपने दोबारा पत्र क्यों लिखा? सुरजीत सिंह राठौड़: मैंने वर्तमान महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को पत्र और ई-मेल भेजकर दोबारा अपनी बात रखी है। मेरी मांग है कि मेरे बयान को दर्ज किया जाए और यह देखा जाए कि उस समय कूपर अस्पताल और रिया चक्रवर्ती को किस आधार पर क्लीन चिट दी गई थी। मेरा सवाल सिर्फ इतना है कि अगर मैं उस घटना का प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा कर रहा था तो मेरा बयान क्यों नहीं लिया गया? कम से कम मुझे बुलाकर पूछा तो जाता कि आपने क्या देखा था। सवाल: आप सुशांत और दिशा सालियान की मौत के बीच कनेक्शन की बात भी करते हैं। आपका आधार क्या है? सुरजीत सिंह राठौड़: मेरा मानना है कि दोनों घटनाओं की कड़ियों को भी जांच के दायरे में देखा जाना चाहिए। सुशांत और दिशा दोनों दोस्त थे। सुशांत को दिशा से जुड़ी कुछ बातें पता थीं और वे इसको लेकर नाराज थे। इसमें आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली और डीनो मोरिया से दिशा परेशान थी। इस पर सुशांत भी इन सभी से नाराज थे। मेरा दावा है कि सुशांत ने कुछ लोगों के सामने इस मामले को उठाने की बात कही थी। मुझे लगता है कि इन दोनों मामलों के बीच जो भी तथ्यात्मक कड़ियां हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मैं चाहता हूं कि जांच एजेंसी सभी तथ्यों को सामने रखे और जो सच है, वह देश के सामने आए। मैंने पहले भी कुछ लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी को ही निकालना चाहिए। अगर कोई साजिश थी तो उसका पता लगाया जाना चाहिए और अगर नहीं थी तो यह भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए कि सुशांत की मौत से जुड़े हर सवाल का जवाब क्या है। सवाल: आपकी सुशांत से व्यक्तिगत मुलाकात कितनी थी? सुरजीत सिंह राठौड़: मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरी सुशांत से कोई गहरी व्यक्तिगत दोस्ती नहीं थी। मुंबई में फिल्म प्रीमियर और दूसरे कार्यक्रमों में एक-दो बार मुलाकात हुई थी। एक प्रोजेक्ट को लेकर फोन पर भी बातचीत हुई थी। जब फिल्म पद्मावत को लेकर राजस्थान में आंदोलन चल रहा था। उस समय सुशांत ने राजपूत समाज को लेकर कुछ बयान दिए थे। बाद में उन्होंने अपने नाम से सरनेम भी हटाया था। तब मैंने उन्हें फोन करके कहा था कि आप अपना काम कीजिए। इस मामले में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने मुझसे कहा था कि वे फिल्म इंडस्ट्री में हैं और कई बार इंडस्ट्री में रहकर कुछ बातें समझनी पड़ती हैं। सवाल: अब आप सुशांत सिंह राजपूत पर फिल्म बनाने की तैयारी भी कर रहे हैं। इसकी वजह क्या है? सुरजीत सिंह राठौड़: हां, हम सुशांत पर फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं। अभी इसकी स्टोरी पर काम चल रहा है। इस फिल्म का मेरा उद्देश्य पैसा कमाना नहीं है। मैं चाहता हूं कि इस पूरे मामले में जो सवाल उठे, जो घटनाएं

नेपाल में पुनर्निर्माण के लिए ₹4.52 लाख करोड़ लगेंगे:यह देश की GDP से भी ज्यादा; बाढ़ से 16 लाख लोग प्रभावित, 1377 की मौत

नेपाल में पुनर्निर्माण के लिए ₹4.52 लाख करोड़ लगेंगे:यह देश की GDP से भी ज्यादा; बाढ़ से 16 लाख लोग प्रभावित, 1377 की मौत

नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ ने इतनी बड़ी तबाही मचाई है कि अब टूटे घर, सड़कें, पुल और दूसरी सुविधाएं फिर से बनाने में 4.52 लाख करोड़ भारतीय रुपए खर्च होने का अनुमान है। यह रकम नेपाल की GDP 4.32 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। बाढ़ से करीब 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 1377 लोगों की मौत हो चुकी है और 5130 लोग लापता हैं। कुल अनुमानित खर्च का करीब 75% यानी ₹2.96 लाख करोड़ सड़क, पुल, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाएं फिर से बनाने में लगेगा। बाढ़ में 7,570 घर, 48 सरकारी इमारतें, 18 स्कूल और 7 स्वास्थ्य केंद्र भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…