बेंगलुरु में इंजीनियर कपल ने सुसाइड किया:पति फ्लैट में फंदे से लटका मिला, पत्नी ने 17वीं मंजिल से कूदकर जान दी

बेंगलुरु के कोथनूर इलाके के अपार्टमेंट में एक इंजीनियर कपल के सुसाइड का मामला सामने आया है। पहले पति का शव फ्लैट के बंद कमरे में मिला। कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला तो पत्नी ने सिक्योरिटी और पड़ोसियों को बुलाया। दरवाजा तोड़ने पर पति का शव फंदे से लटका मिला। इसके कुछ ही मिनट बाद पत्नी फ्लैट से बाहर निकलीं और उसी अपार्टमेंट की 17वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। मृतकों की पहचान तेलंगाना के सिद्दीपेट निवासी भानु चंदर रेड्डी कुंटा (32) और उनकी पत्नी शाजिया (31) के रूप में हुई है। भानु चंदर सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। शाजिया IBM में काम करती थीं। रेड्डी ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में बताया। साथ ही लिखा कि उनकी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए। कपल शादी से पहले लिव-इन रिलेशनशिप में रहे पुलिस के अनुसार, कपल की शादी को लगभग नौ साल हो चुके थे। इससे पहले दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके थे। सूत्रों ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद उनके बीच अक्सर विवाद होते रहते थे। हालांकि, दोनों परिवार उनके रिश्ते से अनजान थे। बेंगलुरु पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और उनकी मौत के कारणों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या पति के स्वास्थ्य समस्याओं ने इस घटना में कोई भूमिका निभाई। इसके अलावा रिश्तों में तनाव और मानसिक दबाव और अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही मौत की असली वजह और पूरा घटनाक्रम स्पष्ट हो सकेगा। बेंगलुरु के घर में दो महिलाओं के शव मिले, दो घायल इसी बीच, बेंगलुरु के बाहरी इलाके के घर में दो अन्य महिलाओं के गले कटे हुए शव पाए गए। जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य घायल अवस्था में थे। पुलिस के अनुसार, घटना बढ़ते कर्ज के कारण आत्महत्या की कोशिश लगती है। पुलिस ने बताया कि आशा (55) और उनकी बेटी वर्षिता (32) घर में मृत पाई गईं। आशा का बेटा मोहन (27) और 10 साल का पोता मयंक गौड़ा घायल अवस्था में बच गए और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… आंध्र प्रदेश में नेवी कर्मचारी ने प्रेमिका के टुकड़े किए, धड़ को फ्रिज में रखा; पत्नी मायके गई थी आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक शादीशुदा नेवी कर्मचारी ने रविवार 29 मार्च को अपनी प्रेमिका की हत्या कर दी। फिर उसके शव के कई टुकड़े कर दिए। इसके बाद खुद पुलिस स्टेशन गया और अपना अपराध को कबूल कर लिया। आरोपी ने प्रेमिका का सिर, हाथ और पैर को धड़ से अलग किया। पैरों और कूल्हे के हिस्से को ट्रॉली बैग में छिपा दिया। धड़ को फ्रिज में रखा। पूरी खबर पढ़ें…
बेंगलुरु में इंजीनियर कपल ने सुसाइड किया:पति फ्लैट में फंदे से लटका मिला, पत्नी ने 17वीं मंजिल से कूदकर जान दी

बेंगलुरु के कोथनूर इलाके के अपार्टमेंट में एक इंजीनियर कपल के सुसाइड का मामला सामने आया है। पहले पति का शव फ्लैट के बंद कमरे में मिला। कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला तो पत्नी ने सिक्योरिटी और पड़ोसियों को बुलाया। दरवाजा तोड़ने पर पति का शव फंदे से लटका मिला। इसके कुछ ही मिनट बाद पत्नी फ्लैट से बाहर निकलीं और उसी अपार्टमेंट की 17वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। मृतकों की पहचान तेलंगाना के सिद्दीपेट निवासी भानु चंदर रेड्डी कुंटा (32) और उनकी पत्नी शाजिया (31) के रूप में हुई है। भानु चंदर सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। शाजिया IBM में काम करती थीं। कपल की शादी को लगभग नौ साल हो चुके थे। इससे पहले दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके थे। सूत्रों ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद उनके बीच अक्सर विवाद होते रहते थे। रेड्डी ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उन्होंने लिखा कि उनकी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में बताया। मृतकों के दोनों परिवार उनके रिश्ते से अनजान थे। बेंगलुरु पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और उनकी मौत के कारणों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। पलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या पति के स्वास्थ्य समस्याओं ने इस घटना में कोई भूमिका निभाई। इसके अलावा रिश्तों में तनाव और मानसिक दबाव और अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही मौत की असली वजह और पूरा घटनाक्रम स्पष्ट हो सकेगा। इसी बीच, बेंगलुरु के बाहरी इलाके के घर में दो अन्य महिलाओं के गले कटे हुए शव पाए गए। जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य घायल अवस्था में थे। पुलिस के अनुसार, घटना बढ़ते कर्ज के कारण आत्महत्या की कोशिश लगती है। पुलिस ने बताया कि आशा (55) और उनकी बेटी वर्षिता (32) घर में मृत पाई गईं। आशा का बेटा मोहन (27) और 10 साल का पोता मयंक गौड़ा घायल अवस्था में बच गए और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बुरहानपुर में उर्वरक वितरण के लिए ई-विकास सिस्टम लागू:कल से ऑनलाइन पारदर्शी व्यवस्था शुरू, कालाबाजारी पर रोक लगेगी

बुरहानपुर में कृषि आदान विक्रेताओं के लिए उर्वरक वितरण की नई ‘ई-विकास प्रणाली’ पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यह प्रणाली कल (1 अप्रैल) से पूरी तरह लागू होगी, जिसका उद्देश्य किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराना है। कलेक्टर हर्ष सिंह के मार्गदर्शन में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के तहत कृषि विभाग किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसी कड़ी में कृषि उपज मंडी केला नीलामी सभागृह में इस ऑनलाइन प्रणाली का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में उपसंचालक कृषि एम.एस. देवके ने कृषि आदान विक्रेताओं को ई-विकास प्लेटफॉर्म के माध्यम से उर्वरक वितरण की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई। आसानी से उर्वरक मिल सकेगा इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य जिले में शत-प्रतिशत पारदर्शी उर्वरक वितरण सुनिश्चित करना है। इससे किसानों को समय पर और आसानी से उर्वरक मिल सकेगा, साथ ही कालाबाजारी, अधिक दर और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा। उपसंचालक देवके ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा लागू की गई यह नवीन प्रणाली 1 अप्रैल से पूर्ण रूप से लागू की जा रही है। नई व्यवस्था से किसानों को उनकी फसल की वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार लक्षित रूप में उर्वरक प्राप्त होगा। संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग से फसलों की उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी प्रताप सिंह जमरे, एसएडीओ राम पाटिल, प्रभारी जिला विपणन अधिकारी संदीप इंगले, कृषि विस्तार अधिकारी जे.एस. चौहान, अखिलेश रावत सहित बड़ी संख्या में कृषि आदान विक्रेता उपस्थित रहे।
जापान में क्रिकेट लीग, इंटरनेशनल स्टार्स बिना पैसे लिए खेलेंगे:2 मई से तीन दिन की लीग में खेलेंगे दिमुथ करुणारत्ने, करण केसी और जोश ब्राउन

क्रिकेट का क्रेज अब सिर्फ भारत, ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड तक सीमित नहीं है। अब ‘उगते सूरज का देश’ यानी जापान भी इस खेल में तेजी से पहचान बना रहा है। जापान प्रीमियर लीग (जेपीएल) नाम का टी20 टूर्नामेंट धीरे-धीरे दुनिया भर के क्रिकेट फैंस और खिलाड़ियों का ध्यान खींच रहा है। इस साल लीग में श्रीलंका के पूर्व कप्तान दिमुथ करुणारत्ने, ऑस्ट्रेलिया के बिग बैश लीग स्टार जोश ब्राउन और नेपाल के ऑलराउंडर करण केसी जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खेलते नजर आएंगे। आखिर जापान में क्रिकेट का क्या माहौल है और यह लीग कैसे काम करती है? जानते हैं… जापान प्रीमियर लीग के बारे में वो सबकुछ, जो आपके लिए जानना जरूरी है 1. जापान प्रीमियर लीग क्या है और यह कब शुरू हुई? इसकी शुरुआत 2015 में हुई थी। इसमें 4 टीमें (नॉर्थ, साउथ, ईस्ट, वेस्ट कांटो) थीं, जो घरेलू मैदानों पर खेलती थीं। लेकिन दर्शकों की कमी के कारण वह फ्लॉप हो गया। अब मैच सानो इंटरनेशनल ग्राउंड पर होंगे। इसमें पांचवीं टीम ‘कंसाई’ भी जुड़ गई है। टूर्नामेंट 2 से 4 मई तक चलेगा, जिसमें 12 मैच खेले जाएंगे। 2. क्या जापान में क्रिकेट का कोई पुराना इतिहास है? जापान में क्रिकेट 1863 से खेला जा रहा है। 80 के दशक में जापान क्रिकेट एसोसिएशन की स्थापना भी हो गई थी। हालांकि, लंबे इतिहास के बावजूद क्रिकेट वहां मुख्यधारा का खेल नहीं बन पाया है। जापान की अंडर-19 पुरुष टीम ने 2020 और 2026 के वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया था। 3. इस लीग में खेलने वाले स्थानीय खिलाड़ी कौन हैं? जापान में क्रिकेटर्स पेशेवर नहीं हैं। वे या तो छात्र हैं या फिर कहीं नौकरी करते हैं। ये खिलाड़ी मैच खेलने के लिए दफ्तरों से सालाना छुट्टियां लेते हैं। उनके लिए क्रिकेट पेशे से ज्यादा एक शौक है। साल की शुरुआत में ट्रायल्स और घरेलू प्रदर्शन के आधार पर इन खिलाड़ियों को 14-सदस्यीय टीम में ड्रॉफ्ट के जरिए चुना जाता है। 4. जब पैसा नहीं मिलता, तो विदेशी क्यों खेलने जाते हैं? फैंस को हाई-क्वालिटी क्रिकेट दिखाने व स्थानीय खिलाड़ियों को एक्सपोजर देने हर टीम में एक विदेशी खिलाड़ी रखा जाता है। इस लीग में विदेशी खिलाड़ियों को खेलने की कोई सैलरी नहीं मिलती। ये खिलाड़ी क्रिकेट के विकास में मदद करने और सद्भावना के तहत यहां खेलने आते हैं। 5. आयोजक दर्शकों को आकर्षित करने के लिए क्या कर रहे हैं? इसका भविष्य क्या है? जापान में सिर्फ क्रिकेट दर्शकों को मैदान तक लाने के लिए काफी नहीं है। इसलिए आयोजक डांस, म्यूजिक, फूड स्टॉल्स, जापानी भाषा में कमेंट्री का सहारा लेते हैं। एसोसिएशन के चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर एलन का मानना है कि बिना सैलरी के खिलाड़ियों को बुलाना लंबे समय तक मुमकिन नहीं है। अच्छे स्पॉन्सर और तगड़ी फंडिंग की जरूरत है।
मुनाफे के चक्कर में ग्राहकों को भूली कंपनी:क्राफ्ट हाइंज को तोड़ने के बजाय सुधारेंगे नए सीईओ कैहिलेन; ग्राहकों की सेहत पर जोर

जब स्टीव कैहिलेन को क्राफ्ट हाइंज का सीईओ बनाया गया, तो काम साफ था- कंपनी को दो हिस्सों में तोड़ना। लेकिन महज छह हफ्ते के भीतर उन्होंने वह फैसला पलट दिया। उन्होंने बोर्ड को समझाया, वॉरेन बफे के उत्तराधिकारी ग्रेग एबेल को फोन किया और कहा, ‘यह कंपनी ठीक हो सकती है, तोड़ने की जरूरत नहीं है।’ यह कोई छोटा फैसला नहीं था। लगातार 9 तिमाहियों से घटती बिक्री, शेयर में गिरावट और उपभोक्ताओं का सस्ते ब्रांड्स की तरफ जाना, सब कुछ क्राफ्ट हाइंज के खिलाफ था। ऑस्कर मेयर, फिलाडेल्फिया क्रीच चीज, जेल-ओ, कूल-एड जैसे दशकों पुराने ब्रांड्स की पहचान तो है, लेकिन जैसा कैहिलेन खुद कहते हैं, ‘लोग टी-शर्ट खरीदना चाहते हैं, प्रोडक्ट नहीं। हमें दोनों बिकवाने हैं।’ 60 साल के कैहिलेन फूड इंडस्ट्री के पुराने खिलाड़ी हैं। इससे पहले वो केलॉग कंपनी को दो हिस्सों में बांट चुके थे। स्नैक्स वाला हिस्सा केलानोवा बना और मार्स ने उसे 36 अरब डॉलर (अभी के हिसाब से 3.4 लाख करोड़ रुपए) में खरीद लिया। यानी कंपनी तोड़ने का अनुभव उनके पास था, लेकिन इस बार उन्होंने वो नहीं किया जो उनसे उम्मीद थी। उनका तर्क सीधा था- अगर अभी तोड़ा, तो दोनों हिस्से कमजोर निकलेंगे। पहले कंपनी को मजबूत करो, फिर विकल्प खुले रहेंगे। चुनौतियां कम नहीं हैं। वजन घटाने वाली दवाओं ने लोगों की खाने की आदतें बदल दी हैं। अमेरिका में ‘अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड’ पर राजनैतिक बहस छिड़ी है। ईरान युद्ध से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जो सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं। कैहिलेन मानते हैं कि बीते 10 वर्षों में कंपनी ने उपभोक्ताओं को नजरअंदाज किया और सिर्फ मुनाफे पर ध्यान दिया। यही सबसे बड़ी गलती थी। लेकिन कैहिलेन आश्वस्त नजर आते हैं।35,000 कर्मचारियों को नई दिशा दी गई है। रिसर्च टीमें प्रोटीन-रिच विकल्पों पर काम कर रही हैं। आर्टिफिशियल कलर और सामग्री हटाने की प्रक्रिया पहले से चल रही थी। कैहिलेन की मां आयरलैंड से थीं और चार बच्चे पालते हुए कॉलेज की डिग्री ली थी। संभवत: यही जिद्द उन्हें विरासत में मिली है। वॉरेन बफे ने 2015 में हाइंज और क्राफ्ट फूड्स का विलय कराया था क्राफ्ट हाइंज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी फूड एंड बेवरेज कंपनी है। वॉरेन बफे की फर्म बर्कशयर हैथवे और निवेश फर्म 3जी कैपिटल ने 2015 में हाइंज और क्राफ्ट फूड्स का विलय कराया था। कंपनी के पोर्टफोलियो में ऑस्कर मेयर, फिलाडेल्फिया क्रीच चीज, जेल-ओ, कूल-एड, कैप्री सन और हाइंज केचअप समेत दर्जनों ब्रांड हैं। कंपनी के दुनियाभर में 35,000 कर्मचारी हैं और इसका मुख्यालय शिकागो में है। ग्रेज एबेल जो अब बर्कशयर हैथवे के सीईओ हैं, उन्होंने भी कैहिलेन के साथ ही 1 जनवरी को ही नई जिम्मेदारी संभाली है।
2026 तमिलनाडु चुनाव: DMK के नेतृत्व वाली SPA, AIADMK के नेतृत्व वाले एनडीए में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं? | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 13:30 IST 2026 के तमिलनाडु चुनाव में द्रमुक के नेतृत्व वाली एसपीए बनाम अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले एनडीए को देखना होगा: मैदान में दो मुख्य गठबंधनों के सीट-बंटवारे का फॉर्मूला, उनके घोषणापत्र और अन्य प्रमुख खिलाड़ियों के बारे में बताया गया (बाएं से) उदयनिधि और एमके स्टालिन, पीएम नरेंद्र मोदी के साथ एडप्पादी के पलानीस्वामी। (पीटीआई फ़ाइल) 2026 तमिलनाडु चुनाव: जैसे ही तमिलनाडु 23 अप्रैल को 2026 विधानसभा चुनावों के लिए तैयार हो रहा है, प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों ने चुनावी स्थिति संभाल ली है। सत्तारूढ़ द्रमुक के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) और अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) दोनों ने चुनाव के लिए अपने सीट-बंटवारे के फॉर्मूले को अंतिम रूप दे दिया है, जिसके परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। News18 आपको वह सब कुछ बताता है जो आपको जानना आवश्यक है। एसपीए (डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन): तमिलनाडु में सत्तारूढ़ गठबंधन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) तमिलनाडु चुनाव के लिए अपने 26-पार्टी गठबंधन के हिस्से के रूप में 164 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। मजबूत उपस्थिति बनाए रखने के लिए, गठबंधन में कुल 175 उम्मीदवार द्रमुक के ‘उगते सूरज’ प्रतीक के तहत चुनाव लड़ेंगे। दल सीटें आवंटित द्रमुक 164 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 28 डीएमडीके 10 वीसीके 8 भाकपा 5 सीपीआई (एम) 5 एमडीएमके 4 आईयूएमएल 2 एमएमके 2 केएमडीके 2 एमजेके 1 एसडीपीआई 1 मुक्कुलाथोर पुली पडाई 1 तमिलर देसिया काची 1 मुख्य आकर्षण DMK ने अपने उम्मीदवारों के लिए कन्याकुमारी, राधापुरम, पलायमकोट्टई और अरुप्पुकोट्टई जैसे प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों को आरक्षित किया है। पार्टी ने सीएम एमके स्टालिन को कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को चेपक-थिरुवल्लिकेनी से उम्मीदवार घोषित किया है। अन्य प्रमुख द्रमुक उम्मीदवारों में कन्याकुमारी के लिए महेश, राधापुरम के लिए अप्पावु, पलायमकोट्टई के लिए वहाब, तेनकासी के लिए कलैकथिरवन और अरुप्पुकोट्टई के लिए केकेएसएसआर रामचंद्रन शामिल हैं। इसके अलावा, ओ पन्नीरसेल्वम बोडिनायक्कनुर से चुनाव लड़ेंगे, और आरएस किर्थिगा देवी को तांबरम से मैदान में उतारा गया है। इसके अलावा, वेलु को मायलापुर के लिए उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया है, जबकि मा. सुब्रमण्यम सैदापेट से चुनाव लड़ेंगे। इस सूची में पेरुंबूर के लिए आरडी शेखर, अवदी के लिए नज़र और रोयापुरम के लिए सुबैर खान जैसे आंकड़े भी शामिल हैं। DMK ने अपने 164 उम्मीदवारों में 60 से अधिक नए, युवा चेहरों को शामिल किया है, जिनमें बड़ी संख्या में वकील, डॉक्टर और इंजीनियर जैसे पेशेवर शामिल हैं। कांग्रेस ने 28 सीटें हासिल कीं, जो 2021 के चुनावों की तुलना में तीन की वृद्धि है। प्रेमललता विजयकांत के नेतृत्व वाली देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) हाल ही में गठबंधन में शामिल हुई और उसे 10 सीटें आवंटित की गईं। कमल हासन की मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) ने एसपीए को पूरा समर्थन दिया है लेकिन इस चुनाव में नहीं लड़ने का विकल्प चुना है। टी. वेलमुरुगन के नेतृत्व वाली तमिलागा वज़वुरीमाई काची (टीवीके) सीट-बंटवारे में देरी से असंतोष के कारण गठबंधन से बाहर हो गई और स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी। समझौते के हिस्से के रूप में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट भी आवंटित की गई है। सीट-बंटवारे की व्यवस्था सभी क्षेत्रों में एक मजबूत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगी, जिसमें 125 डिग्री धारक, 18 महिला उम्मीदवार, 15 डॉक्टर और 29 वकील सहित पेशेवरों का एक व्यापक स्पेक्ट्रम होगा, जो अपने प्रतिनिधियों के लिए शिक्षा और पेशेवर योग्यता पर पार्टी के फोकस को रेखांकित करता है। DMK के घोषणापत्र में क्या है? तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सुप्रीमो एमके स्टालिन ने रविवार को राज्य विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के घोषणापत्र का अनावरण किया, जिसमें नाश्ता योजना के विस्तार और कलैगनार मगलिर उरीमाई थित्तम की वृद्धि सहित प्रमुख कल्याणकारी उपायों की घोषणा की गई, जिसके तहत महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता को बढ़ाकर 2,000 रुपये किया जाएगा। चेन्नई में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु शासन के द्रविड़ मॉडल के तहत एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है, उन्होंने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की सफलता पर प्रकाश डाला और विश्वास व्यक्त किया कि द्रमुक निरंतर जनता के समर्थन के साथ सातवीं बार सत्ता में लौट आएगी। कलैगनार मगलिर उरीमाई थोगाई योजना का जिक्र करते हुए, स्टालिन ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव अवधि के दौरान इसके कार्यान्वयन में बाधा डालने का प्रयास किया, उन्होंने कहा कि चुनौतियों के बावजूद, इस योजना से लगभग 1.3 करोड़ परिवारों को लाभ हुआ है, लाभार्थियों को अब तक 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने दोहराया कि द्रमुक सरकार लोगों के जीवन में सुधार लाने के उद्देश्य से कल्याणकारी पहलों को जारी रखने और विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है। घोषणापत्र में कक्षा 8 तक के 15 लाख छात्रों को कवर करने के लिए नाश्ता योजना का विस्तार, कलैगनार मगलिर उरीमाई थित्तम के तहत प्रति महिला 1,000 रुपये से 2,000 रुपये तक वित्तीय सहायता में वृद्धि, बिना मीटर वाले किसानों के लिए मुफ्त पंप सेट, पुथुमई पेन और तमिल पुधलवन योजनाओं के तहत सहायता में 1,000 रुपये से 1,500 रुपये प्रति छात्र की वृद्धि, वृद्धावस्था पेंशन में 1,000 रुपये की वृद्धि शामिल है। 2,000, और विकलांग व्यक्तियों के लिए पेंशन 2,500 रुपये। एनडीए (एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन): तमिलनाडु में विपक्षी गठबंधन एडप्पादी के पलानीस्वामी की अध्यक्षता वाली ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने आधिकारिक तौर पर भाजपा और अन्य सहयोगियों के साथ अपने समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। अन्नाद्रमुक अपने चुनाव चिन्ह के तहत 169 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि 65 सीटें अपने सात गठबंधन सहयोगियों के लिए छोड़ेगी। दल सीटें आवंटित अन्नाद्रमुक 169 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 27 पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) 18 अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) 11 तमिल मनीला कांग्रेस (टीएमसी) 5 इंडिया जननायक काची (IJK) 2 तमिलगा मक्कल मुनेत्र कड़गम (टीएमएमके) 1 पुरैचि भारतम् 1 मुख्य आकर्षण 169 सीटों पर चुनाव लड़कर, अन्नाद्रमुक यह सुनिश्चित कर रही है कि वह अपने दम पर साधारण बहुमत के आंकड़े (118) तक पहुंच सकती है, जिससे चुनाव के बाद सहयोगियों पर उसकी निर्भरता कम हो जाएगी। भाजपा के 27 सीटों के आवंटन में शहरी, डेल्टा और दक्षिणी जिलों का मिश्रण
सूरत में एक मकान में आग से 5 की मौत:घर में भर रखा था 10 टन साड़ियों का स्टॉक, पैदल चलने तक की जगह नहीं थी

गुजरात के सूरत शहर में एक मकान में आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। पड़ोसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, शहर के लिंबायत इलाके का यह मकान एक व्यापारी का है, जिसमें करीब 10 टन साड़ियों का स्टॉक रखा हुआ था। इससे घर में पैदल चलने तक की जगह नहीं बची थी। इसी के चलते आग इतनी तेजी से भड़की कि किसी को बचने का मौका नहीं मिला। हम इस खबर को लगातार अपडेट कर रहे हैं…
‘मैं पीएम मोदी को धन्यवाद देना चाहता हूं’: टेनिस लीजेंड लिएंडर पेस पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 13:13 IST पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस नई दिल्ली में बीजेपी में शामिल हो गए। टेनिस के दिग्गज लिएंडर पेस (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मंगलवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। उन्हें केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और सुकांत मजूमदार की मौजूदगी में पार्टी में शामिल किया गया। पार्टी में शामिल होने के बाद, टेनिस आइकन ने “देश के युवाओं की सेवा करने” का मौका देने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। पेस ने कहा कि यह क्षण उनके जीवन में महत्वपूर्ण था और उन्होंने इस अवसर के लिए गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का आभार भी व्यक्त किया। बीजेपी में शामिल होने के बाद पेस ने कहा, ‘मेरे जीवन का बड़ा दिन।’ उन्होंने कहा, “आज मेरे जीवन का एक बड़ा दिन है। मुझे यह अवसर देने के लिए मैं पीएम मोदी, अमित शाह जी और नितिन नबीन जी को धन्यवाद देना चाहता हूं। यह मेरे लिए देश के युवाओं की सेवा करने का एक बड़ा अवसर है। अब देश की सेवा करने का समय है। यह न केवल बीजेपी में शामिल होने का मौका है, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।” वीडियो | दिल्ली: टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने कहा, “मैं पीएम मोदी, अमित शाह जी और नितिन नबीन को धन्यवाद देना चाहता हूं। जिस तरह से बीजेपी परिवार ने मेरा पालन-पोषण किया और मुझे मौका दिया। किरेन रिजिजू वह व्यक्ति हैं जिन्हें मैं अपना हीरो मानता हूं और उनकी ओर देखता हूं। हमारे पास एक बड़ा मौका है… pic.twitter.com/mhqi9jWs7v – प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (@PTI_News) 31 मार्च 2026 उन्होंने पार्टी में अपनी एंट्री को सिर्फ औपचारिक सदस्यता नहीं बल्कि देश की सेवा करने की बड़ी जिम्मेदारी बताया. अपनी जड़ों को याद करते हुए पेस ने कहा कि उनका जन्म पश्चिम बंगाल में हुआ था और उनका बंगाली विरासत से जुड़ाव है। उन्होंने आगे कहा, “मेरा जन्म बंगाल में हुआ…मेरी मां बंगाली विरासत से हैं…जब मैं बड़ा हो रहा था, तब वहां ज्यादा बुनियादी ढांचा नहीं था।” पेस ने हाल ही में बीजेपी नेतृत्व से मुलाकात की पेस ने हाल ही में कोलकाता में नितिन नबीन से मुलाकात की थी, जिससे उनके भाजपा में संभावित प्रवेश की अटकलें तेज हो गई थीं। वह पहले 2021 में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हुए थे और 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी के लिए प्रचार किया था, हालांकि उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा था। वह गोवा में टीएमसी में शामिल हुए थे, जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें “छोटा भाई” बताया। हालाँकि, बाद में उन्हें जनवरी 2022 में घोषित पार्टी की 69 सदस्यीय गोवा राज्य समिति से बाहर कर दिया गया, जिसने पार्टी के भीतर उनकी भूमिका पर सवाल उठाए। 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होनी है। पहले प्रकाशित: मार्च 31, 2026, 13:13 IST समाचार राजनीति ‘मैं पीएम मोदी को धन्यवाद देना चाहता हूं’: टेनिस लीजेंड लिएंडर पेस पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)लिएंडर पेस बीजेपी में शामिल हुए(टी)लिएंडर पेस(टी)भारतीय जनता पार्टी(टी)बीजेपी पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)भारतीय टेनिस दिग्गज(टी)नई दिल्ली की राजनीति(टी)किरेन रिजिजू
क्या वेट लॉस की दवा फैटी लिवर में भी कारगर? किन लोगों के लिए फायदेमंद, डॉक्टर पारस अग्रवाल से समझिए

Last Updated:March 31, 2026, 13:11 IST Weight Loss Drugs and Fatty Liver: वेट लॉस की दवाएं फैटी लिवर से भी राहत दिला सकती हैं. डॉक्टर पारस अग्रवाल के अनुसार वजन कम होने पर शरीर सबसे पहले लिवर का फैट घटाता है. फैटी लिवर और डायबिटीज एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. वेट लॉस की दवा उन लोगों को भी दी जा सकती है, जिनका BMI 30 से ज्यादा हो. वेट लॉस ड्रग्स फैटी लिवर से राहत दिलाने में बेहद असरदार हो सकते हैं. Diabetes-Fatty Liver Connection: लिवर हमारे शरीर के सबसे जरूरी ऑर्गन्स में शुमार है. आजकल लाइफस्टाइल और खानपान बिगड़ गया है, जिसका सीधा असर लिवर की सेहत पर देखने को मिल रहा है. बड़ी संख्या में लोग फैटी लिवर का शिकार हो रहे हैं. खासतौर से डायबिटीज के अधिकतर मरीजों में यह समस्या देखी जाती है. डॉक्टर्स की मानें तो फैटी लिवर और डायबिटीज इंटरलिंक है. जिन लोगों को फैटी लिवर है, उन्हें टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क ज्यादा होता है. डायबिटीज के मरीजों को फैटी लिवर का खतरा ज्यादा होता है. कई मरीज डायबिटीज और फैटी लिवर दोनों से जूझ रहे हैं. ऐसे में वेट लॉस ड्रग्स दोनों ही परेशानियों से राहत दिलाने में बेहद असरदार साबित हो सकते हैं. गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. पारस अग्रवाल ने News18 को बताया कि जिन दवाओं को हम वेट लॉस ड्रग्स कहते हैं, वे दरअसल टाइप 2 डायबिटीज के ट्रीटमेंट के लिए डेवलप की गई हैं. ये दवाएं वजन कम करती हैं और डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करती हैं. कई रिसर्च में पता चला है कि ये ड्रग्स डायबिटीज के अलावा फैटी लिवर से राहत दिलाने में भी असरदार साबित हो रहे हैं. दरअसल फैटी लिवर और डायबिटीज का गहरा संबंध है. लिवर शरीर में ग्लूकोज को स्टोर करता है. जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज होती है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण लिवर में फैट का जमाव होने लगता है, जिसे फैटी लिवर कहते हैं. एक बीमारी दूसरी को बढ़ावा देती है. इसलिए दोनों का मैनेजमेंट जरूरी है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि जिन लोगों को सिर्फ फैटी लिवर की समस्या है, वे भी वेट लॉस ड्रग्स ले सकते हैं. इससे उन्हें न सिर्फ फैटी लिवर से राहत मिलेगी, बल्कि टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क भी कम हो जाएगा. वजन घटाने वाली दवाएं, खासकर GLP-1) श्रेणी की दवाएं शरीर में इंसुलिन के स्राव को संतुलित करती हैं और भूख को कम करती हैं. जब इन दवाओं के प्रभाव से शरीर का वजन कम होना शुरू होता है, तो सबसे सकारात्मक असर लिवर पर पड़ता है. वजन घटने की प्रक्रिया में शरीर सबसे पहले लिवर में जमा अतिरिक्त फैट को फ्यूल के रूप में इस्तेमाल करता है. इससे लिवर की सूजन कम होती है और उसकी कार्यक्षमता में सुधार आता है, जो फैटी लिवर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. एक्सपर्ट के मुताबिक वेट लॉस की दवा देने का एक क्राइटेरिया होता है. अगर किसी व्यक्ति का बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI 30 से ऊपर है, तो वह इन दवाओं के लिए एलिजिबल होता है. अगर बीएमआई 27 से ज्यादा है और साथ में अन्य बीमारियां जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या फैटी लिवर की समस्या है, तब भी डॉक्टर वेट लॉस ट्रीटमेंट या जीएलपी दवाओं की सलाह दे सकते हैं. यह ट्रीटमेंट केवल वजन कम करने के लिए नहीं, बल्कि शरीर की अन्य जटिलताओं को ठीक करने के लिए दिया जाता है. फैटी लिवर का इलाज समय पर न होने से यह सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है, इसलिए वजन नियंत्रित करना प्राइमरी ट्रीटमेंट जाता है. हालांकि ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 31, 2026, 13:11 IST
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘वोट कट्ट’ के डर से दिल्ली से बंगाल लौट रहे प्रवासी!, कई लोगों ने कहा- अभी तक सूची में नाम नहीं

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले एक नया ट्रेंड सामने आ रहा है. दिल्ली में काम करने वाले प्रवासी प्रवासी तेजी से अपने गांव-शहर लौट रहे हैं। क्यों? मतदाता सूची से नाम कटने का डर और चुनाव में वोट देने की मांग। कई पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि ईसाइयों और नाम के बारे में कहानियों के बाद वे जोखिम नहीं लेना चाहते। 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले 19 अप्रैल तक सुधार का मौका है, इसलिए लोग जल्दी घर लौट रहे हैं। क्या कह रहे हैं प्रवासीएक प्रवासी श्रमिक ने बताया कि उसका नाम अभी तक कलाकार सूची में नहीं आया है। उनके परिवार में चार प्रशिक्षकों में से केवल एक का नाम सूची में दर्ज है, जबकि बाकी तीन को “विदेशी” माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके घर जाने की योजना के लिए ज्यादातर लोग वोट देने की योजना बना रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के यात्रा करने की वजह से टिकट मिलना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि 2002 में विशेष रूप से पूछे गए कुछ लोगों के नाम, सूची में शामिल हो गए थे, लेकिन कई नाम देर से आए या अब भी मौजूद हैं। हालाँकि 19 अप्रैल तक सुधार का अवसर है, इसलिए लोग एनीमेशन करा सकते हैं। उन्होंने कहा, “हमारा वोट 23 तारीख को है और हम वोट देने जरूर जाएंगे। पूरी पार्टी के लोग जाएंगे, लेकिन अधिकतर लोगों के कारण टिकट अभी तक की हो रही है। मेरा नाम तक की लिस्ट में नहीं आया है। चार कार्यकर्ताओं में उसका सिर्फ एक नाम है, बाकी तीन का नहीं। अभी हम तीन भाई ‘विदेशी’ माने जा रहे हैं और एक ‘भारतीय’ हैं। यानी डर सिर्फ वोट का नहीं, बल्कि पहचान का है।” नाम कटने का आरोप, परिवार तक प्रभावितऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां एक ही परिवार के कुछ लोगों के नाम लिस्ट में हैं, तो कुछ के नहीं. बिहार की एक प्रवासी महिला ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ वोट देने के लिए घर जाने की योजना बना रही हैं। उन्होंने दावा किया कि अब इस तरह की परेशानियां ज्यादा व्यापक नहीं हैं, लेकिन यह भी माना जाता है कि पहले ऐसी परेशानियां सामने आई थीं। महिला का कहना है कि, “हां, मैं भी अपने परिवार के साथ वोट देने जाऊंगी। मैंने अभी तक इतना कुछ नहीं सुना है। मेरे कई रिश्तेदारों के नाम पहले वोटर लिस्ट से जारी किए गए थे।” एक अन्य प्रवासी ने बताया कि उसका नाम सूची में है, लेकिन उसकी पत्नी का नाम बिना किसी कारण के हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे अकेले नहीं हैं. उन्होंने कहा, “हां, हम वोट देंगे। नाम हटा दिया गया है–मेरी पत्नी का वोट दिया गया है। मेरा नाम है, लेकिन पत्नी का क्यों हटाया गया, पता नहीं। ऐसे कई मामले हैं। हमारे परिवार में दो लोगों-मेरी पत्नी और भाभी-के नाम की सूची हटा दी गई है।” SIR बना विवाद की जड़त्रिपुरा, यह पूरा मामला स्पेशल इंटेनसिवी रिजन (SIR) से यात्रा है। इस प्रक्रिया के बाद राज्य में कुल झीलों की संख्या करीब 61 लाख कम 7.66 करोड़ से अधिक 7.04 करोड़ रह गयी है। करीब 60 लाख नाम जांच के ग्रुप में थे, जिनमें से कई को लेकर अब भी विवाद जारी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर पहले ही आरोप लगाया गया है कि यह प्रक्रिया लोगों के वोट का अधिकार छीनने की कोशिश है। ज़मीन का स्तर बढ़ा हुआमालदा में ‘बांग्ला पक्ष’ संगठन ने वोटर लिस्ट से नाम हटाना शुरू कर दिया है. संगठन का आरोप है कि बस्तर भाषी नागरिकों को सुरक्षा तरीकों से सूची से बाहर किया जा रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो राज्य सहभागी आंदोलन होगा। अहम् यह वस्तु क्यों है?बंगाल जैसे राज्य में, जहां हर वोट का महत्व है, वहां लाखों निवेशकों का हटना शेयर बाजार प्रभावित हो सकता है। यह सिर्फ चुनाव नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार का प्रश्न बनता जा रहा है, जहां पहचान, नागरिकता और वोट पार्टी शामिल हो गए हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी(टी)बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी







