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मेंटनेंस घोटाले को किया गया शामिल, टीवी खरीदी को छोड़ा:स्कूलों के लिए 3 साल में आई राशि की जांच करेंगे कलेक्टर

मेंटनेंस घोटाले को किया गया शामिल, टीवी खरीदी को छोड़ा:स्कूलों के लिए 3 साल में आई राशि की जांच करेंगे कलेक्टर

मप्र के स्कूल शिक्षा विभाग में कंप्यूटर खरीदी और मेंटनेंस के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ है। विभागीय मंत्री ने इस मामले को लेकर नाराजगी जाहिर की है। इसके बाद आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता ने एक पत्र सभी जिलों के कलेक्टर को लिखा है कि वे बीते 3 साल में हुए कामों की जांच करके प्रति​वेदन भेजें। इसमें तीन साल के भीतर जो भी बजट आवंटित हुआ है और उसमें जो निर्माण कार्य हुए हैं, उनकी पूरी जांच करना है। हालांकि इसमें इंटरएक्टिव पैनल के मामले को शामिल नहीं किया है, जबकि इसको लेकर भी कई शिकायतें विभागीय मंत्री और अफसरों को हो चुकी हैं। जांच के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। उधर, जिलों में इस पत्र के बाद कलेक्टरों की तरफ से जांच कमेटी बनाई जा रही है, जो कि कलेक्टरों की निगरानी में ही पूरे मामले की जांच करेगी। हालांकि इस पूरे मामले में मंत्री उदय प्रताप सिंह के निर्देश के बाद तीन अफसरों को हटाने की कार्रवाई कर दी गई है। इनमें डीएस कुशवाह संचालक लोक शिक्षण को सीमेट (राज्य शैक्षिक प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान) का संचालक बनाकर भेजा गया है। वहीं प्रमोद कुमार सिंह सीमेट को लोक शिक्षण में संचालक बनाया गया है। साथ ही विभाग में उप सचिव बनाया गया है। इसके अलावा पीके सिंह बघेल जो कि उप संचालक लोक शिक्षण थे को राज्य शिक्षा केंद्र में पदस्थ किया गया है। यह मामले हैं जांच की जद में मप्र में तीन साल में स्कूलों में जमकर मेंटनेंस काम हुआ है। बीते साल ही करीब 149 करोड़ रुपए स्कूलों में मेंटनेंस के लिए भेजे गए थे, लेकिन इसके लिए भोपाल की ही फर्म को ​काम दे दिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी को बायपास करके बीईओ और प्राचार्य स्तर पर काम कराया गया। रीवा, मैहर और सतना जिले में बिना काम के भुगतान करने का मामला सामने आया। जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद यह मामला विधानसभा में उठाया गया और मंत्री ने इसमें जांच के निर्देश दिए। IAS अफसर की निगरानी वाली कमेटी अभी होल्ड विभागीय मंत्री ने आईएएएस अफसर की निगरानी में कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए थे, लेकिन फिलहाल इस समिति को बनाने का मामला होल्ड हो गया है। कमाल की बात यह है ​कि इस पूरे मामले में वित्तीय स्वीकृति देने वाले ​लोक शिक्षण संचालनालय के वित्त अधिकारी राजेश मोर्य व उन फर्म से सवाल-जवाब नहीं हुए, जिनके ऊपर बिना काम किए भुगतान लेने के आरोप हैं। विभागीय अफसरों ने बताया कि कलेक्टरों की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में कुछ आगे होगा।

भोपाल में पराली जलाने पर रोक:एडीएम ने 3 महीने के लिए प्रतिबंध लगाया; उल्लंघन पर होगी FIR

भोपाल में पराली जलाने पर रोक:एडीएम ने 3 महीने के लिए प्रतिबंध लगाया; उल्लंघन पर होगी FIR

भोपाल में पराली जलाने पर रोक लगा दी गई है। गुरुवार देर रात एडीएम सुमित कुमार पांडेय ने आदेश जारी किया। इसके मुताबिक, अगले 3 महीने तक पराली यानी, नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। उल्लंघन करने पर थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश का पालन करते हुए यह रोक लगाई गई है, जो पूरे भोपाल जिले में लागू रहेगी। एडीएम पांडेय ने सभी एसडीएम को पराली जलाने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। वर्तमान में कई किसान गेहूं की कटाई में लगे हैं। इस कारण खेतों में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। कई किसान फसल काटने के बाद खेतों में आग लगा देते हैं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी खत्म हो रही है। इसलिए एडीएम ने यह आदेश जारी किया है। आदेश में यह कलेक्टर के आदेश में यह… जून तक रहेगा आदेश एडीएम ने यह आदेश अगले 3 महीने यानी, जून तक लगाया है। तब भोपाल में मानसून एक्टिव हो जाता है। इससे पराली जलाने की घटनाएं नहीं होती है। एडीएम ने आदेश में लिखा कि यह एक पक्षीय पारित किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील होगा। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. जीएल सोढ़ी बने रहेंगे सिविल सर्जन:इंदौर हाईकोर्ट का फैसला, अब 65 वर्ष की आयु में होंगे रिटायर

डॉ. जीएल सोढ़ी बने रहेंगे सिविल सर्जन:इंदौर हाईकोर्ट का फैसला, अब 65 वर्ष की आयु में होंगे रिटायर

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में सामने आए प्रशासनिक विवाद के बीच हाईकोर्ट ने सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. जी.एल. सोढ़ी के पक्ष में निर्णय दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद वे अपने पद पर बने रहेंगे और अब 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त होंगे। गौरतलब है कि विभाग द्वारा डॉ. सोढ़ी को 20 वर्ष की अनिवार्य क्लीनिकल सेवा पूर्ण न करने और 62 वर्ष की आयु पूरी होने के आधार पर शासकीय सेवा से पृथक करने के निर्देश जारी किए गए थे। वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. राजू नादरिया द्वारा यह आदेश जारी कर क्षेत्रीय संचालक, इंदौर को अमल के लिए भेजा गया था। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार डॉ. सोढ़ी की कुल क्लीनिकल सेवा लगभग 17 वर्ष 10 माह पाई गई, जबकि सिविल सर्जन पद के लिए 20 वर्ष की अनिवार्यता बताई गई थी। साथ ही उनकी जन्मतिथि 29 जून 1961 के अनुसार वे 30 जून 2023 को 62 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके थे। इसके बावजूद वे पद पर कार्यरत रहे। बाद में 18 मार्च 2026 को आदेश जारी कर उन्हें उसी तिथि से सेवानिवृत्त माना गया। प्रक्रिया पर उठे सवाल नियुक्ति और पदस्थापना के दौरान सेवा रिकॉर्ड का सत्यापन अनिवार्य होता है। इसके बावजूद सेवा अवधि की कमी और सेवानिवृत्ति आयु को लेकर समय पर कार्रवाई न होना इसे लेकर विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे थे। हाईकोर्ट के ताजा निर्णय के बाद डॉ. जी.एल. सोढ़ी को राहत मिली है और अब वे 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक अपने पद पर बने रहेंगे।

नगरीय निकायों में अनुभवी बनेंगे एल्डरमैन:बडे़ शहरों से लेकर कस्बों के लिए फॉर्मूला तय, 18 सौ वर्कर होंगे एडजस्ट

नगरीय निकायों में अनुभवी बनेंगे एल्डरमैन:बडे़ शहरों से लेकर कस्बों के लिए फॉर्मूला तय, 18 सौ वर्कर होंगे एडजस्ट

एमपी में सवा साल बाद नगरीय निकाय के चुनाव होने हैं। अर्बन लोकल बॉडी इलेक्शन के पहले बीजेपी ने कार्यकर्ताओं को नगरीय निकायों में एल्डरमैन बनाकर एडजस्ट करने का फॉर्मुला फाइनल कर लिया है। हफ्ते भर के भीतर प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में नियुक्त होने वाले एल्डरमैन की लिस्ट घोषित हो सकती है। मिशन ‘निकाय चुनाव’: अनुभवी नेताओं को कमान भाजपा इस बार एल्डरमैन की नियुक्तियों को केवल पद भरने के तौर पर नहीं, बल्कि निकाय चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं को एक्टिव करने के टूल के रूप में देख रही है। फॉर्मूले के तहत उन पुराने और अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें नगर प्रशासन का गहरा ज्ञान है। रणनीति के पीछे दो मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करना: चुनाव से पहले जिला स्तर के उन सक्रिय नेताओं को एडजेस्ट करना जो लंबे समय से नियुक्तियों का इंतजार कर रहे थे। प्रशासनिक पकड़: अनुभवी एल्डरमैन के जरिए परिषदों के कामकाज और विकास कार्यों की निगरानी को मजबूत करना चाहती है। बडे़ शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक के लिए फॉर्मुला तय भाजपा संगठन में कई दौर के मंथन के बाद यह तय हुआ है कि नगरीय निकायों में 10 लाख से अधिक आबादी वाले 12 नगरीय निकायों में 4-4 एल्डरमैन की नियुक्ति की जाएगी। 10 लाख से कम आबादी वाले 4 नगर निगमों में 8-8 एल्डरमैन की नियुक्ति होगी। नगर पालिकाओं में 6-6 और नगर परिषदों में 4-4 एल्डरमैन की नियुक्ति का फॉर्मूला तय किया गया है। इस लिहाज से 99 नगर पालिकाओं में 594 और 298 नगर परिषदों में 1192 एल्डरमैन की नियुक्तियां होंगी। वहीं 16 नगर निगमों में कुल 80 एल्डरमैन नियुक्त होंगे। 413 निकायों में 18 सौ से ज्यादा वर्कर हो सकते हैं एडजस्ट नियम और अधिकार: वोटिंग नहीं कर सकते प्रदेश के नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति का मुख्य आधार प्रशासनिक अनुभव और नगर पालिका अधिनियम की जानकारी होता है। संगठन की सिफारिश पर नियुक्त होने वाले ये एल्डरमैन परिषद की बैठकों और चर्चाओं में तो सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं, लेकिन इनके पास मत (वोट) देने का अधिकार नहीं होता। इनका कार्यकाल परिषद के कार्यकाल के साथ ही समाप्त होता है। सरल शब्दों में कहें तो, ये परिषद के ‘मार्गदर्शक’ की भूमिका में होते हैं, ‘निर्णायक’ की नहीं।

ड्रग्स माफिया पर नकेल कसें सभी एसपी:मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में दिए निर्देश, कहा- पेट्रोल-डीजल का संकट नहीं

ड्रग्स माफिया पर नकेल कसें सभी एसपी:मुख्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में दिए निर्देश, कहा- पेट्रोल-डीजल का संकट नहीं

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक त्यौहारों के दौरान कानून और व्यवस्था की कड़ी निगरानी करें। सभी एसपी जोनल प्लान तैयार करके 31 मार्च तक प्रस्तुत कर दें। ड्रग्स माफिया पर सख्ती के लिए नशीले पदार्थों के विरुद्ध अभियान चलाने के साथ-साथ जन जागरुकता अभियान चलाएं। एनकोर समिति की हर महीने बैठक करके कार्यवाही विवरण पोर्टल पर दर्ज कराएं। सीएस जैन ने ये बातें वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस में कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहीं। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रदेश में ड्रग्स माफियाओं के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने के निर्देश प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों को दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश से ड्रग्स माफियाओं का नेटवर्क पूर्णतः समाप्त होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में ड्रग्स का कारोबार करने वाले अपराधियों को चिन्हित करें और उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही करें। मनरेगा में जल संरक्षण के काम कराएं उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन में सौ दिन से अधिक समय से लंबित प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण कराएं। मुख्य सचिव ने कहा कि मनरेगा योजना से जल संरक्षण और संवर्धन के कार्य प्राथमिकता से कराएं। इसे जल गंगा अभियान में शामिल करके पोर्टल पर प्रगति दर्ज करें। मनरेगा से दो लाख 51 हजार कार्य स्वीकृत हैं। इनमें जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता देने से जल गंगा संवर्धन अभियान अधिक प्रभावी बनेगा। एकल नलजल योजनाओं का निर्माण कार्य 31 मार्च तक पूरा कराकर इन्हें ग्राम पंचायतों को समारोहपूर्वक हैण्डओवर करें। साथ ही सभी घरों में नल कनेक्शन और पानी की आपूर्ति भी सुनिश्चित कराएं। एकल नलजल योजनाओं के स्रोत तथा हैण्डपंपों में रिचार्ज पिट बनाएं। पेट्रोल डीजल का संकट नहीं, लोगों को करें जागरुक बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को प्राकृतिक खेती, खाद के ई टोकन से शत-प्रतिशत वितरण, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पर निगरानी के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की प्रदेश में पर्याप्त उपलब्धता है। इस संबंध में आमजनों को लगातार जानकारी दें। बैठक में अधिकारियों को गेंहू उपार्जन की तैयारी, स्वरोजगार योजनाओं की लक्ष्यपूर्ति, नरवाई प्रबंधन, अग्नि दुर्घटना से बचाव के उपाय, राहवीर योजना तथा प्रधानमंत्री दुर्घटना राहत योजना के संबंध में निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के अत्याचार पीड़ितों और पक्षकारों को मिलने वाली राहत राशि का भुगतान समय पर कराएं। तय टारगेट से राजस्व जुटाने काम करें उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि नामांकन, सीमांकन और बंटवारा के प्रकरणों का समय पर निराकरण करना राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी का निर्वहन सभी राजस्व अधिकारी और कलेक्टर्स निष्ठापूर्वक करें। अविवादित नामांतरण तथा बटवारा के प्रकरण समय सीमा में निराकृत करें। सभी जिले तय लक्ष्य के अनुसार राजस्व का संग्रहण कराएं। सागर, इंदौर, भोपाल और जबलपुर जिले इस पर विशेष ध्यान दें। स्वामित्व योजना में शेष लंबित प्रकरणों का निराकरण एक माह में कराएं। नरवाई जलाने की घटनाओं पर लाएं कमी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि नरवाई जलाने की घटनाओं के प्रति किसानों को जागरुक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से किसानों और आम लोगों को क्या हानियां होती हैं तथा पर्यावरण पर क्या विपरीत प्रभाव पड़ता है, इसके संबंध में जागरूक किया जाए। बैठक में प्रदेश में गेहूं उपार्जन कार्य की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि गेहूं उपार्जन के लिए सभी माकूल व्यवस्थाएं जाएं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पशुपालन विभाग, मत्स्य पालन विभाग एवं पेयजल व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।

लैब में आर्टिफिशियल स्किन और कॉर्निया होंगी तैयार:एम्स भोपाल में एआई और इंटीग्रेटिव मेडिसिन पर फोकस

लैब में आर्टिफिशियल स्किन और कॉर्निया होंगी तैयार:एम्स भोपाल में एआई और इंटीग्रेटिव मेडिसिन पर फोकस

गंभीर बीमारियों के इलाज में अब बड़ा बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं। एक ओर डीआरडीओ की लैब में आर्टिफिशियल स्किन और कॉर्निया तैयार करने पर तेजी से काम चल रहा है, वहीं एम्स भोपाल में इंटीग्रेटिव मेडिसिन और एडवांस ट्रीटमेंट मॉडल पर रिसर्च इसे जमीन पर उतारने की दिशा में बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक क्लिनिकल स्तर पर सफल होती है, तो बर्न केस, गंभीर घाव और आंखों की रोशनी खो चुके मरीजों के इलाज में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। इससे अंगों की कमी से जूझ रहे हजारों मरीजों को नई उम्मीद मिल सकती है। एम्स में आोजित कार्यक्रम के दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की लैब में आर्टिफिशियल स्किन, बोन और कॉर्निया तैयार करने पर काम तेज हो गया है। इसमें पशुओं के कोलेजन का उपयोग किया जा रहा है। बर्न केस में सबसे बड़ी समस्या स्किन ग्राफ्ट की कमी होती है, जिससे मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। आर्टिफिशियल स्किन इस चुनौती को काफी हद तक कम कर सकती है। वहीं, कॉर्निया की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह तकनीक नई रोशनी साबित हो सकती है। एम्स भोपाल में एआई और इंटीग्रेटिव मेडिसिन पर फोकस एम्स भोपाल में चिकित्सा शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देते हुए नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (एनएएमएस) के सहयोग से अंग प्रत्यारोपण और स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर पहली रीजनल सीएमई आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों ने बताया कि भविष्य में आर्टिफिशियल ऑर्गन और इंटीग्रेटिव मेडिसिन मिलकर इलाज को अधिक प्रभावी बनाएंगे। स्वास्थ्य सूत्रों के अनुसार, एम्स भोपाल जैसे संस्थान आने वाले समय में इन तकनीकों के ट्रायल और क्लिनिकल उपयोग के प्रमुख केंद्र बन सकते हैं। अंगों की कमी के बीच नई उम्मीद भारत में हर साल हजारों मरीज अंगों की कमी के कारण समय पर इलाज नहीं करा पाते। ऐसे में आर्टिफिशियल स्किन और कॉर्निया जैसी तकनीकें गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं। इससे न केवल इलाज की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों के ठीक होने की संभावना भी बेहतर होगी। ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर की अहम भूमिका अंगदान और प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया में ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। वे मरीजों के परिजनों को संवेदनशील तरीके से समझाते हैं, उनकी सहमति सुनिश्चित करते हैं और पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करते हैं। साथ ही यह भी ध्यान रखते हैं कि अंगदान के बाद पार्थिव शरीर पूरे सम्मान के साथ परिवार को सौंपा जाए। अंगदान का एक प्रेरणादायक पहलू सेना से जुड़ा अंगदान को लेकर लोगों में कई तरह की आशंकाएं रहती हैं, लेकिन विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि यह पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया है। इसमें किसी भी तरह का दबाव या जबरदस्ती नहीं होती। अंगदान का एक प्रेरणादायक पहलू सेना से जुड़ा भी सामने आया है, जहां शहीद सैनिकों के परिजनों ने अंगदान कर कई लोगों को नई जिंदगी दी। इन उदाहरणों ने अंगदान को चिकित्सा से आगे बढ़ाकर राष्ट्रसेवा से जोड़ दिया है।

Muskmelon Vs Watermelon: खरबूज या तरबूज? गर्मी में सेहत के लिए ज्याद अच्छा क्या, जानें फायदे

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Last Updated:March 26, 2026, 22:17 IST Best Fruit For Summer: गर्मी के दिनों में शरीर को ज्यादा मात्रा में पानी की जरूरत होती है. ऐसे में तरबूज और खरबूज डाइट में शामिल करने के लिए बेहतरीन फल साबित होते हैं. अगर आपको सिर्फ शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना है, तो तरबूज एक बेहतरीन विकल्प है. लेकिन अगर आप बेहतर पोषण, पाचन और इम्यूनिटी चाहते हैं, तो खरबूजा ज्यादा फायदेमंद है. ख़बरें फटाफट गर्मियों में बॉडी में पानी की कमी की समस्या बहुत ही कॉमन हो जाती है.ऐसे में खान-पान में बदलाव लाना जरूरी हो जाता है. डाइट में ऐसे फलों और सब्जियों को शामिल करना होता है, जिसमें पानी की मात्रा ज्यादा हो, जिससे शरीर अंदर से ठंडा और हाइड्रेट रहे. तरबूज और खरबूज दो ऐसे फल हैं जो इस मौसम में दवा की तरह काम करते हैं. दोनों ही पानी से भरपूर होते हैं, लेकिन सवाल यह है कि इनमें से ज्यादा फायदेमंद कौन है? खरबूज या तरबूज सेहत के लिए क्या ज्याद फायदेमंद पोषण की तुलना अगर 100 ग्राम की मात्रा देखें, तो तरबूज में लगभग 30 कैलोरी होती है, जबकि खरबूजे में 34 कैलोरी. तरबूज में पानी करीब 91% होता है, जो इसे गर्मी में तुरंत ठंडक देने वाला बनाता है. वहीं खरबूजे में पानी थोड़ा कम (लगभग 90%) होता है, लेकिन इसमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स ज्यादा होते हैं. खरबूजे में विटामिन A और विटामिन C की मात्रा तरबूज से काफी ज्यादा होती है, जो आंखों और इम्यूनिटी के लिए बहुत फायदेमंद है. साथ ही इसमें पोटैशियम भी ज्यादा होता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है. तरबूज के फायदेतरबूज गर्मियों का सबसे अच्छा हाइड्रेशन फल माना जाता है. इसमें पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती. यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है और हीट स्ट्रोक से बचाता है. तरबूज में लाइकोपीन नाम का एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें एल-सिट्रुलिन नाम का तत्व होता है, जो एक्सरसाइज के बाद मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद करता है. खरबूजे के फायदेखरबूजा पोषण के मामले में ज्यादा मजबूत माना जाता है. इसमें फाइबर ज्यादा होता है, जिससे पाचन बेहतर होता है और कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है. इसमें मौजूद बीटा-कैरोटीन आंखों की रोशनी और त्वचा के लिए अच्छा होता है. यह त्वचा को ग्लो देने में भी मदद करता है. खरबूजे में पोटैशियम अधिक होता है, जो ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है और दिल की सेहत के लिए भी अच्छा है. क्या खाएं?अगर आपको सिर्फ शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना है, तो तरबूज एक बेहतरीन विकल्प है. लेकिन अगर आप बेहतर पोषण, पाचन और इम्यूनिटी चाहते हैं, तो खरबूजा ज्यादा फायदेमंद है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें First Published : March 26, 2026, 22:17 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

गर्मी में थकान, एसिडिटी और बेचैनी से परेशान? बस 1 चम्मच गुलकंद देगा तुरंत ठंडक और जबरदस्त राहत!

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Last Updated:March 26, 2026, 21:40 IST गर्मियों में बढ़ती गर्मी के साथ शरीर में थकान, चिड़चिड़ापन और पाचन से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं. ऐसे में अगर कोई देसी और स्वादिष्ट उपाय मिल जाए, जो शरीर को ठंडक भी दे और सेहत भी सुधारे, तो उससे बेहतर क्या हो सकता है. गुलकंद एक ऐसा ही पारंपरिक सुपरफूड है, जो न सिर्फ गर्मी के असर को कम करता है, बल्कि पेट की परेशानियों से राहत दिलाकर तन और मन दोनों को सुकून पहुंचाता है. गुणकारी गुलकंद के फायदे. गर्मियों की तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच लोग अब राहत पाने के लिए नेचुरल और पारंपरिक चीजों की ओर तेजी से लौट रहे हैं. ऐसे में गुलकंद एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आया है, जो ताजा गुलाब की पंखुड़ियों से तैयार होता है. यह न सिर्फ मीठा और खुशबूदार होता है, बल्कि शरीर और मन दोनों को ठंडक देने का काम करता है. गर्मियों में इसे डाइट में शामिल करना शरीर को अंदर से ठंडा रखने और लू के असर से बचाने का आसान तरीका माना जाता है. गुलकंद बनाने की प्रक्रिया काफी खास और पारंपरिक है. इसमें ताजी गुलाब की पंखुड़ियों को चीनी या गुड़ के साथ मिलाकर धूप में धीरे-धीरे पकाया जाता है. इस प्रक्रिया से इसका स्वाद और औषधीय गुण दोनों बढ़ जाते हैं. पुराने समय में दादी-नानी घर पर ही गुलकंद बनाती थीं और इसे परिवार के सभी सदस्यों को खिलाया जाता था. यही वजह है कि आज भी कई घरों में इसे बनाना और खाना एक परंपरा के रूप में जारी है. पाचन और ठंडक के लिए है फायदेमंदस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गुलकंद में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं और गर्मी के कारण होने वाली थकान, चिड़चिड़ापन और तनाव को कम करते हैं. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और भोजन को आसानी से पचाने में सहायक होता है. गर्मियों में जब एसिडिटी, गैस और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं, तब गुलकंद का सीमित मात्रा में सेवन इन दिक्कतों से राहत दिलाने में मदद करता है. स्किन और इम्युनिटी के लिए भी है लाभकारीगुलकंद में एंटीऑक्सीडेंट्स की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो शरीर की इम्युनिटी को मजबूत बनाने में सहायक होती है. यह त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने में भी मदद करता है, खासकर गर्मियों में जब स्किन डल और बेजान लगने लगती है. साथ ही यह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा कम होता है. कई तरीकों से कर सकते हैं सेवनगुलकंद को कई तरह से डाइट में शामिल किया जा सकता है. इसे सीधे चम्मच से खाया जा सकता है या फिर दूध, दही और शरबत में मिलाकर भी लिया जा सकता है. इसके अलावा इसे हलवा, लड्डू और आइसक्रीम जैसी मिठाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, इसमें शुगर की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 26, 2026, 21:40 IST

भाजपा नेता ने ‘गुंडों’ पर कार्रवाई की कसम खाई, बंगाल में पार्टी के सत्ता में आने पर यूपी-शैली के मुठभेड़ों का वादा किया | राजनीति समाचार

Brent crude jumped 8% to $116 per barrel and is up nearly 60% since the war began in late February. (Image: Reuters)

आखरी अपडेट:26 मार्च, 2026, 19:47 IST दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल में उत्तर प्रदेश शैली में मुठभेड़ों की कसम खाई, पुलिस और माफियाओं को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर हमला किया, क्योंकि भाजपा ने उन्हें फिर से खड़गपुर सदर से मैदान में उतारा। दिलीप घोष, बंगाल, भाजपा चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में प्रचार जोरों पर है और तैयारियों के बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने गुरुवार को राज्य में भगवा रेजिमेंट के सत्ता में आने पर पूर्ण परिवर्तन और अपराधियों के खिलाफ “उत्तर प्रदेश-शैली मुठभेड़” का वादा किया। अपने पुराने क्षेत्र खड़गपुर में एक चुनाव अभियान के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला करते हुए घोष ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में पुलिस वर्तमान में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के इशारे पर काम करती है और अपराधियों और “माफियाओं” के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहती है। उन्होंने कहा, “4 मई के बाद सब कुछ बदल जाएगा। जिस पुलिस को आप आज माफियाओं के साथ बैठकर चाय पीते और भ्रष्ट नेताओं के चमचों के रूप में काम करते देखते हैं, उनका चरित्र बदल जाएगा। वही पुलिस उत्तर प्रदेश की शैली में मुठभेड़ करेगी और अपराधियों को सलाखों के पीछे डालेगी।” घोष की टिप्पणी से राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है उनकी टिप्पणी से जल्द ही एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और सत्तारूढ़ टीएमसी ने भाजपा पर खुले तौर पर न्यायेतर हिंसा का समर्थन करने का आरोप लगाया। हालाँकि, घोष ने आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने खड़गपुर में लंबे समय तक “गुंडों और माफियाओं” से लड़ाई लड़ी है और ऐसा करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने खड़गपुर में गुंडों और माफियाओं के खिलाफ कई लड़ाईयां लड़ी हैं और मैं फिर लड़ूंगा। लेकिन शायद इस बार इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। एक बार बीजेपी सत्ता में आएगी तो अपराध में शामिल सभी लोगों को पकड़कर जेल भेजा जाएगा।” घोष, जिन्होंने 2016 से 2019 तक विधानसभा में खड़गपुर सदर का प्रतिनिधित्व किया था, को एक बार फिर भाजपा ने निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा है। यह सीट पार्टी के लिए महत्व रखती है, क्योंकि पारंपरिक गढ़ों से परे इसके विस्तार के दौरान यह पश्चिम बंगाल में इसके शुरुआती राजनीतिक ठिकानों में से एक थी। खुद को जमीनी स्तर के समर्थन वाले एक मजबूत नेता के रूप में पेश करते हुए घोष ने कहा कि औद्योगिक शहर में राजनीति के प्रति उनका दृष्टिकोण हमेशा प्रत्यक्ष और टकरावपूर्ण रहा है। “हथियारों से लोगों को धमकाने का आरोप लगाते हुए हमारे खिलाफ मामले दर्ज किए गए। लेकिन अगर कोई डरता है, तो जाहिर तौर पर घोष उसे डराएंगे। आपको क्यों डरना चाहिए? अगर आपमें साहस है, तो आमने-सामने आएं। अगर वे पुलिस की मदद से लूट, चोरी और मतदाताओं को डरा सकते हैं, तो हम उन्हें चुनौती क्यों नहीं दे सकते?” उसने कहा। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा अपने विरोधियों को आश्चर्यचकित करके राजनीति की है। खड़गपुर के लोगों ने इसी वजह से मुझे वोट दिया और वे फिर से मुझे वोट देंगे।” पहले प्रकाशित: 26 मार्च, 2026, 19:47 IST समाचार राजनीति भाजपा नेता ने ‘गुंडों’ पर कार्रवाई की कसम खाई, बंगाल में सत्ता में आने पर यूपी-शैली के मुठभेड़ों का वादा किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)दिलीप घोष मुठभेड़ टिप्पणी(टी)उत्तर प्रदेश शैली मुठभेड़(टी)भाजपा अभियान पश्चिम बंगाल(टी)तृणमूल कांग्रेस बनाम भाजपा(टी)पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा(टी)खड़गपुर विधानसभा क्षेत्र(टी)पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था

अर्जुन रामपाल के 'भारत माता की जय' नारे पर विवाद:लेखिका ने आर्टिकल में उठाए सावाल; गर्लफ्रेंड गैब्रिएला ने लेख को बताया शर्मनाक

अर्जुन रामपाल के 'भारत माता की जय' नारे पर विवाद:लेखिका ने आर्टिकल में उठाए सावाल; गर्लफ्रेंड गैब्रिएला ने लेख को बताया शर्मनाक

फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में विलेन बने एक्टर अर्जुन रामपाल एक नए विवाद में फंस गए हैं। हाल ही में एक अवॉर्ड शो के दौरान ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाने पर लेखिका शोभा डे ने उनकी आलोचना की है। इस पर अर्जुन की गर्लफ्रेंड गैब्रिएला डेमेट्रियाडेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए शोभा डे के लेख को ‘शर्मनाक’ बताया है। दरअसल लेखिका शोभा डे ने एक लेख में लिखा कि ‘अर्जुन रामपाल का भारत माता की जय कहना बॉलीवुड दर्शकों के लिए क्यों चिंता का विषय होना चाहिए।’ शोभा डे ने अपने लेख में तर्क दिया है कि बॉलीवुड में इस तरह के नारों का इस्तेमाल अब ‘स्वाभाविक’ दिखने के लिए राजनीतिक दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा है। उन्होंने इसे स्टार्स के बदलते राजनीतिक रुख और भविष्य के बॉलीवुड के लिए एक चिंताजनक संकेत बताया है। गर्लफ्रेंड गैब्रिएला ने लेख को बताया शर्मनाक शोभा डे के लेख पर अर्जुन की गर्लफ्रेंड गैब्रिएला ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस तरह की बातें करना शर्मनाक है। गैब्रिएला ने अर्जुन का बचाव करते हुए कहा कि उनके अभिनय और मेहनत को राजनीति से जोड़ना गलत है। गैब्रिएला ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए फिल्म ‘धुरंधर 2’ की तारीफ भी की और इसे अपनी अब तक की सबसे पसंदीदा हिंदी फिल्म बताया। उन्होंने अर्जुन की लगन और आदित्य धर के निर्देशन को मास्टरपीस कहा है। 26/11 के खौफनाक अनुभव से जुड़ा है नारा अवॉर्ड फंक्शन में अर्जुन ने बताया कि उनके लिए यह नारा सिर्फ एक औपचारिकता नहीं था। साल 2008 के 26/11 हमलों के दौरान अर्जुन खुद ताज होटल में मौजूद थे और अपना जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने अपनी आंखों से वो भयावह मंजर देखा था। अर्जुन ने कहा, “धुरंधर फिल्म में काम करना मेरे लिए एक निजी बदला लेने जैसा था। 26/11 की सुबह जब मैं घर लौट रहा था, तो मुझे रास्ते में कई बार रुककर उल्टियां हुई थीं। आदित्य धर ने जब मुझे सीन सुनाया, तो मुझे लगा कि मैं इसके जरिए अपना बदला लूंगा।” ISI एजेंट का रोल कर रो पड़े थे अर्जुन आदित्य धर की इस जासूसी थ्रिलर में अर्जुन रामपाल ने मेजर इकबाल का किरदार निभाया है, जो एक क्रूर पाकिस्तानी ISI एजेंट है। फिल्म के एक सीन में अर्जुन का किरदार होटल में आतंकवादियों के संपर्क में रहकर जश्न मनाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस चुनौतीपूर्ण और नकारात्मक सीन की शूटिंग पूरी करने के बाद अर्जुन खुद सेट पर रो पड़े थे। वहीं फिल्म के सीक्वल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में रणवीर सिंह का किरदार मेजर इकबाल से अपना बदला पूरा करता है।