सतना जिला कोर्ट को बम से उड़ाने की मिली धमकी:सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, सर्च अभियान में कुछ नहीं मिला

सतना जिला न्यायालय को शुक्रवार सुबह बम से उड़ाने की धमकी मिली। अदालत की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक संदिग्ध मेल प्राप्त हुआ, जिसमें दावा किया गया कि कोर्ट परिसर और जजों के कार्यालयों में 15 जहरीली गैस के बम लगाए गए हैं, जो दोपहर 1 बजे विस्फोट करेंगे। इस धमकी से न्यायिक और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद, बम निरोधक दस्ता (बॉम्ब स्क्वॉड) और डॉग स्क्वॉड को जिला न्यायालय परिसर में भेजा गया। सतना के अलावा मैहर, अमरपाटन और अन्य तहसील न्यायालयों में भी व्यापक सुरक्षा जांच शुरू की गई। अवकाश के दिन मिली इस धमकी के बाद, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कोर्ट परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया। संदिग्ध वस्तुओं की जांच के लिए परिसर के हर कोने को खंगाला गया। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल किसी भी प्रकार की विस्फोटक सामग्री मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि धमकी भरे ईमेल की जांच साइबर सेल द्वारा की जा रही है। मेल भेजने वाले की पहचान और लोकेशन ट्रेस करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है।
भारत की लोक परंपराओं से सीखें खुश रहने के सूत्र:हैप्पीनेस का फॉर्मूला हमारी संस्कृति में; उत्तराखंड के फूलदेई त्योहार से केरल की नौका दौड़ तक, ये परंपराएं सिखाती हैं जीना

हर साल वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में नॉर्वे-स्वीडन जैसे देश शीर्ष पर रहते हैं, लेकिन खुशी के जो सिद्धांत वहां मापे जाते हैं, जैसे- सामाजिक भरोसा, सामूहिक जीवन, प्रकृति से जुड़ाव, रिश्तों की मजबूती। वे भारत की लोक परंपराओं में सदियों से मौजूद हैं। देश की ये अलग-अलग परंपराएं बताती हैं कि खुशी कोई भावना नहीं, बल्कि जीने का तरीका है। सामूहिकता साथ हो तो मुश्किल भी आसान लगती है – भारत की कई परंपराएं ‘मैं’ नहीं, ‘हम’ पर आधारित हैं। – उत्तराखंड में फूलदेई का त्योहार हर साल चैत्र माह की शुरुआत में मनाया जाता है। सर्दियों के बाद जब पहाड़ों में नए-नए फूल खिलते हैं, तब बच्चे घर-घर जाकर दहलीज पर फूल सजाते हैं और सबके सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पूरा गांव एक-दूसरे के दरवाजे से जुड़ता है और बसंत का स्वागत अकेले नहीं, बल्कि सामूहिक खुशी के साथ करता है। – केरल की वल्लम कली (नौका दौड़) में 100 से भी ज्यादा लोग एक लंबी नाव में सवार होकर एक ही ताल और लय में चप्पू चलाते हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि इतने लोग एक लक्ष्य के लिए पूरी एकता के साथ साथ चल रहे हैं। कृतज्ञता शुक्रिया कहना सिखाता है; जो है, वही काफी है – ओडिशा की नुआखाई में नई फसल पहले धरती और देवी को अर्पित की जाती है, फिर गांव साथ खाना खाता है। कृतज्ञता हमें सिखाती है कि जो है, वही काफी है। – तमिलनाडु का कोलम सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि छोटे जीवों के लिए भोजन है। यानी दिन की शुरुआत ही दान से होती है। रिश्ते और संवाद, अकेलेपन का सबसे बड़ा इलाज – असम में ‘भेलघर’ नाम का अस्थायी घर बनाकर लोग रात भर साथ जश्न मनाते हैं और अगली सुबह उसे जला देते हैं। यह सिखाती है कि खुशी लोगों के बीच होती है। – नागालैंड का मोरुंग सामुदायिक केंद्र है। बुजुर्ग युवाओं को जीवन कौशल सिखाते हैं, इससे पीढ़ियों के बीच जुड़ाव बना रहता है। प्रकृति और धैर्य, स्थायी खुशियों का सूत्र – मेघालय में खासी और जयंतिया जनजाति के लोग पेड़ों की जीवित जड़ों को मोड़-तोड़कर पुल बनाते हैं। ये पुल प्रकृति के साथ मिलकर तैयार होते हैं और पूरी तरह बनने में 15 से 30 साल लग जाते हैं। यह परंपरा हमें धैर्य और दूरदृष्टि सिखाती है। आज मेहनत करके आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ टिकाऊ बनाना ही संतोष है। भरोसा, जिंदगी में कोई भी डर मायने नहीं रखता – गुजरात के डांग क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में होली के दौरान एक साहसिक परंपरा निभाई जाती है। लोग एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर मानव मीनार बनाते हैं और उस पर नाचते हैं। – सीख: यह परंपरा आपसी भरोसा सिखाती है… ऊपर खड़ा व्यक्ति जानता है कि नीचे खड़े लोग उसे गिरने नहीं देंगे।
गर्मी में गन्ने का एक गिलास जूस, पीलिया को रखें हमेशा दूर; डॉक्टर ने बताए चौंकाने वाले फायदे

Last Updated:March 20, 2026, 12:29 IST Sugarcane Juice Benefits: गर्मी के दिनों में शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए मौसमी फलों के सेवन की सलाह दी जाती है लेकिन पीलिया एक ऐसी बीमारी है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक को अपनी चपेट में ले लेती है. वहीं गन्ने के जूस को पीलिया का काल माना जाता है. गर्मी में एक गिलास जूस पीलिया सहित कई बीमारियों में लाभकारी है. गर्मी की शुरुआत होते ही खरगोन सहित निमाड़ में सूरज आग उगलने लगा है. मार्च के महीने में ही तापमान तेजी से बढ़ा है. अप्रैल-मई में हालत और ज्यादा खराब हो सकते हैं क्योंकि हर साल यहां तामपान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. ऐसे में लोगों का दिन में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है और शरीर जल्दी थकने लगता है. इस भीषण गर्मी के कारण तेज धूप और लू की चपेट में आकर लोग जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं. बच्चे और बुजुर्ग इसके ज्यादा शिकार होते हैं. इस मौसम में डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और बुखार जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं. खास बात यह है कि इस समय ध्यान न दिया जाए, तो बुखार पीलिया में बदल जाता है और कई बार व्यक्ति की जान तक चले जाती है. खरगोन के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ संतोष मौर्य ने लोकल 18 से कहा कि इस मौसम में ज्यादा पानी पीना चाहिए और ठंडी चीजों का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर संतुलित बना रहे. वहीं गन्ने का जूस पीलिया के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है. यह लीवर को सपोर्ट करता है और शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद करता है. नियमित रूप से इसका सेवन करने से राहत मिल सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google इसी वजह से इन दिनों खरगोन में गर्मी बढ़ते ही गन्ने के जूस के ठेले बड़ी संख्या में नजर आने लगे हैं. दोपहर के समय इन ठेलों पर लोगों की भीड़ खूब दिख रही है. लोग ठंडा-ठंडा जूस पीकर राहत महसूस कर रहे हैं क्योंकि यह सिर्फ प्यास नहीं बुझाता बल्कि शरीर को अंदर से ठंडक भी देता है. गन्ने का रस नैचुरल तरीके से शरीर को एनर्जी देता है. इसे पीने से तुरंत ताजगी मिलती है और थकान कम होती है. गन्ने के जूस में कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे शरीर के लिए जरूरी तत्व पाए जाते हैं. इसके साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. डॉ मौर्य के अनुसार, गन्ने का जूस सिर्फ स्वाद में अच्छा नहीं होता बल्कि यह शरीर को तुरंत एनर्जी भी देता है. तेज धूप में बाहर से आने के बाद एक गिलास जूस शरीर को तुरंत ताजगी देता है और कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता. नियमित रूप से इसका सेवन करने से पीलिया जैसी घातक बीमारियों में जल्दी राहत मिल सकती है. यह एक नैचुरल ड्रिंक है, जिसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता. वहीं इसकी तासीर भी ठंडी होती है, इसलिए यह शरीर को अंदर से ठंडक भी देता है. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में लोग कोल्डड्रिंक की जगह गन्ने का जूस ज्यादा पसंद करते हैं. यह सस्ता भी होता है और सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. First Published : March 20, 2026, 12:29 IST
‘अपमानित हुआ, गुहार लगानी पड़ी…’: बोरदोलोई ने गोगोई के सत्ता संभालने के बाद से असम कांग्रेस में विश्वास की कमी का संकेत दिया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 20, 2026, 12:17 IST बोरदोलोई, जो हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं और उन्हें दिसपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा गया है। असम के नेता प्रद्युत बोरदोलोई बीजेपी में शामिल हो गए. (पीटीआई/फ़ाइल) अनुभवी नेता और नगांव से पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि पार्टी के भीतर अलगाव, आंतरिक मतभेद और अपमान की बढ़ती भावना के कारण उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। बोरदोलोई, जो हाल ही में भाजपा में शामिल हुए और उन्हें दिसपुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा गया है, ने कहा कि कांग्रेस के साथ उनका जुड़ाव उनकी किशोरावस्था से है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “कांग्रेस के साथ मेरा जुड़ाव काफी पुराना है। मैं 16 साल का था जब मैं एनएसयूआई (कांग्रेस की छात्र शाखा) का सदस्य बना… मैं पहली पीढ़ी का राजनेता हूं और मुझे पार्टी में आगे बढ़ने के कई मौके मिले। मैंने चार बार विधायक के रूप में जीत हासिल की और 15 साल तक कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। मैं दो बार सांसद भी रहा हूं।” क्या बदलाव आया, इसकी व्याख्या करते हुए, बोरदोलोई ने कहा, “हालांकि, हाल ही में, चीजें पहले जैसी नहीं रही हैं… मैंने (कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव में) शशि थरूर का समर्थन किया था क्योंकि मुझे लगा कि संगठन में चुनाव आवश्यक हैं। मैंने उनके लिए प्रचार करने के लिए उत्तर-पूर्वी राज्यों में उनके साथ यात्रा की… मुझे कहना होगा कि मल्लिकार्जुन खड़गे, जो अध्यक्ष बने, ने कभी कोई शिकायत नहीं की, लेकिन मुझे लगा कि अन्य लोग समान नहीं थे। मुझे लगा कि मुझे व्यवस्थित रूप से बाहर कर दिया गया था। मेरे कनिष्ठों को स्क्रीनिंग समितियों में नियुक्त किया गया था।” जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और उन्हें सीडब्ल्यूसी में आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया, मेरा नाम कभी भी किसी भी विचार के लिए नहीं आया।” उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान सामने आई कठिनाइयों के बारे में भी बताया। “हालांकि 2019 में मैंने नागांव लोकसभा सीट जीती, जो कांग्रेस ने 35 वर्षों से नहीं जीती थी, 2024 में मुझे फिर से नामांकित होने के लिए दर-दर भटकना पड़ा। क्योंकि गौरव गोगोई के कलियाबोर निर्वाचन क्षेत्र के कुछ हिस्से नागांव में चले गए, वह मेरी सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। बाद में, रकीबुल हुसैन भी यही चाहते थे। मुझे बहुत दुख हुआ। सोनिया गांधी के हस्तक्षेप से मुझे मेरी सीट मिल गई। लेकिन तथ्य यह है कि मुझे केसी सहित हर नेता के पास जाना पड़ा। वेणुगोपाल, और विनती ने मुझे अपमानित महसूस कराया,” उन्होंने कहा। बोरदोलोई ने आगे असम में पार्टी नेतृत्व से समर्थन की कमी का आरोप लगाया। “गोगोई के असम कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, विश्वास में लगातार कमी आई है। मुझे सभी निर्णय लेने से दूर रखा गया था और मैं अलग-थलग महसूस कर रहा था। तब जो लोग मेरे काफिले पर हमले के लिए जिम्मेदार थे, उन्हें लहरीघाट और गोगोई के स्थानीय विधायक आसिफ नज़र ने सम्मानित किया था। मुझे आश्चर्य हुआ कि मेरी शिकायतों के बावजूद गोगोई अगले दिन उनके साथ मंच साझा करने चले गए। मेरे द्वारा उनके खिलाफ दिए गए सबूतों के बावजूद वे विधायक को फिर से नामांकित करना चाहते हैं। मुझे केंद्रीय चुनाव समिति के दौरान पता चला कि (सीईसी) की बैठक में, इमरान मसूद, जो एक बहुत ही सांप्रदायिक नेता हैं और कांग्रेस की बैठकों में वंदे मातरम गाने से इनकार करते हैं, ने मेरी शिकायतों को मनगढ़ंत बताकर खारिज कर दिया, राज्य कांग्रेस प्रमुख बैठक में थे, लेकिन उन्होंने मेरा बचाव नहीं किया।” यह पूछे जाने पर कि क्या कोई पैटर्न है, यह देखते हुए कि असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले कांग्रेस नेतृत्व द्वारा दरकिनार किए जाने का आरोप लगाया था, बोरदोलोई ने कहा, “अगर मैं इस पर कुछ भी कहूंगा, तो मैं रोने वाले बच्चे की तरह लगूंगा। तथ्य यह है कि मुझे अपमानित महसूस हुआ।” जगह : असम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 20, 2026, 12:17 IST समाचार राजनीति ‘अपमानित हुआ, गुहार लगानी पड़ी…’: बोरदोलोई ने गोगोई के सत्ता संभालने के बाद से असम कांग्रेस में विश्वास की कमी का संकेत दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)प्रद्युत बोरदोलोई(टी)असम की राजनीति(टी)कांग्रेस पार्टी(टी)बीजेपी(टी)राजनीतिक स्विच(टी)आंतरिक मतभेद(टी)नागांव(टी)दिसपुर विधानसभा क्षेत्र
आपने देखा है सिंदूर का पौधा? खेती से मालामाल होंगे किसान, कई बीमारियों में भी कारगर

होमवीडियोकृषि आपने देखा है सिंदूर का पौधा? कई बीमारियों में भी कारगर, जानें फायदे X आपने देखा है सिंदूर का पौधा? कई बीमारियों में भी कारगर, जानें फायदे Sindoor Tree Benefits: सिंदूर का पौधा औषधीय गुणों से भी भरपूर माना जाता है. इस पौधे को अंग्रेजी में कुमकुम ट्री या कमील ट्री कहा जाता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसे रक्तबीज के नाम से भी जाना जाता है. सिंदूर का पौधा बहुवर्षीय होता है, यानी एक बार लगाने के बाद यह कई वर्षों तक फल देता है. यह पौधा लगभग तीन साल में फल देना शुरू कर देता है. इसके फल और बीज से पूरी तरह प्राकृतिक और हर्बल सिंदूर तैयार किया जाता है. एक पौधे से लगभग डेढ़ किलो तक बीज प्राप्त हो जाते हैं, जिनसे गहरा लाल रंग निकलता है. यह रंग पूरी तरह प्राकृतिक होता है और त्वचा के लिए सुरक्षित माना जाता है. यदि किसान बड़े पैमाने पर इस पौधे का रोपण करते हैं तो इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.
साबूदाना रेसिपी फॉर नवरात्रि व्रत: नवरात्रि व्रत में खास साबूदाने से ये 4 तरह की टेस्टी चीजें, मिनटों में हो जाएगी तैयार; बनाना भी है आसान

20 मार्च 2026 को 11:56 IST पर अपडेट किया गया नवरात्रि व्रत रेसिपी: नवरात्रि व्रत के दौरान अगर आप कुछ आसान, टेस्टी और सब्जी बनाना चाहते हैं, तो साबूदाना अपने किचन का हीरो बन सकते हैं। ये चारों रेसिपी ना सिर्फ बनाने में आसान हैं बल्कि पूरे दिन आपको एनर्जी भी देती हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)नवरात्रि साबूदाना रेसिपी(टी)साबूदाना रेसिपी(टी)चैत्र नवरात्रि 2026(टी)साबूदाना उपमा(टी)साबूदाना खीर(टी)साबूदाना खिचड़ी(टी)साबूदाना लड्डू(टी)नवरात्रि रेसिपी(टी)नवरात्रि भोजन रेसिपी
अमेरिका में बच्चों के लिए ‘द बैलेंस प्रोजेक्ट’:फोन-फ्री बचपन; असली दुनिया को इतना दिलचस्प बनाइए कि बच्चे स्क्रीन भूल जाएं

अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के लिटिल सिल्वर शहर में 7 साल की मौली रोज साइकिल से अकेले स्कूल जाती है। कुछ समय पहले तक यह सामान्य बात थी, लेकिन आज के स्क्रीन-डोमिनेटेड दौर में यह आंदोलन बन चुका है। मौली और उसके दोस्त ‘द बैलेंस प्रोजेक्ट’ नाम की पहल का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य बच्चों को मोबाइल से दूर कर स्वतंत्र बचपन लौटाना है। यह पहल अभिभावकों द्वारा शुरू की गई है। उन्होंने शहर में सुरक्षित साइकिल रूट मैप बनाए, बच्चों के लिए ‘बाइक-बडी’ समूह बनाए और स्कूलों में फोन-फ्री माहौल की मांग की। रेस्टोरेंट में बच्चों को मोबाइल देने के बजाय बैलेंस बॉक्स दिए जाते हैं…, जिनमें रंग, खिलौने और छोटे गेम होते हैं। पहल का लक्ष्य असली दुनिया को इतना रोचक बनाना है कि बच्चे खुद स्क्रीन छोड़ दें। विशेष साइकिल रूट मैप, बाइक-बडी जैसे समूह बने इसके तहत पार्क, प्ले-स्पेस और थर्ड स्पेस यानी घर और स्कूल से अलग मिलने-जुलने की जगहें विकसित की जा रही हैं। सर्वे बताते हैं कि ज्यादातर बच्चे ऑनलाइन रहने के बजाय दोस्तों के साथ बाहर खेलना पसंद करते हैं, लेकिन अवसर नहीं मिलते।
Kidney Cancer Silent Symptoms: ये हैं किडनी कैंसर से पहले दिखने वाले लक्षण!… शरीर में दिखते हैं ये बदलाव, तो आपके जीवन के लिए है खतरा

Last Updated:March 20, 2026, 11:51 IST Kidney Cancer Silent Symptoms: किडनी कैंसर एक ऐसी स्थिति है जिसमें शुरुआती चरणों में लक्षण अक्सर बहुत हल्के होते हैं. हालांकि, शरीर हमेशा कुछ खास संकेतों के ज़रिए खतरे का इशारा देता है. मेडिकल साइंस में इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जा सकता है, क्योंकि इसके लक्षण तभी ज़्यादा साफ़ तौर पर दिखाई देते हैं. Kidney Cancer Silent Symptoms: कैंसर की महामारी वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है. विशेष रूप से, किडनी कैंसर के मामले खतरनाक दर से बढ़ रहे हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में, यह कैंसर के 10 सबसे आम रूपों में से एक है. दुख की बात है कि दुनिया भर में, यह बीमारी अक्सर अपने शुरुआती चरणों में कोई खास लक्षण नहीं दिखाती है. चूंकि किडनी शरीर के काफी अंदर स्थित होती हैं, इसलिए ट्यूमर का बढ़ना अक्सर तब तक पता नहीं चलता जब तक कि वह काफी बढ़ न जाए. यही कारण है कि इस बीमारी के बारे में विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी हर किसी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. फॉक्स चेस कैंसर सेंटर के अनुसार, यदि किडनी कैंसर का पता जल्दी चल जाए, तो जीवित रहने की दर 90 प्रतिशत होती है. अगर शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने से पहले ही इसका निदान और उपचार कर लिया जाए, तो पूरी तरह से ठीक होना बिल्कुल संभव है. हालांकि, कई लोगों को निदान में देरी का सामना करना पड़ता है. फॉक्स चेस कैंसर सेंटर में यूरोलॉजी के प्रोफेसर और यूरोलॉजिक ऑन्कोलॉजी के वरिष्ठ चिकित्सा विशेषज्ञ डेविड वाई.टी. चेन के अनुसार इस बीमारी का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण पेशाब में खून आना है. अगर आपका पेशाब बिना किसी दर्द के लाल हो जाता है, तो आपको तुरंत सचेत हो जाना चाहिए. इसके अलावा, पीठ में तेज़ दर्द को नज़रअंदाज़ न करें, विशेष रूप से पीठ के निचले हिस्से या बगल के एक तरफ होने वाले दर्द को. यह दर्द धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और रुक-रुक कर भी हो सकता है. कुछ लोगों को पेट के किनारे या पीठ के निचले हिस्से में कोई गांठ या उभार महसूस हो सकता है. ऐसे लक्षण दिखने पर, तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की सलाह दी जाती है. Add News18 as Preferred Source on Google बिना किसी वजह के वज़न कम होना एक और अशुभ संकेत है. बिना किसी खान-पान या जीवनशैली में बदलाव किए वज़न कम होना, शरीर के अंदर किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है. इसके साथ अक्सर भूख पूरी तरह से खत्म हो जाती है और बहुत ज़्यादा थकान महसूस होती है. लगातार थकान, जो पर्याप्त आराम करने के बाद भी दूर न हो, किडनी की खराबी या विफलता का चेतावनी संकेत हो सकती है। इसके अलावा, लाल रक्त कोशिकाओं की कमी जिससे एनीमिया होता है भी कैंसर के लक्षण के रूप में सामने आ सकती है. कुछ लोगों को लगातार बुखार रह सकता है जो किसी भी तरह से कम नहीं होता. संक्रमण न होने पर भी, किसी व्यक्ति को रात में पसीना आने और शरीर में तेज़ गर्मी या जलन महसूस होने जैसे लक्षण हो सकते हैं. ये कुछ ऐसे संकेत हैं जो बताते हैं कि शरीर में कैंसर की मौजूदगी बढ़ रही हो सकती है. हालांकि, जिन लोगों में ये लक्षण दिखते हैं, ज़रूरी नहीं कि उन सभी को कैंसर ही हो. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन या किडनी में पथरी जैसी बीमारियों में भी ऐसे ही लक्षण दिख सकते हैं। फिर भी, बिना ठीक से मेडिकल जांच करवाए खुद से दवा लेना खतरनाक हो सकता है. किडनी कैंसर की स्क्रीनिंग हर किसी के लिए ज़रूरी नहीं है. लेकिन, अगर आपके परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा है, तो आपको सावधानी बरतनी चाहिए. जिन लोगों में इस बीमारी का आनुवंशिक खतरा है, और साथ ही जिन्हें पुरानी बीमारियां रही हैं, उन्हें नियमित रूप से मेडिकल जांच करवानी चाहिए. जो लोग किडनी की पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें भी लगातार डॉक्टरों की देखरेख में रहना चाहिए. शुरुआती स्क्रीनिंग से ट्यूमर का पता तब चल जाता है, जब वे अभी छोटे होते हैं और उन्हें आसानी से निकाला जा सकता है. First Published : March 20, 2026, 11:51 IST
वर्ल्ड अपडेट्स:लंदन में 2 भारतीयों ने सड़क पर पान थूका, डेढ़ लाख रुपए का जुर्माना लगा

लंदन के ब्रेंट इलाके में सार्वजनिक जगह पर पान थूकने के मामले में भारतीय मूल के दो लोगों पर 1,391 पाउंड (करीब 1.45 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों लोगों को पहले मौके पर ही 100 पाउंड का जुर्माना भरने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इसे नहीं भरा। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया और जुर्माना कई गुना बढ़ गया। ब्रेंट सिटी काउंसिल ने पान थूकने के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि इससे सार्वजनिक जगहें गंदी होती हैं और सफाई पर काफी खर्च बढ़ जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल को हर साल करीब 30,000 पाउंड (लगभग 30 लाख रुपये) सिर्फ पान के दाग साफ करने में खर्च करने पड़ते हैं। पहला मामला एडगवेयर इलाके के रहने वाले अक्षीतकुमार भद्रे पटेल का है। उन्होंने जून 2025 में किंग्सबरी रोड पर एक मेट्रो स्टेशन के पास पान थूका था। वे कोर्ट में पेश नहीं हुए, इसलिए उनके खिलाफ फैसला उनकी गैरमौजूदगी में ही सुनाया गया। समय पर जुर्माना न भरने के कारण उनकी रकम 10 गुना से ज्यादा बढ़ गई। दूसरा मामला रुइसलिप इलाके के रहने वाले हितेश पटेल का है। उन्होंने वेम्बली हिल रोड पर पान थूका था। वे भी कोर्ट में पेश नहीं हुए और उनके खिलाफ भी गैरहाजिरी में ही फैसला हुआ, जिससे उन पर भी भारी जुर्माना लगा। उत्तर-पश्चिम लंदन के ब्रेंट और आसपास के इलाकों में पान थूकने की समस्या बढ़ रही है, जिस पर स्थानीय प्रशासन सख्त हो गया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पान के दाग हटाना मुश्किल और महंगा होता है, इसके लिए खास तरीके से सफाई करनी पड़ती है। काउंसिल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। इसके तहत जगह-जगह चेतावनी वाले बैनर लगाए जा रहे हैं, अधिकारी गश्त कर रहे हैं और मौके पर ही 100 पाउंड तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… कनाडा पुलिस बोली- भारत से जुड़े अपराध का कोई सबूत नहीं, ट्रूडो सरकार के दावे से पलटे कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने कहा है कि भारत सरकार से जुड़े किसी एजेंट से कनाडा के लोगों को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। RCMP के कमिश्नर माइक डुहेम ने गुरुवार को CTV को दिए इंटरव्यू में कहा कि मौजूदा जांच में किसी विदेशी सरकार से सीधा संबंध साबित नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, “2024 में मैंने जो कहा था, वह उस समय की जांच पर आधारित था। लेकिन अब जो हम देख रहे हैं, उसमें हर मामले को किसी विदेशी संस्था से जोड़ना संभव नहीं है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार देखा जा रहा है। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एनआईए द्वारा घोषित आतंकी हरदीप निज्जर की हत्या को भारत से जोड़कर आरोप लगाए थे, जिससे दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। साल 2023 में पैदा हुए तनाव के बाद भारत और कनाडा अपने रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और हालिया कूटनीतिक प्रयासों से इसमें सुधार भी दिख रहा है। ट्रम्प ने जापानी पीएम की मौजूदगी में कहा- हमें भी पर्ल हार्बर हमले की जानकारी नहीं थी, वैसा ही हमने ईरान में किया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने गुरुवार को जापान की प्रधानमंत्री को उस समय चौंका दिया, जब उन्होंने 1941 में हुए पर्ल हार्बर हमले का जिक्र कर दिया। ट्रम्प ने यह बात हल्के अंदाज में कही, लेकिन यह टिप्पणी जापान के लिए असहज करने वाली मानी जा रही है। ट्रम्प ने PM साने ताकाइची के साथ एक बैठक के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। तब उनसे एक रिपोर्टर ने पूछा- अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला करने से पहले अपने सहयोगियों को क्यों नहीं बताया। इस पर ट्रम्प ने कहा, “हमने किसी को नहीं बताया क्योंकि हम सरप्राइज देना चाहते थे। सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है?” उन्होंने एक जापानी पत्रकार से मजाकिया लहजे में कहा, “तुमने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया?” ताकाइची, जो ट्रांसलेटर के जरिए बात समझ रही थीं, उन्होंने कुछ नहीं कहा, लेकिन ऐसा लगा कि वह यह सुनकर असहज हो गई थीं। दरअसल, 7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिका के हवाई स्थित पर्ल हार्बर सैन्य अड्डे पर अचानक हमला किया था। इस हमले में 2400 से ज्यादा अमेरिकी मारे गए थे। इसके बाद अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया था। नेपाल में बालेन शाह 27 मार्च को PM पद की शपथ ले सकते हैं, एक दिन पहले सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह नेपाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है। हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की बंपर जीत के बाद अब बालेंद्र (बालेन) शाह 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी में हैं। RSP ने 23 फरवरी को हुए चुनाव में 275 में से 182 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इससे साफ हो गया है कि बालेन शाह के नेतृत्व में एक ही पार्टी की सरकार बनेगी। चुनाव से पहले ही पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था और अब सरकार बनाने की तैयारियां आखिरी चरण में हैं। सांसदों का शपथ ग्रहण 26 मार्च को दोपहर 2 बजे होगा। इससे पहले उसी दिन सुबह 11:30 बजे सबसे वरिष्ठ सांसद को शपथ दिलाई जाएगी। 78 साल के अर्जुन नरसिंह केसी सबसे उम्रदराज चुने गए सांसद हैं, जो पहले खुद राष्ट्रपति से शपथ लेंगे और फिर बाकी सांसदों को शपथ दिलाएंगे।
गर्मियों में अंजीर कैसे खाएं? यहां जानिए सही तरीका और फायदे नहीं तो होगा सिर्फ नुकसान

Last Updated:March 20, 2026, 10:26 IST जीर गर्म तासीर वाला तो होता है, लेकिन गर्मियों में अंजीर को हमेशा भिगोकर खाना चाहिए. रात भर 2 से 3 सूखे अंजीर को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाने से शरीर को ठंडक और पोषण भी मिलता है. इसके एक दो नहीं, बल्कि अनगिनत फायदे हैं. बलिया: आज हम आपको एक ऐसे फल के बारे में बताने और दिखाने जा रहे हैं, जिसके फायदे हैरान करने वाले हैं. बिल्कुल साधारण सा देखने वाला यह फल किसी संजीवनी से कम नहीं है. एक नहीं, बल्कि अनेक औषधीय गुणों से भरपूर अंजीर का अगर सही से सेवन किया जाए, तो कई समस्याओं से निजात पाया जा सकता है. अंजीर न केवल पुरुषों के लिए वरदान है, बल्कि महिलाओं के लिए भी बेहद लाभकारी और गुणकारी है. आइए जानते हैं आयुर्वेद प्रोफेसर मेगा गोयल क्या बता रही हैं… असिस्टेंट प्रोफेसर वैद्य मेगा गोयल ने कहा कि UG तक की पढ़ाई बैंगलोर के सरकारी कॉलेज से हुई है, यह बैंगलोर की ही रहने वाली भी हैं. अभी वह नौकरी पाने के बाद से उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के बांसडीह मझौली स्थित शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में कार्यरत हैं. उन्होंने लोकल 18 के दर्शकों को पीछे लगे पेड़ के बारे में लाभकारी जानकारी देते हुए कहा कि प्रकृति भी सारी चीज अपने हिसाब से बनाती हैं. सभी को पता है कि गर्मी बढ़ रही है. अंजीर को कैसे खाएं ऐसे में अंजीर गर्म तासीर वाला तो होता है, लेकिन गर्मियों में अंजीर को हमेशा भिगोकर खाना चाहिए. रात भर 2 से 3 सूखे अंजीर को पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाने से शरीर को ठंडक और पोषण भी मिलता है. इसके एक दो नहीं, बल्कि अनगिनत फायदे हैं. अंजीर का सेवन वहीं लोग करे, जिनका पाचन तंत्र सक्रिय हो. जिनको पचने में समस्या हो, वो इसका सेवन न करें. जो लोग लोग अंदर बाहर से सूखे हैं, उनके के लिए अंजीर रामबाण है. यहां तक की अंजीर डिलीवरी के दौरान मेंटली और फिजिकली मां और बेटे दोनों के लिए बेहद लाभकारी और गुणकारी है. हड्डियों के लिए भी अंजीर वरदान इसको दूध में भिगोकर भी सेवन किया जा सकता है. रात भर भिगोने के बाद सुबह पीसकर भी दूध में मिलाकर पिया जा सकता है इससे माताओं में दुग्ध वृद्धि होती है बच्चों के हड्डियों के लिए भी अंजीर वरदान है, क्योंकि इसमें कैल्शियम भरपूर होता है. जो बहुत दुबले पतले हैं जिनका वजन नहीं बढ़ता है ऐसी में भी अंजीर बहुत लाभकारी है. इसके अलावा, अंजीर अनेकों रोगों में बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है. अगर आप किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं, तो बगैर आयुर्वेद एक्सपर्ट की सलाह लिए अंजीर का सेवन न करें. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें Location : Ballia,Ballia,Uttar Pradesh First Published : March 20, 2026, 10:16 IST






