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शिमला पहुंचे राहुल गांधी:बहन प्रियंका के घर छराबड़ा में ठहरे, नेता प्रतिपक्ष का निजी दौरा बताया जा रहा

शिमला पहुंचे राहुल गांधी:बहन प्रियंका के घर छराबड़ा में ठहरे, नेता प्रतिपक्ष का निजी दौरा बताया जा रहा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को शिमला पहुंच गए हैं। वह शिमला से करीब 12 किलोमीटर दूर छराबड़ा स्थित अपनी बहन प्रियंका गांधी घर पर ठहरे हुए हैं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी करीब 2-3 दिन के निजी दौरे पर शिमला आए हैं। इस दौरान वह छराबड़ा में ही रुकेंगे। बता दें कि प्रियंका गांधी ने छाबड़ा में पहाड़ी शैली में अपना घर बना रखा है, जहां वह समय-समय पर आती रहती हैं। हाल ही में प्रियंका गांधी भी एक सप्ताह पहले यहां आई थीं और चार दिन रुकने के बाद दिल्ली लौट गई थीं। अब राहुल गांधी के आगमन से क्षेत्र में राजनीतिक हलचल भी बढ़ गई है। राहुल गांधी के शिमला पहुंचते ही छराबड़ा और कल्याणी हेलीपैड के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस और प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त बल तैनात किया है।

Dry eyes eye drop| आप भी अपनी आंखों में डाल रहे हैं जहर? तुरंत रोको, सरकार ने राज्यों को दिया कड़े एक्शन का आदेश

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Last Updated:March 20, 2026, 14:31 IST सीडीएससीओ ने राज्यों को बाजार में धड्ल्‍ले से बेची जा रहीं ड्राई आईज की बिना मंजूरी वाली आई ड्रॉप्स पर तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया है. ये ड्रॉप्स आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. साथ ही इन दवा न‍िर्माताओं के ख‍िलाफ भी कड़ा एक्‍शन लेने के ल‍िए कहा है. आइए जानते हैं व‍िस्‍तार से.. ड्राई आईज के ल‍िए बाजार में बेची जा रहीं इन आई ड्रॉप्‍स को लेकर सीडीएससीओ ने सभी राज्‍यों को बैन लगाने का न‍िर्देश द‍िया है. Ban Dry Eyes Eye Drops: ड्राई आईज यानि सूखी आंखों की समस्या काफी आम है. ज्यादा स्क्रीन इस्तेमाल करने या ऑफिस आदि के चलते एकटक लंबे समय तक स्क्रीन देखते रहने से यह परेशानी लोगों को होती है और लोग इसको ठीक करने के लिए आई ड्रॉप्स खरीद लेते हैं लेकिन यही आई ड्रॉप्स अब इस सामान्य सी लगने वाली बीमारी को खतरनाक बना रही है. बाजार में बेची जा रहीं ड्राई आईज की आई ड्रॉप्स जहर का काम कर रही हैं, जिन पर केंद्रीय दवा नियामक ने तुरंत रोक लगाने का आदेश दिया है. सीडीएससीओ ने सभी राज्यों को बाजार में बेची जा रहीं ड्राई आईज की ड्रॉप्स की मंजूरी को तुरंत रद्द करने और इसे बनाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के लिए कहा है. सीडीएससीओ की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के दवा नियंत्रकों को भेजे गए एक संदेश में कहा गया है कि’सोडियम हाइलूरोनेट आई ड्रॉप्स 0.3%’ का निर्माण और बिक्री बिना केंद्रीय प्राधिकरण से अनिवार्य मंजूरी के की जा रही है, जिस पर तत्काल रोक जरूरी है. बताया गया कि यह फॉर्मूलेशन नई दवा की श्रेणी में आता है जिसे बाजार में बेचने से पहले मंजूरी लेना जरूरी है, लेकिन पता चला है कि इसे बिना नियामक की मंजूरी के ही बाजार में मरीजों को बेचा जा रहा है. इससे लोगों की आंखों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है. वहीं लोग इस दवा को ड्राई आईज यानि सूखी आंखों की परेशानी होने पर ले रहे हैं. ड्राई आइज के क्या लक्षण हैं? . आंखों में जलन और लगातार खुजली होना . पलक, आंख की कोर में चुभन या किरकिरापन महसूस होना . लाल आंखें होना या हल्की लालिमा आना . आंखों से पानी आना . नजर का कमजोर या धुंधला होना . आंखों में भारीपन और थकान होना . रोशनी की तरफ देखने पर संवेदनशीलता महसूस होना . सुबह उठने पर आंखों का चिपकना कैसे काम करती हैं ये आई ड्रॉप्स एम्स आरपी सेंटर की प्रोफेसर डॉ. नम्रता शर्मा बताती हैं कि आमतौर पर ये आई ड्रॉप्स आर्टिफिशियल टियर्स यानि कृत्रिम आंसुओं के रूप में काम करती हैं और सूखी आंखों और जलन को कम करती हैं. इन आई ड्रॉप्स को डालने से आंखें नम रहती हैं और बेचैनी भी कम होती है, लेकिन अगर यही आई ड्रॉप्स खराब क्वालिटी की हों तो आंखों को राहत देने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकती हैं. इसीलिए CDSCO ने सलाह दी है कि आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर करें. अगर कोई दवा मंजूर नहीं है तो उससे आंखों को खतरा हो सकता है. इन आई ड्रॉप्स के ये हैं बड़े नुकसान . बिना अप्रूवल वाली आई ड्रॉप्स आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं. ये आंखों में जलन को और बढ़ा सकती हैं. ड्राई आइज को और सूखा कर सकती हैं. . इन दवाओं क डालने से आंख में कंजंक्टिवाइटिस या पिक आई जैसे संक्रमणों का खतरा पैदा हो सकता है. . ड्राई आंखों की सतह पहले से ही कमजोर होती है, इसलिए बिना जांच-परख वाले प्रोडक्ट्स फायदे के बजाय ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं. .इन दवाओं की गुणवत्ता, शुद्धता और फॉर्मूलेशन की कोई गारंटी नहीं होती. खराब निर्माण प्रक्रिया अपनाए जाने के कारण ये आंख को फायदे के बजाय नुकसान कर सकती हैं और कई बार इस दवा का असर कम होने से आंख में रोग बढ़ भी सकता है. कौन सी बातें हैं बेहद जरूरी . डॉक्टरों का कहना है कि बिना मंजूरी वाली दोनों ही आई ड्रॉप्स को भी खोलने के एक महीने बाद फेंक देना चाहिए, ताकि ये आंखों में संक्रमण न फैला सकें. . बिना डॉक्टर की सलाह के आंखों की कोई भी दवा इस्तेमाल न करें. . कैमिस्ट या मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर आंखों में न डालें. डॉक्टर की सलाह के बाद ही कोई दवा डालें. ये बात समझें कि आंखें बहुत अनमोल हैं, एक बार नुकसान होने के बाद इन्हें वापस पाना बहुत मुश्किल है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें First Published : March 20, 2026, 14:31 IST

रीवा में बच्चा चोरी की अफवाह, भीड़ ने पलटी कार:लाठी-डंडे लेकर युवक पर हमला करने दौड़े; पुलिस ने बीच में आकर रोका, पति-पत्नी में था विवाद

रीवा में बच्चा चोरी की अफवाह, भीड़ ने पलटी कार:लाठी-डंडे लेकर युवक पर हमला करने दौड़े; पुलिस ने बीच में आकर रोका, पति-पत्नी में था विवाद

रीवा के जवा क्षेत्र में बच्चा चोरी की अफवाह ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। करीब 100 ग्रामीणों की भीड़ ने एक कार को घेरकर पलट दिया और उसमें सवार युवक पर हमला करने की कोशिश की। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह बच्चे को सुरक्षित बचा लिया। सोहागी थाना प्रभारी पवन शुक्ला ने बताया कि जैसे ही अफवाह फैली, गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। देखते ही देखते सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए और “मारो-मारो” चिल्लाते हुए कार को चारों तरफ से घेर लिया। कुछ ही देर में गुस्साई भीड़ ने कार को पलट दिया और लाठी-डंडों के साथ हमला करने आगे बढ़ी। पुलिस ने लोगों से की गाली-गलौज हालात इतने बेकाबू हो गए थे कि वहां मौजूद लोग दहशत में आ गए और पूरा इलाका तनावपूर्ण हो गया। मौके पर युवक को सुरक्षित निकालने के लिए पुलिस को गाली गलौज तक करना पड़ा। जानकारी के मुताबिक, नीरज गौतम अपनी पत्नी पुष्पांजलि गौतम से चल रहे पारिवारिक विवाद के चलते सोहागी स्थित ससुराल पहुंचा था। दोनों के बीच बच्चे को लेकर विवाद था। इसी दौरान नीरज बच्चे को अपने साथ जबरन ले आया। घटना के बाद गांव में बच्चा चोरी की अफवाह फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और जवा क्षेत्र में नीरज की कार को घेर लिया। गुस्साई भीड़ ने कार पलट दी और लाठी-डंडों के साथ हिंसक हो गई। पुलिस ने युवक को भीड़ से बचाया सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया। पुलिस ने बीच-बचाव कर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला और युवक को भी भीड़ से बचाया। सोहागी थाना प्रभारी पवन शुक्ला ने बताया कि यह सब एक गलतफहमी की वजह से हुआ। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और अफवाह फैलाने वालों की पहचान की जा रही है।

इंश्योरेंस विज्ञापन में कम दाम, पेमेंट के वक्त वसूली ज्यादा:82% यूजर्स ने झेला धोखा; पॉलिसीबाजार जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स शामिल

इंश्योरेंस विज्ञापन में कम दाम, पेमेंट के वक्त वसूली ज्यादा:82% यूजर्स ने झेला धोखा; पॉलिसीबाजार जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स शामिल

डिजिटल दौर में इंश्योरेंस खरीदना आसान तो हुआ है, लेकिन डार्क पैटर्न्स का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। लोकलसर्किल के ताजा सर्वे के मुताबिक, 10 में से 8 यूजर्स ‘सब्सक्रिप्शन ट्रैप’ जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यानी पॉलिसी लेना आसान है, लेकिन उसे कैंसिल करना बहुत मुश्किल। सर्वे के मुताबिक पिछले 24 महीनों में ऐसे मामले 61% से बढ़कर 80% हो गए हैं। पर्सनल डिटेल्स का मिसयूज: 85% यूजर्स अनचाही कॉल्स से परेशान सर्वे में शामिल 85% यूजर्स ने बताया कि इंश्योरेंस कोटेशन लेते समय उनसे गैर-जरूरी जानकारी मांगी जाती है। बाद में इन डिटेल्स का इस्तेमाल अनचाही मार्केटिंग कॉल्स और मैसेज भेजने के लिए होता है। पिछले 2 साल में ऐसे मामले 57% से बढ़कर 85% हो गए हैं। करीब 90% यूजर्स ने बताया कि अगर वे सिर्फ कोटेशन लेते हैं या पॉलिसी कैंसिल करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें बार-बार कॉल और मैसेज करके परेशान किया जाता है। इसे ‘नैगिंग’ कहा जाता है। पिछले 24 महीनों में यह 86% से बढ़कर 90% पर पहुंच गया है। दिखाते कुछ हैं, बेचते कुछ हैं: 82% यूजर्स ने झेला ‘बेट एंड स्विच’ सर्वे में शामिल 82% यूजर्स ने ‘बेट एंड स्विच’ का अनुभव किया। यानी विज्ञापन में कम प्रीमियम दिखाया गया लेकिन पेमेंट के वक्त दाम बढ़ गए। इसके अलावा, 65% यूजर्स ने ‘ड्रिप प्राइसिंग’ या छिपे हुए चार्जेस की बात कही, जो पॉलिसी रिन्यूअल या क्लेम के वक्त सामने आते हैं। अब इस मामले से जुड़े 4 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल 1: सर्वे में कौन-कौन सी कंपनियों के डार्क पैटर्न्स का जिक्र है? जवाब: इसमें पॉलिसीबाजार, एको, ICICI लोम्बार्ड, टाटा AIG, बजाज आलियांज और HDFC एर्गो जैसे बड़े नामों के प्लेटफॉर्म्स पर 2 से 4 तरह के डार्क पैटर्न्स पाए हैं। डार्क पैटर्न्स डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वे चालाकियां हैं जिनसे ग्राहकों को ऐसे फैसले लेने के लिए उकसाया जाता है जो वे शायद नहीं लेना चाहते। सवाल 2: ग्राहक खुद को इन धोखाधड़ी वाले तरीकों से कैसे बचा सकते हैं? जवाब: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्राहकों को ‘फ्री-लुक पीरियड’ का फायदा उठाना चाहिए। ‘फ्री-लुक पीरियड’ पॉलिसी मिलने के बाद मिलने वाला वह 30 दिनों का समय है, जिसमें आप नियम और शर्तें पसंद न आने पर बिना किसी बड़े नुकसान के इंश्योरेंस कैंसिल कर सकते हैं। इसके अलावा कोई भी पेमेंट करने से पहले पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स को ध्यान से पढ़ें। अगर बैंक लोन के बदले जबरन इंश्योरेंस दे रहा है, तो इसकी शिकायत करें। सवाल 3: क्या किसी बड़ी कंपनी पर इस मामले में कार्रवाई हुई है? जवाब: हां, पिछले साल IRDAI ने फ्लिपकार्ट इंटरनेट पर ₹1.06 करोड़ का जुर्माना लगाया था। कंपनी बिना पर्याप्त ट्रेनिंग वाले स्टाफ के जरिए इंश्योरेंस पॉलिसी बेच रही थी। ग्राहकों को सीधे इंश्योरर की जगह मिडिलमैन की साइट पर भेज रही थी, जो नियमों का उल्लंघन है। सवाल 4: भारतीय रिजर्व बैंक इस पर क्या कदम उठा रहा है? जवाब: RBI ने ‘रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट’ के तहत ड्राफ्ट निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके एप्स डार्क पैटर्न्स से मुक्त हों। अगर मिस-सेलिंग पाई गई, तो बैंकों को ग्राहक का पूरा पैसा वापस करना होगा। मिस-सेलिंग अब बीएनएस के तहत अपराध वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वित्तीय उत्पादों की ‘मिस-सेलिंग’ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अब एक अपराध की श्रेणी में आता है। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों को बीमा बेचने के बजाय अपने कोर बैंकिंग कामकाज और डिपॉजिट बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। रीडर टिप ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीदते समय ‘प्री टिक्ड’ (पहले से टिक किए हुए) बॉक्स को अनचेक करना न भूलें, क्योंकि ये अक्सर एक्स्ट्रा प्रीमियम वाले ‘ऐड ऑन्स’ होते हैं।

'आदित्य धर ने कई बातें छुपाकर रखीं':धुरंधर 2 एक्टर दानिश इकबाल बोले- दो महीने पहले तक नहीं पता था कि मैं ही ‘बड़े साहब’ हूं

'आदित्य धर ने कई बातें छुपाकर रखीं':धुरंधर 2 एक्टर दानिश इकबाल बोले- दो महीने पहले तक नहीं पता था कि मैं ही ‘बड़े साहब’ हूं

फिल्म ‘धुरंधर’ में कई बार ‘बड़े साहब’ का जिक्र हुआ था, लेकिन किरदार का खुलासा नहीं किया गया था। अब ‘धुरंधर 2’ के रिलीज होने के बाद सामने आया है कि इस रोल को एक्टर दानिश इकबाल ने निभाया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने कहा कि उन्हें कई दिनों तक शूटिंग के दौरान यह जानकारी नहीं थी कि वह बड़े साहब का किरदार निभा रहे हैं। टाइम्स नाऊ को दिए इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने कहा, ‘मैं आपको बता दूं कि बड़े साहब वाली बात तो कभी हुई ही नहीं। मतलब, दो महीने पहले तक मुझे भी पता नहीं था कि मैं बड़े साहब का रोल कर रहा हूं। मुझे शक था। वह (आदित्य) बहुत सीक्रेटिव थे और उन्होंने कई बातें अपने तक ही रखीं।’ एक्टर ने आगे कहा, ‘लेकिन हां, मैं दाऊद का रोल कर रहा था, यह मुझे अच्छी तरह पता था, लेकिन दाऊद ही बड़े साहब हैं, इस पर मैं भी पूरी तरह कन्फिडेंट नहीं था। सब मुझे दाऊद भाई या साहब कहकर बुलाते थे। मेरे किरदार के बारे में किसी ने मुझसे कुछ नहीं कहा। इसलिए मेरे सीन्स में हर समय मैं ही बोलता रहता हूं।’ 8 से 9 घंटे तक मेकअप करना पड़ता था: दानिश दानिश इकबाल ने यह भी बताया कि बड़े साहब के किरदार में खुद को ढालने के लिए उन्हें रोज मेकअप के लिए 8 से 9 घंटे बैठना पड़ता था और पूरे दिन प्रोस्थेटिक के साथ रहना होता था। इसे हटाने में भी 3 से 4 घंटे लगते थे और कई नियमों का पालन करना पड़ता था, जिसमें खाना नहीं खा सकते थे। दानिश इकबाल ए माइटी हार्ट, महारानी, फराज, भक्षक और द हंट: द राजीव असैसिनेशन केस जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं। वह हाल ही में नाना पाटेकर के साथ वेब सीरीज संकल्प में दिखे थे।

'आदित्य धर ने कई बातें छुपाकर रखीं':धुरंधर 2 एक्टर दानिश इकबाल बोले- दो महीने पहले तक नहीं पता था कि मैं ही ‘बड़े साहब’ हूं

'आदित्य धर ने कई बातें छुपाकर रखीं':धुरंधर 2 एक्टर दानिश इकबाल बोले- दो महीने पहले तक नहीं पता था कि मैं ही ‘बड़े साहब’ हूं

फिल्म ‘धुरंधर’ में बार-बार ‘बड़े साहब’ का जिक्र हुआ था, लेकिन किरदार का खुलासा नहीं किया गया था। अब ‘धुरंधर 2’ के रिलीज होने के बाद सामने आया है कि इस रोल को एक्टर दानिश इकबाल ने निभाया है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने बताया कि उन्हें शूटिंग के दौरान यह जानकारी नहीं थी कि वह ‘बड़े साहब’ का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो महीने पहले तक उन्हें इस बात का पता नहीं था। टाइम्स नाऊ को दिए इंटरव्यू में दानिश इकबाल ने बताया, ‘मैं आपको बता दूं कि ‘बड़े साहब’ वाली बात तो कभी हुई ही नहीं। मतलब, दो महीने पहले तक मुझे भी पता नहीं था कि मैं ‘बड़े साहब’ का रोल कर रहा हूं। मुझे शक था। वह (आदित्य) बहुत सीक्रेटिव थे और उन्होंने कई बातें अपने तक ही रखीं।’ एक्टर ने आगे कहा, ‘लेकिन हां, मैं दाऊद का रोल कर रहा था, यह मुझे अच्छी तरह पता था, लेकिन दाऊद ही बड़े साहब हैं, इस पर मैं भी पूरी तरह कन्फिडेंट नहीं था। सब मुझे दाऊद भाई या साहब कहकर बुलाते थे। मेरे किरदार के बारे में किसी ने मुझसे कुछ नहीं कहा। इसलिए मेरे सीन्स में हर समय मैं ही बोलता रहता हूं।’ दानिश इकबाल ने यह भी बताया कि ‘बड़े साहब’ के किरदार में खुद को ढालने के लिए उन्हें रोज 8 से 9 घंटे तक मेकअप करना पड़ता था और पूरे दिन प्रोस्थेटिक के साथ रहना होता था। इसे हटाने में भी 3 से 4 घंटे लगते थे और कई नियमों का पालन करना पड़ता था, जिसमें खाना नहीं खा सकते थे। दानिश इकबाल ए माइटी हार्ट, महारानी, अरण्यक, फराज, भक्षक और द हंट: द राजीव असैसिनेशन केस जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं। वह हाल ही में नाना पाटेकर के साथ वेब सीरीज ‘संकल्प’ में दिखे थे।

नवरात्रि पर पंजाब में शराब का लंगर:दरबार के बाहर बेंच पर रखी बोतलें, प्रसाद के तौर पर बांटी, नवविवाहित जोड़े करते अरदास

नवरात्रि पर पंजाब में शराब का लंगर:दरबार के बाहर बेंच पर रखी बोतलें, प्रसाद के तौर पर बांटी, नवविवाहित जोड़े करते अरदास

फरीदकोट में कोटकपूरा के गांव मरहाना में चैत्र नवरात्रि के दौरान एक अनोखी परंपरा देखने को मिली, जहां बाबा काला महर के यादगार मेले में शराब का लंगर लगाया गया। दरबार के बाहर बेंचों पर देसी और अंग्रेजी शराब की बोतलें सजाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में शराब परोसी गई। मान्यता के अनुसार, मन्नत पूरी होने पर यहां भक्त बाबा को शराब चढ़ाते हैं और उसी को लंगर के रूप में बांटते हैं। बाबा काला महर के पूर्वज गजनी से आए थे और उनकी आस्था से जुड़ी यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यह भी मान्यता है कि बाबा ने शराब को परमात्मा के रंग में रंगने वाला अमृत बताया, जिसके बाद से यहां यह परंपरा शुरू हुई। संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहां सबसे अधिक नवविवाहित जोड़े आते हैं। प्रबंधक कमेटी के प्रधान परमजीत सिंह ने बताया कि हर साल ही मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। इस स्थान के प्रति संधू गोत्र के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है और यहां पर अपनी मुरादें पूरी करने के लिए लोग अरदास करने पहुंचते हैं और मुराद पूरी होने पर शुकराना करने भी आते हैं। मान्यता के अनुसार चढ़ती है शराब स्थानीय मान्यता के मुताबिक, श्रद्धालु बाबा काला महर को शराब चढ़ाते हैं और उसी को लंगर के रूप में बांटते हैं। दूर-दराज से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं, जिनमें नवविवाहित जोड़े भी शामिल होते हैं। बाबा काला महर के प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। ज्यादातर लोग दरगाह पर शराब चढ़ाने ही आते हैं। कोई देसी तो कोई ब्रांडेड शराब चढ़ाता है। मान्यता यह भी है कि श्रद्धालु चढ़ाई गई शराब में से थोड़ी घर ले जा सकता है या वहीं बैठकर प्रसाद के रूप में सेवन कर सकता है। नवविवाहित जोड़े करते हैं अरदास बाबा के प्रति महिलाओं की श्रद्धा अधिक बताई जाती है। नवविवाहित जोड़े संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहां आते हैं और शराब चढ़ाकर मुराद मांगते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु दोबारा बच्चे के साथ यहां आकर शराब चढ़ाते हैं। लोगों के अनुसार, बाबा काला महर संधू वंश से संबंधित थे। गजनी से जुड़ा है इतिहास मान्यता है कि बाबा काला महर के पूर्वज गजनी से आए थे, जो लाहौर होते हुए कोटकपूरा के पास जंगल में बस गए। यहीं बाबा का जन्म हुआ। बताया जाता है कि पशु चराते समय उनकी मुलाकात गुरु गोरखनाथ से हुई, जिसके बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। आसपास के संधू गोत्र के लोगों में उनकी पूजा होने लगी। यह भी मान्यता है कि बाबा ने शराब को परमात्मा के रंग में रंगने वाला अमृत बताया, जिसके बाद से यहां शराब चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।

अमेरिका में बढ़ रहे मास शूटर:ऑनलाइन कम्युनिटी इन्हें ‘संत’ मान रही; हिंसक कंटेंट दिखाने वाला एल्गोरिदम अपराध की राह पर ले जाता है

अमेरिका में बढ़ रहे मास शूटर:ऑनलाइन कम्युनिटी इन्हें ‘संत’ मान रही; हिंसक कंटेंट दिखाने वाला एल्गोरिदम अपराध की राह पर ले जाता है

अमेरिका में मास शूटर्स की संख्या बढ़ रही है और इसके पीछे एक नया, खतरनाक ट्रेंड उभर रहा है। इंटरनेट पर ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कम्युनिटीज तेजी से फैल रही हैं, जो इन हत्यारों को संत और भगवान की तरह पूज रही हैं। यह सिर्फ अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसी डिजिटल संस्कृति है, जो हिंसा को महिमामंडित कर रही है। एक दशक तक मास शूटिंग पर स्टडी करने वाले क्रिमिनोलॉजिस्ट जेम्स डेंसली व जिलियन पीटरसन कहते हैं, अब हमलावर कम उम्र के हैं, इंटरनेट से गहराई से जुड़े हैं और हिंसा को ही जीवन का अर्थ मानने लगे हैं। इसकी वजह एल्गोरिदम है, जो कम उम्र से ही यूजर्स को गहरे अंधेरे कंटेंट की ओर धकेल देता है। एक मजाकिया पोस्ट से शुरू होकर यह रास्ता हिंसा तक पहुंच सकता है… और किशोरों को इस बात का एहसास भी नहीं होता। एक्सपर्ट कहते हैं, ‘पहले मास शूटर्स को आमतौर पर मध्यम आयु के, अकेलेपन और संकट से जूझते पुरुषों के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नए अपराधी अधिकतर युवा हैं, जो ऑनलाइन नेटवर्क से गहराई से जुड़े हैं। वे मानते हैं कि हिंसा ही उनके जीवन का सबसे ‘महत्वपूर्ण’ काम है। ट्रू क्राइम जैसी कम्युनिटी सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद है। यहां कुख्यात हमलावरों को ‘संत’ कहा जाता है, उनके वीडियो और फैन आर्ट बनाए जाते हैं। प्लेटफॉर्म्स भले ही ऐसे कंटेंट को हटाते हों, पर यह जल्दी ही नए रूप में वापस आ जाता है। 2024 से अब तक अमेरिका में कम से कम 7 स्कूल शूटिंग्स इस कम्युनिटी से जुड़ी रही हैं। यह कम्युनिटी निजी दर्द को सार्वजनिक प्रदर्शन में बदल देती है… ‘देखो, दूसरों ने भी यही किया और वे याद किए जाते हैं।’ इस तरह अपराधियों को एक स्क्रिप्ट मिल जाती है, जिसमें उनका हमला कहानी का चरम बन जाता है। शोधकर्ता कहते हैं,‘इसके लिए स्कूलों में बेहतर काउंसलिंग व हथियारों पर नियंत्रण जरूरी है। बड़ी जिम्मेदारी टेक कंपनियों की है। सोशल प्लेटफॉर्म कुछ पलों में ट्रेंडिंग साउंड या इमेज पहचान लेते हैं। उसी तरह वे हिंसा का महिमामंडन करने वाला कंटेंट फ्लैग कर सकते हैं, फुटेज की री-शेयरिंग धीमी कर सकते हैं और हिंसक कंटेंट दोबारा उभरने से रोक सकते हैं। अपराध को महिमामंडित करती हैं ऑनलाइन कम्युनिटी ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कई कम्युनिटीज अपराध को आकर्षक रूप में पेश करती हैं। ‘ब्लड लाइकली’ में लोग खुद को जासूस मानकर अनसुलझे मामलों पर चर्चा करते हैं। ‘अनएक्सप्लेंड मिस्ट्रीज फोरम’ अपराध के साथ पैरानॉर्मल घटनाओं को भी जोड़ता है व रहस्यमयी केसों पर बहस करता है। ‘रेडिट ट्रू क्राइम सबरेडिट’ सबसे सक्रिय जगह है, जहां सीरियल किलर्स व स्कूल शूटिंग्स पर चर्चा होती है व फैन कल्चर भी बनता है। वहीं अनकवर्ड खासतौर पर कोल्ड केस और गुमशुदा पर केंद्रित है, जहां लोग मिलकर पुराने मामले सुलझाते हैं।

अमेरिका में बढ़ रहे मास शूटर:ऑनलाइन कम्युनिटी इन्हें ‘संत’ मान रही; हिंसक कंटेंट दिखाने वाला एल्गोरिदम अपराध की राह पर ले जाता है

अमेरिका में बढ़ रहे मास शूटर:ऑनलाइन कम्युनिटी इन्हें ‘संत’ मान रही; हिंसक कंटेंट दिखाने वाला एल्गोरिदम अपराध की राह पर ले जाता है

अमेरिका में मास शूटर्स की संख्या बढ़ रही है और इसके पीछे एक नया, खतरनाक ट्रेंड उभर रहा है। इंटरनेट पर ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कम्युनिटीज तेजी से फैल रही हैं, जो इन हत्यारों को संत और भगवान की तरह पूज रही हैं। यह सिर्फ अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसी डिजिटल संस्कृति है, जो हिंसा को महिमामंडित कर रही है। एक दशक तक मास शूटिंग पर स्टडी करने वाले क्रिमिनोलॉजिस्ट जेम्स डेंसली व जिलियन पीटरसन कहते हैं, अब हमलावर कम उम्र के हैं, इंटरनेट से गहराई से जुड़े हैं और हिंसा को ही जीवन का अर्थ मानने लगे हैं। इसकी वजह एल्गोरिदम है, जो कम उम्र से ही यूजर्स को गहरे अंधेरे कंटेंट की ओर धकेल देता है। एक मजाकिया पोस्ट से शुरू होकर यह रास्ता हिंसा तक पहुंच सकता है… और किशोरों को इस बात का एहसास भी नहीं होता। एक्सपर्ट कहते हैं, ‘पहले मास शूटर्स को आमतौर पर मध्यम आयु के, अकेलेपन और संकट से जूझते पुरुषों के रूप में देखा जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। नए अपराधी अधिकतर युवा हैं, जो ऑनलाइन नेटवर्क से गहराई से जुड़े हैं। वे मानते हैं कि हिंसा ही उनके जीवन का सबसे ‘महत्वपूर्ण’ काम है। ट्रू क्राइम जैसी कम्युनिटी सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद है। यहां कुख्यात हमलावरों को ‘संत’ कहा जाता है, उनके वीडियो और फैन आर्ट बनाए जाते हैं। प्लेटफॉर्म्स भले ही ऐसे कंटेंट को हटाते हों, पर यह जल्दी ही नए रूप में वापस आ जाता है। 2024 से अब तक अमेरिका में कम से कम 7 स्कूल शूटिंग्स इस कम्युनिटी से जुड़ी रही हैं। यह कम्युनिटी निजी दर्द को सार्वजनिक प्रदर्शन में बदल देती है… ‘देखो, दूसरों ने भी यही किया और वे याद किए जाते हैं।’ इस तरह अपराधियों को एक स्क्रिप्ट मिल जाती है, जिसमें उनका हमला कहानी का चरम बन जाता है। शोधकर्ता कहते हैं,‘इसके लिए स्कूलों में बेहतर काउंसलिंग व हथियारों पर नियंत्रण जरूरी है। बड़ी जिम्मेदारी टेक कंपनियों की है। सोशल प्लेटफॉर्म कुछ पलों में ट्रेंडिंग साउंड या इमेज पहचान लेते हैं। उसी तरह वे हिंसा का महिमामंडन करने वाला कंटेंट फ्लैग कर सकते हैं, फुटेज की री-शेयरिंग धीमी कर सकते हैं और हिंसक कंटेंट दोबारा उभरने से रोक सकते हैं। अपराध को महिमामंडित करती हैं ऑनलाइन कम्युनिटी ‘ट्रू क्राइम’ जैसी कई कम्युनिटीज अपराध को आकर्षक रूप में पेश करती हैं। ‘ब्लड लाइकली’ में लोग खुद को जासूस मानकर अनसुलझे मामलों पर चर्चा करते हैं। ‘अनएक्सप्लेंड मिस्ट्रीज फोरम’ अपराध के साथ पैरानॉर्मल घटनाओं को भी जोड़ता है व रहस्यमयी केसों पर बहस करता है। ‘रेडिट ट्रू क्राइम सबरेडिट’ सबसे सक्रिय जगह है, जहां सीरियल किलर्स व स्कूल शूटिंग्स पर चर्चा होती है व फैन कल्चर भी बनता है। वहीं अनकवर्ड खासतौर पर कोल्ड केस और गुमशुदा पर केंद्रित है, जहां लोग मिलकर पुराने मामले सुलझाते हैं।

IPL में पहली बार सभी 10 टीमों के कप्तान भारतीय:कमिंस बाहर तो ईशान ने कमान संभाली; 6 कैप्टन पहली ट्रॉफी जीतने की दौड़ में

IPL में पहली बार सभी 10 टीमों के कप्तान भारतीय:कमिंस बाहर तो ईशान ने कमान संभाली; 6 कैप्टन पहली ट्रॉफी जीतने की दौड़ में

IPL के 19 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब सभी 10 टीमों के कप्तान भारतीय होंगे। सनराइजर्स हैदराबाद के नियमित कप्तान पैट कमिंस के शुरुआती मैचों से बाहर होने के बाद फ्रेंचाइजी ने उनकी जगह ईशान किशन को कप्तानी सौंपी है। इसके साथ ही टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों में सभी टीमों की कमान भारतीय खिलाड़ियों के हाथ में होगी। पिछले सीजन में भी हैदराबाद के पैट कमिंस को छोड़कर बाकी सभी टीमों के कप्तान भारतीय ही थे। ईशान किशन पहले बार किसी IPL की कप्तानी करेंगे ईशान किशन पहली बार IPL में कप्तानी करते नजर आएंगे। मौजूदा 10 कप्तानों में 6 ऐसे हैं, जो अपनी पहली ट्रॉफी की तलाश में हैं। इनमें ऋतुराज गायकवाड़, रियान पराग, शुभमन गिल, अजिंक्य रहाणे, ईशान किशन और ऋषभ पंत शामिल हैं। वहीं, बाकी 4 कप्तान पहले ही खिताब जीत चुके हैं। श्रेयस अय्यर ने 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स को चैंपियन बनाया था, रजत पाटीदार ने 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को खिताब दिलाया, जबकि हार्दिक पांड्या ने 2022 में गुजरात टाइटंस को ट्रॉफी जिताई थी। श्रेयस अय्यर इकौलते कप्तान जो तीन फ्रेंचाइजियों को फाइनल तक पहुंचाया श्रेयस अय्यर IPL इतिहास के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजियों को फाइनल तक पहुंचाया है। उन्होंने 2020 में दिल्ली कैपिटल्स को फाइनल तक पहुंचाया, जहां टीम को मुंबई इंडियंस से हार मिली थी। इसके बाद 2024 में उन्होंने KKR को चैंपियन बनाया और 2025 में पंजाब किंग्स को फाइनल तक पहुंचाया, जहां टीम RCB से हार गई। धोनी और रोहित सबसे सफल कप्तान IPL इतिहास में सबसे सफल कप्तानों की बात करें तो महेंद्र सिंह धोनी (CSK) और रोहित शर्मा (MI) शीर्ष पर हैं। दोनों ने अपनी-अपनी टीमों को 5-5 बार चैंपियन बनाया है। धोनी के नाम सबसे ज्यादा मैच (229) और जीत (134) दर्ज हैं, जबकि रोहित ने मुंबई इंडियंस को पांच खिताब दिलाए हैं। —————————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… नाथन एलिस हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण IPL 2026 से बाहर: CSK ने रिप्लेसमेंट जारी नहीं किया, फ्रेंचाइजी ने 2 करोड़ रुपए में खरीदा था 5 बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स के तेज गेंदबाज नाथन एलिस हैमस्ट्रिंग इंजरी के कारण IPL 2026 से बाहर हो गए हैं। फ्रेंचाइजी के एक अधिकारी ने बताया कि 31 साल के एलिस IPL से बाहर हो चुके हैं, हालांकि उनके रिप्लेसमेंट को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। पूरी खबर