जंग के चलते क्रूड दोगुना, 146 डॉलर पहुंचा:पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है; ईरानी हमले से कतर गैस प्लांट बंद, यूरोप में कीमत 30% बढ़ी

ईरान की ओर से खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर नए हमलों के बाद आज 19 मार्च को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों में 30% तक की तेजी है। जंग शरू होने के बाद से भारत में क्रूड की कीमतें लगभग दोगुनी होकर 146 डॉलर पर पहुंच गई है। गैस और क्रूड की कीमतें बढ़ने से भारत में गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। 1. भारत में क्रूड की कीमतें 146 डॉलर के करीब पहुंची जंग से पहले 27 फरवरी को ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर के नीचे था। अब इसकी कीमत उछलकर 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। वहीं इंडियन बास्केट की कीमतें 71 डॉलर से बढ़कर 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत पर होने वाले असर को 2 पॉइंट में समझें… भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल और 50% से ज्यादा गैस आयात करता है, इसलिए वहां की हर हलचल हमारी जेब और इकोनॉमी पर असर डालती है। 1. पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम बढ़ सकते हैं भारतीय बास्केट की कीमत 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। अगर कच्चा तेल इसी स्तर पर बना रहा, तो सरकारी तेल कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों पर पेट्रोल-डीजल बेचना मुश्किल होगा। आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 10 से 15 रुपए तक की बढ़ोतरी की आशंका बन सकती है। साथ ही, गैस की किल्लत से LPG सिलेंडर के दाम भी बढ़ सकते हैं। हाल ही में ऑयल रिफाइनिंग कंपनियों ने घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए का इजाफा किया था। 2. खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती है कच्चा तेल सिर्फ गाड़ियों के ईंधन के काम नहीं आता, बल्कि पेंट, प्लास्टिक, फर्टिलाइजर और दवाइयों के कच्चे माल में भी इस्तेमाल होता है। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे फल, सब्जी और अनाज के दाम बढ़ेंगे। कुल मिलाकर आम आदमी का बजट बिगड़ जाएगा। तीन बड़े बेंचमार्क के आधार पर पहचाना जाता है कच्चा तेल दुनिया भर में कच्चा तेल मुख्य रूप से तीन बड़े बेंचमार्क के आधार पर पहचाना और बेचा जाता है, जिन्हें ब्रेंट, WTI और OPEC बास्केट कहते हैं। ब्रेंट क्रूड उत्तरी सागर (यूरोप) के समुद्री कुओं से निकलता है और दुनिया का दो-तिहाई तेल कारोबार इसी के भाव पर टिका है। वहीं WTI अमेरिका के जमीनी इलाकों से निकलता है और अपनी शुद्धता के कारण अमेरिकी बाजार का मुख्य मानक है। OPEC बास्केट सऊदी अरब, ईरान और इराक जैसे खाड़ी देशों के संगठन (OPEC) द्वारा उत्पादित अलग-अलग कच्चे तेलों का एक औसत मिश्रण है। इंडियन बास्केट क्या है? भारत किसी एक देश या एक ही तरह का तेल नहीं खरीदता, बल्कि कई देशों जैसे इराक, सऊदी अरब, रूस, UAE से अलग-अलग वैरायटी का तेल खरीदता हैं। इन सभी अलग-अलग तरह के तेलों की कीमतों का जो औसत निकाला जाता है, उसे ही ‘इंडियन बास्केट’ कहते हैं। 2. यूरोप में गैस की कीमतें 30% से ज्यादा उछली ईरान के कतर पर किए गए इस हमले का सबसे ज्यादा असर यूरोप में गैस के दामों पर पड़ा है। यहां मुख्य गैस कॉन्ट्रैक्ट डच TTF बेंचमार्क एक समय करीब 30% तक उछलकर 70 यूरो पर पहुंच गया था। हालांकि अभी यह 16% की तेजी के साथ 63 यूरो के करीब ट्रेड कर रहा है। ब्रिटेन में गैस की कीमतें 140% तक बढ़ीं ब्रिटेन में थोक गैस की कीमतें बढ़कर 171.34 पेंस प्रति थर्म ($2.29) पर पहुंच गई हैं। जनवरी 2023 के बाद से कीमतें इस स्तर तक पहले कभी नहीं पहुंची थीं। जंग शुरू होने के बाद ये करीब 140% बढ़ी है। युद्ध से पहले इसकी कीमत 71.13 पेंस प्रति थर्म ($1.33) थी। क्रूड और गैस के दाम बढ़ने की 2 वजहें 1. कतर का रास लफ्फान प्लांट बंद ईरान के ड्रोन हमलों में कतर के रास लफ्फान को काफी नुकसान पहुंचा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा LNG हब है और ग्लोबल सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा (20%) यहीं से आता है। हमले के बाद इस प्लांट को फिलहाल बंद कर दिया गया है। इससे सप्लाई रुक गई है। 2. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।
पुलिस व्यवस्था से मतदान तक: भाजपा उम्मीदवार के रूप में डॉ. राजेश कुमार की एंट्री बंगाल चुनाव के लिए गेम-चेंजर क्यों है | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 19, 2026, 17:33 IST एक उच्च पदस्थ महानिदेशक (डीजी) से एक राजनीतिक हस्ती में डॉ. कुमार के परिवर्तन पर बारीकी से नजर रखी जा रही है हाल के महीनों में, डॉ. कुमार संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के खिलाफ अपनी सैद्धांतिक कानूनी चुनौती के कारण लोगों की नजरों में बने हुए हैं। फ़ाइल छवि 1990 बैच के पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी डॉ. राजेश कुमार का सक्रिय चुनावी राजनीति में प्रवेश पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। जनवरी 2026 में जन शिक्षा और पुस्तकालय सेवा विभाग के प्रमुख सचिव के रूप में उनकी सेवानिवृत्ति के बाद, डॉ कुमार को आधिकारिक तौर पर गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया था। प्रशासनिक कठोरता के लिए उनकी प्रतिष्ठा और पेशेवर प्रशंसा और हाई-प्रोफाइल कानूनी दावे दोनों द्वारा परिभाषित करियर को देखते हुए, एक उच्च पदस्थ महानिदेशक (डीजी) से एक राजनीतिक व्यक्ति के रूप में उनके परिवर्तन पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। डॉ. कुमार का पेशेवर प्रक्षेप पथ एक असाधारण शैक्षणिक पोर्टफोलियो पर आधारित है जो उन्हें उनके कई समकालीनों से अलग करता है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया दोनों के एक साथी सदस्य, उनके पास वित्त और मानव संसाधन में एमबीए की डिग्री के साथ-साथ वित्त में पीएचडी है। राजकोषीय विशेषज्ञता और कानून प्रवर्तन अनुभव के इस दुर्लभ संयोजन ने उन्हें पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पारंपरिक पुलिसिंग से लेकर पर्यावरण नीति कार्यान्वयन तक जटिल शासन भूमिकाओं को नेविगेट करने की अनुमति दी। आईपीएस में उनके कार्यकाल को कई प्रतिष्ठित नेतृत्व भूमिकाओं द्वारा चिह्नित किया गया था, जिसमें सबसे उल्लेखनीय रूप से कोलकाता के 41वें पुलिस आयुक्त के रूप में कार्य करना शामिल था। अप्रैल 2019 में भारत के चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त, शहर के पुलिस बल के शीर्ष पर उनके संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल के बाद आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) के प्रमुख और यातायात और सड़क सुरक्षा के डीजीपी के रूप में प्रमुख कार्य किए गए। सार्वजनिक सेवा में उनके योगदान को सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति के पुलिस पदक और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए मुख्यमंत्री पदक के माध्यम से औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है, जो समुदाय-उन्मुख पुलिसिंग और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन के लिए समर्पित करियर को दर्शाता है। हाल के महीनों में, डॉ. कुमार संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के खिलाफ अपनी सैद्धांतिक कानूनी चुनौती के कारण लोगों की नजरों में बने हुए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में डीजीपी पद के लिए नियुक्ति प्रक्रिया का विरोध करने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि पात्रता पैनल से उनका बहिष्कार भेदभावपूर्ण और अनुचित था। यह कानूनी दृढ़ता, पूर्व डीजी राजीव कुमार के साथ उनके करीबी पेशेवर संबंधों के साथ मिलकर – जो उसी दिन सेवानिवृत्त हुए और वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस के लिए संसद सदस्य के रूप में कार्यरत हैं – उनकी उम्मीदवारी में अनुभवी राजनीतिक साज़िश की एक परत जोड़ती है। अपनी वर्दी को राजनीतिक पद पर बदलते हुए, डॉ. राजेश कुमार भाजपा में पारदर्शी, विकासोन्मुख नेतृत्व का दृष्टिकोण लेकर आए हैं। मानव तस्करी से निपटने और समाज के कमजोर वर्गों की रक्षा करने पर उनका ध्यान, जिसने उनकी सेवा के बाद के वर्षों को परिभाषित किया, उनके राजनीतिक मंच की आधारशिला बनने की उम्मीद है। ऐसे राज्य में जहां प्रशासनिक अनुभव को मतपेटी में अत्यधिक महत्व दिया जाता है, उनके प्रवेश को बौद्धिक गहराई और सिद्ध शासन का चेहरा पेश करने के लिए भाजपा द्वारा एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जाता है। पहले प्रकाशित: मार्च 19, 2026, 17:26 IST समाचार राजनीति पुलिस व्यवस्था से मतदान तक: भाजपा उम्मीदवार के रूप में डॉ. राजेश कुमार की एंट्री बंगाल चुनाव के लिए गेम-चेंजर क्यों है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पुलिस(टी)बंगाल
टैगोर पार्क में कंटूर खोदकर मंत्री-अफसरों ने श्रमदान किया:खंडवा में मंत्री विजय शाह ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का शुभारंभ किया

खंडवा जिले में गुरुवार को तीसरे ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का भव्य शुभारंभ हुआ। जिला स्तरीय कार्यक्रम शहर के टैगोर पार्क में आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने जल संरक्षण का संदेश देते हुए जल ग्रहण संरचना निर्माण के लिए श्रमदान किया। कार्यक्रम में महापौर अमृता अमर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी सुदेश वानखेडे, कलेक्टर ऋषव गुप्ता, जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा और नगर निगम आयुक्त प्रियंका राजावत सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। साढ़े तीन महीने चलेगा अभियान मंत्री डॉ. विजय शाह ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत प्रदेश के सभी जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में जल स्रोतों और नदियों के किनारे की जा रही है। यह अभियान करीब साढ़े तीन महीने तक चलेगा और इसका समापन 30 जून को होगा। 18 विभाग मिलकर करेंगे काम कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने जानकारी दी कि इस अभियान में सरकार के कुल 18 विभाग शामिल रहेंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग और नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग को सह-नोडल विभाग बनाया गया है। अभियान के तहत जल संरक्षण, संवर्धन और संरचनाओं के निर्माण पर विशेष जोर रहेगा। विक्रमोत्सव में ‘सम्राट विक्रमादित्य’ नाट्य मंचन गुड़ी पड़वा के अवसर पर विक्रमोत्सव-2026 के तहत स्थानीय किशोर कुमार सभागृह में ‘सूर्य उपासना’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मंत्री डॉ. विजय शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत ब्रह्म ध्वज वंदन से हुई। इसके बाद ‘नट निमाड़’ कला समूह ने श्री विजय सोनी के निर्देशन में ‘सम्राट विक्रमादित्य’ नाट्य का मंचन किया, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा।
टटीरी सॉन्ग विवाद में बादशाह को हाईकोर्ट से राहत:गिरफ्तारी पर रोक लगाई, हरियाणा महिला आयोग बोला- पेश हो जाता तो, ये नौबत न आती

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ‘टटीरी सॉन्ग’ विवाद में फंसे सिंगर बादशाह की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हालांकि कोर्ट ने शर्त रखी कि बादशाह को खुद जांच में सहयोग करना होगा। HSCW (हरियाणा राज्य महिला आयोग) ने 13 मार्च को पानीपत में बादशाह की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे, जिसके बाद गुरुवार को सिंगर को हाईकोर्ट से राहत मिली। दैनिक भास्कर एप से बात करते हुए आयोग की अध्यक्ष रेणू भाटिया ने कहा… हम भी यहीं चाहते थे कि बादशाह जांच में शामिल हो। नोटिस के बाद सिंगर मीटिंग में आते तो ये नौबत नहीं आती। बादशाह का टटीरी सॉन्ग 1 मार्च को रिलीज हुआ था। सॉन्ग के रिलीज होने के साथ ही इसमें बादशाह के लिरिक्स और लड़कियों के सीन को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद पंचकूला पुलिस ने सॉन्ग को यूट्यूब से हटवा दिया। जींद में 2 व पंचकूला में एक एफआईआर दर्ज हुई। अब जानिए सॉन्ग को लेकर विवाद क्यों… आयोग के सामने पेश न होने पर गिरफ्तारी के आदेश 13 मार्च हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष ने सिंगर को पानीपत में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। उनके वकीलों ने दलील दी कि बादशाह सिक्योरिटी रीजन और प्रोफेशनल कमिटमेंट की वजह से पेश नहीं हो सके। इसके बाद चेयरपर्सन रेणू भाटिया ने पंचकूला और पानीपत SP को बादशाह की गिरफ्तारी और पासपोर्ट जब्ती के निर्देश दिए थे। 2 पॉइंट में सॉन्ग के बारे में जानिए… सिमरन ने तीन साल पहले गाया: टटीरी सॉन्ग में फीमेल वोकल देने वाली 20 वर्षीय सिमरन जागलान कैथल जिले के पट्टी अफगान गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता कर्मबीर फौजी भी हरियाणवी सिंगर हैं। सिमरन ने करीब तीन साल पहले टटीरी सॉन्ग गाया था। बादशाह को उनकी ट्रेडिशनल स्टाइल में गाई हुई आवाज पसंद आई तो दोबारा रिकॉर्डिंग कर मंगाया। इसी के बाद बादशाह ने टटारी को नए ढंग से पेश किया, जिसमें फीमेल वोकल रिमरन ने दी। जींद में हुई थी गाने की शूटिंग: इस गाने की शूटिंग जींद के सच्चा खेड़ा, नरवाना और दुबई में हुई थी। 26 फरवरी को बादशाह इस गाने के प्रमोशन के लिए हरियाणा के कैथल और सोनीपत पहुंचे थे। वहीं, प्रोडक्शन टीम ने 14 मार्च को सिमरन और बादशाह का मुंबई में एक शो भी शेड्यूल किया था। सॉन्ग के यूट्यूब से हटाए जाने के बाद मुंबई शो भी कैंसिल कर दिया गया। ————— यह खबर भी पढ़ें… हरियाणा में बादशाह की गिरफ्तारी के आदेश: महिला आयोग अध्यक्ष बोलीं- पंचकूला-पानीपत SP पासपोर्ट जब्त करें; टटीरी सॉन्ग विवाद में पेश नहीं हुए सिंगर टटीरी सॉन्ग विवाद को लेकर हरियाणा महिला आयोग ने बॉलीवुड सिंगर-रैपर बादशाह को गिरफ्तार करने का आदेश दिए। बादशाह शुक्रवार को समन पर पानीपत में पेश नहीं हुए। उनके वकीलों ने दलील दी कि किसी प्रोफेशनल कमिटमेंट में व्यस्त होने की वजह से बादशाह नहीं आ सके। (पूरी खबर पढ़ें)
बीजेपी के टिकट पर लड़ेंगी चुनाव, बोलीं- ममता में बनर्जी के शासन को…

पश्चिम बंगाल में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रेशन और डेमोक्रेट केस की मां ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के टिकट पर चुनावी लड़ाई की इच्छा जताई है। गुरुवार (19 मार्च, 2026) को उन्होंने कहा कि वह बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में नग्न रहना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी लड़ाई के पीछे उनका मकसद टीएमसी कांग्रेस (टीएमसी) सरकार को हटाने के लिए राजनीतिक रास्ता अपनाना है। अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के दर्शन हॉल में एक ट्रेनी डॉक्टर की हत्या कर दी गई और फिर उसकी हत्या कर दी गई। डॉक्टर की उम्र उस वक्त 31 साल थी. यह घटना पूरे देश में पैदा हुई थी। घटना के विरोध में राज्यभर में कम्युनिस्टों और नागरिक समाज ने लंबे समय तक प्रदर्शन किया था। पीड़ित डॉक्टर की मां ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें उत्तर 24 परगना के पनिहाटी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने की संभावना है, और बीजेपी की ओर से जल्द ही अंतिम सूची जारी की जाएगी, जिसमें उनका नाम शामिल होने की संभावना है। कास्ट की मां ने कहा था कि उन्हें पहले बीजेपी का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उस समय वह मानसिक रूप से तैयार नहीं हुईं। उन्होंने कहा, ‘मुझे बहुत पहले बीजेपी से (चुनाव लड़ाई का) प्रस्ताव मिला था, लेकिन तब मैं मानसिक रूप से तैयार नहीं था. कल मैंने इसे स्वीकार करना और चुनावी लड़ाई का निर्णय लिया क्योंकि मैं गृह मंत्री का शासन समाप्त करना चाहता हूं।’ उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि यह बात उनके गृह विभाग के पास भी है. व्यापारी की मां ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने उनकी बेटी के मामले की जांच और न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी बेटी के लिए न्याय सुनिश्चित करने और इस सरकार को सत्ता से हटाने के लिए राजनीति में प्रवेश कर रही हूं।’ बीजेपी नेता अर्जुन सिंह ने हाल ही में पीड़ित डॉक्टर के माता-पिता से मुलाकात की थी। यह भी पढ़ें:-बंगाल की रेटिंग में ‘सोशल मीडिया वॉर’: बीजेपी-टीएमसी के आरोप-प्रत्यारोप ने भूकंप के झटके, वोट से पहले गरमाया मोरचा (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)ममता बनर्जी(टी)बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)टीएमसी(टी)आरजी कर बलात्कार और हत्या मामला(टी)आरजी कर पीड़िता मां(टी)बंगाल विधानसभा चुनाव 2026
सरकार बोली- सिलेंडर की पैनिक बुकिंग में कमी:ऑनलाइन बुकिंग बढ़कर 94% तक पहुंची; अमेरिका से LPG की सप्लाई हो रही, कीमतों में बढ़ोतरी नहीं

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि LPG चिंता का विषय बनी हुई है लेकिन देश में किसी भी LPG डिस्ट्रीब्यूटर के पास सिलेंडरों की कमी नहीं है। सिलेंडरों की सप्लाई सामान्य है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, अब करीब 94% सिलेंडर बुकिंग ऑनलाइन हो रही है, जबकि डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड सिस्टम 76% तक प्रभावी हो गया है। पैनिक बुकिंग में भी कमी आ रही है। 18 मार्च को करीब 57,000 रीफिल बुकिंग हुई। वेस्ट एशिया के हालिया घटनाक्रमों पर पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने आगे बताया कि भारत में करीब 70% कच्चा तेल अब होर्मुज स्ट्रेट के बाहर के क्षेत्रों से आ रहा है। युद्ध के कारण दबाव जरूर है, लेकिन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से ये बातें केंद्रीय मंत्रालयों की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे वैश्विक समुदाय के लिए परीक्षा की घड़ी है। सरकार ने कहा- दूसरे जगहों से LPG लेने की कोशिश कर रहे पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने कॉमर्शियल LPG उपभोक्ताओं से CNG पर शिफ्ट करने की अपील की है और कई कंपनियों ने इसके लिए इंसेंटिव भी घोषित किए हैं। सुजाता शर्मा ने कहा कि मिडिल ईस्ट में हालात का सीधा असर भारत की एनर्जी सप्लाई पर पड़ता है, इसलिए सरकार अन्य जगहों से भी सप्लाई लेने की कोशिश कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत ईरान समेत कई देशों से लगातार बातचीत कर रहा है, ताकि ऊर्जा सप्लाई बिना रुकावट बनी रहे। जंग के दौरान करीब 2.8 लाख लोग वेस्ट एशिया से भारत लौटे विदेश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी (गल्फ) असीम महाजन ने बताया कि 28 फरवरी के बाद से करीब 2.8 लाख लोग वेस्ट एशिया से भारत लौट चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुछ देशों में ऑपरेशनल दिक्कतों के बावजूद फ्लाइट ऑपरेशन धीरे-धीरे बेहतर हो रहे हैं। महाजन के मुताबिक, 18 मार्च को भारत और UAE के बीच करीब 75 उड़ानें संचालित हुईं, जबकि अगले दिन यह संख्या बढ़कर करीब 90 उड़ानों तक पहुंचने की उम्मीद है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव सी. सेंथिल राजन ने LNG सेवाओं से जुड़े सोशल मीडिया फ्रॉड को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा- LNG उपभोक्ता सोशल मीडिया पर फैल रहे फर्जी संदेशों से सावधान रहें। ऐसे मैसेज पर भरोसा न करें और जरूरत पड़ने पर पुलिस में शिकायत करें। मिडिल-ईस्ट तनाव के कारण देश में LPG संकट अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है। इसी बीच खबरें आई थीं कि अगर ग्राहकों ने e-KYC नहीं कराया, तो उनका गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। e-kyc से जुड़ी आई इन खबरों के बाद अफरा-तफरी जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्टिकरण दिया था कि यह कोई नया नियम नहीं है। eKYC की जरूरत सिर्फ उन्हीं ग्राहकों को है, जिनका वेरिफिकेशन अब तक नहीं हुआ है। मंत्रालय ने कहा था कि इसका मकसद सिर्फ इतना है कि ज्यादा से ज्यादा गैस ग्राहक अपना बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करवा लें, ताकि सिस्टम में फर्जीवाड़ा न हो। LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम तीन बार बदले 6 मार्च: घरेलू LPG बुकिंग के लिए लॉक-इन पीरियड 21 दिन किया गया। 9 मार्च: डिमांड बढ़ने से शहरों में लॉक-इन पीरियड बढ़ाकर 25 दिन किया। 12 मार्च: ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर बुक करने का गैप 45 दिन किया गया। सप्लाई संकट की वजह होर्मुज स्ट्रेट का लगभग बंद होना अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर संयुक्त हमला किया, जिसमें कई सैन्य और परमाणु ठिकाने निशाना बने। इस ऑपरेशन में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई अधिकारी मारे गए। अमेरिका ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया। इस युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और आपूर्ति बाधित हुई। यहां से भारत का 80-85% LPG आयात होता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और 60% से ज्यादा LPG बाहर से आती है। इसी के कारण भारत में LPG किल्लत जैसे हालत बने लेकिन भारत सरकार ने लगातार लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की। सरकार ने कहा कि देश में LPG और तेल की कोई कमी नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहे। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। —————————————– ये खबर भी पढ़ें… मार्च के पहले हफ्ते में LPG की खपत 17% घटी, पेट्रोल 13%-डीजल 8% ज्यादा बिका देश भर में मार्च के पहले हफ्ते में लिक्विफाइट पेट्रोलियम गैस(LPG) की खपत 17% घटी है। ये असर वेस्ट एशिया में बने जंग के हालातों की वजह से हुआ है। 90% मार्केट शेयर वाली 3 सरकारी कंपनियों के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में LPG की खपत कम हुई है। पूरी खबर पढ़ें…
इस राज्य में बदलेगी सरकार? टैगरी एन्हांसमेंट को टैग किया गया, एसोसिएट्स वाला सर्वे, सीएम की फ़्लू नींद

देश में आगामी राज्यों में चुनाव की तारीखों की घोषणा हो गई है। मित्र राज्यों में केरल भी शामिल है। ऐसे में विधानसभा चुनाव को लेकर प्री-पोल सर्वे सामने आया है। इस सर्वे में कांग्रेस नेतृत्व वाले संगठन यूनीडेट डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की बढ़त पर नजर आ रही है। वहीं, इंकमबेंसी विरोधी गठबंधन एलडीएफ (एलडीएफ) की ओर से राज्य में बदलाव का बड़ा संकेत सामने आया है। पोल मंत्रा की तरफ से प्री-पोल सर्वे किया गया पोल मंत्रा की तरफ से यह प्री-पोल सर्वे किया गया है। सर्वे में 26 हजार लोगों को शामिल किया गया है. उनके अनुसार, जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें 38.2% वोट शेयर पर यूयू पर 38.2% वोट देखने को मिल रहे हैं, जबकि एल एफसी को 33.7% और बीजेपी के नेतृत्व वाली पार्टी को 20.4% वोट देखने को मिल रहे हैं। मित्रता में 8% लोग ऐसे हैं, किचॉच ने किसी प्रकार का निर्णय नहीं लिया है। प्री-पोल में किस नेता को कितना समर्थन? यूएफ़एफ़ के जिन नेताओं को जनता का समर्थन मिल रहा है, उनके वीडियो शेयरिंग को 29.5%, केसी वेणुगोपाल को 28.2% और शशि थरूर को 23.4% प्रतिशत समर्थन मिला है। इसके अलावा एल फ़्लेक्स के नेताओं में सीएम पिनराई विजयन को 38.2%, शैलिता को 32.5% का समर्थन मिल रहा है। केसी वेणुगोपाल को सीएम पद के लिए सबसे अच्छे नेता बताया जा रहा है। उन्हें 46.8% लोगों ने सीएम की पसंद बताया। वहीं, विजयन पिनराई को सिर्फ 27.9% लोगों ने पसंद किया है। लोगों की राय पर एल डिफॉल्ट के फायदे? इधर, सर्वे में एल फाइनैंशियल के पद को लेकर भी लोगों की राय सामने आई है। इसमें 31% लोग बहुत बुरे और 20.9% लोग बुरे बताए गए। साथ ही 23.8% लोगों ने बहुत अच्छा बताया और 10.7 लोगों ने केवल अच्छा सिखाया। लोकसभा चुनाव में वोटर्स के नाम पर 38.9%, एल.एफ.एफ. को 27.8% और बीजेपी को 23.1% समर्थन मिला है। वहीं, यहां की बात करें तो राजीव चंद्रशेखर को 52.1% समर्थन मिला। के सुरन्द्रन को 22.4% समर्थन मिला। यह प्रीपोल केरल के अलग-अलग तरह का आभूषण बनाया गया है। इसमें आयु, लिंग और समुदाय का निर्माण किया गया है।
‘मुख्यमंत्री पद का दावेदार…’, केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सीएम पद के दावेदार शशि थरूर क्या बोले?

केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के न्यूनतम नेता शशि थरूर ने कहा था कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए आवेदन नहीं करते हैं, क्योंकि वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनका मानना है कि आदर्श रूप से मुख्यमंत्री का चुनाव शेयरों में होना चाहिए। गुरुवार (19 मार्च, 2026) को शशि थरूर ने टीपी-भाषा को दिए गए विशेष साक्षात्कार में कहा कि वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, इसलिए उन्हें किसी एक खास क्षेत्र की चिंता करने की जरूरत नहीं है, और राज्य चुनाव में उनकी भूमिका मिल-जुली है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव प्रचार के लिए राज्य के कोने-कोने में जाने का बास से इंतजार कर रहे हैं। शशि थरूर ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की उस विचारधारा का भी ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय गठबंधन के नेताओं से ‘एक लय-ताल के साथ काम करने’ की बात कही थी। शशि थरूर ने कहा कि यह एक अच्छा संदेश था, और अब हर कोई एक गीत-ताल के साथ काम कर रहा है। शशि थरूर ने यह भी कहा कि वैसे तो उन्हें केरल में कांग्रेस को बहुमत मिलने पर खुशी होगी, लेकिन 140 संसदीय क्षेत्र में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक मोर्चा (यूडीएफ) के लिए 85 से 100 नामांकन के बीच का आंकड़ा काफी अच्छा रहेगा। क्रिकेट की दवाओं का इस्तेमाल करते हुए शशि थरूर ने कहा कि यूएफसी, विशेष रूप से आसामी के नेतृत्व वाले वाम डेमोक्रेटिक मोर्चा (एलडीएफ) के खिलाफ गुगली गेंदें फेंकी जा रही हैं, क्योंकि वे मुश्किल पिच पर हैं, और हम उन्हें कैच कर सकते हैं। शशि थरूर ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे राष्ट्रपति-शैली के चुनाव अधिक होते जा रहे हैं, वह व्यक्तिगत रूप से पद से पहले मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत चेहरे को सामने रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केरल में कांग्रेस के पास यह क्षमता है कि वह किसी एक व्यक्ति या नाम के बजाय एक आयाम, एक मिशन और पार्टी के चुनाव के आधार पर भी अच्छे चुनाव परिणाम दे सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनावी प्रचार में कोई चेहरा नहीं है, एल कम्युनिस्ट कांग्रेस की आम जनता पर प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि मैसाचुसेट्स एलायंस के पास के समाजवादी मुख्यमंत्री पिनराईन की जीत में एक चेहरा है, इस पर शशि थरूर ने कहा, ‘निजी तौर पर, मैं आपकी बात से सहमत हूं; मेरा मतलब यह है कि हम अपना पद छोड़ सकते हैं, लेकिन जैसा कि पार्टी नेतृत्व ने मुझे बताया, कांग्रेस ने पहले कभी ऐसा नहीं किया।’ शशि थरूर ने कहा, ‘क्योंकि यह सिद्धांत है कि चुनाव पार्टी के लिए होता है, और एक बार जब पार्टी जीतती है, तो वह अपना नेता चुनती है। ‘असल में इसका मतलब यह है कि चुनाव के बाद नेता का चुनाव होना, चुनाव के बाद नेता का चुनाव होना।’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस की राज्य में बहुत गहरी पैठ है. पूरे केरल में उनकी बात बहुत ही पसंदीदा तरीके से सुनी जाती है. हर खंड, हर गांव और हर वार्ड में मौजूद है। इसी वजह से कांग्रेस के पास यह क्षमता है कि वह किसी एक व्यक्ति के चेहरे या नाम के बजाय, एक आदर्श, एक मिशन और पार्टी के चुनाव-श्रेणी के आधार पर भी अच्छे नतीजे दे सकती है।’ शशि थरूर ने कहा कि जरूरी नहीं कि हर जगह यही सिद्धांत बदला जाए। उन्होंने कहा कि अब जिस तरह असम में साफा पर गौरव गोगोई पार्टी के चेहरे हैं, वहीं दूसरे राज्यों में भी इसी तरह के नेता हैं. उन्होंने कहा, ‘लेकिन केरल में हम इसी तरह (बिना चेहरे घोषित किए) लड़ने जा रहे हैं और केरल में हमारी जगहों की वजह से मुझे लगता है कि यह एक ऐसा राज्य है जहां हम कलाकारी: इसी तरह जीतेंगे।’ जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए क्या पात्र हैं, तो शशि थरूर ने कहा, ‘नहीं, मैं नहीं हूं।’ इसके कई अच्छे कारण हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि मैं खुद चुनाव लड़ने की बात नहीं कर रहा हूं। मेरा मानना है कि आदर्श रूप से मुख्यमंत्री का चुनाव शेयरों में होना चाहिए।’ उन्होंने अप्रैल में वोटिंग प्रोग्राम के संदर्भ में कहा, ‘यह काफी स्टार्स वाली बात है कि वोटिंग 9 आ रही है, खासकर तब जब इसकी घोषणा खुद 15 मार्च को करने में काफी देर हो गई थी।’ मूल रूप से, इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग ने हमें लगभग तीन सप्ताह के लिए प्रोत्साहन दिया है। ज्यादातर यूनिवर्सल ने तो अभी तक अपने सभी साझा के नाम भी घोषित नहीं किये हैं. नॉमिनेशन सोमवार तक जमा हैं और अचानक, ये दावेदार 9 अप्रैल को रिजॉल्यूशन का सामना करने वाले हैं।’ शशि थरूर ने आरोप लगाया कि देखने में ऐसा लगता है कि यह सब जान-जेकर केरल में अलास्का, असम में बीजेपी और पुदुचेरी में स्थानीय पार्टी की एकजुटता को बढ़ावा देने के लिए गया है; ये हैं वो तीन राज्य जहां 9 अप्रैल को मतदान होना है. केरल विधानसभा चुनाव में यू.एफ.एफ.एफ.ई.सी. की जीत पर विश्वास व्यक्त करते हुए शशि थरूर ने कहा कि एल.एफ.एफ.ई.सी. सरकार के खिलाफ 10 साल की सत्य-विरोधी लहर है। उन्होंने कहा, ‘उसकी कट्टरपंथी नाकामियां, आर्थिक संकट, समर्थकों के आधार और हर तरह के नुकसान हैं, सिद्धांतों के आधार पर समाजवादी सरकार से विमुख हो गए हैं।’ यह पूछे जाने पर कि एक हफ्ते पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उनके सभी मुद्दे उठाए जाने के बाद शशि थरूर ने कहा, ‘मेरे मुद्दे मूल रूप से राज्य के लिए कोई मतलब नहीं है। मैं राज्य चुनाव में उम्मीदवार नहीं हूं. यह ज्यादातर एक टीम के तौर पर सामूहिक काम करने का सवाल था और मैं इस टीम का पूरी तरह से हिस्सा हूं। असल में, मैं प्रचार समिति का सह-अध्यक्ष हूं।’ चुनाव में अपनी भूमिका के बारे में शशि थरूर ने कहा, ‘मैं संसद सत्र में हिस्सा लेने के लिए भी प्रचार समिति में अन्य दलों के साथ नियमित ऑफ़लाइन बैठकों में शामिल हो रहा हूं।’ मैं संसद सत्र के पिछले कुछ सप्ताह को खत्म करने जा रहा हूं।’ उन्होंने कहा कि वह नाइजीरिया और राज्य के सभी 14 पर्यटकों के बीच अपनी यात्रा की संभावना जता रहे हैं।
ऑफिस में 9 घंटे तक कुर्सी से चिपके रहते हैं? इन 5 बीमारियों का बढ़ रहा खतरा, वक्त रहते हो जाएं अलर्ट

Last Updated:March 19, 2026, 15:34 IST Health Risks of Long Sitting: एक ही जगह कई घंटों तक बैठकर काम करना सेहत के लिए खतरनाक है. इससे डायबिटीज, हार्ट डिजीज समेत कई गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो हर आधे घंटे में उठकर कुछ देर टहलने से इन बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. लंबे समय तक एक जगह बैठे रहने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. Risks of Sitting Too Much: आजकल देश में कॉरपोरेट कल्चर तेजी से बढ़ रहा है. अधिकतर लोग इस कल्चर को फॉलो करने में कंफर्टेबल महसूस कर रहे हैं, लेकिन लगातार 8-9 घंटे तक ऑफिस में एक जगह बैठे रहना सेहत के लिए ठीक नहीं होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स लंबे समय तक बैठने को न्यू स्मोकिंग तक कह रहे हैं. जब आप लगातार 9 घंटे या उससे अधिक समय तक कुर्सी से चिपके रहते हैं, तो शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रियाएं धीमी पड़ जाती हैं और मांसपेशियों की सक्रियता न्यूनतम स्तर पर आ जाती है. हमारा शरीर गति करने के लिए बना है, स्थिरता के लिए नहीं. अगर आप भी अपने ऑफिस के काम के दौरान घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं, तो आप अनजाने में कई गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहे हैं. मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक जब आप घंटों एक कुर्सी पर बैठे रहते हैं, तो शरीर में ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है और मांसपेशियां कम फैट बर्न करती हैं. इससे फैटी एसिड्स हार्ट की धमनियों में जमा होने लगते हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाता है. एक रिसर्च के अनुसार जो लोग दिन में 8 घंटे से अधिक बैठते हैं, उनमें हार्ट से जुड़ी बीमारियों से मौत का खतरा अन्य लोगों के मुकाबले दोगुना होता है. लगातार बैठने का सीधा असर शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया पर पड़ता है. केवल एक दिन लंबे समय तक बैठने से ही शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता कम होने लगती है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है. इससे लॉन्ग टर्म में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कुर्सी पर टिके रहने से शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है, जिससे कैलोरी बर्न करने की क्षमता कम हो जाती है. विशेष रूप से पेट के आसपास की चर्बी तेजी से बढ़ने लगती है. यह मोटापा केवल बाहरी दिखावट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर के आंतरिक अंगों के कामकाज को भी प्रभावित करता है, जिससे मेटाबॉलिक सिंड्रोम की स्थिति पैदा हो जाती है. इसके अलावा गलत पोस्चर में घंटों बैठने से रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है. इससे डिस्क कंप्रेशन और पीठ के निचले हिस्से में दर्द की समस्या शुरू हो जाती है. इसके साथ ही कंप्यूटर स्क्रीन की ओर झुककर देखने से टेक नेक की समस्या होती है, जो गर्दन और कंधों की नसों को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती है. लंबे समय तक बैठने का संबंध केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य से भी है. गतिहीन जीवनशैली के कारण शरीर में एंडोर्फिन और सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन्स का उत्पादन कम हो जाता है. धूप और ताजी हवा की कमी के साथ-साथ एक ही जगह जमे रहने से डिप्रेशन और एंजायटी का खतरा बढ़ जाता है, जिससे कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है. इन खतरों से बचने के लिए आपको अपनी नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि माइक्रो-ब्रेक्स लेने की आदत डालनी होगी. हर 30 मिनट में 2 मिनट के लिए खड़े हों या स्ट्रेचिंग करें. ऑफिस में फोन पर बात करते समय टहलने की आदत डालें और लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. याद रखें जिम में एक घंटा बिताने से 9 घंटे बैठने का नुकसान पूरी तरह खत्म नहीं होता. इसके लिए शरीर को पूरे दिन छोटी-छोटी गतिविधियों की आवश्यकता होती है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 19, 2026, 15:34 IST
दिव्यांका त्रिपाठी ने प्रेग्नेंसी कन्फर्म की:बेबी बंप फ्लॉन्ट कर शेयर की खबर; शादी के करीब 10 साल बाद एक्ट्रेस मां बनेंगी

एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी ने गुरुवार को अपनी प्रेग्नेंसी की खबर कंफर्म कर दी है। दिव्यांका ने बेबी बंप फ्लॉन्ट करते हुए पति विवेक दहिया के साथ तस्वीरें शेयर कीं। कपल शादी के करीब 10 साल बाद माता-पिता बनेंगे। प्रेग्नेंसी को लेकर एक इंस्टा पोस्ट में दिव्यांका और विवेक ने लिखा, ‘10 साल बाद कहानी में नया मोड़। कुछ सफर जल्दी पूरा करने के लिए नहीं होते… वे साथ मिलकर तैयार होने के लिए होते हैं और जब लगता है कि कहानी पूरी हो गई है… तभी जिंदगी इसमें सबसे खूबसूरत अध्याय जोड़ देती है।’ पोस्ट में आगे लिखा गया, ‘अब भी इस एहसास को महसूस कर रहे हैं… बिना वजह मुस्कुरा रहे हैं… दिल कृतज्ञता से भरा है। हम माता-पिता बनने वाले हैं।’ बेबी जून में होगा: दिव्यांका अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर दिव्यांका और विवेक ने ईटाइम्स से बातचीत में कहा कि उनका बेबी जून में होगा। एक्ट्रेस ने कहा कि वह लगभग हर महीने प्रेग्नेंसी टेस्ट करती थीं और पॉजिटिव रिजल्ट की उम्मीद करती थीं। जब रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो उन्हें इस बात को स्वीकार करने में थोड़ा समय लगा। विवेक ने खबर सुनकर खुशी जताई, लेकिन तुरंत जश्न नहीं मनाया। दिव्यांका ने यह भी कहा कि मेरे मन और शरीर में बदलाव आया। मैं अपने खान-पान, व्यायाम और चलने-फिरने के तरीके को लेकर काफी सतर्क हो गई। मैं अचानक ज्यादा जागरूक और सावधान हो गई। दिव्यांका और विवेक की पहली मुलाकात टीवी सीरियल ‘ये हैं मोहब्बतें’ के सेट (2015) पर हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सिर्फ प्रोफेशनल रिश्ता था। सेट पर घंटों साथ रहते थे, लेकिन बातचीत बहुत कम होती थी। दिव्यांका और विवेक की लव स्टोरी में एक्टर पंकज भाटिया ने अहम भूमिका निभाई, जिन्होंने दोनों को एक-दूसरे के लिए परफेक्ट लाइफ पार्टनर बताया था। कुछ समय तक डेटिंग करने के बाद दोनों ने 8 जुलाई 2016 को भोपाल में शादी की थी।







