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गर्मी में ताजगी का राज… ये 5 फल खाओ, डॉक्टर की नहीं पड़ेगी जरूरत, हाइड्रेट और इम्यूनिटी बूस्ट करना भी आसान!

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Last Updated:March 19, 2026, 15:26 IST गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी जल्दी हो जाती है, जिससे थकान, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में सही फलों का सेवन करना बेहद जरूरी है, जो न केवल शरीर को ठंडक दें बल्कि जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करें. तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, संतरा और अनानास जैसे पानी से भरपूर फल गर्मियों में हाइड्रेशन, इम्यूनिटी और ताजगी बनाए रखने के लिए सबसे फायदेमंद माने जाते हैं. गर्मी शुरू होते ही शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है, जिससे थकान, चक्कर और कमजोरी महसूस होती है. ऐसे में खानपान का सही ध्यान रखना जरूरी हो जाता है, खासकर उन फलों का सेवन करना चाहिए जिनमें पानी की मात्रा अधिक होती है और जो शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं. गर्मियों में सही फल खाने से शरीर हाइड्रेट रहता है, इम्यूनिटी मजबूत होती है और बीमारियों से बचाव होता है. इसलिए अपनी डाइट में पानी से भरपूर फलों को शामिल करना सबसे आसान और असरदार तरीका है. गर्मी में सबसे फायदेमंद फल तरबूज माना जाता है, क्योंकि इसमें लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है. यह शरीर को तुरंत ठंडक देता है और पानी की कमी को तेजी से पूरा करता है. तरबूज में विटामिन A और C भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो त्वचा को हेल्दी रखने और इम्युनिटी मजबूत करने में मदद करते हैं. इसके नियमित सेवन से शरीर में ताजगी बनी रहती है और लू से बचाव होता है. गर्मियों में दिन के समय तरबूज खाना सबसे फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा, खरबूजा भी गर्मियों के लिए बेहतरीन फल है, जो शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ पाचन को बेहतर बनाता है. इसमें फाइबर, पोटैशियम और विटामिन C अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं. खरबूजा खाने से पेट की समस्याएं कम होती हैं और शरीर में पानी का संतुलन बना रहता है. गर्मी के दिनों में इसे सुबह या दोपहर के समय खाने से शरीर को अधिक फायदा मिलता है और दिनभर तरोताजा महसूस होता है. Add News18 as Preferred Source on Google वहीं, ककड़ी को भी गर्मियों में जरूर शामिल करना चाहिए, क्योंकि इसमें लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है. यह शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है और अंदर से ठंडक पहुंचाता है. ककड़ी को सलाद के रूप में या हल्के नमक के साथ खाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर में ताजगी बनी रहती है. इसके अलावा, संतरा भी पानी और विटामिन C का अच्छा स्रोत है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और थकान दूर करने में मदद करता है. संतरा खाने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. इसके साथ ही, अनानास भी गर्मी के मौसम में काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें पानी के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट्स और एंजाइम्स होते हैं, जो पाचन को सुधारते हैं और शरीर को मजबूत बनाते हैं. अनानास का सेवन करने से शरीर में ताजगी बनी रहती है और कमजोरी दूर होती है. कुल मिलाकर, अगर आप गर्मी के मौसम में इन फलों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं, तो न केवल पानी की कमी दूर होगी बल्कि शरीर भी फिट और हेल्दी रहेगा, जिससे आप पूरे दिन एक्टिव और ऊर्जावान महसूस करेंगे. First Published : March 19, 2026, 15:26 IST

बुरहानपुर में जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू:ताप्ती राजघाट पर अफसर-जनप्रतिनिधियों ने किया श्रमदान, पानी बचाने जनआंदोलन का आह्वान

बुरहानपुर में जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू:ताप्ती राजघाट पर अफसर-जनप्रतिनिधियों ने किया श्रमदान, पानी बचाने जनआंदोलन का आह्वान

बुरहानपुर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान गुरुवार को शुरू हुआ। इस अभियान का उद्देश्य पानी की हर बूंद बचाना और जल संरक्षण की दिशा में मजबूत पहल करना है। अभियान के शुभारंभ अवसर पर ताप्ती नदी के राजघाट पर जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विधायक अर्चना चिटनिस, महापौर माधुरी पटेल, जिला पंचायत सीईओ व अपर कलेक्टर सृजन वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। राजघाट पर मां ताप्ती के किनारे विधिवत पूजन और शपथ के साथ अभियान की शुरुआत हुई। इस दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से श्रमदान किया। उन्होंने कचरा एकत्र कर स्वच्छता और जल संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर बोरी बंधान कार्य का भी शुभारंभ किया गया। जल संरक्षण के लिए शपथ ली विधायक अर्चना चिटनिस ने जल गंगा संवर्धन अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान में सभी की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण और संवर्धन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए उपस्थित लोगों को प्रेरित किया। महापौर माधुरी पटेल ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों में भी वर्षा जल को सहेजने की व्यवस्था करें। उन्होंने जल संरक्षण के प्रयासों में सहभागी बनने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान सामूहिक शपथ भी ली गई। इस अभियान के माध्यम से न केवल जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जाएगा, बल्कि आमजनों को भी इससे जोड़कर इसे एक जन-आंदोलन के रूप में विकसित किया जाएगा।

इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए क्या खाएं और क्या न खाएं? यहां देखिए पूरी लिस्ट, सेहत में आएगा सुधार

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Last Updated:March 19, 2026, 15:05 IST Best Foods to Boost Immunity: बदलते मौसम में निरोगी रहने के लिए इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है. डाइटिशियन कामिनी सिन्हा के अनुसार खट्टे फल, हल्दी और अदरक शरीर के डिफेंस सिस्टम को एक्टिव करते हैं. इन चीजों का सेवन करना फायदेमंद होता है. जबकि अत्यधिक चीनी और प्रोसेस्ड फूड व्हाइट ब्लड सेल्स की कार्यक्षमता को घटा देते हैं. इससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है. बीमारियों से बचने के लिए हेल्दी खानपान जरूरी होता है. बदलते मौसम और संक्रमण के बढ़ते खतरों के बीच इम्यूनिटी हमारे शरीर को बचाती है. अगर आपका इम्यून सिस्टम मजबूत है, तो शरीर वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने में सक्षम होता है, जिससे आप बार-बार बीमार नहीं पड़ते. इम्यूनिटी रातों-रात नहीं बनती, बल्कि यह हमारे खान-पान और लाइफस्टाइल का परिणाम है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की सीनियर डाइटिशियन कामिनी सिन्हा से जानते हैं कि इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए कौन से फूड्स का सेवन करना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए. इम्यूनिटी की बात हो और विटामिन C का जिक्र न हो, ऐसा मुमकिन नहीं है. संतरा, नींबू, मौसंबी और कीवी जैसे खट्टे फल सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाते हैं, जो संक्रमण से लड़ने के लिए अनिवार्य हैं. विटामिन-C एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाता है. चूंकि हमारा शरीर विटामिन-C को स्टोर नहीं कर सकता, इसलिए इसे रोजाना डाइट में शामिल करना जरूरी है. भारतीय मसालों में छिपे औषधीय गुण इम्यूनिटी के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. लहसुन में एलिसिन नामक यौगिक होता है, जो संक्रमण और सूजन से लड़ता है. अदरक गले की खराश और इन्फ्लेमेशन को कम करने में सहायक है. वहीं, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है. रात को गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी डालकर पीना सदियों पुराना और सबसे प्रभावी नुस्खा है. Add News18 as Preferred Source on Google हमारी इम्यूनिटी का लगभग 70 से 80% हिस्सा हमारे गट हेल्थ में होता है. दही और प्रोबायोटिक फूड्स शरीर में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाते हैं. ये बैक्टीरिया न केवल पाचन सुधारते हैं, बल्कि बाहरी कीटाणुओं को शरीर पर हावी होने से भी रोकते हैं. दोपहर के भोजन में एक कटोरी ताजा दही शामिल करना आंतों के स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए अत्यंत लाभकारी है. बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज और सूरजमुखी के बीज विटामिन E, जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड के बेहतरीन स्रोत हैं. विटामिन-E एक घुलनशील एंटीऑक्सीडेंट है, जो इम्यून फंक्शन को सुचारू बनाए रखने में मदद करता है. जिंक की कमी से शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए मुट्ठी भर सूखे मेवे रोज खाने चाहिए. पालक, ब्रोकली और मेथी जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां न केवल विटामिन-C बल्कि विटामिन-A और आयरन से भी भरपूर होती हैं. ये सब्जियां शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखती हैं और कोशिकाओं के पुनर्जनन में मदद करती हैं. ब्रोकली को कम से कम पकाकर खाना चाहिए ताकि इसके पोषक तत्व बरकरार रहें. यह शरीर को डिटॉक्स करने और संक्रमण रोकने में मदद करती है. इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ-साथ यह जानना भी जरूरी है कि क्या चीज उसे कमजोर करती है. अत्यधिक चीनी का सेवन शरीर की सफेद रक्त कोशिकाओं की कीटाणुओं को मारने की क्षमता को कुछ घंटों के लिए कम कर देता है. इसी तरह प्रोसेस्ड फूड, पैकेट बंद स्नैक्स और सोडा में मौजूद प्रिजर्वेटिव्स शरीर में सूजन बढ़ाते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम दूसरी बीमारियों से लड़ने के बजाय खुद को ठीक करने में उलझ जाता है. शराब का अधिक सेवन फेफड़ों के स्वास्थ्य को बिगाड़ता है और शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया को धीमा कर देता है. धूम्रपान श्वसन तंत्र की सुरक्षात्मक परतों को नष्ट कर देता है, जिससे वायरस के लिए शरीर में प्रवेश करना आसान हो जाता है. अगर आप अपनी इम्यूनिटी को लेकर गंभीर हैं, तो इन नशीले पदार्थों से दूरी बनाना पहला कदम होना चाहिए. केवल खाना ही काफी नहीं है, बल्कि शरीर को डिटॉक्स करने के लिए दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पीना जरूरी है. पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है. इसके साथ ही रात की 7-8 घंटे की गहरी नींद इम्यून सेल्स के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है. नींद की कमी शरीर को थका देती है, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. First Published : March 19, 2026, 15:05 IST

‘हमारी कोई दुश्मनी नहीं…’, असम चुनाव में गौरव गोगोई को टक्कर देने जा रहे हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने क्या कहा

'हमारी कोई दुश्मनी नहीं...', असम चुनाव में गौरव गोगोई को टक्कर देने जा रहे हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने क्या कहा

असम में विधानसभा चुनाव को लेकर फोकस बिसात बिछुनी शुरू हो गई है. इस बार जोरहाट में एक हाई-प्रोफाइल चुनावी मुकाबला होने जा रहा है, क्योंकि असम विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी इस बार चुनाव में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसी) के अध्यक्ष गौरव गोगोई को चुनौती देने के लिए तैयार हैं। अपने उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए गोस्वामी ने जोरहाट क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए गोगोई के फैसले पर आश्चर्यचकित कर दिया। मीडिया से बात करते हुए गोस्वामी ने कहा, “मुझे आश्चर्य है कि गौरव गोगोई यहां नेता के रूप में चुनाव लड़ने क्यों आए हैं। वे जोर देकर कह रहे हैं कि वे अब विधानसभा चुनाव में उतरने का फैसला क्यों कर रहे हैं?” क्या बोले हितेन्द्र नाथ गोस्वामी?समर्थक समर्थक ने अपनी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि गोगोई के अल्पसंख्यक रहते हुए भी विकास समन्वय पर प्रत्यक्ष समन्वय की कमी हो रही है। उन्होंने आगे कहा, “वे जोरहाट के न्यूनतम थे और मैं यहां का नेता हूं, लेकिन मुझे इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के यात्रियों को ले जाने के बारे में कोई चर्चा याद नहीं है।” युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका – गोस्वामीगोस्वामी ने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं के बीच कोई व्यक्तिगत प्रतिद्वंदिता नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी कंपनी कोई शत्रु नहीं है, इसलिए मैं किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहता।” आगामी प्रकाशन में युवा कॉलेज की भूमिका में गोस्वामी ने अपने बढ़ते प्रभाव को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, ”युवा पीढ़ी इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, लेकिन वे वैज्ञानिक हैं और जानते हैं कि किसे नियुक्त किया गया है।” बेहोशी की हालत में बेबस हुए गोस्वामी ने गोगोई को पाकिस्तान से जोड़ने वाले काम पर टिप्पणी करने से पहले कहा और कहा, “मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। जोर के घाट के लोग शिक्षित हैं और वे जानते हैं कि क्या सही है।” इसी बीच गोस्वामी ने असमिया म्यूजिक के दिग्गज जुबिन गर्ग के सम्मान में एक प्रोजेक्ट की योजना का खुलासा करते हुए एक कल्चरल पहल की घोषणा की। उन्होंने बताया, “हम जुबिन गर्ग को समर्पित एक प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं, जिसका निर्माण उद्योग महाविद्यालय के पास सोताई में किया जाएगा।” दोनों नेताओं के महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए, आने वाले दिनों में जोर-शोर से एक कड़ा और गहन मुकाबला देखने की उम्मीद है। ये भी पढ़ें असम बीजेपी उम्मीदवारों की सूची: असम में बीजेपी ने की फील्डिंग सेट! प्रद्युत बोरदोलोई सहित कई बड़े दांव, क्या उलटी पड़ जाएगी बाजी? (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)गौरव गोगोई(टी)हितेंद्र नाथ गोस्वामी(टी)कांग्रेस(टी)असम(टी)विधानसभा चुनाव(टी)जोरहाट(टी)कांग्रेस(टी)गौरव गोगोई(टी)हितेंद्र नाथ गोस्वामी

सिक्किम की फिल्म ‘शेप ऑफ मोमो’ दो इंटरनेशनल अवॉर्ड जीती:रूस के फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट डेब्यू फिल्म बनी; डायरेक्टर ने अवॉर्ड राज्य को डेडिकेट किए

सिक्किम की फिल्म ‘शेप ऑफ मोमो’ दो इंटरनेशनल अवॉर्ड जीती:रूस के फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट डेब्यू फिल्म बनी; डायरेक्टर ने अवॉर्ड राज्य को डेडिकेट किए

सिक्किम की नेपाली भाषा की फिल्म ‘शेप ऑफ मोमो’ ने दो इंटरनेशनल अवॉर्ड जीते हैं। रूस के खांटी-मानसीस्क में आयोजित ‘स्पिरिट ऑफ फायर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में इस फिल्म को बेस्ट इंटरनेशनल डेब्यू फिल्म के लिए ‘सिल्वर टैगा अवॉर्ड’ मिला है। इसके साथ ही सांस्कृतिक मूल्यों को संजोने के लिए फिल्म को ‘सोल ऑफ रशिया – वर्ल्ड सिनेमा स्पेशल प्राइज’ अवॉर्ड दिया गया है। इस फिल्म का निर्देशन त्रिबेनी राय ने किया है। डायरेक्टर सिक्किम को समर्पित की जीत अवॉर्ड लेते समय डायरेक्टर त्रिबेनी राय काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने अपनी इस सफलता को सिक्किम राज्य को समर्पित किया है। त्रिबेनी ने बताया कि यह अवॉर्ड उनके लिए इसलिए भी खास है क्योंकि उनकी मां इस फिल्म की प्रोड्यूसर हैं और उन्होंने अपनी मां के साथ स्टेज पर यह सम्मान हासिल किया। रूस के फिल्म फेस्टिवल से मिली पहचान ‘शेप ऑफ मोमो’ को इस फिल्म फेस्टिवल के इंटरनेशनल डेब्यू कॉम्पिटिशन में शामिल किया गया था। 16 मार्च को हुए अवॉर्ड समारोह में फिल्म की काफी तारीफ हुई। यह फिल्म सिक्किम और पूर्वोत्तर भारत की कहानियों को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर ले जाने में सफल रही है। इस फेस्टिवल की शुरुआत साल 2003 में हुई थी और इसे दुनियाभर के नए फिल्ममेकर्स के लिए रूस का सबसे महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। अब एम्स्टर्डम में होगी फिल्म की स्क्रीनिंग रूस में जीत के बाद अब ‘शेप ऑफ मोमो’ का सफर और आगे बढ़ेगा। अप्रैल में यह फिल्म नीदरलैंड के ‘सिनेमा एशिया फिल्म फेस्टिवल’ में अपनी डच प्रीमियर के लिए एम्स्टर्डम जाएगी। इससे पहले इस फिल्म का यूरोपियन प्रीमियर स्पेन के ‘सैन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में हो चुका है। इंटरनेशनल सर्किट में सराहना मिलने के बाद अब मेकर्स इसे भारत में रिलीज करने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी शुरुआत गंगटोक में एक बड़े प्रीमियर के साथ होगी। कौन हैं डायरेक्टर त्रिबेनी राय? ईस्ट सिक्किम की रहने वाली त्रिबेनी राय का रूस से पुराना नाता है। साल 2016 में उन्होंने रूस के प्रतिष्ठित VGIK इंटरनेशनल समर स्कूल में हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई थी। त्रिबेनी की फिल्म ‘शेप ऑफ मोमो’ न केवल एक कहानी है, बल्कि यह सिक्किम की संस्कृति और वहां के पारंपरिक मूल्यों को भी बखूबी दर्शाती है।

फिल्म मातृभूमि का गाना 'चांद देख लेना' रिलीज:गाने में सलमान खान और चित्रांगदा सिंह के बीच इमोशनल लव स्टोरी दिखी

फिल्म मातृभूमि का गाना 'चांद देख लेना' रिलीज:गाने में सलमान खान और चित्रांगदा सिंह के बीच इमोशनल लव स्टोरी दिखी

सलमान खान ने अपने फैंस को ईद से पहले खास तोहफा दिया है। बुधवार को सलमान और चित्रांगदा सिंह पर फिल्माया गया फिल्म “मातृभूमि” का गाना “चांद देख लेना” रिलीज किया गया है। गाने का संगीत हिमेश रेशमिया ने दिया है और इसको सिंगर निहाल टौरो और अंकोना मुखर्जी ने गाया है। यह गाना पुराने दौर के सच्चे प्यार की याद दिलाता है। यह एक सैनिक की ड्यूटी और उसके रिश्तों के बीच की इमोशनल जर्नी को खूबसूरती से दिखाता है। यह गाना चांद के इमोशनल महत्व को बहुत खूबसूरती से दिखाता है, जो ईद और करवा चौथ दोनों का अहम हिस्सा है। जहां ईद पर चांद का दिखना जश्न और मिलन का प्रतीक है, वहीं करवा चौथ पर यह प्यार, इंतजार और भरोसे को दर्शाता है। गाना इन दोनों परंपराओं को भावनाओं और उम्मीद के जरिए एक साथ पिरोता है। देखें गाने की झलक- गौरतलब है कि फिल्म के टाइटल ट्रैक “मातृभूमि” को लोगों ने खूब पसंद किया और इसे यूट्यूब पर 50 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले। इसके बाद वेलेंटाइन डे पर गाना “मैं हूं” गाना रिलीज हुआ था। बता दें कि पहले इस फिल्म का नाम ‘बैटल ऑफ गलवान’ था, जिसे अब बदलकर ‘मातृभूमि: मे वार रेस्ट इन पीस’ कर दिया गया है। यह बदलाव फिल्म की कहानी के गहरे जज्बात और जंग के बीच इंसानियत के संदेश को दर्शाने के लिए किया गया है। फिल्म को सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान ने प्रोड्यूस किया है, जबकि अपूर्व लाखिया इसके डायरेक्टर हैं।

गुनगुने पानी में नींबू और शहद…. सही मात्रा और तरीका जानें, साथ ही जानिए 5 चौंकाने वाले फायदे

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Last Updated:March 19, 2026, 14:49 IST स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए सुबह खाली पेट नींबू पानी पीना एक सरल और असरदार तरीका है. इसमें मौजूद विटामिन C, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को डिटॉक्स करते हैं, इम्यूनिटी मजबूत करते हैं, त्वचा को चमकदार बनाते हैं और दिनभर ऊर्जा बनाए रखते हैं. आजकल हेल्दी रहने के लिए लोग कई घरेलू नुस्खे अपनाते हैं, जिनमें से एक असरदार तरीका है सुबह खाली पेट नींबू पानी पीना. नींबू में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट, पोटैशियम और साइट्रिक एसिड जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं. आयुर्वेद में भी सुबह गुनगुने पानी के साथ नींबू लेने को सेहत के लिए लाभकारी माना गया है. नींबू में भरपूर विटामिन C पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद करता है. सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने से शरीर को दिनभर के लिए ऊर्जा मिलती है और संक्रमण से लड़ने में भी मदद होती है. आयुर्वेद के अनुसार, नींबू में ऐसे गुण होते हैं जो शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं और मौसम बदलने पर सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं से बचाने में सहायक होते हैं. नींबू पानी शरीर को प्राकृतिक तरीके से डिटॉक्स करने में मदद करता है और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है. आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में अमा (टॉक्सिन) जमा हो जाता है तो विभिन्न बीमारियां हो सकती हैं. सुबह नींबू पानी पीने से शरीर की सफाई होती है और लिवर बेहतर तरीके से काम करता है. Add News18 as Preferred Source on Google आजकल कई लोग वजन कम करने के लिए सुबह नींबू पानी पीते हैं. गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे शरीर कैलोरी को बेहतर तरीके से बर्न करता है. आयुर्वेद में इसे शरीर के कफ दोष को संतुलित करने वाला माना जाता है, और कफ बढ़ने से वजन बढ़ सकता है. इसलिए सुबह नींबू पानी पीना वजन नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है. नींबू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. नियमित रूप से नींबू पानी पीने से शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, जिससे त्वचा साफ और चमकदार दिखती है. यह त्वचा में कोलेजन बनने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा हेल्दी और फ्रेश नजर आती है. इसलिए इसे कई लोग प्राकृतिक स्किन केयर ड्रिंक भी मानते हैं. रात भर सोने के बाद शरीर को पानी की जरूरत होती है, और सुबह नींबू पानी पीने से शरीर को तुरंत हाइड्रेशन मिलता है. इससे शरीर में ताजगी महसूस होती है और दिन की शुरुआत भी अच्छी होती है. आयुर्वेद में सुबह उठकर पानी पीने की परंपरा को उषापान कहा जाता है, और जब इस पानी में नींबू मिलाया जाता है तो यह और भी ज्यादा फायदेमंद हो जाता है. अगर आप सुबह नींबू पानी पीना चाहते हैं तो इसे सही तरीके से लेना जरूरी है. सुबह उठने के बाद एक गिलास गुनगुना पानी लें, इसमें आधा नींबू निचोड़ें, चाहें तो थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं, और इसे धीरे-धीरे घूंट-घूंट करके पिएं. इससे शरीर को अधिक लाभ मिल सकता है. First Published : March 19, 2026, 14:49 IST

इंडक्शन यूजिंग टिप्स: गैस की रसोई में चूल्हे का उपयोग कैसे किया जाता है? तो जान लें ये स्मार्ट उपाय ऑलिव ग्रोथ एक्सटेंशन मुश्किल

इंडक्शन यूजिंग टिप्स: गैस की रसोई में चूल्हे का उपयोग कैसे किया जाता है? तो जान लें ये स्मार्ट उपाय ऑलिव ग्रोथ एक्सटेंशन मुश्किल

19 मार्च 2026 को 14:44 IST पर अपडेट किया गया रसोई सुरक्षा युक्तियाँ: यदि आप भी विशेष चूल्हा यूज़ कर रहे हैं तो इन 4 सेंसेट से डाउनग्रेड करें, नहीं तो आपका बिजली बिल बढ़ सकता है, वहीं सुरक्षा का खतरा हो सकता है। पढ़ें पूरी खबर। (टैग्सटूट्रांसलेट) इंडक्शन कुकटॉप गलतियाँ (टी) बिजली बिल बचाएं इंडक्शन (टी) किचन सेफ्टी टिप्स (टी) इंडक्शन सेफ्टी टिप्स भारत (टी) गैस सिलेंडर की कमी इंडक्शन डिमांड (टी) सामान्य रसोई उपकरण त्रुटियां (टी) इंडक्शन टिप्स का उपयोग करना (टी) इंडक्शन टिप्स (टी) इंडक्शन

अमेरिका की वर्ल्ड कप जर्सी की कहानी:2022 के विद्रोह के बाद खिलाड़ियों ने खुद तय की 2026 की डिजाइन; अवे जर्सी तो नाइट क्लब में पहन सकते हैं

अमेरिका की वर्ल्ड कप जर्सी की कहानी:2022 के विद्रोह के बाद खिलाड़ियों ने खुद तय की 2026 की डिजाइन; अवे जर्सी तो नाइट क्लब में पहन सकते हैं

जून में शुरू हो रहे 2026 फीफा वर्ल्ड कप का खुमार छाने लगा है। इस बीच, अमेरिकी पुरुष फुटबॉल टीम ने इस महाकुंभ के लिए अपनी नई जर्सी लॉन्च की है। लेकिन इस जर्सी के पीछे सिर्फ डिजाइनरों की मेहनत नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों की एक दिलचस्प बगावत की कहानी भी छिपी है। यह किट खिलाड़ियों ने खुद अपनी पसंद और शर्तों पर तैयार करवाई है। इसकी शुरुआत जून 2022 में टेक्सास के ऑस्टिन शहर से हुई। अमेरिकी टीम 2022 वर्ल्ड कप की अपनी नई किट के फोटोशूट के लिए वहां मौजूद थी। लेकिन जब खिलाड़ियों ने वह जर्सी देखी, तो वे भड़क गए। टीम के स्टार मिडफील्डर टायलर एडम्स ने तब कहा था, ‘हमें नहीं लगा कि यह किट हमारी सही पहचान पेश करती है।’ नाराजगी इस कदर थी कि खिलाड़ियों ने सेट पर काम रोक दिया। लगभग 30 मिनट तक शूटिंग रुकी रही, जिससे नाइकी और अमेरिकी फेडरेशन के अधिकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। बाद में जैसे-तैसे शूट पूरा हुआ, लेकिन खिलाड़ियों की इस बगावत ने फेडरेशन को कड़ा संदेश दे दिया था। 2022 के उस अनुभव के बाद नाइकी और अमेरिकी सॉकर ने 2026 वर्ल्ड कप के लिए रणनीति पूरी तरह बदल दी। इस बार बंद कमरों में डिजाइन फाइनल करने के बजाय, खिलाड़ियों को शुरुआत से ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया। नवंबर 2023 और 2024 में कई ट्रेनिंग कैंप्स के दौरान नाइकी के डिजाइनरों ने खिलाड़ियों को एक-एक कर मीटिंग में बुलाया। उनसे पूछा गया कि वे कैसी जर्सी चाहते हैं और उनके लिए अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने का क्या मतलब है। टायलर एडम्स कहते हैं, ‘इस बार हमने सचमुच हर एक चीज खुद चुनी है।’ खिलाड़ियों और डिजाइनरों की लंबी माथापच्ची के बाद दो जर्सी तैयार की गईं। होम जर्सी पर लाल और सफेद स्ट्रिप्स हैं। खिलाड़ी चाहते थे कि ब्राजील के पीले या नीदरलैंड्स के नारंगी रंग की तरह अमेरिका की भी एक पक्की पहचान हो। इसलिए इस जर्सी में अमेरिकी झंडे की लहराती हुई धारियों को शामिल किया गया। यह उन जोशीले फैंस के लिए है, जो स्टैंड्स में ‘U-S-A’ के नारे लगाते हैं। वहीं, अवे जर्सी ऐसी है, जिसे पहनकर नाइट क्लब में भी जा सकते हैं। इसके लिए जब नाइकी ने पहली बार सितारों वाला एक चमकीला डिजाइन दिखाया, तो खिलाड़ियों ने उसे रिजेक्ट कर दिया। खिलाड़ियों की एक खास मांग थी, ‘हमें एक ऐसी कूल जर्सी चाहिए, जिसे हम जींस के साथ पहनकर किसी क्लब में भी जा सकें।’ इसके बाद डिजाइन को बदला गया और इसे लगभग काले रंग का बनाया गया, जिसमें पास से देखने पर चमकते हुए सितारे नजर आते हैं। खिलाड़ियों का मानना है कि यह 2026 की नई जर्सी सिर्फ एक कपड़े का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से उनकी और उनके देश की भावना का प्रतिनिधित्व करती है।

सिर्फ बीमारी का पता ही नहीं लगाता MRI, अब इलाज में भी हो रहा इस्तेमाल, डॉक्टर से जानिए 5 बड़ी बातें

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Last Updated:March 19, 2026, 14:23 IST MRI for Precision Surgery: एमआरआई एक एडवांस स्कैनिंग है, जिसके जरिए कई गंभीर बीमारियों का पता लगाया जाता है. रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक बंसल के अनुसार MRI अब केवल बीमारी की जांच के लिए नहीं है, बल्कि इसका उपयोग कई तरह की सर्जरी और कीमोथेरेपी की निगरानी के लिए किया जा रहा है. यह ट्रीटमेंट को ज्यादा इफेक्टिव बनाने में मदद कर रहा है. एमआरआई के जरिए कई तरह की सर्जरी भी की जाती हैं. Critical Facts About MRI: जब भी लोगों को कोई अंदरूनी समस्या होती है, तब मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानी MRI कराने की सलाह दी जाती है. यह एक तरह की स्कैनिंग तकनीक है, जिसमें शरीर के अंदरूनी हिस्सों की साफ तस्वीर बन जाती है. लंबे समय से इसे केवल एक डायग्नोस्टिक टूल यानी बीमारी का पता लगाने वाली मशीन माना गया है, लेकिन अब MRI का इस्तेमाल कई तरह के ट्रीटमेंट में भी किया जा रहा है. अब MRI सिर्फ यह नहीं बताता कि बीमारी कहाँ है, बल्कि यह गंभीर बीमारियों के सटीक इलाज का एक हिस्सा बन चुका है. कैंसर से लेकर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर तक MRI डॉक्टर्स के लिए एक गाइड की तरह काम कर रहा है. चलिए डॉक्टर से जानते हैं कि एमआरआई का इस्तेमाल किन-किन ट्रीटमेंट में किया जा रहा है. दिल्ली के आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक बंसल ने News18 को बताया कि पहले सर्जन एक्स-रे या सीटी स्कैन की मदद से ऑपरेशन करते थे, लेकिन अब इंट्रा-ऑपरेटिव MRI का इस्तेमाल हो रहा है. इसका मतलब है कि ऑपरेशन के दौरान ही मरीज का MRI किया जाता है. इससे सर्जन्स को रियल टाइम में पता चलता है कि ट्यूमर का कितना हिस्सा निकल चुका है और कितना बाकी है. इसी तरह MRI-गाइडेड बायोप्सी के जरिए डॉक्टर शरीर के उस सटीक बिंदु से सैंपल लेते हैं, जहां बीमारी मौजूद है. इससे गलत रिपोर्ट की गुंजाइश खत्म हो जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर बंसल ने बताया कि अब फोकस्ड अल्ट्रासाउंड थेरेपी (MRgFUS) में भी एमआरआई का यूज किया जा रहा है. इसमें MRI का उपयोग बिना किसी चीर-फाड़ के ट्यूमर को नष्ट करने के लिए किया जाता है. डॉक्टर MRI के जरिए ट्यूमर की सटीक लोकेशन देखते हैं और फिर हाई-इंटेंसिटी अल्ट्रासाउंड किरणों को उसी बिंदु पर केंद्रित करते हैं. इससे ट्यूमर कोशिकाएं जलकर नष्ट हो जाती हैं. यह तकनीक विशेष रूप से गर्भाशय के फाइब्रॉएड और पार्किंसंस रोग के कारण होने वाले कंपन के इलाज में असरदार साबित हो रही है. एक्सपर्ट के मुताबिक MRI अब सिर्फ कैंसर का पता नहीं लगाता, बल्कि यह भी बताता है कि दी जा रही कीमोथेरेपी कितनी प्रभावी है. फंक्शनल MRI के जरिए डॉक्टर देख सकते हैं कि दवा शरीर के भीतर ट्यूमर पर कैसा असर कर रही है. अगर ट्यूमर नहीं सिकुड़ रहा, तो डॉक्टर समय रहते इलाज का तरीका बदल सकते हैं. इससे मरीज का कीमती समय और पैसा दोनों बचते हैं और उसे अनावश्यक दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है. इसके अलावा हार्ट डिजीज के मामले में कार्डियक MRI एक गेम-चेंजर है. यह न केवल दिल की बनावट दिखाता है, बल्कि यह भी मापता है कि दिल की मांसपेशियां कितनी सक्रिय हैं और ब्लड फ्लो कैसा है. हार्ट अटैक के बाद दिल का कितना हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है और क्या उसे दोबारा ठीक किया जा सकता है. इसका सटीक फैसला अब कार्डियक MRI की मदद से लिया जा रहा है, जो एंजियोग्राफी से भी ज्यादा डिटेल्ड जानकारी देता है. डॉक्टर के मुताबिक कैंसर के इलाज में रेडिएशन देते समय सबसे बड़ी चुनौती स्वस्थ कोशिकाओं को बचाना होती है. नई MRI-Linac मशीनें रेडिएशन के दौरान लगातार तस्वीरें लेती रहती हैं. चूंकि मरीज के सांस लेने से ट्यूमर की स्थिति थोड़ी बदल सकती है, इसलिए MRI तुरंत रेडिएशन की बीम को एडजस्ट कर देता है. इससे केवल कैंसर कोशिकाओं पर हमला होता है और आस-पास के स्वस्थ अंग पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 19, 2026, 14:23 IST