Thursday, 15 Oct 2026 | 08:24 AM

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असम बीजेपी उम्मीदवारों की सूची: असम में बीजेपी ने की फील्डिंग सेट! प्रद्युत बोरदोलोई सहित कई बड़े दांव, क्या उलटी पड़ जाएगी बाजी?

असम बीजेपी उम्मीदवारों की सूची: असम में बीजेपी ने की फील्डिंग सेट! प्रद्युत बोरदोलोई सहित कई बड़े दांव, क्या उलटी पड़ जाएगी बाजी?

बीजेपी ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी लंबे समय से इंतजार कर रही वाली की लिस्ट आखिरकार जारी कर दी है। पार्टी ने 89 रेज़्यूमे पर खुद की लड़ाई का निर्णय लिया है, जबकि बाकी 37 रेज़्यूमे सहयोगी ऑर्केज़म दिए गए हैं। असम में कुल 126 सीटें हैं और बीजेपी ने 89 पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. असोम गण परिषद (एजीपी) को 26 और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) को 11 सीटें मिली हैं। सीएम हिमंत जालुकबारी से ही लड़ेंगे चुनाव सीएम हिमंत बिस्वा सरमा अपनी पुरानी और मजबूत सीट जालुकबारी से ही चुनाव लड़ेंगे। 2001 से यह सीट लगातार जीती आ रही है और यहां उनका गढ़ माना जाता है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और विपक्ष में डिप्टी लीडर गौरव गोगोई जोर-शोर से लड़ रहे हैं। बीजेपी ने यहां बुजुर्ग नेताओं, पूर्व मंत्रियों और कट्टर समर्थकों हितेंद्र नाथ गोस्वामी को उतारा है। यह प्रतियोगिता राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल लड़ाइयों में से एक होगी, क्योंकि जोरहाट कांग्रेस का पारंपरिक क्षेत्र है, लेकिन गोस्वामी ने यहां कई बार जीत हासिल की है। बीजेपी की लिस्ट में कौन सा बड़ा नाम शामिल? प्रभात से प्रमुख भाजपा नेता मनाब डेका को टिकटें। नाजिरा में बीजेपी के मैरी बोरगोहेन बनाम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेब्रेट सैकिया। तीताबाद से हाल ही में पूर्व चाय बागान के नेता धीरज गोवला शामिल हुए। ये सीट पहले कांग्रेस की मजबूत गढ़ थी और वंचित सीएम युवा गोगोई से जुड़ी हुई है. बिहपुरिया से पूर्व कांग्रेस नेता भूपेन बोरा. दिसपुर से कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई को टिकट दे दिया है। दिसपुर असम की सबसे प्रतिष्ठित सीट है। महमोरा में सुरुज दिहिंगिया को मौका मिला, क्योंकि स्टैलिस्ट विधायक जोगेन मोहन महाजन चुने गए हैं। चक्रधर गोगोई बनाम असम जतिया परिषद (एजेपी) के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई का आमना-सामना। शिवसागर में एजीपी के वेटरन प्रदीप हजारिका बनाम राजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई। बीजेपी के पास कई स्टैटिक्स के टिकट नहीं हैं, जो पार्टी की नई रणनीतियाँ हैं। पार्टी एंटी-इनकंबेंसी से बच और नए राहुल को अवसर देने पर फोकस कर रही है। सूची में अनुभवी नेताओं के साथ नए और युवा चेहरे, महिलाएं और युवा किशोरी शामिल हैं। बीजेपी की एक ही लिस्ट में काम खत्म, कांग्रेस के दावेदार बाकी चुनाव 9 अप्रैल 2026 को एक चरण में ही होगा। नामांकन की अंतिम तारीख 23 मार्च है और 4 मई 2026 को आएगी। कांग्रेस ने अब तक 65 की दो लिस्ट जारी की है, जबकि बीजेपी ने एक ही लिस्ट में अपना काम पूरा कर लिया है. यह घोषणा असम में राजनीतिक और जातीय माहौल में पूरी तरह गरमा गई है। एनडीए गठबंधन मजबूत स्थिति में दिख रहा है, लेकिन कांग्रेस और लोकतंत्र गठबंधन भी चुनौती दे रहे हैं। कई हाई-प्रोफाइल पोर्टफोलियो पर मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। (टैग्सटूट्रांसलेट)असम बीजेपी उम्मीदवारों की सूची(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव 2026(टी)गौरव गोगोई(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम समाज सूची(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम चुनाव चुनाव(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव 2026(टी)हिमंता बिस्वा सरमा(टी)गौरव गोगोई(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी

बंगाल की रेटिंग में ‘सोशल मीडिया वॉर’: बीजेपी-टीएमसी के आरोप-प्रत्यारोप ने भूकंप के झटके, वोट से पहले गरमाया मोरचा

बंगाल की रेटिंग में 'सोशल मीडिया वॉर': बीजेपी-टीएमसी के आरोप-प्रत्यारोप ने भूकंप के झटके, वोट से पहले गरमाया मोरचा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर एक बार फिर से मुख्य युद्धभूमि बन गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और पारंपरिक कांग्रेस (टीएमसी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नारा तेजी से चल रहा है। दोनों के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी ऑर्केस्ट्रा ने इंटरमीडिएट को और हॉट कर दिया है, जिससे 2026 विधानसभा चुनाव और रंग भरने की तैयारी चल रही है। बीजेपी ने अपने पोस्ट में राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नौकरी चोरी करो, टिकट पाओ, राशन चोरी करो, टिकट पाओ, छात्रों का अपमान करो, टिकट पाओ, आरक्षण का अपमान करो, टिकट पाओ लेकिन ज्यादा समय तक नहीं। 46 दिनों में यह दमनकारी शासक लोकतांत्रिक तरीके से उखाड़ फेंका गया। यह अभिकथन अधिसूचना रणनीति के अनुसार सीधे तौर पर शासन और शेयर बाजार को केंद्र में लाया जाता है। बीजेपी ने सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के आरोप लगाए इसी क्रम में बीजेपी ने एक और पोस्ट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है. पार्टी ने लिखा, “एक जैसे लोग साथ ही रहते हैं। ममता बनर्जी ने राघव को समय सीमा की धमकी दी है, ठीक वैसे ही जैसे अकबरुद्दीन ने कहा था, लेकिन हम जानते हैं कि बीजेपी सांप्रदायिक सौहार्द के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं करती है। बंगाल में सांप्रदायिकता का अंत बंद है।” इस कथन में कहा गया है कि भाजपा की चुनावी चर्चा धार्मिक और पहचान आधारित राजनीति के लिए है। संदेश स्पष्ट है: 👉 नौकरियाँ चुराओ, टिकट पाओ👉राशन चुराओ, टिकट पाओ👉हिन्दुओं का अपमान करो, टिकट पाओ 👉आदिवासियों का अपमान करो, टिकट लो लेकिन ज्यादा समय तक नहीं. 46 दिनों में इस दमनकारी शासन को लोकतांत्रिक तरीके से उखाड़ फेंका जाएगा! क्योंकि #PaltanoDorkarChaiभाजपा सरकार pic.twitter.com/6c3lYlyl1i – भाजपा पश्चिम बंगाल (@भाजपा4बंगाल) 19 मार्च 2026 वहीं, अनौपचारिक कांग्रेस ने भी पलटवार करते हुए बीजेपी पर टिकट वितरण में लोगों को आपराधिक दायित्व देने का आरोप लगाया है. पार्टी ने कहा, “बीजेपी की टिकटें एक आपराधिक रिकॉर्ड के समान योग्यता रखती हैं। बंगाल बेहतर है। 2026 में चुनाव परिणाम स्पष्ट और स्पष्ट होंगे।” इस बयान से साफ है कि टीएमसी के खिलाफ और उम्मीदवारों के चयन के मुद्दे को बीजेपी बनाना चाहती है। महाराष्ट्र-यूपी की घटनाएं टीएमसी कार्यकर्ताओं को लेकर सिर्फ बंगाल ही नहीं, महिलाओं की सुरक्षा का नुकसान भी राजनीतिक सिद्धांत का बड़ा आधार बन गया है। टीएमसी ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कथित स्मृतियों का खुलासा करते हुए बीजेपी को लाभ का आधार दिया। पार्टी ने कहा, “महिलाओं की जिंदगी बीजेपी राज्यों में लगातार मौलाना के रूप में है। एक 13 साल के दशक में एसिड अटैक की घटना हुई लेकिन ‘बेटी बचाओ’ का नारा नेतृत्व वाले नेताओं की शैलियां पूछती हैं।” इसमें आरोप लगाया गया है कि महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था में केंद्रीय आरक्षण रणनीति बनाने की कोशिश की जा रही है। .@बीजेपी4इंडिया आपराधिक रिकार्ड की तरह टिकट बांटना योग्यता है। बंगाल बेहतर जानता है. 2026 में फैसला जोरदार और स्पष्ट होगा। pic.twitter.com/tBEgRFQWp4 – अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (@AITCofficial) 18 मार्च 2026 टीएमसी ने एक अन्य पोस्ट में उत्तर प्रदेश की घटना का जिक्र करते हुए कहा, “चार साल की बच्ची को चॉकलेट का लालच दिया गया, उसके साथ दोस्ती की गई और हत्या कर दी गई। बीजेपी फिर से राज्यों में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।” इस प्रकार के कथनों में सांकेतिक एवं राजनीतिक दोनों गुटों के लिए प्रभावकारी तत्व तैयार किए जाते हैं। महाजंगलराज में @बीजेपी4इंडिया-उत्तर प्रदेश शासित। एक 4 साल की मासूम बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर एक दरिंदा अपने साथ खींच ले गया, उसके साथ बेरहमी से बलात्कार किया गया और फिर पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी गई। उसका शव उससे महज 500 मीटर की दूरी पर झाड़ियों में कूड़े की तरह फेंक दिया गया था… pic.twitter.com/FNSHDIRjl4 – अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (@AITCofficial) 18 मार्च 2026 तेज़ होंगे आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि सोशल मीडिया पर इस तरह के हमले आगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं। इससे एक तरफ पार्टी के बीच ऊर्जा की धार तेज होती है। 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की राजनीति अब सिर्फ रैली और सभाओं तक सीमित नहीं रही। डिजिटल मंच पर चल रही यह जंग यह संकेत है कि आने वाले महीनों में आरोप-प्रत्यारोप और भी तेज होंगे। इस चुनावी लड़ाई में असली सवाल यही रहेगा कि सोशल मीडिया का यह डॉक्यूमेंटेशन के जजमेंट को प्रभावित करेगा, या फिर जमीन पर विकास और शासन का मुद्दा ही अंतिम परिणाम तय करेगा। ये भी पढ़ें ‘बीजेपी में अब कोई एंट्री नहीं’: इस बार दलबदलुओं के लिए डोर बंदा, बंगाल की भविष्यवाणी में नया सस्पेंस

भोपाल कोर्ट से रिहाई के बाद असलम की गिरफ्तारी:VIDEO:प्राइवेट कार में बैठा ले गए पुलिसकर्मी, एक घंटे तक कार में घुमाया, कार्रवाई की

भोपाल कोर्ट से रिहाई के बाद असलम की गिरफ्तारी:VIDEO:प्राइवेट कार में बैठा ले गए पुलिसकर्मी, एक घंटे तक कार में घुमाया, कार्रवाई की

नगर निगम के स्लॉटर हाउस से निकले मांस में गोमांस की पुष्टि के बाद गिरफ्तार असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा को जमानत मिलने के बाद बुधवार रात उसकी रिहाई हो गई। हालांकि जेल से निकलते ही उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया है। सूत्रों की मानें तो असलम पर धारा 151 के तहत कार्रवाई जोन-4 के एक थाना पुलिस ने की है। अब पुलिस उसके खिलाफ रासुका प्रतिवेदन पेश करने की तैयारी कर रही है। बुधवार रात करीब 10 बजे भोपाल सेंट्रल जेल के मुख्य द्वार से असलम के निकलते ही पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। लाल रंग की पोलो कार से उसे जेल परिसर से बाहर निकाला गया। इस कार का एक वीडियो भी सामने आया है। पहले उसे परवलिया सड़क फिर सीहोर रोड ले जाया गया। इसके बाद देर रात उसे थाने लेकर पहुंची पुलिस ने टीम ने कार्रवाई की। इधर गो मांस तस्करी से जुड़े पूरे मामले का खुलासा करने का दावा करने वाले भानू हिंदू का आरोप है कि पुलिस की ओर से कमजोर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी। इन्हीं खामियों का फायदा असलम को बेल मिलने के लिए मिला। भानू के मुताबिक पुलिस ने केस की शुरुआत से ही लापरवाही की थी। गो मांस से भरे कंटेनर को छोड़ दिया गया था। हैदराबाद जिस सैंपल को जाना था, वह खराब हो गया। मथुरा से आई सेंपल रिपोर्ट के आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई थी। पुलिस की खामियों के कारण ही असलम को कोर्ट से राहत मिली। लेकिन असलम पर रासुका की कार्रवाई नहीं की गई तो समस्त हिंदू संगठनों के साथ सड़कों पर उतरेंगे और अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन किया जाएगा। 70 दिन बाद हुई थी जेल से रिहाई करीब 70 दिन बाद एडीजे पंकज कुमार जैन की अदालत ने 35 हजार रुपए के मुचलके पर असलम को रिहा करने के आदेश दिए। हालांकि, देर रात भोपाल सेंट्रल जेल से रिहाई के बाद से असलम गायब है। असलम के भाई आसिफ के अनुसार वे असलम को लेने जेल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें उससे मिलने तक नहीं दिया गया। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। जानिए कोर्ट ने जमानत आदेश में क्या कहा अदालत ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि संबंधित अपराध न तो मृत्युदंड और न ही आजीवन कारावास से दंडनीय है और यह न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। आरोपी दो माह से अधिक समय से अभिरक्षा में है, जबकि मामले की विवेचना पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी प्रस्तुत की जा चुकी है। ऐसे में ट्रायल पूरा होने में समय लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए जमानत देना उचित है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी का यह दूसरा जमानत आवेदन था। पहला आवेदन गुण-दोष के आधार पर निरस्त नहीं हुआ था। अब परिस्थितियों में बदलाव और जांच पूरी होने के बाद जमानत दी गई। साथ ही शर्त रखी गई है कि आरोपी ट्रायल में कोई बाधा नहीं डालेगा और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएगा। इन शर्तों पर बाहर आया असलम असलम की तरफ से वकील विजय चौधरी और जगदीश गुप्ता ने कोर्ट में पक्ष रखा। कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ शर्तें भी रखी हैं। वह केस की सुनवाई में कोई रुकावट नहीं डालेगा। बिना कोर्ट की इजाजत के वह देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेगा। सुनवाई के दौरान वह बार-बार तारीखें आगे बढ़ाने (स्थगन) की मांग नहीं करेगा। एडिशनल डीसीपी बोले नहीं की कोई कार्रवाई एडिशनल डीसीपी जोन-4 मलकीत सिंह ने बताया कि उनके जोन से असलम के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्हें असलम की गिरफ्तारी के संबंध में कोई जानकारी भी नहीं है। क्या था पूरा मामला 17 दिसंबर की रात हिंदू संगठनों ने पुलिस कंट्रोल रूम के पास एक कंटेनर पकड़ा था, जो जिंसी स्लॉटर हाउस से निकला था। इसमें 26 टन मांस भरा था। जब इस मांस के सैंपल मथुरा की लैब भेजे गए, तो वहां से आई रिपोर्ट में इसमें गोमांस होने की बात सामने आई। रिपोर्ट आने के बाद 8 जनवरी 2026 को जहांगीराबाद पुलिस ने केस दर्ज कर असलम और ड्राइवर शोएब को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने निकाली निगम-पुलिस की अर्थी असलम चमड़ा को जमानत मिलने के बाद शहर में विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते हुए नगर निगम और पुलिस प्रशासन की सांकेतिक अर्थी निकाली और पुतला दहन किया। इस दौरान मौके पर जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शन को देखते हुए एहतियातन मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर स्थिति पर नजर बनाए रखी, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि इतने गंभीर मामले में आरोपी को जमानत मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। उनका कहना था कि इससे आम लोगों में गलत संदेश जाएगा और पीड़ित पक्ष के साथ अन्याय हुआ है। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

चांदी ₹13 हजार गिरकर ₹2.37 लाख पर आई:5 दिन में ये ₹31 हजार गिरी, सोने की कीमत आज ₹4 हजार घटकर ₹1.52 लाख हुई

चांदी ₹13 हजार गिरकर ₹2.37 लाख पर आई:5 दिन में ये ₹31 हजार गिरी, सोने की कीमत आज ₹4 हजार घटकर ₹1.52 लाख हुई

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 19 मार्च को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 13 हजार रुपए घटकर 2.37 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले मंगलवार को इसकी कीमत 2.50 लाख रुपए किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 4 हजार रुपए गिरकर 1.52 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले 18 मार्च को सोना 1.56 लाख रुपए प्रति 10g था। अमेरिका-ईरान जंग के कारण सोना 5 कारोबारी दिन में 9 हजार और चांदी 31 हजार सस्ती हुई है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 19 मार्च, 2026) सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.52लाख तक सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है। चांदी की कीमतों में भारी क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.37 लाख तक चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह अपने ऑल टाइम हाई से बहुत तेजी से नीचे आई है। गिरावट के मुख्य कारण: मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है: कैश की बचत: मिडिल ईस्ट जंग के कारण निवेशक जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। वे अपने गोल्ड और सिल्वर को बेचकर ‘कैश’ इकट्ठा कर रहे हैं ताकि अनिश्चितता के समय उनके पास लिक्विड मनी रहे। प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, इसलिए बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं। ब्याज दरों का असर: अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने से भी कीमती धातुओं की चमक थोड़ी फीकी हुई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना-चांदी के दाम में आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। इसके चलते सोना 1.50 लाख और चांदी 2.50 लाख रुपए तक आ सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए।

चांदी ₹13 हजार गिरकर ₹2.37 लाख पर आई:5 दिन में ये ₹31 हजार गिरी, सोने की कीमत आज ₹4 हजार घटकर ₹1.52 लाख हुई

चांदी ₹13 हजार गिरकर ₹2.37 लाख पर आई:5 दिन में ये ₹31 हजार गिरी, सोने की कीमत आज ₹4 हजार घटकर ₹1.52 लाख हुई

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 19 मार्च को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत 13 हजार रुपए घटकर 2.37 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले मंगलवार को इसकी कीमत 2.50 लाख रुपए किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 4 हजार रुपए गिरकर 1.52 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले 18 मार्च को सोना 1.56 लाख रुपए प्रति 10g था। अमेरिका-ईरान जंग के कारण सोना 5 कारोबारी दिन में 9 हजार और चांदी 31 हजार सस्ती हुई है। सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.52लाख तक सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है। चांदी की कीमतों में भारी क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.37 लाख तक चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह अपने ऑल टाइम हाई से बहुत तेजी से नीचे आई है। गिरावट के मुख्य कारण: मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है: कैश की बचत: मिडिल ईस्ट जंग के कारण निवेशक जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। वे अपने गोल्ड और सिल्वर को बेचकर ‘कैश’ इकट्ठा कर रहे हैं ताकि अनिश्चितता के समय उनके पास लिक्विड मनी रहे। प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, इसलिए बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं। ब्याज दरों का असर: अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने से भी कीमती धातुओं की चमक थोड़ी फीकी हुई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना-चांदी के दाम में आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। इसके चलते सोना 1.50 लाख और चांदी 2.50 लाख रुपए तक आ सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए।

‘बीजेपी में अब कोई एंट्री नहीं’: इस बार दलबदलुओं के लिए डोर बंदा, बंगाल की भविष्यवाणी में नया सस्पेंस

'बीजेपी में अब कोई एंट्री नहीं': इस बार दलबदलुओं के लिए डोर बंदा, बंगाल की भविष्यवाणी में नया सस्पेंस

पश्चिम बंगाल की राजनीति 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा उद्देश्य सामने आया है। पार्टी कांग्रेस (टीएमसी) ने अपनी उम्मीदवार सूची में 74 स्टैनलिस्ट के टिकटें संगठन में हलचल पैदा कर दी है। इस फैसले के बाद जहां पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं बीजेपी ने इस मुद्दे पर अपनी रणनीति साफ कर दी है ‘अब नो एंट्री’. डीगपुर सदर सीट से बीजेपी प्रत्याशी दिलीप घोष ने टीएमसी के इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “टीएमसी के विधायक और मंत्री ने इतनी ज्यादा कट मनी खा ली है कि वे इसके आदी हो गए हैं। उन्हें इतनी सलाह दी गई है कि जब टिकट कटेगा तो वे हो जाएंगे। 74 खच्चर के टिकट कट गए, हर कोई नाराज है और बाकी लोग बीजेपी से संपर्क कर रहे हैं।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब बंगाल की राजनीति में टिकट वितरण को लेकर असंतोष और दलबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिकों का मानना ​​है कि इतनी बड़ी संख्या में टिकट टीएमसी की नीतिगत रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं, जिसका मकसद सत्ता-विरोधी सरकार को कम करना और नए लोकतंत्र को मौका देना है। #घड़ी | खड़गपुर, पश्चिम मेदिनीपुर: 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए टीएमसी ने अपनी आधिकारिक उम्मीदवार सूची से 74 मौजूदा विधायकों को हटाने पर, खड़गपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष का कहना है, “टीएमसी, उनके विधायकों और उनके मंत्री ने खा लिया है… pic.twitter.com/DYNnRDzPvd – एएनआई (@ANI) 19 मार्च 2026 बीजेपी का ‘नो एंट्री’ संदेशदिलीप घोष ने भाजपा की नई रणनीति को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने कहा, “पिछली बार आम गलती हुई, हमने शायद हरियाणवी लोगों को टिकटें दे दी थीं और हमें नुकसान पहुंचाया था। इस बार बीजेपी किसी को भी प्रवेश नहीं दे रही है।” इस बयान में बीजेपी के लिए बेहतर ‘फ़िल्टर मैकेनिज़्म’ को स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। 2021 के चुनाव में डेमो न कर पाने के बाद पार्टी अब उम्मीदवार चयन में सबसे ज्यादा नजर आ रही है। का फोकस अब ऐसे मजबूत पर है जो भाजपा के रूप में मजबूत हो और ज़मीनी स्तर पर काम कर सके। टीएमसी में असंतुलन और अनुपातइसी तरह की पार्टी ने अपने 209 जिलों में से 135 को बंधक बनाकर 74 के टिकट काट दिए, जबकि 15 नेताओं की ओर से रुख बदल दिया गया। सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं, जिनमें पार्थ चटर्जी (बेहाला पश्चिम), विवेक गुप्ता (जोरासांको), परेश पाल (बेहाला), असित मजूमदार (चिनसुरा), अभिनेता चिरंजीत (बारासात), कंचन आमिर (उत्तरपाड़ा), क्राउनमणि अधिकारी (राणा घाट दक्षिण) और जीवन कृष्ण साहा (बर्धमान) जैसे नेता शामिल हैं। इसके अलावा चार मंत्री ताजमुल हुसैन, बिप्लब रॉय चौधरी, ज्योत्सना मंडी और मनोज तिवारी भी उम्मीदवार सूची में जगह नहीं बना सके, जिससे पार्टी के बड़े स्तर पर राजनीतिक पुनर्संरचना के संकेत मिले हैं। 74 लेबल के टिकट कटने के बाद टीएमसी में असंतोष बढ़ने की आशंका को नकारा नहीं जा सका। बंगाल की राजनीति में टिकटों का वितरण हमेशा से ही होता रहा है और कई बार यह दलबदल का कारण भी बना है। बीजेपी का दावा है कि कई समर्थक नेता अपने संपर्क साध रहे हैं, लेकिन पार्टी के दिग्गज नेता ‘नो एंट्री’ की नीति अपनाकर अपने निर्देशन का संदेश देना चाहते हैं। यह रणनीति भाजपा को दलबदल की राजनीति से दूर ‘संगठन आधारित चुनाव’ की ओर ले जाने की कोशिश है। ये भी पढ़ें अमेरिकी नेताओं को ईरान में कैसे बनाया जाएगा? विदेश मंत्री मार्को रुबियो और पीट हेगसेथ के घर के ऊपर सूर्योदय देखा गया

बैतूल में जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू, विक्रमोत्सव भी मनाया:केंद्रीय मंत्री उइके की मौजूदगी में ब्रम्हध्वज वंदना भी हुई

बैतूल में जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू, विक्रमोत्सव भी मनाया:केंद्रीय मंत्री उइके की मौजूदगी में ब्रम्हध्वज वंदना भी हुई

बैतूल जिले में गुरुवार को शासकीय जयवंती हॉक्सर महाविद्यालय परिसर में जल संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े दो बड़े कार्यक्रमों का संयुक्त आयोजन किया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने प्रदेश सरकार के “जल गंगा संवर्धन अभियान” का शुभारंभ किया। इसी के साथ विक्रमोत्सव 2026 के तहत जिला स्तरीय सूर्य उपासना कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत “जल गंगा संवर्धन अभियान” के शुभारंभ से हुई। इस दौरान जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक नाट्य प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें जल के महत्व और संरक्षण की आवश्यकता को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। अभियान के तहत जिले की सभी नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में 30 जून तक जल संरक्षण, जल स्रोतों की साफ-सफाई, मरम्मत, भूजल संवर्धन और पौधारोपण जैसे कार्य किए जाएंगे। ब्रम्हध्वज वंदना की भी गई इसके बाद विक्रमोत्सव के अंतर्गत सूर्य उपासना कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर ब्रम्हध्वज वंदना की गई और धार्मिक-सांस्कृतिक वातावरण में सूर्य उपासना की गई। मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल के कलाकारों ने “सम्राट विक्रमादित्य” नाटक का मंचन कर उपस्थित लोगों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से परिचित कराया। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशन में आयोजित इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विद्यार्थी और नागरिक मौजूद रहे। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य जहां एक ओर जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना था, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं को बढ़ावा देना भी था।

9 दिन तक अखंड ज्योत जलाकर मन्नत मांग रहे श्रद्धालु:छतरपुर में प्राचीन खेरे की देवी मंदिर में सुबह से लगीं कतारें; देखिए तस्वीरें

9 दिन तक अखंड ज्योत जलाकर मन्नत मांग रहे श्रद्धालु:छतरपुर में प्राचीन खेरे की देवी मंदिर में सुबह से लगीं कतारें; देखिए तस्वीरें

छतरपुर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन गुरुवार को जिलेभर के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। शहर के सैकड़ों वर्ष पुराने प्राचीन खेरे की देवी माता मंदिर में सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए अगले 9 दिनों तक लगातार जलने वाली अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कर रहे हैं और विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना का दौर जारी है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, शहर का खेरे की देवी माता मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि नगर की रक्षा के लिए माता यहां विराजमान हुई थीं। इसी आस्था के कारण नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में विशेष रूप से धार्मिक माहौल रहता है। व्रत रखकर सुख-समृद्धि की कर रहे कामना मंदिर परिसर में गुरुवार सुबह से ही पूजा, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। महिलाएं और युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में माता के दर्शन के लिए पहुंचे। कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर माता से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। पुजारी बोले- सच्चे मन से मांगी गई इच्छा पूरी होती है नवरात्रि के पहले दिन से ही श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए मंदिर में ज्योत प्रज्ज्वलित करते हैं, जो अगले नौ दिनों तक लगातार जलती रहती है। मंदिर के पुजारी रज्जू महाराज ने बताया, “यहां वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है कि भक्त नवरात्रि में ज्योत जलाकर माता से अपनी मनोकामना मांगते हैं। सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है।” नवरात्रि के पहले दिन उमड़ी इस आस्था की भीड़ से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया है, जो अगले नौ दिनों तक इसी तरह बना रहेगा। देखिए अन्य तस्वीरें…

खरगोन में तीन दिन ओला-बारिश का अलर्ट:खेतों में पड़ी 60% गेहूं की फसल पर खतरा; 70-80 km/h की रफ्तार से चली हवाएं

खरगोन में तीन दिन ओला-बारिश का अलर्ट:खेतों में पड़ी 60% गेहूं की फसल पर खतरा; 70-80 km/h की रफ्तार से चली हवाएं

खरगोन में गुरुवार को अचानक मौसम बदल गया और 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। इस बदलाव से 39 डिग्री के तापमान वाली गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन खेतों में खड़ी 60 प्रतिशत गेहूं की फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है। खरगोन में तेज गर्मी के बीच बुधवार रात गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हुई और गुरुवार सुबह भी हल्की बारिश दर्ज की गई। इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं, जिससे 39 डिग्री सेल्सियस तापमान वाली गर्मी से लोगों को राहत मिली। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक जिले में गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। 60 प्रतिशत गेहूं की फसल पर बढ़ा खतरा जिले में इन दिनों गेहूं की कटाई का काम चल रहा है, लेकिन लगभग 60 प्रतिशत फसल अभी भी खेतों में खड़ी है या कटाई के बाद पड़ी हुई है। अचानक बदले मौसम और ओलावृष्टि की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान अपनी कटी हुई फसल को बारिश से बचाने के लिए उसे प्लास्टिक तिरपाल से ढंकने का प्रयास कर रहे हैं। किसान बोले- तैयार फसल खराब होने का डर वड़ा गांव के किसान वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया, “ओला-बारिश से तैयार फसल खराब होने का डर है।” इस साल खरगोन जिले में 1.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई की गई थी, जिसमें से लगभग 70 हजार हेक्टेयर में कटाई पूरी हो चुकी है। 1 अप्रैल से शुरू होगी समर्थन मूल्य पर खरीदी खेतों में फसल की कटाई के साथ-साथ जिले में थ्रेसिंग और भंडारण का काम भी जारी है। किसानों की उपज के लिए जिले में 1 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी शुरू की जाएगी।

चैत्र नवरात्रि शुरू, पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा:नरसिंहपुर के सदर मड़िया मंदिर में मांगी हर मुराद पूरी होती; दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु

चैत्र नवरात्रि शुरू, पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा:नरसिंहपुर के सदर मड़िया मंदिर में मांगी हर मुराद पूरी होती; दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु

चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज गुरुवार से शुरू हो गया है। पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। नरसिंहपुर शहर के प्राचीन सदर मड़िया मंदिर में भी आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने मां को जल अर्पित कर पूजा की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि मांगी गई हर मुराद पूरी होती मंदिर को लेकर लोगों में गहरी आस्था है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। इसी कारण दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त घट-कलश स्थापना भी कराते हैं। मंदिर के पुजारी मोहित कृष्ण शास्त्री ने बताया कि चैत्र नवरात्रि का पहला दिन हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस नौ दिवसीय पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। उन्होंने ब्रह्म पुराण का हवाला देते हुए कहा कि इसी कालखंड में ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए इस पर्व का विशेष महत्व है। सच्ची श्रद्धा से मां भगवती सभी मनोकामनाएं पूर्ण करतीं पुजारी ने आगे कहा कि यदि कोई भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से मां भगवती का स्मरण करता है, तो मां उसकी पुकार अवश्य सुनती हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि देशभर में चैत्र नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।