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'केदारनाथ में सारा अली खान को एफिडेविट से मिलेगी एंट्री':BKTC अध्यक्ष बोले- सनातन में आस्था रखने वालों का स्वागत; फोटोग्राफी के लिए तय होगी जगह

'केदारनाथ में सारा अली खान को एफिडेविट से मिलेगी एंट्री':BKTC अध्यक्ष बोले- सनातन में आस्था रखने वालों का स्वागत; फोटोग्राफी के लिए तय होगी जगह

उत्तराखंड में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने एक सब-कमेटी गठित कर दी है, जो एक खास एसओपी तैयार कर रही है। इस एसओपी के आधार पर उन लोगों के प्रवेश को वर्जित किया जाएगा जो सनातन धर्म में आस्था नहीं रखते। इसी दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान को भी केदारनाथ में एंट्री नहीं मिलेगी? तो इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा- केदारनाथ में एंट्री के लिए सारा अली खान को पहले एफिडेविट देकर यह बताना होगा कि उनकी सनातन धर्म में आस्था है। वहीं, इस मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा कि उत्तराखंड जैसा राज्य, जो महिलाओं के बलिदान से बना है, वहां किसी भी श्रद्धालु की आस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सामाजिक विभाजन की राजनीति में असफल होने के बाद अब धार्मिक आस्था के मुद्दों को उठा रही है। सारा अली खान कई बार पहुंच चुकी हैं केदारनाथ सारा अली खान फिल्म ‘केदारनाथ’ बनने के बाद कई बार धाम में दर्शन करने आ चुकी हैं। अब तक उन्होंने बिना किसी रोक-टोक के मंदिर में दर्शन किए हैं। हालांकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें भी उसी प्रक्रिया का पालन करना होगा जो अन्य श्रद्धालुओं पर लागू होगी। कांग्रेस प्रवक्ता बोलीं- क्या सब पर नियम लागू होगा सुजाता पॉल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा पहले से ही एक बड़ा मुद्दा है, ऐसे में इस तरह के विवाद खड़े करना चिंता का विषय है। सुजाता पॉल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी श्रद्धालु से शपथ पत्र मांगा जा रहा है, तो क्या यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि विभिन्न धर्मों से जुड़े राजनीतिक या सार्वजनिक जीवन के लोग चारधाम यात्रा करना चाहें, तो क्या उनसे भी इसी प्रकार के दस्तावेज मांगे जाएंगे। BKTC के 3 नए नियम जो चारधाम यात्रा 2026 में लागू हो सकते हैं…. 1. गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक चारधाम यात्रा के दौरान बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-सनातनियों के प्रवेश को रोकने के लिए समिति ने पूरी तैयारी कर ली है। देहरादून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि इस विषय में पहले से चली आ रही परंपराओं का भी अध्ययन किया गया है। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य के समय लागू व्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि सनातन धर्म को न मानने वाले लोगों के प्रवेश को वर्जित करने की व्यवस्था लागू की जाएगी। 2. मंदिर परिसर के 60 मीटर तक मोबाइल ले जाना मना मंदिर समिति ने तय किया है कि केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम से करीब 50 से 60 मीटर की परिधि में कोई भी व्यक्ति मोबाइल फोन लेकर नहीं जा सकेगा। यह नियम केवल श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मंदिर समिति के पदाधिकारियों और अन्य हक-हकूकधारियों पर भी समान रूप से लागू होगा। मंदिर समिति का कहना है कि इससे मंदिर परिसर में अनुशासन बनाए रखने और भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। 3. फोटोग्राफी के लिए तय किए जाएंगे अलग स्थान मंदिर परिसर में मोबाइल और फोटोग्राफी को लेकर नई व्यवस्था भी लागू की जा रही है। समिति ने निर्णय लिया है कि धामों में फोटोग्राफी के लिए विशेष स्थान निर्धारित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को केवल उन्हीं स्थानों तक मोबाइल ले जाने की अनुमति होगी। 5 प्वाइंट्स में जानिए प्रेस वार्ता में क्या बोले BKTC अध्यक्ष

ऋतिक रोशन और प्राइम वीडियो की नई फिल्म का ऐलान:कॉमेडी फिल्म मेस में चोरों और सनकी मकान मालिक की कहानी; राजेश कृष्णन करेंगे डायरेक्ट

ऋतिक रोशन और प्राइम वीडियो की नई फिल्म का ऐलान:कॉमेडी फिल्म मेस में चोरों और सनकी मकान मालिक की कहानी; राजेश कृष्णन करेंगे डायरेक्ट

ऋतिक रोशन के प्रोडक्शन हाउस ‘HRX फिल्म्स’ और ओटीटी प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो ने नई कॉमेडी फिल्म ‘मेस’ बनाने का ऐलान किया है। इस फिल्म का निर्देशन ‘लूटकेस’ और ‘क्रू’ जैसी फिल्में बना चुके राजेश ए. कृष्णन करेंगे। यह फिल्म एक ऐसी रात की कहानी है जहां चोर एक सनकी आदमी के घर में फंस जाते हैं। इसमें चोरों का एक गैंग एक ऐसे आदमी के घर में चोरी करने के इरादे से घुसता है जिसे ओसीडी (OCD – ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) है। यानी वह सफाई और चीजों को व्यवस्थित रखने के मामले में काफी सनकी है। घर में घुसने के बाद चोरों के लिए वहां से जिंदा और सुरक्षित निकलना ही सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। ऋतिक और ईशान रोशन करेंगे प्रोड्यूस इस फिल्म को ऋतिक रोशन और उनके भाई ईशान रोशन अपने बैनर ‘HRX फिल्म्स’ के तहत प्रोड्यूस कर रहे हैं। HRX फिल्म्स और प्राइम वीडियो के बीच यह दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है। इससे पहले दोनों ने मिलकर थ्रिलर सीरीज ‘स्टॉर्म’ का ऐलान किया था। फिल्म की स्क्रिप्ट को राजेश कृष्णन और कपिल सावंत ने अमेरिकी लेखक पॉल सोटर की एक ओरिजिनल कहानी के आधार पर तैयार किया है। ऋतिक रोशन ने कहा- राजेश कृष्णन का विजन शानदार ऋतिक रोशन ने इस पार्टनरशिप पर खुशी जताते हुए कहा, “प्राइम वीडियो के साथ हमारी साझेदारी हमें साहसी और नई तरह की कहानियां कहने का मौका दे रही है। राजेश कृष्णन कॉमेडी के साथ बेहतरीन नैरेटिव बुनने की काबिलियत रखते हैं। ‘मेस’ के लिए उनका विजन शुरुआत से ही असाधारण रहा है।” वहीं प्राइम वीडियो इंडिया के हेड निखिल मधोक ने कहा कि फिल्म की कहानी और इसके मजेदार किरदार दर्शकों को अंत तक बांधे रखेंगे। डायरेक्टर राजेश कृष्णन का ट्रैक रिकॉर्ड राजेश ए. कृष्णन को फिल्म इंडस्ट्री में उनके अलग और कॉमिक स्टाइल के लिए जाना जाता है। उन्होंने साल 2019 में ‘लूटकेस’ फिल्म से बतौर डायरेक्टर बॉलीवुड में कदम रखा था। हाल ही में आई उनकी फिल्म ‘क्रू’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया था। वे मशहूर वेब सीरीज ‘ट्रिपलिंग’ के पहले सीजन को भी डायरेक्ट कर चुके हैं। राजेश ने बताया कि ‘मेस’ की दुनिया कॉमेडी और अफरा-तफरी का एक अनोखा मेल है, जो दर्शकों को अपनी सीट से चिपकने पर मजबूर कर देगी।

समर ड्रिंक रेसिपी: गर्मी में पेय पदार्थ बनाएं ये 5 तरह के, पेट रहेगा ठंडा-ठंडा; आप देखें फिट

खुश पेट और स्वस्थ जीवन के लिए सर्वोत्तम ग्रीष्मकालीन पेय रेसिपी, आहार युक्तियाँ, आम पन्ना, छाछ, नींबू पानी, नारियल पानी, तरबूज का रस

गर्मी के मौसम में बेस्ट ड्रिंक्स के लिए | छवि: फ्रीपिक सर्वोत्तम ग्रीष्मकालीन पेय: गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडा और ठंडा रखना बहुत जरूरी होता है। तेज धूप, पेय पदार्थ और थकान से बचने के लिए सही खान-पान के साथ कोल्ड और पेय पदार्थों का सेवन बेहद खतरनाक होता है। अगर आप भी ये गर्म पेय पदार्थ कुछ टेस्टी और कॉकटेल ड्रिंक बनाना चाहते हैं, तो ये 5 आसान पेय आपके लिए असरदार हैं। यहाँ जानिए कौन से हैं वो ड्रिंक्स- आम पन्ना (आम पन्ना) गर्मी में आम पन्ना शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ लू से भी मिलता है। कैसे देखें: कच्चे आम को स्टॉक करके उसका गूदा निकाला हुआ लें, जिसमें पुदीना, जीरा पाउडर, काला नमक और चीनी शामिल हैं। ठंडा करके पिएं। छाछ (छाछ) पाचन के लिए बहुत ही स्वादिष्ट है और पेट को ठंडा करने वाली चटनी। कैसे देखें: दही में पानी पूरे फेंट लें, इसमें नमक शामिल है, इसके अलावा जीरा और हरा धनिया मिलाया जाता है। यह एक परावर्तित समर ड्रिंक है। नींबू पानी (नींबू पानी) नींबू पानी शरीर को तत्काल ऊर्जा देता है और आहार से सीखता है। कैसे देखें: पानी में नींबू का रस, नमक या चीनी का रस। यात्रा तो इसमें पुदीना भी डाल सकते हैं। नारियल पानी (Coconut Water) नारियल का पानी इलेक्ट्रोलाइट्स इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत रिफ्रेश कर देता है। इसमें आप नींबू या सब्जा बीज आक्स्टिक टेस्ट डायनासोर का उपयोग कर सकते हैं। यह शरीर को प्रमाणित करता है और निर्बलता को दूर करता है। तरबूज़ जूस (Watermelon Juice) तरबूज़ में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो गर्मी में बहुत मज़ेदार होती है। कैसे देखें: तरबूज के टुकड़े ब्लेंड करें, थोड़ा काला नमक डालें और ठंडा-ठंडा सर्व करें। इन समर ड्रिंक्स को पीने के फायदे? शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं। डिहाइड्रेशन से बचाते हैं। पाचन को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। ऊर्जा स्तर बनाये हुए हैं। गर्मी के मौसम में बाहर के कोल्ड ड्रिंक पीने की जगह घर पर बने ये चॉकलेट ड्रिंक स्ट्राइक कर सकते हैं। ये ना सिर्फ आपको ठंडक पहुंचाएगा बल्कि आपकी सेहत को भी बेहतर बनाने में मदद करेगा। यह अवश्य पढ़ें: समर रायता रेसिपी: घर पर मिनटों में जरूर बनाएं ये 3 तरह का रायता, गर्मी में शरीर रहेगा ठंडा-ठंडा (टैग अनुवाद करने के लिए)समर ड्रिंक्स रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन पेय(टी)तरबूज का रस(टी)नारियल पानी(टी)नींबू पानी(टी)आम पन्ना(टी)घर का बना पेय(टी)स्वस्थ पेय(टी)चीनी रहित पेय(टी)छाछ

बिहार के ‘लापता’ विधायक: राज्यसभा में एनडीए की अप्रत्याशित जीत के पीछे महागठबंधन के नेताओं से मिलें | राजनीति समाचार

New Zealand vs South Africa Live Cricket Score, 2nd T20I: Stay updated with NZ vs SA Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Hamilton. (Picture Credit: X@ICC)

आखरी अपडेट:मार्च 17, 2026, 14:04 IST चार विपक्षी विधायक – तीन कांग्रेस से और एक राजद से – राज्यसभा चुनाव में अपना वोट डालने में विफल रहे। बिहार के चार विधायक जो 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के मतदान से अनुपस्थित थे। (छवि: myneta) सोमवार को हुए मतदान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) द्वारा महत्वपूर्ण पांचवीं राज्यसभा सीट हासिल करने के बाद बिहार में ग्रैंड अलायंस (महागठबंधन) ताजा आंतरिक तनाव की चपेट में आ गया है, जिससे राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और उसके सहयोगी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच दरारें उजागर हो गई हैं। विपक्ष के चार विधायकों – कांग्रेस के तीन और राजद के एक – के वोट डालने में विफल रहने के बाद मुकाबला निर्णायक रूप से एनडीए के पक्ष में झुक गया, जिससे अंतिम क्षण में विपक्ष का अंकगणित पटरी से उतर गया, जिससे मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद थी। उनकी अनुपस्थिति एनडीए समर्थित उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा को राजद उम्मीदवार एडी सिंह को हराने में निर्णायक साबित हुई। जबकि नीतीश कुमार जैसे नेताओं और भाजपा उम्मीदवारों की जीत संदेह में नहीं थी, पांचवीं सीट प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में उभरी थी। विपक्ष ने आवश्यक आंकड़े को पार करने के लिए छोटी पार्टियों के समर्थन पर भरोसा करते हुए अपनी संख्या से अधिक समर्थन जुटा लिया था। हालाँकि, सहयोगियों के मजबूती से टिके रहने के बावजूद, अप्रत्याशित गैर-प्रदर्शन ने समीकरण को बिगाड़ दिया। इस घटनाक्रम से राजद के भीतर गुस्सा फैल गया है और नेताओं ने अनौपचारिक रूप से खराब आंतरिक समन्वय के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया है। हालाँकि, राजद नेता तेजस्वी यादव ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर बेईमानी का आरोप लगाया, उन्होंने दावा किया, “उन सांसदों को प्रलोभन की पेशकश की गई जिन्होंने या तो गठबंधन के खिलाफ मतदान किया या दूर रहे,” और जोर देकर कहा, “हम उनसे लड़ने के लिए तैयार हैं, और हमारा संघर्ष जारी रहेगा।” आखिर में नंबर गेम उन चार विधायकों पर टिक गया जो राज्यसभा चुनाव से गायब थे। यहां बताया गया है कि वे कौन थे: सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा एक कांग्रेस विधायक हैं जो 2025 के चुनावों में वाल्मिकी नगर निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधानसभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने जद (यू) के एक पदाधिकारी का स्थान लिया। उनका राजनीतिक करियर उत्तर-पश्चिमी बिहार में जमीनी स्तर के प्रतिनिधित्व पर केंद्रित रहा है। हालाँकि, महत्वपूर्ण राज्यसभा वोट के दौरान उनकी अनुपस्थिति ने अब उनकी राजनीतिक स्थिति को सुर्खियों में ला दिया है, ऐसे समय में आंतरिक अनुशासन और समन्वय के बारे में गठबंधन के हलकों में सवाल उठ रहे हैं जब हर वोट का महत्वपूर्ण महत्व होता है। मनोज विश्वास मनोज विश्वास कांग्रेस के विधायक के रूप में फारबिसगंज निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्होंने 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में करीबी मुकाबले में जीत हासिल की थी। उनकी जीत कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण थी, खासकर सीमांचल क्षेत्र में, जहां पार्टी भाजपा से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अपने चुनावी पदचिह्न को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही थी। जबकि विश्वास को वफादारी बदलने के लिए नहीं जाना जाता है, वह राज्यसभा चुनाव मतदान से अनुपस्थित रहे, जिससे उनके रुख पर सवाल उठे। मनोहर प्रसाद सिंह मनोहर प्रसाद सिंह मनिहारी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक हैं. राज्यसभा की वोटिंग से उनकी अनुपस्थिति की चर्चा उनकी तरल राजनीतिक यात्रा के कारण अधिक हो रही है। वह शुरू में जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़े थे, उन्होंने खुद को उस दौर में पार्टी के साथ जोड़ा जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी का बिहार में महत्वपूर्ण प्रभाव था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में उनका स्थानांतरण बाद में हुआ, जो बिहार की राजनीति की विशेषता वाले बार-बार होने वाले पुनर्गठन को दर्शाता है, जहां नेता अक्सर बदलते जाति समीकरण, निर्वाचन क्षेत्र की गतिशीलता और गठबंधन विन्यास के आधार पर संबद्धता का पुनर्मूल्यांकन करते हैं। फैसल रहमान फैसल रहमान राजद के नेता हैं और पूर्वी चंपारण जिले के ढाका निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं। उनकी पृष्ठभूमि में कृषि और सामाजिक सेवा शामिल है, और उन्होंने पहले 2015 में सीट जीती थी, 2020 में हार गए और फिर 2025 में जीते। हाल ही में राज्यसभा वोट की अनुपस्थिति में, उन्होंने कहा कि वह अपनी मां के खराब स्वास्थ्य के कारण दिल्ली लौट आए हैं। पहले प्रकाशित: मार्च 17, 2026, 10:58 IST समाचार राजनीति बिहार के ‘लापता’ विधायक: राज्यसभा में एनडीए की अप्रत्याशित जीत के पीछे महागठबंधन के नेताओं से मिलें अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

राशन वितरण को लेकर पूर्व सरपंच-कोटेदार के बेटे में मारपीट:शहडोल में कम राशन देने और हाथ से लिखी पर्ची बांटने का आरोप

राशन वितरण को लेकर पूर्व सरपंच-कोटेदार के बेटे में मारपीट:शहडोल में कम राशन देने और हाथ से लिखी पर्ची बांटने का आरोप

शहडोल के ग्राम हिरवार में शासकीय उचित मूल्य दुकान पर राशन वितरण को लेकर विवाद के बाद पूर्व सरपंच और कोटेदार के पुत्र के मारपीट हाे गई।हितग्राहियों ने राशन कम देने का आरोप लगाया है।घटना का वीडियो भी सामने आया है। राशन में कटौती और फर्जीवाड़े का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि उचित मूल्य दुकान संचालक द्वारा हर राशन कार्ड धारक के हिस्से में 5 से 10 किलोग्राम तक गेहूं और चावल की कटौती की जा रही है। इसके अलावा, पारदर्शिता को ताक पर रखकर कंप्यूटराइज्ड पर्ची के बजाय हाथ से लिखी पर्चियां थमाई जा रही हैं, जिससे अनाज के वास्तविक वितरण का मिलान करना मुश्किल हो रहा है। जनपद सदस्य बोले- शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई जनपद सदस्य भारत सिंह अंकू ने बताया कि कोटेदार की मनमानी और खाद्यान्न वितरण में अनियमितताओं की शिकायत कई बार अधिकारियों से की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की उदासीनता के कारण गरीब हितग्राहियों का हक मारा जा रहा है। इस हंगामे के बावजूद, फिलहाल किसी भी पक्ष ने थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। पुलिस का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है और लिखित शिकायत मिलते ही वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, ग्रामीण अब जिला प्रशासन से कोटेदार के खिलाफ निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

उत्तराखंड के बाद गुजरात में UCC की तैयारी:समिति ने CM भूपेंद्र पटेल को रिपोर्ट सौंपी, 24 मार्च को सदन में पेश हो सकता है विधेयक

उत्तराखंड के बाद गुजरात में UCC की तैयारी:समिति ने CM भूपेंद्र पटेल को रिपोर्ट सौंपी, 24 मार्च को सदन में पेश हो सकता है विधेयक

उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी जल्द यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो सकता है। यूसीसी के लिए गठित समिति ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत अध्ययन के बाद इसने अंतिम सिफारिशों सहित अपनी रिपोर्ट पेश की है। गुजरात सरकार आज शाम को इस रिपोर्ट पर मंत्रियों और अधिकारियों के साथ चर्चा करेगी। यूसीसी से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा मौजूदा विधानसभा सत्र में ही की जाएगी। रिपोर्ट 23 मार्च को सदन में रखी जा सकती है, जबकि 24 मार्च को बिल पेश किए जाने की संभावना है, जो इस बजट सत्र का अंतिम दिन भी है। अगर यह बिल पास हो जाता है, उत्तराखंड के बाद यूसीसी लागू करने वाला गुजरात देश का दूसरा राज्य बन जाएगा। महिलाओं के समान अधिकारों को प्राथमिकता मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने X पर लिखा- गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) के क्रियान्वयन के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति ने अपनी विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज हैं रंजना प्रकाश देसाई पांच सदस्यीय इस समिति का गठन 4 फरवरी 2025 को किया गया था, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई कर रही हैं। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज हैं। वे 13 सितम्बर 2011 से 29 अक्टूबर 2014 तक सर्वोच्च न्यायालय में जज रहीं। जस्टिस रंजना देसाई जम्मू-कश्मीर पर परिसीमन आयोग की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। देसाई सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले बॉम्बे हाईकोर्ट की जज भी रह चुकी हैं। भारत में केवल उत्तराखंड में UCC लागू भारत में अभी केवल उत्तराखंड में UCC लागू है। वहां 28 जनवरी 2025 को UCC लागू किया गया। मुख्यमंत्री आवास में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इसका ऐलान किया था। यूसीसी लागू होने से राजय में 5 नियम सख्ती से लागू हुए- ——————— UCC से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- UCC लागू करने का समय आ गया:संसद फैसला करें; शरियत कानून में सुधार की जल्दबाजी न करें, इससे नुकसान की आशंका सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का समय आ गया है। इस पर फैसला करना कोर्ट के बजाय संसद का काम है। कोर्ट शरियत कानून 1937 की कुछ धाराओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। पूरी खबर पढ़ें…

कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर ओडिशा के 3 विधायकों को निलंबित कर दिया | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:मार्च 17, 2026, 13:41 IST पार्टी नेताओं ने कहा कि संगठन की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए अनुशासनात्मक कदम जरूरी थे, खासकर राज्यसभा चुनाव के बाद। निलंबित विधायकों – रमेश जेना, सोफिया फिरदौस और दसरथी गमांग – पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने का आरोप था। (न्यूज़18) ओडिशा कांग्रेस ने पार्टी के भीतर अनुशासन लागू करने के उद्देश्य से हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर मंगलवार को अपने तीन विधायकों को निलंबित कर दिया। निलंबित विधायकों – रमेश जेना, सोफिया फिरदौस और दसरथी गमांग – पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने का आरोप लगाया गया था, जिस पर पार्टी नेतृत्व ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। निर्णय की घोषणा करते हुए, सुजीत पाढ़ी ने कहा कि यह कार्रवाई “अनुशासनहीनता” और पार्टी के निर्देशों के उल्लंघन पर की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा क्योंकि यह पार्टी की सामूहिक रणनीति को कमजोर करता है। एक अलग कार्रवाई में, कटक शहर कांग्रेस अध्यक्ष गिरिबाला बेहरा को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। पार्टी नेताओं ने कहा कि संगठन की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए अनुशासनात्मक कदम आवश्यक थे, खासकर राज्यसभा चुनावों में राज्य इकाई के भीतर आंतरिक विभाजन उजागर होने के बाद। कांग्रेस ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों से पहले एकता के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि क्रॉस-वोटिंग ने ओडिशा में पार्टी की स्थिति कमजोर कर दी है और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाया है। ओडिशा राज्यसभा चुनाव परिणाम सत्तारूढ़ भाजपा ने सोमवार को द्विवार्षिक चुनावों में ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों में से दो पर जीत हासिल की, जबकि विपक्षी बीजद और भगवा पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने एक-एक सीट हासिल की। भाजपा की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल और पार्टी के सांसद सुजीत कुमार ने चुनाव जीतने के लिए 35-35 वोट हासिल किए। बीजद के आधिकारिक उम्मीदवार संतरूप मिश्रा ने 31 वोट हासिल कर चुनाव जीत लिया। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे ने दूसरी वरीयता के वोटों के माध्यम से चौथी सीट जीती, उन्होंने विपक्ष समर्थित उम्मीदवार दत्तेश्वर होता को हराया, जिन्हें बीजद, कांग्रेस और सीपीआई (एम) का समर्थन प्राप्त था। रे और होता दोनों प्रथम वरीयता के 23-23 वोट हासिल कर बराबरी पर थे। अधिकारी ने बताया कि बाद में दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती के बाद रे को विजेता चुना गया। चुनाव में विधानसभा के सभी 147 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनावों में क्रॉस-वोटिंग देखी गई, जिसमें कई विपक्षी विधायकों ने कथित तौर पर भाजपा उम्मीदवारों और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया। जबकि 147 सदस्यीय सदन में भाजपा और उसके समर्थित निर्दलीय विधायकों की संख्या 82 थी, भगवा पार्टी के उम्मीदवारों ने 93 प्रथम वरीयता वोट हासिल किए, जो विधानसभा में उसकी ताकत से 11 अधिक थे। अधिकारी ने कहा, ये 11 वोट बीजद (8) और कांग्रेस (3) विधायकों से आए। जगह : भुवनेश्वर, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 17, 2026, 12:55 IST समाचार राजनीति कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर ओडिशा के तीन विधायकों को निलंबित कर दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ओडिशा कांग्रेस निलंबन(टी)राज्यसभा चुनाव(टी)क्रॉस वोटिंग(टी)पार्टी अनुशासन(टी)बीजेपी समर्थित उम्मीदवार(टी)आंतरिक विभाजन(टी)ओडिशा की राजनीति(टी)पार्टी से निष्कासित सदस्य

बहुत सारे रसोइये? डिनर पॉलिटिक्स ने कर्नाटक में सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार सत्ता संघर्ष को बढ़ा दिया | राजनीति समाचार

New Zealand vs South Africa Live Cricket Score, 2nd T20I: Stay updated with NZ vs SA Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Hamilton. (Picture Credit: X@ICC)

आखरी अपडेट:मार्च 17, 2026, 13:32 IST पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि समझा जाता है कि सिद्धारमैया ने बैठक का इस्तेमाल अपने पक्ष में ताकतों को एकजुट करने और एकता का संकेत देते हुए गतिशीलता को अधिक बारीकी से समझने के लिए किया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि समानांतर रात्रिभोज की राजनीति कांग्रेस के भीतर की वास्तविकता को दर्शाती है – दो शक्ति केंद्र एक साथ काम कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि डिनर टेबल अब कर्नाटक में नया राजनीतिक युद्ध कक्ष बन गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोमवार शाम को रात्रिभोज बैठकों की श्रृंखला की पहली शुरुआत की, जिससे कर्नाटक की सबसे पुरानी पार्टी के भीतर ताजा राजनीतिक हलचल शुरू हो गई। जब वह 14 मंत्रियों के एक चुनिंदा समूह के साथ बैठे, तो सिद्धारमैया ने कर्नाटक में आगामी उपचुनावों की तैयारियों, आंतरिक आरक्षण और आसन्न कैबिनेट फेरबदल के बारे में बात की। हालाँकि, जो नज़र आता है उससे कहीं अधिक है। बैठक में शामिल होने वालों में प्रियांक खड़गे, ईश्वर खंड्रे, बीजेड ज़मीर अहमद खान, बिरथी सुरेश, कृष्णा बायरे गौड़ा, दिनेश गुंडू राव, एमबी पाटिल, एचसी महादेवप्पा, केएच मुनियप्पा, रामलिंगा रेड्डी, एसएस मल्लिकार्जुन, सतीश जारकीहोली और चेलुवरयास्वामी शामिल थे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि समझा जाता है कि सिद्धारमैया ने बैठक का इस्तेमाल अपने पक्ष में ताकतों को एकजुट करने और गतिशीलता को अधिक बारीकी से समझने के लिए किया, जबकि गुटीय बड़बड़ाहट, छाया मुक्केबाजी और उनके और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष के बीच एकता का संकेत दिया। विधायकों पर लगाम लगाने और बार-बार दिल्ली दौरे को हतोत्साहित करने के लिए उपस्थित मंत्रियों को भी एक संदेश दिया गया। समय महत्वपूर्ण है. पिछले कुछ हफ्तों में, कांग्रेस के भीतर विभिन्न समूहों के बीच कई अनौपचारिक रात्रिभोज बैठकें आयोजित की गई हैं – एमबी पाटिल के नेतृत्व में लिंगायत नेता और जी परमेश्वर और सतीश जारकीहोली के नेतृत्व में दलित नेता। इन समानांतर सभाओं ने केवल सुलगते विभाजनों को रेखांकित किया है। यह सब मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच जारी सत्ता संघर्ष के साथ-साथ पार्टी के भीतर से कैबिनेट फेरबदल की बढ़ती मांगों की पृष्ठभूमि में हो रहा है। मंत्रियों की रात्रिभोज बैठक से पहले सिद्धारमैया ने शिवकुमार के साथ एक अलग बैठक भी की. डीके का समानांतर आउटरीच शिवकुमार भी अपने चैनल चला रहे हैं। हाल के सप्ताहों में, डिप्टी सीएम ने विधायकों और चुनिंदा मंत्रियों के साथ छोटी, बंद कमरे में बातचीत की मेजबानी की है और उनमें भाग लिया है, जिनमें से कई उनके समर्थन आधार से हैं। केपीसीसी प्रमुख के रूप में छह साल पूरे करने के बाद, यह तथ्य कि सीएम बदलने और डीके को सत्ता सौंपने की मांग करने वालों को केवल कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, यह दर्शाता है कि वह आलाकमान पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं। कैबिनेट में फेरबदल के साथ, सभी क्षेत्रों और समुदायों, विशेषकर वोक्कालिगा नेताओं और पहली बार के विधायकों के बीच समर्थन को मजबूत करने का एक स्पष्ट प्रयास भी है। पहली बार के विधायकों या नए चेहरों के लिए मंत्री पद की मांग भी काफी हद तक शिवकुमार खेमे की मांग है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि समानांतर रात्रिभोज की राजनीति कांग्रेस के भीतर की वास्तविकता को दर्शाती है – दो शक्ति केंद्र एक साथ काम कर रहे हैं, प्रत्येक खुले टकराव को शुरू किए बिना अपनी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। इस बीच, कर्नाटक कांग्रेस आगामी उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारी तेज कर रही है। पार्टी नेतृत्व ने दावणगेरे दक्षिण और बागलकोट में अभियान प्रयासों की निगरानी के लिए पहले ही मंत्रियों की टीमों को तैनात कर दिया है। पहले प्रकाशित: मार्च 17, 2026, 13:32 IST समाचार राजनीति बहुत सारे रसोइये? डिनर पॉलिटिक्स ने कर्नाटक में सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष को बढ़ा दिया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

गर्मी आते ही बच्चों में बढ़ जाता है डिहाइड्रेशन का खतरा, ये 7 लक्षण दिखें तो तुरंत हो जाएं अलर्ट

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Summer Health Tips for Kids: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में जैसे ही गर्मी ने दस्तक दी, बच्चों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का खतरा भी बढ़ने लगा है. खासकर दूषित पानी और तेज धूप इस समस्या को और बढ़ा देते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो बच्चों की हालत गंभीर हो सकती है. बच्चों में जल्दी होता है डिहाइड्रेशनविशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र गुप्ता बताते हैं कि छोटे बच्चों के शरीर का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए उनमें पानी की कमी जल्दी हो जाती है. अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए तो बच्चे जल्दी कमजोर पड़ जाते हैं और उनकी तबीयत अचानक बिगड़ सकती है. ये लक्षण दिखें तो तुरंत समझें खतराडॉक्टर के मुताबिक, डिहाइड्रेशन के कुछ साफ संकेत होते हैं त्वचा सूखी होना, आंखों के नीचे गड्ढे पड़ना,बच्चा चिड़चिड़ा होना, उल्टी या दस्त, अगर ये लक्षण दिखें तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें. धूप में ज्यादा रहने से बढ़ता है खतरातेज धूप में ज्यादा देर रहने से शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है, जिससे पानी की कमी हो जाती है. इसलिए बच्चों को दोपहर में बाहर खेलने से रोकें और उन्हें बार-बार पानी या तरल पदार्थ देते रहें. पेशाब का रंग भी देता है संकेतअगर बच्चा कम या गाढ़ा पेशाब कर रहा है, तो यह भी डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत बच्चे को पानी, जूस या ORS देना चाहिए. हालत गंभीर लगे तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें. ये सावधानियां रखें जरूरीदोपहर में बच्चों को बाहर न भेजें, सुबह 10 बजे से पहले या शाम 6 बजे के बाद ही खेलने दें, साफ और शुद्ध पानी ही पिलाएं, बार-बार तरल पदार्थ देते रहें कपड़ों का भी रखें ध्यानगर्मी में बच्चों को ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनाएं. गहरे रंग के कपड़े गर्मी ज्यादा सोखते हैं, जिससे शरीर जल्दी गर्म हो जाता है. हल्के और आरामदायक कपड़े बच्चों को ठंडा रखने में मदद करते हैं. थोड़ी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानीडॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है. इसलिए समय पर ध्यान देना, सही खान-पान और पानी की पर्याप्त मात्रा देना ही सबसे बड़ा बचाव है.

बीसीजी रिपोर्ट-अंतिम: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम:सत्ता से दूर, अमेरिका के निचले सदन में 1%, सीनेट में कोई भारतवंशी नहीं

बीसीजी रिपोर्ट-अंतिम: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम:सत्ता से दूर, अमेरिका के निचले सदन में 1%, सीनेट में कोई भारतवंशी नहीं

जहां पैसे और नॉलेज की बात आती है तो भारतीय मूल के अमेरिकी अपनी जनसंख्या से कहीं आगे हैं, लेकिन जब सत्ता और प्रतिनिधित्व की बात होती है, तो वहां वे अपनी जनसंख्या के अनुपात तक भी नहीं पहुंचे हैं। यानी यह समुदाय अमेरिका को बनाने में तो बड़ी भूमिका निभा रहा है, लेकिन अमेरिका की दिशा तय करने में उसकी भूमिका अभी बहुत छोटी है। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार रिपोर्ट ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के आखिरी हिस्से में पढ़िए, अमेरिका की सत्ता में भारतवंशियों का कितना वजन है? अमेरिका में भारतवंशियों की राजनीतिक यात्रा 1955 में एक सांसद से शुरू होकर 6 सांसदों तक ही पहुंच पाई है। मतलब अमेरिकी संसद में अब भी भारतवंशियों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। उच्च सदन सीनेट में तो एक भी भारतवंशी नहीं है। 2024 के चुनावों के बाद निचले सदन में भारतवंशियों की संख्या बढ़कर 6 हो गई। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने काश पटेल को एफबीआई डायरेक्टर बनाया है। डॉक्टर जय भट्टाचार्य को नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। श्रीराम कृष्णन को सरकार के लिए एआई नीति मार्गदर्शन के लिए अहम भूमिका सौंपी गई, जो भारतवंशियों की बढ़ती मौजूदगी दर्शाता है। संसद; 435 सीटों में 6 पर ही भारतवंशी – अमेरिकी संसद के निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) की कुल 435 सीटों में से केवल 6 सीटों (1.4%) पर भारतवंशी। – 2012 से पहले केवल दो भारतवंशी पहुंचे थे। 1955 में दलीप सिंह सौंद और 2004 में बॉबी जिंदल। 2012 में अमी बेरा के बाद धीरे-धीरे यह संख्या अब आधा दर्जन हो पाई है। – उच्च सदन यानी सीनेट में इस वक्त एक भी भारतवंशी नहीं है। 100 सीनेटर होते हैं, 50 राज्यों से 2-2, निचले सदन से पास बिल में सीनेट की मुहर जरूरी। – कमला हैरिस 2016 में पहली भारतीय-अमेरिकी उच्च सदन की सदस्य बनीं। 2020 में उपराष्ट्रपति बनने के बाद उच्च सदन में कोई भारतवंशी नहीं है। शीर्ष सरकारी एजेंसियों में… सिर्फ 3% – हेल्थकेयर और साइंस के क्षेत्र में भारतवंशियों का बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन ‘सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल’ (सीडीसी) और ‘नेशनल साइंस फाउंडेशन’ (एनएसएफ) जैसी अमेरिका की शीर्ष सरकारी एजेंसियों के उच्च पदों पर केवल 3% भारतवंशी। – मतलब ये कि काम करने की जगह पर तो भारतवंशियों की हिस्सेदारी 10% है, पर फैसले लेने वाली जगह पर 3% ही है। – किस शोध को पैसा मिले, किस विश्वविद्यालय को अनुदान मिले, किस तकनीक पर निवेश हो… ये सब यही संस्थान तय करते हैं। – इन पदों पर भारतीय-अमेरिकी कम होने से उनके समुदाय की जरूरतें, उनके शोध के विषय व प्राथमिकताएं पीछे रह जाती हैं। जबकि चुनाव में ये बड़े गेम चेंजर हैं – अमेरिका के कुल योग्य वोटर्स में भारतवंशियों की हिस्सेदारी भले ही 1% है, लेकिन वे ‘स्विंग स्टेट्स’ (चुनावों में निर्णायक माने जाने वाले राज्य) में अपना खासा प्रभाव रखते हैं। ये वोटर अब इमिग्रेशन रिफॉर्म, नागरिक अधिकारों और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों जैसे मुद्दों पर मुखर होकर मतदान कर रहे हैं। – रिपोर्ट कहती है कि ये मतदाता करीबी मुकाबलों में परिणाम तय करने या पलटने में बहुत अहम। – 2024 के रिपब्लिकन प्राथमिक चुनाव में निक्की हेली और विवेक रामास्वामी, दोनों भारतीय मूल के उम्मीदवार थे। डेमोक्रेट में कमला हैरिस राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी थीं। ये इस समुदाय की राजनीतिक अहमियत बताता है। आईएमएफ, डब्ल्यूएचओ और वर्ल्ड बैंक में अपनी छाप छोड़ी भारतीय मूल के पेशेवर वैश्विक संस्थानों में महत्वपूर्ण नेतृत्व निभा रहे हैं। आईएमएफ में गीता गोपीनाथ ने कोविड में आर्थिक पुनरुद्धार और टीकाकरण रणनीतियों को दिशा दी। आईएमएफ के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने 2008 के वित्तीय संकट की पहले से चेतावनी देकर वैश्विक वित्तीय नीति को प्रभावित किया। विश्व बैंक में इंदरमीत गिल और ममता मूर्ति ने विकास नीतियों को नए विचारों के साथ मजबूत किया। 2023 से अध्यक्ष अजय बंगा जलवायु परियोजनाओं व गरीबी उन्मूलन पर ध्यान दे रहे हैं। डब्ल्यूएचओ में सौम्या स्वामीनाथन ने स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक सहयोग मजबूत किया।