केले को लंबे समय तक ताजा कैसे रखें: गर्मियों में केले 1-2 दिन में ही हो जाते हैं खराब? अपनाएं ये आसान ट्रिक्स, छोटे-छोटे रेस्तरां तक

केले भंडारण युक्तियाँ | छवि: फ्रीपिक केले को लंबे समय तक ताज़ा कैसे रखें: केला एक ऐसा फल है जो लगभग हर घर में खा जाता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह बहुत जल्दी पककर काला पड़ जाता है। अक्सर देखा जाता है कि 1 से 2 दिन में ही मशालेदार गोलियां लग जाती हैं। कई लोग इसी कारण से कम मात्रा में केले दिशानिर्देश रखते हैं। हालाँकि कुछ आसान किचन ट्रिक्स अपनाकर केले को लंबे समय तक ताज़ा और ताज़ा रखा जा सकता है। सही तरीके से स्टोर करने पर कई दिन तक खराब नहीं होता और उनका स्वाद भी बना रहता है। आइये आपको बताते हैं इन ट्रिक्स के बारे में… केले एनिमेटेड समय इस बात का ध्यान जब भी केले चालू हो तो कोशिश करें कि सभी केले एक जैसे हों। कुछ केले पूरी तरह से बताए गए लेंथ जिसमें तत्काल कहानी जा सके, जबकि कुछ अनकहे या कम रिकॉर्ड वाले केले लें। इससे केले धीरे-धीरे पकेंगे और लंबे समय तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। केलों को गुच्छे से अलग करके बताएं केले को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए उन्हें गुच्छे से अलग कर देना एक अच्छा तरीका माना जाता है। जब केले एक साथ गुच्छे में रहते हैं तो वे तेजी से मंदिर बनाते हैं। ऐसे में उन्हें अलग-अलग भंडारों से लेकर मसालों की प्रक्रिया तक में बदल दिया जाता है और वे ज्यादातर समय तक समुद्री किनारे तक रहते हैं। आराम करो केले के चॉकलेट से एथिलीन गैस गायब हो जाती है, जो फल को मसाले में तेजी से मदद करता है। यदि केले के प्लास्टर को पॉलिथिन या क्लिंग रैप से अच्छी तरह लपेट दिया जाए तो एथि गैस का असर कम हो जाता है। इससे केले जल्दी काले नहीं नाटकीय और ज्यादातर समय तक सेफ और ताज़ा रहते हैं। अन्य फलों से अलग जगह केले केले को कभी भी सेब की तरह फलों के साथ नहीं रखना चाहिए। कई फल एथिलीन गैस पेट्रोलियम हैं, जिनके आस-पास फल रैपिड से ज्वालामुखी बने हुए हैं। ऐसे में केले को अलग-अलग टोकरी या फल रखने की जगह पर रखना बेहतर होता है। इससे उनके जल्दी खराब होने की संभावना कम हो जाती है। केला हैंगर का भी उपयोग किया जा सकता है आजकल बाजार में केले रखने के लिए खास तरह के के हैंगर भी मिलते हैं। इन्हें केले टांगकर रखने से उन पर दबाव नहीं पड़ता और वे जल्दी खराब नहीं होते। इस तरीके से केले कई दिनों तक समुद्र तट बने रह सकते हैं। विटामिन सी का उपयोग कर सकते हैं केलॉन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए विटामिन सी की टैबलेट का उपयोग भी किया जा सकता है। इसके लिए विटामिन सी की गोली को पानी में घोल लें और उस पानी से केले को दांतों से धो लें। इससे केले अर्ली ब्लैक नॉट प्रोजेक्टर हैं और उनकी ताजगी लंबे समय तक बनी हुई है। केलों को सही टेंपरेचर में पोस्ट करें केलों को गलने से बचने के लिए उन्हें बहुत ज्यादा गर्म जगह पर नहीं रखना चाहिए। साथ ही उन्हें फ़र्ज़ी में रखने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे उनका छिलका जल्दी काला पड़ सकता है। केले को हमेशा नॉमिनेट रूम का तापमान बेहतर बना रहता है। छात्र तो उन्हें वैक्स पेपर से स्नातक करके भी रखा जा सकता है ताकि वे अधिक से अधिक समय तक सुरक्षित रहें। यह भी पढ़ें: अहान-अनीत ‘सैयारा’ के बाद अनीत पड्डा और अहान पैज ने फिर से हाथ मिलाया (टैग्सटूट्रांसलेट)केले भंडारण युक्तियाँ(टी)केले को लंबे समय तक ताजा कैसे रखें(टी)केले को काला होने से रोकें(टी)केले रसोई हैक(टी)केले संरक्षण युक्तियाँ(टी)घर पर केले भंडारण(टी)फल भंडारण युक्तियाँ(टी)केले को हफ्तों तक ताजा रखें
दिल्ली में युवक की हत्या पर एमपी में विरोध:धार में समाज जन बोले- दोषियों को फांसी दी जाए, परिवार को मिले मुआवजा

दिल्ली के उत्तमनगर में होली के दिन दलित युवक तरुण खटीक की हत्या के विरोध में धार में प्रदर्शन किया गया। क्षत्रिय मालवा खटीक सेना धार के नेतृत्व में समाज के लोगों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर डिप्टी कलेक्टर आशा परमार को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। समाजजनों ने बताया कि होली जैसे पावन पर्व पर हुई इस घटना से समाज में चिंता का माहौल है। समाजजनों ने मांग की कि इस हत्या के सभी दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। उनके खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर कठोरतम दंड, यानी फांसी की सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके अतिरिक्त, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता के तौर पर एक करोड़ रुपए का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की गई। यह मांग परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से की गई है। ज्ञापन में दोषियों की अवैध संपत्तियों और घरों पर बुलडोजर चलाने की भी मांग शामिल थी। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से इस गंभीर घटना का संज्ञान लेने और पीड़ित परिवार को जल्द न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया। यह ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के लोग और विभिन्न संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे।
रियल एस्टेट- छोटे शहरों में प्रॉपर्टी नया सोना:बुनियादी ढांचे पर निवेश; 2-4 साल में 100% तक बढ़ सकते हैं दाम, इंदौर-जयपुर नए हॉटस्पॉट

अगर आप जमीन-जायदाद में निवेश की सोच रहे हैं तो जल्द फैसला करना फायदेमंद हो सकता है। इंदौर, भोपाल, जयपुर, पटना, रांची और लुधियाना जैसे टियर-2,3 शहर बेहतर विकल्प हो सकते हैं। प्रॉपटेक कंपनी स्क्वेयर यार्ड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 2 से 4 साल में इन शहरों में प्लॉट के दाम 25% से लेकर 100% तक बढ़ सकते हैं। स्क्वेयर यार्ड्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में ₹12.2 लाख करोड़ के सरकारी पूंजी निवेश, नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और रोजगार विस्तार की वजह से छोटे शहरों की जमीन आगामी वर्षों में सबसे तेज रफ्तार से महंगी होगी। इंदौर, जयपुर, भुवनेश्वर, कटक, वाराणसी और पुरी जैसे शहर इस लहर की अगुआई करेंगे। मुख्य शहर के बाहरी इलाकों में सबसे तेज बढ़ेंगे दाम 15-40% – मेट्रो कॉरिडोर के 1 किमी दायरे में 30-70% – नए एयरपोर्ट/ एक्सप्रेसवे के पास 80-100% – हाई-ग्रोथ पेरिफेरल प्लॉटेड एरिया 20-60% – इंडस्ट्रियल कॉरिडोर/ लॉजिस्टिक हब (स्रोत: स्क्वेयर यार्ड्स रिपोर्ट 2026) 2020-25 – टियर-2 और टियर 3 शहरों में 5 साल में दोगुना तक हो चुके दाम यह कोई नई शुरुआत नहीं है। 2020 से 2025 के बीच भी छोटे-मझोले शहरों में जमीन और मकान, दोनों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। हर शहर में प्लॉट की बढ़त फ्लैट से 10-25% अधिक रही है। इंदौर में इस दौरान फ्लैट 72% तक और प्लाट में 85-100% तक तेजी देखी गई। शहर फ्लैट महंगे प्लॉट के दाम बढ़े इंदौर 72% 85-100% जयपुर 65% 75-90% भोपाल 49% 60-75% नागपुर 47% 55-70% चंडीगढ़ 44% 50-65% रायपुर 40% 45-60% लुधियाना 38% 45-60% पटना 35% 40-55% रांची 33% 40-55% जबलपुर 28% 35-50% उदयपुर 25% 35-50% स्रोत: एनएचबी रेजिडेक्स एचपीआई, प्रॉपइक्विटी 50 लाख से 1 करोड़ रुपए के घरों की मांग सबसे ज्यादा निवेशक – लंबे समय के लिए प्लॉट सबसे बेहतर विकल्प। इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के पास लिए गए प्लॉट अगले 5-10 वर्षों में मल्टी-बैगर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। नौकरीपेशा वर्ग – 50 से 1 करोड़ रुपए के मकानों की मांग सबसे ज्यादा। पहली बार घर खरीदने वाले – ब्याज दरें घटने, आसान सुविधाएं मददगार। 200 इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स और ‘अर्बन चैलेंज फंड’ से रियल एस्टेट में क्रांति टियर-2,3 शहरों में 200 से ज्यादा पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर की बहाली, सेमीकंडक्टर मिशन-2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स-केमिकल सेक्टर में विस्तार से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे, जो इन शहरों में घर-प्लॉट की मांग बढ़ाएंगे। सरकार का 1 लाख करोड़ का ‘अर्बन चैलेंज फंड’ इसे रफ्तार देगा। आखिर टियर-2 और 3 शहरों में उछाल क्यों? मेट्रो शहरों में सीमित और महंगी जमीन से विस्तार की सीमित संभावनाएं हैं। छोटे शहरों में कम कीमतों पर बड़े प्लॉट खरीदे जा सकते हैं। इन्फ्रा निवेश का सबसे ज्यादा लाभ उन्हीं इलाकों को, जहां अभी विकास कम है। 70% ब्लू-कॉलर और बड़ी संख्या में वाइट-कॉलर जॉब्स महानगरों से निकलकर छोटे शहरों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
इम्तियाज की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' का टीजर आउट:दिलजीत दोसांझ लीड रोल में दिखाई देंगे; भारत-पाक बंटवारे के बीच दिखेगी अधूरी प्रेम कहानी

फिल्म मेकर इम्तियाज अली की अगली फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ का टीजर शुक्रवार दोपहर 1:00 बजे रिलीज कर दिया गया है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, वेदांग रैना और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में हैं। टीजर से अंदाजा लग रहा है कि यह फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन की थीम पर आधारित एक इमोशनल लव स्टोरी है। यह फिल्म इसी साल जून में सिनेमाघरों में रिलीज होगी। सोशल मीडिया से पुराने प्यार को मिलाएंगे दिलजीत टीजर में एक्टर्स को इंट्रोड्यूस कराया गया है। इसमें दिलजीत दोसांझ एक यूट्यूबर के रोल में नजर आ रहे हैं। कहानी में दिलजीत इंटरनेट और सोशल मीडिया की मदद से नसीरुद्दीन शाह को उनके दशकों पुराने प्यार से मिलाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। हालांकि, इन कयासों पर पूरी मुहर फिल्म का ट्रेलर आने के बाद ही लगेगी। फिल्म के टाइटल ट्रैक ‘मैं वापस आऊंगा’ को टीजर में यूज किया गया है। इसे खुद दिलजीत दोसांझ ने गाया है। वेदांग बनेंगे युवा नसीरुद्दीन शाह फिल्म के वीडियो को देखकर लग रहा है कि वेदांग रैना इसमें नसीरुद्दीन शाह के युवा अवतार की भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, शरवरी वाघ फिल्म में उनकी प्रेमिका के किरदार में नजर आ रही हैं। यह फिल्म एक लड़के और एक लड़की की प्रेम कहानी से शुरू होकर पूरे देश के इमोशन्स को छूती हुई आगे बढ़ती है। इम्तियाज और दिलजीत की दूसरी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के जरिए दिलजीत दोसांझ और इम्तियाज अली दूसरी बार साथ काम कर रहे हैं। इससे पहले इस जोड़ी ने ‘अमर सिंह चमकीला’ में साथ काम किया था, जिसे एमी अवॉर्ड्स में नॉमिनेशन मिला था। खास बात यह है कि इस फिल्म में इम्तियाज अली, संगीतकार ए.आर. रहमान और गीतकार इरशाद कामिल की मशहूर तिकड़ी फिर से लौट रही है। इम्तियाज बोले- माइग्रेशन हमारे दौर की सबसे बड़ी कहानी फिल्म के बारे में बात करते हुए निर्देशक इम्तियाज अली ने कहा, क्या प्यार कभी खो सकता है? हमारे दौर की सबसे बड़ी कहानी माइग्रेशन की है। यह कहानी विभाजन के समय लोगों की यादों और अनुभवों से प्रेरित है। मुझे यह कहानी बड़े पर्दे पर कहने का मौका मिला, यह मेरा सौभाग्य है।
वॉरजोन में फंसे डॉ. मिलर का मिशन इम्पॉसिबल:ट्रम्प सरकार ने हाथ खड़े किए तो अमेरिकी डॉक्टर ने मोर्चा संभाला; कतर से 4 महाद्वीप होकर 62 घंटे में घर पहुंचे

अमेरिका के न्यू ऑरलियन्स के रहने वाले डॉक्टर जेय मिलर के लिए भारत की ‘वन्स-इन-ए-लाइफटाइम’ फैमिली वेकेशन एक डरावने अनुभव में बदल गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव के बीच फंसे डॉक्टर ने जिस तरह से अपनी जान बचाकर घर वापसी की, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। 28 फरवरी को डॉ. मिलर दोहा (कतर) से डलास के लिए रवाना हुए थे, लेकिन ईरान-इजरायल तनाव के चलते हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उनका विमान एक घंटे बाद वापस दोहा लौट आया। इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था। जवाब में ईरान रॉकेट और ड्रोन दाग रहा था। कतर समेत मध्य-पूर्व के कई देशों ने एयरस्पेस बंद कर दिया। फ्लाइटें रद्द हो गईं। हजारों यात्री फंस गए। डॉ. मिलर ने बताया कि उस वक्त उन्होंने अपनी पत्नी को फोन किया और बस इतना कहा कि ‘मैं उनसे बहुत प्यार करता हूं, क्योंकि मुझे नहीं पता था कि मैं घर लौट पाऊंगा या नहीं।’ मिलर 45 साल के पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट हैं। वे मरीजों के पास लौटने के लिए पत्नी स्वाथी नर्रा और 5 साल की बेटी देवी से एक हफ्ते पहले भारत से निकल गए थे। भारत से अमेरिका जाते वक्त कतर से मिलर को अगली फ्लाइट पकड़नी थी, लेकिन युद्ध छिड़ने के कारण वे दोहा में ही फंस गए। वे एंडाज दोहा होटल में ठहरे थे। इस दौरान मिलर ने अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट को कॉल किए। फॉर्म भरे। लुइसियाना के नेताओं से संपर्क किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। अमेरिकी विदेश विभाग ने जब यह कह दिया कि यात्री अपनी सुरक्षा के लिए सरकार पर निर्भर न रहें, तब डॉक्टर मिलर ने खुद ही निकलने का रास्ता बनाया। दोहा से रियाद टैक्सी से 9 घंटे में पूरा किया सफर एशिया (सऊदी अरब) – दोहा एयरपोर्ट बंद होने के कारण मिलर ने रियाद तक 9 घंटे का सफर टैक्सी से पूरा किया। इसके लिए उन्हें 3 कारें बदलनी पड़ीं और 2.5 लाख रुपए खर्च किए। अफ्रीका (इथियोपिया) – रियाद से वे इथोपिया की राजधानी अदिस अबाबा पहुंचे। यहां 15 घंटे रुके । यूरोप और अमेरिका – इथियोपिया से उनकी फ्लाइट तेल भरवाने के लिए इटली (रोम) रुकी, फिर शिकागो होते हुए वे न्यू ऑरलियन्स पहुंचे।
CBSE के पैटर्न पर चला राजस्थान बोर्ड:साल में दो बार होगी 10वीं की परीक्षा, फरवरी और मई में होंगे एग्जाम; ड्रॉपआउट में आएगी कमी

राजस्थान बोर्ड साल 2027 से 10वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित करने की तैयारी में है। पहला सेशन की परीक्षा फरवरी और दूसरे सेशन की परीक्षा मई महीने में होगी। राजस्थान बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन यानी RBSE ने गुरुवार, 12 मार्च को इसकी जानकारी दी। मीडिया को एड्रेस करते हुए RBSE के सचिव गजेंद्र सिंह राठौर ने 2027 से 10वीं बोर्ड परीक्षाएं दो बार आयोजित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को मंजूरी के लिए भेजा गया है। CBSE-MP बोर्ड भी 2 बार एग्जाम की घोषणा कर चुके हैं इससे पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन यानी CBSE ने साल 2026 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार कराने की घोषणा की थी। वहीं, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एमपी बोर्ड की परीक्षाएं साल में 2 बार आयोजित करने की घोषणा की थी। उनका कहना था कि छात्रों का साल खराब नहीं होना चाहिए और उनकी पढ़ाई चलती रहे। ड्रॉपआउट रेट में कमी आएगी मौजूदा दौर में राजस्थान बोर्ड 10वीं में फेल होने या कम मार्क्स आने पर पूरे 1 साल का इंतजार करना पड़ता है या सप्लीमेंट्री परीक्षा देनी पड़ती है। नई व्यवस्था लागू होने से छात्रों के पास अपनी तैयारी के अनुसार परीक्षा में शामिल होने का विकल्प रहेगा। इससे न केवल ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी, बल्कि सीखने की क्षमता में भी सुधार होगा। यही सिस्टम CBSE 10वीं परीक्षा में 2026 से लागू किया गया है। 1 महीने चली बोर्ड परीक्षा इस साल राजस्थान बोर्ड की परीक्षाएं 12 फरवरी से 11 मार्च तक आयोजित की गईं। वहीं, बोर्ड से आंसर शीट इकट्ठे करने के लिए राज्य भर में 66 कलेक्शन सेंटर बनाए गए। इसके अलावा सेंट्रलाइज्ड इवैलुएशन सेंटर भी स्थापित किए गए हैं। 20 मार्च तक जारी हो सकता है रिजल्ट सचिव ने गजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान में 30,915 टीचर्स आंसर शीट को जांचने में लगे हुए हैं। बोर्ड का लक्ष्य सभी जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करके 20 मार्च तक परीक्षा रिजल्ट घोषित करना है। —————- ये खबर भी पढ़ें… MBBS की 11,682 सीटें बढ़ीं, 43 नए मेडिकल कॉलेज खुले:2014 से अबतक 150% से ज्यादा की बढ़ोतरी, PG की सीटों में 8,967 का इजाफा हुआ एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए MBBS यानी बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी की 11,682 सीटों की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, 8,967 पोस्टग्रेजुएट (PG) सीटों को भी मंजूरी दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बुधवार, 11 मार्च को संसद में इसकी जानकारी दी। पढ़ें पूरी खबर…
बंगाल का ‘सीमांचल’? 2026 की बहस में जनसांख्यिकी हावी क्यों हो रही है | केसर स्कूप | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 13, 2026, 13:58 IST जबकि बंगाल की जनसांख्यिकी केंद्र के लिए चिंता का विषय है, एसआईआर इसे ठीक कर सकता है, भाजपा को उम्मीद है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित किया। (नरेंद्रमोदी.इन पीटीआई के माध्यम से) इस जनवरी में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के मालदा में थे, एक ऐसा जिला जहां 2011 की जनगणना के अनुसार 51% मुस्लिम आबादी है। पड़ोसी जिला मुर्शिदाबाद है – बंगाल का सबसे अधिक मुस्लिम बहुल जिला, जहां 66% आबादी इस्लाम का पालन करती है। ये दोनों जिले बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। मोदी ने मालदा में एक भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, “घुसपैठ से स्थानीय संस्कृति और भाषा पर असर पड़ रहा है और मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में दंगे इस वजह से बढ़ रहे हैं। आपको घुसपैठियों और कार्यालय में बैठे लोगों के गठजोड़ को तोड़ना होगा।” प्रधान मंत्री ने दावा किया कि “जनसांख्यिकीय संतुलन” कुछ स्थानों पर “गड़बड़” हो रहा है। यह प्रधान मंत्री द्वारा एक बार का संदर्भ नहीं था। पिछले साल अक्टूबर में, नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा था कि आज बड़ी चुनौती सामाजिक समानता को कम करने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से आती है। उन्होंने चेतावनी दी थी, ”हमारी जनसांख्यिकी को बदलने की एक साजिश है।” बिहार का सीमांचल बिहार में, नेपाल और बांग्लादेश की सीमा से लगे राज्य के उत्तरपूर्वी हिस्से में एक भौगोलिक और सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र है जिसमें चार मुस्लिम बहुल जिले शामिल हैं जिन्हें सीमांचल के नाम से जाना जाता है। इस शब्द का शाब्दिक अर्थ सीमावर्ती क्षेत्र है। किशनगंज, जिसमें 65-70% मुस्लिम आबादी है, अररिया, जिसमें लगभग 40-45% है, कटिहार, जो लगभग 40% होने का दावा करता है और पूर्णिया, जिसमें लगभग 38% मुस्लिम आबादी है, सीमांचल बनाते हैं – बिहार के सबसे अविकसित क्षेत्र। सीमांचल बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण हो गया है, खासकर असदुद्दीन ओवैसी और उनकी एआईएमआईएम जैसे नेताओं के उदय के साथ, जिन्होंने 2020 और 2025 के विधानसभा चुनावों में हर बार पांच सीटें जीतीं, यह दर्शाता है कि पार्टी ने मुस्लिम वोटों पर सवार होकर समर्थन की एक टिकाऊ क्षेत्रीय जेब बना ली है। बंगाल का सीमांचल? सरकारी सूत्रों का कहना है कि मालदा में ‘जनसांख्यिकी’ और विशेष रूप से पश्चिम बंगाल को अलग करने के बारे में प्रधानमंत्री का बार-बार दावा करना उनकी चिंता से आता है। क्या बंगाल के चार शीर्ष मुस्लिम बहुल जिले – मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और बीरभूम राज्य के अपने ‘सीमांचल’ के रूप में उभरेंगे? 2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर दिनाजपुर में 49-50% मुस्लिम आबादी है, जबकि बीरभूम में 37% है। इनमें से कई जिले समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जैसे पिछले साल मुर्शिदाबाद सांप्रदायिक हमलों से दहल गया था जिसमें तीन लोग मारे गए थे; 2016 में मालदा के कालियाचक में भीड़ हिंसा में 30 पुलिस कर्मी घायल हो गए और पुलिस भवन क्षतिग्रस्त हो गया। पिछले स्वतंत्रता दिवस पर, प्रधान मंत्री पीएम मोदी ने एक “उच्च-शक्ति जनसांख्यिकी मिशन” की घोषणा की जो अनियमित प्रवासन की “साजिश” से निपटेगा। एसआईआर चुनौती देता है लेकिन बंगाल चुनाव करीब आने के साथ, यह अक्सर चर्चा का मुद्दा रहेगा। भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के अपने पहले दिन, नितिन नबीन ने कहा, “आने वाले महीनों में, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल, केरल और पुदुचेरी में चुनाव होंगे, जहां जनसांख्यिकीय परिवर्तन राजनीतिक परिदृश्य को बदल रहे हैं। समर्पण, संघर्ष और दृढ़ता के माध्यम से, भाजपा कार्यकर्ता सभी पांच राज्यों में पार्टी की सफलता सुनिश्चित करेंगे।” लेकिन क्या चुनाव आयोग द्वारा जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चुनाव से परे सरकार की चिंता को कम कर सकता है? साठ लाख लंबित मामलों में से जांच के दायरे में सबसे अधिक मतदाताओं वाले शीर्ष पांच में से शीर्ष तीन जिले मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर हैं। मुर्शिदाबाद से 11,01,145; मालदा से 8,28,127 और उत्तर दिनाजपुर से 4,80,341 लोग इस बात पर नजर रख रहे हैं कि वे वोट देने के लिए अधिकृत हैं या नहीं। सरकारी सूत्रों का मानना है कि उनमें से कई अवैध घुसपैठिए हैं जिनकी वर्षों से बड़े पैमाने पर मौजूदगी धीरे-धीरे इन सीमावर्ती जिलों की जनसांख्यिकी को बदल रही है। पहले प्रकाशित: मार्च 13, 2026, 13:58 IST समाचार चुनाव बंगाल का ‘सीमांचल’? 2026 की बहस में जनसांख्यिकी हावी क्यों हो रही है | केसर स्कूप अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)जनसांख्यिकीय परिवर्तन(टी)नरेंद्र मोदी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)मालदा(टी)मुर्शिदाबाद(टी)सीमांचल(टी)मुस्लिम आबादी(टी)घुसपैठ
फोर्ब्स अफ्रीकी अरबपतियों की सूची में अव्वल अलीको डेंगोटे:बैंक से निकाले 90 करोड़, रातभर कैश छूते रहे ताकि अमीर होने का एहसास हो, 8 की उम्र में सीखने लगे थे बिजनेस के गुर

फोर्ब्स 2026 की सूची के अनुसार, नाइजीरियाई कारोबारी अलीको डेंगोटे (68) 2.62 लाख करोड़ रु. (28.5 बिलियन डॉलर) की संपत्ति के साथ लगातार 15वीं बार अफ्रीका के सबसे अमीर व्यक्ति बने हैं। डेंगोटे का नाइजेरिया में सीमेंट, चीनी और तेल रिफाइनरी का कारोबार है। उनकी कंपनी डांगोटे सीमेंट अफ्रीका की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी है। डेंगोटे का जीवन सादगी व विलासिता का संगम है। मुनाफा दोबारा निवेश करने के मंत्र पर चलने वाले डेंगोटे सोने की नक्काशी वाले महल में रहते हैं। वे समंदर के बीच 396 करोड़ की लग्जरी याट ‘मरिया’ पर बिजनेस डील्स करने के शौकीन हैं। पढ़िए इनके कई किस्से. पॉकेटमनी के पैसे बचाकर स्कूल में दोस्तों को कैंडी बेचा करते थे डेंगोटे डेंगोटे ने 8 की उम्र में कारोबार की पहली समझ स्कूल के मैदान में कैंडी बेचकर विकसित की। वे पॉकेट मनी बचाकर मिठाइयों के पैकेट खरीदते और उन्हें दोस्तों को बेचकर मुनाफा कमाते। उनके अनुसार, वह सिर्फ मिठाई नहीं बेच रहे थे, बल्कि लाभ कमाने की कला सीख रहे थे। कार में भरकर घर लाए थे 90 करोड़ रुपए, अमीरी परखने का अनोखा जुनून डेंगोटे को एक बार यकीन नहीं हुआ कि वे अरबपति बन चुके हैं। महज यह परखने के लिए कि अमीरी सिर्फ कागजी आंकड़े नहीं है, बैंक से 90 करोड़ रु. कैश निकलवाए। वे सारा पैसा गाड़ी में रखकर घर ले गए, उसे देखा, छुआ और तसल्ली होने पर अगले दिन वापस बैंक में जमा करवा दिया। पहली बार कारोबार के लिए 3 साल का कर्ज कहकर 3 महीने में ही चुका दिया 21 की उम्र में डेंगोटे ने चाचा से 3 साल के लिए 2.5 लाख रु. उधार लिए। इससे उन्होंने चावल और ब्राजील से चीनी आयात कर बेचना शुरू किया। उनमें कारोबार की ऐसी कला थी कि 3 महीने में कर्ज चुका दिया। यह उनके कमोडिटी ट्रेडिंग बिजनेस की पहली बड़ी सफलता थी। बेटी के जन्म के बाद छोड़ा 290 किमी की खतरनाक रफ्तार से कार चलाना डेंगोटे के पास पोर्शे और फेरारी जैसी 25 लग्जरी गाड़ियां थीं। वे युवावस्था में अक्सर 290 किमी/घंटा की रफ्तार से कार चलाते थे। लेकिन दूसरी बेटी के जन्म के बाद उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने खतरनाक ड्राइविंग करना छोड़ दिया।
बेटी के साथ दुबई में फंसीं लारा दत्ता भारत लौटीं:बोलीं- वीडियो इसलिए पोस्ट किया, क्योंकि वह मेरा आखिरी मैसेज हो सकता था

मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच दुबई में फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता और उनकी 14 साल की बेटी सुरक्षित मुंबई लौट आई हैं। लारा ने बताया कि दुबई के जेबेल अली पोर्ट के पास बमबारी के कारण स्थिति चिंताजनक थी। साथ ही एक्ट्रेस ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो इसलिए पोस्ट किया, क्योंकि उन्हें लगा कि यह उनका आखिरी मैसेज भी हो सकता था। बता दें कि लारा दत्ता ने 4 मार्च को इंस्टाग्राम पर एक इमोशनल वीडियो पोस्ट कर दुबई में अपनी बेटी सायरा के साथ फंसे होने का अनुभव शेयर किया था। हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में लारा दत्ता ने हाल ही में बताया कि उनका घर जेबेल अली पोर्ट से लगभग 10 किलोमीटर दूर है, जहां लगातार बमबारी हो रही थी। उन्होंने कहा कि परिवार के पास लौटने के लिए उन्होंने जोखिम उठाने का फैसला किया। लारा ने बताया कि वे दो घंटे की यात्रा करके फुजैराह पहुंचीं। इससे एक दिन पहले ही फुजैराह पोर्ट और ऑयल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ था। उन्होंने कहा कि यह सफर काफी डराने वाला था। एयरपोर्ट पर भी सुनाई दे रहे थे धमाके: लारा लारा दत्ता ने बताया कि एयरपोर्ट पर भी धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही थीं और सभी को उम्मीद थी कि कोई हमला न हो। उन्होंने एयरलाइंस की भी सराहना की और कहा कि इस अनुभव का असर उनकी बेटी पर पड़ सकता है। एक्ट्रेस ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि दूसरी तरफ क्या हो रहा है, क्योंकि उस समय हालात बहुत अनिश्चित थे। उन्होंने कहा कि यूएई में लोगों ने पहले कभी ऐसा माहौल नहीं देखा था। वहीं इंस्टाग्राम पर वहां के हालात बताते हुए वीडियो पोस्ट करने को लेकर एक्ट्रेस ने कहा, “मैंने वह वीडियो इसलिए पोस्ट किया, क्योंकि मेरे मन में एक प्रतिशत यह भी ख्याल आया कि शायद यह मेरा आखिरी संदेश हो सकता है।” लारा ने बताया कि मजाक में उन्होंने फिल्म वेलकम टू द जंगल में अपने को-स्टार अक्षय कुमार से कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा था, जैसे वह फिल्म एयरलिफ्ट 2 का हिस्सा हों। लारा दत्ता पिछले तीन साल से दुबई में रह रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी वहां एक फेमस टेनिस कोच के साथ ट्रेनिंग कर रही है। उस समय उनके पति महेश भूपति काम के सिलसिले में लंदन में थे। वर्कफ्रंट की बात करें तो लारा दत्ता जल्द ही अहमद खान की फिल्म वेलकम टू द जंगल में नजर आएंगी, जिसमें अक्षय कुमार मुख्य भूमिका में हैं।
थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ की ओटीटी डील कैंसिल:अमेजन प्राइम वीडियो ने 120 करोड़ की डील की थी, सेंसर विवाद में फंसी है मूवी

थलापति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेंसर बोर्ड के साथ चल रहे विवाद और रिलीज में हो रही देरी के कारण ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो ने फिल्म के साथ अपनी डील कैंसिल कर दी है। अमेजन प्राइम वीडियो ने ‘जन नायकन’ के डिजिटल राइट्स के लिए करीब 120 करोड़ रुपए की डील की थी। फैंस पिछले दो महीने से इस फिल्म के थिएटर्स में आने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक इसकी रिलीज डेट फाइनल नहीं हो सकी है। 120 करोड़ की डील से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पीछे हटा अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट कब मिलेगा और यह सिनेमाघरों में कब लगेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार इसीलिए ही अमेजन प्राइम वीडियो ने यह डील कैंसिल की है। आमतौर पर ओटीटी प्लेटफॉर्म्स थिएटर रिलीज की तारीख के आधार पर ही एग्रीमेंट करते हैं। 9 जनवरी को होनी थी रिलीज, कोर्ट तक पहुंचा मामला ‘जन नायकन’ को शुरुआत में 9 जनवरी को रिलीज करने का प्लान था। मगर सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म के कुछ सीन्स पर आपत्ति जताते हुए उन्हें हटाने का निर्देश दिया। बोर्ड का मानना था कि कुछ सीन्स काफी संवेदनशील हैं। इसके बाद मेकर्स और सेंसर बोर्ड के बीच विवाद बढ़ा और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। दो महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी फिल्म अधर में लटकी हुई है। 9 मार्च की स्क्रीनिंग भी हुई कैंसिल विवाद सुलझाने के लिए मेकर्स ने कोर्ट से केस वापस लिया और रिवाइजिंग कमेटी के पास पहुंचे। 9 मार्च को फिल्म की स्क्रीनिंग रखी गई थी, लेकिन ऐन मौके पर कमेटी के एक सदस्य के बीमार होने के कारण इसे रद्द करना पड़ा। स्क्रीनिंग कैंसिल होने से रिव्यू प्रोसेस में और देरी हो गई है। थलापति विजय की यह आखिरी फिल्म विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही है। विजय तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) पार्टी के प्रमुख हैं। उनकी पार्टी ने मार्च-अप्रैल में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। हाल ही में विजय ने अपने एक्टिंग करियर से संन्यास लेने का ऐलान किया था। उन्होंने 33 साल के लंबे फिल्मी करियर के बाद फिल्मों को अलविदा कहने का फैसला किया। उन्होंने यह घोषणा मलेशिया में फिल्म के ऑडियो लॉन्च के दौरान की थी। अब वे राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होंगे।





