PF पर मिलता रहेगा 8.25% ब्याज:2025-26 के लिए दरों में बदलाव नहीं; जून से सितंबर के बीच खातों में आएगा पैसा

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी पीएफ पर 8.25% की दर से ही ब्याज मिलता रहेगा। सरकार ने ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के इस फैसले पर अब वित्त मंत्रालय की मुहर लगेगी, जिसके बाद कर्मचारियों के खातों में पैसा क्रेडिट होगा। जून से सितंबर के बीच खाते में आएगा ब्याज का पैसा आम तौर पर सीबीटी की घोषणा के कुछ महीनों बाद ब्याज की रकम खातों में जमा की जाती है। पिछले रिकॉर्ड को देखें तो यह पैसा हर साल जून से सितंबर के बीच क्रेडिट होता है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2024-25 का ब्याज जुलाई 2025 में खातों में डाला गया था। हालांकि, इसकी कोई तय तारीख नहीं है। इसलिए समय-समय पर अपना बैलेंस चेक करें। देरी होने पर भी नहीं होगा ब्याज का नुकसान अक्सर सब्सक्राइबर्स को चिंता रहती है कि अगर ब्याज क्रेडिट होने में देरी होती है, तो क्या उन्हें नुकसान होगा? EPFO ने साफ किया है कि ब्याज क्रेडिट होने में देरी से मेंबर्स को कोई वित्तीय नुकसान नहीं होता है। नवंबर 2024 में बदले गए नियमों के मुताबिक, अब सेटलमेंट की तारीख तक का पूरा ब्याज दिया जाता है, जबकि पहले केवल पिछले महीने तक का ही ब्याज मिलता था। ‘पासबुक लाइट’ से चेक करें अपना बैलेंस EPFO ने बैलेंस चेक करने के लिए ‘पासबुक लाइट’ फीचर शुरू किया है: पिछले 5 सालों में की ब्याज दरें 1952 में 3% ब्याज से शुरुआत हुई थी फाइनेंशियल ईयर के आखिर में तय होती है ब्याज दर PF में ब्याज दर के फैसले के लिए सबसे पहले फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी की बैठक होती है। यह इस फाइनेंशियल ईयर में जमा हुए पैसों के बारे में हिसाब देती है। इसके बाद CBT की बैठक होती है। CBT के निर्णय के बाद वित्त मंत्रालय सहमति के बाद ब्याज दर लागू करता है। ब्याज दर पर फैसला फाइनेंशियल ईयर के आखिर में होता है।
भाजपा ने महाराष्ट्र से राज्यसभा सीटों के लिए 7 में से 4 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए; विनोद तावड़े सूची में | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 04, 2026, 12:35 IST भाजपा ने बुधवार को महाराष्ट्र से आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े (छवि: एक्स) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को महाराष्ट्र से आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। यह घोषणा महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव से पहले हुई है। पार्टी की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने राज्य से उच्च सदन चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, भाजपा महासचिव विनोद तावड़े, माया चिंतामन इनवाते और रामराव वडकुटे की उम्मीदवारी को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री अठावले लंबे समय से एनडीए के सहयोगी हैं और वर्तमान में राज्यसभा सांसद के रूप में कार्यरत हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तावड़े का नाम भी उम्मीदवारों में शामिल किया गया है। बीजेपी ने 9 उम्मीदवारों की घोषणा की भाजपा ने विभिन्न राज्यों में राज्यसभा चुनाव के लिए कुल नौ उम्मीदवारों की घोषणा की। बिहार से पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और शिवेश कुमार को मैदान में उतारा है. असम में तेराश गोवाल्ला और जोगेन मोहन को नामांकित किया गया है, जबकि लक्ष्मी वर्मा छत्तीसगढ़ से चुनाव लड़ेंगी। हरियाणा से संजय भाटिया उम्मीदवार हैं, जबकि पार्टी ने ओडिशा से सुजीत कुमार के साथ राज्य इकाई प्रमुख मनमोहन सामल को उम्मीदवार बनाया है। राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को होने हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: मार्च 04, 2026, 12:18 IST समाचार राजनीति भाजपा ने महाराष्ट्र से राज्यसभा सीटों के लिए 7 में से 4 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए; विनोद तावड़े सूची में अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)महाराष्ट्र(टी)विनोद तावड़े(टी)राज्यसभा सीटें
राजस्थान के युवक की ईरान के हमले में मौत:क्रूड ऑयल टैंकर पर गिरी थी मिसाइल, 3 दिन से शव ढूंढ रही एजेंसी

अमेरिका-इजराइल और ईरान की वॉर में राजस्थान के एक युवक की मौत हो गई। नागौर जिले का रहने वाला युवक क्रूड ऑयल कंपनी के शिप पर जॉब करता था। जानकारी के अनुसार 1 मार्च की सुबह ओमान के एक पोर्ट पर ईरान की मिसाइल उनके जहाज पर गिरी थी। हादसे में शिप पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। दलीप शिप के अगले हिस्से में पायलट आशीष कुमार के साथ थे। आशीष बिहार के रहने वाले थे, जिनका शव मिल गया है। वहीं, दलीप के बॉडी अभी नहीं मिली है। खासब पोर्ट पर खड़ा था शिप हमले के समय जहाज खासब पोर्ट पर खड़ा था। कंपनी के अनुसार हमले के दौरान अधिकांश क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकाल लिया गया था, लेकिन कैप्टन आशीष समेत 2 अन्य लोग मिसिंग हो गए थे। हमले के तीन दिन बाद बुधवार सुबह कंपनी ने दो लोगों की मौत की पुष्टि की। इनमें नागौर के खींवताना के रहने वाले दलीप भी शामिल हैं। ये शिप स्काईलाइट कंपनी का था। शिप कंपनी और सुरक्षा एजेंसीज तीन दिन से उनकी बॉडी ढूंढ रही हैं। दलीप के भाई देवेंद्र सिंह ने बताया – दलीप सिंह पुत्र कानसिंह ने 22 जनवरी 2026 को मर्चेंट नेवी में ड्यूटी जॉइन की थी। वो ऑयल/केमिकल टैंकर में क्रू मेंबर थे। 28 फरवरी को परिवार से हुई थी आखिरी बात जानकारी के अनुसार 28 फरवरी को आखिरी बार दिलीप की परिवार से बात हुई थी। दलीप के साथ नागौर जिले के बामणा गांव के रहने वाले सुनील कुमार भी काम करते थे। वे सुनील की ड्यूटी खत्म होने के बाद उनकी जगह ही शिफ्ट में पहुंचे थे। …. वॉर से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… UAE में फंसे भारतीयों को राजस्थानी बिजनेसमैन ने बचाया:200 इंडियंस को गाड़ियों से दुबई में अपने फार्महाउस ले गए, खाने-पीने की नि:शुल्क व्यवस्था की अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण तमाम भारतीय दुबई सहित अन्य देशों में फंसे हुए हैं। फ्लाइट्स कैंसिल होने के कारण ये लोग भारत लौट नहीं पा रहे। इसमें नौकरीपेशा से लेकर टूरिस्ट तक शामिल हैं। पूरी खबर पढ़िए…
भोपाल में अस्पताल में तोड़फोड़ पुलिस पर पथराव:मरीज की मौत के बाद गुस्साए परिजनों का हंगामा, लाठी-डंडों से लैस होकर पुलिस पर हमला

भोपाल के आनंद नगर स्थित लक्ष्मी हॉस्पिटल में एक युवक की मौत के बाद हंगामा हो गया। मृतक के परिजनों ने अस्पताल में लापरवाही से मौत के आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। अस्पताल में तोड़फोड़ और विवाद बढ़ता देख स्टाफ ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझाइश देने का प्रयास किया। लेकिन परिजनों और परिचितों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया। जमकर पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। सर में पत्थर लगने से एक पुलिसकर्मी को गंभीर चोट आई है, जबकि तीन को मामूली चोटे लगी हैं। घटना बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे की है। पूरा घटनाक्रम लगभग 1 घंटे चला। हंगामा कर रहे दो दर्जन से अधिक लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। सभी को पिपलानी थाने में रखा गया है। सुरक्षा के लिहाज से दो थानों की पुलिस बल मौके पर मौजूद है। मौत से भड़की भीड़ ने अस्पताल में की तोड़फोड़ जानकारी के मुताबिक लक्ष्मण वंशकार आदमपुर छावनी का रहने वाला था। पेट की समस्या के चलते उसे बीती बीती देर रात अस्पताल में भर्ती किया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप था कि इलाज में लापरवाही की गई। डॉक्टरों की लापरवाही के चलते लक्ष्मण की मौत हुई है। मौत के बाद मृतक के परिजन इलाज करने वाले डॉक्टर से मिलना चाहते थे। अस्पताल स्टाफ ने फिलहाल डॉक्टर का अस्पताल में नहीं होने की जानकारी दी। इसके बाद भड़के परिजनों ने हंगामा शुरू किया और अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी। 1 घंटे तक चला हंगामा हंगामा बढ़ता देख अस्पताल के स्टाफ ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने हंगामा कर रहे लोगों से थाने चलकर शिकायत दर्ज करने की बात कही। आश्वासन दिया की मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पीएम रिपोर्ट के आधार पर आगे उचित कार्रवाई तय की जाएगी। इसके बाद भी लोग तत्काल कार्रवाई करते हुए इलाज करने वाले डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। इसी मांग के चलते परिजन पुलिस से भिड़ गए और विवाद बढ़ गया जिसके बाद पथराव किया गया। भीड़ पर काबू पाने पुलिस ने भी हल्का बल प्रयोग किया। तत्काल आसपास के थानों की पुलिस को भी मौके पर बुलाया गया।
UAE में फंसे भारतीयों को राजस्थानी बिजनेसमैन ने बचाया:200 इंडियंस को गाड़ियों से दुबई में अपने फार्महाउस ले गए, खाने-पीने की नि:शुल्क व्यवस्था की

यूएई में फंसे भारतीयों के लिए राजस्थानी बिजनेसमैन धीरज जैन ने दुबई में अपने फॉर्म हाउस में रहने, खाने-पीने की निशुल्क व्यवस्था की है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण तमाम भारतीय दुबई सहित अन्य देशों में फंसे हुए हैं। फ्लाइट्स कैंसिल होने के कारण ये लोग भारत लौट नहीं पा रहे। इसमें नौकरीपेशा से लेकर टूरिस्ट तक शामिल हैं। . तमाम लोगों के पैसे भी खत्म हो गए हैं। उनके वहां ठहरने से लेकर खाने-पीने तक की दिक्कत आ गई है। ऐसी मुसीबत की घड़ी में राजस्थान के रहने वाले बिजनेसमैन धीरज जैन मददगार बनकर सामने आए हैं। जैन यूएई में रियल एस्टेट डेवलपर हैं। मूलरूप से नागौर जिले के मेड़ता सिटी के रहने वाले धीरज जैन ने 200 से अधिक भारतीयों को अलग-अलग इलाकों से गाड़ी भेजकर बुलावाया। इसके बाद दुबई के अजमान स्थित अपने फार्म हाउस में इनके ठहरने, खाने-पीने की मुफ्त व्यवस्था कराई। उधर, जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से खाड़ी देशों के लिए संचालित होने वाली चार फ्लाइट्स को बुधवार को लगातार पांचवें दिन रद्द कर दिया गया। पहले ये PHOTOS देखिए … दुबई के अजमान स्थित फॉर्म हाउस में ठहरे भारतीयों ने कहा- नागौर के मेड़ता सिटी के रहने वाले बिजनेसमैन ने रहने के लिए सुरक्षित जगह की व्यवस्था कराई है। मेड़ता सिटी (नागौर) के रहने वाले बिजनेसमैन ने दुबई के अपने फार्म हाउस में भारतीयों के रहने के लिए पूरा इंतजाम किया है। युद्ध के कारण दुबई और आसपास फंसे भारतीयों के रुकने के लिए राजस्थान के बिजनेसमैन धीरज जैन ने अपने फार्म हाउस पर इस तरह गद्दे बिछवा दिए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग यहां ठहर सकें। राजस्थान के युवक की ईरान के हमले में मौत:क्रूड ऑयल कंपनी के जहाज पर थे, मिसाइल आकर गिरी, शव की तलाश जारी जयपुर से खाड़ी-देशों की 4 फ्लाइट्स लगातार 5वें दिन रद्द:मिडिल ईस्ट तनाव का दिखा असर, पैसेंजर्स की बढ़ी परेशानी पल-पल के अपडेट के लिए ब्लॉग देखिए…
होली आई केयर टिप्स: आंखों में चला गया है पक्का रंग? चिंता न करें, घर पर ही इन आसान प्रवेश द्वार से तुरंत आराम पाएं

होली पर आंखों की देखभाल के टिप्स: होली का असली रंग, खुशियों और मौज-मस्ती का संगम है। लेकिन कभी-कभी यह मस्ती उस समय फीकी पड़ जाती है, जब गुलाल या ‘पक्का रंग’ अनजाने में हमारी आंखों में चला जाता है। आंखों में जलन के कारण आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और यहां तक कि संक्रमण का कारण भी बन सकता है। अगर इस होली आपकी या आपकी किसी की आंखों में रंग चला जाए, तो डरने की जगह धैर्य से काम लें। आइए आपको इस लेख में कुछ घरेलू चमत्कारों के बारे में विस्तार से बताया गया है। जिससे आप अपनी आंखों को बचा सकते हैं। जैसे ही आंखों में जाए रंग, बिना देर किए साफा और ठंडे पानी से आंखों को बार-बार बदलें।अपने मूल में पानी के चश्में को शामिल करें और पलकों को झपकाए। रंग पर जाना तो स्वाभाविक होता है, लेकिन आंखों को रंग देना सबसे बुरा हो सकता है। राँगे से रंग के छोटे-छोटे कण आँखों की पुतली पर कुचले जा सकते हैं, जिससे कार्नियल का अबाधीकरण का ख़तरा बढ़ जाता है। यदि आंखों में काजल जलन बनी हुई है, तो शुद्ध गुलाब जल की दो-दो बूंदें आंखों में डाल लें। गुलाब जल अपनी शीतलता के लिए जाना जाता है और यह आंखों की लालिमा को कम करने में मदद करता है। जलन और सूजन को कम करने के लिए एक साफ सूती कपड़े को ठंडा पानी में भिगोकर आंखों के ऊपर रखें। आप इलेक्ट्रिक टी-बैग या कोल्ड टी-बैग का भी उपयोग कर सकते हैं। यह आंखों की नसों को आराम पहुंचाता है। आंखों को बचाने के लिए भूलकर भी न करें ये गलतियां होली अटेम्प्ट समय-समय पर स्थिर उपकरणों से अस्पताल। अगर स्थिर तार लगे आंख में रंग चला जाए, तो सबसे पहले उसे उतारें और निकालें।बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी एंटीबायोटिक या एंटीबायोटिक आई-ड्रॉप न दें।आंखों को देखने से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धो लें।
डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को मिली धमकियां:बताया क्यों नहीं हैं द केरल स्टोरी पार्ट 2 में शामिल, ‘चरक’ से लौटे, हाथरस कांड को लाएंगे सामने

‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन एक बार फिर अपनी नई फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ को लेकर सुर्खियों में हैं। सामाजिक और संवेदनशील मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले सेन इस बार आस्था और अंधविश्वास के टकराव को बड़े पर्दे पर पेश कर रहे हैं। ‘चरक’ केवल एक ऐतिहासिक उत्सव की कहानी नहीं है, बल्कि परंपरा, तर्क, समाज और अंधविश्वास के बीच के जटिल संबंधों को दिखाने की कोशिश है। फिल्म की रिसर्च प्रक्रिया, विवाद, सेंसर बोर्ड के मुद्दे, आलोचनाओं और उनके खिलाफ उठ रही आवाजों के बारे में सुदीप्तो ने खुलकर अपने विचार साझा किए हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुदीप्तो ने बताया कि उनके लिए सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से सवाल पूछने और जागरूकता फैलाने का एक जरिया है। ‘द केरल स्टोरी’ के बाद आप फिर एक सामाजिक मुद्दे पर फिल्म लेकर आ रहे हैं। ‘चरक फेयर ऑफ फेथ’ के बारे में बताइए। कितनी रिसर्च की गई है? ‘चरक’ कोई नई परंपरा नहीं है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि यह उत्सव लगभग एक हजार साल से भी अधिक समय से पूर्वी भारत बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड साथ ही दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मनाया जाता रहा है। चैत्र महीने (करीब 15 मार्च से 15 मई) के बीच यह उत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित होता है। पश्चिम बंगाल में जैसे दुर्गा पूजा की लोकप्रियता है, उसी तरह ‘चरक’ भी अत्यंत लोकप्रिय है। इसे मां काली और भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है। लोकविश्वास है कि इस दौरान देवी-देवता धरती पर आकर भक्तों के बीच निवास करते हैं। बचपन में हम जेब खर्च बचाकर इस मेले का इंतजार करते थे। हजारों लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम इससे जुड़े हैं। लेकिन इस उत्सव का एक दूसरा पक्ष भी है तांत्रिक साधनाएं और अघोरी प्रथाएं। इतिहास में कुछ स्थानों पर ऐसी प्रथाएं रही हैं, जिन्हें अब कानूनन प्रतिबंधित किया जा चुका है। हमारी फिल्म इसी ‘फेथ’ यानी आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा को सवालों के कटघरे में खड़ा करती है। आपकी फिल्में अक्सर विवादों में घिर जाती हैं। क्या आपको लगता है लोग सच से डरते हैं? हमारे समाज में विज्ञान, तर्क और शिक्षा को हम सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हैं। जहां हमें फायदा दिखता है, वहां लॉजिक अपनाते हैं, और जहां परंपरा टकराती है, वहां चुप हो जाते हैं। मैं एक उदाहरण देता हूं। कई घरों में लड़कियों को रात में खुले बाल लेकर बाहर न जाने या कुछ विशेष रंग के कपड़े न पहनने की सलाह दी जाती है। इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता, लेकिन वे पीढ़ियों से चली आ रही हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब अंधविश्वास हिंसा में बदल जाता है। जैसे किसी दंपती को संतान न हो तो किसी मासूम की बलि देने की सोच, यह भयावह है। हाथरस की एक घटना ने मुझे झकझोर दिया, जहां कथित तौर पर स्कूल का रिजल्ट सुधारने के नाम पर एक बच्चे की बलि देने की बात सामने आई। जब तक समाज इन घटनाओं पर सवाल नहीं उठाएगा, तब तक बदलाव कैसे आएगा? ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज डेट टल गई है। आप इस प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा रहे हैं। इसे आप कैसे देखते हैं? लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है। आप किसी फिल्म से असहमत हो सकते हैं, आलोचना कर सकते हैं, बहस कर सकते हैं। लेकिन कला को रोक देना समाधान नहीं है। मेरे लिए आर्ट का काम है जो सच दबाया जा रहा है, उसे सामने लाना। सरकारें आएंगी-जाएंगी, राजनीतिक दल बदलेंगे, लेकिन समाज और आने वाली पीढ़ियां यहीं रहेंगी। इसलिए कलाकार की जिम्मेदारी है कि वह ईमानदारी से अपनी बात कहे। ‘द केरल स्टोरी 2’ में आप निर्देशक के तौर पर नजर नहीं आएंगे। इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या प्रोडक्शन टीम के साथ किसी प्रकार का मतभेद हुआ था? ऐसी कोई अनबन नहीं है। शुरुआत में मुझे ही निर्देशन करना था, लेकिन कहानी का दायरा केरल से आगे बढ़ाया गया। मेरा रिसर्च मुख्यतः केरल पर आधारित था और मैंने उस पर लगभग दस साल काम किया। मैं अखबार की खबरों या सोशल मीडिया फॉरवर्ड के आधार पर फिल्म नहीं बना सकता। जिस विषय को छूता हूं, उस पर गहन अध्ययन करता हूं। इसलिए मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया। ‘द केरल स्टोरी’ और ‘बस्तर’ के बाद आपको धमकियां भी मिलीं। क्या कभी डर लगा? सच कहूं तो हां, शुरुआत में डर लगा। ‘द केरला स्टोरी’ के बाद और खासकर ‘बस्तर’ के दौरान मेरे नाम पर बाकायदा “रेट कार्ड” चल रहा था किसी ने कहा आंख निकालने का इतना, हाथ काटने का इतना। ये सब सोशल मीडिया पर फैलाया गया। एक-दो दिन के लिए मन में डर आया, लेकिन फिर लगा कि अगर मैं डर गया तो फिल्म बनाना ही छोड़ दूं। मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि कोई फिल्म सिर्फ प्रोपेगेंडा के दम पर इतनी बड़ी सफलता हासिल कर सकती है। अगर दर्शक जुड़ते हैं तो उसकी वजह कहानी होती है, इरादा होता है। फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के पार्ट 2 को लेकर कई फिल्मकारों ने भी प्रतिक्रिया दी है। अनुराग कश्यप ने इसे ‘बकवास’ कहा, वहीं प्रकाश राज ने भी फिल्म को बेकार बताया। आप इन आलोचनाओं को कैसे देखते हैं? देखिए, लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है। अगर अनुराग कश्यप या प्रकाश राज को मेरी फिल्म पसंद नहीं आई, तो उन्हें यह कहने की पूरी स्वतंत्रता है। मैं उनके अधिकार का सम्मान करता हूं। लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी फिल्म को ट्रेलर या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर जज नहीं करना चाहिए। पूरी फिल्म देखने के बाद असहमति हो तो खुलकर आलोचना कीजिए, बहस कीजिए। हमारा संविधान हमें सवाल करने और तर्क करने का अधिकार देता है। आप सोशल मीडिया पर लिखिए, लेख लिखिए, चर्चा कीजिए मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन किसी फिल्म को रुकवाने या बैन करने की मांग करना सही परंपरा नहीं है। अगर आपको फिल्म खराब लगती है तो दर्शकों से कहिए कि मत देखिए। लेकिन कला को रोकना समाधान नहीं है। कला नदी की तरह है उसे
रील संस्कृति के समय में परिपक्व प्रेम पर खास चर्चा:सौरभ जैन और शीन दास ने कहा- सम्मान और धैर्य से ही रिश्ते चलते हैं

सौरभ राज जैन और शीन सविता दास इन दिनों वेब सीरीज संमरमर को लेकर चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में दोनों कलाकारों ने अपने किरदारों अमृता और आदित्य के जरिए बदलते दौर के प्रेम, धैर्य और रिश्तों की गहराई पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि सच्चा प्यार केवल साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि सम्मान, समझ और जिम्मेदारी निभाने का भी नाम है। आज के ‘रील संस्कृति’ और त्वरित फैसलों वाले समय में उनका मानना है कि रिश्तों की असली ताकत धैर्य और परस्पर सम्मान में छिपी है। दोनों ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए यह भी बताया कि टीवी से आगे बढ़ने के सफर में उन्हें किन धारणाओं का सामना करना पड़ा। साथ ही, सूरज बड़जात्या के साथ काम करने के अनुभव को उन्होंने परिवार जैसा बताया। पेश है कुछ खास अंश.. सवाल: शीन, आपका किरदार आपके असली जीवन से कितना मिलता-जुलता है? जवाब/शीन:मुझे लगता है कि भावनात्मक रूप से मैं और अमृता (मेरा किरदार) थोड़े संवेदनशील हैं। फर्क इतना है कि अमृता पहले बात को समझती है, उसे अपने भीतर समेटती है और फिर प्रतिक्रिया देती है। लेकिन मैं तुरंत प्रतिक्रिया दे देती हूं। मैं खुद भी यही सीखना चाहती हूं कि पहले बात को समझूं और फिर जवाब दूं। सवाल: सौरभ, आपका किरदार आदित्य आपसे कितना मिलता है? जवाब/सौरभ: आदित्य मुझे बहुत अपने जैसा लगता है। रिश्तों को समझना और उन्हें सम्मान देना मेरे लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। बचपन में हम सब थोड़े आवेग में फैसले लेते हैं और फिर उनसे सीखते हैं। आदित्य की यात्रा भी कुछ ऐसी ही है। इसलिए यह किरदार मेरे लिए बहुत जुड़ा हुआ और अपना-सा है। सवाल: बदलते समय में प्यार के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? और यह कहानी कितनी प्रासंगिक है? जवाब/शीन: एक पुरानी कहावत है कि प्यार करना आसान है, लेकिन निभाना कठिन है। जो लोग निभा लेते हैं, वही सच्चे मायने में जीतते हैं। अमृता और आदित्य ने अपने प्यार को निभाया है। उन्हें समाज के लिए शादी की जरूरत नहीं थी, क्योंकि उनका रिश्ता गहरा और सच्चा था। हालांकि परिस्थितियों के कारण अमृता को अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए अलग रास्ता चुनना पड़ा। लेकिन आदित्य ने उसका साथ नहीं छोड़ा। उसने उसे आगे बढ़ने की आज़ादी दी। यह कहानी सपनों और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की है। जीवन हमेशा सीधी रेखा में नहीं चलता। प्यार और जिम्मेदारियां हमेशा एक साथ नहीं चलतीं। यही इस कहानी की खूबसूरती है। सवाल: आज के ‘तुरंत सब कुछ पाने’ वाले दौर में इंतजार और धैर्य कितना मायने रखता है? जवाब/सौरभ: मेरे विचार से किसी भी दौर का प्यार हो, उसका आधार एक ही है, सम्मान। जहां सम्मान है, वहां धैर्य भी है। बिना धैर्य के सम्मान नहीं हो सकता। जो इस बात को समझता है, वही सच्चा प्रेम करता है। जो सिर्फ समय बिताना चाहता है, उसके लिए प्रेम का कोई अर्थ नहीं है। सवाल: आजकल ‘अल्फा मेल’ की बातें होती हैं। ऐसे में आदित्य जैसा सरल और संवेदनशील लड़का कितना प्रासंगिक है? जवाब/सौरभ: मुझे लगता है कि दस आक्रामक लोगों के बीच एक शांत और संतुलित व्यक्ति काफी होता है। सच्चे प्रेम में हिंसा नहीं, बल्कि मूल्य और जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होते हैं। सशक्त होना मतलब केवल अपने बारे में सोचना नहीं है। असली सशक्तिकरण तब है, जब आप अपने सपनों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझते हैं। आदित्य और अमृता की यात्रा यही सिखाती है। सवाल: टीवी से फिल्मों और अन्य मंचों पर आने वाले कलाकारों को ‘टीवी कलाकार’ का टैग झेलना पड़ता है। क्या आपके साथ ऐसा हुआ? जवाब/शीन: कभी-कभी लोग ऐसा कहते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि मैं जिस लगन से टीवी करती हूं, उसी लगन से फिल्म भी करूंगी। टीवी कलाकारों को अनुशासन, संवाद याद रखने और समय की कद्र करने की अच्छी आदत होती है। इसलिए यह अनुभव हमें और मजबूत बनाता है। लोगों की सोच अलग हो सकती है, लेकिन इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता। सौरभ: हां, ऐसी धारणाएं होती हैं। लेकिन मेरा मानना है कि जब आपका समय आता है, तो सब ठीक हो जाता है। अगर समय नहीं आया, तो हम कई कारण गिना सकते हैं। पर सही समय पर सब अपने आप ठीक हो जाता है। सवाल: राजश्री परिवार के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? और सूरज जी से क्या सीख मिली? जवाब/शीन: जब मैंने उनके साथ पहला शो किया था, तो उन्होंने मुझसे कहा था कि टीआरपी की चिंता मत करो, बस प्रक्रिया का आनंद लो। यह सुनकर मैं हैरान रह गई थी। इतने बड़े निर्माता का ऐसा कहना बहुत प्रेरणादायक था। आज भी जब उनका फोन आता है, तो ऐसा लगता है जैसे घर से फोन आया हो। सौरभ: पहले मैंने ‘यहां में घर घर खेली’ में एक छोटे किरदार में काम किया था, और इस बार बड़ा अवसर मिला। जब मैं पहली बार उनसे मिला, तो सोचा था कोई असिस्टेंट आकर किरदार समझाएगा। लेकिन वे खुद मेरे मेकअप कक्ष में आए और किरदार के संदर्भ लेकर समझाया। उनका काम के प्रति जुनून और सभी को सम्मान देने का तरीका बहुत प्रेरणादायक है। आज के समय में जहां सम्मान को दिखावा समझ लिया जाता है, वहां उनके साथ रहकर महसूस होता है कि सच्चा सम्मान कैसा होता है।
विजय-रश्मिका का हैदराबाद में रिसेप्शन:ट्रेडिशनल लुक में दिखीं पुष्पा फिल्म की हीरोइन; कर्नाटक डिप्टी CM समेत कई सेलेब्स पहुंचे

विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना का रिसेप्शन हैदराबाद के होटल ताज कृष्णा में हो रहा है। कपल ने 26 फरवरी को उदयपुर में इंटिमेट वेडिंग की थी। अब कपल हैदराबाद में ग्रैंड रिसेप्शन दिया है, जिसमें हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयाली और कन्नड़ इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियों के अलावा कई राजनेता शामिल हो रहे हैं। बॉलीवुड से करण जौहर, कृति सेनन समेत कई लोग रिसेप्शन में पहुंचें वहीं साउथ से चिरंजीवी, नागार्जुन, रामचरण जैसे की स्टार्स पहुंच रहे हैं। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी.के.शिवकुमार ने भी रिसेप्शन में पहुंचकर न्यूलीवेड को गुलदस्ता दिया है। 26 फरवरी को उदयपुर में हुई शादी विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की शादी 26 फरवरी को राजस्थान के उदयपुर के ममेंटोज एकाया रिसोर्ट में हुई। इस इंटिमेट वेडिंग में महज 250 करीबी ही शामिल हुए थे। कपल ने शादी में नो फोन पॉलिसी रखी थी। शादी दो अलग परंपराओं से संपन्न हुई। सुबह तेलुगु रीति-रिवाजों से विवाह हुआ, जबकि शाम को रश्मिका की कोडवा परंपरा के अनुसार रस्में निभाई गईं। रश्मिका ने लाल साड़ी और सोने के आभूषण पहने, जबकि विजय ने आइवरी धोती और लाल अंगवस्त्रम धारण किया। विजय-रश्मिका के रिसेप्शन के लाइव अपडेट के लिए व्लॉग देखें-
जीवन में लिया संकल्प, मृत्यु के बाद परिवार ने निभाया:इंदौर में 83 वर्षीय महिला की देह दान; नेत्र, त्वचा भी दान कर दी मानवता की सीख

इंदौर में 83 वर्षीय वृद्धा के निधन के बाद उनके लिए गए संकल्प को पूरा करते हुए परिजन ने उनकी देह दान की है। इसी कड़ी में उनकी आंखें और त्वचा भी दान की है जिससे दूसरे लोगों की अंधियारी जिंदगी में उजियारा होगा। मंगला सहाने (83) निवासी टेलीफोन नगर के निधन बाद परिवार ने यह फर्ज अदा किया। वह धार्मिक प्रवृत्ति की थी और कुछ दिनों से बीमार थी। दुख की इस घड़ी में परिजनों ने अंग और देहदान कर समाज के समक्ष परोपकार का अनुकरणीय संदेश दिया है। उनके दामाद डॉ. प्रमोद बंसोड़ ने बताया कि स्व. मंगला ने जीवित रहते हुए जनवरी 2023 में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में देहदान का संकल्प पत्र भरकर रजिस्ट्रेशन कराया था। उनके निधन के बाद बेटी जयश्री और दामाद डॉ. प्रमोद बंसोड़ (संयोजक, भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ, वीर सावरकर मंडल) ने उनके संकल्प को जिम्मेदारीपूर्वक पूर्ण किया। नेत्र दान एमके इंटरनेशनल आई बैंक में, त्वचा दान चोइथराम स्किन बैंक में और देह दान की प्रक्रिया एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हुई। उनके निवास पर आयोजित अंतिम विदाई के दौरान मध्य प्रदेश शासन की ओर से सम्मान स्वरूप पुलिस द्वारा “गार्ड ऑफ ऑनर”दिया गया। इस अवसर पर भोपाल के सरकारी मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. सलिल भार्गव और मुस्कान ग्रुप के सेवादार संदीपन आर्य और जीतू बगानी ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अंग और देहदान की प्रक्रिया की जानकारी साझा की। तकनीकी सेवाएं गोपाल सिरोके और जयवंत निकम की टीम द्वारा प्रदान की गईं। परिजनों ने बताया कि दिवंगत के नेत्रों से दृष्टिहीनों को नई रोशनी मिलेगी, त्वचा जले हुए मरीजों के उपचार में सहायक होगी और उनका शरीर मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स के लिए एनाटॉमी के अध्ययन में अमूल्य योगदान देगा।








