Thursday, 17 Sep 2026 | 04:28 AM

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मूवी रिव्यू: बेबी डू डाई डू:मुंबई की गलियों में खामोश मौत का खेल…फिल्म में सिर्फ स्टाइल है या दमदार थ्रिलर भी?

मूवी रिव्यू: बेबी डू डाई डू:मुंबई की गलियों में खामोश मौत का खेल...फिल्म में सिर्फ स्टाइल है या दमदार थ्रिलर भी?

आजकल क्राइम थ्रिलर फिल्मों में गोलियां, गैंगस्टर और बदले की कहानियां नई बात नहीं रहीं। ऐसे में बेबी डू डाई डू अपने मुख्य किरदार की वजह से अलग नजर आती है। यहां एक ऐसी सुपारी किलर है, जो न बोल सकती है और न सुन सकती है, लेकिन हर मिशन को बिना शोर किए अंजाम देती है। निर्देशक नचिकेत सामंत ने इस कहानी को सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं बनाया, बल्कि मुंबई शहर की बदलती तस्वीर और उसके अंधेरे चेहरे को भी कहानी का हिस्सा बनाया है। फिल्म हर मोड़ पर चौंकाती नहीं, लेकिन अपने स्टाइल, माहौल और दमदार अभिनय के दम पर अंत तक दिलचस्प बनी रहती है। इस फिल्म की लेंथ 2 घंटा 5 मिनट है। दैनिक भास्कर ने इसे 5 में से 3 स्टार रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? कहानी की शुरुआत दो जुड़वां बहनों से होती है, जो बचपन में एक बंद पड़े होटल में पहुंच जाती हैं। वहां वे एक हत्या की गवाह बन जाती हैं। इस घटना में एक बहन की मौत हो जाती है, जबकि दूसरी की जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है। सालों बाद वही लड़की बेबी करमरकर (हुमा कुरैशी) के नाम से मुंबई की सबसे खतरनाक कॉन्ट्रैक्ट किलर बन चुकी होती है। वह गूंगी और बहरी है, लेकिन अपने हर मिशन को बेहद सटीक तरीके से अंजाम देती है। उसकी पहचान उसकी खास छतरी है, जो जरूरत पड़ने पर जानलेवा हथियार बन जाती है। बेबी का पालन पोषण पापा (चंकी पांडे) ने किया है, जो उसे एक के बाद एक मिशन सौंपते रहते हैं। लेकिन हर सुपारी के पीछे बेबी की अपनी एक तलाश भी छिपी है। वह अपनी जुड़वां बहन के हत्यारे तक पहुंचना चाहती है। इसी बीच उसकी जिंदगी में सिद्धू (रचित सिंह) की एंट्री होती है और पहली बार उसे इस खून खराबे वाली दुनिया से बाहर निकलने की उम्मीद दिखाई देती है। क्या बेबी अपने अतीत से बाहर निकल पाएगी? क्या उसे अपनी बहन के हत्यारे तक पहुंचने का मौका मिलेगा? और क्या अपराध की दुनिया उसे इतनी आसानी से जाने देगी? इन्हीं सवालों के जवाब फिल्म धीरे धीरे देती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हुमा कुरैशी हैं। बिना लंबे संवाद बोले सिर्फ आंखों, चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज के जरिए उन्होंने बेबी के दर्द, गुस्से और अकेलेपन को बेहद असरदार तरीके से निभाया है। उनका शांत चेहरा और अचानक हिंसक हो जाने वाला अंदाज फिल्म को अलग पहचान देता है। रचित सिंह कहानी में भावनात्मक संतुलन लेकर आते हैं। उनका किरदार सादगी से लिखा गया है और दोनों के बीच की केमिस्ट्री फिल्म को राहत देती है। चंकी पांडे अपने अब तक के अलग किरदारों में नजर आते हैं। उनका शांत लेकिन रहस्यमय अंदाज प्रभावित करता है। सिकंदर खेर एक बार फिर ग्रे शेड वाले किरदार में जमे हैं और हर बार स्क्रीन पर आते ही तनाव बढ़ा देते हैं। सीमा पाहवा भी अपने सीमित स्क्रीन टाइम में प्रभाव छोड़ती हैं। फिल्म का डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष कैसा है? निर्देशक नचिकेत सामंत ने इस फिल्म को पारंपरिक क्राइम थ्रिलर बनने से बचाने की कोशिश की है। उन्होंने स्टाइल और कहानी के बीच अच्छा संतुलन बनाने का प्रयास किया है। मुंबई यहां सिर्फ लोकेशन नहीं, बल्कि कहानी का एक अहम किरदार बनकर सामने आती है। बारिश में भीगी सड़कें, पुरानी चालें, अधूरी इमारतें और शहर का अंधेरा चेहरा फिल्म के माहौल को मजबूत बनाते हैं। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की सबसे बड़ी खूबियों में शामिल है। कई फ्रेम इंटरनेशनल नियो नॉयर फिल्मों की याद दिलाते हैं। ब्लैक एंड व्हाइट फ्लैशबैक, कम रोशनी वाले दृश्य और रंगों का इस्तेमाल कहानी को अलग पहचान देता है। हालांकि फिल्म पूरी तरह अपनी पकड़ बनाए नहीं रख पाती। पहले हिस्से में रफ्तार थोड़ी धीमी महसूस होती है। दूसरे भाग में कहानी तेज होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा किरदार और कई समानांतर ट्रैक फिल्म को थोड़ा उलझा देते हैं। कुछ ट्विस्ट का अंदाजा पहले ही लग जाता है और कुछ घटनाएं जरूरत से ज्यादा सुविधाजनक लगती हैं। इसके बावजूद निर्देशक फिल्म का माहौल और सस्पेंस बनाए रखने में काफी हद तक सफल रहते हैं। फिल्म क म्यूजिक कैसा है? फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के साथ अच्छी तरह चलता है। कई जगह सन्नाटा भी कहानी का हिस्सा बन जाता है और तनाव बढ़ाता है। गाने कम हैं और कहानी में रुकावट नहीं बनते। हालांकि ऐसा कोई गीत नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद लंबे समय तक याद रह जाए। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? बेबी डू डाई डू उन फिल्मों में से है जो अपनी कहानी से ज्यादा अपने ट्रीटमेंट और माहौल के लिए याद रखी जाएगी। हुमा कुरैशी का दमदार अभिनय, स्टाइलिश प्रस्तुति और मुंबई को कहानी का अहम किरदार बनाने का तरीका फिल्म को अलग बनाता है। हालांकि धीमा पहला हिस्सा, कुछ अनुमानित मोड़ और जरूरत से ज्यादा किरदार इसकी रफ्तार को थोड़ा कमजोर करते हैं। अगर आपको अलग अंदाज की क्राइम थ्रिलर, मजबूत महिला प्रधान किरदार और स्टाइलिश फिल्में पसंद हैं, तो बेबी डू डाई डू एक बार जरूर देखी जा सकती है।

‘आर्यभट्ट का जीरो’ में दिखेगा हिमांश कोहली का नया रूप:फिल्म की कहानी पिता-पुत्र के टकराव और सपनों के संघर्ष पर

‘आर्यभट्ट का जीरो’ में दिखेगा हिमांश कोहली का नया रूप:फिल्म की कहानी पिता-पुत्र के टकराव और सपनों के संघर्ष पर

‘यारियां’, ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2’ समेत कई बड़ी फिल्मों में लीड रोल कर चुके हिमांश कोहली की नई फिल्म ‘आर्यभट्ट का जीरो’ है। इससे जुड़ने से लेकर मेकिंग आदि पर उनसे हुई खास बातचीत… हिमांश कहते हैं…‘आर्यभट्ट का जीरो’ देहरादून के एक मोहल्ले की कहानी है। इसमें मेरा किरदार ब्रह्मगुप्त श्रीवास्तव उर्फ बग्गू है, जिसे उसके पिता हमेशा ‘जीरो’ मानते हैं। पिता चाहते हैं कि बेटा उनके जीते-जी कुछ बन जाए, जबकि बग्गू अपने सपनों की दुनिया बसाना चाहता है। यह पिता-पुत्र के टकराव की कहानी के साथ हर उस युवा की कहानी भी है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करता है।’ फिल्म में मेरी जिंदगी की झलक भी है, तारीक मोहम्मद ने लिखी है कहानी हिमांश बताते हैं…‘मैं इस फिल्म से शुरुआत से जुड़ा रहा हूं। जब लेखक तारिक मोहम्मद कहानी लिख रहे थे, तब हम अपनी जिंदगी के अनुभव साझा कर रहे थे। मैं उन्हें बता रहा था कि कई बार अपने सपनों को लेकर सबसे पहले घरवालों को ही समझाना पड़ता है। मेरे जीवन में भी ऐसा दौर आया है। फिल्म के कई हिस्से, खासकर प्री-क्लाइमैक्स, मेरी निजी जिंदगी से मेल खाते हैं। सिर्फ मुझे ही नहीं, पूरी टीम को लगा कि कहानी में कहीं न कहीं उनकी भी जिंदगी दिखाई देती है।’ हर किरदार बग्गू की मंजिल तक उसे पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है हिमांश कहते हैं, ‘यह सिर्फ एक लड़के की कहानी नहीं, पूरे मोहल्ले की कहानी है। फिल्म में सोनाली सहगल, रवि किशन, नीरज सूद, अल्का अमीन, राजेश शर्मा, दर्शना बानिक, गोपाल दत्त और शिल्पा शिंदे जैसे कलाकार हैं। हर किरदार बग्गू की जिंदगी में किसी न किसी मोड़ पर आता है और उसकी सोच या सफर को प्रभावित करता है।’ देहरादून सिर्फ लोकेशन नहीं, फिल्म का एक अहम किरदार भी है बकौल हिमांश…‘फिल्म की शूटिंग देहरादून, दिल्ली और मुंबई में हुई लेकिन सबसे ज्यादा समय देहरादून में बिताया। करीब 65 दिन वहां शूट किया। दिल्ली और मुंबई का इस्तेमाल कहानी की जरूरत के हिसाब से किया गया है। क्लाइमैक्स भी देहरादून में शूट हुआ।’ पहले नाम ‘बूंदी रायता’ था, फिर फिल्म बनने तक मिल गया मनचाहा टाइटल हिमांश के मुताबिक…‘शुरुआत में फिल्म का वर्किंग टाइटल ‘बूंदी रायता’ रखा गया था, क्योंकि ‘आर्यभट्ट का जीरो’ टाइटल उपलब्ध नहीं था। हमारी पहली पसंद हमेशा यही नाम था। यह किसी और के पास रजिस्टर्ड था, लेकिन बाद में रिन्यू नहीं हुआ और फिल्म पूरी होने तक हमें यह टाइटल मिल गया। मुझे लगता है कि कहानी के भाव और पिता-पुत्र के रिश्ते को यही नाम सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त करता है।’ लीड रोल मिलना रणनीति नहीं, किस्मत का साथ होना है हिमांश का कहना है…‘यारियां’ में भी मैं पहले थर्ड लीड के लिए चुना गया था, लेकिन वर्कशॉप के दौरान मुख्य भूमिका तक पहुंच गया। उसी समय ‘हमसे है लाइफ’ में भी लीड कर रहा था। सही समय पर सही मौका मिलना जरूरी होता है, लेकिन तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। अभिनय के साथ-साथ अपने प्रोडक्शन हाउस के तहत भी फिल्में बना रहा हूं। ‘जूलिया एंड कालिया’ पूरी हो चुकी है। दूसरी फिल्म ‘क से कबूतर’ शिक्षा व्यवस्था पर आधारित है, जिसकी शूटिंग जारी है। इसका अगला शेड्यूल छत्तीसगढ़ में होगा।

थाइलैंड में बच्चे ने 10 बौद्ध भिक्षुओं को कुचला, VIDEO:बिना इजाजत पिता का पिकअप ट्रक चला रहा था, 10 किमी चलाने के बाद कंट्रोल खोया

थाइलैंड में बच्चे ने 10 बौद्ध भिक्षुओं को कुचला, VIDEO:बिना इजाजत पिता का पिकअप ट्रक चला रहा था, 10 किमी चलाने के बाद कंट्रोल खोया

थाईलैंड के मुकदाहन शहर में गुरुवार को एक बच्चे ने पिकअप ट्रक से बौद्ध भिक्षुओं के जुलूस को कुचल दिया। जिसमें कम से कम 10 भिक्षुओं की मौत हो गई और 5 गंभीर रूप से घायल है। पुलिस के मुताबिक, 11 साल का एक लड़का अपने माता-पिता का पिकअप ट्रक बिना इजाजत लेकर निकला था। करीब 10 किलोमीटर चलाने के बाद उसने वाहन से नियंत्रण खो दिया और तीर्थयात्रा पर निकले भिक्षुओं के जुलूस में जा घुसा। यह हादसा स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11 बजे हुआ। भिक्षुओं का समूह सड़क किनारे एक लाइन में पैदल चल रहा था। स्थानीय रेस्क्यू संगठन की ओर से जारी CCTV फुटेज में पिकअप ट्रक तेज रफ्तार में जुलूस को टक्कर मारता नजर आया। 35 भिक्षु और पांच श्रद्धालु तीर्थयात्रा पर निकले थे थाईलैंड की 93% से ज्यादा आबादी बौद्ध धर्म को मानती है। सार्वजनिक धार्मिक यात्राएं और जुलूस आम बात हैं। मुकदाहन के गवर्नर वोरायन बुन्नारात के मुताबिक, गुरुवार को कुल 35 बौद्ध भिक्षु और पांच आम श्रद्धालु एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक पैदल तीर्थयात्रा कर रहे थे। यात्रा शुरू होने के कुछ ही समय बाद यह हादसा हो गया। अधिकारियों के अनुसार, पांच भिक्षुओं की मौत मौके पर हुई, जबकि अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कई घायलों का इलाज चल रहा है। मुकदाहन अस्पताल ने घायलों के इलाज के लिए लोगों से तत्काल रक्तदान की अपील भी की है। बच्चे के परिजनों ने पुलिस को पिकअप ट्रक न होने की सूचना दी पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि लड़का घर पर अकेला था। वह उस दिन अस्वस्थ होने के कारण स्कूल नहीं गया था। इसी दौरान उसने अपने माता-पिता का पिकअप ट्रक बिना अनुमति ले लिया। जब परिजनों को पिकअप घर पर नहीं मिली तो उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने हादसे के बाद वाहन को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस ने अभी तक कोई केस दर्ज नहीं किया प्रांतीय पुलिस प्रमुख मेजर जनरल पैरोज थाइफुत्सा ने कहा कि लड़का नाबालिग है। फिलहाल उससे पूछताछ नहीं हो सकी है क्योंकि वह सदमे में है और बयान देने की स्थिति में नहीं है। इसी वजह से अभी तक कोई आरोप तय नहीं किया गया है। पुलिस पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया और हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है। बाद में BBC से बातचीत में पुलिस प्रमुख ने कहा कि लड़के की देखभाल उसके अभिभावकों, डॉक्टर और अन्य अधिकारियों की टीम कर रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक वह विशेष जरूरतों वाला बच्चा हो सकता है, हालांकि इस बारे में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। थाईलैंड दुनिया के सबसे ज्यादा सड़क हादसों वाले देशों में शामिल है। WHO के मुताबिक, हर साल सड़क दुर्घटनाओं में करीब 18 हजार लोगों की मौत होती है। हालांकि इस मामले में हादसे की वास्तविक वजह का पता पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

मूवी रिव्यू – 'अल्फा':दमदार एक्शन, फीका इमोशन… आलिया की फिल्म में बॉबी देओल का नेगेटिव अवतार छाया, ऋतिक रोशन का कैमियो देता है सरप्राइज

मूवी रिव्यू – 'अल्फा':दमदार एक्शन, फीका इमोशन... आलिया की फिल्म में बॉबी देओल का नेगेटिव अवतार छाया, ऋतिक रोशन का कैमियो देता है सरप्राइज

यशराज स्पाई यूनिवर्स की पहली फीमेल लीड फिल्म अल्फा बड़े स्केल, हाई ऑक्टेन एक्शन और एक नए कॉन्सेप्ट के साथ सिनेमाघरों में आई है। ट्रेलर से उम्मीद थी कि यह स्पाई यूनिवर्स को नया मुकाम देगी, लेकिन फिल्म उस उम्मीद पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती। निर्देशक शिव रवैल ने इसे इंटरनेशनल स्पाई थ्रिलर का लुक देने में मेहनत की है। विजुअल्स, एक्शन और प्रोडक्शन वैल्यू प्रभावित करते हैं, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और कम भावनात्मक जुड़ाव फिल्म को बार बार पीछे खींचते हैं। कहानी करीब 140 मिनट लंबी फिल्म की शुरुआत 27 जुलाई 1999 से होती है। इंडियन आर्मी के विक्रांत कौल (अनिल कपूर) और फतेह सिंह लाखावत (बॉबी देओल) देश की सबसे खतरनाक सीक्रेट फोर्स बनाने का सपना देखते हैं। इसी सोच से टीम अल्फा की शुरुआत होती है, जिसके सैनिकों को अल्फा सीरम दिया जाता है। यह सीरम इंसान की ताकत, रिफ्लेक्स और रिकवरी को कई गुना बढ़ा देता है। इसी दौरान विक्रांत अपनी गर्भवती पत्नी जानकी (दिया मिर्जा) की जान बचाने के लिए उसे भी अल्फा सीरम दे देता है। यह फैसला उसकी पूरी जिंदगी बदल देता है। फतेह का मानना होता है कि इस सीरम पर सिर्फ सेना का हक था। वह विक्रांत की नवजात बेटी को उससे अलग कर देता है और उसे यकीन दिला देता है कि उसकी बेटी मर चुकी है। सालों बाद वही बेटी सीता (आलिया भट्ट) फतेह की निगरानी में एक खतरनाक हथियार बन चुकी होती है। बचपन से उसे मिशन दिए जाते हैं और वह देश के दुश्मनों को खत्म करती रहती है। लेकिन एक दिन उसे पता चलता है कि जिस इंसान को वह अपना गुरु मानती रही, वही सबसे बड़ा गुनहगार है। दूसरी तरफ स्पेन में पली विक्रांत की दूसरी बेटी दुर्गा (शरवरी) की एंट्री होती है। दोनों बहनों का आमना सामना होता है और कहानी ऑपरेशन ओडिसी के रहस्य तक पहुंचती है। आखिर फतेह का असली मिशन क्या है, ऑपरेशन ओडिसी के पीछे उसका मकसद क्या है और क्या सीता उसे रोक पाएगी, फिल्म का क्लाइमैक्स इन्हीं सवालों के जवाब देता है। एक्टिंग सीता के किरदार में आलिया भट्ट ने पूरी मेहनत की है। उन्होंने एक्शन सीक्वेंस में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और कई दृश्यों में प्रभाव भी छोड़ती हैं। हालांकि भावनात्मक दृश्यों में उनका किरदार दर्शकों से उतना जुड़ नहीं पाता, जितनी जरूरत थी। शरवरी को स्क्रीन स्पेस कम मिला है, लेकिन जितना मौका मिला उसमें उन्होंने अच्छा काम किया है और अपने किरदार के साथ न्याय किया है। फिल्म के सबसे बड़े सरप्राइज पैकेज हैं बॉबी देओल। फतेह सिंह लाखावत के रोल में उनका जुनून, खामोशी और खतरनाक स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है। अनिल कपूर भी अपने किरदार में पूरी तरह फिट बैठते हैं। वहीं फिल्म के आखिर में ऋतिक रोशन का कैमियो स्पाई यूनिवर्स के फैंस के लिए एक अच्छा सरप्राइज बनकर आता है और आगे की फिल्मों के लिए उत्सुकता भी बढ़ा देता है। डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष निर्देशक शिव रवैल ने फिल्म को हॉलीवुड स्टाइल स्पाई थ्रिलर जैसा ट्रीटमेंट देने की कोशिश की है। सिनेमैटोग्राफी शानदार है। सेपिया टोन, बड़े सेट्स और खूबसूरत लोकेशंस फिल्म को शानदार विजुअल अपील देते हैं। खासकर आलिया और शरवरी के बीच पहला फाइट सीक्वेंस फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है। हालांकि कहानी के स्तर पर फिल्म कई जगह कमजोर पड़ जाती है। स्क्रीनप्ले ढीला है और कई घटनाएं बिना ठोस आधार के आगे बढ़ती हैं। कुछ ट्विस्ट जरूर हैं, लेकिन उनमें वह रोमांच नहीं है जो दर्शकों को पूरी फिल्म बांधकर रख सके। भावनात्मक दृश्यों में भी फिल्म असर छोड़ने में नाकाम रहती है। कई जगह स्पाई एजेंट्स को इतना सुपरह्यूमन बना दिया गया है कि कहानी वास्तविकता से दूर जाती महसूस होती है। इतना अच्छा कॉन्सेप्ट होने के बावजूद लेखन उसे पूरी तरह भुना नहीं पाता। म्यूजिक फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के टोन के मुताबिक ठीक बैठता है और एक्शन को सपोर्ट करता है। लेकिन गानों में ऐसा कोई ट्रैक नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद भी याद रह जाए। फाइनल वर्डिक्ट अल्फा विजुअली शानदार है, एक्शन दमदार है और बॉबी देओल अपने किरदार से सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। आलिया भट्ट ने भी पूरी ईमानदारी से फिल्म को संभालने की कोशिश की है। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, कम भावनात्मक जुड़ाव और औसत थ्रिल इसकी सबसे बड़ी कमजोरियां बन जाती हैं। फिल्म एक नए स्पाई चैप्टर की मजबूत शुरुआत बन सकती थी, लेकिन यह मौका पूरी तरह भुना नहीं जा सका। अगर आप बड़े पर्दे पर स्टाइलिश एक्शन और यशराज स्पाई यूनिवर्स के फैन हैं तो फिल्म एक बार देख सकते हैं, लेकिन कहानी के स्तर पर यह आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी।

ई-रिक्शा को बीच सड़क रोकने वाला चीनी एप बैन:गलत इस्तेमाल के बाद सरकार ने हटाने का निर्देश दिया, पर अभी प्लेस्टोर में मौजूद

ई-रिक्शा को बीच सड़क रोकने वाला चीनी एप बैन:गलत इस्तेमाल के बाद सरकार ने हटाने का निर्देश दिया, पर अभी प्लेस्टोर में मौजूद

दिल्ली में ई-रिक्शा चालकों को इन दिनों एक अजीब समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर चलते-चलते ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाते हैं और दोबारा स्टार्ट नहीं होते। जांच में सामने आया है कि इसकी वजह कोई मैकेनिकल खराबी या बैटरी डिस्चार्ज होना नहीं, बल्कि ‘BAT-BMS’ नाम का चीनी स्मार्टफोन एप है। शरारती तत्व और सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट बनाने वाले लोग इस एप की मदद से दूर बैठे ही ई-रिक्शा को बंद कर रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि ‘BAT-BMS’ समेत दो मोबाइल एप्लिकेशन्स को एप स्टोर्स से हटाने का निर्देश दिए हैं। CII साइबर सुरक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने शुक्रवार को इस कार्रवाई की पुष्टि की है। सवाल 1: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा BAT-BMS एप असल में क्या है? जवाब: ‘BAT-BMS’ रियल टाइम बैटरी मैनेजमेंट टूल है। इसे चीनी कंपनी ‘शेन्ज़ेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी’ ने डेवलप किया है। इस एप का मुख्य काम ब्लूटूथ-इनेबल्ड लिथियम बैटरी की निगरानी करना है। यह एप बैटरी के चार्ज लेवल, वोल्टेज, टेम्परेचर और सेल हेल्थ जैसी जरूरी जानकारियां डिस्प्ले करता है। इसे आप अपनी बैटरी का एक तरह का डिजिटल डैशबोर्ड मान सकते हैं। सवाल 2: यह एप कैसे काम करता है और लोग इससे चलते हुए ई-रिक्शा कैसे रोक पा रहे हैं? जवाब: यह कोई बहुत हाई-टेक हैकिंग नहीं है, बल्कि सुरक्षा की एक साधारण चूक का फायदा उठाना है। इस एप में एक ‘रिमोट कट-ऑफ’ फीचर होता है, जिसकी मदद से बैटरी के डिस्चार्ज (पावर सप्लाई) को चालू या बंद किया जा सकता है। जब कोई व्यक्ति ई-रिक्शा के 10 से 15 मीटर के दायरे (ब्लूटूथ की रेंज) में आकर इस एप के जरिए वाहन की बैटरी से कनेक्ट होता है, तो वह डिस्चार्ज फंक्शन को बंद कर देता है। इससे मोटर को मिलने वाली पावर तुरंत कट जाती है और ई-रिक्शा रुक जाता है। सवाल 3: क्या देश के सभी ई-रिक्शा या इलेक्ट्रिक वाहन इस एप के जरिए रोके जा सकते हैं? जवाब: नहीं। सोशल मीडिया पर फैल रहे डर के विपरीत सभी ई-रिक्शा इसके जोखिम में नहीं हैं। यह एप केवल उन्हीं वाहनों पर असर डाल सकता है जो कुछ खास शर्तों को पूरा करते हैं। सवाल 3: कौन से ई-रिक्शा इस एप के प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित हैं? जवाब: भारत में अभी भी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा पुरानी लेड-एसिड बैटरियों पर चलते हैं। इन बैटरियों में कोई ब्लूटूथ या डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम नहीं होता, इसलिए ये इस एप से पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके अलावा, जिन लिथियम बैटरियों के ब्लूटूथ सिस्टम में मैन्युफैक्चरर या डीलर द्वारा मजबूत पासवर्ड सेट किया गया है, उन्हें भी इस एप के जरिए एक्सेस नहीं किया जा सकता। सवाल 4: चीनी कंपनी ने इस एप को किस उद्देश्य से बनाया था? क्या ये ई-रिक्शा के लिए था? जवाब: नहीं, कंपनी ने इस एप को ई-रिक्शा को कंट्रोल करने के लिए नहीं बनाया था। इसका मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा उपकरणों और नावों या जहाजों की बैटरी में लगी लिथियम बैटरियों की सेहत पर नजर रखना था। इस एप का डिस्चार्ज ऑन/ऑफ फीचर सुरक्षा और रखरखाव के लिहाज से दिया गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर बैटरी ओनर पावर कट कर सके। लेकिन भारत में इसका इस्तेमाल ई-रिक्शा की बैटरियों को रिमोटली बंद करने के लिए किया जाने लगा। सवाल 5: इससे ई-रिक्शा चालकों और सड़क सुरक्षा पर क्या असर पड़ रहा है? जवाब: वायरल वीडियो में लोग इसे खराब ड्राइविंग का ‘बदला’ लेने या केवल मनोरंजन के लिए ई-रिक्शा बंद करते दिख रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह चालकों के लिए मुसीबत बन गया है। ट्रैफिक के बीच अचानक ई-रिक्शा के बंद होने से पीछे से आ रहे वाहनों से टक्कर होने का खतरा रहता है। इसके अलावा, ई-रिक्शा चालकों का समय बर्बाद होता है और उनकी कमाई पर असर पड़ता है। सवाल 6: सुरक्षा की इस बड़ी चूक के लिए असल में जिम्मेदार कौन है? जवाब: इसके लिए मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर बैटरी असेंबल करने वाले, डीलर्स और कुछ लो-कॉस्ट वाले लिथियम बैटरी मेकर्स जिम्मेदार हैं। भारत में सस्ते ई-रिक्शा पार्ट्स के बाजार में कई ऐसी लिथियम बैटरियां बेची जा रही हैं, जिनके ब्लूटूथ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को बिना किसी पासवर्ड या डिफॉल्ट पासवर्ड के खुला छोड़ दिया जाता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी ने अपने घर का मुख्य दरवाजा खुला छोड़ दिया हो और कोई भी अंदर आ जाए। सवाल 7: इस सुरक्षा खामी को ठीक करने का क्या उपाय है? जवाब: इसका समाधान बहुत सीधा और आसान है। वाहनों के डीलर्स और निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ग्राहकों को वाहन बेचने से पहले बैटरी के मैनेजमेंट सिस्टम में एक मजबूत और यूनिक पासवर्ड सेट करें। यदि पासवर्ड सेट रहेगा, तो ब्लूटूथ रेंज में होने के बावजूद कोई बाहरी व्यक्ति एप से कनेक्ट नहीं हो पाएगा। इसके अलावा, जिन ड्राइवरों के पास पहले से ऐसी बैटरियां हैं, वे डीलर के पास जाकर अपनी बैटरी के बीएमएस सेटिंग्स में पासवर्ड लॉक लगवा सकते हैं। सवाल 8: क्या इस मामले में प्रशासन या सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई की जा रही है? जवाब: हां, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने घोषणा की है कि ई-रिक्शा को रिमोटली (दूर से) बंद करने की चिंताओं के बाद दो संदिग्ध एप्लिकेशन्स को एप स्टोर्स से हटा दिया गया है। इनमें विवादों में रहा ‘BAT-BMS’ एप भी शामिल है। इससे पहले शिकायतें बढ़ने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली परिवहन विभाग ने ‘BAT-BMS’ के साथ-साथ इसी तरह काम करने वाले एक अन्य एप्लीकेशन ‘इपोच ली-आयन’ (Epoch Li-ion) के खिलाफ जांच शुरू की थी। सवाल 9: परिवहन विभाग इस समस्या को रोकने के लिए आगे क्या कदम उठा सकता है? जवाब: दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह और विभाग के सीनियर अधिकारी इस तकनीकी खामी और सुरक्षा के खतरे की गंभीरता से समीक्षा कर रहे हैं। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि कम्यूटर्स और ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए इन असुरक्षित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम एप्स पर किस तरह के प्रतिबंध या नियम लागू किए जा सकते हैं, ताकि अनधिकृत उपयोग को रोका जा सके।

ओटीटी के दौर में बड़े परदे पर लौट रहे दर्शक:मल्टीप्लेक्स कारोबार छह महीने में 21% बढ़ा, दर्शक 12% तक बढ़े

ओटीटी के दौर में बड़े परदे पर लौट रहे दर्शक:मल्टीप्लेक्स कारोबार छह महीने में 21% बढ़ा, दर्शक 12% तक बढ़े

देश में फिल्मों के लिए बड़े पर्दे का आकर्षण फिर बढ़ रहा है। मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-जून 2026 के दौरान देश के मल्टीप्लेक्स बॉक्स ऑफिस कलेक्शन में पिछले साल की तुलना में 21% की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं उद्योग से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक कुल बॉक्स ऑफिस कारोबार में भी करीब 16-17% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि सिनेमाघरों में आने वाले दर्शकों (फुटफॉल) में 10-12% का इजाफा हुआ। इसकी सबसे बड़ी वजह फिल्मों का मजबूत लाइनअप रहा। हिंदी में ‘धुरंधर 2’ और ‘बॉर्डर 2’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस को नई जान दी, वहीं तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। इससे साफ संकेत मिला कि दर्शक अब भाषा नहीं, अच्छी कहानी और सिनेमाई अनुभव को प्राथमिकता दे रहे हैं। सीक्वल और फ्रेंचाइजी बने नया फॉर्मूला 2026 की सबसे बड़ी सीख यह रही कि दर्शक परिचित किरदारों और स्थापित फ्रेंचाइजी को बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं। ‘धुरंधर 2’, ‘बॉर्डर 2’, ‘दृश्यम 3’, ‘वाझा 2’ और अन्य सीक्वल फिल्मों ने शानदार कारोबार किया। हालांकि, केवल बड़े बजट की फिल्में ही नहीं, बल्कि 100-200 करोड़ रुपए कमाने वाली मिड-बजट फिल्मों की संख्या भी बढ़ी, जो उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत है। रफ्तार और बढ़ने की उम्मीद मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट कमल ज्ञानचंदानी का कहना है कि ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइजी, मौलिक कहानियां, क्षेत्रीय सिनेमा और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के संतुलित मिश्रण ने दर्शकों का भरोसा लौटाया है। वहीं सिनेपोलिस इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर देवांग संपत का मानना है कि यदि साल की दूसरी छमाही में भी मजबूत रिलीज कैलेंडर बना रहा तो थिएटर उद्योग में कमाई का नया रिकॉर्ड बन सकता है। 2026 में भारतीय बॉक्स ऑफिस कलेक्शन जनवरी – 1,327 फरवरी – 427 मार्च – 1,690 अप्रैल – 787 मई – 1,138 (*करोड़ रु. में) स्रोत- ऑरमैक्स मीडिया ट्रेड विश्लेषकों के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में 30 हिंदी फिल्मों की रिलीज से 2,352 करोड़ रुपए का बॉक्स ऑफिस कारोबार हुआ। ये बीते साल से करीब 15% की बढ़ोतरी है।

वर्ल्ड अपडेट्स:वेनेजुएला में चमत्कार: मलबे में 8 दिन से फंसा कुत्ता जिंदा मिला, रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित निकाला

वर्ल्ड अपडेट्स:वेनेजुएला में चमत्कार: मलबे में 8 दिन से फंसा कुत्ता जिंदा मिला, रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित निकाला

वेनेजुएला में मलबे के नीचे लगातार आठ दिन तक फंसे रहने के बाद एक कुत्ते को जीवित बाहर निकाल लिया गया। लंबे समय तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद उसके सुरक्षित मिलने की घटना को लोग किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुत्ता किसी आपदा के बाद मलबे में दब गया था। समय बीतने के साथ उसके जीवित मिलने की उम्मीद बेहद कम होती गई, लेकिन बचाव दल ने तलाश अभियान बंद नहीं किया। आखिरकार लगातार प्रयासों के बाद रेस्क्यू टीम उसे सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रही। कुत्ते के जीवित मिलने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि आपदा के बाद शुरुआती दिनों के बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी रखना कितना महत्वपूर्ण होता है। रेस्क्यू के बाद कुत्ते की स्वास्थ्य जांच की गई और उसे आवश्यक देखभाल के लिए सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। आठ दिन बाद उसके जीवित मिलने की यह घटना पूरे अभियान की सबसे भावुक और प्रेरक तस्वीर बनकर सामने आई है।

विंबलडन के तीसरे दौर में आर्थर फेरी पहुंचे:अकेले ब्रिटिश खिलाड़ी बचे; डिफेंडिंग चैंपियन इगा स्वियातेक और एलीना रायबाकिना की जीत, बुल्टार-वाटसन डबल्स से बाहर

विंबलडन के तीसरे दौर में आर्थर फेरी पहुंचे:अकेले ब्रिटिश खिलाड़ी बचे; डिफेंडिंग चैंपियन इगा स्वियातेक और एलीना रायबाकिना की जीत, बुल्टार-वाटसन डबल्स से बाहर

ब्रिटिश खिलाड़ी वर्ल्ड नंबर 114 आर्थर फेरी मेंस सिंगल्स के तीसरे दौर में पहुंचने वाले इकलौते ब्रिटिश खिलाड़ी बन गए हैं। वहीं, विमेंस सिंगल्स में डिफेंडिंग चैंपियन इगा स्वियातेक और पूर्व चैंपियन एलीना रायबाकिना ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर तीसरे दौर में जगह बना ली है। जबकि डबल्स में केटी बुल्टार और हीथर वाटसन समेत सभी 6 ब्रिटिश जोड़ियां पहले ही दौर में हारकर बाहर हो गईं। वहीं, टूर्नामेंट के अन्य बड़े मुकाबलों में बुल्गारिया के अनुभवी खिलाड़ी ग्रिगोर दिमित्रोव ने चेक रिपब्लिक के जाकुब मेन्सिक को चार सेटों के कड़े मुकाबले में हराकर तीसरे दौर में प्रवेश किया, जहां उनका सामना इटली के माटेओ बेरेटिनी से होगा। आर्थर फेरी ब्रिटेन की आखिरी उम्मीद 23 साल के आर्थर फेरी का जन्म पेरिस में फ्रांसीसी माता-पिता के घर हुआ था,लेकिन जब वे बहुत छोटे थे, तभी उनका परिवार विंबलडन में आकर बस गया था। फेरी ने बचपन में करीब 10 साल की उम्र तक फ्रांस का प्रतिनिधित्व किया था, लेकिन इसके बाद वे ब्रिटेन के टेनिस सिस्टम (LTA) में शामिल हो गए। कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से साइंस और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने वाले फेरी अब पूरी तरह ब्रिटिश बन चुके हैं। फेरी ने अपनी इस कामयाबी पर कहा,’मैं इसी विंबलडन टूर्नामेंट को देखते हुए बड़ा हुआ हूं। बचपन में खिलाड़ियों की नकल करता था और आज यहां मैच जीत रहा हूं, यह अहसास अद्भुत है। अब मैं खुद को दिल से पूरी तरह ब्रिटिश महसूस करता हूं।’ फेरी की मां ओलिविया खुद फ्रांस की पूर्व फेड कप खिलाड़ी रही हैं और पिता लोइक फ्रांस के फुटबॉल क्लब लोरिएंट के मालिक हैं। इगा स्वियातेक ने प्लिस्कोवा को 69 मिनट में हराया विमेंस सिंगल्स के दूसरे दौर में पोलैंड की स्टार खिलाड़ी और वर्ल्ड नंबर तीन इगा स्वियातेक ने पूर्व फाइनलिस्ट कैरोलिना प्लिस्कोवा को सीधे सेटों में 6-1, 6-3 से हरा दिया। उन्होंने सिर्फ 69 मिनट में मैच अपने नाम कर लिया। मैच के बाद स्वियातेक ने कहा, ‘आज मैं काफी स्थिर महसूस कर रही थी। पहला दौर बहुत इमोशनल था, लेकिन आज ऐसा लगा जैसे यह ऑफिस का कोई आम दिन हो, जहां मुझे सही फैसले लेने थे। मैं अपने इस प्रदर्शन और फोकस से बेहद खुश हूं।’ एलीना रायबाकिना ने कैटी मैकनेली को सिर्फ 71 मिनट में हराया कजाकिस्तान की 2022 विंबलडन चैंपियन एलीना रायबाकिना ने भी सेंटर कोर्ट पर अपना जलवा बिखेरा। वर्ल्ड नंबर दो रायबाकिना ने अमेरिका की कैटी मैकनेली को महज 71 मिनट में 6-1, 6-2 से शिकस्त दी। रयबाकिना को अपने पहले दौर के मैच में फ्रांस की लोइस बोइसन के खिलाफ तीसरे सेट तक जूझना पड़ा था, लेकिन दूसरे दौर में उन्होंने कोई गलती नहीं की। अब तीसरे दौर में उनका सामना बेल्जियम की एलिस मर्टेंस से होगा। ग्रिगोर दिमित्रोव ने जाकुब मेन्सिक को हराकर अगले दौर में जगह बनाई 35 साल के ग्रिगोर दिमित्रोव ने 15वीं वरीयता प्राप्त जाकुब मेन्सिक को 7-6, 4-6, 7-5, 6-3 से हराकर अगले दौर में जगह बना ली। मैच के दौरान बारिश की वजह से कोर्ट की छत बंद करनी पड़ी। इस दौरान दिमित्रोव को पिछले साल की याद आ गई, जब वह सेंटर कोर्ट पर जैनिक सिनर के खिलाफ मुकाबले में चोटिल होकर बाहर हो गए थे। जीत के बाद दिमित्रोव ने कहा,’मैंने चार-पांच बार ऊपर छत की ओर देखा। मुझे लगा कि इतिहास खुद को दोहरा सकता है, लेकिन अब वह सब पीछे छूट चुका है। विंबलडन में मुझे जो प्यार मिलता है, वही इसे मेरे लिए खास बनाता है। ब्रिटिश डबल्स जोड़ियों का निराशाजनक प्रदर्शन जहां सिंगल्स में आर्थर फेरी ने ब्रिटेन की उम्मीदों को जिंदा रखा, वहीं डबल्स कोर्ट से घरेलू फैंस के लिए मायूसी हाथ लगी। केटी बुल्टार और हीथर वाटसन की जोड़ी ने दूसरे सेट के टाई-ब्रेकर में 4 मैच पॉइंट बचाए, लेकिन आखिरकार वे पोलैंड की कतारजाइना पीटर और चेक रिपब्लिक की अन्ना सिस्कोवा से 6-4, 6-7, 6-3 से हार गईं। इसके अलावा ओलिविया निकोल्स, जोडी बरेज और हैरियट डार्ट समेत सभी छह ब्रिटिश महिला डबल्स जोड़ियां पहले ही दौर में हारकर बाहर हो गईं। हालांकि मेन्स डबल्स में हेनरी पैटन और नील स्कुप्सकी जैसे शीर्ष खिलाड़ियों ने दूसरे दौर में जगह बना ली है।

सेंसेक्स 650 अंक चढ़कर 78,150 पर खुला:निफ्टी में भी 200 अंकों की तेजी; IT और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी

सेंसेक्स 650 अंक चढ़कर 78,150 पर खुला:निफ्टी में भी 200 अंकों की तेजी; IT और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 3 जुलाई को तेजी देखने को मिल रही है। सेंसेक्स 650 अंक की तेजी के साथ 78,150 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में 200 अंक की बढ़त है। ये 24,350 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी देखने को मिल रही है। एशियाई बाजारों में तेजी अमेरिकी बाजार में कल तेजी रही थी विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 14,588 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल सेंसेक्स में 579 अंक की तेजी रही थी शेयर बाजार में आज यानी 2 जुलाई को बढ़त रही। सेंसेक्स 579 अंक की तेजी के साथ 77,502 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में 170 अंक की बढ़त रही। ये 24,176 पर बंद हुआ है। आज IT, ऑटो और रियल्टी शेयर्स में ज्यादा खरीदारी रही।

सेंसेक्स 650 अंक चढ़कर 78,150 पर खुला:निफ्टी में भी 200 अंकों की तेजी; IT और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी

सेंसेक्स 650 अंक चढ़कर 78,150 पर खुला:निफ्टी में भी 200 अंकों की तेजी; IT और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 3 जुलाई को तेजी देखने को मिल रही है। सेंसेक्स 650 अंक की तेजी के साथ 78,150 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में 200 अंक की बढ़त है। ये 24,350 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में तेजी अमेरिकी बाजार में कल तेजी रही थी विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 14,588 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल सेंसेक्स में 579 अंक की तेजी रही थी शेयर बाजार में आज यानी 2 जुलाई को बढ़त रही। सेंसेक्स 579 अंक की तेजी के साथ 77,502 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में 170 अंक की बढ़त रही। ये 24,176 पर बंद हुआ है। आज IT, ऑटो और रियल्टी शेयर्स में ज्यादा खरीदारी रही।