घमौरी का इलाज I skin care tips in summers

Last Updated:May 07, 2026, 16:00 IST गर्मी और उमस के बढ़ते असर से त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. जिला एमएमजी अस्पताल में घमौरी के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है, जिसमें छोटे बच्चों से लेकर बड़े लोग तक शामिल हैं. डॉक्टरों के अनुसार, अधिक पसीना आने और पसीने की ग्रंथियां बंद हो जाने से त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने उभर आते हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण और पस का रूप ले सकते हैं. गाजियाबाद. गर्मियों की बढ़ती तपिश और उमस अब लोगों की त्वचा पर भी असर दिखाने लगी है, जिला एमएमजी अस्पताल में इन दिनों घमौरी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. छोटे बच्चों से लेकर बड़े तक इस समस्या से परेशान होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि तेज गर्मी और ज्यादा पसीना आने के कारण त्वचा की पसीने वाली ग्रंथियां बंद हो जाती हैं, जिससे पसीना बाहर नहीं निकल पाता और त्वचा के अंदर ही फंस जाता है. यही स्थिति आगे चलकर घमौरी का रूप ले लेती है. शुरुआत में छोटे-छोटे दाने दिखाई देते हैं, लेकिन लापरवाही करने पर इनमें लालपन, जलन और पस तक पड़ सकती है.जिला एमएमजी अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या द्विवेदी ने बताया कि मई की शुरुआत के साथ ही तापमान लगातार बढ़ रहा है. गर्मी के कारण शरीर से अधिक पसीना निकलता है. कई बार पसीने वाली ग्रंथियां बंद हो जाती हैं जिससे पसीना त्वचा के अंदर जमा हो जाता है और छोटे-छोटे लाल दाने बनने लगते हैं. इन दानों में पानी जैसा पदार्थ भी भरा दिखाई देता है, उन्होंने बताया कि घमौरी तीन चरणों में बढ़ती है. शुरुआत में हल्के दाने निकलते हैं फिर उनमें लालपन आता है और समय पर इलाज न मिलने पर उनमें संक्रमण होकर पस भी पड़ सकता है. अधिक पसीना आने पर शरीर को रखें साफ डॉक्टरों के अनुसार घमौरी से बचने के लिए शरीर को ठंडा और सूखा रखना बेहद जरूरी है. कोशिश करनी चाहिए कि ज्यादा देर तक धूप और गर्मी में न रहें, घर से बाहर निकलने पर ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि हवा शरीर तक पहुंच सके. टाइट कपड़े, लेगिंग और ज्यादा फिटिंग वाले कपड़े गर्मियों में परेशानी बढ़ा सकते हैं. अधिक पसीना आने पर समय-समय पर शरीर को साफ करना चाहिए और दिन में कम से कम दो बार ठंडे पानी से नहाना फायदेमंद रहता है. डॉ. दिव्या द्विवेदी ने बताया कि छोटे बच्चों में भी घमौरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में माता-पिता को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, कई लोग बच्चों के शरीर पर ज्यादा मात्रा में पाउडर लगा देते हैं लेकिन यह नुकसानदायक हो सकता है. पाउडर पसीने वाली ग्रंथियों को और बंद कर देता है जिससे समस्या बढ़ जाती है. इसकी जगह ठंडे या गीले सूती कपड़े से शरीर को साफ करना बेहतर होता है. डॉक्टरों ने लोगों को गर्मियों में ज्यादा पानी पीने, तरल पदार्थ लेने और मौसमी फलों का सेवन करने की सलाह दी है. साथ ही यदि घमौरी में ज्यादा लालपन, जलन या पस दिखाई दे तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Ghaziabad,Uttar Pradesh
ताजा या फ्रिज वाला, कौन सा नारियल पानी है हेल्थ के लिए पॉवरफुल? एक्सपर्ट से समझें

Last Updated:May 06, 2026, 11:02 IST Best coconut water : मई की तीखी गर्मी के तेवर दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं. गर्मी बढ़ते ही सड़क किनारे नारियल पानी पीने वालों की भीड़ नजर आने लगती है. कई लोग एक बार में पूरा नारियल पानी नहीं पी पाते, तो बचा हुआ पानी फ्रिज में रख देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नारियल पानी ज्यादा देर तक रखने पर खराब भी हो सकता है? कई बार लोग इसे अगले दिन तक पी लेते हैं. प्रयागराज के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. संजीव ने इसके फायदे नुकसान बताया है. डॉ संजीव ने बताया कि ताजा नारियल पानी बेहद जल्दी खराब होने वाला ड्रिंक माना जाता है. अगर नारियल खोलने के बाद उसे कमरे के तापमान पर छोड़ दिया जाए, तो गर्म मौसम में सिर्फ 2 से 4 घंटे के अंदर उसमें फर्मेंटेशन शुरू हो सकता है. यानी उसका स्वाद बदलने लगता है और उसमें हल्की खटास आने लगती है. यही वजह है कि ताजा नारियल पानी निकालने के तुरंत बाद पीने की सलाह दी जाती है. अगर आपने पैक्ड नारियल पानी खोला है, तो उसे तुरंत फ्रिज में रखना जरूरी माना जाता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक खुले हुए नारियल पानी को 1 से 3 दिन के अंदर खत्म कर देना चाहिए. कुछ प्रोसेस्ड पैक्ड ड्रिंक्स 5 दिन तक चल सकते हैं, लेकिन स्वाद और गुणवत्ता धीरे-धीरे कम होने लगती है. वहीं ताजा नारियल पानी ज्यादा देर तक सुरक्षित नहीं रहता क्योंकि उसमें प्रिजर्वेटिव नहीं होते. नारियल पानी खराब हुआ है या नहीं, इसकी पहचान करना भी आसान है. अगर उसमें खट्टी या अजीब बदबू आने लगे, स्वाद बदल जाए, हल्की गैस महसूस हो या पानी धुंधला दिखने लगे, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google कुछ मामलों में रंग हल्का गुलाबी या भूरा भी हो सकता है, जो ऑक्सीडेशन की वजह से होता है. हालांकि बदबू और खट्टापन सबसे बड़ा संकेत माना जाता है. सोशल मीडिया और रेडिट पर भी लोग पैक्ड नारियल पानी को लेकर अपने अनुभव शेयर कर रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि बोतल खुलने के बाद अगर उसे बाहर छोड़ दिया जाए तो उसमें अजीब स्मेल आने लगती है. कुछ लोगों ने इसे “फर्मेंटेड टेस्ट” जैसा बताया. वहीं कई लोग सलाह देते हैं कि नारियल पानी हमेशा ताजा ही पीना बेहतर रहता है. अगर आप भी गर्मियों में नारियल पानी पीना पसंद करते हैं, तो कोशिश करें कि इसे खोलने के तुरंत बाद ही खत्म कर दें. फ्रिज में रखने पर भी ज्यादा दिनों तक स्टोर करने से बचें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही पेट खराब कर सकती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
आम का मजा लें, मगर सावधानी से… ज्यादा खाना बन सकता है मुसीबत, जानिए डॉक्टर की सलाह

Last Updated:May 01, 2026, 12:18 IST गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की मिठास छा जाती है. फलों का राजा कहलाने वाला आम स्वाद के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसान पहुंचा सकता है. चंदौली की डॉक्टर रिद्धि पांडे ने बताया कि सही मात्रा और सही तरीके से आम खाने पर यह शरीर को ठंडक, ऊर्जा और हाइड्रेशन देता है. चंदौली. गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की बहार छा जाती है, आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है. हालांकि, स्वाद के साथ-साथ इसके सेवन में सावधानी बरतना भी बेहद जरूरी है. डॉक्टर ने बताया कि आम स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद तो है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा नुकसान भी पहुंचा सकती है. डॉक्टर रिद्धि पांडे ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि गर्मी के मौसम में जो भी फल प्राकृतिक रूप से उपलब्ध होते हैं, वे शरीर के लिए लाभकारी होते हैं, आम भी उन्हीं फलों में से एक है. Add News18 as Preferred Source on Google इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है और यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. आम में मौजूद पानी और पोषक तत्व शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते, जिससे गर्मी के दिनों में राहत मिलती है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आम का सेवन एक सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति, खासकर बच्चे, बहुत अधिक मात्रा में आम खाते हैं, तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है. ज्यादा आम खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है, जिससे फोड़े-फुंसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. उन्होंने बताया कि बच्चों को आम खाते समय विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. डॉक्टर ने बताया कि कई बार बच्चे आम को बिना छिलका हटाए ही खा लेते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. आम का छिलका हटाकर ही खाना चाहिए, क्योंकि छिलके में ऐसे तत्व हो सकते हैं, जो त्वचा संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा, आम का अत्यधिक सेवन पाचन तंत्र पर भी असर डाल सकता है. इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को संतुलित मात्रा में ही आम खाने की आदत डालें और उन्हें इसके सही तरीके के बारे में समझाएं. वहीं, डॉक्टर रिद्धि पांडे ने कहा कि अगर सही मात्रा और तरीके से आम का सेवन किया जाए, तो यह शरीर के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. यह न केवल ऊर्जा देता है, बल्कि शरीर को ठंडक भी पहुंचाता है. बता दें कि आम का आनंद जरूर लें, लेकिन संतुलन और सावधानी के साथ, तभी यह स्वादिष्ट फल आपके स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित होगा, न कि परेशानी का कारण बने. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
benefits of soaking rice I गर्मीयों में चावल खाने का सही तरीका

Last Updated:April 27, 2026, 15:02 IST गर्मियों में चावल खाने को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सही तरीके से तैयार किया गया चावल सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है. चावल को पकाने से पहले करीब 30 मिनट तक भिगोने से इसमें मौजूद एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं और यह पाचन में आसान हो जाता है. साथ ही, चावल शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करता है. हालांकि, बेहतर पाचन और सुस्ती से बचने के लिए इसे दाल, सब्जियों या सलाद जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित मात्रा में खाना जरूरी है. चंदौली. गर्मियों के मौसम में चावल खाने को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं. जैसे क्या चावल रोज खाना ठीक है, इसे कैसे पकाया जाए और क्या यह पाचन के लिए अच्छा होता है? इन्हीं सवालों पर डॉक्टर रिद्धी पांडे ने लोकल18 से बातचीत में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. डॉ. पांडे ने बताया कि चावल को सही तरीके से पकाया जाए, तो यह न सिर्फ आसानी से पचता है, बल्कि शरीर को तुरंत ऊर्जा भी देता है. चावल को पकाने से पहले कम से कम 30 मिनट तक पानी में भिगोकर रखना बेहद फायदेमंद होता है, ऐसा करने से चावल में मौजूद कुछ एंटी-न्यूट्रिएंट्स जैसे फाइटिक एसिड कम हो जाते हैं, जो पाचन में बाधा डाल सकते हैं. भिगोने की प्रक्रिया से डाइजेस्टिव एंजाइम भी सक्रिय हो जाते हैं, जिससे चावल शरीर में जल्दी और आसानी से पचता है. बेहतर हो जाता है टेक्सचर उन्होंने बताया कि भिगोए हुए चावल पकाने पर उनका टेक्सचर भी बेहतर हो जाता है और उनमें मौजूद हानिकारक तत्व काफी हद तक निकल जाते हैं. इससे न सिर्फ पाचन सुधरता है, बल्कि पेट से जुड़ी समस्याओं की संभावना भी कम हो जाती है, जो लोग चावल खाने के बाद भारीपन या गैस की समस्या महसूस करते हैं, उनके लिए यह तरीका खासतौर पर लाभकारी हो सकता है. चावल खाने से आती है नींद रिद्धी पांडे ने बताया कि जहां तक चावल और रोटी की तुलना का सवाल है, तो आमतौर पर चावल को रोटी के मुकाबले हल्का और जल्दी पचने वाला माना जाता है. यही वजह है कि बीमार या कमजोर पाचन वाले लोगों को अक्सर चावल खाने की सलाह दी जाती है. हालांकि, चावल खाने के बाद खासकर गर्मियों में नींद आने की समस्या भी कई लोगों को होती है, इसका कारण चावल का हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स हो सकता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता और फिर गिरता है, जिससे सुस्ती महसूस होती है. ऊर्जावान बनाने में करता है मददवहीं, उन्होंने बताया कि इससे बचने के लिए चावल के साथ फाइबर युक्त चीजें जैसे दाल, सब्जियां या सलाद शामिल करना चाहिए. साथ ही, ज्यादा मात्रा में चावल खाने से बचना और संतुलित आहार लेना जरूरी है. अगर सही तरीके से चावल को भिगोकर और संतुलित मात्रा में खाया जाए, तो यह न केवल पाचन के लिए अच्छा है, बल्कि शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने में भी मदद करता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Chandauli,Uttar Pradesh First Published : April 27, 2026, 15:02 IST
Health Tips: डाइट में शामिल करें इस छोटे से बीज के दो चम्मच, मोटापा और खराब कोलेस्ट्रॉल होगा कंट्रोल

अलसी के बीज स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. यह वजन घटाने, कोलेस्ट्रॉल कम करने, डायबिटीज नियंत्रित करने और हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं. सही लाभ पाने के लिए इन्हें हल्का भूनकर पाउडर बनाकर सीमित मात्रा में रोजाना सेवन करना जरूरी है.
एनीमिया और कृमि रोग से बचाव के लिए 24 अप्रैल को बच्चों को यहां दी जाएगी स्वर्णप्राशन ड्रॉप

Last Updated:April 22, 2026, 17:45 IST अंबाला के नागरिक अस्पताल के आयुष विभाग में 24 अप्रैल को पोषण पखवाड़ा के तहत 1 से 16 वर्ष तक के बच्चों को स्वर्णप्राशन ड्रॉप दी जाएगी. यह आयुर्वेदिक ड्रॉप बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, बुद्धि और शारीरिक विकास बढ़ाने में सहायक मानी जाती है. सीमित मात्रा में उपलब्ध इस ड्रॉप के लिए सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है. अंबाला. बदलते दौर के साथ-साथ आज बहुत सी बीमारियां देखने को मिल रही है, जिनमें कृमि और एनीमिय रोग शामिल हैं. दरअसल, इन रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार कार्य कर रहा है ओर बच्चों में इनकी रोकथाम के लिए स्वर्णप्राशन ड्रॉप दी जा रही हैं. बता दें कि, अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल में मौजूद आयुष विंग में 24 अप्रैल को पोषण पखवाड़ा के तहत एनीमिया व कृमि रोग की रोकथाम के लिए महंगे दामों में मिलने वाली स्वर्णप्राशन ड्रॉप दी जाएगी. वहीं जानकारी के अनुसार, स्वर्णप्राशन ड्रॉप बच्चों के लिए एक प्राचीन आयुर्वेदिक प्रतिरक्षा बूस्टर है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता, बौद्धिक क्षमता और शारीरिक बल को बढ़ाता है. वही इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में आयुष विभाग की एमडी डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि देशभर में एनीमिया और कृमि रोग के मामले गर्भवती महिलाओं व बच्चों में बहुत ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. जिससे उन्हें काफी ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं. उन्होंने कहा कि इस रोग को लेकर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा वैक्सीनेशन कार्यक्रम चलाए जाते है, जिसके तहत आयुष विभाग भी स्वर्णप्राशन गोल्ड ड्रॉप 1 वर्ष से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों को देता हैं. ताकि, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ-साथ बौद्धिक व शारीरिक बल की क्षमता बढ़ सके, वह स्वास्थ्य जीवन जी सकें. उन्होंने बताया कि यह ड्रॉप काफी ज्यादा महंगी होती है, इसलिए हर माता पिता अपने बच्चों को नहीं दे पाते है. आयुष विभाग पुष्य नक्षत्र के दिन यह स्वर्णप्राशन ड्रॉप बच्चों को देता है और यह दिन हर महीने के 29 दिन बाद होता हैं. उन्होंने बताया कि वह सभी माता पिता को बताना चाहती है कि 24 अप्रैल को यह ड्रॉप सुबह 8:00 बजे से लेकर 2:00 बजे तक दिया जाएगा. इसमें रजिस्ट्रेशन नागरिक अस्पताल के आयुष विभाग में आकर कोई भी व्यक्ति करवा सकता है. उन्होंने कहा कि अभी तक काफी ज्यादा रजिस्ट्रेशन आ चुके हैं और इसके लिए माता-पिता को आयुष विभाग का कार्ड बनवाना है तभी यह ड्रॉप उनके बच्चे को मिल पाएगी. यह रजिस्ट्रेशन के हिसाब से ही सीमित मात्रा में ही उपलब्ध हो पाती है. स्वर्णप्राशन ड्रॉप के प्रमुख फायदेइस स्वर्णप्रशन गोल्ड ड्रॉप का काफी फायदा आयुर्वेद में बताए गए है, जिसमें यह बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत करता है और बार-बार होने वाली सर्दी, खांसी व बुखार से बचाता है. इसके साथ ही यह बच्चों की मेधा (बुद्धि), एकाग्रता, और स्मरण शक्ति को बढ़ाता है. यह स्वस्थ वजन बढ़ाने, हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है. वही आयुर्वेदिक डॉक्टर का कहना है कि यह पाचन अग्नि को तेज करता है, जिससे भूख बढ़ती है और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है. इसके साथ ही यह त्वचा के रंग और कांति में सुधार करता है. उन्होंने बताया है कि पुष्य नक्षत्र पर इसका सेवन करना विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है, जो दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव डालता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 22, 2026, 17:45 IST
Summer Tips: गर्मियों में रामबाण है आंवला मुरब्बा! कब्ज-एसिडिटी से दिलाए राहत, ऐसे करें सेवन

Last Updated:April 21, 2026, 13:01 IST गर्मियों की तपती धूप में शरीर को ठंडक और सेहत दोनों चाहिए और इसका देसी जवाब है आंवला का मुरब्बा. खट्टा-मीठा स्वाद वाला यह पारंपरिक फूड सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि कई बीमारियों से बचाव का भी आसान उपाय है. तराई क्षेत्रों में मिलने वाला आंवला, जब मुरब्बे के रूप में इस्तेमाल होता है, तो यह इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर पेट की समस्याओं तक में राहत देने वाला प्राकृतिक टॉनिक बन जाता है. लखीमपुर खीरी. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लोग अपने खान-पान को लेकर ज्यादा सजग हो जाते हैं. इस समय ऐसी चीजों की तलाश रहती है जो शरीर को ठंडक पहुंचाए और साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद हो. यही कारण है कि पारंपरिक देसी खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, जिनमें मुरब्बा एक खास स्थान रखता है. गर्मियों के मौसम में मुरब्बा की डिमांड अधिक रहती है क्योंकि मुरब्बा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद पाया जाता है. खीरी जिले के तराई इलाके में आंवला के पौधे अधिक पाए जाते हैं, ऐसे में सर्दियों के मौसम में आंवला आपको बाजारों में मिल जाएगा. वहीं गर्मियों के मौसम में आंवला का मुरब्बा किसी देसी औषधि से कम नहीं है. आंवला में विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट से भरपूर होता है ऐसे में पाचन से लेकर कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google लोकल 18 से बातचीत करते हुए राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मियों के मौसम में सुबह खाली पेट मुरब्बा का सेवन करने से कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं से आपको राहत मिल जाएगी. पेट साफ ना हो पाने के कारण मुंह में छाले हो जाते हैं, ऐसे में मुरब्बा का सेवन करने से पेट की गर्मी शांत होती है. आंवला का मुरब्बा इम्यूनिटी बूस्टर होता है, जोकि हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है. बदलते मौसम के कारण खांसी, जुकाम जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाता है, सुबह खाली पेट मुरब्बा खाने से त्वचा में निखार आता हैं. आप आसानी से घर पर मुरब्बा बना सकते हैं इसके लिए सबसे पहले आपको आंवला लेना होगा, उसके बाद आंवला को साफ़ पानी से धो लें. फिर आंवला में छेद कर गर्म पानी में उबाल लें. फिर 1 किलो चीनी की चाशनी तैयार कर ले, चाशनी की सफाई के लिए 1 चम्मच दूध डालें और ऊपर आने वाले जांघ को हटा दें. चिपचिपा होने तक उबालें, इसमें आप इलायची पाउडर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. फिर उसके बाद उबले हुए आंवला को चाशनी में डूबा दे. 4 से 5 दिन के लिए आप मुरब्बा को एक सुरक्षित स्थान पर रख दें, इसके बाद आप इसका सेवन कर सकते हैं. First Published : April 21, 2026, 13:01 IST
आंवला मुरब्बा के फायदे I lakhimpur kheri news

Last Updated:April 13, 2026, 15:43 IST गर्मियों की शुरुआत के साथ आंवला मुरब्बा की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक देने के साथ पाचन सुधारने में मदद करता है. विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आंवला मुरब्बा सुबह खाली पेट खाने से कब्ज, एसिडिटी और पेट की गर्मी से राहत मिलती है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ खांसी-जुकाम में भी फायदेमंद माना जाता है और त्वचा में निखार लाने में सहायक है. लखीमपुर खीरी. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही लोग अपने खान-पान को लेकर ज्यादा सजग हो जाते हैं. इस समय ऐसी चीजों की तलाश रहती है जो शरीर को ठंडक पहुंचाए और साथ ही सेहत के लिए भी फायदेमंद हो. यही कारण है कि पारंपरिक देसी खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है, जिनमें मुरब्बा एक खास स्थान रखता है. गर्मियों के मौसम में मुरब्बा की डिमांड अधिक रहती है क्योंकि मुरब्बा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद पाया जाता है. खीरी जिले के तराई इलाके में आंवला के पौधे अधिक पाए जाते हैं, ऐसे में सर्दियों के मौसम में आंवला आपको बाजारों में मिल जाएगा. वहीं गर्मियों के मौसम में आंवला का मुरब्बा किसी देसी औषधि से कम नहीं है. आंवला में विटामिन सी और एंटी आक्सीडेंट से भरपूर होता है ऐसे में पाचन से लेकर कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. लोकल 18 से बातचीत करते हुए राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि गर्मियों के मौसम में सुबह खाली पेट मुरब्बा का सेवन करने से कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं से आपको राहत मिल जाएगी. पेट साफ ना हो पाने के कारण मुंह में छाले हो जाते हैं, ऐसे में मुरब्बा का सेवन करने से पेट की गर्मी शांत होती है. आंवला का मुरब्बा इम्यूनिटी बूस्टर होता है, जोकि हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है. बदलते मौसम के कारण खांसी, जुकाम जैसी समस्याओं से भी राहत दिलाता है, सुबह खाली पेट मुरब्बा खाने से त्वचा में निखार आता हैं. मुरब्बा बनाने की रेसिपीआप आसानी से घर पर मुरब्बा बना सकते हैं इसके लिए सबसे पहले आपको आंवला लेना होगा, उसके बाद आंवला को साफ़ पानी से धो लें. फिर आंवला में छेद कर गर्म पानी में उबाल लें. फिर 1 किलो चीनी की चाशनी तैयार कर ले, चाशनी की सफाई के लिए 1 चम्मच दूध डालें और ऊपर आने वाले जांघ को हटा दें. चिपचिपा होने तक उबालें, इसमें आप इलायची पाउडर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. फिर उसके बाद उबले हुए आंवला को चाशनी में डूबा दे. 4 से 5 दिन के लिए आप मुरब्बा को एक सुरक्षित स्थान पर रख दें, इसके बाद आप इसका सेवन कर सकते हैं. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh First Published : April 13, 2026, 15:43 IST
बच्चा रो रहा है बार-बार? हो सकता है वजह डकार न आना, ये टिप्स फॉलो करते ही तुरंत लेगा डकार, नहीं दिखाएगा नखरे

Last Updated:April 13, 2026, 15:35 IST नवजात शिशु की देखभाल में डकार दिलाना एक बेहद अहम हिस्सा है. सही तरीके से डकार दिलाने से बच्चे के पेट में फंसी हवा बाहर निकलती है, जिससे वह ज्यादा आरामदायक महसूस करता है और उसकी सेहत बेहतर रहती है. आइए जानते है कुछ जरूरी टिप्स… अक्सर नई मांओं के लिए यह समझना थोड़ा मुश्किल होता है कि बच्चे को सही तरीके से डकार कैसे दिलाई जाए. इसी वजह से कई बार वे बच्चे के व्यवहार और सेहत में होने वाले बदलावों को ठीक से समझ नहीं पातीं. दरअसल, बच्चे को डकार दिलाना उसकी देखभाल का एक जरूरी हिस्सा है. जब मां को बच्चे की डकार सुनाई देती है, तो उसे एक तरह की तसल्ली मिलती है कि बच्चे ने दूध अच्छे से पिया है और वह आराम में है. लोकल18 से बातचीत में सर्वोदय हॉस्पिटल, सेक्टर-8 के डायरेक्टर और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशील सिंगला बताते हैं कि डकार दिलाना क्यों जरूरी है, यह समझना बेहद अहम है. जब बच्चा दूध पीता है, खासकर बोतल से, तो उसके साथ कुछ मात्रा में हवा भी उसके पेट में चली जाती है. यही हवा बाद में परेशानी की वजह बनती है. जब इस हवा को बाहर निकाला जाता है, तो उसे ही डकार कहा जाता है. अगर बच्चे के पेट में यह हवा फंसी रह जाए, तो उसका पेट फूला-फूला लगने लगता है. इससे बच्चे को पेट दर्द हो सकता है, वह बार-बार रोता है, चिड़चिड़ा हो जाता है और कई बार दूध पीने से भी कतराने लगता है. लेकिन यदि समय पर बच्चे को डकार दिला दी जाए, तो वह न सिर्फ आराम महसूस करता है, बल्कि अच्छे से दूध भी पीता है और उसे नींद भी बेहतर आती है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ. सिंगला के अनुसार, कई बार आपने देखा होगा कि बच्चे को दूध पीने के बाद उल्टी हो जाती है. यह भी उसी हवा के बाहर निकलने का एक तरीका होता है, जिसमें दूध के साथ हवा भी बाहर आ जाती है. खासकर बोतल से दूध पीने वाले बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, जबकि मां का दूध पीने वाले बच्चों में यह अपेक्षाकृत कम होती है. बच्चे को डकार दिलाने के कुछ आसान और प्रभावी तरीके भी हैं. आप बच्चे को अपने कंधे से सटा कर उसकी पीठ को हल्के-हल्के थपथपा सकते हैं. इसके अलावा, बच्चे को गोद में सीधा बैठाकर उसकी पीठ पर हल्का दबाव देना भी मददगार होता है. एक और तरीका यह है कि बच्चे को अपनी गोद में पेट के बल लिटाकर उसकी पीठ को धीरे-धीरे सहलाया जाए. इन तरीकों से बच्चे के पेट में फंसी हवा आसानी से बाहर निकल जाती है. डकार का मतलब यही है कि बच्चे के पेट की हवा सहजता से बाहर निकल गई. यह समस्या आमतौर पर 4 से 6 महीने तक के बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, यह समस्या अपने आप कम हो जाती है और 6 महीने के बाद अक्सर खत्म भी हो जाती है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं होती और सामान्य देखभाल से ही यह समस्या संभाली जा सकती है. First Published : April 13, 2026, 15:35 IST
summer pregnancy care tips I कन्नौज समाचार

Last Updated:April 09, 2026, 19:15 IST गर्मियों में गर्भवती महिलाओं के लिए डिहाइड्रेशन गंभीर खतरा बन सकता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण शरीर में पानी की कमी से चक्कर, कमजोरी और प्री-मैच्योर डिलीवरी का जोखिम बढ़ जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि नियमित रूप से पानी, नारियल पानी, छाछ और पानी से भरपूर फलों का सेवन मां और शिशु दोनों की सेहत के लिए जरूरी है. कन्नौज. गर्मियों का मौसम गर्भवती महिलाओं के लिए कई चुनौतियां लेकर आता है, जिनमें सबसे आम समस्या है शरीर में पानी की कमी, यानी डिहाइड्रेशन. तेज धूप, पसीना और बढ़ता तापमान शरीर से पानी तेजी से कम कर देता है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है, क्योंकि इसका सीधा असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर पड़ सकता है. गर्भावस्था के दौरान शरीर को सामान्य से अधिक पानी की जरूरत होती है. पर्याप्त पानी पीने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है, पोषक तत्वों का सही संचार होता है और शिशु के विकास में भी मदद मिलती है. अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो चक्कर आना, थकान, सिरदर्द और यहां तक कि प्री-मैच्योर डिलीवरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. इन चीजों का करें नियमित सेवनगर्मी के मौसम में सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि कुछ प्राकृतिक पेय और फल भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं. नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय पदार्थ शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ जरूरी मिनरल्स भी प्रदान करते हैं. इसके अलावा तरबूज, खीरा और मौसमी जैसे फल शरीर में पानी की कमी को दूर करने में बेहद मददगार साबित होते हैं. ये चीजें शरीर को तरोताजा बनाए रखने के साथ ऊर्जा भी देती हैं. दिनभर पानी पीने की बनाएं आदतडॉ. शक्ति बसु बताते हैं गर्भवती महिलाओं को दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीते रहना चाहिए. एक साथ ज्यादा पानी पीने के बजाय नियमित अंतराल पर पानी लेना ज्यादा फायदेमंद होता है. हमेशा अपने साथ पानी की बोतल रखें और बाहर जाते समय भी पानी पीना न भूलें. यह आदत शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में काफी मदद करती है. क्या बोले डॉक्टर जिला अस्पताल सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु बताते हैं कि डिहाइड्रेशन के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे मुंह सूखना, पेशाब का गहरा रंग, कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना और दिल की धड़कन तेज होना, अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत पानी या तरल पदार्थ का सेवन बढ़ा दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें. हर गर्भवती महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी डाइट या हाइड्रेशन प्लान को अपनाने से पहले अपने नज़दीकी डॉक्टर की सलाह जरूर लें. सही मार्गदर्शन और संतुलित खानपान के जरिए गर्मियों में भी खुद को और अपने बच्चे को स्वस्थ रखा जा सकता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Kannauj,Uttar Pradesh First Published : April 09, 2026, 19:15 IST







