सिवनी में जेबकतरा गिरफ्तार:मंदिर से श्रद्धालु का उड़ाया था पर्स, 17 हजार लेकर हुआ था फरार

सिवनी जिले में सक्रिय जेबकतरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने शनिवार की रात एक शातिर चोर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से चोरी की नकदी और पर्स बरामद किया। कोतवाली थाना प्रभारी सतीश तिवारी ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 को सिवनी निवासी अमित राजपूत (42) ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि हनुमान प्रकटोत्सव के दौरान बालस्वरूप हनुमान मंदिर में पूजा करते समय रात करीब 8 बजे किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब से लगभग 17 हजार रुपए चुरा लिए थे। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना स्तर पर एक टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास पूछताछ, संदिग्धों की गतिविधियों का विश्लेषण और तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग किया। इसके आधार पर सिवनी के टिग्गा मोहल्ला निवासी इस्लाम खान (30) की पहचान संदिग्ध के रूप में हुई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने चोरी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने चोरी की गई राशि में से कुछ पैसे खर्च कर दिए थे। उसके पास से 7,250 रुपये नकद और एक पर्स बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी इस्लाम खान के खिलाफ पहले भी कोतवाली थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी सतीश तिवारी के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक संजय यादव, मनोज पाल, मुकेश चौरिया और राजेंद्र राजपूत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले आयोजनों में सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
गर्मी में भूलकर भी नहीं रखें फ्रिज में ये चीजें, फायदे की जगह हो जाएगा नुकसान, हेल्थ एक्सपर्ट से जानें

Last Updated:April 05, 2026, 07:03 IST Health tips: गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोग ठंडी चीजें ज्यादा खाने लगते हैं. घर में रखा फ्रिज इस मौसम में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीज बन जाता है. कई लोग खाने-पीने की लगभग हर चीज फ्रिज में रख देते हैं, ताकि वह ज्यादा समय तक ताजा रहे. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ चीजें फ्रिज में रखना नुकसानदायक हो सकता है. खरगोन हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. संतोष मौर्य (आयुर्वेद विशेषज्ञ) बताते हैं कि हर चीज को ठंडा रखना जरूरी नहीं होता. कई फल और सब्जियां फ्रिज में रखने से उनके पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इससे शरीर को फायदा मिलने की जगह नुकसान हो सकता है. इसलिए गर्मी में खाने की चीजों को सही तरीके से रखना जरूरी है. ब्रेड को भी अक्सर लोग फ्रिज में रख देते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता. फ्रिज में रखने से ब्रेड जल्दी सूख जाती है और उसका स्वाद भी खराब हो जाता है. लंबे समय तक ऐसी ब्रेड खाने से पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है. टमाटर को फ्रिज में रखने से उसका स्वाद और प्राकृतिक गुण कम हो जाते हैं. ठंडे तापमान में टमाटर जल्दी खराब भी हो सकता है. इसलिए टमाटर को सामान्य तापमान पर खुले स्थान पर रखना ज्यादा सही माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google केले, आम और पपीता जैसे फलों को भी फ्रिज में रखने से बचना चाहिए. फ्रिज में रखने से ये फल जल्दी काले पड़ जाते हैं और इनमें मौजूद पोषक तत्व कम हो जाते हैं. ऐसे फल सामान्य जगह पर रखने से ज्यादा समय तक अच्छे रहते हैं. तरबूज को भी पूरा का पूरा फ्रिज में रखना सही नहीं माना जाता. इससे उसका स्वाद बदल सकता है. तरबूज काटने के बाद ही फ्रिज में रखें और जल्दी उपयोग करें. इससे शरीर को सही पोषण मिलता है और पेट की समस्या से बचाव होता है. लहसुन, प्याज और आलू जैसी चीजों को भी फ्रिज में रखने से नुकसान हो सकता है. फ्रिज में रखने से इनका स्वाद बदल जाता है और इनमें नमी बढ़ जाती है. इससे ये जल्दी खराब हो सकते हैं और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. तेल को भी फ्रिज में रखना सही नहीं माना जाता. ठंडे तापमान में तेल गाढ़ा हो जाता है और उसकी गुणवत्ता बदल सकती है. इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि गर्मी में भी कुछ चीजों को सामान्य तापमान पर ही रखना चाहिए, ताकि शरीर स्वस्थ बना रहे. First Published : April 05, 2026, 07:03 IST
जोधपुर में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब शहर में संभव – News18 हिंदी

X जोधपुर में शुरू हुई रोबोटिक सर्जरी, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब संभव Jodhpur Cancer Robotic Surgery: जोधपुर के विनायका अस्पताल में स्वदेशी रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आया है. 8 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस तकनीक से अब कैंसर सहित कई जटिल ऑपरेशन शहर में ही संभव हो गए हैं. डेढ़ महीने में 13 सफल सर्जरी इसके बेहतर परिणाम का संकेत हैं. अस्पताल ने 8 डॉक्टरों और 12 स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण देकर इस सुविधा को मजबूत बनाया है. डॉ. प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में टीम पहले ही 5000 से अधिक कैंसर ऑपरेशन कर चुकी है. अब रोबोटिक तकनीक से मरीजों को कम दर्द, जल्दी रिकवरी और कम खर्च का लाभ मिल रहा है. RGHS योजना से जुड़ने के कारण आम लोगों की पहुंच भी बढ़ी है. इस पहल से मारवाड़ के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
क्रिकेट खेलते-खेलते 3 दोस्तों ने साफ कर दी नदी:पॉकेट मनी से ग्लव्स-जूते खरीदे, लोग मजाक उड़ाते तो भी जुटे रहते, अब देश–दुनिया में चर्चा

भोपाल से 119 किलोमीटर दूर ब्यावरा के 3 दोस्तों की इन दिनों देश-दुनिया में चर्चा है। 20 और 18-18 साल के तीनों दोस्त एक ही मोहल्ले में रहते हैं। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर, जब लोग ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान कर रहे थे, तब इन्होंने अजनार नदी की सफाई का संकल्प लिया। तीनों को तैरना नहीं आता, फिर भी नदी में उतर गए। रोजमर्रा के काम की रील बनाकर अपलोड करने लगे। लोग ट्रोल करते और मजाक बनाते रहे, लेकिन ये हर दिन क्रिकेट खेलने का कहकर निकलते और नदी से गंदगी निकालते रहे। फरवरी-मार्च में परीक्षा के दौरान भी ये रोज सफाई करते रहे। नदी के एक घाट पर, जहां पहले कचरे का पहाड़ था, वहां अब इन्होंने पुताई कर दी है। वहां लोग घूमने आने लगे हैं। बीते दिनों मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इनके काम को सराहा, तो देश-दुनिया की नजर इन पर पड़ी। कुछ लोगों ने कहा कि ये सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए ऐसा कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ब्यावरा पहुंचा और असली तस्वीर समझी। बिट्टू ने दिया नदी सफाई का आइडिया भास्कर की टीम जब ब्यावरा पहुंची तो तीनों दोस्त एक स्कूटी पर सवार होकर नदी के घाट जाने की तैयारी कर रहे थे। अब ये शहर में फेमस चेहरे हो गए हैं। सबसे मुख्य किरदार है बिट्टू तबाही उर्फ सुरेंद्र चौधरी। दो अन्य किरदार हैं कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल। बातचीत की शुरूआत करते हुए कृष्णा ने बताया कि ये आयडिया बिट्टू का था। 26 जनवरी को बिट्टू ने कहा कि क्यों न हम कुछ ऐसा करें कि लोगों को लगे कि हमने कुछ बदलाव लाया है। हम यहां क्रिकेट खेलने आते थे। कई बार घाट पर बैठने का मन करता था लेकिन इतनी गंदगी होती थी कि बैठ नहीं पाते थे। उसके बाद से हम लोग अबतक 3 घाटों की सफाई कर चुके हैं। लोग मजाक उड़ाते थे लेकिन हम जुटे रहे कृष्णा की बात को आगे बढ़ाते हुए बिट्टू ने कहा कि हमने नदी सफाई की बात सोच तो ली, लेकिन दिक्कत ये थी हम तीनों को तैरना नहीं आता था। फिर भी हम पीछे नहीं हटे। हमने ग्लव्स, जूते और एक जाल का इंतजाम किया। फिर कचरा खींचने के लिए एक टूल बनवाया। 26 जनवरी के बाद एक दिन ऐसा नहीं गुजरा कि हम घाट पर न आएं हों। एक बार नदी में काम करते हुए मेरे पैरों पर सांप आ गया था। मेरे दोस्त कृष्णा ने मुझे बताया। वो तो अच्छा हुआ कि मैं बड़े जूते पहना हुआ था। पैसों का इंतजाम कैसे करते हो? इस सवाल पर बिट्टू ने कहा कि पॉकेट मनी को बचाकर अपने लिए हाथ में पहनने वाले दस्ताने, जूते और जाल खरीदते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर भी हमें थोड़ी मदद मिली है। अब तक हम सफाई में अपने करीब 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। हमें जब कोई काम करना है तो हम 15 दिन से उसके लिए पैसे जोड़ते हैं। ड्रम, पेंट और बाकी टूल पर अब तक 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। स्किन इंफेक्शन हुआ, कई बार बुखार भी आया गंदगी के कारण तीनों लड़कों को हाथ-पैरों में स्किन इंफेक्शन भी हो गया है। वे कहते हैं कि कई बार बुखार भी आ जाता है। हमें भी पता है कि ये सब गंदे पानी में ज्यादा समय तक रहने के कारण ही हो रहा है। लेकिन एक बार यदि हम इसे साफ करने में आगे बढ़ गए तो शहर के लिए ये बहुत बड़ा काम हो जाएगा। बिट्टू कहता है नदी से जो कचरा निकला है, वो हमने फेंका नहीं है। घाट के पास ही इसे दबाकर रखा है। हम चाहते हैं कि इस कचरे को रीसाइकिल करके कहीं इस्तेमाल किया जा सके। आजकल तो सड़क बनाने में भी प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हो रहा है। परीक्षाओं के दौरान भी काम करते रहे बिट्टू के दूसरे साथी कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल दोनों बारहवीं क्लास में पढ़ रहे थे। फरवरी-मार्च में उनकी परीक्षाएं भी थीं। हमने पूछा परीक्षाओं के दौरान कैसे काम किया? तो जवाब मिला कि इस दौरान भी रोजाना शाम को घाट पर आते थे। एक भी दिन हम इस काम से गैरहाजिर नहीं रहे। घर वालों को भी कभी नहीं बताया। घर वाले जब भी पूछते तो यही कहते कि थोड़ा रिलेक्स होने के लिए खेलने जा रहे हैं। मां-पिता से कहकर निकलते-क्रिकेट खेलने जा रहे हैं बिट्टू और कृष्णा कहते हैं कि वो बीते दो ढाई महीने से नदी की सफाई के रील सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपलोड कर रहे हैं। लेकिन उनके माता–पिता सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करते। उन्हें कभी ये पता नहीं लगा कि वे क्या करते हैं? हम तो घर से यही कहकर निकलते हैं कि हम क्रिकेट खेलने जा रहे हैं। हां, बीते कुछ दिनों से जब से महिंद्रा जी ने हमारे काम की सोशल मीडिया पर तारीफ की है, तब से कई लोग हमसे अच्छे से बात करते हैं। कलेक्टर ने भी हमें बुलाकर सम्मान किया। स्थानीय विधायक ने भी हमें बुलाया है। प्रशासन भी अब इन घाटों पर जेसीबी से कचरा हटवाने में जुट गया है। 15 नाले, पूरे शहर का सीवरेज और कचरा भी इसी नदी में ब्यावरा शहर के बीचों बीच से बहने वाली ये नदी प्लास्टिक कचरे से अटी पड़ी है। जहां नजर डालो वहीं से सीवरेज मिलता दिख रहा है। इन लड़कों ने बीते दो महीने में नदी के 3 घाटों पर तस्वीर बदलने की कोशिश की है। इन्होंने घाट की सीढ़ियों की सफाई करके यहां पुताई की। घाटों पर कचरा न फेंके के पोस्टर लगाए वहीं घाट पर कचरा फेंकने के लिए दो ड्रम रखे। तीनों दोस्त रोज ड्रम का कचरा खाली करते हैं, लोगों से कहते हैं कचरा बाहर न फेंके। इनकी कोशिश के बाद अब सरकारी अमला भी एक्टिव होता दिख रहा है। नगर पालिका ब्यावरा के सीएमओ इकरार अहमद अपनी टीम के साथ ऐसे ही एक घाट पर पहुंचे थे। अहमद कहते हैं कि अजनार नदी का उद्गम स्थल यहां से 15 किलोमीटर दूर है। पूरे शहर का सीवरेज और छोटे-बड़े नालों की गंदगी नदी में मिलती है। सीवरेज को इसमें मिलने से रोकने
गर्मी में गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें खास ख्याल! डाइटिशियन से जानें, क्या खाएं, क्या बचें और कैसे रहें स्वस्थ

जमशेदपुर: गर्मी का मौसम शुरू होते ही आम लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने की जरूरत ज्यादा हो जाती है. इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में सही खान-पान और दिनचर्या बेहद जरूरी हो जाती है. आइये जानते हैं गर्भवती महिलाएं ऐसे में क्या करें. जमशेदपुर की डाइटिशियन बीवा रंजन ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान गर्मी में एक बार में ज्यादा खाना खाने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन करना ज्यादा फायदेमंद होता है. हर 2 से 3 घंटे में हल्का भोजन लेने से पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है. हाइड्रेशन का रखें खास ध्यान गर्मी में सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी होती है. इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है. इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ताजे फलों का जूस जैसे तरबूज का जूस शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है. सुबह का नाश्ता हो हल्का और पौष्टिक सुबह के समय फल खाना सबसे अच्छा माना जाता है. तरबूज, खरबूजा, सेब, केला जैसे फल शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स देते हैं. साथ ही आप हल्का दलिया, ओट्स या दूध भी ले सकती हैं. दोपहर का भोजन संतुलित रखें दोपहर में रोटी, चावल और दाल का संतुलित सेवन करें. इसके साथ हरी सब्जियां और सलाद जरूर शामिल करें. सलाद में खीरा, टमाटर, गाजर जैसी चीजें शरीर को ठंडक देती हैं और पाचन को बेहतर बनाती हैं. शाम के समय हेल्दी स्नैक्स लें शाम को भारी तली-भुनी चीजों से बचें. इसके बजाय सॉटेड पनीर, चना (चिकपी) सलाद या स्प्राउट्स खा सकती हैं. ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं और मां व बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हैं. रात का खाना हल्का रखें रात में हल्का भोजन जैसे खिचड़ी, दाल-चावल या हल्की सब्जी के साथ रोटी लेना बेहतर होता है. ज्यादा भारी खाना पचने में दिक्कत दे सकता है और नींद भी खराब कर सकता है. लाइफस्टाइल का भी रखें ध्यान गर्मी में ज्यादा मेहनत या हार्ड वर्क से बचना चाहिए. हल्की-फुल्की वॉक करना शरीर के लिए अच्छा रहता है. ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें और तेज धूप में बाहर निकलने से बचें. जानें क्या न करें बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और बाहर का खाना अवॉयड करें. कैफीन और ज्यादा मीठे पेय पदार्थ भी कम लें. अंत में गर्मी के मौसम में प्रेग्नेंट महिलाओं को संतुलित डाइट, पर्याप्त पानी और आरामदायक दिनचर्या अपनाकर खुद को स्वस्थ रखना चाहिए. इससे मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है.
पीरियड में तेज दर्द होना भी बांझपन का संकेत:25% महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के पीछे एंडोमेट्रियोसिस; हर 10 में से एक महिला पीड़ित, लेकिन है अनजान

पीरियड के दौरान दर्द को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हर दर्द सामान्य नहीं होता। एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी हर 10 में से एक किशोरी और महिला को प्रभावित कर रही है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान 4 से 11 साल की देरी से होती है। चिंता की बात यह है कि आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण यही बीमारी बन रही है। समय रहते पहचान न होने पर यह किडनी, आंत और प्रजनन क्षमता तक को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। पीरियड के दौरान यह टिशु भी सक्रिय होता है, जिससे शरीर में सूजन, दर्द, चॉकलेट सिस्ट और एडहीजन बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेकर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। राजधानी भोपाल से लेकर मध्यप्रदेश हो या देश से लेकर दुनिया हो, कहीं भी महिला इससे सुरक्षित नहीं हैं। केस स्टडी 1- दर्द से किडनी फेलियर तक 33 वर्षीय युवती को कई सालों से पीरियड के दौरान तेज दर्द होता था। वह इसे सामान्य समझकर दर्दनाशक दवाएं लेती रही और कभी जांच नहीं कराई। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज किया। कुछ समय बाद पेट में सूजन और पेशाब में समस्या शुरू हुई। जांच में पता चला कि एंडोमेट्रियोसिस टिशु ट्यूमर जैसा बनकर यूटेरस ट्यूब पर दबाव डाल रहा है, जिससे किडनी पर असर पड़ा। हालत बिगड़ने पर दोनों किडनी फेल होने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर जांच हो जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। केस स्टडी 2- आंतों तक पहुंचा रोग 39 वर्षीय महिला में एंडोमेट्रियोसिस लंबे समय तक अनदेखा रहा। बाद में यह टिशु आंतों तक फैल गया और गंभीर संक्रमण हो गया। डॉक्टरों को पहले आंत का प्रभावित हिस्सा हटाना पड़ा, फिर सर्जरी कर टिशु निकाला गया। यह केस दिखाता है कि बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। केस स्टडी 3: बांझपन की वजह बना रोग एक 32 वर्षीय महिला कई सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। जांच के दौरान एंडोमेट्रियोसिस सामने आया। डॉक्टरों के अनुसार, यही बीमारी उसकी इंफर्टिलिटी का कारण बनी थी। इस टिशु के कारण बॉडी का हार्मोनल बैलेंस बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे बॉडी में एस्ट्रोजेन का लेवल कम हो जाता है। जो प्रेगनेंसी में समस्या पैदा करता है। 4 से 11 साल देरी से होती है पहचान यह बीमारी 4 से 11 साल की देरी से पकड़ में आती है, क्योंकि महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझ लेती हैं। डॉ. चित्तावर कहती हैं कि अगर दर्द इतना हो कि महिला रोजमर्रा के काम नहीं कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस ही बांझपन का कारण बन रहा है। यह टिशु प्रजनन अंगों को प्रभावित कर गर्भधारण की क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। रोग का दो ही स्थितियों में पता चलता है- पीरियड के दर्द को ना समझें सामान्य एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अक्सर सामान्य पीरियड दर्द से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड के दौरान असहनीय दर्द, जो दवा लेने के बाद ही कम हो। कई महिलाओं को पीरियड के पहले और बाद में भी लगातार दर्द बना रहता है। इसके अलावा दर्द के कारण दैनिक कार्य न कर पाना, भारी ब्लीडिंग, पेट में सूजन, उल्टी या मतली, लंबे समय तक पेल्विक दर्द और थकान भी इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह रोग खतरनाक एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे गंभीर असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। कई मामलों में यह बीमारी गर्भधारण को मुश्किल बना देती है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह किडनी, आंत और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। WHO ने इस क्रॉनिक बीमारी की कैटेगरी में रखा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस एक कॉमन लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है। यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) कैटेगरी वाला रोग है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इस बीमारी का असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं लंबे समय तक सही इलाज से वंचित रह जाती हैं। देर से पहचान सबसे बड़ा खतरा WHO का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में औसतन 4 से 12 साल की देरी होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। WHO सलाह देता है कि यदि दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
पीरियड में तेज दर्द होना भी बांझपन का संकेत:25% महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के पीछे एंडोमेट्रियोसिस; हर 10 में से एक महिला पीड़ित, लेकिन है अनजान

पीरियड के दौरान दर्द को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हर दर्द सामान्य नहीं होता। एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी हर 10 में से एक किशोरी और महिला को प्रभावित कर रही है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान 4 से 11 साल की देरी से होती है। चिंता की बात यह है कि आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण यही बीमारी बन रही है। समय रहते पहचान न होने पर यह किडनी, आंत और प्रजनन क्षमता तक को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। पीरियड के दौरान यह टिशु भी सक्रिय होता है, जिससे शरीर में सूजन, दर्द, चॉकलेट सिस्ट और एडहीजन बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेकर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। राजधानी भोपाल से लेकर मध्यप्रदेश हो या देश से लेकर दुनिया हो, कहीं भी महिला इससे सुरक्षित नहीं हैं। केस स्टडी 1- दर्द से किडनी फेलियर तक 33 वर्षीय युवती को कई सालों से पीरियड के दौरान तेज दर्द होता था। वह इसे सामान्य समझकर दर्दनाशक दवाएं लेती रही और कभी जांच नहीं कराई। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज किया। कुछ समय बाद पेट में सूजन और पेशाब में समस्या शुरू हुई। जांच में पता चला कि एंडोमेट्रियोसिस टिशु ट्यूमर जैसा बनकर यूटेरस ट्यूब पर दबाव डाल रहा है, जिससे किडनी पर असर पड़ा। हालत बिगड़ने पर दोनों किडनी फेल होने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर जांच हो जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। केस स्टडी 2- आंतों तक पहुंचा रोग 39 वर्षीय महिला में एंडोमेट्रियोसिस लंबे समय तक अनदेखा रहा। बाद में यह टिशु आंतों तक फैल गया और गंभीर संक्रमण हो गया। डॉक्टरों को पहले आंत का प्रभावित हिस्सा हटाना पड़ा, फिर सर्जरी कर टिशु निकाला गया। यह केस दिखाता है कि बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। केस स्टडी 3: बांझपन की वजह बना रोग एक 32 वर्षीय महिला कई सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। जांच के दौरान एंडोमेट्रियोसिस सामने आया। डॉक्टरों के अनुसार, यही बीमारी उसकी इंफर्टिलिटी का कारण बनी थी। इस टिशु के कारण बॉडी का हार्मोनल बैलेंस बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे बॉडी में एस्ट्रोजेन का लेवल कम हो जाता है। जो प्रेगनेंसी में समस्या पैदा करता है। 4 से 11 साल देरी से होती है पहचान यह बीमारी 4 से 11 साल की देरी से पकड़ में आती है, क्योंकि महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझ लेती हैं। डॉ. चित्तावर कहती हैं कि अगर दर्द इतना हो कि महिला रोजमर्रा के काम नहीं कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस ही बांझपन का कारण बन रहा है। यह टिशु प्रजनन अंगों को प्रभावित कर गर्भधारण की क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। रोग का दो ही स्थितियों में पता चलता है- पीरियड के दर्द को ना समझें सामान्य एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अक्सर सामान्य पीरियड दर्द से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड के दौरान असहनीय दर्द, जो दवा लेने के बाद ही कम हो। कई महिलाओं को पीरियड के पहले और बाद में भी लगातार दर्द बना रहता है। इसके अलावा दर्द के कारण दैनिक कार्य न कर पाना, भारी ब्लीडिंग, पेट में सूजन, उल्टी या मतली, लंबे समय तक पेल्विक दर्द और थकान भी इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह रोग खतरनाक एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे गंभीर असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। कई मामलों में यह बीमारी गर्भधारण को मुश्किल बना देती है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह किडनी, आंत और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। WHO ने इस क्रॉनिक बीमारी की कैटेगरी में रखा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस एक कॉमन लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है। यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) कैटेगरी वाला रोग है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इस बीमारी का असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं लंबे समय तक सही इलाज से वंचित रह जाती हैं। देर से पहचान सबसे बड़ा खतरा WHO का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में औसतन 4 से 12 साल की देरी होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। WHO सलाह देता है कि यदि दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
मोना ने गौरव को ‘धुरंधर’ का स्पॉइलर देने से रोका:शूटिंग के सेट पर समझाया कि फिल्म रिलीज से पहले जानकारी साझा करना गलत है

ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम पर वेब शो ‘मां का सम’ रिलीज हो चुका है। यह कहानी मां‑बेटे के रिश्ते को एक नए और मॉडर्न नजरिए से पेश करती है। इस शो में इमोशन, ह्यूमर और आज की जनरेशन की सोच का दिलचस्प मेल देखने को मिलता है, जहां एक बेटा अपनी सिंगल मदर के लिए सही लाइफ पार्टनर ढूंढने की कोशिश करता है। दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में शो की स्टारकास्ट मोना सिंह और मिहिर आहूजा ने अपने किरदारों, शूटिंग के अनुभव, फिल्मी सफर और इस कहानी के जरिए समाज को दिए जा रहे महत्वपूर्ण संदेश पर विस्तार से बातचीत की। इस दौरान मोना सिंह ने फिल्म ‘धुरंधर’ से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया, जिसमें उन्होंने सेट पर ही एक्टर गौरव गेरा को स्पॉइलर देने से रोक दिया था। ‘मां का सम ’ की स्क्रिप्ट में ऐसा क्या खास था कि आपने तुरंत हां कह दी? मोना सिंह- मुझे इस शो की सबसे खास बात इसकी सोच लगी। आमतौर पर हम मां के किरदार को एक तय ढांचे में देखते हैं जहां वह सिर्फ अपने बच्चों के लिए जीती है। लेकिन इस कहानी में मां को एक इंसान की तरह दिखाया गया है, जिसकी अपनी इच्छाएं हैं, अपने सपने हैं और जो अपनी जिंदगी में दूसरा मौका डिजर्व करती है। यह बहुत रिफ्रेशिंग और प्रोग्रेसिव अप्रोच है। खासतौर पर सिंगल मदर्स के लिए यह बहुत जरूरी है कि उन्हें भी अपनी जिंदगी जीने का पूरा हक मिले। मुझे लगा कि यह शो लोगों की सोच बदल सकता है और इसी वजह से मैंने इसे तुरंत हां कह दी। शो में अपने किरदार ‘अगस्त्य’ के बारे में विस्तार से बताइए? मिहिर आहूजा- अगस्त्य एक बहुत ही होशियार और सेंसिटिव लड़का है, जो अपनी मां से बहुत प्यार करता है। वह चाहता है कि उसकी मां की जिंदगी में कोई कमी न रहे, खासकर उनकी पर्सनल लाइफ में। वह एक मैथ्स जीनियस है और हर चीज को लॉजिक और एल्गोरिदम के जरिए समझने की कोशिश करता है। इसी सोच के साथ वह अपनी मां के लिए डेट्स अरेंज करता है, ताकि वह एक परफेक्ट पार्टनर चुन सके। यह किरदार बहुत इंटरेस्टिंग है क्योंकि इसमें इमोशन और लॉजिक का अनोखा मेल देखने को मिलता है। शो में आपका किरदार डेटिंग ऐप के जरिए डेट्स पर जाता है। इस कॉन्सेप्ट को आप कैसे देखती हैं? मोना सिंह- शो में जो डेट्स दिखाई गई हैं, वे दरअसल उसके बेटे द्वारा अरेंज की गई हैं। उसका बेटा यह समझना चाहता है कि कौन सा इंसान उसकी मां के लिए सही रहेगा। यह पूरी प्रक्रिया बहुत दिलचस्प है क्योंकि इसमें एक तरह का एक्सपेरिमेंट भी है जैसे हम जिंदगी में अलग-अलग चीजें ट्राय करके सही विकल्प चुनते हैं। यहां भी वही हो रहा है, बस फर्क इतना है कि यह एक मां की लव लाइफ को लेकर है, जो हमारे समाज में अभी भी थोड़ा टैबू माना जाता है। मुझे लगता है कि यह पहल बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे लोग समझेंगे कि मां भी अपनी खुशी के बारे में सोच सकती है। शूटिंग के दौरान कोई ऐसा मजेदार किस्सा जो आपको आज भी याद हो? मोना सिंह- दिल्ली में शूट किया गया एक डेट सीन मेरे लिए बेहद यादगार और मजेदार रहा। उस सीन में लगातार फोन कॉल्स आ रहे थे कभी मेरी मां का, तो कभी सामने वाले लड़के की मां का।वह पूरा सिचुएशन इतना रियल और फनी बन गया था कि हम शूट करते-करते हंस पड़ते थे। सामने वाले एक्टर ने भी बहुत शानदार परफॉर्म किया, जिससे सीन और भी मजेदार हो गया। उस दौरान मुझे लगा कि असल जिंदगी में भी शायद लोगों के साथ ऐसी अजीब और मजेदार डेट्स होती होंगी। ओटीटी प्लेटफॉर्म को आप अपने करियर के लिए कितना अहम मानती हैं? मोना सिंह- ओटीटी मेरे लिए एक बहुत बड़ा गेम चेंजर रहा है। मुझे ऐसा लगता है कि मुझे मेरी दूसरी पारी यहीं से मिली है। यहां कहानियां ज्यादा रियल और लेयर्ड होती हैं, खासकर महिला किरदारों के लिए। पहले जहां किरदारों को सिर्फ पॉजिटिव या नेगेटिव के दायरे में दिखाया जाता था, वहीं ओटीटी पर उन्हें पूरी गहराई और विस्तार के साथ पेश किया जाता है। अगर ओटीटी नहीं होता, तो शायद मुझे ऐसे रोल्स निभाने का मौका नहीं मिलता। ‘धुरंधर’ से जुड़ा एक स्पॉइलर वाला किस्सा भी चर्चा में रहा। उस बारे में बताइए? मोना सिंह- हम अमृतसर में शूट कर रहे थे, तभी गौरव गेरा मुझे धुरंधर फिल्म से जुड़ी तस्वीरें और कहानी बताने लगे। मैंने तुरंत उन्हें रोक दिया और कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए। एक कहानी और किरदार को बनाने में बहुत मेहनत लगती है और हर कलाकार एक NDA से बंधा होता है। मैंने उन्हें समझाया कि रिलीज से पहले इस तरह की जानकारी साझा करना गलत है। यह प्रोफेशनल एथिक्स का भी हिस्सा है कि हम उस भरोसे को बनाए रखें। शूटिंग के दौरान सबसे बड़ा चैलेंज क्या रहा? मिहिर आहूजा- सबसे बड़ा चैलेंज मैथ्स से जुड़े सीन थे। मुझे उन्हें इस तरह से करना था कि दर्शकों को लगे कि मैं सच में एक मैथ्स एक्सपर्ट हूं। इसके लिए मुझे कई फॉर्मूलाज और एल्गोरिदम समझने पड़े और उनकी प्रैक्टिस करनी पड़ी। सेट पर हमें बाकायदा गाइड किया जाता था, ताकि हम अपने किरदार के साथ न्याय कर सकें। यह थोड़ा मुश्किल जरूर था, लेकिन सीखने का अच्छा अनुभव भी रहा। सेट पर जेन-जी रिलेशनशिप टर्म्स को लेकर कोई मजेदार अनुभव रहा? मोना सिंह- हां, यह काफी मजेदार था क्योंकि हम दोनों ही इन टर्म्स से ज्यादा वाकिफ नहीं थे। ‘सिचुएशनशिप’, ‘घोस्टिंग’, ‘ब्रेडक्रंबिंग’ जैसे शब्द हमारे लिए नए थे। सेट पर हमें इनके मतलब समझाए गए, जैसे किसी क्लास में पढ़ाया जाता है। यह अनुभव काफी दिलचस्प था और इससे यह भी समझ आया कि आज की जनरेशन किस तरह रिलेशनशिप को देखती है। एक आउटसाइडर होने के नाते बॉलीवुड में आपकी जर्नी कैसी रही? मिहिर आहूजा- शुरुआत में मेरे लिए सब कुछ नया था क्योंकि इंडस्ट्री में मेरा कोई बैकग्राउंड नहीं था। मुझे नहीं पता था कि ऑडिशन कहां होते हैं या किससे संपर्क करना चाहिए। मैंने खुद ही रास्ते ढूंढे, गूगल की मदद ली और
सलमान लाला से इंस्पायर्ड होकर आसिफ बना अपराधी:5 स्टार होटलों में रुकता, स्पोर्ट्स बाइक पर घूमा, पुलिस की मौजूदगी में पेशी की रील बनाई

भोपाल में विजय मेवाड़ा की बेरहमी से हत्या करने वाला आसिफ उर्फ बम इंदौर के डॉन सलमान लाला से इंस्पायर्ड था। सलमान की तर्ज पर महंगी कार-बाइक पर घूमता था। 5 स्टार होटलों में ठहरता और अवैध कारोबार से लाखों रुपए बना चुका था। आसिफ सोशल मीडियो प्लेटफॉर्म पर भी खासा एक्टिव रहता था। हर गतिविधि की रील बनाकर अपलोड करता था। सलमान की तरह आसिफ भी अपना एक बड़ा नेटवर्क बनाना चाहता था। यहां तक कि पुलिस की मौजूदगी में कोर्ट पेशी के दौरान कई रील बनाई और वायरल की हैं। उसके करीबियों की मानें तो नशे में आसिफ हैवान बन जाता था। साथ वालों तक को पीटता था। वह शराब पीने का बेहद शौकीन था। उसका बड़ा भाई शरीफ उर्फ बच्चा भी अपराधी है और भोपाल सेंट्रल जेल में बंद है। हत्या के बाद शॉर्ट एनकाउंटर में पकड़े गए आसिफ को न्यायालय ने 13 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। फिलहाल आरोपी हमीदिया अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है। पुलिस को गुमराह कर रहा आसिफ इलाजरत आसिफ से पुलिस फिलहाल कोई खास पूछताछ नहीं कर सकी है। जैसे फरारी काटने में उसकी मदद किसने की। तीन दिनों तक आरोपी कहां रहा। समसपुरा गांव तक कैसे पहुंचा। आरोपी लगातार बयान बदलकर पुलिस को गुमराह कर रहा है। उसने पुलिस को अपराध के बाद पैदल ही समसपुरा के जंगल तक पहुंचने की बात कही है। हालांकि उसकी बताई कहानी पुलिस के गले नहीं उतर रही है। अब रातीबड़ पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। जुआ-सटटा और अड़ीबाजी के धंधे से जुड़ा शरीफ और आसिफ दोनों ही भाई जुआ, सट्टा और अड़ीबाजी के धंधे से जुड़े हैं। आसिफ के खिलाफ एक दर्जन से अधिक अपराध शहर के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं। दोनों ही भाई शहर में अवैध कारोबार करने वालों से अड़ीबाजी कर रकम वसूलने का काम भी करते हैं। पर्शियन बिल्लियां पालने का शौकीन आसिफ बम पर्शियन कैट पालने का शौकीन है। उसके पास करीब 6 पर्शियन कैट हैं। इसी के साथ वह बकरा पालन का काम भी कर चुका है। प्रदेश सहित देश के अलग-अलग राज्यों में घूम चुका है। इसकी पुष्टि उसके इंस्टा अकाउंट से होती है। घेराबंदी देख पुलिस पर फायरिंग कर दी थी कारोबारी विजय मेवाड़ा हत्याकांड के मुख्य आरोपी कुख्यात बदमाश आसिफ उर्फ बम को पुलिस ने एक 1 अप्रैल को नाटकीय घेराबंदी के बाद दबोच लिया। 10 मिनट के भीतर दोनों ओर से तीन राउंड फायर किए गए। एक गोली आरोपी के दाहिने पैर के घुटने के करीब लगी। वह लड़खड़ाकर गिरा और उसे पकड़ लिया गया। 12 बजकर 15 मिनट पर पुलिस टीम आरोपी को लेकर सरकारी बोलेरो वाहन से समसपुरा गांव से हमीदिया अस्पताल के लिए रवाना हुई। फिलहाल आसिफ का इलाज जारी है। रातीबड़ थाना पुलिस ने अशोका गार्डन थाने के टीआई अनुराग लाल की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास का एक और मुकदमा दर्ज कर लिया है। जंगल में स्थित घटनास्थल से पुलिस ने लोडेड देसी पिस्टल सहित चले हुए कारतूस जब्त कर लिए हैं। सलमान लाला भी चला था दुर्लभ कश्यप की राह पर भले ही भोपाल का आसिफ इंदौर का बदमाश सलमान लाला से प्रेरित रहा हो, लेकिन खुद सलमान लाला उज्जैन के डॉन दुर्लभ कश्यप से प्रेरित था। दुर्लभ को सलमान अपना आइडल मानता था। दुर्लभ की तरह वह भी अपना नेटवर्क बढ़ाता था और युवा लड़कों को इस नेटवर्क से जोड़ता था। दुर्लभ कश्यप बेहद ही कम उम्र में बड़ा बदमाश बन गया था और एक दिन आपसी रंजिश के चलते गैंगवार में उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर आज तक दुर्लभ कश्यप के किस्से बताए जाते रहे हैं। दुर्लभ कश्यप उज्जैन के जीवाजीगंज के अब्दालपुरा का रहने वाला था। वही भी बिल्लयां पालने का शौकीन था। बताया जाता है कि दुर्लभ से प्रेरित होकर आसिफ भी बिल्लयां पालने लगा था। 15 साल की उम्र से उसने हथियारों के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालनी शुरू कर दी थीं। लोगों धमकाता था। ये खबर भी पढ़ें… पुलिस को देखते ही जंगल में भागने लगा हत्यारा भोपाल के कारोबारी विजय मेवाड़ा हत्याकांड के मुख्य आरोपी कुख्यात बदमाश आसिफ उर्फ बम को पुलिस ने एक नाटकीय घेराबंदी के बाद दबोच लिया। 10 मिनट के भीतर दोनों ओर से तीन राउंड फायर किए गए। एक गोली आरोपी के दाहिने पैर के घुटने के करीब लगी। वह लड़खड़ाकर गिरा और उसे पकड़ लिया गया।पूरी खबर पढ़ें
बटलर से वैभव-यशस्वी के कैच छूटे:अशोक ने 154 की स्पीड से गेंद फेंकी, बिश्नोई 200 टी-20 विकेट वाले यंगेस्ट इंडियन; मोमेंट्स-रिकार्ड्स

IPL 2026 के 9वें मैच में राजस्थान रॉयल्स ने गुजरात टाइटंस को 6 रन से हरा दिया। अहमदाबाद में खेले गए इस मुकाबले में RR ने 210 रन बनाए, जबकि GT 204 रन ही बना सकी। मैच के दौरान जोस बटलर से वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल के अहम कैच छूटे। वहीं, गुजरात के अशोक शर्मा ने 154.2 किमी/घंटा की रफ्तार से इस सीजन की सबसे तेज गेंद फेंकी। दूसरी ओर, रवि बिश्नोई ने टी-20 क्रिकेट में अपने 200 विकेट पूरे कर लिए और इस उपलब्धि तक पहुंचने वाले सबसे युवा भारतीय गेंदबाज बन गए। RR Vs GT मैच के मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स… 1. साई सुदर्शन ने 42 इनिंग में 15वीं फिफ्टी लगाई साई सुदर्शन ने IPL में सिर्फ 42 पारियों में अपनी 15वीं फिफ्टी पूरी कर ली। वे इस मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं और केवल क्रिस गेल (41 पारियां) उनसे आगे हैं। सुदर्शन ने शॉन मार्श (43) को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की। 2. वैभव के IPL में 30 सिक्स पूरे वैभव सूर्यवंशी ने IPL में अपने 30 सिक्स पूरे कर लिए। वे 19 साल या उससे कम उम्र में सबसे तेजी से इस आंकड़े तक पहुंचने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने सिर्फ 157 गेंदों में यह मुकाम हासिल किया। ऋषभ पंत और ईशान किशन ने भी 30-30 सिक्स लगाए थे, लेकिन उन्होंने इसके लिए काफी ज्यादा गेंदें खेलीं। 3. अशोक शर्मा ने इस सीजन की सबसे तेज गेंद फेंकी गुजरात के तेज गेंदबाज अशोक शर्मा ने इस सीजन की सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उन्होंने राजस्थान के खिलाफ मुकाबले में 154.2 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकी। इस सीजन में इससे पहले सबसे तेज गेंद का रिकॉर्ड एनरिक नॉर्त्या (150.9 किमी/घंटा) के नाम था। हालांकि, IPL इतिहास की सबसे तेज गेंद का रिकॉर्ड अभी भी शॉन टैट के नाम है, जिन्होंने 2011 में 157.71 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकी थी। 4. बिश्नोई टी-20 में 200 विकेट लेने वाले सबसे युवा भारतीय बने रवि बिश्नोई ने गुजरात के ग्लेन फिलिप्स का विकेट लेते ही टी-20 क्रिकेट में अपने 200 विकेट पूरे किए। उन्होंने यह उपलब्धि 25 साल 211 दिन की उम्र में हासिल की और इसी के साथ वह टी-20 में 200 विकेट लेने वाले सबसे युवा भारतीय गेंदबाज बन गए। उन्होंने यह मुकाम अपने करियर के 170वें टी-20 मैच में हासिल किया। बिश्नोई टी-20 में 200 विकेट लेने वाले 19वें भारतीय गेंदबाज बने हैं, जबकि स्पिनर्स की लिस्ट में वह 9वें स्थान पर हैं। हालांकि, ओवरऑल टी-20 क्रिकेट में सबसे कम उम्र में 200 विकेट लेने का रिकॉर्ड राशिद खान के नाम है, जिन्होंने यह उपलब्धि 23 साल 119 दिन की उम्र में हासिल की थी। यहां से टॉप-10 मोमेंट्स… 1. वैभव ने चौके से खाता खोला पारी की शुरुआत में ही वैभव सूर्यवंशी ने चौका लगाकर अपने पहले रन बनाए। मोहम्मद सिराज की लेग स्टंप पर डाली गई लेंथ गेंद को उन्होंने हल्के से ग्लांस करते हुए फाइन लेग की दिशा में चौके के लिए भेज दिया। 2. बटलर से वैभव और यशस्वी के कैच छूटे जोस बटलर से वैभव सूर्यवंशी ने यशस्वी जायसवाल का कैच छूट गया। अशोक शर्मा की गेंद पर वैभव सूर्यवंशी ने शॉट खेला, गेंद बल्ले का किनारा लेकर स्लिप की दिशा में गई। बटलर ने फुल लेंथ डाइव लगाकर कैच पकड़ने की कोशिश की, लेकिन गेंद उनके हाथ से छूट गई और चौके के लिए निकल गई। इस जीवनदान का वैभव ने पूरा फायदा उठाया और अगली ही गेंद पर पॉइंट की दिशा में छक्का लगाकर टीम की फिफ्टी पूरी कर दी। इससे पहले यशस्वी जायसवाल को भी जीवनदान मिला था। सिराज की शॉर्ट ऑफ लेंथ गेंद पर यशस्वी ने फ्लिक खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद विकेटकीपर की ओर गई। बटलर ने दाईं ओर डाइव लगाई, लेकिन कैच पकड़ नहीं सके। 3. जायसवाल की चौके से फिफ्टी 12वें ओवर में यशस्वी जायसवाल ने चौके से अपना अर्धशतक पूरा किया। मोहम्मद सिराज की ऑफ स्टंप के बाहर डाली गई गेंद पर उन्होंने आगे बढ़कर एक्स्ट्रा कवर की दिशा में शानदार ड्राइव खेला, जो सीधे चौके के लिए चला गया। 4. रियान ने पहली गेंद पर सिक्स लगाया रियान पराग ने अपनी पहली ही बॉल पर सिक्स लगा दिया। कगिसो रबाडा की फुल लेंथ गेंद, जो मिडिल और लेग स्टंप पर थी, उस पर पराग ने बॉटम हैंड का इस्तेमाल करते हुए डीप स्क्वायर लेग की दिशा में गेंद को सिक्स के लिए भेज दिया। 5. सिराज का डाइविंग कैच 16वें ओवर में शिमरन हेटमायर कैच आउट हो गए। ओवर की तीसरी बॉल अशोक शर्मा ने गुड लेंथ पर फेंकी। हेटमायर ने शॉट खेला, वे लॉन्ग ऑन पर मोहम्मद सिराज के हाथों कैच हो गए। सिराज ने डाइविंग कैच पकड़ा, हेटमायर ने 18 रन बनाए। 6. 15वें ओवर के बाद बॉल बदली गई मैच के दौरान 15वें ओवर के बाद गुजरात के कप्तान की मांग पर अंपायर्स ने गेंद को बदलने का फैसला लिया। यह नियम ओस के असर को कम करने के लिए लागू किया गया है, जिससे दूसरी पारी में गेंदबाजों को बेहतर ग्रिप मिल सके और मुकाबला संतुलित बना रहे। 7. सुदर्शन ने छक्का लगाकर फिफ्टी पूरी की 8वें ओवर की चौथी गेंद पर साई सुदर्शन ने रियान पराग के खिलाफ सिक्स लगाया। इसी के साथ उन्होंने 33 गेंद पर अपनी फिफ्टी पूरी कर ली। वे 73 रन बनाकर कैच आउट हुए। 8. तेवतिया का रिवर्स में सिक्स राहुल तेवतिया ने 15वें ओवर में रिवर्स शॉट पर सिक्स लगा दिया। रवि बिश्नोई की गेंद पर उन्होंने अपना स्टांस बदलते हुए शॉट खेला। तेवतिया ने फुल लेंथ बॉल को डीप बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से सिक्स लगा दिया। 9. जडेजा के थ्रो से शाहरुख रनआउट 15वें ओवर में रवींद्र जडेजा की शानदार फील्डिंग ने शाहरुख खान को रनआउट करा दिया। रवि बिश्नोई की फ्लाइटेड गेंद पर राशिद खान ने शॉट खेलकर दो रन पूरे किए और तीसरे रन के लिए कॉल किया। लॉन्ग फील्ड से जडेजा तेजी से गेंद तक पहुंचे, बाउंड्री के पास शानदार स्टॉप किया और तुरंत स्ट्राइकर एंड पर सटीक थ्रो फेंका। ध्रुव जुरेल ने गिल्लियां बिखेर दीं, जबकि शाहरुख क्रीज से काफी दूर रह गए। 10.






