Monday, 15 Jun 2026 | 05:59 PM

Trending :

EXCLUSIVE

क्रिकेट खेलते-खेलते 3 दोस्तों ने साफ कर दी नदी:पॉकेट मनी से ग्लव्स-जूते खरीदे, लोग मजाक उड़ाते तो भी जुटे रहते, अब देश–दुनिया में चर्चा

क्रिकेट खेलते-खेलते 3 दोस्तों ने साफ कर दी नदी:पॉकेट मनी से ग्लव्स-जूते खरीदे, लोग मजाक उड़ाते तो भी जुटे रहते, अब देश–दुनिया में चर्चा

भोपाल से 119 किलोमीटर दूर ब्यावरा के 3 दोस्तों की इन दिनों देश-दुनिया में चर्चा है। 20 और 18-18 साल के तीनों दोस्त एक ही मोहल्ले में रहते हैं। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर, जब लोग ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान कर रहे थे, तब इन्होंने अजनार नदी की सफाई का संकल्प लिया। तीनों को तैरना नहीं आता, फिर भी नदी में उतर गए। रोजमर्रा के काम की रील बनाकर अपलोड करने लगे। लोग ट्रोल करते और मजाक बनाते रहे, लेकिन ये हर दिन क्रिकेट खेलने का कहकर निकलते और नदी से गंदगी निकालते रहे। फरवरी-मार्च में परीक्षा के दौरान भी ये रोज सफाई करते रहे। नदी के एक घाट पर, जहां पहले कचरे का पहाड़ था, वहां अब इन्होंने पुताई कर दी है। वहां लोग घूमने आने लगे हैं। बीते दिनों मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इनके काम को सराहा, तो देश-दुनिया की नजर इन पर पड़ी। कुछ लोगों ने कहा कि ये सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए ऐसा कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ब्यावरा पहुंचा और असली तस्वीर समझी। बिट्टू ने दिया नदी सफाई का आइडिया
भास्कर की टीम जब ब्यावरा पहुंची तो तीनों दोस्त एक स्कूटी पर सवार होकर नदी के घाट जाने की तैयारी कर रहे थे। अब ये शहर में फेमस चेहरे हो गए हैं। सबसे मुख्य किरदार है बिट्‌टू तबाही उर्फ सुरेंद्र चौधरी। दो अन्य किरदार हैं कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल। बातचीत की शुरूआत करते हुए कृष्णा ने बताया कि ये आयडिया बिट्‌टू का था। 26 जनवरी को बिट्‌टू ने कहा कि क्यों न हम कुछ ऐसा करें कि लोगों को लगे कि हमने कुछ बदलाव लाया है। हम यहां क्रिकेट खेलने आते थे। कई बार घाट पर बैठने का मन करता था लेकिन इतनी गंदगी होती थी कि बैठ नहीं पाते थे। उसके बाद से हम लोग अबतक 3 घाटों की सफाई कर चुके हैं। लोग मजाक उड़ाते थे लेकिन हम जुटे रहे
कृष्णा की बात को आगे बढ़ाते हुए बिट्टू ने कहा कि हमने नदी सफाई की बात सोच तो ली, लेकिन दिक्कत ये थी हम तीनों को तैरना नहीं आता था। फिर भी हम पीछे नहीं हटे। हमने ग्लव्स, जूते और एक जाल का इंतजाम किया। फिर कचरा खींचने के लिए एक टूल बनवाया। 26 जनवरी के बाद एक दिन ऐसा नहीं गुजरा कि हम घाट पर न आएं हों। एक बार नदी में काम करते हुए मेरे पैरों पर सांप आ गया था। मेरे दोस्त कृष्णा ने मुझे बताया। वो तो अच्छा हुआ कि मैं बड़े जूते पहना हुआ था। पैसों का इंतजाम कैसे करते हो? इस सवाल पर बिट्टू ने कहा कि पॉकेट मनी को बचाकर अपने लिए हाथ में पहनने वाले दस्ताने, जूते और जाल खरीदते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर भी हमें थोड़ी मदद मिली है। अब तक हम सफाई में अपने करीब 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। हमें जब कोई काम करना है तो हम 15 दिन से उसके लिए पैसे जोड़ते हैं। ड्रम, पेंट और बाकी टूल पर अब तक 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। स्किन इंफेक्शन हुआ, कई बार बुखार भी आया
गंदगी के कारण तीनों लड़कों को हाथ-पैरों में स्किन इंफेक्शन भी हो गया है। वे कहते हैं कि कई बार बुखार भी आ जाता है। हमें भी पता है कि ये सब गंदे पानी में ज्यादा समय तक रहने के कारण ही हो रहा है। लेकिन एक बार यदि हम इसे साफ करने में आगे बढ़ गए तो शहर के लिए ये बहुत बड़ा काम हो जाएगा। बिट्टू कहता है नदी से जो कचरा निकला है, वो हमने फेंका नहीं है। घाट के पास ही इसे दबाकर रखा है। हम चाहते हैं कि इस कचरे को रीसाइकिल करके कहीं इस्तेमाल किया जा सके। आजकल तो सड़क बनाने में भी प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हो रहा है। परीक्षाओं के दौरान भी काम करते रहे
बिट्‌टू के दूसरे साथी कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल दोनों बारहवीं क्लास में पढ़ रहे थे। फरवरी-मार्च में उनकी परीक्षाएं भी थीं। हमने पूछा परीक्षाओं के दौरान कैसे काम किया? तो जवाब मिला कि इस दौरान भी रोजाना शाम को घाट पर आते थे। एक भी दिन हम इस काम से गैरहाजिर नहीं रहे। घर वालों को भी कभी नहीं बताया। घर वाले जब भी पूछते तो यही कहते कि थोड़ा रिलेक्स होने के लिए खेलने जा रहे हैं। मां-पिता से कहकर निकलते-क्रिकेट खेलने जा रहे हैं
बिट्‌टू और कृष्णा कहते हैं कि वो बीते दो ढाई महीने से नदी की सफाई के रील सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपलोड कर रहे हैं। लेकिन उनके माता–पिता सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करते। उन्हें कभी ये पता नहीं लगा कि वे क्या करते हैं? हम तो घर से यही कहकर निकलते हैं कि हम क्रिकेट खेलने जा रहे हैं। हां, बीते कुछ दिनों से जब से महिंद्रा जी ने हमारे काम की सोशल मीडिया पर तारीफ की है, तब से कई लोग हमसे अच्छे से बात करते हैं। कलेक्टर ने भी हमें बुलाकर सम्मान किया। स्थानीय विधायक ने भी हमें बुलाया है। प्रशासन भी अब इन घाटों पर जेसीबी से कचरा हटवाने में जुट गया है। 15 नाले, पूरे शहर का सीवरेज और कचरा भी इसी नदी में
ब्यावरा शहर के बीचों बीच से बहने वाली ये नदी प्लास्टिक कचरे से अटी पड़ी है। जहां नजर डालो वहीं से सीवरेज मिलता दिख रहा है। इन लड़कों ने बीते दो महीने में नदी के 3 घाटों पर तस्वीर बदलने की कोशिश की है। इन्होंने घाट की सीढ़ियों की सफाई करके यहां पुताई की। घाटों पर कचरा न फेंके के पोस्टर लगाए वहीं घाट पर कचरा फेंकने के लिए दो ड्रम रखे। तीनों दोस्त रोज ड्रम का कचरा खाली करते हैं, लोगों से कहते हैं कचरा बाहर न फेंके। इनकी कोशिश के बाद अब सरकारी अमला भी एक्टिव होता दिख रहा है। नगर पालिका ब्यावरा के सीएमओ इकरार अहमद अपनी टीम के साथ ऐसे ही एक घाट पर पहुंचे थे। अहमद कहते हैं कि अजनार नदी का उद्गम स्थल यहां से 15 किलोमीटर दूर है। पूरे शहर का सीवरेज और छोटे-बड़े नालों की गंदगी नदी में मिलती है। सीवरेज को इसमें मिलने से रोकने के लिए हमने डीपीआर बनाई है। गंगा जल संवर्धन स्कीम के तहत हम इस नदी को को बेहतर करने की कोशिश में जुटे हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
समर दही रेसिपी: समर दही में शामिल करें दही की ये 2 रेसिपी, पेट में ठंडक के साथ दही भी रहेगा बेहतर

March 12, 2026/
10:26 pm

ग्रीष्मकालीन दही रेसिपी: गर्मी का मौसम शुरू हो गया है, जिसमें ऐसी चीजें शामिल होनी चाहिए, जो पेट को ठंडक...

टीपू सुल्तान को शिवाजी की तरह 'बहादुरी का प्रतीक' बताने पर महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख पर मामला दर्ज भारत समाचार

February 15, 2026/
1:12 pm

आखरी अपडेट:फ़रवरी 15, 2026, 13:12 IST सपकाल के टीपू सुल्तान की तुलना शिवाजी से करने वाले बयान के बाद अहिल्यानगर...

ईरान जंग- 9 एशियाई देशों में तेल संकट:बांग्लादेश में यूनिवर्सिटीज बंद, थाइलैंड में लिफ्ट इस्तेमाल पर रोक; पाकिस्तान में मंत्रियों की सैलरी-विदेश यात्रा रोकी

March 10, 2026/
5:07 pm

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच 11 दिनों से जारी जंग का असर अब एशिया के कई देशों में दिखाई देने...

बुरहानपुर में कल दो दर्जन क्षेत्रों में बिजली कटौती:आजाद नगर उपकेंद्र के मेंटेनेंस कार्य के चलते सुबह 8 से 9:30 बजे तक बंद रहेगी बिजली

April 27, 2026/
9:12 pm

बुरहानपुर में 33-11 केवी आजाद नगर उपकेंद्र के रखरखाव कार्य के कारण मंगलवार, 28 अप्रैल को बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

क्रिकेट खेलते-खेलते 3 दोस्तों ने साफ कर दी नदी:पॉकेट मनी से ग्लव्स-जूते खरीदे, लोग मजाक उड़ाते तो भी जुटे रहते, अब देश–दुनिया में चर्चा

क्रिकेट खेलते-खेलते 3 दोस्तों ने साफ कर दी नदी:पॉकेट मनी से ग्लव्स-जूते खरीदे, लोग मजाक उड़ाते तो भी जुटे रहते, अब देश–दुनिया में चर्चा

भोपाल से 119 किलोमीटर दूर ब्यावरा के 3 दोस्तों की इन दिनों देश-दुनिया में चर्चा है। 20 और 18-18 साल के तीनों दोस्त एक ही मोहल्ले में रहते हैं। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर, जब लोग ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान कर रहे थे, तब इन्होंने अजनार नदी की सफाई का संकल्प लिया। तीनों को तैरना नहीं आता, फिर भी नदी में उतर गए। रोजमर्रा के काम की रील बनाकर अपलोड करने लगे। लोग ट्रोल करते और मजाक बनाते रहे, लेकिन ये हर दिन क्रिकेट खेलने का कहकर निकलते और नदी से गंदगी निकालते रहे। फरवरी-मार्च में परीक्षा के दौरान भी ये रोज सफाई करते रहे। नदी के एक घाट पर, जहां पहले कचरे का पहाड़ था, वहां अब इन्होंने पुताई कर दी है। वहां लोग घूमने आने लगे हैं। बीते दिनों मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इनके काम को सराहा, तो देश-दुनिया की नजर इन पर पड़ी। कुछ लोगों ने कहा कि ये सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए ऐसा कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ब्यावरा पहुंचा और असली तस्वीर समझी। बिट्टू ने दिया नदी सफाई का आइडिया
भास्कर की टीम जब ब्यावरा पहुंची तो तीनों दोस्त एक स्कूटी पर सवार होकर नदी के घाट जाने की तैयारी कर रहे थे। अब ये शहर में फेमस चेहरे हो गए हैं। सबसे मुख्य किरदार है बिट्‌टू तबाही उर्फ सुरेंद्र चौधरी। दो अन्य किरदार हैं कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल। बातचीत की शुरूआत करते हुए कृष्णा ने बताया कि ये आयडिया बिट्‌टू का था। 26 जनवरी को बिट्‌टू ने कहा कि क्यों न हम कुछ ऐसा करें कि लोगों को लगे कि हमने कुछ बदलाव लाया है। हम यहां क्रिकेट खेलने आते थे। कई बार घाट पर बैठने का मन करता था लेकिन इतनी गंदगी होती थी कि बैठ नहीं पाते थे। उसके बाद से हम लोग अबतक 3 घाटों की सफाई कर चुके हैं। लोग मजाक उड़ाते थे लेकिन हम जुटे रहे
कृष्णा की बात को आगे बढ़ाते हुए बिट्टू ने कहा कि हमने नदी सफाई की बात सोच तो ली, लेकिन दिक्कत ये थी हम तीनों को तैरना नहीं आता था। फिर भी हम पीछे नहीं हटे। हमने ग्लव्स, जूते और एक जाल का इंतजाम किया। फिर कचरा खींचने के लिए एक टूल बनवाया। 26 जनवरी के बाद एक दिन ऐसा नहीं गुजरा कि हम घाट पर न आएं हों। एक बार नदी में काम करते हुए मेरे पैरों पर सांप आ गया था। मेरे दोस्त कृष्णा ने मुझे बताया। वो तो अच्छा हुआ कि मैं बड़े जूते पहना हुआ था। पैसों का इंतजाम कैसे करते हो? इस सवाल पर बिट्टू ने कहा कि पॉकेट मनी को बचाकर अपने लिए हाथ में पहनने वाले दस्ताने, जूते और जाल खरीदते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर भी हमें थोड़ी मदद मिली है। अब तक हम सफाई में अपने करीब 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। हमें जब कोई काम करना है तो हम 15 दिन से उसके लिए पैसे जोड़ते हैं। ड्रम, पेंट और बाकी टूल पर अब तक 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। स्किन इंफेक्शन हुआ, कई बार बुखार भी आया
गंदगी के कारण तीनों लड़कों को हाथ-पैरों में स्किन इंफेक्शन भी हो गया है। वे कहते हैं कि कई बार बुखार भी आ जाता है। हमें भी पता है कि ये सब गंदे पानी में ज्यादा समय तक रहने के कारण ही हो रहा है। लेकिन एक बार यदि हम इसे साफ करने में आगे बढ़ गए तो शहर के लिए ये बहुत बड़ा काम हो जाएगा। बिट्टू कहता है नदी से जो कचरा निकला है, वो हमने फेंका नहीं है। घाट के पास ही इसे दबाकर रखा है। हम चाहते हैं कि इस कचरे को रीसाइकिल करके कहीं इस्तेमाल किया जा सके। आजकल तो सड़क बनाने में भी प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हो रहा है। परीक्षाओं के दौरान भी काम करते रहे
बिट्‌टू के दूसरे साथी कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल दोनों बारहवीं क्लास में पढ़ रहे थे। फरवरी-मार्च में उनकी परीक्षाएं भी थीं। हमने पूछा परीक्षाओं के दौरान कैसे काम किया? तो जवाब मिला कि इस दौरान भी रोजाना शाम को घाट पर आते थे। एक भी दिन हम इस काम से गैरहाजिर नहीं रहे। घर वालों को भी कभी नहीं बताया। घर वाले जब भी पूछते तो यही कहते कि थोड़ा रिलेक्स होने के लिए खेलने जा रहे हैं। मां-पिता से कहकर निकलते-क्रिकेट खेलने जा रहे हैं
बिट्‌टू और कृष्णा कहते हैं कि वो बीते दो ढाई महीने से नदी की सफाई के रील सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपलोड कर रहे हैं। लेकिन उनके माता–पिता सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करते। उन्हें कभी ये पता नहीं लगा कि वे क्या करते हैं? हम तो घर से यही कहकर निकलते हैं कि हम क्रिकेट खेलने जा रहे हैं। हां, बीते कुछ दिनों से जब से महिंद्रा जी ने हमारे काम की सोशल मीडिया पर तारीफ की है, तब से कई लोग हमसे अच्छे से बात करते हैं। कलेक्टर ने भी हमें बुलाकर सम्मान किया। स्थानीय विधायक ने भी हमें बुलाया है। प्रशासन भी अब इन घाटों पर जेसीबी से कचरा हटवाने में जुट गया है। 15 नाले, पूरे शहर का सीवरेज और कचरा भी इसी नदी में
ब्यावरा शहर के बीचों बीच से बहने वाली ये नदी प्लास्टिक कचरे से अटी पड़ी है। जहां नजर डालो वहीं से सीवरेज मिलता दिख रहा है। इन लड़कों ने बीते दो महीने में नदी के 3 घाटों पर तस्वीर बदलने की कोशिश की है। इन्होंने घाट की सीढ़ियों की सफाई करके यहां पुताई की। घाटों पर कचरा न फेंके के पोस्टर लगाए वहीं घाट पर कचरा फेंकने के लिए दो ड्रम रखे। तीनों दोस्त रोज ड्रम का कचरा खाली करते हैं, लोगों से कहते हैं कचरा बाहर न फेंके। इनकी कोशिश के बाद अब सरकारी अमला भी एक्टिव होता दिख रहा है। नगर पालिका ब्यावरा के सीएमओ इकरार अहमद अपनी टीम के साथ ऐसे ही एक घाट पर पहुंचे थे। अहमद कहते हैं कि अजनार नदी का उद्गम स्थल यहां से 15 किलोमीटर दूर है। पूरे शहर का सीवरेज और छोटे-बड़े नालों की गंदगी नदी में मिलती है। सीवरेज को इसमें मिलने से रोकने के लिए हमने डीपीआर बनाई है। गंगा जल संवर्धन स्कीम के तहत हम इस नदी को को बेहतर करने की कोशिश में जुटे हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.