Saturday, 12 Sep 2026 | 08:32 PM

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रिपोर्ट-रूस की मदद से ईरान ने खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल बनाया:3 साल लगे; अमेरिकी जहाजों पर हमले में इस्तेमाल होगा

रिपोर्ट-रूस की मदद से ईरान ने खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल बनाया:3 साल लगे; अमेरिकी जहाजों पर हमले में इस्तेमाल होगा

रूस गुपचुप तरीके से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने की तकनीक दे रहा था। फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीक्रेट प्रोजेक्ट की शुरुआत 2023 में हुई थी। अमेरिका-इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान भी इस पर काम जारी रहा। इस कार्यक्रम का कोडनेम C430L है। इसमें कुछ रूसी मिसाइल एक्सपर्ट ईरान के साथ काम कर रहे थे। कार्यक्रम का मकसद ईरान को ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित करने में मदद करना है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वॉरशिप के खिलाफ किया जा सकता है। ईरान के पास सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्षमता नहीं है सुपरसोनिक का मतलब है ऐसी रफ्तार जो आवाज की गति (मैक 1) से ज्यादा हो। सुपरसोनिक मिसाइल कम से कम करीब 1,200 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार से उड़ती है। ईरान के पास तेज रफ्तार बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। ईरान अपनी फत्तह मिसाइल की रफ्तार करीब मैक 13 से 15 बताता है, यानी लगभग 16,000 से 18,500 किमी/घंटा। ईरान के पास ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो आवाज की रफ्तार से कई गुना तेज जा सकती हैं। लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल का उड़ने का तरीका अलग होता है। वह ऊपर जाती है और फिर तेज रफ्तार से नीचे अपने टारगेट की तरफ आती है। ऊंचाई पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइल रडार को ज्यादा आसानी से दिखाई दे सकती है। डिफेंस सिस्टम को उसे ट्रैक करने और उस पर हमला करने के लिए ज्यादा समय मिलता है। कम ऊंचाई पर आने वाली क्रूज मिसाइल जमीन या समुद्र की सतह के करीब उड़ती है। धरती की गोलाई और पहाड़ों जैसी चीजों की वजह से रडार उसे तब पकड़ सकता है, जब वह काफी करीब आ चुकी हो। यही वजह है कि ईरान सुपरसोनिक रफ्तार वाली क्रूज मिसाइल बना रहा है। 3 साल तक जारी रहा काम FT के मुताबिक, लीक हुए दस्तावेजों से पता चलता है कि C430L कार्यक्रम को लेकर रूस और ईरान के बीच बातचीत 2026 की गर्मियों तक जारी थी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस कार्यक्रम के तहत ईरान ने पूरी तरह तैयार सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर ली है या उसे सैन्य इस्तेमाल के लिए कब तक तैनात किया जा सकता है। C430L प्रोग्राम का मकसद- रैमजेट इंजन बनाना FT की जांच के मुताबिक, कार्यक्रम का मुख्य फोकस रैमजेट इंजन पर था। यह ऐसा इंजन है, जो तेज रफ्तार से उड़ रही मिसाइल को आगे बढ़ाने के लिए हवा और ईंधन का इस्तेमाल करता है। मिसाइल जब तेजी से आगे बढ़ती है तो सामने से आने वाली हवा इंजन के अंदर जाती है। वहां इस हवा में ईंधन मिलाकर जलाया जाता है। इससे पैदा होने वाली ताकत मिसाइल को आगे बढ़ाने और उसकी तेज रफ्तार बनाए रखने में मदद करती है। रैमजेट इंजन का तेज रफ्तार वाली मिसाइलों में इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसे काम करने के लिए मिसाइल को पहले से पर्याप्त गति चाहिए। इसलिए शुरुआत में मिसाइल को गति देने के लिए अलग इंजन या लॉन्च सिस्टम की जरूरत हो सकती है। ईरान ने रैमजेट इंजन का टेस्ट भी किया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान रैमजेट इंजन विकसित कर चुका है और उसका उड़ान परीक्षण भी कर चुका है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि रूस की मदद से विकसित कोई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ईरानी सेना में तैनात हो चुकी है। पूर्व CIA विश्लेषक जिम लैमसन के मुताबिक, इस तरह की तकनीक ईरान को भविष्य में ऐसा हथियार सिस्टम विकसित करने में मदद कर सकती है, जो अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए खतरा बने। ड्रोन से मिसाइल तकनीक तक पहुंचा रूस-ईरान का सहयोग ईरान पहले ही रूस को शाहेद ड्रोन दे चुका है। इन ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर हुआ है। ईरान ने रूस में इन ड्रोनों का उत्पादन शुरू करने में भी मदद की थी। वहीं रूस ने भी ईरान को सैन्य उपकरण और हथियार मुहैया कराए हैं। यह पहली बार हो रहा है जब रूस सिर्फ हथियार देने के बजाय ईरान की अपनी मिसाइल बनाने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहा है। यही वजह है कि C430L प्रोग्राम को रूस और ईरान के सैन्य सहयोग में एक अहम कदम मान जा रहा है। रूस की सरकारी हथियार कंपनी भी शामिल एफटी के मुताबिक, सी430एल कार्यक्रम को रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी रोसबोरोनेक्सपोर्ट ने तैयार किया था। इस प्रोजेक्ट में उसने रूस की मिसाइल कंपनी एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनिया के साथ काम किया। अमेरिका ने 2014 में NPO मशिनोस्त्रोयेनिया पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह कंपनी जहाज, पनडुब्बी और जमीन से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों पर काम करती है। यह कंपनी रूस के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े काम में भी शामिल रही है। FT को मिले लीक दस्तावेजों और यात्रा रिकॉर्ड से पता चलता है कि C430L समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले रूस के हथियार निर्यात अधिकारियों और NPO मशिनोस्त्रोयेनिया के कई वरिष्ठ इंजीनियरों ने ईरान के कई दौरे किए थे।

फिल्म ‘हनुमान अंश’ में दिखी जयपुर के चित्रकार की पेंटिंग:की-बोर्ड की कुंजियों से बनाई, तीन महीने में तैयार हुई नीम करोली बाबा की कलाकृति

फिल्म ‘हनुमान अंश’ में दिखी जयपुर के चित्रकार की पेंटिंग:की-बोर्ड की कुंजियों से बनाई, तीन महीने में तैयार हुई नीम करोली बाबा की कलाकृति

जयपुर के कंटेम्परेरी कलाकार मुकेश शर्मा इन दिनों अपनी एक अनोखी कलाकृति को लेकर चर्चा में हैं। नीम करोली बाबा पर बनी उनकी यह पेंटिंग फिल्म ‘हनुमान अंश’ में दिखाई गई है। खास बात यह है कि फिल्म में मुकेश शर्मा के काम और इस पेंटिंग के निर्माण की प्रक्रिया को भी जगह दी गई है और फिल्म के अंत में उन्हें विशेष क्रेडिट दिया गया है। खास बात यह है कि इस पेंटिंग का सफर किसी सामान्य फिल्मी असाइनमेंट की तरह शुरू नहीं हुआ, बल्कि तकनीक और आध्यात्मिकता के बीच संबंध तलाशते हुए फिल्म के निर्माताओं की नजर मुकेश शर्मा की कला पर पड़ी। जयपुर के रहने वाले मुकेश शर्मा इन दिनों दिल्ली में रहकर अपनी कला साधना कर रहे हैं। वेनिस में देखे काम से शुरू हुआ फिल्म से जुड़ाव मुकेश शर्मा ने बताया कि फिल्म के निर्माता तकनीक के साथ काम करने वाले ऐसे कलाकारों की तलाश कर रहे थे, जिनकी कला में टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, चेतना और समकालीन जीवन से जुड़े सवाल दिखाई देते हों। इसी शोध के दौरान उनकी नजर मेरे काम पर पड़ी। निर्माताओं ने उनका विशाल स्कल्प्चरल इंस्टॉलेशन ‘नागराज’ वेनिस, इटली में देखा था। यहां देखें पेंटिंग के फोटोज… कुछ समय बाद फिल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने उन से संपर्क किया। प्रोड्यूसर्स ने मुकेश शर्मा को बताया कि वह नीम करोली बाब पर फिल्म बना रहे हैं। और बाबा की आध्यात्मिक विचारधारा और तकनीक के बीच संबंध को भी फिल्म में तलाशना चाहते हैं। नीम करोली बाबा का प्रभाव भारत के साथ-साथ दुनिया भर के कई लोगों पर रहा है। तकनीक और समकालीन संस्कृति से जुड़े चर्चित नामों में स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग का उल्लेख भी अक्सर उनके संदर्भ में किया जाता है। निर्माताओं की दिलचस्पी इसी बिंदु में थी कि आध्यात्मिकता, तकनीक, ऊर्जा और मानवीय चेतना किस तरह एक-दूसरे से जोड़ती है। पोस्टर को अपनी कला भाषा में रीक्रिएट किया फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर ने मुकेश शर्मा के साथ बातचीत के दौरान फिल्म का आधिकारिक पोस्टर शेयर किया, जिसे डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने तैयार किया था। मुकेश शर्मा ने इसी पोस्टर की छवि को अपनी विशिष्ट कला-भाषा में देखने और रीक्रिएट करने का प्रयास किया। कलाकार ने बताया कि उन्होंने इसके लिए डिस्कार्डेड कंप्यूटर और लैपटॉप की कुंजियों का इस्तेमाल किया। इन कुंजियों को काटा, घिसा और फिर एक-एक टुकड़े को बेहद बारीकी से जोड़ते हुए महाराज जी के चेहरे, कंबल और पूरी आकृति को आकार दिया गया। छोटे-छोटे हिस्सों को इस तरह संयोजित किया गया कि दूर से देखने पर एक संपूर्ण आकृति उभरती है, जबकि करीब से देखने पर उसमें इस्तेमाल की गई हजारों तकनीकी कुंजियां दिखाई देती हैं। यह पेंटिंग लगभग तीन महीने में बनकर तैयार हुई। ई-वेस्ट को दिया आध्यात्मिक अर्थ मुकेश शर्मा के लिए यह पेंटिंग केवल नीम करोली बाबा की तस्वीर नहीं है। यह तकनीक और आध्यात्मिकता के बीच एक समकालीन संवाद है। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर और लैपटॉप की कुंजियां महज ई-कचरा नहीं हैं। वे हमारे समय, हमारी भाषा, हमारी स्मृतियों और तकनीकी जीवन के दस्तावेज भी हैं। जब इन्हीं अलग-अलग हिस्सों को एक साथ जोड़कर एक नई आकृति दी जाती है, तो डिस्कार्डेड तकनीक भी एक नई अर्थपूर्ण और आध्यात्मिक उपस्थिति हासिल कर लेती है। आश्रम की यात्रा ने बदला अनुभव इस कलाकृति के निर्माण के दौरान मुकेश शर्मा ने खुद नीम करोली बाबा के आश्रम की यात्रा भी की। इसी दौरान यह पूरा काम उनके लिए सिर्फ एक पेशेवर कमीशन नहीं रहा। मुकेश शर्मा कहते हैं कि उन्हें महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि किसी तरह का भीतर से आया एक आह्वान था। उन्हें लगा कि शायद यह आध्यात्मिक जुड़ाव सही समय पर उनके सामने आया है और इसी वजह से उन्होंने इस कमीशन को स्वीकार किया।

स्वरा भास्कर बोलीं- रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा:पद्मावत के जौहर सीन विवाद पर दी सफाई; सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से भी हुई बहस

स्वरा भास्कर बोलीं- रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा:पद्मावत के जौहर सीन विवाद पर दी सफाई; सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से भी हुई बहस

एक्ट्रेस स्वरा भास्कर 2018 की फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर सीन पर दिए गए बयान के बाद विवादों में आ गई हैं। दिल्ली में एक इवेंट के दौरान उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म के जौहर सीन पर सवाल उठाए थे। बयान के बाद सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि स्वरा ने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को कायर कहा है। भारी ट्रोलिंग के बाद मंगलवार को स्वरा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर सफाई दी। स्वरा ने कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती को कायर नहीं कहा, बल्कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। दिल्ली के इवेंट में दिए बयान पर शुरू हुआ विवाद यह पूरा विवाद 31 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ टॉक के दौरान शुरू हुआ था। इवेंट में स्वरा ने फिल्म के क्लाइमेक्स का जिक्र करते हुए कहा था कि एक सीन में गर्भवती महिला का पेट दिखाया गया है जो जौहर करने जा रही है। स्वरा ने कहा था, “यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया था और मैंने थियेटर में ही ‘छी’ कह दिया था। 5 दिन विचार करने के बाद मैंने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को ओपन लेटर लिखा था।” उन्होंने आगे कहा ‘क्या आप हमारे जैसे समाज में यही बताना चाहते हैं, जहां मुझे लगता है कि रेप की महामारी फैली हुई है?’ उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन पर ऐतिहासिक बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया था। इंस्टाग्राम वीडियो शेयर कर दी सफाई मंगलवार को स्वरा भास्कर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर मेरा एक क्लिप वायरल हो रहा है। मुझसे पूछा गया था कि पद्मावत देखने के बाद मैंने ओपन लेटर क्यों लिखा था। मैं साफ करना चाहती हूं कि मैंने रानी पद्मावती या महल की बाकी महिलाओं को कायर नहीं कहा। अगर गाली देनी है तो सही बात पर दीजिए। मैंने कहा था कि अगर मैं रेप पीड़िता होती, तो क्लाइमेक्स देखकर मुझे लगता कि रेप के बाद जिंदा बचकर मैंने कायरता दिखाई है।” ‘क्या महिला की पवित्रता उसकी जान से ज्यादा कीमती है?’ स्वरा ने कहा कि देश में आज भी रेप एक महामारी जैसा बन चुका है। हाल ही में दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमें ऐसी फिल्में बनानी चाहिए जो संदेश दें कि महिला की पवित्रता उसकी जिंदगी से ज्यादा कीमती है? उन्होंने निर्भया केस का उदाहरण देते हुए कहा कि निर्भया ने आखिरी सांस तक अपनी जिंदगी के लिए लड़ाई लड़ी थी। किसी भी महिला की जीने की इच्छा को कम नहीं आंकना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी से सोशल मीडिया पर हुई बहस स्वरा के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रियंका ने लिखा कि जब चुनाव मौत और हराम में गुलाम बनने के बीच हो, तो महिलाओं ने मौत को चुना, जो उनका एक फैसला था। इस पर जवाब देते हुए स्वरा ने लिखा, “प्रियंका जी, आप असल बात नहीं समझ रही हैं। बात जौहर करने वाली महिलाओं की पसंद की नहीं, बल्कि इस बात की है कि हम किस चीज को महिमामंडित कर रहे हैं। क्या रेप के बाद किसी सर्वाइवर को जीने का हक नहीं है?” क्या है पद्मावत का जौहर सीन फिल्म में जौहर का सीन क्लाइमैक्स के पास आता है। अलाउद्दीन खिलजी की सेना राजपूतों को हरा देती है और चित्तौड़ के किले में घुस जाती है। दीपिका पादुकोण का किरदार ‘रानी पद्मावती’ किले की महिलाओं के साथ जौहर करती हैं। फिल्म में इसे पकड़े जाने से बचने के लिए खुद को आग के हवाले करने की घटना के तौर पर दिखाया गया है।

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल के 5 लोगों के शव यूपी में मिले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर सौंपे गए। ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बह गए थे। शव नेपाल पुलिस को सौंपे गए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। नेपाल में शव जलाने की बजाय दफनाए जा रहे नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें। दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल त्रासदी की 4 तस्वीरें… नेपाल के 5 लोगों के शव यूपी में मिले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर सौंपे गए। ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बह गए थे। शव नेपाल पुलिस को सौंपे गए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। नेपाल में शव जलाने की बजाय दफनाए जा रहे नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें। दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।

अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन को 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के लिए डायरेक्टर फराह खान की पहली पसंद बताया जाता है। हालांकि, बेटी आराध्या को जन्म देने के बाद फिल्मों में वापसी कर रहीं ऐश्वर्या ने इस फिल्म को ठुकरा दिया था। फिल्म में शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी बननी थी, जबकि उनके पति अभिषेक बच्चन भी फिल्म का हिस्सा थे। शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन स्टारर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। ऐश्वर्या ने फिल्म इसलिए नहीं की क्योंकि उन्हें लगा कि फिल्म में वह और अभिषेक एक-दूसरे के साथ कास्ट नहीं होंगे और अलग-अलग कलाकारों के साथ उनकी जोड़ी बनने से स्क्रीन पर अजीब स्थिति पैदा हो सकती है। एक पुराने इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने बताया था कि उन्हें यह फिल्म फिल्मों से ब्रेक के बाद वापसी के लिए बिल्कुल सही लगी थी। 2018 में पत्रकार राजीव मसंद से बातचीत में उन्होंने कहा था कि बड़े ब्लॉकबस्टर और तय बॉक्स ऑफिस वाली ऐसी फिल्म उनके लिए बेहतरीन वापसी हो सकती थी। हालांकि, फिल्म में अभिषेक के पहले से होने की वजह से ऐश्वर्या को इसकी कास्टिंग का डायनेमिक सही नहीं लगा। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर फिल्म ऑफर की जाती तो वह जरूर करतीं, लेकिन अभिषेक के साथ फिल्म में अलग-अलग कलाकारों के साथ जोड़ी बनाना ठीक नहीं लगता। ऐश्वर्या ने माना था कि एक प्रोफेशनल और एक्टर के तौर पर ऐसी फिल्म छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन पत्नी के तौर पर उन्होंने यह फैसला लिया। एक अन्य बातचीत में NDTV से ऐश्वर्या ने कहा था कि उन्हें फिल्म काफी मजेदार लगी थी और उन्हें पता था कि इसकी शूटिंग का अनुभव अच्छा रहेगा, लेकिन फिल्म में उनके और अभिषेक के एक-दूसरे के साथ जोड़ी न बनने की वजह से उन्होंने इसे ठुकरा दिया। ऐश्वर्या ने और कौन-सी फिल्में ठुकराईं ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के अलावा ऐश्वर्या को कई सफल फिल्मों के ऑफर मिलने की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। इनमें ‘ट्रॉय’, ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’, ‘भूल भुलैया’, ‘कृष’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ शामिल हैं। हालांकि, इन फिल्मों को ठुकराने की वजहों से जुड़ी बातें ऐश्वर्या ने खुद कंफर्म नहीं की हैं। अभिषेक-ऐश्वर्या के तलाक की अफवाहें सामने आई थीं अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन के तलाक की अफवाहें साल 2024 में काफी चर्चा में रही थीं। इन अफवाहों को तब हवा मिली, जब जुलाई 2024 में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी में अभिषेक पूरे बच्चन परिवार के साथ पहुंचे थे। वहीं, ऐश्वर्या अपनी बेटी आराध्या के साथ अलग नजर आई थीं। इसके बाद ऐश्वर्या को पेरिस फैशन वीक और दूसरे इवेंट्स में भी सिर्फ आराध्या के साथ देखा गया। सोशल मीडिया पर अभिषेक का एक डीपफेक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह तलाक का ऐलान करते दिख रहे थे। इससे अफवाहों को और बढ़ावा मिला। हालांकि, लंबे समय तक चुप रहने के बाद अभिषेक ने इन खबरों पर नाराजगी जताई थी। दिसंबर 2025 में पीपिंग मून से बातचीत में अभिषेक ने कहा था, “अगर आप एक पब्लिक फिगर हैं, तो लोग आपकी हर छोटी बात पर अपनी राय बनाएंगे। हमारे बारे में जो भी गलत बातें लिखी गई हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। ये बातें गलत हैं और जानबूझकर दुख पहुंचाने वाली हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाहें उनकी शादी के बाद शुरू नहीं हुई थीं, बल्कि शादी से पहले से ही चल रही थीं। अभिषेक ने कहा, “शादी से पहले लोग हमारी शादी की तारीखें बताने लगे थे। शादी के बाद लोग यह तय करने लगे कि हम कब अलग होंगे। ये सब बकवास है। वह मेरी सच्चाई जानती हैं और मैं उनकी सच्चाई जानता हूं। हम अपने परिवार के साथ प्यार और खुशी से रहते हैं, और हमारे लिए यही सबसे ज्यादा मायने रखता है।” पिछले महीने अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी बेटी आराध्या बच्चन को एक साथ मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। वे अमेरिका (न्यूयॉर्क) से अपनी पारिवारिक छुट्टियां बिताकर वापस लौटे थे।

अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

अभिषेक के लिए ऐश्वर्या राय ने ठुकराई थी फिल्म:शाहरुख की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ से कमबैक करने वाली थीं, पत्नी के तौर पर फैसला लिया था

एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन को 2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के लिए डायरेक्टर फराह खान की पहली पसंद बताया जाता है। हालांकि, बेटी आराध्या को जन्म देने के बाद फिल्मों में वापसी कर रहीं ऐश्वर्या ने इस फिल्म को ठुकरा दिया था। फिल्म में शाहरुख खान के साथ उनकी जोड़ी बननी थी, जबकि उनके पति अभिषेक बच्चन भी फिल्म का हिस्सा थे। शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन स्टारर ‘हैप्पी न्यू ईयर’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। ऐश्वर्या ने फिल्म इसलिए नहीं की क्योंकि उन्हें लगा कि फिल्म में वह और अभिषेक एक-दूसरे के साथ कास्ट नहीं होंगे और अलग-अलग कलाकारों के साथ उनकी जोड़ी बनने से स्क्रीन पर अजीब स्थिति पैदा हो सकती है। एक पुराने इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने बताया था कि उन्हें यह फिल्म फिल्मों से ब्रेक के बाद वापसी के लिए बिल्कुल सही लगी थी। 2018 में पत्रकार राजीव मसंद से बातचीत में उन्होंने कहा था कि बड़े ब्लॉकबस्टर और तय बॉक्स ऑफिस वाली ऐसी फिल्म उनके लिए बेहतरीन वापसी हो सकती थी। हालांकि, फिल्म में अभिषेक के पहले से होने की वजह से ऐश्वर्या को इसकी कास्टिंग का डायनेमिक सही नहीं लगा। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर फिल्म ऑफर की जाती तो वह जरूर करतीं, लेकिन अभिषेक के साथ फिल्म में अलग-अलग कलाकारों के साथ जोड़ी बनाना ठीक नहीं लगता। ऐश्वर्या ने माना था कि एक प्रोफेशनल और एक्टर के तौर पर ऐसी फिल्म छोड़ना आसान नहीं था, लेकिन पत्नी के तौर पर उन्होंने यह फैसला लिया। एक अन्य बातचीत में NDTV से ऐश्वर्या ने कहा था कि उन्हें फिल्म काफी मजेदार लगी थी और उन्हें पता था कि इसकी शूटिंग का अनुभव अच्छा रहेगा, लेकिन फिल्म में उनके और अभिषेक के एक-दूसरे के साथ जोड़ी न बनने की वजह से उन्होंने इसे ठुकरा दिया। ऐश्वर्या ने और कौन-सी फिल्में ठुकराईं ‘हैप्पी न्यू ईयर’ के अलावा ऐश्वर्या को कई सफल फिल्मों के ऑफर मिलने की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। इनमें ‘ट्रॉय’, ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’, ‘भूल भुलैया’, ‘कृष’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ शामिल हैं। हालांकि, इन फिल्मों को ठुकराने की वजहों से जुड़ी बातें ऐश्वर्या ने खुद कंफर्म नहीं की हैं। अभिषेक-ऐश्वर्या के तलाक की अफवाहें सामने आई थीं अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन के तलाक की अफवाहें साल 2024 में काफी चर्चा में रही थीं। इन अफवाहों को तब हवा मिली, जब जुलाई 2024 में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी में अभिषेक पूरे बच्चन परिवार के साथ पहुंचे थे। वहीं, ऐश्वर्या अपनी बेटी आराध्या के साथ अलग नजर आई थीं। इसके बाद ऐश्वर्या को पेरिस फैशन वीक और दूसरे इवेंट्स में भी सिर्फ आराध्या के साथ देखा गया। सोशल मीडिया पर अभिषेक का एक डीपफेक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वह तलाक का ऐलान करते दिख रहे थे। इससे अफवाहों को और बढ़ावा मिला। हालांकि, लंबे समय तक चुप रहने के बाद अभिषेक ने इन खबरों पर नाराजगी जताई थी। दिसंबर 2025 में पीपिंग मून से बातचीत में अभिषेक ने कहा था, “अगर आप एक पब्लिक फिगर हैं, तो लोग आपकी हर छोटी बात पर अपनी राय बनाएंगे। हमारे बारे में जो भी गलत बातें लिखी गई हैं, वे पूरी तरह झूठी हैं। उनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है। ये बातें गलत हैं और जानबूझकर दुख पहुंचाने वाली हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाहें उनकी शादी के बाद शुरू नहीं हुई थीं, बल्कि शादी से पहले से ही चल रही थीं। अभिषेक ने कहा, “शादी से पहले लोग हमारी शादी की तारीखें बताने लगे थे। शादी के बाद लोग यह तय करने लगे कि हम कब अलग होंगे। ये सब बकवास है। वह मेरी सच्चाई जानती हैं और मैं उनकी सच्चाई जानता हूं। हम अपने परिवार के साथ प्यार और खुशी से रहते हैं, और हमारे लिए यही सबसे ज्यादा मायने रखता है।” पिछले महीने अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन और उनकी बेटी आराध्या बच्चन को एक साथ मुंबई एयरपोर्ट पर स्पॉट किया गया था। वे अमेरिका (न्यूयॉर्क) से अपनी पारिवारिक छुट्टियां बिताकर वापस लौटे थे।

ट्रम्प ने बोइंग डील के लिए बांग्लादेश को शुक्रिया कहा:PM से बोले- ये फाइटर जेट आपको निराश नहीं करेगा, मैं भी याद रखूंगा

ट्रम्प ने बोइंग डील के लिए बांग्लादेश को शुक्रिया कहा:PM से बोले- ये फाइटर जेट आपको निराश नहीं करेगा, मैं भी याद रखूंगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को पत्र लिखकर बोइंग विमान खरीदने के फैसले के लिए धन्यवाद दिया है। बांग्लादेश PM तारिक रहमान के नाम से 31 अगस्त को लिखी इस चिट्ठी में ट्रम्प ने लिखा, प्रिय प्रधानमंत्री, मुझे बोइंग विमान खरीदने से संबंधित आपकी चिट्ठी मिली। मैं इस फैसले की बहुत तारीफ करता हूं। बोइंग आपको निराश नहीं करेगा और मैं भी इसे नहीं भूलूंगा। मैं आपसे मिलने का इंतजार कर रहा हूं। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

रैपर बादशाह ने दूसरी पत्नी ईशा रिखी से लिया तलाक:शादी के 5 महीने बाद अलग हुए; पहली पत्नी जैस्मिन से 2020 में अलग हुए थे

रैपर बादशाह ने दूसरी पत्नी ईशा रिखी से लिया तलाक:शादी के 5 महीने बाद अलग हुए; पहली पत्नी जैस्मिन से 2020 में अलग हुए थे

रैपर बादशाह और पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी ने अपनी शादी के 5 महीने बाद ही एक-दूसरे से अलग होने का ऐलान कर दिया है। दोनों ने सोमवार रात अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर जैसी पोस्ट शेयर कर तलाक की पुष्टि की। बादशाह ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह फैसला दोनों की आपसी सहमति से लिया गया है। उन्होंने फैंस और मीडिया से इस समय में उनकी प्राइवेसी का सम्मान करने और किसी भी तरह का अंदाजा न लगाने का अनुरोध किया है। पिछले कुछ हफ्तों से दोनों के रिश्ते में अनबन की खबरें आ रही थीं। इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या लिखा पोस्ट में बादशाह ने लिखा कि वे और ईशा रिखी आपसी सम्मान के साथ अलग-अलग रास्तों पर आगे बढ़ रहे हैं। बादशाह ने लिखा, “हमारा यह फैसला आपसी सहमति से लिया गया है। हम सभी से गुजारिश करते हैं कि इस समय हमारी प्राइवेसी का ध्यान रखें। इस मुद्दे पर हमारा यह पहला और आखिरी बयान है, इसलिए हमारी रिलेशनशिप को लेकर आगे कोई अंदाजा न लगाया जाए।” ईशा रिखी ने भी अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर यही बयान शेयर किया है। कौन हैं ईशा रिखी? जुलाई से सामने आ रही थीं अनबन की खबरें बादशाह और ईशा रिखी के रिश्ते में तनाव की खबरें जुलाई के महीने में आनी शुरू हुई थीं। 26 जुलाई को ईशा ने बादशाह के साथ अपनी कई तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए एक पोस्ट लिखी थी। इसमें उन्होंने ‘हर तूफान एक सीख है’ लिखकर दिल टूटने वाला इमोजी लगाया था। इसके बाद ईशा ने एक नोट में लिखा था कि वे लंबे समय तक डर की वजह से चुप रहीं, लेकिन अब वे अपने आत्मसम्मान के लिए बोल रही हैं। इसी बीच ईशा की मां पूनम रिखी ने भी सोशल मीडिया पर कर्म से जुड़ी पोस्ट शेयर की थीं। जून में ही किया था शादी का खुलासा ईशा रिखी ने इसी साल जून में इंस्टाग्राम पर ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन के दौरान बादशाह के साथ अपनी शादी की पुष्टि की थी। हालांकि शादी के बाद भी दोनों सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के बारे में ज्यादा बात करने से बचते रहे। वहीं अब रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईशा रिखी जल्द ही सलमान खान के रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ का हिस्सा बन सकती हैं। बादशाह का दूसरा तलाक, पहली पत्नी से है एक बेटी यह रैपर बादशाह का दूसरा तलाक है। इससे पहले उन्होंने जैस्मिन मसीह से शादी की थी। साल 2017 में दोनों की एक बेटी हुई, जिसका नाम जेसेमी ग्रेस मसीह सिंह है। हालांकि मतभेदों के बाद बादशाह और जैस्मिन साल 2020 में एक-दूसरे से अलग हो गए थे। इसके बाद बादशाह की जिंदगी में ईशा रिखी की एंट्री हुई थी। तलाक के ऐलान के बीच बादशाह का नया गाना रिलीज पर्सनल लाइफ में चल रही हलचल के बीच बादशाह का नया मराठी हिप-हॉप गाना ‘चिमना’ 31 अगस्त को रिलीज हुआ है। इसमें उन्होंने दिव्या कुमार और मराठी लोक कलाकार नागेश मोरवेकर के साथ काम किया है। गाने का म्यूजिक हितेन ने दिया है और वीडियो में मराठी एक्ट्रेस नेहा खान नजर आ रही हैं। बादशाह ने गाने को लेकर कहा कि वे भारत के रीजनल म्यूजिक को प्रमोट करना चाहते हैं।

चीन ने युद्ध की तैयारी के लिए कानून बदला:1 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम; आम लोगों और कंपनियों के संसाधन भी ले सकेगी सरकार

चीन ने युद्ध की तैयारी के लिए कानून बदला:1 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम; आम लोगों और कंपनियों के संसाधन भी ले सकेगी सरकार

चीन ने अपने समाज को युद्ध के लिए तैयार करने की दिशा में कानूनी ढांचा मजबूत किया है। देश की शीर्ष विधायिका ने 28 अगस्त 2026 को संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून को मंजूरी दी। यह कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा। इसके तहत युद्ध या संघर्ष जैसी स्थिति में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) किसी भी व्यक्ति या निजी कंपनी से मदद लेने और उनके संसाधन जब्त करने का अधिकार रखेंगे। पूरे देश को युद्ध के लिए तैयार करने की योजना चीन एक अधिनायकवादी देश है, जहां आम नागरिकों के पास कड़े और व्यापक कानूनों का विरोध करने या उनसे बचने की क्षमता नहीं है। नया कानून इसी व्यवस्था का हिस्सा है। यह कानून माओत्से तुंग की ‘जन युद्ध’ की सोच से जुड़ा हुआ है। इस सोच के तहत संकट के समय पूरी जनता को एकजुट होकर लड़ना और विरोध करना होता है। कानून का मकसद केवल पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को युद्ध के लिए तैयार करना नहीं है। इसका उद्देश्य पूरे देश को संघर्ष के लिए तैयार करना है। इसी दिशा में चीन ने जनवरी 2014 में केंद्रीय राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग बनाया था। इसके बाद संसाधनों के तालमेल, राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने और युद्ध की तैयारी के लिए कई कानूनी नियम लागू किए गए। इन कदमों के जरिए CCP ने राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के नाम पर अपनी सत्ता को और मजबूत किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर व्यापक अधिकार इस आयोग की मदद से चीन ने 2015 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 2017 में राष्ट्रीय खुफिया कानून और 2021 में डेटा सुरक्षा कानून लागू किया। इन कानूनों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला उठाकर चीनी सरकार को व्यापक अधिकार मिल जाते हैं। इन कानूनों के आदेशों से कोई नागरिक, कर्मचारी, कंपनी या संगठन बाहर नहीं है। संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में 14 अध्याय और 82 अनुच्छेद हैं। 2010 में लागू होने के बाद यह इसका पहला अपडेट है। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, कानून नए सिस्टम के तहत राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी में सैन्य और नागरिक अधिकारियों के काम और जिम्मेदारियां साफ करता है। यह राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने, आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ तालमेल बैठाने और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था से जुड़ने के लिए राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी सिस्टम को बेहतर बनाता है। राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी का मतलब चीन राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी को ऐसी गतिविधियों के तौर पर परिभाषित करता है, जिनमें राष्ट्रीय संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा और विकास हितों पर खतरे के जवाब में राज्य कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाता है। इसका उद्देश्य शांतिकाल और युद्धकाल के बीच तेजी से बदलाव सुनिश्चित करना और आर्थिक-सामाजिक ताकत को राष्ट्रीय रक्षा क्षमता में बदलना है। अमेरिका के थिंक टैंक जेम्सटाउन फाउंडेशन के लिए लिखने वाली सामंथा हॉफमैन ने कहा कि संशोधन छह क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इनमें सामान्य प्रावधानों में सुधार, जैसे पार्टी नेतृत्व को बनाए रखना; संगठनात्मक नेतृत्व ढांचे में बदलाव; लामबंदी की बुनियादी कार्यप्रणाली में सुधार; रिजर्व बल तैयार करने और भर्ती व्यवस्था की स्थापना; रणनीतिक सामग्री के भंडार की व्यवस्था में सुधार; और राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी से जुड़े प्रचार व शिक्षा तंत्र को मजबूत करना शामिल है। हॉफमैन ने लिखा, “नए संशोधन यह सुनिश्चित करते हैं कि पार्टी नेतृत्व किसी भी समय देश के सैन्य, नागरिक, आर्थिक और सामाजिक संसाधनों की पूरी ताकत को सक्रिय कर सके और उन्हें रणनीतिक लक्ष्यों की ओर लगा सके।” उनके मुताबिक, अगर कोई बड़ा संघर्ष होता है तो शी जिनपिंग राष्ट्रीय शक्ति को एकजुट ताकत के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। विकास हितों को भी कानून में शामिल किया चीन राष्ट्रीय विकास और राष्ट्रीय रक्षा के हितों को एक साथ जोड़ रहा है। 2010 के कानून में संप्रभुता, एकीकरण, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की रक्षा का लक्ष्य था। 2026 के संस्करण में इसमें ‘विकास हित’ भी जोड़े गए हैं। CCP की भाषा में विकास हितों में आर्थिक सुरक्षा, संसाधनों तक पहुंच, विदेशों में मौजूद संपत्तियां और तकनीकी विकास शामिल हैं। इनमें क्षेत्रीय खतरे भी शामिल हैं। हॉफमैन ने आगे कहा, “यह बदलाव 2020 में संशोधित राष्ट्रीय रक्षा कानून के अनुरूप है। वह कानून पहले ही राज्य के विकास हितों को खतरा होने पर लामबंदी व्यवस्था शुरू करने की अनुमति देता है। इससे साफ होता है कि यह व्यवस्था विकास हितों पर भी लागू होती है।” संशोधित कानून में संगठनात्मक नेतृत्व निकायों और उनकी शक्तियों, राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी की योजना, सशस्त्र बलों के लिए कर्मियों के रिजर्व और लामबंदी, सैन्य शोध तथा नागरिक संसाधनों की मांग और जब्ती से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसमें मुआवजे की व्यवस्था भी है। शी जिनपिंग की भूमिका पर विशेषज्ञों की राय ब्रसेल्स में सेंटर फॉर रूस यूरोप एशिया स्टडीज की निदेशक थेरेसा फॉलन ने X पर चिंता जताई। उन्होंने लिखा, “युद्ध के बढ़ते खतरे को नजरअंदाज करना अब कहीं ज्यादा मुश्किल है। चीन का राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून 28 अगस्त 2026 को अपडेट किया गया और 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। यह युद्धकाल का राष्ट्रीय रक्षा कानून है।” उन्होंने सवाल उठाया, “क्या अमेरिकी सैन्य भंडार में कमी, यूक्रेन में रूस का युद्ध और ईरान पर इजराइल-अमेरिका के युद्ध ने शी जिनपिंग को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि समय अनुकूल होता जा रहा है?” हालांकि, 2026 के कानून की कुछ धाराएं चिंता पैदा करती हैं, लेकिन इसके ज्यादातर हिस्से पुराने कानून से बहुत अलग नहीं हैं। मिसाल के तौर पर, 18 से 60 साल के पुरुषों और 18 से 55 साल की महिलाओं के लिए राष्ट्रीय रक्षा सेवा करना जरूरी होने वाला प्रावधान 2010 के कानून में भी था। एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो लाइल मॉरिस ने कहा, “असल में नागरिकों की लामबंदी से जुड़ी लगभग सभी जिम्मेदारियां 2010 के कानून जैसी ही हैं।” विशेष ज्ञान और कौशल वाले लोगों को बुलाने के लिए कोई उम्र सीमा तय नहीं है। हालांकि, मॉरिस ने कहा, “शी की लामबंदी में भूमिका और डेटा प्रबंधन से जुड़ी कई नई धाराओं को समझना जरूरी है। लेकिन लोगों को इसे युद्ध की नई तैयारी बताकर बहुत ज्यादा चिंता करना बंद करना चाहिए। यह तैयारी 2010 के कानून के बाद से एक दशक से ज्यादा समय से विकसित हो रही है।” CCP के केंद्रीय