जैकलीन के केस से जज ने खुद को अलग किया:सुकेश से जुड़े ₹200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई अब दूसरी बेंच करेगी

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने के दिल्ली अदालत के आदेश को चुनौती दी है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने सुनवाई की शुरुआत में जैकलीन के वकील और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बताया कि मामला किसी अन्य बेंच के सामने लिस्ट किया जाएगा। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि एक संबंधित मामले में उनके बेटे सरकार की ओर से पेश हो चुके हैं। उन्होंने मामले को 25 जून को ऐसी बेंच के सामने लिस्ट करने का निर्देश दिया, जिसमें दोनों में से कोई एक सदस्य न हो। दिल्ली की एक अदालत ने 30 मई को जैकलीन फर्नांडिस, कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर और 15 अन्य लोगों के खिलाफ 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया था। जैकलीन 3 जून को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुई थीं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक्ट्रेस ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया था। क्या है 200 करोड़ का यह मामला यह पूरा मामला हाई-प्रोफाइल ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है। सुकेश पर आरोप है कि उसने दिल्ली की रोहिणी जेल के अंदर से ही फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह से 200 करोड़ रुपए की जबरन वसूली की थी। जांच एजेंसी ED का दावा है कि सुकेश ने इसी वसूली की रकम का एक बड़ा हिस्सा जैकलीन फर्नांडिस और उनके परिवार पर खर्च किया था। सुकेश ने जैकलीन को लुभाने के लिए करोड़ों रुपए के गिफ्ट दिए थे। ED की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी हैं जैकलीन प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की जांच के बाद दाखिल की गई अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जैकलीन फर्नांडिस को भी आरोपी बनाया था। ED का कहना है कि जैकलीन को सुकेश के आपराधिक बैकग्राउंड और जबरन वसूली के पैसों के बारे में पहले से जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने उससे महंगे तोहफे लेना जारी रखा। इन गिफ्ट्स में लग्जरी गाड़ियां, महंगे ब्रांडेड बैग, कपड़े, ज्वेलरी और कई कीमती पेट्स (पालतू जानवर) शामिल थे। लीगल टीम की दलील- जैकलीन खुद पीड़ित हैं दूसरी तरफ, जैकलीन फर्नांडिस की लीगल टीम लगातार कोर्ट में यह दलील दे रही है कि एक्ट्रेस इस मामले में पूरी तरह निर्दोष हैं। उनके वकीलों का कहना है कि जैकलीन खुद सुकेश चंद्रशेखर की साजिश का शिकार हुई हैं और उन्होंने सुकेश को एक बिजनेसमैन समझकर उससे दोस्ती की थी। जांच के दौरान सुकेश और जैकलीन की कई निजी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। फिलहाल इस मामले में कोर्ट यह तय कर रहा है कि आरोपों के आधार पर केस को आगे कैसे बढ़ाया जाए।
होर्मुज में 90 दिन फंसे रहे रायपुर के रुद्रांश:जहाज के ऊपर से गुजरती थीं मिसाइलें-ड्रोन, सायरन बजते ही इंजन रूम में छिपते थे

जैसे ही हमले का सायरन बजता, जहाज के सभी 22 कर्मचारी भागकर नीचे इंजन रूम में छिप जाते थे। आसमान में मिसाइलें, ड्रोन और फाइटर जेट चक्कर काट रहे होते थे और अंदर सब अपनी जान बचाने के लिए भगवान से प्रार्थना करते थे। रायपुर के रहने वाले रुद्रांश चौबे इस कार्गो शिप में असिस्टेंट कैप्टन और चीफ ऑफिसर हैं। उन्होंने मौत के इसी खौफ के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में 3 महीने बिताए, ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग के दौरान उनका जहाज ठीक उसी इलाके में फंस गया जहां लड़ाई चल रही थी। कई बार मिसाइलें जहाज के बिल्कुल ऊपर से गुजरीं, एक ड्रोन का टूटा हुआ मलबा भी उनके जहाज पर आकर गिरा। 6 महीने का कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने के बाद कंपनी ने एक स्पेशल बोट (नाव) भेजकर रुद्रांश और उनके साथियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। पढ़िए पूरा इंटरव्यू:- सवाल: उस समय वहां की स्थिति कैसी थी और आप कैसे फंस गए? जवाब: हम अपना कार्गो डिस्चार्ज करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट में गए थे। इसके बाद हमें अगला कार्गो लेना था, तभी पता चला कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है और होर्मुज में आवाजाही बंद कर दी गई है। इसके बाद करीब 3 महीने तक हम उसी क्षेत्र में रहे। इस दौरान हमने कार्गो लोड और डिस्चार्ज भी किया और भारत लाने के लिए एक और कार्गो लोड किया। लंबे समय तक जहाज एंकर पर खड़ा रहा और हम वहीं फंसे रहे। सवाल: समुद्र के बीच 24 घंटे रहना पड़ता था, उस दौरान स्थिति कैसी थी? जवाब: समुद्र में रहने के दौरान हर समय सतर्क रहना पड़ता था। युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों में ड्रोन, मिसाइल और लड़ाकू विमानों की गतिविधियां दिखाई देती थीं। रेडियो पर लगातार अलग-अलग तरह के अलर्ट और सूचनाएं मिल रही थीं। जीपीएस स्पूफिंग जैसी घटनाएं भी हो रही थीं। शुरुआत में स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि हमें समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करना है और कहां जाना है। बाद में डीजी शिपिंग, इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन और हमारी कंपनी की ओर से जारी सुरक्षा दिशा निर्देशों का पालन कर हमने स्थिति का सामना किया। सवाल: पहली ही नौकरी और घर से दूर सीधे युद्ध के मैदान में एंट्री, मौत के इस साए के बीच खुद को और घर वालों की चिंता को कैसे संभाला? जवाब: मेरी कोशिश रहती थी कि हर दिन घरवालों को अपनी स्थिति की जानकारी दूं। समाचारों में वे लगातार हमले और तनाव की खबरें देखते थे, इसलिए उन्हें यह बताना जरूरी था कि मैं सुरक्षित हूं। सैटेलाइट कम्युनिकेशन के जरिए हम संपर्क में रहते थे। हालांकि कई बार जीपीएस स्पूफिंग और तकनीकी समस्याओं के कारण चार-पांच दिन तक बात नहीं हो पाती थी, लेकिन हम किसी तरह एक छोटा मैसेज भेजकर अपने सुरक्षित होने की जानकारी दे देते थे। सवाल: क्या कभी ऐसा हुआ कि ड्रोन या मिसाइल का खतरा आपके जहाज के बेहद करीब पहुंच गया हो? जवाब: जी हां, एक बार जब हमारा जहाज बहरीन के आसपास था, तब हमारे जहाज के ऊपर एक ड्रोन विस्फोट हुआ था। उसके कुछ अवशेष जहाज पर आकर गिरे थे। इस घटना के बाद सभी लोगों को महसूस हुआ कि स्थिति वास्तव में गंभीर है। इसके अलावा मिसाइलें, ड्रोन और लड़ाकू विमान लगातार हमारे ऊपर से गुजरते दिखाई देते थे। शुरुआत में इससे काफी डर लगा, लेकिन बाद में हमने सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया और खुद को संभाला। सवाल: उस समय सबसे ज्यादा डर किस बात का लगता था? जवाब: डर यही था कि कहीं कोई मिसाइल या ड्रोन गलती से हमारे जहाज को निशाना न बना ले। रात में जब अलर्ट आते थे या ऊपर से लड़ाकू विमान गुजरते थे, तब मन में कई तरह के विचार आते थे। ऐसे समय में हम ईश्वर को याद करते थे और सुरक्षित रहने की प्रार्थना करते थे। सवाल: समुद्र में उतरते वक्त बड़े-बड़े सपने रहे होंगे और वहां जाकर मिसाइलें देखनी पड़ीं, पहली नौकरी का यह अनुभव कैसा रहा? जवाब: कॉलेज और एनसीसी के दौरान हमने कई आपात परिस्थितियों के बारे में पढ़ा और प्रशिक्षण लिया था कि संकट के समय कैसे काम करना चाहिए। लेकिन यह पहली बार था जब हमने ऐसी स्थिति को करीब से देखा। शुरुआत में काफी घबराहट थी और समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। बाद में सुरक्षा नियमों का पालन किया, आपात स्थिति में वहां से सुरक्षित निकलने की तैयारियां समझीं और एक-दूसरे की हिम्मत बढ़ाकर हालातों का सामना किया। सवाल: उस समय जहाज पर कितने लोग थे और आप लोग एक-दूसरे का मनोबल कैसे बढ़ाते थे? जवाब: हमारे जहाज पर कुल 22 क्रू मेंबर थे। उनमें सबसे कम अनुभव मेरा ही था, क्योंकि यह मेरी पहली समुद्री यात्रा और पहली नौकरी थी। हमने एक सरल तरीका अपनाया था कि युद्ध और तनाव के बारे में ज्यादा सोचने के बजाय अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें। हमारा मानना था कि अगर हम अपना काम ठीक से करते रहेंगे तो डर हम पर हावी नहीं होगा। हमने स्थिति को एक समस्या की तरह देखा और उसके समाधान पर ध्यान दिया। इसी सोच के कारण हम युद्ध की परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दे पाए। सवाल: क्या जहाज पर खाने-पीने या दूसरी जरूरतों की कोई समस्या हुई? जवाब: नहीं, जहाज में पर्याप्त राशन और जरूरी सामान मौजूद था। असली चुनौती मानसिक दबाव था। हर दिन अनिश्चितता के बीच गुजर रहा था और किसी को नहीं पता था कि हालात कब सामान्य होंगे। सवाल: फिर आप वहां से बाहर कैसे निकले? जवाब: मेरा 6 महीने का कॉन्ट्रैक्ट पूरा हो चुका था। इसी दौरान कंपनी ने हमारे लिए खास व्यवस्था की। एक सर्विस बोट के जरिए हमें बंदरगाह तक पहुंचाया गया। मैं और मेरे साथ नौ अन्य क्रू मेंबर जहाज से उतरे। इसके बाद हम दुबई पहुंचे और वहां से हवाई मार्ग से अपने-अपने घरों के लिए रवाना हुए। सवाल: अब होर्मुज फिर से बंद हो गया है, जब आप वहां फंसे थे तो आपका कैसा एक्सपीरियंस रहा था? जवाब: वह ऐसा एक्सपीरियंस था जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता। उस संकट के समय हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता पूरी टीम को
टीएमसी से पलायन जारी, राज्यसभा सांसद प्रकाश बड़ाईक ने दिया इस्तीफा, ममता को एक और झटका | भारत समाचार

आखरी अपडेट:11 जून, 2026, 10:48 IST बड़ाईक औपचारिक रूप से सुबह 11 बजे उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंपेंगे, इस सप्ताह इस्तीफा देने वाले तीसरे टीएमसी सांसद बन जाएंगे। टीएमसी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक (फेसबुक) ममता बनर्जी के लिए एक और झटका, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने गुरुवार को राज्यसभा में अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया, सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के बाद ऐसा करने वाले तीसरे पार्टी सांसद बन गए। बड़ाईक आज सुबह 11 बजे औपचारिक रूप से उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। उनके इस्तीफे के बाद उच्च सदन में टीएमसी की ताकत घटकर 10 रह जाएगी. यह एक विकासशील कहानी है। अधिक विवरण जोड़े जाने हैं. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया टीएमसी से पलायन जारी, राज्यसभा सांसद प्रकाश बड़ाईक ने दिया इस्तीफा, ममता के लिए एक और झटका अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तृणमूल कांग्रेस सांसद का इस्तीफा(टी)ममता बनर्जी को झटका(टी)प्रकाश चिक बड़ाईक(टी)टीएमसी राज्यसभा सांसद(टी)सुखेंदु शेखर रॉय(टी)सुष्मिता देव का इस्तीफा(टी)उच्च सदन में टीएमसी की ताकत(टी)भारतीय संसद की राजनीति
पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा के जिम पर फायरिंग:दिल्ली में बदमाशों ने गोलियां चलाईं; लॉरेंस गैंग ने ली जिम्मेदारी, लिखा- कहा था सलमान खान से दूर रह

दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में गुरुवार तड़के एक जिम के बाहर मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह जिम दिल्ली में राजौरी गार्डन के रहने वाले 2 कारोबारियों का है। इसके ब्रांड एंबेसडर पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा हैं। घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर कुख्यात लॉरेंस गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इसमें गुरु रंधावा के बारे में लिखा है- इसे समझाया था कि सलमान खान से दूर रह, वह हमारा दुश्मन है, लेकिन ये उसके बहुत करीबी बन रहा था। जितने भी देशद्रोही हैं, जहां भी छिपे हैं, वहीं पर मारेंगे। हमलावरों ने जिम पर कम से कम 7 राउंड गोलियां चलाईं और वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए। हालांकि, हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जबरन वसूली, गैंगवार और आपसी रंजिश समेत सभी एंगल से जांच शुरू कर दी है। केयरटेकर के पहुंचने पर हुआ खुलासा घटना का पता तब चला जब सुबह करीब सवा 5 बजे जिम के केयरटेकर वहां पहुंचे। जिम के शीशे टूटे देख और गोलियों के निशान पाकर उन्होंने तुरंत मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। जांच के लिए तुरंत फोरेंसिक टीम (FSL) को भी मौके पर बुलाया गया। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से खाली कारतूस और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस हमलावरों की पहचान करने के लिए जिम के आसपास और भागने वाले रास्तों पर लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। जांच में सामने आया है कि जिस फिटनेस सेंटर पर हमला हुआ है, उसके मालिक राजौरी गार्डन के रहने वाले दो व्यवसायी हैं। वहीं, एक बेहद मशहूर पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा इस जिम के ब्रांड एंबेसडर हैं। इसी वजह से इस हमले को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है। रंगदारी और आपसी रंजिश के एंगल से जांच शुरू दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, मामले की तफ्तीश के लिए कई टीमें गठित की गई हैं। पुलिस इस मामले को फिरौती, गैंगस्टरों की आपसी रंजिश और मालिकों की किसी निजी दुश्मनी के एंगल से जोड़कर देख रही है। पुलिस ने संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और बदमाशों की तलाश में छापे मारे जा रहे हैं। सामने आई पोस्ट में क्या-क्या लिखा… घटना के बाद वायरल की गई पोस्ट में लिखा है- जय महाकाल, जय श्री राम, राम राम सभी भाइयों को। जो आज ये 24HS FITNESS (24 आवर्स फिटनेस) दिल्ली में गुरु रंधावा की जिम पर जो फायरिंग हुई है, वह मैंने अनिल पंडित USA और लॉरेंस ग्रुप ने की है। पोस्ट में आगे लिखा है- ये सलमान खान से कुछ ज्यादा ही करीबी हो रहा था। इसे हमने पहले भी समझाया था कि इससे दूर रहो, ये हमारा दुश्मन है, लेकिन इसको समझ नहीं आई और जितने भी हमारे दुश्मन हैं वे किसी भी कोने में छुप जाएं, जल्दी ही सबसे मुलाकात होगी। वेट एंड वॉच। पोस्ट में अंत में नोट लगाकर लिखा गया है- और जितने भी ये देशद्रोही हैं, जो देश के खिलाफ साजिश रचते हैं, दुनिया के किसी भी कोने में छुप जाना, वहीं पर ही मारेंगे। अंत में सलाम साहिदा नू, लॉरेंस बिश्नोई ग्रुप, जितेंद्र गोगी मान ग्रुप, हैरी बॉक्सर, आरजू बिश्नोई, टायसन बिश्नोई, शुभम लोंकर, हरमन संधू और अंकित सेरसा का नाम लिखा है। हम इस खबर को अपडेट कर रहे हैं…
एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी जीरो हुई:अब 22% से 30% मिश्रण पर नहीं लगेगा टैक्स, सरकार की क्रूड इम्पोर्ट घटाने की तैयारी

केंद्र सरकार ने E20 (20% एथेनॉल ब्लेंडिंग) से अधिक स्तर के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर भी एक्साइज ड्यूटी जीरो कर दी है। सरकारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि 22% से लेकर 30% एथेनॉल मिक्स वाले पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। केंद्र सरकार ने देश में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) के इम्पोर्ट को कम करने और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आइए आसान सवाल-जवाब में समझते हैं कि सरकार के इस फैसले का मतलब क्या है और इससे आम आदमी और देश को क्या फायदा होगा। सवाल 1: सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर क्या नया नोटिफिकेशन जारी किया है? जवाब: भारत सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर पेट्रोल में हाई लेवल एथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त कर दिया है। इसके तहत जिस पेट्रोल में 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिला होगा, उस पर कोई केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) नहीं लगाया जाएगा। इस टैक्स छूट के दायरे में पेट्रोल के चार नए वेरिएंट्स— E22, E25, E27 और E30 शामिल होंगे। यह पहली बार है जब सरकार ने E20 से ऊपर के ब्लेंड्स के लिए इतने बड़े फाइनेंशियल सपोर्ट (फिस्कल इंसेंटिव) देने की घोषणा की है। सवाल 2 : क्या होता है एथेनॉल? जवाब: एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है, लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। सवाल 3: सरकार के इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह क्या है? जवाब: भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल (करीब 87%) विदेशों से इम्पोर्ट करता है। विदेशी तेल पर देश की निर्भरता को कम करने और घरेलू स्तर पर बनने वाली प्रदूषण-मुक्त ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस टैक्स छूट से तेल कंपनियां पेट्रोल में 20% से ज्यादा एथेनॉल मिलाने के लिए प्रेरित होंगी, जिससे देश का पैसा बाहर जाने से बचेगा। सवाल 4: क्या सरकार के पास इन नए वेरिएंट्स (E22 से E30) के लिए कोई तकनीकी ढांचा तैयार है? जवाब: हां, सरकार ने इसकी पूरी तैयारी पहले ही कर ली है। कुछ हफ्ते पहले ही भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने आधिकारिक तौर पर E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल ब्लेंड्स के लिए फ्यूल-क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (ईंधन की गुणवत्ता के मानक) अधिसूचित किए थे। IS 19850:2026 के तहत ये मानक 15 मई, 2026 से लागू हो चुके हैं। इनमें एथेनॉल की मात्रा, ऑक्टेन रेटिंग, सल्फर की सीमा, टेस्टिंग प्रोसेस और सेफ्टी नियमों को तय किया गया है। अब टैक्स छूट मिलने से तकनीकी और वित्तीय दोनों तरह के रास्ते साफ हो गए हैं। सवाल 5: भारत में अभी एथेनॉल ब्लेंडिंग की क्या स्थिति है, क्या हम टारगेट के करीब हैं? जवाब: भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम तय समय से काफी तेजी से आगे बढ़ा है। नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स (2018) में संशोधन करके पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य पहले 2030 रखा गया था, जिसे बाद में घटाकर एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2025-26 कर दिया गया। सरकारी तेल कोशिकाओं ने जून 2022 में ही समय से 5 महीने पहले 10% ब्लेंडिंग का टारगेट हासिल कर लिया था। सवाल 5: गाड़ियों के इंजन और परफॉर्मेंस पर एथेनॉल के असर को लेकर क्या विवाद रहा है? जवाब: जैसे-जैसे देश भर में E20 फ्यूल मिलना शुरू हुआ, कुछ गाड़ी मालिकों ने इंजन की क्षमता, माइलेज और गाड़ियों के पुराने पार्ट्स के खराब होने को लेकर चिंता जताई थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था। हालांकि, सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में E20 फ्यूल लागू करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट में सरकार ने दलील दी थी कि यह बदलाव पूरी तरह से जांच-परख के बाद और गन्ना किसानों के आर्थिक फायदे को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकार ने बिना एथेनॉल वाले (प्योर) पेट्रोल की समानांतर सप्लाई जारी रखने की मांग को भी ठुकरा दिया था। सवाल 7: क्या एथेनॉल मिक्स होने से गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है? ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का क्या कहना है? जवाब: इस पर ऑटोमोबाइल निर्माताओं की संस्था ‘सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (SIAM) ने स्थिति साफ की थी। SIAM के मुताबिक, कुछ पुरानी गाड़ियों में E20 ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज में मामूली गिरावट आ सकती है, लेकिन इससे गाड़ी की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। सवाल 8: आम तौर पर माना जाता है कि एथेनॉल सस्ता होता है, तो क्या ब्लेंडेड पेट्रोल की कीमत कम होगी? जवाब: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एथेनॉल कंपनियों से खरीदना रिफाइंड पेट्रोल के मुकाबले सस्ता नहीं पड़ रहा है। पिछले साल पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया था कि एथेनॉल की औसत खरीद लागत (वेटेड एवरेज प्रोक्योरमेंट कॉस्ट) रिफाइंड पेट्रोल की लागत से अधिक हो गई है। 31 जुलाई, 2025 तक, ट्रांसपोर्टेशन और GST मिलाकर कंपनियों को एथेनॉल की औसत खरीद लागत 71.32 रुपए प्रति लीटर पड़ रही थी। यही वजह है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने के बावजूद रिटेल प्राइस (खुदरा कीमत) को कम करना फिलहाल पेचीदा बना हुआ है।
एथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी जीरो हुई:22% से 30% मिलाने पर टैक्स नहीं लगेगा, सरकार की कच्चा तेल इम्पोर्ट घटाने की तैयारी

केंद्र सरकार 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिले पेट्रोल पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगी। E20, यानी 20% एथनॉल मिले पेट्रोल पर कोई राहत नहीं दी गई है। केंद्र सरकार ने देश में क्रूड ऑयल, यानी कच्चे तेल के इम्पोर्ट को कम करने और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है। आइए आसान सवाल-जवाब में समझते हैं कि सरकार के इस फैसले का मतलब क्या है और इससे आम आदमी और देश को क्या फायदा होगा। सवाल 1: सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर क्या नया नोटिफिकेशन जारी किया है? जवाब: भारत सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर पेट्रोल में हाई लेवल एथेनॉल ब्लेंडिंग को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त कर दिया है। इसके तहत जिस पेट्रोल में 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिला होगा, उस पर कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। इस टैक्स छूट के दायरे में पेट्रोल के चार नए वेरिएंट्स- E22, E25, E27 और E30 शामिल होंगे। यह पहली बार है जब सरकार ने E20 से ऊपर के ब्लेंड्स के लिए इतने बड़े फाइनेंशियल सपोर्ट, यानी फिस्कल इंसेंटिव देने की घोषणा की है। सवाल 2 : क्या होता है एथेनॉल? जवाब: एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है, लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। सवाल 3: सरकार के इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह क्या है? जवाब: भारत अपनी जरूरत का करीब 87% विदेशों से इम्पोर्ट करता है। विदेशी तेल पर देश की निर्भरता को कम करने और घरेलू स्तर पर बनने वाली प्रदूषण-मुक्त ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस टैक्स छूट से तेल कंपनियां पेट्रोल में 20% से ज्यादा एथेनॉल मिलाने के लिए प्रेरित होंगी, जिससे देश का पैसा बाहर जाने से बचेगा। सवाल 4: क्या सरकार के पास नए वेरिएंट्स- E22 से E30 के लिए कोई तकनीकी ढांचा तैयार है? जवाब: हां, सरकार ने इसकी पूरी तैयारी पहले ही कर ली है। कुछ हफ्ते पहले ही भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने आधिकारिक तौर पर E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल ब्लेंड्स के लिए फ्यूल-क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (ईंधन की गुणवत्ता के मानक) अधिसूचित किए थे। IS 19850:2026 के तहत ये मानक 15 मई, 2026 से लागू हो चुके हैं। इनमें एथेनॉल की मात्रा, ऑक्टेन रेटिंग, सल्फर की सीमा, टेस्टिंग प्रोसेस और सेफ्टी नियमों को तय किया गया है। अब टैक्स छूट मिलने से तकनीकी और वित्तीय दोनों तरह के रास्ते साफ हो गए हैं। सवाल 5: भारत में अभी एथेनॉल ब्लेंडिंग की क्या स्थिति है, क्या हम टारगेट के करीब हैं? जवाब: भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम तय समय से काफी तेजी से आगे बढ़ा है। नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स (2018) में संशोधन करके पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य पहले 2030 रखा गया था, जिसे बाद में घटाकर एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2025-26 कर दिया गया। सरकारी तेल कोशिकाओं ने जून 2022 में ही समय से 5 महीने पहले 10% ब्लेंडिंग का टारगेट हासिल कर लिया था। सवाल 5: गाड़ियों के इंजन और परफॉर्मेंस पर एथेनॉल के असर को लेकर क्या विवाद रहा है? जवाब: जैसे-जैसे देश भर में E20 फ्यूल मिलना शुरू हुआ, कुछ गाड़ी मालिकों ने इंजन की क्षमता, माइलेज और गाड़ियों के पुराने पार्ट्स के खराब होने को लेकर चिंता जताई थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था। हालांकि, सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में E20 फ्यूल लागू करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट में सरकार ने दलील दी थी कि यह बदलाव पूरी तरह से जांच-परख के बाद और गन्ना किसानों के आर्थिक फायदे को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकार ने बिना एथेनॉल वाले (प्योर) पेट्रोल की समानांतर सप्लाई जारी रखने की मांग को भी ठुकरा दिया था। सवाल 7: क्या एथेनॉल मिक्स होने से गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है? ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का क्या कहना है? जवाब: इस पर ऑटोमोबाइल निर्माताओं की संस्था ‘सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (SIAM) ने स्थिति साफ की थी। SIAM के मुताबिक, कुछ पुरानी गाड़ियों में E20 ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज में मामूली गिरावट आ सकती है, लेकिन इससे गाड़ी की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। सवाल 8: आमतौर पर माना जाता है कि एथेनॉल सस्ता होता है, तो क्या ब्लेंडेड पेट्रोल की कीमत कम होगी? जवाब: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एथेनॉल कंपनियों से खरीदना रिफाइंड पेट्रोल के मुकाबले सस्ता नहीं पड़ रहा है। पिछले साल पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया था कि एथेनॉल की औसत खरीद लागत (वेटेड एवरेज प्रोक्योरमेंट कॉस्ट) रिफाइंड पेट्रोल की लागत से अधिक हो गई है। 31 जुलाई, 2025 तक, ट्रांसपोर्टेशन और GST मिलाकर कंपनियों को एथेनॉल की औसत खरीद लागत 71.32 रुपए प्रति लीटर पड़ रही थी। यही वजह है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने के बावजूद रिटेल प्राइस (खुदरा कीमत) को कम करना फिलहाल पेचीदा बना हुआ है।
12 साल बाद टीवी पर लौटे यशपाल:बोले- ‘बरेली के बच्चन’ के लिए फिल्में-ओटीटी छोड़ी, अंश ने कहा- यंग ऑडियंस फिर टीवी से जुड़ेगी

लंबे समय बाद टीवी पर वापसी कर रहे अभिनेता यशपाल शर्मा अपने नए शो ‘बरेली के बच्चन’ को लेकर उत्साहित हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस शो के लिए उन्होंने अपनी फिल्में और ओटीटी प्रोजेक्ट्स फिलहाल अलग रख दिए हैं। यशपाल ने कहा कि ‘नीली छतरी वाले’ के बाद करीब 12 साल बाद वह टीवी शो कर रहे हैं और इस बार भी पूरी तरह एक ही प्रोजेक्ट पर फोकस कर रहे हैं। बातचीत में उन्होंने फिल्मों और टीवी का फर्क, अच्छी कहानियों की कमी और नए कलाकारों के लिए जरूरी सलाह साझा की। वहीं अंश मनुजा ने अपने किरदार सतलुज को रिबेल और रियल बताया। सवाल: आपने सिनेमा और टेलीविजन दोनों माध्यमों में काम किया है। आज के समय में दोनों में सबसे बड़ा फर्क क्या महसूस करते हैं? जवाब/यशपाल शर्मा: सिनेमा और टीवी में सबसे बड़ा फर्क काम करने के तरीके का है। फिल्में बहुत प्लानिंग के साथ बनाई जाती हैं। दो-तीन घंटे की कहानी को बारीकी से तैयार किया जाता है और उसे लंबे समय तक देखा जा सकता है। वहीं टीवी का काम काफी तेज होता है। यहां लगातार शूटिंग चलती रहती है और कलाकारों को हर समय तैयार रहना पड़ता है। फिल्मों में कई टेक्स लिए जा सकते हैं, लेकिन टीवी में समय कम होता है और उसी हिसाब से काम करना पड़ता है। सवाल: आपको अक्सर पावरफुल और लेयर्ड किरदारों में देखा गया है। ‘अजब सिंह’ में ऐसा क्या था जिसने आपको आकर्षित किया? जवाब/यशपाल शर्मा: अजब सिंह का किरदार बहुत अलग और दिलचस्प है। उसके अंदर कई परतें हैं और उसकी भावनात्मक यात्रा में उतार-चढ़ाव हैं। वह अपने परिवार से प्यार करता है, लेकिन उसे जाहिर नहीं करता। यही वजह है कि मुझे यह किरदार बहुत पसंद आया। इतना ही नहीं, मैंने इस शो के लिए अपनी फिल्में और ओटीटी प्रोजेक्ट्स फिलहाल अलग रख दिए हैं और पूरी तरह इसी काम पर ध्यान दे रहा हूं। सवाल: आप फिल्मों के मामले में काफी चुनिंदा माने जाते हैं। क्या आज भी स्क्रिप्ट सबसे बड़ा फैक्टर होती है? जवाब/यशपाल शर्मा: बिल्कुल। सबसे पहले मैं स्क्रिप्ट देखता हूं। उसके बाद किरदार, मेहनताना, प्रोडक्शन हाउस, डायरेक्टर और टीम को देखता हूं। जब सारी चीजें सही लगती हैं, तभी काम करता हूं। सवाल: ओटीटी, टीवी और फिल्मों के इस दौर में एक अभिनेता के लिए सबसे बड़ा चैलेंज क्या है? जवाब/यशपाल शर्मा: जो भी काम करो, उसमें पूरी ईमानदारी और समर्पण होना चाहिए। मैं ओटीटी, फिल्म और टीवी- तीनों में काम करता हूं, लेकिन जब किसी एक प्रोजेक्ट पर काम करता हूं तो पूरी तरह उसी में डूब जाता हूं। करीब 12 साल बाद मैं टीवी पर वापसी कर रहा हूं। ‘नीली छतरी वाले’ के बाद यह मेरा दूसरा टीवी शो है। उस समय भी मैंने बाकी कामों से दूरी बनाकर सिर्फ उसी शो पर ध्यान दिया था और इस बार भी यही किया है। सवाल: आज के युवा एक्टर्स को कौन-सी गलती नहीं करनी चाहिए? जवाब/यशपाल शर्मा: दिखावा नहीं करना चाहिए। अभिनय दिखाने की नहीं, महसूस करने की चीज है। अगर आप किरदार को अंदर से जीते हैं, तो दर्शक उसे खुद महसूस करेंगे। सवाल: आपको लगता है कि अच्छे एक्टर्स की कमी है या अच्छी कहानियों की? जवाब/यशपाल शर्मा: अच्छे एक्टर्स की कमी नहीं है। अच्छी कहानियों की कमी जरूर रही है, लेकिन ओटीटी और नई पीढ़ी के आने से अब बेहतर काम हो रहा है। सवाल: क्या कोई ऐसा रोल है जिसे आप अब भी करना चाहते थे और अब मौका मिला? जवाब/यशपाल शर्मा: अजब सिंह वैसा ही किरदार है। इसमें इमोशन, इंटेंसिटी, प्यार और कई रंग हैं। इसे लेकर मैं उत्साहित हूं। सवाल: सतलुज का किरदार आपको सबसे ज्यादा किस वजह से दिलचस्प लगा? जवाब/अंश मनुजा: सतलुज अलग और रिबेल स्वभाव का किरदार है। वह सबके खिलाफ नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा में रखने वाला इंसान है। उसका गुस्सा और सोच उसे बाकी लोगों से अलग बनाती है। सवाल: युवा दर्शकों को इस शो में क्या नया देखने को मिलेगा? जवाब/अंश मनुजा: यह एक रियल कॉन्सेप्ट वाला शो है। टीवी पर अक्सर ड्रामा और मेलोड्रामा देखने को मिलता है, लेकिन यह शो थोड़ा अलग है। मुझे लगता है कि यह युवाओं को टीवी की तरफ फिर आकर्षित करेगा। सवाल: सेट पर सीनियर एक्टर्स से कोई ऐसी सीख मिली जो हमेशा याद रहेगी? जवाब/अंश मनुजा: यशपाल सर ने सीधे सलाह कम दी है, लेकिन उनके काम को देखकर बहुत कुछ सीखा है। सेट पर अनुशासन कितना जरूरी है, छोटे-छोटे एक्सप्रेशन कितने मायने रखते हैं और किरदार को सच्चाई से कैसे निभाना चाहिए, यह सब उनसे सीखा। सवाल: आपकी असल जिंदगी और इस किरदार में कितनी समानता है? जवाब/अंश मनुजा: बहुत कम समानता है। सिर्फ एक चीज मिलती है कि मैं भी थोड़ा रिबेल स्वभाव का हूं। अपने पिता से कई बातों पर बहस होती है, लेकिन आखिर में हम साथ बैठकर खाना जरूर खाते हैं। यही बात इस किरदार में भी दिखती है। सवाल: क्योंकि यह फैमिली शो है, परिवार में गलतफहमियों को संभालने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? जवाब/अंश मनुजा: बात करना सबसे जरूरी है। अगर कोई बात परेशान कर रही है तो खुलकर सामने वाले से पूछ लेना चाहिए। मेरे हिसाब से हर रिश्ते में कम्युनिकेशन सबसे जरूरी चीज है।
FIFA वर्ल्ड कप में पहली बार बिलेनियर फुटबॉलर खेलते दिखेंगे:रोनाल्डो सबसे अमीर खिलाड़ी, दूसरे नंबर पर मेसी; दोनों की नेटवर्थ 1 बिलियन से ज्यादा

फीफा वर्ल्ड कप में इस बार पहली बार बिलेनियर खिलाड़ी खेलते नजर आएंगे। फोर्ब्स ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में भाग लेने वाले सबसे अमीर खिलाड़ियों की लिस्ट जारी की है। इसमें पुर्तगाल के स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो टॉप पर हैं। वहीं, अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी दूसरे नंबर पर हैं। रोनाल्डो और मेसी दोनों की ही नेटवर्थ $1 बिलियन (करीब ₹9,530 करोड़) से ज्यादा है। फोर्ब्स के मुताबिक, वर्ल्ड कप के टॉप 11 खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले पिछले 12 महीनों में कुल $950 मिलियन (करीब ₹9,050 करोड़) की कमाई की है। फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट में पहली बार 48 टीमें हिस्सा लेंगी और 104 मैच खेले जाएंगे। टॉप-11 हाइएस्ट पेड फुटबॉलर रोनाल्डो की कमाई ₹2,800 करोड़ पार, मेवेदर के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी की 41 साल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो इस समय दुनिया के सबसे महंगे खिलाड़ी हैं। पिछले एक साल में उनकी अनुमानित कमाई $300 मिलियन (करीब ₹2858.25 करोड़) रही है। इसमें से ₹3191.71 करोड़ ($235 मिलियन) उन्हें मैदान पर खेल (सैलरी और बोनस) से मिले हैं, जबकि ₹619.38 करोड़ ($65 मिलियन) एंडोर्समेंट और अन्य बिजनेस वेंचर्स से आए हैं। सऊदी अरब के क्लब अल-नासर के लिए खेलने वाले रोनाल्डो दुनिया के उन चुनिंदा 4 एक्टिव एथलीट्स में शामिल हैं, जिनकी नेटवर्थ $1 बिलियन से ज्यादा है। उनकी यह सालाना कमाई बॉक्सिंग लेजेंड फ्लॉयड मेवेदर जूनियर के उस रिकॉर्ड के बराबर है, जो फोर्ब्स के इतिहास में किसी खिलाड़ी की एक साल की सबसे बड़ी कमाई मानी जाती है। रोनाल्डो अपने करियर का छठवां वर्ल्ड कप खेल रहे हैं और हाल ही में उन्होंने अल-नासर को सऊदी प्रो लीग का खिताब भी जिताया है। दूसरे नंबर पर मेसी, इस बार सबसे बड़े स्कोरर बन सकते हैं अर्जेटीना को पिछला वर्ल्ड कप जिताने वाले लियोनेल मेसी लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं। मेसी ने पिछले 12 महीनों में $140 मिलियन (करीब ₹1333.78 करोड़) की कमाई की है। खास बात यह है कि मेसी की यह कमाई फील्ड और ऑफ-फील्ड (विज्ञापन और बिजनेस) में आधी-आधी ($70-70 मिलियन) बंटी हुई है। इंटर मियामी के लिए खेल रहे मेसी हाल ही में फोर्ब्स की बिलेनियर लिस्ट में शामिल हुए हैं, उनकी कुल नेटवर्थ $1.1 बिलियन (करीब ₹1048 करोड़) आंकी गई है। रोनाल्डो की तरह मेसी का भी यह छठवां वर्ल्ड कप होगा। अगर मेसी इस टूर्नामेंट में 4 गोल और कर देते हैं, तो वह जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज (16 गोल) को पीछे छोड़कर वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे सफल गोल स्कोरर बन जाएंगे। एम्बापे तीसरे और हालैंड चौथे पायदान पर फ्रांस के स्टार फॉरवर्ड किलियन एम्बापे लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं। रियल मैड्रिड के इस खिलाड़ी की सालाना कमाई $95 मिलियन (करीब ₹905.13 करोड़) रही है। एम्बापे इस समय फुटबॉल की दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड्स में से एक हैं और उन्होंने हाल ही में कई नए इन्वेस्टमेंट किए हैं। मैनचेस्टर सिटी के साथ बड़ा कॉन्ट्रैक्ट करने वाले नॉर्वे के स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड $80 मिलियन (करीब ₹762.27 करोड़) की कमाई के साथ चौथे नंबर पर हैं। वहीं ब्राजील के विनीसियस जूनियर $60 मिलियन (करीब ₹571.70 करोड़) कमाकर पांचवें स्थान पर काबिज हैं। सिर्फ 18 साल की उम्र में लामिन यामल टॉप-10 में शामिल इस लिस्ट का सबसे बड़ा सरप्राइज स्पेन के 18 वर्षीय सनसनी लामिन यामल हैं। यामल ने पिछले एक साल में $43 मिलियन (करीब ₹409.68 करोड़) की बंपर कमाई की है और वह लिस्ट में 9वें नंबर पर हैं। इतनी कम उम्र में उनकी इतनी बड़ी कमाई फुटबॉल मार्केट में उनके बढ़ते दबदबे को दिखाती है। लिवरपूल के मोहम्मद सालाह $55 मिलियन (करीब ₹523.96 करोड़) के साथ छठे, सेनेगल के सादियो माने $54 मिलियन (करीब ₹514.44 करोड़) के साथ सातवें और इंग्लैंड के जूड बेलिंगहैम $44 मिलियन (करीब ₹419.17 करोड़) के साथ आठवें नंबर पर हैं। इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन $41 मिलियन (करीब ₹390.59 करोड़) कमाकर 10वें और चोट से जूझ रहे ब्राजील के नेमार $38 मिलियन (करीब ₹362.01 करोड़) के साथ 11वें नंबर पर हैं। फोर्ब्स कैसे तय करता है खिलाड़ियों की कमाई? फोर्ब्स की इस लिस्ट में खिलाड़ियों की पिछले 12 महीनों की सैलरी, बोनस, इमेज राइट्स और एंडोर्समेंट (विज्ञापनों से कमाई) को शामिल किया जाता है। हालांकि, इसमें खिलाड़ियों के पर्सनल इन्वेस्टमेंट से मिलने वाले रिटर्न, टैक्स, ट्रांसफर फीस और एजेंट्स को दी जाने वाली कमीशन को शामिल नहीं किया जाता है। यह रैंकिंग साफ करती है कि आज के दौर में बड़े फुटबॉलर सिर्फ खिलाड़ी नहीं बल्कि एक ग्लोबल ब्रांड बन चुके हैं।
दूसरे दिल्ली दौरे में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी से मुलाकात की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:10 जून, 2026, 21:50 IST राष्ट्रीय राजधानी के तीन दिवसीय दौरे पर आए विजय के गुरुवार को नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद नई दिल्ली में विजय की सोनिया गांधी और राहुल गांधी से यह पहली मुलाकात थी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने बुधवार को नई दिल्ली में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। राष्ट्रीय राजधानी के तीन दिवसीय दौरे पर आए विजय के गुरुवार को नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल की बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। मई में दक्षिणी राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभालने के बाद यह उनकी नई दिल्ली की दूसरी यात्रा है। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद विजय पहली बार सीपीपी प्रमुख के 10, जनपथ स्थित आवास पर गांधी परिवार से मिले। विजय के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए राहुल गांधी पिछले महीने चेन्नई गए थे। के अनुसार पीटीआई सूत्रों के अनुसार, यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी और गांधी परिवार ने विजय को आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं दीं। इससे पहले आज विजय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। विजय-कांग्रेस गठबंधन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद, कांग्रेस ने तेजी से डीएमके के साथ अपना गठबंधन खत्म कर दिया और सरकार बनाने के लिए विजय की टीवीके से हाथ मिला लिया। 234 सदस्यीय विधानसभा में सिर्फ पांच विधायक होने के बावजूद, पार्टी ने सत्ता-साझाकरण व्यवस्था के हिस्से के रूप में नए मंत्रिमंडल में दो सीटें और प्रवीण चक्रवर्ती के लिए एक राज्यसभा सीट हासिल की। इस कदम से लगभग छह दशकों के बाद तमिलनाडु में कांग्रेस की सत्ता में वापसी भी हुई। पार्टी ने आखिरी बार 1967 में राज्य पर शासन किया था, हिंदी विरोधी आंदोलन के बीच सत्ता से बाहर होने से पहले, जिसने तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दिया और द्रविड़ पार्टियों के उदय का मार्ग प्रशस्त किया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में -सौरभ वर्मावरिष्ठ उपसंपादक सौरभ वर्मा मुख्य उप-संपादक के रूप में News18.com के लिए सामान्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दैनिक समाचारों को कवर करते हैं। वह राजनीति पर गहरी नजर रखते हैं। आप उन्हें ट्विटर –twitter.com/saurbhkverma19 पर फ़ॉलो कर सकते हैं न्यूज़ इंडिया दूसरे दिल्ली दौरे में तमिलनाडु के सीएम विजय ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी से मुलाकात की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)सी जोसेफ विजय(टी)सोनिया गांधी की बैठक(टी)राहुल गांधी की बैठक(टी)नई दिल्ली यात्रा(टी)नीति आयोग परिषद(टी)तमिलनाडु में कांग्रेस
सायोनी घोष से लेकर युसूफ पठान तक, सितारों को सांसद बनाने का ममता का प्रयोग क्यों उल्टा पड़ गया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:10 जून, 2026, 20:34 IST सालों तक, ममता ने सिनेमा, टेलीविजन और खेल के लोकप्रिय चेहरों को राजनीति में लाकर टीएमसी की अपील को व्यापक बनाने के लिए स्टार पावर पर भरोसा किया। न्यूज18 ने पहले काकोली घोष दस्तीदार खेमे से जुड़े 20 बागी सांसदों में से 19 के नाम की खबर दी थी. हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की हार के बाद, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) संसद में विभाजन की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जिसमें 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एक अलग संसदीय गुट के गठन और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने के बारे में सूचित किया है। यह घटनाक्रम विधानसभा में एक समानांतर विद्रोह के बाद आया है, जहां असंतुष्ट टीएमसी विधायकों ने 58 विधायकों के समर्थन का दावा किया था और टीएमसी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय विपक्ष के नेता के रूप में रीतब्रत बनर्जी का समर्थन करके पार्टी नेतृत्व की अवहेलना की थी। न्यूज18 इससे पहले काकोली घोष दस्तीदार खेमे से जुड़े 20 बागी सांसदों में से 19 के नाम सामने आए थे। जो बात सामने आई वह यह है कि उनमें से नौ मशहूर हस्तियां हैं – अभिनेता, खिलाड़ी और सांस्कृतिक हस्तियां – जिन्हें ममता बनर्जी ने व्यक्तिगत रूप से चुना और लोकसभा में पहुंचाया। सालों तक, ममता ने सिनेमा, टेलीविजन और खेल के लोकप्रिय चेहरों को राजनीति में लाकर टीएमसी की अपील को व्यापक बनाने के लिए स्टार पावर पर भरोसा किया। इस रणनीति ने चुनावी सफलता दिलाई और पार्टी को बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य पर हावी होने में मदद की। लेकिन राजनीतिक वफादारी की परीक्षा अक्सर संकट के क्षणों में होती है। जैसा कि ममता को अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, संसदीय टिकटों पर जिन मशहूर हस्तियों पर उन्होंने भरोसा किया था उनमें से कई अब विद्रोह का हिस्सा हैं जिससे पार्टी पर उनकी पकड़ कमजोर होने का खतरा है। यहां उन सेलिब्रिटी सांसदों पर एक नजर है जो कभी ममता की जीत के फार्मूले के प्रतीक थे और अब टीएमसी के सबसे बड़े आंतरिक विद्रोह के केंद्र में हैं। यूसुफ़ पठान भारत की 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप विजेता टीम के सदस्य, यूसुफ पठान ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले राजनीति में प्रवेश किया। प्रतिद्वंद्वियों द्वारा “बाहरी व्यक्ति” होने की आलोचना के बावजूद, पूर्व क्रिकेटर ने बहरामपुर में कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को 85,000 से अधिक वोटों से हराया। सायोनी घोष अभिनेत्री 2021 में टीएमसी में शामिल हुईं और जल्द ही पार्टी की सबसे अधिक दिखाई देने वाली प्रचारकों में से एक बन गईं। हालाँकि वह आसनसोल से अपना पहला विधानसभा चुनाव हार गईं, लेकिन ममता बनर्जी ने उन्हें युवा टीएमसी अध्यक्ष के रूप में पदोन्नत किया और बाद में उन्हें जादवपुर से मैदान में उतारा, जहाँ उन्होंने दो लाख से अधिक वोटों की भारी जीत हासिल की। उन्हें हाल ही में टीएमसी महिला विंग का अध्यक्ष बनाया गया था। रचना बनर्जी हिट रियलिटी शो दीदी नंबर 1 के माध्यम से बंगाल में एक घरेलू नाम, रचना बनर्जी ने 2024 के चुनावों से पहले राजनीति में प्रवेश किया। ममता ने महिला मतदाताओं के बीच अपनी लोकप्रियता पर भरोसा किया और उन्हें भाजपा नेता और अभिनेत्री लॉकेट चटर्जी के खिलाफ एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले में हुगली से मैदान में उतारा। शत्रुघ्न सिन्हा अभिनेता से नेता बने अभिनेता 2022 में टीएमसी में शामिल होने से पहले भाजपा और कांग्रेस में रह चुके हैं। ममता बनर्जी ने उन्हें आसनसोल लोकसभा उपचुनाव में मैदान में उतारा, जहां उन्होंने तीन लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की, जिससे अनुभवी नेता को बंगाल में एक नया राजनीतिक आधार मिला। कालीपद सोरेन अपने उपनाम खेरवाल सोरेन के नाम से जाने जाने वाले, संताली लेखक और नाटककार साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्म श्री प्राप्तकर्ता हैं। सम्मानित सांस्कृतिक और बौद्धिक हस्तियों को मैदान में उतारने की अपनी रणनीति को जारी रखते हुए, ममता ने 2024 में आदिवासी बहुल झाड़ग्राम सीट के लिए उन्हें चुना। जून मालिया बंगाली फिल्मों और टेलीविजन में एक परिचित चेहरा, जून मालिया ने 2021 में राजनीति में प्रवेश किया और मेदिनीपुर विधानसभा सीट जीती। तीन साल बाद, ममता ने उन्हें मेदिनीपुर से मैदान में उतारकर राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचाया, जहां उन्होंने भाजपा की अग्निमित्रा पॉल को हराया। देव अधिकारी बंगाल के सबसे बड़े फिल्मी सितारों में से एक, देव अधिकारी ने 2014 में राजनीति में प्रवेश किया और तब से तीन बार घाटल लोकसभा सीट जीत चुके हैं। कई सेलिब्रिटी राजनेताओं के विपरीत, उन्होंने धीरे-धीरे अपनी खुद की एक राजनीतिक पहचान बनाई, घाटल मास्टर प्लान उनका हस्ताक्षर मुद्दा बन गया। सताब्दी रॉय ममता बनर्जी द्वारा टीएमसी में लाए गए शुरुआती अभिनेताओं में से शताब्दी रॉय ने 2009 में बीरभूम से संसद में प्रवेश किया और तब से इस सीट को बरकरार रखा है। उनकी लगातार चार जीतें उन्हें पार्टी के सबसे सफल सेलिब्रिटी राजनेताओं में से एक बनाती हैं। पार्थ भौमिक अधिकांश सेलिब्रिटी रंगरूटों के विपरीत, पार्थ भौमिक ने अपना राजनीतिक करियर पार्टी संगठन के माध्यम से बनाया। तीन बार के विधायक, पूर्व मंत्री और उत्तर 24 परगना जिले के अध्यक्ष, उन्होंने 2024 में बैरकपुर से भाजपा के दिग्गज अर्जुन सिंह को हराकर संसद में प्रवेश किया। क्यों उल्टा पड़ा ममता का स्टार प्रयोग? ममता बनर्जी वर्षों से अभिनेताओं, खिलाड़ियों और अन्य मशहूर हस्तियों को पार्टी में लाती रही हैं। रणनीति ने चुनावी तौर पर अच्छा काम किया, जिससे टीएमसी को मतदाताओं को आकर्षित करने और पूरे बंगाल में एक मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव दिखाने में मदद मिली। 2019 के लोकसभा चुनाव में, उन्होंने अभिनेता नुसरत जहां और मिमी चक्रवर्ती को मैदान में उतारा, दोनों ने आसानी से जीत हासिल की। इस फॉर्मूले को बाद के चुनावों में दोहराया गया, और अधिक मशहूर हस्तियों को सक्रिय राजनीति में शामिल किया गया। हालाँकि, टीएमसी के भीतर चल रहे विद्रोह ने रणनीति की एक प्रमुख कमजोरी को उजागर कर दिया है। इनमें से कई सेलिब्रिटी सांसदों के पास स्वतंत्र जमीनी आधार का अभाव है और वे ममता बनर्जी की लोकप्रियता और पार्टी की संगठनात्मक मशीनरी के बल पर राजनीतिक रूप से









