रणवीर सिंह ने मोहन भागवत से मुलाकात की:नागपुर में रेशिमबाग स्मृति मंदिर पहुंचे, RSS के संस्थापक हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह शुक्रवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के मेमोरियल पर गए। जहां उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि दी और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की। पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि एक्टर ने संघ के दूसरे सरसंघचालक एम एस गोलवलकर के मेमोरियल पर जाकर उन्हें भी श्रद्धांजलि दी। रणवीर दोपहर करीब 4 बजे मुंबई से चार्टर्ड फ्लाइट से नागपुर पहुंचे। वे रेशिमबाग स्थित हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर गए, जो RSS से जुड़ा प्रमुख स्थान है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा की इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि दौरा छोटा, लेकिन अहम रहा। उन्होंने RSS पदाधिकारियों के साथ कई विषयों पर बातचीत की, हालांकि इन चर्चाओं की जानकारी पब्लिक नहीं की गई है। एयरपोर्ट अधिकारियों ने भी उनके आने और जाने की पुष्टि की। रणवीर सिंह शाम करीब 8 बजे वापस मुंबई लौट गए। मोहन भागवत से मुलाकात की टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रणवीर सिंह ने नागपुर में RSS प्रमुख मोहन भागवत से भी मुलाकात की। यह मुलाकात RSS हेडक्वार्टर में हुई, हालांकि संगठन ने कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया है। RSS से जुड़े लोगों ने रेशिमबाग स्थित स्मृति भवन में उनके दौरे की पुष्टि की है। हालांकि, उनके इस दौरे का उद्देश्य साफ नहीं किया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले रणवीर सिंह ने RSS के स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर एक वीडियो मैसेज जारी कर अपनी शुभकामनाएं दी थीं। बता दें कि रणवीर का यह दौरा ऐसे समय में सामने आया है, जब उनकी फिल्म धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर रही है और इसने दुनिया भर में 1600 करोड़ रुपए से ज्यादा कमा लिए हैं।
कॉन्स्टेबल ने साथियों के साथ किया एजेंट का अपहरण:दतिया में दिनदहाड़े बोलेरो से उठाया; 7 KM पीछा कर 2 गिरफ्तार, आरक्षक फरार

दतिया में बाइक की बकाया किस्त मांगने के विवाद में शिवपुरी के दिनारा थाने में पदस्थ आरक्षक राजपाल मांझी ने अपने भाई और अन्य साथियों के साथ मिलकर गुरुवार दोपहर एक 21 वर्षीय रिकवरी एजेंट का दिनदहाड़े अपहरण कर लिया। आरोपियों ने एजेंट के साथ मारपीट कर उसे जबरन बोलेरो में बैठाया और रास्ते में डराने के लिए फायरिंग भी की। दतिया पुलिस ने तत्काल घेराबंदी कर 7 किलोमीटर तक पीछा करते हुए 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मामले में आरक्षक राजपाल मांझी सहित 4 अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस ने अपहरण और मारपीट का केस दर्ज कर लिया है। ऑनलाइन सेंटर से बोलेरो में बैठाया, रास्ते में की फायरिंग जानकारी के अनुसार, दतिया निवासी 21 वर्षीय विजय बाल्मीकि एक फाइनेंस कंपनी में रिकवरी एजेंट के तौर पर काम करता है। उसने एक ग्राहक को बाइक फाइनेंस करवाई थी, जिसकी किस्तें बकाया थीं। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जिसके बाद आरोपी पक्ष ने विजय के अपहरण की योजना बनाई। गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे विजय दतिया के एक ऑनलाइन सेंटर पर मौजूद था। तभी छोटू मांझी, उसका भाई आरक्षक राजपाल मांझी (थाना दिनारा, शिवपुरी), बंटी उर्फ मुस्लिमान और अन्य साथी वहां पहुंचे। आरोपियों ने पहले विजय के साथ मारपीट की और फिर उसे जबरन एक बोलेरो वाहन में बैठाकर अपहरण कर लिया। अपहरण के दौरान आरोपियों ने रास्ते में विजय के साथ मारपीट की और उसे जान से मारने की धमकी दी। सूत्रों के अनुसार, उसे डराने के उद्देश्य से फायरिंग भी की गई थी। पुलिस ने 7 KM किया पीछा, एजेंट को सड़क पर छोड़कर भागे घटना की सूचना मिलते ही दतिया पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और तत्काल घेराबंदी की। पुलिस को अपनी ओर आता देख, आरोपी एजेंट को सड़क पर छोड़कर भागने लगे। पुलिस ने लगभग 7 किलोमीटर तक पीछा कर आरोपी छोटू मांझी और बंटी उर्फ मुस्लिमान को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, आरक्षक राजपाल मांझी सहित चार अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपहरण, मारपीट और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। ये खबर भी पढ़ें… दतिया में फायरिंग और बैंक एजेंट अपहरण के आरोपी गिरफ्तार दतिया में अवैध हथियारों से फायरिंग कर दहशत फैलाने और बैंक एजेंट का अपहरण करने के आरोप में दो मुख्य आरोपियों को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। यह घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के गोंडा मोहल्ले में हुई थी… पूरी खबर पढ़िए
सलमान खान व्हीलचेयर क्रिकेटर भीमा खूंटी से मिले:टी-शर्ट पर ऑटोग्राफ दिया, रणवीर सिंह ने भी मुलाकात की

जामनगर में अनंत अंबानी के 31वें जन्मदिन समारोह में शामिल होने के बाद एक्टर सलमान खान ने इंटरनेशनल व्हीलचेयर क्रिकेटर भीमा खूंटी से मुलाकात की और उनकी टी-शर्ट पर ऑटोग्राफ दिया। बता दें कि भीमा खूंटी एक अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेटर हैं और गुजरात व्हीलचेयर क्रिकेट टीम के कप्तान हैं। वह पोरबंदर, गुजरात के रहने वाले हैं और एक मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी पहचान रखते हैं। भीमा खूंटी ने अपने इंस्टाग्राम पर जो वीडियो पोस्ट किया है, उसमें देखा जा सकता है कि सलमान जामनगर से निकलते समय कड़ी सुरक्षा के बीच भीमा खूंटी से मिलने के लिए रुके। उन्होंने भीमा खूंटी की टी-शर्ट पर ऑटोग्राफ दिया और कुछ समय बातचीत भी की। सलमान से मिलने के बाद भीमा ने लिखा कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती, वे सिर्फ हिम्मत देखते हैं। क्रिकेट के मैदान से लेकर सलमान खान से मुलाकात तक का सफर उनके लिए गर्व का पल रहा। रणवीर सिंह ने भी मुलाकात की वहीं, रणवीर सिंह भी जामनगर एयरपोर्ट पर भीमा खूंटी से मिले। वीडियो में रणवीर उनके सामने घुटनों पर बैठकर बातचीत करते, ऑटोग्राफ देते और हाथ मिलाते नजर आए। रणवीर सिंह से मुलाकात को लेकर भीमा ने इमोशनल पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि जिंदगी में कुछ पल ऐसे होते हैं जो कभी नहीं भूलते और आज का दिन उन्हीं में से एक था। भीमा ने रणवीर सिंह की सादगी, विनम्रता और सम्मान की भावना की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सुपरस्टार होना अलग बात है, लेकिन एक अच्छा इंसान होना ही असली स्टार बनाता है। बता दें कि सलमान खान और रणवीर सिंह जामनगर में आयोजित अनंत अंबानी के जन्मदिन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।
पश्चिम बंगाल में SIR ही सबसे बड़ा मुद्दा:नई वोटर लिस्ट से CM ममता की परेशानी बढ़ी, 50 सीटों पर TMC को ज्यादा चुनौती

8 अप्रैल की सुबह बूंदाबांदी के बीच करीब सुबह 10:25 बजे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समर्थकों के हुजूम के साथ पैदल ही हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने घर से नामांकन के लिए निकलीं। गोपालनगर सर्वे बिल्डिंग तक के करीब एक किलोमीटर तक रास्ते में समर्थक जोतोई कोरो हमला, आबार जितबे बांग्लो (चाहे जितना करो हमला, फिर जीतेगा बांग्ला) के नारे लगा रहे थे। वहां CM बनर्जी ने मीडिया से कहा- राज्य के करीब 90.8 लाख (11.9%) मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिसे उन्होंने अदालत में चुनौती देने की बात कही है। अकेले भवानीपुर सीट से 51 हजार वोट घटने का अनुमान है। दरअसल, बंगाल चुनाव में इस बार भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे पुराने मुद्दों को पीछे छोड़कर स्पेशन इंटेंसिव रिवीजन (SIR) सबसे बड़ा विवाद बन गया है। ममता के आरोपों का जवाब देते हुए राज्य भाजपा के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि मतदाता सूची से नाम सिर्फ मुसलमानों के ही नहीं कटे हैं बल्कि राजवंशी, मतुआ और अन्य समुदायों के भी कटे हैं। जो मर गए, ट्रांसफर हो गए, उनका नाम तो सूची से हटाना ही पड़ेगा। एक्सपर्ट बोले- SIR से ममता की राह थोड़ी मुश्किल हुई पॉलिटिकल एनालिस्ट और सीनियर जर्नलिस्ट सुभाशीष मोइत्रा कहते हैं कि एसआईआर से ममता की राह थोड़ी मुश्किल अवश्य हुई है। करीब 50 सीटों पर चुनौती और बढ़ गई है, लेकिन जीत असंभव जैसी भी नहीं है। राज्य में 49 सीटों पर 90% से अधिक हिंदू वोट हैं। साल 2021 में इनमें से तृणमूल 29 और भाजपा 20 सीटें जीती थी। वहीं 25% या इससे अधिक मुस्लिम वोट वाली राज्य की कुल 146 सीटों में तृणमूल 131 सीटों पर जीती थी। मोइत्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र (जहां नगरीय निकाय नहीं है) की करीब 163 सीटें (इन सीटों में मुस्लिम आबादी वाली व 90% हिंदू आबादी वाली कुछ सीटें शामिल हैं) में तृणमूल को 126 सीटें मिली, जबकि भाजपा 36 में सफल हुई थी। SIR के बाद मुस्लिम वोट ममता बनर्जी के पक्ष में और अधिक ताकत के साथ जुटेगा। मोइत्राग ने कहा कि मुर्शिदाबाद की बहरामपुर सीट से अधीर रंजन चौधरी उम्मीदवार हैं, जबकि मालदा मालतीपुर से मौसम नूर लड़ रही हैं। कांग्रेस यही दो सीट जीत सकती है। बाकी सीटों पर वामपंथी पार्टियाें के साथ वे कुछ खास वोट काटने या भाजपा को फायदा पहुंचाने की स्थिति में नहीं होंगी। सिर्फ 5 साल में भाजपा 10% से 38% पर पहुंची शहरी क्षेत्रों में ममता के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी सीनियर जर्नलिस्ट शंखदीप दास कहते हैं कि शहरी क्षेत्रों में ममता सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी स्पष्ट नजर आती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ममता सरकार अपनी योजनाओं के कारण मजबूत है। सबसे बड़ी बात है कि वे हर वर्ग महिला, युवा, किसान, श्रमिक, बेरोजगार, मजदूर, बुजुर्गों को कवर करने के लिए उससे संबंधित कोई न कोई योजना अवश्य चला रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इन योजनाओं का बहुत प्रभाव पड़ा है। लक्ष्मी भंडार योजना के तहत राज्य की 2.21 करोड़ महिलाओं को आर्थिक मदद दी है। दुआरे सरकार (दरवाजे पर सरकार) जैसे मॉडल से लोग जुड़े हैं। निर्वाचन आयोग भाजपा आयोग बन गया तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता ने कहा कि एसआईआर सबसे बड़ा मुद्दा हो गया है। निर्वाचन आयोग भाजपा आयोग बन गया है। लग रहा है जैसे बंगाल की 294 सीटों पर ज्ञानेश कुमार ही भाजपा के उम्मीदवार हैं। इनके पास पूरे बूथ पर लड़ने के लिए कार्यकर्ता भी नहीं हैं। वहीं संघ के एक पदाधिकारी ने कहा कि राज्य में मुर्शिदाबाद को छोड़कर हर जिले में हिंदू आबादी घट गई है। गुजरात के बाद बंगाल ही ऐसा राज्य है, जहां हिंदू सर्वाधिक 68% भाजपा को वोट देते हैं। इन सबसे दूर, राज्य की राजनीति में छह दशकों पर तक सत्ता में रही कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां इस बार अलग-अलग और सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा नेता ने कहा कि राज्य के करीब 85 हजार बूथों में से हमने 65 हजार से अधिक बूथों पर कार्यकर्ताओं की नियुक्ति कर दी है, जो बड़ी उपलब्धि है। वर्ष 2021 के बाद से हमारे 321 कार्यकर्ता मारे गए हैं। भयमुक्त चुनाव हुए तो हमारी जीत तय है। …………………….. यह खबर भी पढ़ें… शाह बोले- ममता भतीजे को सीएम बनाना चाहती हैं: लोगों की परेशानी की परवाह नहीं; ममता बोलीं- सांप पर भरोसा करना, BJP पर नहीं गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के देबरा में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, ममता बनर्जी बंगाल के लोगों की चिंता नहीं करती हैं। उन्हें बस भतीजे अभिषेक बनर्जी को अगला सीएम बनाने में दिलचस्पी है। उधर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने नॉर्थ 24 परगना के टेंटुलिया में चुनावी रैली की। उन्होंने कहा- सांप पर भरोसा किया जा सकता है, लेकिन BJP पर नहीं। पूरी खबर पढ़ें…
पश्चिम बंगाल में SIR ही सबसे बड़ा मुद्दा:नई वोटर लिस्ट से CM ममता की परेशानी बढ़ी, 50 सीटों पर TMC को ज्यादा चुनौती

8 अप्रैल की सुबह बूंदाबांदी के बीच करीब सुबह 10:25 बजे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समर्थकों के हुजूम के साथ पैदल ही हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने घर से नामांकन के लिए निकलीं। गोपालनगर सर्वे बिल्डिंग तक के करीब एक किलोमीटर तक रास्ते में समर्थक जोतोई कोरो हमला, आबार जितबे बांग्लो (चाहे जितना करो हमला, फिर जीतेगा बांग्ला) के नारे लगा रहे थे। वहां CM बनर्जी ने मीडिया से कहा- राज्य के करीब 90.8 लाख (11.9%) मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिसे उन्होंने अदालत में चुनौती देने की बात कही है। अकेले भवानीपुर सीट से 51 हजार वोट घटने का अनुमान है। दरअसल, बंगाल चुनाव में इस बार भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे पुराने मुद्दों को पीछे छोड़कर स्पेशन इंटेंसिव रिवीजन (SIR) सबसे बड़ा विवाद बन गया है। ममता के आरोपों का जवाब देते हुए राज्य भाजपा के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि मतदाता सूची से नाम सिर्फ मुसलमानों के ही नहीं कटे हैं बल्कि राजवंशी, मतुआ और अन्य समुदायों के भी कटे हैं। जो मर गए, ट्रांसफर हो गए, उनका नाम तो सूची से हटाना ही पड़ेगा। एक्सपर्ट बोले- SIR से ममता की राह थोड़ी मुश्किल हुई पॉलिटिकल एनालिस्ट और सीनियर जर्नलिस्ट सुभाशीष मोइत्रा कहते हैं कि एसआईआर से ममता की राह थोड़ी मुश्किल अवश्य हुई है। करीब 50 सीटों पर चुनौती और बढ़ गई है, लेकिन जीत असंभव जैसी भी नहीं है। राज्य में 49 सीटों पर 90% से अधिक हिंदू वोट हैं। साल 2021 में इनमें से तृणमूल 29 और भाजपा 20 सीटें जीती थी। वहीं 25% या इससे अधिक मुस्लिम वोट वाली राज्य की कुल 146 सीटों में तृणमूल 131 सीटों पर जीती थी। मोइत्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र (जहां नगरीय निकाय नहीं है) की करीब 163 सीटें (इन सीटों में मुस्लिम आबादी वाली व 90% हिंदू आबादी वाली कुछ सीटें शामिल हैं) में तृणमूल को 126 सीटें मिली, जबकि भाजपा 36 में सफल हुई थी। SIR के बाद मुस्लिम वोट ममता बनर्जी के पक्ष में और अधिक ताकत के साथ जुटेगा। मोइत्राग ने कहा कि मुर्शिदाबाद की बहरामपुर सीट से अधीर रंजन चौधरी उम्मीदवार हैं, जबकि मालदा मालतीपुर से मौसम नूर लड़ रही हैं। कांग्रेस यही दो सीट जीत सकती है। बाकी सीटों पर वामपंथी पार्टियाें के साथ वे कुछ खास वोट काटने या भाजपा को फायदा पहुंचाने की स्थिति में नहीं होंगी। सिर्फ 5 साल में भाजपा 10% से 38% पर पहुंची शहरी क्षेत्रों में ममता के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी सीनियर जर्नलिस्ट शंखदीप दास कहते हैं कि शहरी क्षेत्रों में ममता सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी स्पष्ट नजर आती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ममता सरकार अपनी योजनाओं के कारण मजबूत है। सबसे बड़ी बात है कि वे हर वर्ग महिला, युवा, किसान, श्रमिक, बेरोजगार, मजदूर, बुजुर्गों को कवर करने के लिए उससे संबंधित कोई न कोई योजना अवश्य चला रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इन योजनाओं का बहुत प्रभाव पड़ा है। लक्ष्मी भंडार योजना के तहत राज्य की 2.21 करोड़ महिलाओं को आर्थिक मदद दी है। दुआरे सरकार (दरवाजे पर सरकार) जैसे मॉडल से लोग जुड़े हैं। निर्वाचन आयोग भाजपा आयोग बन गया तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता ने कहा कि एसआईआर सबसे बड़ा मुद्दा हो गया है। निर्वाचन आयोग भाजपा आयोग बन गया है। लग रहा है जैसे बंगाल की 294 सीटों पर ज्ञानेश कुमार ही भाजपा के उम्मीदवार हैं। इनके पास पूरे बूथ पर लड़ने के लिए कार्यकर्ता भी नहीं हैं। वहीं संघ के एक पदाधिकारी ने कहा कि राज्य में मुर्शिदाबाद को छोड़कर हर जिले में हिंदू आबादी घट गई है। गुजरात के बाद बंगाल ही ऐसा राज्य है, जहां हिंदू सर्वाधिक 68% भाजपा को वोट देते हैं। इन सबसे दूर, राज्य की राजनीति में छह दशकों पर तक सत्ता में रही कांग्रेस और वामपंथी पार्टियां इस बार अलग-अलग और सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा नेता ने कहा कि राज्य के करीब 85 हजार बूथों में से हमने 65 हजार से अधिक बूथों पर कार्यकर्ताओं की नियुक्ति कर दी है, जो बड़ी उपलब्धि है। वर्ष 2021 के बाद से हमारे 321 कार्यकर्ता मारे गए हैं। भयमुक्त चुनाव हुए तो हमारी जीत तय है। …………………….. यह खबर भी पढ़ें… शाह बोले- ममता भतीजे को सीएम बनाना चाहती हैं: लोगों की परेशानी की परवाह नहीं; ममता बोलीं- सांप पर भरोसा करना, BJP पर नहीं गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के देबरा में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, ममता बनर्जी बंगाल के लोगों की चिंता नहीं करती हैं। उन्हें बस भतीजे अभिषेक बनर्जी को अगला सीएम बनाने में दिलचस्पी है। उधर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने नॉर्थ 24 परगना के टेंटुलिया में चुनावी रैली की। उन्होंने कहा- सांप पर भरोसा किया जा सकता है, लेकिन BJP पर नहीं। पूरी खबर पढ़ें…
लखनऊ में दुबई से आ रहे विमान की इमरजेंसी लैंडिंग:154 यात्री थे, काठमांडू में मौसम खराब होने पर उतारा; डेढ़ घंटे बाद रवाना

लखनऊ एयरपोर्ट पर शनिवार सुबह दुबई से काठमांडू जा रहे विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। काठमांडू में मौसम खराब होने पर वहां लैंडिंग की परमिशन नहीं मिली। उसके बाद पायलट ने लखनऊ एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को कॉल किया और लैंडिंग की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के बाद विमान को सुबह 8:22 बजे अमौसी एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया। फ्लाई दुबई की फ्लाइट (एफजेड-1133) में 154 यात्री सवार थे। तकनीकी टीम ने विमान की जांच की। अब उसमें ईंधन भरा गया। करीब डेढ़ घंटे बाद सुबह 10 विमान को काठमांडू के लिए रवाना कर दिया गया। फ्लाई दुबई की विमान सेवा मध्य पूर्व, यूरोप में भी फ्लाई दुबई के टिकट अन्य कंपनियों की अपेक्षा किफायती माने जाते हैं। 2008 में दुबई सरकार के सहयोग से यह कंपनी शुरू की गई थी। इसका मुख्यालय दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर है। फ्लाई दुबई मध्य पूर्व, एशिया, यूरोप, अफ्रीका के कई शहरों के लिए विमान सेवा चला रही है। भारत के कई शहरों से भी इसकी सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं। 31 मार्च को भी कराई थी इमरजेंसी लैंडिंग लखनऊ में इससे पहले 31 मार्च को एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। फ्लाइट पश्चिम बंगाल के बागडोगरा से दिल्ली जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट यूपी के अंबेडकरनगर के ऊपर थी, तभी पायलट के केबिन में धुआं महसूस हुआ। उस समय फ्लाइट 36 हजार फीट की ऊंचाई पर थी। पायलट ने धुआं महसूस होते ही लखनऊ एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मेडे कॉल किया। मेडे कॉल के बाद यात्रियों को ऑक्सीजन मास्क उपलब्ध करा दिए गए। लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति लेकर फ्लाइट को शाम 5:17 बजे सुरक्षित लैंड कराया। ———————– ये खबर भी पढ़िए- मिर्जापुर में मॉर्निंग वॉक पर वकील की हत्या, VIDEO : 2 हमलावर आए, सीने पर गोली मारी मिर्जापुर में शनिवार सुबह सवा 7 बजे मॉर्निंग वॉक पर निकले सीनियर वकील की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावर बाइक से आए। उन्हें रास्ते में रोका और सीने में तमंचा सटाकर गोली मार दी। खून से लथपथ वकील जमीन पर गिर पड़े। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पूरी वारदात CCTV में रिकॉर्ड हो गई। (पूरी खबर पढ़िए)
‘रणनीति, मतभेद नहीं’: मार्गरेट अल्वा ने कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन में तनाव से इनकार किया | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:11 अप्रैल, 2026, 08:35 IST वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने गठबंधन तनाव, खड़गे की टिप्पणियों और असम के सीएम की पत्नी पर उनकी टिप्पणियों के लिए सहयोगी पवन खेड़ा की ‘प्रताड़ना’ की खबरों पर सफाई दी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा. (एक्स @alva_margaret) वरिष्ठ कांग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा ने तमिलनाडु में कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन के भीतर दरार की बात को खारिज कर दिया है और इसे “रणनीति का मामला बताया है, मतभेद का नहीं”। सीएनएन-न्यूज18 से बात करते हुए, अल्वा ने स्वीकार किया कि सीट-बंटवारे से कांग्रेस के भीतर बेचैनी पैदा हुई है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि यह टूटने का संकेत नहीं है। उन्होंने सीएनएन-न्यूज18 को बताया, “चुनाव के समय हर कोई सीटें चाहता है। कांग्रेस अधिक सीटें चाहती थी, और कई कैडर निराश थे। लेकिन यह मत कहिए कि कोई एकता नहीं है। मुद्दा यह है कि यह रणनीति के बारे में है।” यह निर्दिष्ट करते हुए कि स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता-स्तर के तनाव गठबंधनों में नियमित हैं, उन्होंने कहा कि वे बड़े राजनीतिक उद्देश्य को नहीं बदलते हैं। उन्होंने कहा, “जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की अपनी राजनीति, अपने मतभेद हैं और वे इसके साथ रहते आए हैं। लेकिन जब सरकार बनाने की बात आती है, तो हम एकजुट होते हैं। लक्ष्य स्पष्ट है- द्रमुक को सत्ता में वापस लाना और वह वापस आएगी।” अल्वा ने यह समझाते हुए कि क्यों कांग्रेस और द्रमुक अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग प्रचार करते नजर आ रहे हैं, कहा कि यह कलह का संकेत नहीं बल्कि एक सुविचारित दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा, “सवाल यह है कि अधिकतम सीटें कैसे जीती जाएं। डीएमके के गढ़ों में उनके कार्यकर्ता लड़ाई का नेतृत्व करेंगे। कांग्रेस वहां ध्यान केंद्रित करेगी जहां उसके पास ताकत, क्षमता और संगठन है। हर जगह हस्तक्षेप करने या हर चरण को साझा करने पर जोर देने का कोई मतलब नहीं है।” कांग्रेस और द्रमुक के बीच हाल की संयुक्त रैलियों का जिक्र करते हुए, जिसमें कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी शामिल थे, उन्होंने कहा, “हर कोई मंच पर है, हर कोई गठबंधन का हिस्सा है। लेकिन हर किसी को बोलने की जरूरत नहीं है। यह इस बारे में है कि आप अभियान को अधिकतम करने के लिए समूहों को कैसे जोड़ते हैं।” अल्वा ने इस धारणा का भी खंडन किया कि भाजपा-अन्नाद्रमुक गठबंधन अधिक एकजुट दिखता है। जमीनी स्तर की प्रतिक्रिया के आधार पर, उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में राजनीतिक मूड भाजपा के प्रति तीव्र बना हुआ है। उन्होंने कहा, “बहुत गुस्सा है-भाजपा विरोधी, हिंदी विरोधी, हिंदुत्व विरोधी। तमिलनाडु का लोकाचार लंबे समय से ब्राह्मणवाद विरोधी, उत्तर विरोधी, हिंदी विरोधी रहा है। यह सोचना कि कैडर अचानक भाजपा के एजेंडे को अपना लेंगे, सच नहीं है। वे भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का समर्थन नहीं करेंगे।” अभिनेता-राजनेता विजय और उनके टीवीके की राजनीतिक संभावनाओं पर, अल्वा ने लोकप्रियता और चुनावी सफलता के बीच अंतर बताया। उन्होंने कहा, “वह लोकप्रिय हैं, एक अच्छे प्रचारक हैं, एक फिल्म स्टार हैं जो भीड़ खींचते हैं। लेकिन चुनाव रैलियों से नहीं जीते जाते।” “आपको बूथ-स्तरीय मशीनरी की आवश्यकता है। प्रति बूथ कम से कम 10 कार्यकर्ता जो मतदाता सूची, लामबंदी, बारीकियों को समझते हैं। इसे रातोरात नहीं बनाया जा सकता है। कई लोग तेजी से उठते हैं लेकिन बूथ स्तर पर गिर जाते हैं।” असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर एक टिप्पणी के लिए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के खिलाफ एफआईआर पर एक सवाल पर, अल्वा ने असम पुलिस की कार्रवाई पर तीखा हमला किया और इसे संघीय मानदंडों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा, “किसी राज्य पुलिस के लिए देश भर में ऐसे स्थानों पर घूमना पूरी तरह से अस्वीकार्य है जहां उनका कोई अधिकार नहीं है। आप दूसरे राज्य में किसी के घर में प्रवेश नहीं कर सकते और उन्हें बाहर नहीं खींच सकते।” उन्होंने कहा, “आरोप हैं, उन्हें नकारें, एफआईआर दर्ज करें, अदालत जाएं, गिरफ्तारी वारंट लें। यही कानून का नियम है। आप महज आरोपों पर कार्रवाई नहीं कर सकते।” “मुख्यमंत्री की पत्नी कौन है? क्या वह देवी है? अगर वह इतनी पवित्र है कि आप सवाल भी नहीं पूछ सकते?” अल्वा ने पूछा. उन्होंने विदेशी संपत्तियों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए औपचारिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “रिकॉर्ड के बारे में बात की जा रही है; लंदन, अमेरिका, टैक्स हेवेन, यहां तक कि अर्जेंटीना और कैरेबियन जैसी जगहों पर भी संपत्तियां हैं। अगर ऐसा है, तो एक जांच आयोग गठित करें। अपने दूतावासों का उपयोग करें, सत्यापित करें कि ये संपत्तियां मौजूद हैं या नहीं। फिर कार्रवाई करें।” इसके बजाय, उसने अधिकारियों पर अतिशयोक्ति और ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आप लोगों के घरों में घुसकर इससे बच निकलने की उम्मीद नहीं कर सकते। वह (सरमा) घबरा रहे हैं। वह हार रहे हैं और यह ध्यान भटकाने की कोशिश है।” असम में एक अभियान के दौरान एआईसीसी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे की “सांप” वाली टिप्पणी के विवाद पर, अल्वा ने नफरत फैलाने वाले भाषण के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। “यह नफरत फैलाने वाला भाषण क्यों है? अगर कोई सांप आपके पास से गुजरता है, तो क्या आप उसे नमाज पढ़ रहे लोगों को काटने देंगे? आप पहले सांप को मार देंगे। इसमें गलत क्या है?” उसने पूछा. उन्होंने कहा कि टिप्पणी का जानबूझकर गलत मतलब निकाला जा रहा है। “खड़गे ने किसी को सांप नहीं कहा है। उन्होंने कहा है कि अगर आप नमाज पढ़ रहे हैं तो अगर सांप आ जाए तो स्वाभाविक रूप से आप पहले उसे मार डालेंगे। क्या यह ईशनिंदा है?” उसने कहा। बीजेपी और आरएसएस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “अगर आरएसएस को लगता है कि वे सांप हैं जो जाकर नमाज में खलल डालते हैं, तो यह उनकी दोषी अंतरात्मा है, खड़गे नहीं।” अल्वा ने दलील दी कि चुनाव के दौरान ऐसे विवाद बढ़ जाते हैं. उन्होंने कहा, “चुनावी मौसम में आप किसी भी चीज़ को कुछ भी बना सकते हैं,” उन्होंने कहा, “कोई भी समझदार व्यक्ति – दायां, बायां, केंद्र, भाजपा, आरएसएस – अगर सांप को आते हुए देखेगा तो वह उसी तरह प्रतिक्रिया करेगा”। उन्होंने खड़गे की पिछली “अनपढ़” टिप्पणी पर उनका बचाव किया, जहां उन्होंने दक्षिणी राज्यों और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में
सीधी में खेत-तालाब निर्माण को लेकर विवाद:रात में जेसीबी से खुदाई का आरोप, कलेक्टर से शिकायत

सीधी जिले के ग्राम कोस्टा कोठार में खेत तालाब निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि राजीव पांडे के खेत में तालाब बनाने का काम शुक्रवार देर रात करीब 1 बजे शुरू किया गया। ग्रामीणों ने मनरेगा के तहत मजदूरों से कराए जाने वाले इस कार्य को जेसीबी मशीन से कराने पर सवाल उठाए हैं। शनिवार सुबह ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत सीधे कलेक्टर विकास मिश्रा से की। ग्रामीणों का आरोप है कि खेत तालाब योजना के तहत पहले भी कई बार राशि निकाली जा चुकी है, लेकिन मौके पर कोई काम नहीं हुआ। अब जब मामला सामने आने लगा, तो रोजगार सहायक सत्य प्रकाश पांडे ने आनन-फानन में निर्माण कार्य शुरू करा दिया। गांव के पूर्व सरपंच रमेश कुमार बंसल ने इसे भ्रष्टाचार का मामला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में लगातार अनियमितताएं हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। बंसल ने वर्तमान सरपंच कलावती रावत और रोजगार सहायक की मिलीभगत से यह कार्य कराए जाने का भी आरोप लगाया। ग्रामीणों के अनुसार, जेसीबी से काम कराने का उद्देश्य मजदूरों के नाम पर फर्जी भुगतान दिखाना और सरकारी राशि का गबन करना है। इससे मनरेगा योजना के तहत स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की शासन की मंशा भी प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर, रोजगार सहायक सत्य प्रकाश पांडे ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि कार्य पूरी तरह नियमों के अनुसार किया जा रहा है और कुछ लोग उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। कलेक्टर विकास मिश्रा ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच के तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिका से बातचीत के लिए ईरानी डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंचा:बैठक से पहले लेबनान में सीजफायर की शर्त; अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस भी आज इस्लामाबाद पहुंचेंगे

अमेरिका के साथ प्रस्तावित वार्ता से पहले ईरान का डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंच गया है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ के नेतृत्व में शुक्रवार देर रात यह टीम इस्लामाबाद पहुंची है। इस डेलिगेशन में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदियन, सेंट्रल बैंक गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती, पूर्व IRGC कमांडर मोहम्मद बाकर जोलगदर और संसद के कई सदस्य शामिल हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता और उसके फ्रीज किए गए अरबों डॉलर जारी नहीं किए जाते, तब तक अमेरिका के साथ बातचीत शुरू नहीं होगी। दूसरी तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी डेलिगेशन के साथ आज इस्लामाबाद पहुंचेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच यह अहम बैठक आज इस्लामाबाद में होनी है। इस पर दुनियाभर की नजर बनी हुई है। ईरानी डेलिगेशन के इस्लामाबाद पहुंचने का वीडियो… ट्रम्प बोले- डील नहीं हुई तो फिर हमला करेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर डील नहीं होती, तो अमेरिका फिर हमला करेगा। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों को सबसे बेहतरीन हथियारों से लैस किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं उपराष्ट्रपति वेंस ने बताया है कि ट्रम्प ने बातचीत के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह ईमानदारी से बातचीत करेगा तो अमेरिका तैयार है, लेकिन ‘खेल’ करने की कोशिश पर सख्त जवाब दिया जाएगा।
ग्वालियर में लावारिस शवों को नोच रहे कुत्ते:कब्रों से बाहर खींची लाशें; कहीं हाथ-पैर की हड्डियां तो कहीं खोपड़ियां खुले में बिखरी मिलीं

ग्वालियर में लावारिस शवों के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। नीडम मुक्तिधाम के पीछे करीब 100×100 फीट के क्षेत्र में पिछले तीन दशकों से अज्ञात शवों को दफनाया जाता रहा है। हाल ही में महाराजपुरा क्षेत्र के एक शव की शिनाख्त के लिए कब्र खोदी गई, तो वहां का दृश्य बेहद भयावह मिला। कहीं हाथ-पैर की हड्डियां तो कहीं खोपड़ियां खुले में बिखरी पड़ी थीं। मौके पर आवारा कुत्तों द्वारा कब्रों से शव निकालकर नोचने के प्रमाण भी मिले। उथली कब्रों में दफन होने के कारण शव अक्सर बाहर आ जाते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्वच्छता और दुर्गंध फैलती रहती है। आसपास के रहवासियों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। हर दस कदम पर बिखरी मिलीं हड्डियां दैनिक भास्कर की टीम जब गेट खोलकर अंदर पहुंची तो मिट्टी से एक पैर की हड्डी बाहर निकली दिखाई दी। कुछ दूरी पर मिट्टी से कपड़ा झांकता नजर आया। पास जाकर देखने पर उसमें एक शव दबा मिला। यह शव हाल ही में दफनाया गया था, लेकिन एक दिन पहले हुई बारिश के कारण ऊपर की मिट्टी बह गई थी। इसके बाद अंदर घुसे आवारा कुत्तों ने शव को नोचकर बाहर खींच लिया था। करीब 10 हजार वर्गफीट क्षेत्र में हर कुछ कदम पर मानव हड्डियां बिखरी पड़ी थीं। उथली कब्रों में दफनाए जाते हैं शव ग्वालियर में लावारिस शवों को नीडम मुक्तिधाम के पीछे निर्धारित क्षेत्र में दफनाया जाता है। पहचान की संभावना को ध्यान में रखते हुए शवों को कम गहराई वाले गड्ढों में दफनाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से निकाला जा सके। हालांकि, कब्रों की यही उथली बनावट समय के साथ समस्या बनी रहती है, क्योंकि आवारा जानवर इन्हें आसानी से खोदकर बाहर निकाल देते हैं। कुत्ते खोद रहे कब्रें, फैल रही दुर्गंध नीडम मुक्तिधाम कभी शहर से दूर, सुनसान इलाके में स्थित था, लेकिन अब यह शहरी क्षेत्र के बीच आ चुका है। इसके पीछे बने विशेष स्थान पर लावारिस शवों को दफनाया जाता है। मुक्तिधाम के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यहां अक्सर आवारा कुत्ते मिट्टी खोदकर शवों को बाहर निकाल लेते हैं और उन्हें नोचते हैं। गेट खुला रह जाए तो जानवर आसानी से अंदर पहुंचकर कब्रों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस कारण कई बार शव उथले दिखाई देने लगते हैं और पूरे इलाके में दुर्गंध बनी रहती है। चौकीदार का दावा- कोई जिम्मेदार नहीं, जल्दबाजी में दफनाए जा रहे शव लावारिस शवों के कब्रिस्तान की देखरेख कर रहे नरेश वाल्मीकि ने चौंकाने वाली जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस स्थल के प्रबंधन के लिए कोई अधिकृत कर्मचारी तैनात नहीं है। शव लाने के बाद कर्मचारी अक्सर शराब पीते हैं और फिर जल्दबाजी में उन्हें कम गहराई वाली कब्रों में दफना देते हैं। नरेश का कहना है कि वे पिछले 20 वर्षों से यही स्थिति देख रहे हैं। उन्हें इस काम के लिए कोई भुगतान भी नहीं मिलता। हर माह 10–12 शव दफन, सिर्फ दो फीट गहराई में ऑनलाइन सर्विस एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश बाबू कुशवाहा ने बताया कि उनकी टीम केवल शवों को लाने-ले जाने में पुलिस की सहायता करती है। दफनाने की पूरी प्रक्रिया पुलिस की निगरानी में होती है और इस पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है और मेरे पास कोई स्थायी कर्मचारी नहीं हैं उन्होंने कहा कि हर महीने करीब 10 से 12 लावारिस शव यहां दफनाए जाते हैं। पहचान की संभावना को ध्यान में रखते हुए इन्हें करीब दो फीट या उससे कम गहराई में दफनाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके। हालांकि, इसी कारण आवारा कुत्ते कई बार कब्र खोदकर शवों को बाहर निकाल लेते हैं।








