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15 महीने में 635 मोबाइल बरामद:बैतूल पुलिस ने साइबर ट्रैकिंग से कई राज्यों से की तलाश

15 महीने में 635 मोबाइल बरामद:बैतूल पुलिस ने साइबर ट्रैकिंग से कई राज्यों से की तलाश

बैतूल पुलिस ने पिछले एक साल में गुम हुए 635 मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए हैं। मंगलवार को एक कार्यक्रम में इन मोबाइलों को उनके असली मालिकों को सौंपा गया। पुलिस के अनुसार, यह सफलता साइबर ट्रैकिंग और विभिन्न थानों की संयुक्त टीम के प्रयासों से मिली है। गुम हुए इन मोबाइलों को अलग-अलग राज्यों और जिलों से ट्रेस कर बैतूल लाया गया। बरामद किए गए फोनों में सैमसंग, वीवो, ओप्पो, रेडमी और रियलमी जैसी विभिन्न कंपनियों के स्मार्टफोन शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मार्च 2024 के बीच 100 मोबाइल बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 9 लाख रुपए है। पिछले एक साल में बरामद किए गए कुल 635 मोबाइलों की कीमत लगभग 80 लाख रुपए आंकी गई है। इनमें से 535 से अधिक मोबाइल पहले ही उनके मालिकों को लौटाए जा चुके थे। मोबाइल प्राप्त करने वालों में छात्र, मजदूर, किसान और गृहणियां शामिल हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से लोगों में अपने खोए हुए सामान की वापसी को लेकर विश्वास बढ़ा है। पुलिस ने बताया कि CEIR पोर्टल मोबाइल ट्रैकिंग में काफी सहायक सिद्ध हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, मोबाइल मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। इस पूरे अभियान में साइबर सेल और विभिन्न थानों के पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी लगातार ट्रैकिंग और फॉलोअप के प्रयासों से यह सफलता संभव हो पाई। पुलिस ने जनता से अपील की कि मोबाइल गुम होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत नजदीकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं और CEIR पोर्टल पर शिकायत करें। इससे समय रहते मोबाइल को ट्रैक करने में मदद मिलेगी।

 गर्मी में ये शरबत बनेगा रामबाण, लू से बचाव के साथ पाचन रखेगा दुरुस्त, जानें फायदे

इस हाइब्रिड कार पर मिल रही ₹1.80 लाख की छूट; फैमिली के लिए बेस्ट

Last Updated:April 07, 2026, 16:14 IST आयुर्वेद के जानकर पुरुषार्थी पवन आर्य ने बताया कि गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी होना आम बात है. वहीं नियमित रूप से सौंफ का शरबत पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. दो चम्मच सौंफ को पानी में भिगोकर मिश्री के साथ तैयार किया गया शरबत शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है. जो कि थकान दूर करता है और दिनभर तरोताजा महसूस कराता है गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक और ताजगी देने वाले पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है. आमतौर पर लोग नींबू पानी, शर्बत या ग्लूकोज जैसे पेय का सेवन करते हैं, लेकिन सौंफ का शरबत भी एक बेहतरीन और सेहतमंद विकल्प है. यह न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है. इसकी खुशबूदार महक शरीर को तरोताजा रखती है और गर्मी के दिनों में लू से बचाव में भी मदद करती है. शरीर में बनाए रखता है पानी का संतुलनआयुर्वेद के जानकर पुरुषार्थी पवन आर्य ने बताया कि गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी होना आम बात है. वहीं नियमित रूप से सौंफ का शरबत पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. दो चम्मच सौंफ को पानी में भिगोकर मिश्री के साथ तैयार किया गया शरबत शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है. जो कि थकान दूर करता है और दिनभर तरोताजा महसूस कराता है. इसके सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और लू लगने का खतरा भी कम हो जाता है. पाचन तंत्र को करता है मजबूतआगे कहा कि सौंफ का शरबत पेट के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. जिन लोगों को गैस, अपच या पेट फूलने की समस्या रहती है, उनके लिए यह शरबत काफी फायदेमंद है. इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है और भूख भी बढ़ती है. यह आलसपन दूर कर शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है. ठंडक का देता है प्राकृतिक एहसाससौंफ में कैल्शियम, फाइबर और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करते हैं. रोजाना एक गिलास सौंफ का शरबत पीने से शरीर में ठंडक बनी रहती है. यह हृदय और मस्तिष्क के लिए भी लाभकारी माना जाता है और गर्मी से होने वाली परेशानियों को कम करता है. सौंफ का शरबत बनाने की विधि सौंफ का शरबत बनाना बेहद आसान है. सबसे पहले सौंफ को धोकर लगभग 30 मिनट तक पानी में भिगो दें. इसके बाद एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें भीगी हुई सौंफ, इलायची और केसर डालें. इस मिश्रण को 5 से 10 मिनट तक उबालें और फिर गैस बंद कर ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसे छान लें. अब इसमें स्वादानुसार चीनी और थोड़ा नींबू का रस मिलाएं. तैयार शरबत को गिलास में ठंडा-ठंडा परोसें. गर्मी के मौसम में यह पेय स्वाद के साथ सेहत भी देगा. Location : Palamu,Jharkhand First Published : April 07, 2026, 16:14 IST

तेल संकट का चीन पर असर क्यों नहीं पड़ा:20 साल पहले इमरजेंसी भंडार बनाए, नए तरीकों से बिजली; केमिकल के लिए भी निर्भर नहीं

तेल संकट का चीन पर असर क्यों नहीं पड़ा:20 साल पहले इमरजेंसी भंडार बनाए, नए तरीकों से बिजली; केमिकल के लिए भी निर्भर नहीं

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जहां कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं, वहीं चीन पर इसका असर बाकी दुनिया के मुकाबले कम दिखाई दे रहा है। इसकी वजह यह है कि चीन खुद को कई सालों से ऐसे हालात के लिए तैयारी कर रहा था। चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल खरीदने वाला देश है, इसलिए अगर तेल की सप्लाई में रुकावट आती है तो उसे सबसे ज्यादा नुकसान होना चाहिए था। लेकिन चीन ने पहले से ही बड़ी मात्रा में तेल जमा करके रखा हुआ है। इसके अलावा चीन बिजली से चलने वाले सिस्टम पर शिफ्ट कर चुका है और कोयले से भी जरूरी चीजें बना रहा है। चीन ने धीरे-धीरे अपनी ऊर्जा पॉलिसी को इस तरह बदला कि वह वैश्विक सप्लाई शॉक का सामना कर सके। सरकार ने अहम सेक्टर्स में निवेश बढ़ाया और इंडस्ट्रियल स्ट्रेंथ को राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बनाया। इसके साथ-साथ उसने बिजली बनाने के दूसरे तरीकों पर भी तेजी से काम किया है, जैसे सौर ऊर्जा, हवा से बनने वाली ऊर्जा और पानी से बनने वाली बिजली। इसी कारण अब चीन में पेट्रोल और डीजल की मांग धीरे-धीरे कम होती जा रही है। चीन ने फैक्ट्रियों और प्रोडक्शन को मजबूत बनाया चीन की सरकार लंबे समय से यह मानती है कि मजबूत इंडस्ट्री ही देश की असली ताकत होती है। इसी सोच के तहत उसने अपनी फैक्ट्रियों और उत्पादन क्षमता को इतना मजबूत बना लिया है कि उसे बाहर के देशों पर कम निर्भर रहना पड़े। खास तौर पर उसने उन सेक्टर पर ज्यादा ध्यान दिया, जो उसके लिए रणनीतिक रूप से जरूरी हैं। सरकार सीधे तौर पर दिशा देती रही कि किन क्षेत्रों को मजबूत करना है, ताकि चीन किसी भी पश्चिमी देश के दबाव में न आए। ऊर्जा इस पूरी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा रही है। कुछ साल पहले तक चीन पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों का सबसे बड़ा बाजार था, लेकिन अब वह इलेक्ट्रिक गाड़ियों का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। इसका मतलब यह है कि वहां अब बड़ी संख्या में गाड़ियां तेल की जगह बिजली से चल रही हैं, जिससे तेल पर निर्भरता कम हो रही है। कोयले की मदद से जरूरी केमिकल बनाना सीखा 1990 के दशक में जब चीन कई फैक्ट्रियां बना रहा था, तब उसे केमिकल बनाने के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। ये वही केमिकल होते हैं जिनसे प्लास्टिक, रबर, धातु के हिस्से और कई दूसरी चीजें बनती हैं। लेकिन अब चीन ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जिससे वह कोयले की मदद से ही कई जरूरी केमिकल बना सकता है, जैसे मेथेनॉल और सिंथेटिक अमोनिया। यह तकनीक नई नहीं है, बल्कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने भी इसका इस्तेमाल किया था। अब चीन इसी तरीके से तेल के बिना भी अपनी इंडस्ट्री चला सकता है। आज दुनिया का बड़ा हिस्सा केमिकल सप्लाई के लिए चीन पर निर्भर है। उदाहरण के तौर पर, दुनिया का करीब तीन-चौथाई पॉलिएस्टर और नायलॉन चीन में बनता है। वियनताम-फिलीपींस ने चीन से मदद मांगी हाल ही में वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को जब ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने चीन से मदद मांगी। चीन ने भी कहा कि वह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ मिलकर ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर काम करने को तैयार है। चीन की यह सोच नई नहीं है। साल 2000 के आसपास उसे इस बात की चिंता होने लगी थी कि उसका तेल कुछ खास समुद्री रास्तों पर निर्भर है, जैसे मलक्का स्ट्रेट। अगर वहां कोई समस्या होती है, तो सप्लाई रुक सकती है। इसी वजह से 2004 में चीन ने इमरजेंसी तेल भंडार बनाना शुरू किया और अब वह लगातार इसे बढ़ा रहा है। फिर भी चीन पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। आज भी उसकी करीब 75% तेल जरूरतें आयात से पूरी होती हैं। लेकिन उसने इलेक्ट्रिक गाड़ियों और नवीकरणीय ऊर्जा में इतना निवेश किया है कि पेट्रोल और डीजल की मांग लगातार दो साल से घट रही है। कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चीन में तेल की मांग अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है और आगे कम हो सकती है। चीन ने कोयले का इस्तेमाल बढ़ाया इसके साथ ही चीन ने कोयले का इस्तेमाल फिर से बढ़ा दिया है, खासकर केमिकल बनाने के लिए। 2020 में जहां उसने 155 मिलियन टन कोयला इस काम में इस्तेमाल किया था, वहीं 2024 तक यह बढ़कर 276 मिलियन टन हो गया और 2025 में इसमें और बढ़ोतरी हुई। सरकार कहती है कि यह एक अस्थायी उपाय है, जब तक वह पूरी तरह साफ ऊर्जा पर नहीं पहुंच जाता। लेकिन फिलहाल इससे उसे फायदा मिल रहा है, क्योंकि तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। उदाहरण के तौर पर, खाद बनाने में इस्तेमाल होने वाला यूरिया देखें। इसकी वैश्विक कीमतें 40% से ज्यादा बढ़ गई हैं, लेकिन चीन में कोयले से बनने वाले यूरिया की कीमत वैश्विक दर से आधी से भी कम है। इससे चीन को बड़ा फायदा मिल रहा है। असल में, अमेरिका और चीन के बीच पिछले कुछ सालों से चल रहे तनाव ने भी चीन को आत्मनिर्भर बनने के लिए और तेज कर दिया। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में शुरू हुए व्यापार युद्ध और तकनीकी टकराव ने चीन को यह एहसास कराया कि उसे अपने सप्लाई चेन और संसाधनों पर खुद का नियंत्रण मजबूत करना होगा। इसके बाद चीन ने अपनी इंडस्ट्री और तकनीक को तेजी से आगे बढ़ाया। ———————————————- ये खबर भी पढ़ें… ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका:मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध चीन के लिए‎ खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल चीन ने‎ मिडिल ईस्ट में भारी निवेश किया हुआ है। साथ ‎ही ये क्षेत्र उसके इस्पात, इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर पैनलों के लिए बड़ा बाजार है।‎ ईरान के रूप में चीन को तेल का सस्ता स्रोत‎ मिला था। पूरे क्षेत्र में उसे ऐसी सरकारें भी मिलीं,‎जो नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में चीन से‎ सीखने के लिए उत्सुक थीं। इन्हीं सब के बीच‎ चीन तेल और गैस‎ के लिए मध्य पूर्व की

केसर दूध और नारियल पानी पीने से बच्चा सच में गोरा पैदा होता है! सच है या मिथ?

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saffron milk coconut water fair baby myth vs reality: ‘वंदना ने जैसे ही कंसीव किया उसे हर तरफ से सलाहें मिलने लगीं. कभी बड़ी बहन फोन पर कहती कि नारियल पानी पीना शुरू कर दे और आखिरी तक नहीं छोड़ना, बच्च दूध सा सफेद होगा. कभी जेठानी और ननद सलाह देने लगती कि संतरा और सौंफ खाती रहना बच्चे रंग एकदम सफेद होगा. तो कभी बैंगन की सब्जी या काले रंग का कोई फल जैसे जामुन या आलू-बुखारा खाती तो सासू मां ही टोक देतीं कि ये क्यों खाया काला बच्चा पैदा करोगी क्या? पहले तो वंदना को ये बातें काफी अच्छी लगीं कि चलो सभी बहुत केयर कर रहे हैं, लेकिन फिर उसे अचानक झुंझलाहट होने लगी कि खाने-पीने से कैसे बच्चे का रंग गोरा या काला हो सकता है? हालांकि वह कई बार अपने लाख मन करने के बाद भी कुछ चीजों से परहेज करने लग गई तो कुछ चीजों को जबदस्ती अपनी डाइट में शामिल कर लिया. ये कहानी सिर्फ वंदना की नहीं है, ऐसी लाखों वंदनाएं हैं जो प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसी सलाहों को झेलती हैं या एक बार इससे गुजरने के बाद खुद भी दूसरों को देने लगती हैं.’ लेकिन सवाल उठता है कि क्या वास्तव में नारियल का पानी पीने, संतरा खाने, केसर का दूध पीने, सफेद चीजें खाने से बच्चा गोरा पैदा होता है और काली चीजें खाने से बच्चा काला पैदा होता है? क्या खाने पीने से बच्चे का रंग निर्धारित होता है? ये मिथ है या हकीकत? मेडिकल साइंस क्या कहता है? आइए जानते हैं. आमतौर पर दादी-नानी और महिलाओं की बातों से लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी सलाह भरी पड़ी हैं लेकिन मेडिकल रिसर्च और वैज्ञानिक अध्ययनों की मानें तो रंग की बात पूरी तरह मिथक (myth) है. बच्चे का रंग जीन (genetics) से तय होता है, न कि मां के आहार से. हालांकि कुछ रिसर्च बताती हैं कि अगर मां पोषणयुक्त आहार लेती है या प्रोटीन इंटेक ठीक रहता है तो बच्चे के चेहरे की बनावट पर इसका असर पड़ता है. नेचर कम्यूनिकेशन में प्रकाशित एक स्टडी कहती है कि mTOR सिग्नलिंग पाथवे जानवरों और मनुष्यों में चेहरे की संरचना के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है, जो प्रोटीन और अमीनो एसिड्स के प्रति संवेदनशील होता है. स्टडी कहती है कि ऐसा चूहों और इंसानों में देखा गया है कि गर्भावस्था में प्रोटीन का इंटेक अच्छा रखने से पेट में पल रहे बच्चे के चेहरे का निर्माण काफी बेहतर होता है और उसमें कमियां नहीं रहतीं. बच्चे के बालों पर भी पड़ता है खान-पान का असर अमेरिका में हुई एक अन्य स्टडी दावा करती है कि चूहों पर हुए अध्ययन में देखा गया कि मां द्वारा गर्भ में लिया गया पोषणयुक्त आहार बच्चे के बालों पर भी असर डालता है. इसमें बच्चे के बालों की ग्रोथ से लेकर उसका रंग तक शामिल है. स्टडी कहती है कि जो माएं प्रेग्नेंसी में विटामिन बी12, फॉलिक एसिड, कॉलिन और बीटाइन ठीक मात्रा में लेती हैं तो उनके गर्भ में पल रहे बच्चों के बालों का रंग ज्यादा गहरा और चमकदार हो सकता है. बच्चे के रंग को लेकर क्या है हालांकि अगर बच्चे की त्वचा के रंग की बात करें तो मेलानिन नामक पिगमेंट पर निर्भर करता है, जो माता-पिता दोनों के जीन से आता है. साइंस कहती है कि बच्चे की त्वचा का रंग मां और पिता की त्वचा के रंग का मिला-जुला होता है. गर्भावस्था में कोई भी आहार या पेय बच्चे के जीन को बदल नहीं सकता. अभी तक ऐसा कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो केसर या नारियल पानी को बच्चे के रंग से जोड़ता हो. हालांकि केसर (सैफरन) के बारे में कई मान्यताएं कहती हैं कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो मूड बेहतर कर सकते हैं और पाचन सुधार सकते हैं, इसका सीधा असर बच्चे की ग्रोथ पर पड़ता है और बच्चा स्वस्थ होता है लेकिन त्वचा का रंग जेनेटिक फैक्टर से तय हो ऐसा नहीं है. हेल्थलाइन (2021) की एक रिपोर्ट भी लिखती है कि केसर से बच्चे का रंग गोरा होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. उल्टा, ज्यादा मात्रा में केसर लेने से गर्मी बढ़ने और गर्भपात का खतरा बढ़ा सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह से ही सीमित मात्रा (आमतौर पर 2-3 धागे) लेनी चाहिए. नारियल पानी के हैं ये फायदे नारियल पानी की बात करें तो यह गर्भावस्था में हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट्स के लिए अच्छा है.वहीं संतरा विटामिन सी का अच्छा सोर्स है. एक रिसर्च (PMC, 2024) में पाया गया कि ये दोनों मॉर्निंग सिकनेस कम कर सकते हैं लेकिन बच्चे के रंग पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता. कई डॉक्टरों ने इसे साफ तौर पर मिथक बताया है. किसी भी स्टडी में नारियल पानी को फेयर बेबी से जोड़ने का कोई प्रमाण नहीं मिला है. फिर नारियल पानी, संतरा, केसर दूध क्यों लें? वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्भावस्था में आहार बच्चे के समग्र विकास, वजन, दिमाग और इम्यूनिटी के लिए जरूरी है. विटामिन सी, ई, ओमेगा-3, फोलिक एसिड युक्त संतुलित डाइट (फल, सब्जियां, दालें, ड्राई फ्रूट्स) बच्चे की त्वचा को स्वस्थ बनाती हैं, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपने स्वास्थ्य के लिए और बच्चे के लिए न्यूट्रीशनल फूड के साथ इन चीजों को लिया जा सकता है, लेकिन ध्यान रहे कि इससे गोरे होने का कोई प्रमाण नहीं है. मिथकों के चक्कर में न छोड़ें पोषणयुक्त फूड इसलिए जरूरी है कि ऐसे मिथकों पर भरोसा करके महिलाएं जरूरी पोषण और न्यूट्रीशनल फूड लेना न छोड़ें, ऐसा करने से नुकसान हो सकता है. आप ये सब भी ले सकती हैं लेकिन अपनी पूरी डाइट लेने के साथ. गर्भवती महिला को डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए.

दुनिया की इकलौती एक्सरसाइज, जिसे करने से एक बूंद भी पसीना नहीं आता ! शरीर रहता है कूल-कूल

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Last Updated:April 07, 2026, 15:39 IST Swimming Health Benefits: स्विमिंग एक ऐसी एक्सरसाइज है, जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है. यह शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ हार्ट हेल्थ सुधारती है, मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और जोड़ों पर दबाव कम करती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि स्विमिंग करने से तनाव, एंजायटी और डिप्रेशन को कम करने में मदद मिल सकती है. गर्मी में स्विमिंग करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है. Swimming Benefits in Summer: गर्मी के मौसम में लोग एक्सरसाइज करने से भी बचते हैं. दरअसल एक्सरसाइज करते वक्त पसीना बहुत आता है. कई लोग पसीने से बचने के लिए वर्कआउट ही नहीं करते हैं या गर्मी की वजह से घर से बाहर नहीं निकलते हैं. अगर आप गर्मी में ऐसी एक्सरसाइज करना चाहते हैं, जिसमें आपको गर्मी न लगे, तो स्विमिंग करना शुरू कर दें. स्विमिंग करते वक्त न आपको पसीना आता है और न ही किसी तरह की परेशानी होती है. ठंडे-ठंडे पानी में स्विमिंग करने से गर्मी से राहत मिलती है और शरीर को गजब के फायदे मिलते हैं. भीषण गर्मी से बचने के लिए तैराकी सबसे प्रभावी विकल्प हैं. गर्मियों में स्विमिंग करना बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद माना जाता है. क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए भी तैराकी बेहद फायदेमंद है. स्विमिंग करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पानी का उत्प्लावन बल शरीर का वजन कम कर देता है. इससे जोड़ों पर दबाव नहीं पड़ता और दर्द या चोट का खतरा काफी कम हो जाता है. जो लोग गठिया, घुटनों के दर्द या हड्डियों की कमजोरी से परेशान रहते हैं, उनके लिए तैराकी बहुत सुरक्षित और प्रभावी व्यायाम है. यह एरोबिक व्यायाम के साथ-साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाला व्यायाम है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार स्विमिंग करने से दिल की सेहत बूस्ट हो जाती है. इससे शरीर में ब्लड फ्लो सुधर जाता है और ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है. यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियों वाले लोगों के लिए भी बहुत उपयोगी है. नियमित तैराकी से मांसपेशियों की ताकत, सहनशक्ति, संतुलन और लचीलापन बढ़ता है. गर्मियों में तैराकी का एक और बड़ा लाभ यह है कि यह शरीर का तापमान नियंत्रित रखती है और डिहाइड्रेशन से बचाती है. स्विमिंग करने से मेंटल हेल्थ भी सुधर सकती है. इससे स्ट्रेस, एंजायटी और डिप्रेशन कम होता है, मूड अच्छा रहता है और नींद की गुणवत्ता बढ़ती है. तैरीका के दौरान एंडोर्फिन, डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे अच्छे हार्मोन रिलीज होते हैं, जो खुशी और सुकून का एहसास कराते हैं. कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया कि पानी के आस-पास रहने से कोर्टिसोल यानी तनाव हार्मोन कम होता है और ऑक्सीटोसिन बढ़ता है, जिससे व्यक्ति ज्यादा खुश और स्वस्थ महसूस करता है. अकेलापन और सामाजिक अलगाव आजकल बुजुर्गों में आम समस्या है. ग्रुप एक्टिविटी से यह समस्या कम होती है और मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि नदियों, झीलों या स्विमिंग पूल जैसे ब्लू स्पेस में समय बिताने से शारीरिक गतिविधि बढ़ती है, तनाव घटता है और स्वास्थ्य बेहतर होता है. अगर आपके घर में स्विमिंग पूल है या आसपास इसकी सुविधा है, तो गर्मियों में आप वहां अक्सर जाकर स्विमिंग करें. इससे न सिर्फ आपकी सेहत बेहतर होगी, बल्कि आप तपिश से भी बच सकते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 07, 2026, 15:39 IST

आर्टेमिस-II ने अपोलो-13 का गलती से बना रिकॉर्ड तोड़ा:चांद पर जाते समय ऑक्सीजन टैंक फट गया था, मुश्किल से बची थी एस्ट्रोनॉट्स की जान

आर्टेमिस-II ने अपोलो-13 का गलती से बना रिकॉर्ड तोड़ा:चांद पर जाते समय ऑक्सीजन टैंक फट गया था, मुश्किल से बची थी एस्ट्रोनॉट्स की जान

11 अप्रैल 1970 चांद पर उतरने के मकसद से अमेरिका ने अपोलो-13 मिशन लॉन्च किया। तीन एस्ट्रोनॉट चांद कि तरफ तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि तीनों एस्ट्रोनॉट को बचाने के लिए ग्राउंड कंट्रोल टीम बेहद जटिल रेस्क्यू मिशन चलाना पड़ा। यान पृथ्वी से 400171 किमी दूर पहुंच गया जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड था। कल 6 अप्रैल को रात 11:26 बजे आर्टेमिस II मिशन के 4 एस्ट्रोनॉट्स ने इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इस स्टोरी में अपोलो-13 मिशन की पूरी कहानी। आखिर कैसे एक रेस्क्यू मिशन से वर्ल्ड रिकॉर्ड बना… अपोलो-13 की कहानी को समझने के लिए एक बार इस जानकारी से गुजर जाएं… अपोलो 13 स्पेसक्राफ्ट मुख्य रूप से तीन मॉड्यूल्स से मिलकर बना था: अचानक ऑक्सीजन टैंक नंबर 2 फट गया 13 अप्रैल 1970 अपोलो 13 मिशन को लॉन्च हुए 56 घंटे बीत चुके थे। कमांडर जेम्स ए. लवेल जूनियर, लूनर मॉड्यूल पायलट फ्रेड डब्ल्यू और कमांड मॉड्यूल पायलट जॉन एल. स्विगर्ट इसमें सवार थे। स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से 3.20 लाख कमी दूर पहुंच चुका था। क्रू इस यान के लैंडिंग मॉड्यूल ‘एक्वेरियस’ की जांच कर रहे थे। अगले दिन अपालो 13 को चांद की कक्षा में प्रवेश करना था। लवेल और हाइस चांद पर चलने वाले पांचवें और छठे इंसान बनने वाले थे। तभी अचानक सर्विस मॉड्यूल का ऑक्सीजन टैंक 2 फट गया। क्रू को लूनर मॉड्यूल में जाने का निर्देश मिला ऑक्सीजन, बिजली और पानी की सप्लाई बंद हो गई। लवेल ने मिशन कंट्रोल को रिपोर्ट किया। उन्होंने कहा- “ह्यूस्टन यहां एक समस्या हो गई है। कमांड मॉड्यूल से ऑक्सीजन लीक हो रही थी और फ्यूल सेल्स तेजी से खत्म हो रहे थे। चांद पर उतरने का मिशन रद्द हो गया। धमाके के एक घंटे बाद, मिशन कंट्रोल ने क्रू को लूनर मॉड्यूल में जाने का निर्देश दिया। इसमें काम चलाने लायक ऑक्सीजन थी। इस मॉड्यूल को केवल अंतरिक्ष यात्रियों को कक्षा में घूम रहे कमांड मॉड्यूल से चांद की सतह तक ले जाने और वापस लाने के लिए बनाया गया था। पानी का कोटा घटाकर पांचवां हिस्सा कर दिया इसकी पावर सप्लाई सिर्फ दो लोगों के लिए 45 घंटे तक चलने लायक थी। अगर अपालो 13 के क्रू को जिंदा धरती पर लौटना था, तो इस लेंडिंग मॉड्यूल को तीन लोगों का बोझ कम से कम 90 घंटे तक उठाना था। अंतरिक्ष में 3 लाख किमी से ज्यादा का रास्ता पार करना था। ऊर्जा बचाने के लिए क्रू ने पानी का कोटा घटाकर पांचवां हिस्सा कर दिया। केबिन का तापमान जमा देने वाली ठंड से बस कुछ ही डिग्री ऊपर रखा। कमांड मॉड्यूल के चौकोर लिथियम हाइड्रोक्साइड कैनिस्टर, लूनर मॉड्यूल के सिस्टम के गोल छेद में फिट नहीं बैठ रहे थे। इसका मतलब था कि कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालना एक बड़ी समस्या थी। मिशन कंट्रोल ने यान में मौजूद चीजों की मदद से एक जुगाड़ू अडैप्टर तैयार किया। अपोलो के क्रू ने उनके मॉडल को कॉपी कर लिया। इसमें लगा नेविगेशन सिस्टम भी बहुत ही साधारण था। 15 अप्रैल को अपोलो 13 ने पृथ्वी से दूरी का रिकॉर्ड बनाया 14 अप्रैल को अपालो 13 ने चांद का चक्कर लगाया। स्विगर्ट और हाइस ने तस्वीरें लीं और लवेल ने सबसे कठिन मैनुअर के बारे में मिशन कंट्रोल से बात की। यह पांच मिनट का इंजन बर्न था, जिससे LM को इतनी रफ्तार मिल सके कि वह ऊर्जा खत्म होने से पहले घर लौट आए। चांद के पिछले हिस्से का चक्कर लगाने के दो घंटे बाद, क्रू ने लैंडिंग मॉड्यूल के छोटे डिसेंट इंजन को चालू किया। अपालो 13 घर वापसी की राह पर था। 15 अप्रैल 1970 को अपालो 13 चांद के पिछले हिस्से में उसकी सतह से 254 किमी और पृथ्वी की सतह से 4,00,171 किमी दूर था। मिशन कंट्रोल को यान की हीट शील्ड खराब होने का डर था 17 अप्रैल को कमांड मॉड्यूल चालू किया गया। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से एक घंटे पहले लैंडिंग मॉड्यूल को कमांड मॉड्यूल से अलग किया गया। दोपहर करीब 1 बजे यान ने पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश किया। मिशन कंट्रोल को यान की हीट शील्ड खराब होने का डर था। उन्होंने क्रू से बिना किसी रेडियो संपर्क के चार मिनट इंतजार किया। फिर, अपालो 13 के पैराशूट दिखाई दिए। तीनों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में उतर गए। इस तरह गलती से इस मिशन में वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बना और तीनों अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर भी लौट आएं। ये खबर भी पढ़ें… अपोलो-13 का 56 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा:पृथ्वी से 4 लाख किमी से ज्यादा दूर पहुंचे 4 एस्ट्रोनॉट्स; अब चांद की ग्रेविटी की मदद से वापस आएंगे पूरी खबर पढ़े…

अवॉर्ड शो में राजपाल का अपमान; सपोर्ट में आए सलमान:कहा- दिल से काम करो, डॉलर ऊपर हो या नीचे, क्या फर्क पड़ता है

अवॉर्ड शो में राजपाल का अपमान; सपोर्ट में आए सलमान:कहा- दिल से काम करो, डॉलर ऊपर हो या नीचे, क्या फर्क पड़ता है

मुंबई में हुए एक अवॉर्ड फंक्शन के दौरान एक्टर राजपाल यादव पर कसे गए तंज के बाद अब सुपरस्टार सलमान खान उनके समर्थन में उतर आए हैं। सलमान ने सोशल मीडिया के जरिए राजपाल यादव को भरोसा दिलाया कि उनके टैलेंट और अनुभव की वजह से इंडस्ट्री में उन्हें हमेशा काम मिलता रहेगा। सलमान का यह बयान उस वीडियो के वायरल होने के बाद आया है, जिसमें एक जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी राजपाल यादव के कर्ज और डॉलर के रेट को लेकर मजाक उड़ाते नजर आ रहे हैं। अवॉर्ड शो में राजपाल पर कसा गया था तंज हाल ही में मुंबई में एक अवॉर्ड इवेंट आयोजित किया गया था। इस दौरान जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी ने राजपाल यादव के कर्ज के मामले पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि डॉलर का रेट चाहे बढ़े या घटे, आपको उतने ही पैसे लौटाने हैं जितने आपने उधार लिए थे। इस कमेंट पर वहां मौजूद कई लोग हंसते हुए नजर आए, जबकि राजपाल यादव स्टेज पर काफी असहज दिखे। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के आने के बाद लोगों ने इसे ‘बुली’ करना बताया था। सलमान ने X पर लिखा- आप एक वैल्यू लाते हो सलमान खान ने राजपाल यादव का बचाव करते हुए X (ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा की। सलमान ने लिखा, “राजपाल भाई, आप 30 साल से काम कर रहे हो और हम सबने आपको बार-बार रिपीट किया है क्योंकि आप अपना काम जानते हो और एक वैल्यू लाते हो। हकीकत यह है कि काम तो आपको बहुत मिलेगा और इसी डॉलर रेट पर मिलता रहेगा।” ‘डॉलर ऊपर हो या नीचे, पैसा तो इंडिया में ही रहना है’ सलमान खान ने डॉलर और रुपए के उतार-चढ़ाव वाले मजाक पर भी अपनी राय दी। उन्होंने लिखा, “ये याद रखना कि कभी-कभी फ्लो में कुछ बातें निकल आती हैं। अगर कुछ देना ही है तो दिमाग में रखो और दिल से काम करो। डॉलर ऊपर हो या नीचे, क्या फर्क पड़ता है, पैसा तो इंडिया में ही देना है।” कर्ज और कानूनी विवादों में घिरे हैं राजपाल राजपाल यादव पिछले काफी समय से कानूनी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन पर एक पुरानी फिल्म के निर्माण के लिए लिए गए कर्ज को न चुकाने का आरोप है। चेक बाउंस से जुड़े मामले में उन्हें हाल ही में जेल भी जाना पड़ा। इसी बैकग्राउंड को लेकर अवॉर्ड शो में उन पर तंज कसा गया था। हालांकि, राजपाल ने अब तक इस विवाद पर खुद कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पवन परमिट नहीं मिले, घर से क्या जब्त कर ली गई असम पुलिस? अनबन ने ही कहा- ‘जहां से भी ढूंढेंगे’

पवन परमिट नहीं मिले, घर से क्या जब्त कर ली गई असम पुलिस? अनबन ने ही कहा- 'जहां से भी ढूंढेंगे'

असम में विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष का हंगामा शुरू हो गया है. नेता पवन शुक्ला ने असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के तीन पासपोर्ट होने के आरोप कांग्रेस पर लगाए, जिसके बाद असम पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. असम पुलिस दिल्ली पवन परमिट के घर पर स्थित है। हालाँकि मौजूदा कांग्रेस प्रवक्ता नहीं मिले, जिसके बाद वो कुछ सामान अपने साथ ले गए हैं। असम पुलिस ने चेतावनी देते हुए कहा कि हम उन्हें कहीं से भी ढूंढेंगे। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, ‘वह कलयुग से भाग गए थे. मुझे मीडिया के माध्यम से पता चला कि पुलिस उनका दिल्ली स्थित आवास था, लेकिन वह हैदराबाद भाग गए थे। ‘कानून अपना काम करेगा।’ पवन नामांकन के घर पर रेड को लेकर भड़की कांग्रेस असम पुलिस की पवन एसोसिएट के घर पर सामान लेकर कांग्रेस का रुख सामने आया है। कैथोलिक कांग्रेस के राकेश ने कहा कि मेरे सहयोगी पवन को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी के अधिकारियों ने यह साबित कर दिया है कि असम के मुख्यमंत्री, अख्तर और डरे हुए हैं। जनहित में बुनियादी सवाल पूछने पर मेरे सहयोगी पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अधिकारियों की पूरी सेना की तैनाती यह साबित करती है कि असम के मुख्यमंत्री परेशान, हताश और परेशान हैं। यह उचित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक जादू-टोना है, राज्य मशीनरी का उपयोग करने वाला एक बदमाश है… -जयराम रमेश (@जयराम_रमेश) 7 अप्रैल 2026 उन्होंने कहा कि यह कोई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक तरह की कार्रवाई है, एक दबंग जो राज्य सिद्धांतों का इस्तेमाल करके दावों को दबा रही है, जो उसके कई काले कारनामों को उजागर कर रही है। जो लोग डराते-धमकाते हैं, वे असल में डरे हुए होते हैं और उनके पास सूर्योदय के लिए बहुत कुछ होता है। इस बात का भी प्रमाण है कि मुख्यमंत्री को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। पवन कार्मिक ने लगाए ये आरोप प्रवक्ता पवन एसोसिएट ने 5 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूछा था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन अलग-अलग पासपोर्ट कैसे हैं? आपके पास तीन पासपोर्ट रखने की क्या आवश्यकता है? क्या वे कोई अपराधी हैं? हिमंता बिस्वा सरमा के पास भी मौजूद हैं सबसे बड़े पासपोर्ट? असम चुनाव के बाद हरियाणा में किस तरह की तैयारी की जा रही है? उन्होंने कहा, ‘हिमंता बिस्वा सरमा की पूरी राजनीतिक छवि के खिलाफ नफरत पर आधारित है, लेकिन उनकी पत्नी दो मुस्लिम देशों के पासपोर्ट लिखी हैं, कैसे? भारत के कानून के खाते से आप द्विपक्षीय नागरिकता नहीं रख सकते हैं तो क्या रिंकी बी लाइसेंस सरमा भारत का पासपोर्ट भी लिख सकते हैं? किस देश के रहस्य अमित शाह को ये जानकारी थी कि उनके दत्तक पुत्र की पत्नी के 3 पासपोर्ट हैं? ‘अध्यक्ष अमित शाह का जवाब- क्या वो एसआईटी सहायक इस मामले की जांच करेगी?’ (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)पवन खेड़ा(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)कांग्रेस(टी)असम पुलिस(टी)असम पुलिस पवन खेड़ा हाउस रेड(टी)जयराम रमेश(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)पवन कार्यकर्ता(टी)असम पुलिस(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम चुनाव(टी)असम विधानसभा चुनाव

असम चुनाव 2026: घुसपैठियों की हो रही है पहचान, चुना-चुनकर देश से बाहर निकलेंगे- अमित शाह

असम चुनाव 2026: घुसपैठियों की हो रही है पहचान, चुना-चुनकर देश से बाहर निकलेंगे- अमित शाह

असम चुनाव 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को असम के श्रीलंकाई जिलों के पथारकांडी में एक विशाल रैली में कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सिर्फ बीजेपी ही राज्य को घुसपैठियों से बचा सकती है और उसकी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रख सकती है. अमित शाह ने कहा, “भाजपा की सरकार बनी है। अब बारी है एक-एक करके चुनी-चुन कर बाहर करने की। केवल भाजपा ही है जिसका नाम करीमगंज है, जिसे श्रीलंका कहा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस है जो प्रदर्शनकारियों के खाते में सत्ता हासिल करना चाहती है। मैं आज यहां से निकला हूं, हम गांधीजी कानाफूसी करते हैं, प्लास्टिक में डूबे हुए हैं। असमिया और शास्त्रीय भाषा को शास्त्रीय भाषा का सिद्धांत का काम किया गया है।” कांग्रेस ने कहा, “हम निजीकरण की बात करते हैं तो कांग्रेस विरोध करती है। कांग्रेस पार्टी के षड्यंत्र के साथ क्षेत्र ने अतिक्रमणिया बहुल क्षेत्र बनाने का प्रयास किया। वोट बैंक की राजनीति कर उन्होंने 1950 के आप्रवासी अधिनियम को समाप्त कर दिया। गोपीनाथ यह अधिनियम लेकर आए थे। कांग्रेस ने 1983 में आईटी अधिनियम पास करियनों को मैसाचुसेट्स शरण का काम सौंपा। मैसाचुसेट्स, बंगाल और इस प्रतिष्ठित सरकार के साथ मिलकर उन्होंने 1950 के आप्रवासी अधिनियम को समाप्त कर दिया। ये घुसपैठिये हमारे युवाओं के रोजगार, गरीबों के राशन और चाय बागानों के अपहरण का प्रयास कर रहे हैं। शाह ने कहा, ”जब से राहुल गांधी कांग्रेस के नेता बने हैं, सभी कांग्रेस नेताओं का सार्वजनिक स्तर नीचे हो गया है. किम मंच पर हजारों की संख्या में भाजपा और आरएसएस के लोग हैं। यह लोकतंत्र की भाषा नहीं है।” (टैग्सटूट्रांसलेट)अमित शाह(टी)गृह मंत्री(टी)श्रीभूमि(टी)असम पाथरकांडी(टी)कांग्रेस पार्टी करीमगंज(टी)केंडिया गृह मंत्री(टी)चुनावी रैली(टी)अमित शाह(टी)गृह मंत्री(टी)कांग्रेस(टी)अमित शाह(टी)गृह मंत्री(टी)श्रीभूमि(टी)असम पत्थरकांडी(टी)कांग्रेस(टी)रिमगंज(टी)चुनावी रैली(टी)राहुल गांधी(टी)असम चुनाव(टी)असम चुनाव

दिव्यांग को 14 साल से नहीं मिला मुआवजा:6.34 लाख का भुगतान अटका, कलेक्टर ने दिए निर्देश

दिव्यांग को 14 साल से नहीं मिला मुआवजा:6.34 लाख का भुगतान अटका, कलेक्टर ने दिए निर्देश

सिंगरौली जिले के बलियरी निवासी दिव्यांग मोहम्मद शोएब को पिछले 14 वर्षों से मुआवजे का भुगतान नहीं मिला है। एनटीपीसी द्वारा उनकी जमीन और घर के अधिग्रहण के बाद भी उन्हें 6 लाख 34 हजार रुपये की राशि नहीं मिली है। मोहम्मद शोएब जन्म से दिव्यांग हैं, उनके दोनों हाथ अविकसित हैं। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उन पर आ गई है। शोएब के अनुसार, वह वर्ष 2011 से लगातार अधिकारियों को आवेदन दे रहे हैं, लेकिन हर बार प्रक्रिया अधूरी बताकर उन्हें टाल दिया जाता है। मंगलवार को जनसुनवाई में मोहम्मद शोएब अपनी समस्या लेकर कलेक्टर गौरव बेनल के समक्ष पहुंचे। उन्होंने मुआवजे में हो रही देरी का पूरा विवरण दिया। कलेक्टर बेनल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भू-अर्जन शाखा के अधिकारियों को तत्काल जांच कर लंबित मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। यह मामला केवल मोहम्मद शोएब तक सीमित नहीं है। सिंगरौली जिले में ऐसे कई विस्थापित परिवार हैं जो वर्षों से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं और मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।