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आयुर्वेद का अनमोल खजाना है गुम्मा: पीलिया को जड़ से करता है खत्म, लिवर की बीमारियां रहती हैं कोसों दूर, जानें चमत्कारी फायदे

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Last Updated:April 07, 2026, 06:37 IST Health Tips: सीतामढ़ी के मशहरू आयुर्वेद एक्सपर्ट भाग्यनारायण सिंह ने गुम्मा द्रोणपुष्पी को पीलिया लिवर और पेट के कीड़ों की सस्ती असरदार औषधि बताया. उन्होंने कहा कि अब यह पौधा खेतों से दुर्लभ होता जा रहा है. इसके चमत्कारी फायदे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. ख़बरें फटाफट सीतामढ़ी: आयुर्वेद जगत में कई ऐसी औषधियां हैं. जो हमारे आस-पास ही मौजूद हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम उनसे वंचित रह जाते हैं. इन्हीं में से एक है गुम्मा (द्रोणपुष्पी), जिसे आयुर्वेद में लिवर और पेट संबंधी विकारों के लिए अमृत माना गया है. सीतामढ़ी के आयुर्वेद एक्सपर्ट भाग्यनारायण सिंह बताते हैं कि गुम्मा एक अत्यंत प्रभावशाली औषधीय पौधा है, जो कभी खेतों की मेड़ों पर बहुतायत में पाया जाता था. हालांकि यह चिंता का विषय है कि आधुनिक खेती के तरीकों और रसायनों (कीटनाशकों) के बढ़ते प्रयोग के कारण यह दुर्लभ होता जा रहा है. खेतों से इस कीमती पौधे का विलुप्त होना प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के लिए एक बड़ी क्षति है. पीलिया रोगियों के लिए है रामबाण एक्सपर्ट भाग्यनारायण सिंह के अनुसार पीलिया (Jaundice) के उपचार में गुम्मा का कोई सानी नहीं है. पीलिया होने पर लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर में पित्त की मात्रा बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में गुम्मा की पत्तियों का ताजा रस किसी वरदान से कम नहीं है. इसका नियमित और सही मात्रा में सेवन करने से लिवर की कोशिकाएं पुनर्जीवित होने लगती हैं और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं. यह न केवल पीलिया को जड़ से खत्म करने में सक्षम है. बल्कि लिवर को नई शक्ति भी प्रदान करता है, जिससे पाचन तंत्र फिर से सुचारू रूप से कार्य करने लगता है. पेट के कीड़ों का अचूक और प्राकृतिक उपचार बच्चों और वयस्कों में पेट के कीड़ों की समस्या एक आम बात है, जो कुपोषण और थकान का कारण बनती है. भाग्यनारायण सिंह बताते हैं कि बाजार में उपलब्ध रसायन युक्त दवाओं के मुकाबले गुम्मा एक सुरक्षित और अचूक उपचार है. इसकी पत्तियों के रस में ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं. जो पेट के हानिकारक कीड़ों को पूरी तरह समाप्त कर देते हैं. इसके कड़वे और तीखे गुणों के कारण यह पेट की कृमि (Worms) का नाश करता है और आंतों की सफाई कर भूख को बढ़ाता है. यह एक ऐसा घरेलू नुस्खा है जिसे सदियों से ग्रामीण भारत में आजमाया जाता रहा है. संरक्षण और उपयोग की आवश्यकता आज के दौर में जब लोग वापस प्राकृतिक जीवनशैली की ओर लौट रहे हैं. तब गुम्मा जैसे पौधों का संरक्षण बेहद अनिवार्य है. भाग्यनारायण सिंह का कहना है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तभी सार्थक है. जब हम अपने पारंपरिक ज्ञान को सहेजें. गुम्मा न केवल औषधीय गुणों से भरपूर है. बल्कि यह कम लागत में असाध्य रोगों के इलाज का सामर्थ्य रखता है. यदि हम अपने खेतों और बगीचों में रसायनों का प्रयोग कम करें तो इस अमूल्य औषधि को फिर से पुनर्जीवित किया जा सकता है. अपनी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए प्रकृति के इन अनमोल उपहारों को पहचानना और अपनाना आज समय की मांग है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें Location : Sitamarhi,Bihar First Published : April 07, 2026, 06:37 IST

नीमच शहर में कल 4 घंटे लाइट बंद:सुबह 7 से 11 बजे तक चलेगा मेंटनेंस कार्य, कई इलाके प्रभावित

नीमच शहर में कल 4 घंटे लाइट बंद:सुबह 7 से 11 बजे तक चलेगा मेंटनेंस कार्य, कई इलाके प्रभावित

नीमच के महू रोड इलाके में मंगलवार को बिजली गुल रहेगी। 11 केवी महू रोड फीडर पर जरूरी मेंटेनेंस का काम होना है, जिसकी वजह से सुबह 7 बजे से 11 बजे तक, यानी कुल चार घंटे बिजली सप्लाई बंद रहेगी। बिजली कंपनी के सहायक यंत्री (शहर) ने बताया कि यह काम मंगलवार, 7 अप्रैल को किया जाएगा। कंपनी ने लोगों से अपील की है कि वे अपने जरूरी काम सुबह 7 बजे से पहले निपटा लें या फिर कटौती के बाद के समय के हिसाब से प्लानिंग करें। इन इलाकों पर पड़ेगा असर फीडर बंद होने से महू रोड के आसपास की कई बड़ी कॉलोनियों में अंधेरा रहेगा। इनमें मुख्य रूप से ये इलाके शामिल हैं, पटवा कॉलोनी, उदय विहार और स्टार सिटी, आदित्य स्टेट, वृन्दावन कॉलोनी और प्रगति नगर, महावीर नगर, हवाई अड्डा रोड, कालानी कॉलोनी और वैभव नगर। बिजली कंपनी ने यह भी साफ किया है कि अगर काम जल्दी हो गया तो बिजली समय से पहले आ सकती है, और अगर काम में देरी हुई तो शटडाउन का समय थोड़ा बढ़ाया भी जा सकता है।

बिलबोर्ड पर छाए हरियाणवी सिंगर भाइयों की कहानी:बैरण सॉन्ग में एनिमेटेड लव स्टोरी दिखाई; कोरोना में गाना शुरू किया, अब मुंबई से भी ऑफर

बिलबोर्ड पर छाए हरियाणवी सिंगर भाइयों की कहानी:बैरण सॉन्ग में एनिमेटेड लव स्टोरी दिखाई; कोरोना में गाना शुरू किया, अब मुंबई से भी ऑफर

हरियाणा में भिवानी जिले का गांव संडवा। इस गांव के रहने वाले दो चचेरे भाई सुमित और अनुज पूरे भारत में छाए हुए हैं। वजह- इनका नया हरियाणवी गाना बैरण। इस गाने में अनुज ने अपनी आवाज दी है, जबकि सुमित ने म्यूजिक कंपोज किया। सुमित भी म्यूजिक कंपोज करने के साथ-साथ सिंगिंग करते हैं। बैरण गाने को यूट्यूब पर अभी तक 67 मिलियन लोग देख चुके हैं। खास बात यह है कि यह गाना बिलबोर्ड इंडिया की लिस्ट में तीन हफ्तों से टॉप पर है। वीडियो में एनिमेटेड लव स्टोरी दिखाई गई है। गाने के बोल हैं- “हो, मन्नै सांभ-सांभ राखे तेरे झांझरा के जोड़े। मेरी गेल रो-रो ये भी छोरी बावले से होरे। मन्नै आए जावै ख्याल तेरे, खाए जावै ख्याल तेरे। जीण कोन्या देती, हाय बैरी तन्हाई मन्नै।” अनुज और सुमित बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही गाना गाने का शौक है। 2019 में जब कोरोना लॉकडाउन लगा तो सिंगिंग में करियर बनाने की ठानी। अपना खुद का यूट्यूब चैनल बनाया। उन्होंने अभी तक 6 गाने रिलीज किए हैं। पहले पांच गाने हिट नहीं हुए। छठे गाने बैरण ने उन्हें बुलंदियों पर पहुंचा दिया। बिलबोर्ड पर गाना रैंक करने के बाद उन्हें मुंबई से कई बड़ी म्यूजिक कंपनियों से ऑफर आए। हालांकि उन्होंने अभी किसी को हां नहीं की। हरियाणा में मासूम शर्मा, केडी से लेकर पंजाबी सिंगर दिलप्रीत ढिल्लों ने भी उन्हें साथ काम करने का ऑफर दिया। पहले सुमित और अनुज के बारे में जानिए…. सुमित के पिता PTI, भाई असिस्टेंट प्रोफेसर सुमित का जन्म 20 अप्रैल 1998 में हुआ। उनके पिता सत्यवान PTI टीचर हैं। उन्होंने अंबाला पॉलिटेक्निक से मैकेनिक ट्रेड में कोर्स किया। उसके बाद हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में बीटेक पास की। सुमित भी गाना गाने के साथ म्यूजिक कंपोज करते हैं। उनका छोटा भाई असिस्टेंट प्रोफसर है। अनुज के पिता JBT टीचर अनुज का जन्म 30 अगस्त 2002 को हुआ। इनके पिता राजेंद्र सिंह JBT टीचर हैं। अनुज की एक बड़ी बहन भी है। उन्होंने JRF क्वालीफाई किया हुआ है। अनुज जब तीसरी क्लास में थे तो उन्होंने स्टेज पर ‘यशोमती मैया से बोले नंदलाला’ भजन गया था। इसके बाद स्कूल टाइम में वह अलग-अलग प्रोग्रामों में हिस्सा लेने लगे। अनुज ने आठवीं क्लास में म्यूजिक में करियर बनाने की ठान ली। सरकारी नौकरी की कोशिश की अनुज बताते हैं कि उन्हें सिंगर बनना था। तब परिवार ने कहा कि पढ़ाई बेहद जरूरी है। इसलिए वे उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में MA की। इसके बाद नेट का एग्जाम भी क्रैक किया। सरकारी नौकरी की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद म्यूजिक में ही अपना करियर बनाने की अब जानिए कैसे शुरू हुई सिंगर बनने की कहानी…. कोविड में गाने की शुरुआत, हारमोनियम खरीदा अनुज ने बताया कि 2019 में कोविड आने के दौरान गाने की सही शुरुआत हुई। सुमित और मैंने मिलकर हारमोनियम और कंप्यूटर खरीदा। हालांकि, दोनों को हारमोनियम चलाना नहीं आता था। धीरे-धीरे यूट्यूब से सीखने की कोशिश की, लेकिन प्रॉपर तरीके से नहीं सीख पाए। पहले गाने के 40 हजार दिए, पसंद नहीं आया सुमित ने बताया कि उन्होंने 2019 में एक गाना लिखा था। वे अपने पहले गाने को कंपोज कराना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपने परिवार से 40 हजार रुपए मांगे। उन्होंने हिसार में एक म्यूजिक प्रोड्यूसर से गाना तैयार करवाया, लेकिन उन्हें म्यूजिक पसंद नहीं आया। वे चाहते थे कि उनके लिरिक्स हर दिल तक पहुंचें। वे अपनी भावना को म्यूजिक प्रोड्यूसर तक ठीक से नहीं पहुंचा पाए, जिसकी वजह से मिसकम्युनिकेशन हुआ और गाना बेहतरीन नहीं बन पाया। इसके बाद 5 और गाने रिलीज किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। 28 नवंबर 2024 को पहला गाना रिलीज किया सुमित ने बताया कि 2024 में उन्होंने यूट्यूब पर बंजारा के नाम से चैनल बनाया। इसी ऑफिशल चैनल से अपने गाने रिलीज करने शुरू कर दिए। 28 नवंबर 2024 में ‘सूट्स विद मी’ पहला गाना रिलीज किया। उसके बाद उन्होंने दूसरा गाना ‘डिफरेंट टॉक’, आशिक आवारा, मौज, हाय रै और छठ गाना बैरण रिलीज किया। बैरण गाना लिखने से लेकर एनिमेटेड वीडियो रिलीज करने में डेढ़ साल का समय लगा। उन्होंने बार-बार इसके लिरिक्स बदले। चंडीगढ़ में शूटिंग हुई, लेकिन पसंद नहीं आई अनुज ने बताया कि गाने का वीडियो चंडीगढ़ में शूट किया था, लेकिन पसंद नहीं आया और रिजेक्ट कर दिया। 23 जनवरी 2026 को ऑडियो सॉन्ग रिलीज किया। लोग इस गाने को पसंद करने लगे। उन्होंने सोचा कि इसके वीडियो में कुछ ऐसा करना है, जिसे लोग फील कर पाएं। इसलिए एनिमेटेड वीडियो लगाने का प्लान आया। 13 फरवरी 2026 को एनिमेटेड वीडियो रिलीज किया। 50 हजार में हुआ था गाना तैयार सुमित ने बताया कि अभी तक रिलीज सभी छह गानों में एक स्टोरी दिखाई गई है। उनका म्यूजिक एक सफर दिखाता है। बंजारा जाति में भी यह चीज कॉमन होती है और हमारी म्यूजिक में भी यह बात बड़ा थी, इसीलिए चैनल का नाम बंजारा रखा। 17 मार्च 2026 को बैरण गाना बिलबोर्ड इंडिया की टॉप रैंकिंग में आया। बैरन गाने का म्यूजिक पंचकूला में रोनी ने तैयार किया। 50 हजार में पूरा गाना तैयार हुआ। पहले पांच गाने नहीं चले, लेकिन छठे गाने ने दोनों भाइयों को बुलंदियों तक पहुंचा दिया। पंजाब और बॉलीवुड से भी ऑफर आए अनुज ने बताया कि बिलबोर्ड इंडिया की नंबर वन रैंकिंग में आने के बाद हरियाणा, पंजाब और बॉलीवुड से उन्हें लगातार ऑफर आ रहे हैं। उनकी मुंबई में एक बड़ी कंपनी के साथ भी बातचीत हुई, लेकिन वहां पर ठीक नहीं लगा और इसलिए काम नहीं किया। हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा, केडी, अमित सैनी रोहतकिया की तरफ से भी साथ काम करने के लिए ऑफर आए। पंजाब से दिलप्रीत ढिल्लों की तरफ से भी ऑफर मिला। हरियाणा और पंजाब की इंडस्ट्री से काफी सपोर्ट भी मिल रहा है। लोग ताने मारते थे, कहते- इसमें कुछ नहीं रखा अनुज ने बताया कि कोरोना में लॉकडाउन के दौरान जब उन्होंने गाने बनाना शुरू किया, तो कुछ लोग उनसे कहते थे कि गानों में कुछ नहीं रखा है। माता-पिता को भी यही कहते थे कि बच्चों को पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ाओ, क्योंकि गाने के क्षेत्र में सबको कामयाबी नहीं मिलती, लेकिन उन्हें माता-पिता

ग्वालियर में अपहरण कर नाबालिग से रेप:मुंह दबाकर 14 साल की लड़की को घर से उठा ले गया; एकांत में किया दुष्कर्म, आरोपी अरेस्ट

ग्वालियर में अपहरण कर नाबालिग से रेप:मुंह दबाकर 14 साल की लड़की को घर से उठा ले गया; एकांत में किया दुष्कर्म, आरोपी अरेस्ट

ग्वालियर में आधी रात एक बदमाश नाबालिग के घर में घुस गया। उसने नाबालिग का मुंह दबाकर उसका अपहरण किया और घर से दूर एकांत स्थान पर ले गया। जहां आरोपी ने नाबालिग के साथ रेप किया। वारदात के बाद आरोपी उसे धमकी देकर फरार हो गया। पीड़िता किसी तरह घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। यह घटना शनिवार-रविवार की दरमियानी रात ग्वालियर के पिछोर इलाके की है। पीड़ित नाबालिग ने महिला थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने मामला कायम कर लिया। इसके बाद कार्रवाई करते हुए पिछोर थाना पुलिस ने सोमवार रात आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। ग्वालियर के पिछोर थाना क्षेत्र में रहने वाली 14 वर्षीय नाबालिग अपने परिवार के साथ रहती है। शनिवार रात खाना खाकर वह सो गई थी। रात करीब दो बजे नींद खुलने पर वह बाथरूम जाने के लिए आंगन में गई। इसी दौरान उसके घर के पास रहने वाला अनिल, पिता सुंदर केवट, वहां दिखाई दिया। नाबालिग कुछ समझ पाती, उससे पहले ही आरोपी ने उसका मुंह दबा दिया और उसे उठाकर एकांत स्थान पर ले गया और उसके साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया। हत्या की धमकी देकर फरार हुआ बदमाश वारदात के बाद आरोपी ने नाबालिग को जान से मारने की धमकी दी कि यदि उसने किसी को कुछ बताया, तो वह उसे और उसके परिवार को खत्म कर देगा। धमकी से डरी नाबालिग किसी तरह घर पहुंची और मां को पूरी घटना बताई। इसके बाद परिजन उसे महिला थाने ले गए, जहां शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर केस डायरी पिछोर थाने भेजी, जहां कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। भागने से पहले पकड़ा गया आरोपी पिछोर थाना प्रभारी शिवम सिंह राजावत ने बतया कि नाबालिग को अगवा कर रेप करने वाले आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है।

मझगवां में 11 माह की बच्ची की मौत:श्वास नली में दूध फंसना बताया गया कारण, कुपोषण से मौत की जताई गई थी आशंका

मझगवां में 11 माह की बच्ची की मौत:श्वास नली में दूध फंसना बताया गया कारण, कुपोषण से मौत की जताई गई थी आशंका

सतना जिले के आदिवासी बहुल मझगवां क्षेत्र में 11 माह की एक बच्ची की मौत के बाद महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर बच्ची की मौत का कारण कुपोषण बताया जा रहा था, लेकिन प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में श्वास नली में दूध फंसने को मौत की वजह बताया गया है। जानकारी के अनुसार, मझगवां ब्लॉक की महतैन ग्राम पंचायत के कैमहा गांव में राजललन की 11 माह 20 दिन की बेटी भारती मवासी की रविवार-सोमवार की दरमियानी रात मौत हो गई। भारती को तीन दिन से बुखार था, जिसका इलाज परिजन गांव के कथित डॉक्टर लालबहादुर से करा रहे थे। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही सोमवार को प्रशासनिक, स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम कैमहा गांव पहुंची। टीम ने प्रारंभिक जांच में पाया कि इलाज के बाद बच्ची को आराम मिल रहा था। कुपोषण से मौत की आशंका को जांच टीम ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। श्वसन नली में दूध जाने की आशंका जांच के दौरान सामने आया कि रविवार रात बच्ची अपनी मां के साथ सो रही थी। मां ने उसे लेटकर दूध पिलाया। रात करीब 12 बजे मां ने देखा तो भारती के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। शिशुरोग विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों को लेटकर दूध पिलाने के बाद उन्हें उठाकर थपकी देना आवश्यक होता है, अन्यथा दूध श्वसन नली में फंस सकता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज शुक्ला ने बताया कि प्रथम दृष्टया श्वसन नली में दूध जाने की वजह से ही मौत की आशंका है। हालांकि, मौत की स्पष्ट वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम जरूरी होता है, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही परिजनों ने भारती को दफना दिया था। टीम में मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर, सीएमएचओ डॉ मनोज शुक्ला, डीपीओ राजीव सिंह, बीएमओ डॉ रूपेश सोनी, सीडीपीओ अभय द्विवेदी आदि शामिल रहे। इससे पहले डीआईओ डॉ सुचित्रा अग्रवाल ने भी गांव पहुंचकर जांच की। डीआईओ ने बताया आधार कार्ड नहीं होने की वजह से परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। तो क्या कुपोषित थी भारती? भारती की मौत के बाद उसके कुपोषित होने का सवाल दिन भर चर्चा में रहा। विशेषज्ञ बताते हैं कि 11 माह की लड़कियों का वजन 8 से 10 किलोग्राम होना चाहिए, लेकिन 10 मार्च को आखिरी जांच में भारती का वजन 7 किलो 208 ग्राम था जो सामान्य से थोड़ा कम था। जांच टीम के मुताबिक भारती का वजन जरूर कम था, लेकिन इससे किसी की मौत नहीं होती। मौत की वजह जानने के लिए पीएम जरूरी थी, जो नहीं हुआ। जांच में यह भी सामने आया है कि 21 वर्ष की उम्र भूरी मवासी ने भारती को जन्म दिया था। अभी वह पांचवी दफा गर्भवती है, इससे बच्चों की बेहतर केयर नहीं हो पाती। मामले में कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने बताया कि बच्ची की मौत की खबर मिलते ही मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम भेजी गई थी जिससे वास्तविक स्थित पता चल सके, टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गर्भावस्था में कब्ज होने की वजह क्या है? जानें, इस समस्या से छुटकारा पाने के उपाय

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Last Updated:April 06, 2026, 23:12 IST प्रेग्नेंसी में कब्ज की समस्या कॉमन है. कई महिलाएं इस समस्या से ग्रस्त रहती हैं. इसके कई कारण होते हैं जैसे गर्भावस्था के दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाता है, जो आंतों की मांसपेशियों को ढीला कर देता है. इसके कारण भोजन को पचाने और मल को निकालने में समय ज्यादा लगता है. इसके अलावा, बढ़ते हुए गर्भाशय का पेट पर दबाव भी आंतों की गति को धीमा कर देता है. आप कुछ उपायों को आजमाकर कब्ज की समस्या को प्रेग्नेंसी में दूर कर सकती हैं. प्रेग्नेंसी में कब्ज होने की वजह क्या है? गर्भावस्था में कब्ज होना आम बात है, लेकिन कुछ महिलाओं को इससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसा ज्यादातर हार्मोनल बदलावों और शारीरिक दबाव की वजह से होता है. ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से इस समस्या से राहत मिल सकती है. गर्भावस्था के दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाता है, जो आंतों की मांसपेशियों को ढीला कर देता है. इसके कारण भोजन को पचाने और मल को निकालने में समय ज्यादा लगता है. इसके अलावा, बढ़ते हुए गर्भाशय का पेट पर दबाव भी आंतों की गति को धीमा कर देता है. कुछ महिलाओं में लो-फाइबर डाइट, पर्याप्त पानी न पीना या बहुत ज्यादा कैफीन (कॉफी और चाय) लेना भी कब्ज की वजह बन सकता है. कई बार डॉक्टर द्वारा दिए जाने वाले आयरन टेबलेट भी कब्ज बढ़ा देते हैं. अगर आहार में बदलाव किया जाए और पर्याप्त पानी पीया जाए, तो यह मदद कर सकता है. कोशिश करें कि दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीएं. अत्यधिक चाय या कॉफी से बचें, क्योंकि यह शरीर को डीहाइड्रेट कर सकती है और कब्ज बढ़ा सकती है. खाने में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना शामिल करें, जैसे साबुत अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल और ताजा सब्जियां. खाने को हमेशा ताजा और गर्म ही खाएं. हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या थोड़ी वॉक भी आंतों की गति को बढ़ाने में मदद कर सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. इसके साथ ही शौचालय का समय नियमित करने की कोशिश करें. सुबह उठकर या खाने के बाद शौचालय जाना चाहिए. हालांकि आंतरिक दबाव डालने या जोर लगाने से बचें. अगर घरेलू उपायों से आराम नहीं मिलता है, तो कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे भी मददगार हो सकते हैं. जैसे त्रिफला चूर्ण या अविपत्तिकर चूर्ण. 2 ग्राम त्रिफला चूर्ण को गर्म पानी के साथ रात में सोने से पहले लिया जा सकता है. अविपत्तिकर चूर्ण भी दिन में दो बार 2 ग्राम की मात्रा में लिया जा सकता है. ये नुस्खे पाचन को सुधारते हैं और कब्ज से राहत दिलाने में कारगर हैं. अगर मल त्याग के दौरान तेज दर्द हो, खून निकलने लगे या समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए. कभी-कभी ये गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 23:12 IST

100 की आबादी वाले मजरे-टोलों तक बनेंगी सड़कें:अब ड्रोन से होगी कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की मॉनिटरिंग; सीएम डॉ. मोहन यादव ने ली बैठक

100 की आबादी वाले मजरे-टोलों तक बनेंगी सड़कें:अब ड्रोन से होगी कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की मॉनिटरिंग; सीएम डॉ. मोहन यादव ने ली बैठक

प्रदेश के दूरस्थ मजरे-टोलों तक अब पक्की सड़कों का जाल बिछेगा। 100 या उससे अधिक आबादी वाली छोटी बस्तियों को भी सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा, वहीं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को समत्व भवन में “सुगम संपर्कता परियोजना” की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति को प्राथमिकता दी जाए। बैठक में सीएम के साथ मुख्य सचिव अनुराग जैन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी मौजूद थे। एक हजार करोड़ रुपए से बनेंगी सड़कें मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के बीच बेहतर संपर्क से आवागमन सुगम होगा और ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान बनेगी। उन्होंने सिपरी सॉफ्टवेयर के उपयोग को बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे सड़कों की डीपीआर तैयार करने के साथ-साथ पुल-पुलिया और कल्वर्ट की आवश्यकता का भी सटीक आकलन किया जा रहा है। परियोजना के तहत प्रदेश में लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लागत से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसमें मजरों-टोलों के साथ सांदीपनि विद्यालयों तक सड़कें बनाई जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की निगरानी ड्रोन से होगी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन से नियमित मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही सड़कों के निर्माण और प्रगति की निगरानी के लिए जनपद, जिला और राज्य स्तर पर डैशबोर्ड प्रणाली विकसित की गई है, जिससे हर स्तर पर पारदर्शिता बनी रहेगी। परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक जनपद पंचायत को तीन करोड़ रुपए तक के कार्यों की स्वीकृति देने का अधिकार दिया गया है। सड़कों का निर्माण मनरेगा के तहत किया जाएगा और गांवों को दोहरी संपर्कता प्रदान करने पर विशेष जोर रहेगा, ताकि वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध हो सकें। पुरानी सड़कों की जियो इन्वेंट्री हो रही तैयार नई सड़कों के चयन में दोहराव रोकने के लिए रिम्स पोर्टल के माध्यम से पूर्व में बनी सड़कों की जियो-इंवेंट्री तैयार की जा रही है। अब तक 33 हजार 655 सड़कों में से 17 हजार 437 सड़कों का रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है, जबकि कई जिलों में सर्वे कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना के तहत अब तक 7 हजार 135 नई सड़कों के प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं और 29 जिलों में 1771 सड़कों को स्वीकृति भी मिल चुकी है। मैदानी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 2100 से अधिक इंजीनियरों और तकनीकी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों को भी तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान की साप्ताहिक समीक्षा करने और जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित और पारदर्शी व्यवस्था से ही ग्रामीण विकास को गति मिलेगी और अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी।

गर्मियों में पिएं गुड़ का शरबत, डिहाइड्रेशन से होगा बचाव, दिनभर मिलेगी एनर्जी, दूर होगी थकान

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Last Updated:April 06, 2026, 22:51 IST Gud ka Sharbat peene ke fayde: आयुर्वेद में गुड़ को अमृत के समान माना गया है. यह प्राकृतिक मिठास का सबसे अच्छा स्रोत है और चीनी से कहीं बेहतर विकल्प है. गुड़ में आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन बी6 और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. गर्मियों में जब लोग थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, तब गुड़ तुरंत ऊर्जा देता है. आप डिहाइड्रेशन से बचने के लिए गुड़ का शरबत भी पी सकते हैं. जानिए, गर्मियों में गुड़ का शरबत पीने के लाभ. गुड़ का शरबत पीने के फायदे. Gud ka Sharbat peene ke fayde: गर्मी के मौसम में थकान, कमजोरी, सिरदर्द और डिहाइड्रेशन की समस्या आम हो जाती है. ऐसे में प्राकृतिक और पौष्टिक पेय की जरूरत पड़ती है. गुड़ का शर्बत गर्मियों के लिए एक बेहद फायदेमंद, रिफ्रेशिंग और एनर्जी देने वाला ड्रिंक है. गुड़ का शर्बत शरीर को तुरंत ठंडक और ऊर्जा देता है साथ ही गर्मी से होने वाली कई समस्याओं से राहत भी दिलाता है. गुड़ का शर्बत बनाना भी बहुत आसान है. आधा कप गुड़ को दो कप पानी में अच्छी तरह भिगो लें. इसमें एक बड़ा चम्मच नींबू का रस, आधा छोटा चम्मच भुना जीरा, कुछ पुदीना के पत्ते और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर अच्छे से फेंट लें. यह शर्बत गर्मी में रोजाना पीने के लिए एकदम सही और स्वादिष्ट है. आयुर्वेद में गुड़ को अमृत के समान माना गया है. यह प्राकृतिक मिठास का सबसे अच्छा स्रोत है और चीनी से कहीं बेहतर विकल्प है. गुड़ में आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन बी6 और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. गर्मियों में जब लोग थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, तब गुड़ तुरंत ऊर्जा देता है और खून की कमी (एनीमिया) को दूर करने में मदद करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. गुड़ पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज की समस्या को दूर करता है और आंतों को साफ रखता है. गर्मी के मौसम में गुड़ को पानी या छाछ के साथ मिलाकर पीने से शरीर को ठंडक मिलती है, प्यास नहीं लगती और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. यह पेट की गैस, एसिडिटी और जलन को भी कम करता है. आयुर्वेद के अनुसार, गुड़ में मौजूद प्राकृतिक खनिज शरीर का तापमान संतुलित रखते हैं, जिससे गर्मी में भी कमजोरी नहीं होती. गुड़ का सेवन ग्लूकोज भी प्रदान करता है जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है. गर्मियों में अक्सर पसीना आने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है. गुड़ का शर्बत इनकी पूर्ति करके शरीर को हाइड्रेट रखता है. साथ ही यह इम्युनिटी बढ़ाने और थकान कम करने में भी सहायक है. विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में गुड़ का शर्बत पीना बहुत फायदेमंद है, क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से ठंडक पहुंचाता है और शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. हालांकि, गर्मी में गुड़ की मात्रा ज्यादा न लें. दिन में एक या दो गिलास पर्याप्त है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है, उन्हें डॉक्टर की सलाह से ही गुड़ का सेवन करना चाहिए. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 22:51 IST

ग्रीष्मकालीन चाय: अदरक या इलायची…गर्मियों में कौन सी चाय की संरचना सबसे बेहतर है?

ग्रीष्मकालीन चाय: अदरक या इलायची...गर्मियों में कौन सी चाय की संरचना सबसे बेहतर है?

ग्रीष्मकालीन चाय: भारत में चाय केवल एक पीने की चीज़ नहीं, बल्कि एक भावना है। झुलसाती गर्मी हो या झुलसाती गर्मी, एक कप गर्म चाय के बिना दिन की शुरुआत अधूरी होती है। अक्सर हम चाय के स्वाद को बढ़ाने के लिए अदरक या इलायची का प्रयोग करते हैं। लेकिन जब बात तापती गर्मी की हो, तो शरीर के तापमान और पाचन तंत्र पर ध्यान देना जरूरी है, यह सवाल उठना लाजिमी है कि अदरक और इलायची में से कौन सा विकल्प बेहतर है? आइए आपको इस लेख में विस्तार से बताया गया है कि ताप्ती हीट में अदरक या फिर इलायची वाली चाय में कौन ज्यादा बेहतर है? अदरक वाली चाय की तासीर होती है गर्म अदरक अपनी औषधीय सामग्री के लिए जानी जाती है। इसमें ‘जिंजरॉल’ नाम का तत्व होता है जो मेटाबोलिज्म को सुधारता है और इम्युनिटी बहाल करता है। दाराक की तासीर गर्म होती है। अधिक गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान सबसे पहले ही बढ़ता है, ऐसे में अधिक भूख के सेवन से शरीर में पित्त दोष को बढ़ाया जा सकता है। इससे सीने में जलन, पेट में गर्मी या त्वचा में दाने जैसे बदलाव हो सकते हैं। अगर आपको गर्मियों में भी ठंड लग रही है या भारी भोजन के बाद पाचन में समस्या हो रही है, तो भूख की मात्रा कम हो सकती है। गर्मियों में मूंगफली वाली चाय इलायची, जिसे ‘मसलों की रानी’ कहा जाता है, न तो सबसे बेहतरीन गुण है बल्कि शरीर को अंदर से ठंडक भी मिलती है। इलायची की तासीर अनमोल है। इलायची पाचन तंत्र को शांत करता है। यह गर्मियों में होने वाली एसिडिटी, पेट फूलना और गैस की समस्या को दूर करने में सहायक है। इसके अलावा, इलाइची एक कीमा बनाया हुआ माउथ फ्रेशनर है जो डायमंड्स की दुर्गंध को कम करने और मूड को ताज़ा करने में मदद करता है। साथ ही आप ऊर्जावान हैं।

इंदौर में खुला चेंबर बना खतरा, युवक गिरा:कुशवाह नगर में हादसा, लोगों की सतर्कता से बची जान; VIDEO वायरल

इंदौर में खुला चेंबर बना खतरा, युवक गिरा:कुशवाह नगर में हादसा, लोगों की सतर्कता से बची जान; VIDEO वायरल

इंदौर के कुशवाह नगर इलाके में सोमवार रात एक युवक खुले चेंबर में गिर गया। अचानक हुई घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने उसे देख लिया और तुरंत बाहर निकाल लिया। घटना के बाद वहां भीड़ जमा हो गई, जबकि कुछ लोग उसे रिक्शे से अस्पताल भेजने की बात करते नजर आए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह मामला कुशवाह नगर मेन रोड पर लोहार गली के सामने का बताया जा रहा है। यहां पिछले तीन दिनों से चेंबर खुला हुआ था। चेंबर में गिरने वाले व्यक्ति की पहचान भगत सिंह नगर निवासी दिलीप करोसिया के रूप में हुई है। वह यहां से गुजर रहे थे, तभी अचानक खुले चेंबर में गिर गए। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने उनकी मदद कर उन्हें बाहर निकाला। इलाके में लग लगी लोगों की भीड़ चेंबर में गिरने के बाद आसपास के लोगों ने उसे बाहर निकाला, जिसके चलते वहां भीड़ जमा हो गई। सड़क से गुजरने वाले लोग भी रुक-रुककर घटना के बारे में पूछते नजर आए। बताया जा रहा है कि यहां काम चल रहा था, जिसके कारण चेंबर खुला हुआ था। यह भी कहा जा रहा है कि युवक नशे की हालत में था। क्षेत्र में रहने वाले रहवासी अशोक तिवारी ने बताया कि वे पास की मेडिकल दुकान पर खड़े थे, तभी अचानक युवक चेंबर में गिर गया। उन्होंने तुरंत उसे देख लिया और लोगों की मदद से बाहर निकाल लिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बता दें कि कुछ महीने पहले चोइथराम मेन रोड पर चेंबर में उतरे निगमकर्मियों की मौत हो गई थी। तस्वीरों में देखिए –