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100 की आबादी वाले मजरे-टोलों तक बनेंगी सड़कें:अब ड्रोन से होगी कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की मॉनिटरिंग; सीएम डॉ. मोहन यादव ने ली बैठक

100 की आबादी वाले मजरे-टोलों तक बनेंगी सड़कें:अब ड्रोन से होगी कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की मॉनिटरिंग; सीएम डॉ. मोहन यादव ने ली बैठक

प्रदेश के दूरस्थ मजरे-टोलों तक अब पक्की सड़कों का जाल बिछेगा। 100 या उससे अधिक आबादी वाली छोटी बस्तियों को भी सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा, वहीं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को समत्व भवन में “सुगम संपर्कता परियोजना” की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति को प्राथमिकता दी जाए। बैठक में सीएम के साथ मुख्य सचिव अनुराग जैन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी मौजूद थे। एक हजार करोड़ रुपए से बनेंगी सड़कें मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के बीच बेहतर संपर्क से आवागमन सुगम होगा और ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान बनेगी। उन्होंने सिपरी सॉफ्टवेयर के उपयोग को बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे सड़कों की डीपीआर तैयार करने के साथ-साथ पुल-पुलिया और कल्वर्ट की आवश्यकता का भी सटीक आकलन किया जा रहा है। परियोजना के तहत प्रदेश में लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लागत से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसमें मजरों-टोलों के साथ सांदीपनि विद्यालयों तक सड़कें बनाई जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की निगरानी ड्रोन से होगी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन से नियमित मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही सड़कों के निर्माण और प्रगति की निगरानी के लिए जनपद, जिला और राज्य स्तर पर डैशबोर्ड प्रणाली विकसित की गई है, जिससे हर स्तर पर पारदर्शिता बनी रहेगी। परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक जनपद पंचायत को तीन करोड़ रुपए तक के कार्यों की स्वीकृति देने का अधिकार दिया गया है। सड़कों का निर्माण मनरेगा के तहत किया जाएगा और गांवों को दोहरी संपर्कता प्रदान करने पर विशेष जोर रहेगा, ताकि वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध हो सकें। पुरानी सड़कों की जियो इन्वेंट्री हो रही तैयार नई सड़कों के चयन में दोहराव रोकने के लिए रिम्स पोर्टल के माध्यम से पूर्व में बनी सड़कों की जियो-इंवेंट्री तैयार की जा रही है। अब तक 33 हजार 655 सड़कों में से 17 हजार 437 सड़कों का रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है, जबकि कई जिलों में सर्वे कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना के तहत अब तक 7 हजार 135 नई सड़कों के प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं और 29 जिलों में 1771 सड़कों को स्वीकृति भी मिल चुकी है। मैदानी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 2100 से अधिक इंजीनियरों और तकनीकी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों को भी तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान की साप्ताहिक समीक्षा करने और जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित और पारदर्शी व्यवस्था से ही ग्रामीण विकास को गति मिलेगी और अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी।

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