लू से बचाएगा विंध्य का सत्तू! चीनी के साथ देसी स्वाद, भुना चना-गेहूं की सीक्रेट रेसिपी

Last Updated:April 10, 2026, 18:48 IST Sidhi News: प्रियंका सिंह ने कहा कि साफ किए गए चनों में गेहूं और थोड़ा जौ मिलाया जाता है, जिससे सत्तू का आटा चिकना हो जाता है. इसके बाद इसे चक्की में पिसवाकर तैयार किया जाता है. सत्तू को लोग नाश्ते में गुड़ या चीनी के साथ खाते हैं. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में जैसे ही गर्मी शुरू होती है, घरों की रसोई का स्वाद भी थोड़ा बदल जाता है. तेज धूप और लू से बचने के लिए लोग अपने खाने में ऐसे डिश शामिल करने लगते हैं, जो शरीर को ठंडक दें और पेट के लिए भी हल्के हों. इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में सत्तू पसंद किया जाता है, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में सेतुआ बोलते हैं. स्वाद में मीठा, ठंडक देने वाला और झटपट बनने वाला यह सत्तू गर्मियों में लगभग हर घर की थाली में दिखाई देता है. विंध्य क्षेत्र में सत्तू को शक्कर (चीनी) या गुड़ के साथ मिलाकर खाया जाता है. सीधी निवासी प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को बताया कि विंध्य क्षेत्र में हर साल गर्मी के मौसम में सत्तू खाने की परंपरा रही है. जैसे ही खेतों में कटाई, बिनाई और मड़ाई का काम शुरू होता है, लोग पुराने चने निकालकर सत्तू बनाने की तैयारी में जुट जाते हैं. सबसे पहले चने को रातभर पानी में भिगोया जाता है, जिससे वे फूल जाते हैं. इसके बाद उन्हें धूप में हल्का सुखाया जाता है और फिर कड़ाही में भून लिया जाता है. भूनने के बाद चनों को चकरी में दरकर उसकी भूसी अलग की जाती है. प्रियंका ने आगे बताया कि साफ किए गए चनों में गेहूं और थोड़ा जौ मिलाया जाता है, जिससे सत्तू का आटा चिकना बनता है. इसके बाद इसे चक्की में पिसवाकर तैयार किया जाता है. तैयार सत्तू को लोग सुबह नाश्ते में गुड़ या चीनी के साथ खाते हैं. खास बात यह है कि गर्मी के मौसम में होने वाले शादी-विवाह में भी सुबह के नाश्ते में सत्तू का विशेष महत्व रहता है. बुजुर्गों का खानपान भी सत्तू पर आधारितगांवों में बुजुर्गों का खानपान भी सत्तू पर आधारित रहा है. वे महुआ और चना, महुआ और सत्तू या चना-गुड़ का सेवन करते थे और स्वस्थ रहते थे. हालांकि बदलते समय के साथ इसका चलन कुछ कम हुआ है लेकिन आज भी ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर किसानों के घरों में सत्तू का उपयोग आम है. सत्तू को गर्मी से बचाव का वरदान माना जाता है. यह बघेलखंड क्षेत्र का पारंपरिक आहार है, जो पोषण और ताजगी का बेहतरीन स्रोत है. इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ उसे स्वस्थ बनाए रखते हैं. बनाने और खाने के तरीके अलग-अलगउत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी सत्तू का सेवन किया जाता है. हालांकि बनाने और खाने के तरीके अलग-अलग हैं. बघेलखंड में खासकर सीधी जिले में सत्तू को घोलकर या हल्का गाढ़ा सानकर चीनी या गुड़ के साथ खाया जाता है. इसके अलावा सत्तू का शरबत, लड्डू, पराठा और पूरी भी बनाई जाती है. गर्मियों में इसका शरबत प्यास बुझाने और शरीर को ठंडा रखने का एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : April 10, 2026, 18:48 IST
अनिल कपूर का शो '24' हॉटस्टार पर लौटेगा:एक्टर ने प्लेटफॉर्म को दी 24 घंटे की चेतावनी; 24 अप्रैल से स्ट्रीम होंगे दोनों सीजन

बॉलीवुड एक्टर अनिल कपूर का पॉपुलर एक्शन थ्रिलर शो ’24’ एक बार फिर दर्शकों के बीच लौटने वाला है। इस बार यह शो ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार (JioHotstar) पर स्ट्रीम किया जाएगा। शो की वापसी की खबर के बीच अनिल कपूर ने सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म को एक अनोखी चेतावनी दी है, जिसने फैंस के बीच सस्पेंस बढ़ा दिया है। शो के दोनों सीजन 24 अप्रैल से स्ट्रीम किए जाएंगे। अनिल कपूर की ‘चेतावनी’ से बढ़ा सस्पेंस अनिल कपूर ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर की है। उन्होंने जियो हॉटस्टार को टैग करते हुए लिखा- “जियो हॉटस्टार, तुम्हारे पास 24 घंटे हैं।” इसके साथ ही कैप्शन में उन्होंने जोड़ा- “वरना मैं मामला अपने हाथ में ले लूंगा।” हालांकि अनिल ने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा, लेकिन माना जा रहा है कि यह शो के प्रमोशन का हिस्सा है। इस पोस्ट के बाद फैंस कयास लगा रहे हैं कि क्या शो का तीसरा सीजन भी आने वाला है। 24 अप्रैल से शुरू होगी स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार पर यह हाई-ऑक्टेन थ्रिलर सीरीज 24 अप्रैल से उपलब्ध होगी। प्लेटफॉर्म ने फैसला किया है कि दर्शकों के लिए हर शुक्रवार को शो के 8 एपिसोड ड्रॉप किए जाएंगे। इस शो को भारत में लॉन्ग-फॉर्मेट स्टोरीटेलिंग के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जाता है। एक्टर बोले- मेरे दिल के बहुत करीब है यह प्रोजेक्ट शो की वापसी पर अपनी बात रखते हुए अनिल कपूर ने कहा, मैंने सालों में कई इंटेंस और एक्शन रोल किए हैं, लेकिन ’24’ मेरे लिए कभी सिर्फ एक शो नहीं था। यह एक अलग ही एड्रेनालिन रश था। इसके रियल-टाइम फॉर्मेट ने मुझे एक एक्टर के तौर पर काफी चैलेंज किया। मैं एक्साइटेड हूं कि अब जियो हॉटस्टार के जरिए दर्शक इस रोमांच को एक बार फिर से महसूस कर पाएंगे। अमेरिकी सीरीज का ऑफिशियल रीमेक है ’24’ बता दें कि यह शो इसी नाम की मशहूर अमेरिकी सीरीज का इंडियन अडैप्टेशन है। इसमें अनिल कपूर ने एंटी-टेररिस्ट यूनिट (ATU) के एजेंट जय सिंह राठौड़ का मुख्य किरदार निभाया है। शो की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘रियल-टाइम’ फॉर्मेट है, जिसमें 24 एपिसोड के जरिए 24 घंटों की कहानी दिखाई जाती है। भारत में इसके अब तक दो सीजन आ चुके हैं।
114 नए राफेल स्वदेशी मिसाइलों से लैस होंगे:18 जेट फ्रांस में, 96 भारत में बनेंगे; कंपनी ने सोर्स कोड देने से इनकार किया

भारत फ्रांस से 114 नए राफेल फाइटर जेट खरीद रहा है। 18 जेट फ्रांस में, 96 भारत में बनेंगे। इन जेट्स को स्वदेशी मिसाइलों और हथियार सिस्टम से लैस किया जाएगा। एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) के जरिए राफेल जेट और स्वदेशी हथियार आपस में कैसे जुड़ेंगे यह तय किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय अगले महीने राफेल फाइटर जेट बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन को रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करेगा। इसके बाद कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत शुरू होगी। इस सौदे को फेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 12 फरवरी को मंजूरी दी थी। 114 में से 18 राफेल जेट्स फ्रांस से फ्लाई-अवे कंडीशन में मिलेंगे। बाकी 96 जेट्स भारत में बनाए जाएंगे, जिसमें 25% कलपुर्जे स्वदेशी होंगे। फ्रांस सोर्स कोड शेयर नहीं करेगा रिपोर्ट्स में कहा गया कि फ्रांस सोर्स कोड देने को तैयार नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, कोई भी देश अपने फाइटर जेट का सोर्स कोड साझा नहीं करता। यही कोड रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, टारगेट ट्रैकिंग और हथियार सिस्टम को कंट्रोल करता है, इसलिए इसे साझा नहीं किया जाता। हालांकि, डील पर इसका असर नहीं है। दावा- रूस और अमेरिका भी नहीं देते सोर्स कोड एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को रूस ने 5th जनरेशन Su-57 फाइटर जेट के दो स्क्वाड्रन देने की पेशकश की है। वह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ मिलकर Su-30 MKI जेट्स को अपग्रेड भी कर रहा है। हालांकि रूस ने इन दोनों फाइटर जेट्स के सोर्स कोड कभी शेयर नहीं किए। अमेरिका का भी यही रुख है। भारत के पास मौजूद अमेरिकी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और अटैक हेलिकॉप्टर से जुड़े सॉफ्टवेयर कोड भी शेयर नहीं किए जाते। एयरफोर्स ने सितंबर 2025 में मांग की थी एयरफोर्स ने सितंबर 2025 में 114 अतिरिक्त राफेल जेट की मांग रक्षा मंत्रालय को भेजी थी। एयरफोर्स के पास पहले से 36 राफेल विमान है, जबकि नौसेना ने 26 मरीन वेरिएंट राफेल का ऑर्डर दिया है। अधिक संख्या में एक ही प्लेटफॉर्म होने से रखरखाव लागत कम होगी। अंबाला एयरबेस पर राफेल का ट्रेनिंग और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सेंटर पहले से चालू है। एयरफोर्स के पास तुरंत दो स्क्वाड्रन (36–38 विमान) शामिल करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद है। भारत में 176 राफेल विमान हो जाएंगे 114 राफेल की डील पूरी होने के बाद भारत के बेड़े में राफेल विमानों की संख्या 176 हो जाएगी। हालांकि अभी इसमें थोड़ा वक्त लग सकता है। एयरफोर्स पहले ही 36 राफेल विमानों को शामिल कर चुकी है। भारतीय नौसेना ने 26 राफेल मरीन का ऑर्डर दिया है। राफेल मरीन से पहले भारत फ्रांस से एयरफोर्स के लिए 36 राफेल जेट भी खरीद चुका है। 2016 में हुई इस डील के सभी विमान 2022 में भारत पहुंचे थे। इन्हें एयरफोर्स के अंबाला और हाशिनारा एयरबेस से संचालित किया जाता है। ये डील 58,000 करोड़ रुपए में हुई थी। राफेल मरीन विमान के फीचर्स एयरफोर्स के राफेल विमान से एडवांस हैं। ————– ये कबर भी पढ़ें… 114 नए राफेल खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी:फ्रेंच प्रेसिडेंट मैक्रों के भारत आने पर हो सकता है सौदा भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस डील की कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए बताई जा रही है। दसॉ एविएशन से 18 विमान उड़ने के लिए तैयार स्थिति में मिलेंगे। बाकी 96 भारत में बनेंगे। इनके 60% कलपुर्जे स्वदेशी होंगे। भारत का यह सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। पूरी खबर पढ़ें…
गुना में 90 वर्षीय पुजारी से मारपीट:पुजारी बोले – मंदिर की जमीन हड़पना चाहता है आरोपी; लाठी डंडों से की मारपीट

जिले के रूठियाई इलाके में एक 90 वर्षीय पुजारी से मारपीट का मामला सामने आया है। मंदिर की जमीन हड़पने के उद्देश्य से पुजारी से विवाद किया गया और उनसे मारपीट की गई। मारपीट में पुजारी घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुजारी कमल दास महाराज (90) ने बताया कि वे वर्षों से देहरी पांजा स्थित मंदिर की सेवा कर रहे हैं। मंदिर की करीब 4-5 बीघा जमीन है, जिससे होने वाली आय से मंदिर का संचालन और उनका जीवन निर्वाह होता है। लेकिन पास में रहने वाले भैयालाल गुर्जर की नीयत इस बेशकीमती जमीन पर खराब थी। गुरुवार दोपहर करीब 4 बजे जब महाराज जी मंदिर परिसर में थे, तभी आरोपी भैयालाल वहां पहुंचा और गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोपी ने बहाना बनाया कि मंदिर का जाली वाला गेट खुला रहता है, लेकिन असल मकसद विवाद खड़ा करना था। देखते ही देखते आरोपी ने डंडे से महाराज पर हमला कर दिया। उनके बाएं कंधे और पीठ पर डंडे के प्रहार किए गए। इतना ही नहीं, आरोपी ने 90 साल के बुजुर्ग पुजारी को जमीन पर पटककर थप्पड़ों से जमकर पिटाई की, जिससे उनकी दाहिनी आंख के ऊपर गहरा घाव हो गया और खून बहने लगा। गनीमत रही कि उसी समय एक दर्शनार्थी मंदिर पहुंच गया, जिसे देखकर आरोपी वहां से भाग निकला। जाते-जाते उसने पुजारी को चेतावनी दी कि अगर दोबारा इस मंदिर पर दिखे, तो जान से खत्म कर देंगे। पुजारी को घायल अवस्था में इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वृद्ध पुजारी के साथ हुई इस बर्बरता की सूचना मिलते ही भुजरिया तालाब मंदिर के महंत राघवेंद्र दास महाराज ने अस्पताल पहुंचकर उनका हाल जाना और इस कृत्य की घोर निंदा की। घटना के बाद घायल पुजारी ने डायल 112 की मदद से पुलिस को बुलाया। रुठियाई चौकी पुलिस ने आरोपी भैयालाल गुर्जर के खिलाफ अपराध क्रमांक 023/26 धारा 115(2), धारा 296(बी), धारा 351(3) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया है। जिले के साधु-संतों ने चेतावनी दी है कि यदि मंदिर की जमीन को सुरक्षित नहीं किया गया और आरोपी पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस मामले की विवेचना कर रही है।
थारू कैंप के पास ग्लेशियर टूटा, केदारनाथ पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त:यात्रा से पहले बारिश-बर्फबारी बनी सबसे बड़ी चुनौती, धाम में 3 फीट तक बर्फ

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने में अब 11 दिन ही शेष रह गए हैं। 22 अप्रैल को धाम के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, ऐसे में प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए हर स्तर पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि इस बार आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके। धाम तक पहुंचने वाले पैदल मार्ग से लेकर बेस कैंप तक सफाई, मरम्मत और सुविधाओं को विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। प्रशासन, पुलिस और अन्य संबंधित विभाग लगातार समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। जिससे यात्रा के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था की स्थिति न बने। बर्फ हटाने से लेकर रास्तों को सुरक्षित बनाने तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि इन तैयारियों के बीच मौसम बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है। लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण काम प्रभावित हो रहा है। वहीं ग्लेशियर खिसकने से पैदल मार्ग को नुकसान भी पहुंचा है। इसके बावजूद टीमें लगातार जुटी हुई हैं और मुश्किल परिस्थितियों के बीच भी तैयारियों को समय पर पूरा करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। धाम में युद्धस्तर पर काम जारी केदारनाथ धाम में बर्फबारी के बाद अब मौसम खुल गया है और तेज धूप निकलने से हालात तेजी से सामान्य किए जा रहे हैं। रास्तों के किनारे जमी मोटी बर्फ को हटाया जा चुका है और पैदल मार्ग को साफ करने का काम जारी है। कर्मचारी और मजदूर मिलकर रास्ते की मरम्मत और सफाई में जुटे हुए हैं, जिससे यात्रा मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सुगम बनाया जा सके। धूप खिलने के बाद तैयारियां तेज पिछले दिनों हुई बारिश और बर्फबारी के बाद धूप खिलने से प्रशासन और संबंधित टीमें तैयारियों को और तेज कर चुकी हैं। धाम में बैरिकेडिंग, सफाई व्यवस्था और मार्ग सुधार के काम किए जा रहे हैं। जल्द ही यात्रा सुचारू रूप से शुरू करने के लिए सभी जरूरी इंतजाम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। ग्लेशियर टूटने से मची अफरा-तफरी यात्रा की तैयारियों के बीच गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर थारू कैंप के पास दोपहर करीब साढ़े 12 बजे एक ग्लेशियर टूट गया। जिससे यात्रा मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया। यह घटना बड़ी लिनचौली से ऊपर हुई, जहां इन दिनों यात्रा को सुचारू बनाने के लिए तेजी से काम चल रहा है। घटना के समय मौके पर मजदूर और कर्मचारी मौजूद थे। जो यात्रा तैयारियों में जुटे हुए थे। अचानक ग्लेशियर टूटने से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा के लिहाज से मार्ग पर आवाजाही को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी बड़े नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। पुलिस प्रशासन अलर्ट इस घटना के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है और क्षतिग्रस्त मार्ग को जल्द से जल्द दुरुस्त करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। लगातार बदलते मौसम और बर्फबारी के चलते इस तरह की घटनाएं चुनौती बन रही हैं, लेकिन टीमें मौके पर डटी हुई हैं और यात्रा को निर्धारित समय पर शुरू कराने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। सभी लोग सुरक्षित जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि ग्लेशियर टूटने से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और सभी लोग सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में स्थिति सामान्य है और मार्ग को फिर से खोलने के लिए श्रमिकों को तैनात कर दिया गया है। तीन साल में 53.81 लाख श्रद्धालु पहुंचे पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो श्रद्धालुओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद कुल मिलाकर भारी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे हैं। वर्ष 2023 में 19,61,025 श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचे, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 16,52,070 रह गई। वहीं 2025 में फिर से बढ़त देखने को मिली और 17,68,795 श्रद्धालुओं ने धाम के दर्शन किए। तीनों वर्षों को मिलाकर कुल 53,81,890 श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचे हैं, जो इस बात का संकेत है कि मौसम और चुनौतियों के बावजूद आस्था में कोई कमी नहीं आई है और हर साल बड़ी संख्या में भक्त बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
झाबुआ में तहसीलदार पर आदिवासियों से अभद्रता का आरोप:सड़क निर्माण का विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट की; आप ने कलेक्टर कार्यालय घेरा

झाबुआ जिले के रानापुर तहसीलदार हुकुम सिंह निगवाल पर ग्रामीणों के साथ अभद्रता और मारपीट करने के आरोप लगे हैं। इन आरोपों के विरोध में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन किया और एसडीएम महेश मंडलोई को ज्ञापन देकर तहसीलदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। निजी जमीन पर सड़क निर्माण को लेकर विवाद AAP जिलाध्यक्ष कमलेश सिंगाड़ ने आरोप लगाया कि बुधवार को ग्राम भूतखेड़ी में अपनी निजी जमीन पर सड़क निर्माण का विरोध कर रहे आदिवासी परिवारों के साथ तहसीलदार ने अमर्यादित व्यवहार किया। ज्ञापन में बताया गया कि पुलिस की मौजूदगी में ग्रामीणों को गाली दी गई और एक युवक के साथ लात मारते हुए मारपीट की गई। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें ग्रामीणों को जबरन गाड़ी में बिठाकर ले जाते देखा जा रहा है। तहसीलदार ने आरोपों को बताया निराधार दूसरी ओर, तहसीलदार हुकुम सिंह निगवाल ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने बताया कि जिस रास्ते को खुलवाया गया, वह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। तहसीलदार के अनुसार, जब राजस्व टीम कोर्ट के आदेश का पालन करने पहुंची, तो प्रतिवादी पक्ष ने धारदार हथियारों के साथ टीम पर हमला करने की कोशिश की और अभद्रता की। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो के तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। सरपंच ने तहसीलदार का समर्थन किया भूतखेड़ी सरपंच मुकेश मेडा ने तहसीलदार की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि अधिकारी ने नियमों के तहत वर्षों पुराने बंद रास्ते को खुलवाकर ग्रामीणों को राहत दी है। रानापुर टीआई दिनेश रावत ने जानकारी दी कि मौके पर पुलिस और राजस्व टीम के कार्य में बाधा डालने के मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। जांच और कार्रवाई की मांग आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासी भाई-बहनों के साथ अभद्रता करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन ने ज्ञापन लेकर मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। विवाद का मुख्य कारण वह आम रास्ता है, जिसे लेकर महीनों से एक परिवार और ग्रामीणों के बीच तनाव बना हुआ था।
‘ममता बनर्जी मेरे खिलाफ साजिश रच रही हैं’: वायरल वीडियो के बाद हुमायूं कबीर ने बीजेपी से संबंध का आरोप लगाया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:10 अप्रैल, 2026, 16:46 IST हुमायूं कबीर ने वायरल वीडियो को बीजेपी द्वारा एआई जनित बताया, ममता बनर्जी पर साजिश का आरोप लगाया और कानूनी कार्रवाई की कसम खाई। एजेयूपी के संस्थापक हुमायूं कबीर। (फाइल फोटो) हुमायूं कबीर का एक कथित वीडियो वायरल होने के बाद चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जिसमें शीर्ष भाजपा नेताओं के साथ उनके संबंधों का दावा किया गया है। वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए, कबीर ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि यह एआई-जनरेटेड था। उन्होंने आगे ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए उन पर उनके खिलाफ “साजिश रचने” का आरोप लगाया। एएनआई से बात करते हुए, एजेयूपी संस्थापक, जिन्होंने बंगाल में बाबरी मस्जिद का निर्माण किया, ने कहा: “ममता बनर्जी मेरे खिलाफ साजिश रच रही हैं। वह जहां भी जाती हैं मेरा नाम ले रही हैं और मेरे खिलाफ बोल रही हैं। आम लोग उन्हें जवाब देंगे। 2026 के चुनाव में ममता बनर्जी सत्ता में नहीं आएंगी।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया, “वीडियो 19 दिसंबर का है, जिसमें मैं एक फ्लैट में बैठा हूं, लेकिन मैं कभी भी उस फ्लैट में रात को नहीं रुका हूं। यह वीडियो, जो रात 8 बजे के बाद रिकॉर्ड किया गया है, एआई-जनरेटेड है। 8 अप्रैल को बनाए गए एक यूट्यूब चैनल ने इसे अपने पहले वीडियो के रूप में पोस्ट किया। मैं उनके खिलाफ उच्च न्यायालय में मामला दायर करूंगा। न्यायपालिका इसका जवाब देगी। मैं ममता बनर्जी को हराऊंगा और सांप्रदायिक भाजपा को पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं आने दूंगा।” #घड़ी | अपने वायरल वीडियो पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर एजेयूपी के संस्थापक हुमायूं कबीर कहते हैं, “ममता बनर्जी मेरे खिलाफ साजिश रच रही हैं। वह जहां भी जा रही हैं, मेरा नाम ले रही हैं और बोल रही हैं। आम लोग उन्हें जवाब देंगे। ममता बनर्जी नहीं आएंगी… https://t.co/AbdHd1uqzb pic.twitter.com/Jppq2qcfIt– एएनआई (@ANI) 10 अप्रैल 2026 तृणमूल कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित वीडियो साझा किया. वीडियो में, कबीर कथित तौर पर पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रधान मंत्री कार्यालय के साथ चुनावों में बनर्जी को हराने की करोड़ों रुपये की योजना के तहत संबंधों का दावा करते हुए दिखाई दे रहे हैं। अमित शाह ने कहा, ‘हम विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे’ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वायरल वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसमें दावा किया गया कि एजेयूपी के संस्थापक हुमायूं कबीर बंगाल चुनाव जीतने के लिए बीजेपी के साथ काम कर रहे हैं। इस तरह के दावों से इनकार करते हुए, अमित शाह ने कहा, “हुमायूं कबीर और भाजपा दक्षिणी ध्रुव और उत्तरी ध्रुव की तरह हैं – हम कभी भी एक साथ नहीं आ सकते। हम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने वालों के साथ बैठने के बजाय अगले 20 वर्षों तक विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : कोलकाता (कलकत्ता), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 10 अप्रैल, 2026, 16:45 IST समाचार राजनीति ‘ममता बनर्जी मेरे खिलाफ साजिश रच रही हैं’: वायरल वीडियो के बाद हुमायूं कबीर ने बीजेपी से संबंध का आरोप लगाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)हुमायूं कबीर वायरल वीडियो(टी)हुमायूं कबीर एआई वीडियो(टी)ममता बनर्जी विवाद(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)अमित शाह की प्रतिक्रिया(टी)तृणमूल कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस(टी)भाजपा नेताओं के लिंक(टी)बंगाल में बाबरी मस्जिद
खुश रहने का मिल गया तरीका, इन कामों को करने से लाइफ रहेगी हैप्पी-हैप्पी! एक्सपर्ट ने बताया सबकुछ

Last Updated:April 10, 2026, 16:32 IST Gorakhpur News: खुशी कोई बाहरी चीज नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग के सही तालमेल का परिणाम है. अगर आप अपनी दिनचर्या में थोड़े बदलाव करें, जैसे नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और सकारात्मक सोच, तो आप खुद ही अपने ‘हैप्पी इंडेक्स’ को बढ़ा सकते हैं. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि खुश रहने के लिए क्या करें. गोरखपुर: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति खुश रहना चाहता है, लेकिन खुशी केवल परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि हमारे शरीर और दिमाग के संतुलन पर भी निर्भर करती है. वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, हमारे शरीर में कुछ खास हार्मोन ऐसे होते हैं, जो हमारी खुशी को नियंत्रित करते हैं. अगर इन हार्मोन को सही तरीके से सक्रिय किया जाए, तो व्यक्ति का ‘हैप्पी इंडेक्स’ यानी खुश रहने का स्तर काफी बढ़ सकता है. कुछ खास उपाय में यह चीज है, शरीर को बदल सकती हैं और आपके लिए भी यह बेहतर साबित होगा. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अभय की ओर से की गई रिसर्च में यह सामने आया है कि सेरोटोनिन, डोपामिन, एंडॉर्फिन और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन खुशी के लिए बेहद जरूरी होते हैं. इन हार्मोन को एक्टिव करने के लिए नियमित एक्सरसाइज, संतुलित आहार और सकारात्मक सोच जरूरी है. कैसे काम करते हैं ये हार्मोन डोपामिन: यह हार्मोन मोटिवेशन और खुशी से जुड़ा होता है. जब आप कोई लक्ष्य हासिल करते हैं, तो इसका स्तर बढ़ता है. सेरोटोनिन: मूड को स्थिर रखने में मदद करता है और डिप्रेशन को कम करता है. एंडॉर्फिन: यह ‘नेचुरल पेनकिलर’ है जो एक्सरसाइज के दौरान रिलीज होता है और आपको अच्छा महसूस कराता है. ऑक्सीटोसिन: इसे ‘लव हार्मोन’ कहा जाता है, जो रिश्तों और अपनापन बढ़ाता है. खुश रहने के लिए जरूरी एक्सरसाइजप्रोफेसर अभय के अनुसार, रोजाना 30 से 45 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी जैसे वॉक, योग, रनिंग या खेलकूद करने से एंडॉर्फिन और डोपामिन का स्तर बढ़ता है. इसके अलावा मेडिटेशन और प्राणायाम से सेरोटोनिन का संतुलन बेहतर होता है. सही खान-पान की भूमिकाखुश रहने के लिए डाइट भी उतनी ही जरूरी है. प्रोटीन, हरी सब्जियां, फल, नट्स और पर्याप्त पानी शरीर में हार्मोन संतुलन बनाए रखते हैं. खासकर केला, दही, डार्क चॉकलेट और हरी पत्तेदार सब्जियां सेरोटोनिन बढ़ाने में मदद करती हैं. खुशी कोई बाहरी चीज नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग के सही तालमेल का परिणाम है. अगर आप अपनी दिनचर्या में थोड़े बदलाव करें, जैसे नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और सकारात्मक सोच, तो आप खुद ही अपने ‘हैप्पी इंडेक्स’ को बढ़ा सकते हैं और एक बेहतर संतुलित जीवन जी सकते हैं. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Gorakhpur,Uttar Pradesh First Published : April 10, 2026, 16:32 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
एआईएमआईएम-एजेयूपी विभाजन: तीन तरह से यह बंगाल के महत्वपूर्ण मुस्लिम वोट को प्रभावित कर सकता है | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:10 अप्रैल, 2026, 16:25 IST मतदाता अनिश्चित हैं कि एआईएमआईएम के सार्वजनिक रूप से टूटने और व्यापक मीडिया कवरेज के बाद वे एजेयूपी पर भरोसा कर सकते हैं या नहीं। बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन किया है. वह शुक्रवार था. सुबह के साढ़े पांच बजे थे जब पश्चिम बंगाल के अधिकांश लोग जाग रहे थे। सुबह होते ही, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) से नाता तोड़ लिया और इस खबर को सार्वजनिक कर दिया। बमुश्किल कुछ हफ्ते बाद जब दोनों कोलकाता में एक साथ दिखे और घोषणा की कि वे टीएमसी के खिलाफ राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए लड़ेंगे, तो यह फैसला बहुत जल्दी आया। द रीज़न? सत्तारूढ़ टीएमसी द्वारा जारी एक स्टिंग ऑपरेशन में भाजपा के साथ “गुप्त” समझ का दावा किया गया है – कि उप मुख्यमंत्री पद के बदले कबीर की पार्टी बंगाल में किंगमेकर के रूप में उभरेगी। एआईएमआईएम का बंगाल की नई मुस्लिम पार्टी से नाता तोड़ने का फैसला कबीर के यह कहने के बावजूद आया कि वीडियो फर्जी है और उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके बनाया गया है। उन्होंने टीएमसी को आरोपों को साबित करने या 2,000 करोड़ रुपये के मानहानि मामले का सामना करने की भी चुनौती दी है। कबीर के दावों के बावजूद एआईएमआईएम ने कहा, “हुमायूं कबीर के खुलासों से पता चला है कि बंगाल के मुसलमान कितने असुरक्षित हैं।” अपने राजनीतिक अलगाव संदेश में, उन्होंने दावा किया कि बंगाल के मुसलमान “सबसे गरीब, उपेक्षित और उत्पीड़ित समुदायों” में से हैं। ओवैसी की पार्टी ने स्पष्ट कर दिया कि वे कबीर के सहयोगी बने रहकर उन पर लगे आरोपों से उत्पन्न राजनीतिक बोझ को साझा करने के बजाय स्वतंत्र रूप से लड़ना पसंद करेंगे। हुमायूं कबीर के खुलासों से पता चला है कि बंगाल के मुसलमान कितने असुरक्षित हैं. एआईएमआईएम ऐसे किसी भी बयान से संबद्ध नहीं हो सकती जहां मुसलमानों की अखंडता पर सवाल उठाया जाता है। आज तक AIMIM ने कबीर की पार्टी से अपना गठबंधन वापस ले लिया है. बंगाल के मुसलमान…- AIMIM (@aimim_national) में से एक हैं 10 अप्रैल 2026 बंगाल की राजनीति के लिए इसका क्या मतलब है, जहां 2011 की जनगणना के अनुसार अल्पसंख्यक आबादी का 27 प्रतिशत हिस्सा हैं, और एक निर्णायक वोटिंग ब्लॉक है जिसने 2011 में सत्ता में आने के बाद से ममता बनर्जी का समर्थन किया है? ओवेसी के पास सुरक्षा के लिए एक बड़ा मैदान है ओवैसी के लिए बंगाल एक छोटा प्रवेश बिंदु है. तेलंगाना के अलावा, उनकी पार्टी ने महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में मुसलमानों के लिए बोलने वाले राजनीतिक संगठन के रूप में अपनी पैठ बनाई है। कोई भी इसके दृष्टिकोण से असहमत हो सकता है, लेकिन उन राज्यों में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच इसके समर्थक हैं। इस चुनाव में, वह पश्चिम बंगाल में अपने पदचिह्न का विस्तार करना चाहते थे, जहां उन्होंने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन किया था, जिसने बंगाल के दो मुस्लिम बहुल जिलों मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में मुसलमानों के बीच मोहभंग का फायदा उठाया था। हालाँकि, टीएमसी का कथित स्टिंग ऑपरेशन, जिसका कबीर ने विरोध किया है, सच्चाई की परवाह किए बिना, उन्हें और उनकी पार्टी को एआईएमआईएम के लिए दायित्व बनाता है। इसका प्रभाव अन्य राज्यों में भी पड़ सकता है जहां एआईएमआईएम सक्रिय है, जिससे इसके समर्थन आधार के बीच असहज सवाल खड़े हो सकते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि एआईएमआईएम ने अपने बड़े राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए तुरंत नाता तोड़ लिया। कबीर की बर्खास्तगी के बावजूद, धारणा मायने रखती है हुमायूं कबीर द्वारा स्टिंग को आक्रामक ढंग से खारिज करने के बावजूद – इसे एआई-जनित मनगढ़ंत कहानी कहना और टीएमसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी देना – राजनीति अक्सर धारणा के बारे में होती है। कथित वीडियो में, पूर्व टीएमसी विधायक, जो अब मुर्शिदाबाद-मालदा-बीरभूम बेल्ट में मुस्लिम राजनीति का एक प्रमुख चेहरा हैं, एक ऐसे व्यक्ति से बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं जो कैमरे पर दिखाई नहीं दे रहा है। कबीर को यह दावा करते हुए सुना जाता है कि उनकी भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ एक “गुप्त” समझ है – कि अगर वह 70-80 सीटें हासिल करते हैं और विधानसभा चुनावों में भाजपा को लगभग 100-120 सीटें मिलती हैं, तो वह उप मुख्यमंत्री पद के बदले में समर्थन देंगे। कबीर ने पूरे वीडियो को एआई-जनरेटेड बताकर खारिज कर दिया है। हालाँकि, उनके पिछले बयान कुछ मुस्लिम मतदाताओं के लिए दावों को विश्वसनीय बना सकते हैं, भले ही वीडियो वास्तव में मनगढ़ंत हो। मार्च के मध्य में पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “अगर हमारी पार्टी सरकार बनाती है तो पहली बार कोई मुस्लिम मुख्यमंत्री होगा. लेकिन अगर हम सरकार नहीं भी बनाते हैं तो भी हम इतनी संख्या लाएंगे कि हमारे बिना कोई सरकार नहीं बन पाएगी.” उस समय, ये आम चुनाव-मौसम के दावों की तरह लग सकते थे, लेकिन ऐसे बयान अब संदेह को बढ़ावा दे सकते हैं और उनके विरोधियों द्वारा इसका फायदा उठाया जा सकता है। खंडित मुस्लिम वोट? 2011 के बाद से मुसलमानों ने बड़े पैमाने पर ममता बनर्जी की टीएमसी को वोट दिया है, जब उनकी निष्ठा वाम मोर्चे से बदल गई थी। हालाँकि, पहली बार, भाजपा द्वारा वर्षों से बार-बार मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगाए जाने के बावजूद, मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और बीरभूम जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाताओं का एक वर्ग सत्तारूढ़ दल से अलग होता दिख रहा है। राजनीतिक रूप से चतुर व्यक्ति कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा – जो कि 66 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाला जिला है – में निजी भूमि के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल बाबरी के नाम पर एक मस्जिद बनाने के लिए किया, जिससे स्थानीय मुसलमानों में मजबूत भावनाएं पैदा हुईं। यह जल्द ही उनके लिए समर्थन की एक स्थिर धारा में तब्दील हो गया। कबीर ने एआईएमआईएम के साथ गठबंधन करके अपनी पार्टी लॉन्च की और उन्हें ओवैसी का समर्थन प्राप्त था। आख़िरकार, ओवैसी एक प्रमुख अखिल भारतीय मुस्लिम नेता हो सकते हैं, लेकिन बंगाल में उनकी स्वीकार्यता सीमित है। सांस्कृतिक मतभेद मायने रखते हैं – औवेसी मटन खाते हैं, जबकि बंगाल के
सुबह में गर्म पानी पीने से क्या सच में पिघल जाती है पेट की चर्बी ? यकीन करने से पहले डॉ. पारस अग्रवाल से जान लें

Last Updated:April 10, 2026, 15:56 IST Hot Water Melt Fat: सुबह-सुबह गर्म पानी यानी गुनगुने पानी पीना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है. आयुर्वेद हो या मेडिकल साइंस सबमें कहा जाता है कि सुबह में दिन की शुरुआत एक गिलास गुनगुने पानी से करना चाहिए. लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसी खबरों की बाढ आ गई है जिसमें दावा किया जाता है कि अगर सुबह में गुनगुने पानी पिएंगे तो इससे पेट की चर्बी कुछ ही महीनों में गलने लगेगी. इस बात में आखिर कितनी सच्चाई है. मारेंगे एशिया अस्पताल में मेटाबोलिक डिसॉर्डडर के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से जब हमने बात की तो उन्होंने इस पूरे मामले को विस्तार से बताया. गर्म पानी और वजन कम करने का कनेक्शन. Hot Water Melt Fat: राष्ट्रीय हेल्थ सर्वे के मुताबिक भारत में 24 प्रतिशत महिला और 23 प्रतिशत पुरुष मोटापे के शिकार हैं. इनमें से अधिकांश के पेट पर बुरी तरह चर्बी जमी होती है. पेट की चर्बी हर तरह के मोटापे से ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यह चर्बी लिवर, किडनी, हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों को घेर लेती है और उन अंगों पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव डालती है. ऐसे में सोशल मीडिया पर हमेशा दावा किया जाता है कि सुबह में खाली पेट गर्म पानी पीने से पेट की चर्बी कुछ ही महीने में गल जाती है. आखिर इस बात में कितनी सच्चाई है. इसी बात को जानने के लिए हमने मारेंगे एशिया अस्पताल में मेटाबोलिक डिसॉर्डडर के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से बात की. मेडिकल साइंस की हकीकतडॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि जिस तरह शरीर का वजन बढ़ने के लिए कई चीजें जिम्मेदार होती है उसी तरह इस अतिरिक्त चर्बी को बाहर निकालने के लिए एक साथ कई मोर्चे पर काम करना पड़ता है. जहां तक गर्म पानी की बात है तो पानी पीने से फायदा ही होता है अगर आप इसे संतुलित मात्रा में पिए तो. लेकिन अगर पानी आपने कम पिया या जरूरत से ज्यादा पिया तो इसका नुकसान उठाना पड़ेगा. पर मेडिकल साइंस में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि सुबह खाली पेट गर्म या गुनगुना पानी पिएंगे तो इससे शरीर की चर्बी गलने लगेगी. हां, कुछ हद तक इससे मेटाबोलिज्म बूस्ट हो सकता है. गर्म पानी शरीर के तापमान को थोड़ा बढ़ा सकता है और हो सकता है कि इससे कैलोरी थोड़ी ज्यादा बर्न हो जाए. पर इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि सुबह खाली पेट गर्म पानी आपके पेट की चर्बी को गला दे या कम कर दें. आयुर्वेद चाहे जो भी कहता हो लेकिन मेडिकल साइंस में आज तक यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि गर्म पानी से वजन कम होता है या पेट की चर्बी गल जाती है. वजन बढ़ता क्यों हैइस सवाल पर डॉ. पारस अग्रवाल कहते हैं कि मोटे तौर पर वजन बढ़ने के लिए 3 कारण जिम्मेदार होते हैं. पहला-आपने जरूरत से ज्यादा खाया. दूसरा-आपने शारीरिक मेहनत नहीं की या शरीर को हिलाया-डुलाया नहीं और तीसरा-गलत चीजें खाई. जब आप जरूरत से ज्यादा खाएंगे तो जाहिर इस भोजन से एनर्जी भी ज्यादा बनेगी और जब एनर्जी खर्च नहीं होगी तो वह चर्बी के रूप में शरीर में जमा होने लगेगा. वहीं जितनी आपके शरीर में एनर्जी बन रही है अगर वह नहीं खाएंगे तो यह भी चर्बी में बदल जाएगी. अंत में यदि आप गलत चीजें खाएंगे तो इसमें थोड़े से ज्यादा एनर्जी बनेगी और वह सीधे चर्बी में बदल जाएगी. जैसे पिज्जा-बर्गर, ज्यादा चीनी, मिठाई, ज्यादा तेल, तली-भुनी चीजें, पैकेटबंद चीजें, मीठा पेय आदि में खराब कार्बोहाइड्रैट होता है इसलिए फिर वजन घटाने के लिए क्या करें डॉ. पारस अग्रवाल सीधे कहते हैं जिस तरह आपने वजन बढ़ाया है उसी तरह इसे घटा लीजिए. जैसे आपको सबसे पहले कैलोरी पर नियंत्रण करना है. यानी आप पहले जितना खाते थे. उसमें धीरे-धीरे कटौती करें. मसलन यदि आप पहले 3 रोटी खाते थे तो अब 2 रोटी खाइए. इसी तरह भोजन की पूरी मात्रा को कम कीजिए. इसके बाद आप पहले जो गंदी चीजें खाते थे, उसे छोड़ दीजिए. जैसे हर तरह के पैकेटबंद फूड, बिस्किट, चॉकलेट, ब्रेड, पिज्जा-बर्गर, बाहर की तली-भुनी चीजें, ज्यादा तेल वाली चीजें, चिप्स, कुरकुरे, कोल्ड ड्रिंक, चीनी वाली चीजें आदि छोड़ दीजिए. बेहतर होगा कि चीनी को पूरी तरह छोड़ दें. इसी जगह आप रोज घर का बना खाना खाएं. चावल, दाल, रोज हरी सब्जियां, फल, सीड्स, ड्राई फ्रूट्स आदि का सेवन करें. अब इन सबके बाद रोज कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज करें. एक्सरसाइज इस तरह से करें कि शरीर के सभी अंगों में हरकतें हो. इसके लिए जिम जाना जरूरी नहीं. किसी भी तरह से आप शरीर के हिलाए-डुलाएं. ऑफिस में तेज वॉक करें, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. चेयर से हर आधे-एक घंटे पर उठकर स्ट्रैच करें, थोड़ा घूम लें. इसके अलावा पर्याप्त नींद लें और तनाव भी कम करें. तनाव कम करने के लिए योगा, ध्यान आदि का सहारा लें. और सबसे जरूरी बात कि पहले यह देखें कि वजन किसी बीमारी की वजह से तो नहीं बढ़ी है. अगर बीमारी की वजह से है तो इसका इलाज पहले कराएं. निश्चित रूप से वजन घटेगा. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 10, 2026, 15:56 IST







