ऑनलाइन गेमिंग लिंक से 2.62 लाख ठगी का पर्दाफाश:शिवपुरी पुलिस ने दो आरोपियों को झारखंड से गिरफ्तार किया

शिवपुरी पुलिस ने गुरुवार को ऑनलाइन ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा कर झारखंड से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। करैरा निवासी श्याम कुमार गुप्ता ने 12 जनवरी 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि अज्ञात आरोपियों ने उनके खाते से 2 लाख 62 हजार रुपए निकाल लिए थे। करैरा थाना प्रभारी विनोद छावई ने बताया कि इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। एक टीम गठित कर मामले की जांच की गई। जांच के दौरान, पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग करते हुए आरोपियों का पता लगाया और झारखंड से बेदांत गुप्ता (20) और गौरव मेहता (20) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में, आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर ठगी की इस वारदात को अंजाम दिया था और ठगी गई रकम को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया था। बैंक खातों को होल्ड करवा दिया पुलिस ने साइबर सेल की सहायता से उन बैंक खातों को होल्ड करवा दिया है, जिनमें ठगी की रकम स्थानांतरित की गई थी। जांच से यह भी पता चला है कि इस गिरोह के अन्य सदस्य महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में सक्रिय हैं। पुलिस के अनुसार, ठगी की यह वारदात ऑनलाइन गेमिंग लिंक के माध्यम से की गई थी। फरियादी द्वारा लिंक पर क्लिक करते ही, आरोपियों को उनके बैंक खाते तक पहुंच मिल गई और उन्होंने पूरी रकम निकाल ली। गिरफ्तार किए गए आरोपी कमीशन एजेंट के तौर पर काम करते थे। वे ठगी की रकम में से अपना कमीशन काटकर शेष राशि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में बैठे गिरोह के सरगना को भेज देते थे। फिलहाल, पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और जल्द ही अन्य राज्यों में दबिश देकर गिरोह के मुख्य सरगनाओं को गिरफ्तार करने की तैयारी में है।
5 साल के बच्चे का वजन सिर्फ 5.5 किलो:SAM रोग से जूझ रहा था; भोपाल एम्स में लाइफ-सेविंग ट्रीटमेंट से मिली नई जिंदगी

भोपाल में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने कुपोषण की गंभीरता को फिर उजागर कर दिया। 5 साल का बच्चा, जिसका वजन महज 5.5 किलो था, गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से जूझ रहा था। हालत इतनी खराब थी कि बच्चा खाना तक नहीं खा पा रहा था और शरीर में पानी की भी कमी हो गई थी। उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कर 10 दिन तक लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट दिया गया। डॉक्टरों की टीम की निगरानी और विशेष पोषण आहार की मदद से बच्चे की हालत में सुधार हुआ और उसे नई जिंदगी मिल सकी। भोपाल एम्स में 58 माह के इस बच्चे को अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, खाना न खाने और पेशाब कम होने की शिकायत के साथ लाया गया था। जांच में सामने आया कि बच्चा गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) का शिकार है। उसका वजन केवल 5.5 किलोग्राम था, जबकि इस उम्र में सामान्य वजन करीब 18 किलोग्राम होना चाहिए। इसके साथ ही बच्चे को एनीमिया, शरीर में पानी की कमी और विटामिन D की कमी जैसी समस्याएं भी थीं। PICU में शुरू हुआ लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट बच्चे की हालत को देखते हुए उसे तुरंत पीआईसीयू (बाल गहन चिकित्सा इकाई) में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों ने लगातार निगरानी में इलाज शुरू किया। SAM प्रोटोकॉल के तहत उसे विशेष पोषण आहार F-75 और F-100 दिया गया, जिससे धीरे-धीरे उसकी स्थिति स्थिर हुई। इसके बाद ऐसा डाइट प्लान तैयार किया गया, जिसे घर पर भी जारी रखा जा सके। 10 दिन में दिखा असर, बढ़ा वजन करीब 10 दिनों के इलाज के बाद बच्चे की हालत में सुधार दिखने लगा। उसका वजन बढ़कर 6.06 किलोग्राम हो गया और वह सामान्य रूप से खाना लेने लगा। डिस्चार्ज के समय डॉक्टरों ने परिजनों को नियमित फॉलो-अप, संतुलित आहार और बच्चे की ग्रोथ पर नजर रखने की सलाह दी। एक महीने में और सुधार इलाज के एक महीने बाद जब बच्चे की दोबारा जांच की गई, तो उसका वजन बढ़कर 7.8 किलोग्राम हो गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, यह सुधार इस बात का संकेत है कि सही समय पर इलाज और पोषण मिलने से गंभीर कुपोषण को भी नियंत्रित किया जा सकता है। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बच्चे के माता-पिता को भी प्रशिक्षित किया। उन्हें बताया गया कि घर पर किस तरह से उच्च कैलोरी और संतुलित आहार तैयार करें और बच्चे को सही तरीके से खिलाएं। इससे बच्चे के लंबे समय तक स्वस्थ रहने की संभावना बढ़ जाती है। कुपोषण को हल्के में न लें विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बच्चे का वजन उम्र के अनुसार नहीं बढ़ रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुपोषण केवल शरीर को कमजोर नहीं करता, बल्कि मानसिक और बौद्धिक विकास पर भी असर डालता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अभिभावक नियमित रूप से बच्चों का वजन जांचते रहें और जरूरत पड़ने पर आंगनवाड़ी या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
प्रभसिमरन सिंह बोले- 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम से युवाओं को फायदा:टीम इंडिया में एंट्री के लिए ज्यादा मेहनत करनी होगी

IPL में पंजाब किंग्स (PBKS) के ओपनिंग बैटर प्रभसिमरन सिंह ने ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम का समर्थन किया है। जहां कई सीनियर प्लेयर्स इस नियम को खराब बता चुके हैं, वहीं 25 साल के प्रभसिमरन इसे युवाओं के लिए एक बड़े मौके के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि इस नियम की वजह से अब टीमें 250 से ज्यादा का स्कोर आसानी से बना रही हैं। 4 साल बाहर बैठा, अब मौके ज्यादा प्रभसिमरन ने कहा, “एक युवा खिलाड़ी के तौर पर मैं इसे मौका मानता हूं। मुझे IPL में आए 8 साल हो गए हैं, लेकिन शुरुआती 4 साल मुझे मौके नहीं मिले। मैं बाहर बैठकर सोचता था कि टीम में कैसे जगह बनाऊं। ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ की वजह से अब मौके बढ़ गए हैं। हालांकि कुछ लोग इसे पसंद नहीं करते, क्योंकि इससे जोखिम भरा क्रिकेट बढ़ गया है, लेकिन इससे बैटिंग में गहराई आती है।” श्रेयस अय्यर को बताया ‘बेस्ट कैप्टन’ पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर की तारीफ करते हुए प्रभसिमरन ने कहा कि अय्यर ने उन्हें ‘सीनियर प्लेयर’ जैसा सम्मान दिया है। वे खिलाड़ियों को फ्रीडम देते हैं। अगर आप फ्लॉप भी हों, तो वे पास आकर तनाव दूर करते हैं। कोच और कप्तान की ओर से साफ मैसेज है कि पावरप्ले में अटैकिंग खेलना है। अब 170-180 का जमाना गया, अब नजरें 250+ स्कोर पर रहती हैं। अभिषेक शर्मा से ‘हेल्दी कॉम्पिटिशन’ टीम इंडिया में जगह बनाने को लेकर उन्होंने कहा, “कॉम्पिटशन बहुत ज्यादा है। सिर्फ अच्छा करना काफी नहीं है, आपको कुछ ‘एक्स्ट्रा’ करना होगा। मेरे पंजाब के साथी अभिषेक शर्मा भारतीय टीम में खेल रहे हैं, यह मेरे लिए मोटिवेशन है। जब भी मेरा चयन नहीं होता, मैं समझ जाता हूं कि मेरी मेहनत अभी कम है और मुझे और बेहतर करना है।” विकेटकीपर के तौर पर निभा रहे हैं लीडरशिप प्रभसिमरन ने बताया कि वे खुद को टीम के लीडरशिप ग्रुप का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा, “विकेट के पीछे से मैच का सबसे अच्छा व्यू मिलता है। जब कप्तान बाउंड्री पर होता है और शोर ज्यादा होता है, तब मैं फील्डिंग एंगल और गेंदबाजों से बातचीत की जिम्मेदारी संभालता हूं। घरेलू क्रिकेट में कप्तानी करने का अनुभव यहां काम आ रहा है।” 1 शतक लगा चुके हैं प्रभसिमरन प्रभसिमरन ने 2019 में पंजाब के लिए IPL डेब्यू किया था। 2022 तक वे 6 मैच ही खेल सके। 2023 में पूरा सीजन खेला और एक शतक लगाकर 358 रन बना दिए। अगले सीजन 334 और पिछले सीजन 549 रन बनाए। तीनों सीजन स्ट्राइक रेट 150 से ज्यादा का रहा। इस सीजन 3 मैचों में 80 रन बना चुके हैं।
क्या है औषधीय गुणों वाला ‘वासा’ का पौधा? गले से लेकर सांस जैसी समस्या से दिलाता निजात, जानिए आयुर्वेदिक फायदे

Last Updated:April 09, 2026, 18:06 IST Health News: अक्सर लोग सिरदर्द, आंखों की समस्या से परेशान रहते हैं. इसके लिए आयुर्वेद में कई इलाज बताए गए हैं. आज आपको ऐसे ही एक पौधे के बारे में बताने वाले हैं, जिसे सेहत का खजाना माना जाता है. आइए इसके आयुर्वेदिक फायदे आपको बताते हैं. लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं. लेकिन कई बार लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है. जानकारी के अभाव के कारण पौधों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन प्राकृतिक जड़ी-बूटियां में हर मर्ज की दवा छिपी होती है. ऐसा ही एक औषधि पौधा है वासा, जिसे कुछ लोग अडूसा के नाम से भी जानते हैं. वासा कई बीमारियों के लिए रामबाण होता है. हम बात कर रहे हैं वासा पौधे की, जिसे वैज्ञानिक नाम जस्टिसिया अधाटोडा है. इंग्लिश में इसे मालाबार नट के नाम से जाना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इस पौधे को लोग रूस भी कहते हैं. इसकी पत्तियां जड़, फूल और फल कई बीमारियों के लिए रामबाण होते हैं. वासा में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. इन समस्याओं से मिलता निजातलोकल 18 से बातचीत करते हुए राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया कि वासा का इस्तेमाल खांसी-जुकाम के इलाज के लिए किया जाता है. कई बार गले में खराश के कारण गले में दर्द होने लगता है, जिसके साथ-साथ सिर दर्द, आंखों की बीमारियों, पाइल्स और कई बीमारियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी वासा का प्रयोग करते हैं. दांतों के दर्द की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है. अगर आपके दांतों में दर्द होता है, तो वासा की लकड़ी का दातुन करने के साथ ही पत्तों का काढ़े से कुल्ला करने से दांतों के दर्द से राहत मिल सकती है. सूजन जैसी समस्या से छुटकाराश्वास संबंधी बीमारियों में भी वासा बहुत उपयोगी है. इसके पत्तों का रस शहद के साथ लेने से सूखी खांसी और सांस फूलने की समस्या दूर होती है. वासा के सूखे फूलों का चूर्ण गुड़ के साथ खाने से सिर दर्द गायब हो जाता है. इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द को कम करने में सहायक हैं. अगर आपके शरीर में सूजन की समस्या आ गई है और सूजन की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो वासा की पत्तियों का सुबह खाली पेट काढ़ा बनाकर पीने से धीरे-धीरे सूजन जैसी समस्या से भी आपको छुटकारा मिल जाएगा. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Lakhimpur,Kheri,Uttar Pradesh First Published : April 09, 2026, 18:06 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
राजस्थानी केरी अचार रेसिपी: घर पर बनाएं राजस्थान की खास केरी अचार, 1 साल से भी ज्यादा कीमत; नोट करें रेसिपी

राजस्थानी केरी अचार रेसिपी: राजस्थान में लोग अक्सर चटपटा और तीखा खाना पसंद करते हैं। इतना ही नहीं, राजस्थानी थाली का स्वाद तब तक अधूरा है, जब तक केरी का अचार न हो। राजस्थान में इस अचार को बनाने का तरीका थोड़ा सा अलग और खट्टा है। खास बात यह है कि आप इस आचार्य को पिछले साल तक बता सकते हैं। यह बुरा नहीं है. आइये आपको राजस्थान की केरी अचार बनाने के तरीके के बारे में बताते हैं। राजस्थानी केरी अचार बनाने की सामग्री के लिए कच्ची आम केरीहल्दी का तेलसौंफमेथी दानाकलौंजीहल्दी पाउडरलाल मिर्च पाउडरहींगनमक सबसे पहले केरी को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। अब ऐसे ही छोटे नमूने में कट लें। एक बड़ी पोथी में कटी हुई केरी, हल्की हल्दी और नमक लगभग 5-6 घंटे के लिए छोड़ दें। इससे केरी अपना पानी छोड़ो देवी। इसके बाद पानी अच्छा लें और केरी के मिश्रण को पंजाब के नीचे या हल्की धूप में 2-3 घंटे के लिए सुखाएं। ध्यान रहे, बिल्कुल नहीं रहना चाहिए।एक मिठाई में मेथी दाना और सौंफ को पेंटिंग सा भून लें। अब एक बड़े पोयस्टोर में दरदरी सौंफ, मेथी, कलौंजी, हल्दी, लाल मिर्च, हींग और नमक को एक साथ मिला लें।सरसों के तेल को एक कड़ाही में तब तक गर्म करें जब तक इसमें से धुआं ना निकले। इसके बाद गैस बंद हो गई और तेल में खराबी आ गई। बिल्कुल गर्म तेल में मोनोजल हो सकता है।जब तेल गुनगुना हो जाए, तो इसमें तैयार किए गए मूल उत्पाद शामिल हैं। अब इस मिश्रण में सुखी हुई केरी के टुकड़े शामिल हैं और अच्छी तरह से बनाए गए हैं ताकि हर टुकड़े पर ठोस की कोटिंग हो जाए। 1 साल से ज्यादा की कीमत ‘सीक्रेट टिप्स’ अचार को कांच या चीनी मिट्टी के जार में भरें। जार में अचार को दबा-दबा कर भरा और ऊपर से इतना उपयोग तेल डाला कि अचार पूरी तरह डूब जाए। तेल आचार्य के लिए ‘सुरक्षा कवच’ का काम करता है।आचार रखने के लिए प्लास्टिक का उपयोग न करें। जार को गर्म पानी से धोकर धूप में सुखाना चाहिए ताकि कोई खरीदारी न हो।आचार विचार समय हमेशा आकर्षक का उपयोग करें। सिद्धांत ही है आचार्य के सबसे बड़े दुश्मन।अचार के विज्ञापन के बाद जार के मुंह पर सूती फैब्रिक के टुकड़े उसे 4-5 दिन से लेकर रोज 2-3 घंटे की धूप तक सुनाते हैं। इसी प्रकार अच्छे प्रकार के पाक मिलते हैं।
आम खाने के कितनी देर बाद पिएं पानी? डॉक्टर ने बताया पाचन से जुड़ा वो सच जिसे 90% लोग नहीं जानते होंगे!

Last Updated:April 09, 2026, 17:20 IST लोगों को गर्मी का मौसम बहुत पसंद होता है और इसकी एक अच्छी वजह भी है क्योंकि यह अपने साथ आमों का स्वादिष्ट स्वाद लेकर आता है. हालांकि, आम खाने को लेकर कई तरह की मान्यताएं और धारणाएं प्रचलित हैं. बड़े-बुज़ुर्ग अक्सर आम खाने के तुरंत बाद पानी न पीने की सलाह देते हैं, और चेतावनी देते हैं कि ऐसा करने से पेट में दर्द हो सकता है. How appropriate is it to drink water immediately after eating mango in summer : गर्मी का मौसम आते ही सबसे पहले हमें आम याद आते हैं. बाजार में आम देखकर ही कई लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. आम सिर्फ स्वादिष्ट नहीं होते, बल्कि शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और फाइबर भी देते हैं. लेकिन बचपन से ही हम सुनते आए हैं कि आम खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए. ये सिर्फ एक पुरानी मान्यता नहीं है, इसके पीछे सेहत से जुड़ी वजहें भी हैं. ऋषिकेश के आयुष डॉक्टर राज कुमार के अनुसार आम शरीर में गर्मी बढ़ाने वाला फल है. आम खाने के बाद हमारी पाचन प्रणाली इसे पचाने के लिए काम करना शुरू करती है. इस समय अगर तुरंत ठंडा पानी पी लिया जाए तो पेट की गर्मी अचानक कम हो जाती है. इससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है. इससे आम ठीक से पच नहीं पाता और गैस, फुलावट, एसिडिटी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. कुछ लोगों को पेट भारी लगना या असहज महसूस होना भी हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि आम खाने के बाद तुरंत पानी न पीएं, कम से कम 20 से 30 मिनट का गैप रखें. Add News18 as Preferred Source on Google इस समय शरीर खाना पचाना शुरू करता है. उसके बाद पानी पीने से कोई समस्या नहीं होती. साथ ही बहुत ठंडा पानी नहीं बल्कि कमरे के तापमान वाला या गुनगुना पानी पीना अच्छा होता है. इससे पाचन आसान रहता है. एक और जरूरी बात यह है कि आम खाने से पहले थोड़ी देर पानी में भिगोना चाहिए. हमारे बड़े लोग इस तरीके को अपनाने के पीछे वजह है. आम को पानी में भिगोने से उसमें मौजूद बाहरी गर्मी कम हो जाती है. साथ ही फल में मौजूद कुछ प्राकृतिक रसायन भी कम हो जाते हैं. ये कुछ लोगों को एलर्जी या शरीर में गर्मी बढ़ने का कारण बन सकते हैं. भिगोए हुए आम खाने से वे आसानी से पच जाते हैं. आम फल सेहत के लिए बहुत अच्छे हैं. लेकिन इन्हें सही तरीके से खाना भी उतना ही जरूरी है. अगर थोड़ी सावधानी बरती जाए तो बिना किसी परेशानी के इस स्वादिष्ट फल का मजा लिया जा सकता है. First Published : April 09, 2026, 17:01 IST
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: मोदी के मास्टरस्ट्रोक से पहले पार्टी संकल्प पत्र की घोषणा, बंगाल में 6 सीटों का ऐलान

भाजपा शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के लिए संकल्प पत्र की घोषणा कर रही है। संकल्प पत्र की घोषणा सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की जनता के लिए छह महत्वपूर्ण गारंटी की घोषणा की। पिछले कई चुनावों की बात करें तो बीजेपी ने मोदी की साख पर एक बड़ा सवाल उठाया है। बीजेपी का दावा है कि मोदी की जनता पर पूरी तरह से विश्वास है और उनका फायदा चुनाव में है। मोदी ने इन गारंटियों के साथ आकांक्षा संकल्प दिया प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी के माध्यम से राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, प्रशासन में मजबूती लाने, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सशक्त कार्रवाई करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री द्वारा दी गई गारंटी में कहा गया है कि राज्य में भाजपा सरकार डर गई और सुरक्षा का माहौल खत्म हो गया और कानून के शासन में लोगों का विश्वास बहाल हो गया। साथ ही लोकतांत्रिक तंत्र को पूरी तरह से जनता के प्रति उत्तर बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हर समर्थक, भ्रष्टाचारी के मामले, महिलाओं के खिलाफ अपराध और बलात्कार के मामलों की सामूहिकता खुलेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पीएम मोदी ने टीएमसी के शासन में शामिल किए गए को लेकर सारसाहित्य तैयार किया बैसाखी में प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को शामिल करने के लिए वह मंत्री हो या किसी अन्य को भी शामिल नहीं किया जाएगा और सभी को कानून के सिद्धांतों में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, मठ को संविधान प्रदत्त के खिलाफ सभी अधिकारों और मांगों का वादा किया गया है, जबकि अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बीजेपी सरकार बनने के बाद पश्चिम बंगाल में 7वें वेतन आयोग को लागू किया जाएगा, जिससे राज्य के सरकारी कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा. यह गारंटी देता है कि पश्चिम बंगाल में सुशासन, सुरक्षा और विकास को लेकर भाजपा की एकजुटता को खत्म किया जाए। यह भी पढ़ें: पीएम मोदी के गढ़ में ओवैसी की एंट्री, यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी का सवाल? (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)नरेंद्र मोदी(टी)बीजेपी का घोषणापत्र शुक्रवार को जारी(टी)नरेंद्र मोदी 6 गारंटी(टी)चुनाव समाचार(टी)ताजा समाचार अपडेट(टी)समाचार हिंदी(टी)पश्चिम बंगाल में नरेंद्र मोदी का भाषण(टी)पश्चिम बंगाल मोदी का भाषण(टी)ताजा समाचार अपडेट(टी)ट्रेंडिंग समाचार(टी)अपडेट समाचार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)नरेंद्र मोदी(टी)शुक्रवार को बीजेपी का घोषणापत्र जारी(टी)नरेंद्र मोदी की 6 गारंटी(टी)चुनाव समाचार(टी)ताजा समाचार अपडेट(टी)हिंदी समाचार
फरमान से शादी करने वाली मोना लिसा की उम्र की होगी जांच, पर कैसे होता है यह टेस्ट, विज्ञान के हिसाब से जानिए

Last Updated:April 09, 2026, 17:03 IST Mona Lisa Age Test: सोशल मीडिया सेंसेशन मोना लिसा ने जब से केरल के एक्टर फरमान से शादी की है तब से वह विवादों में है. कहा जा रहा है मोना लिसा नाबालिग है. इसलिए फरमान के साथ यह शादी अवैध है. ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है और केरल और मध्य प्रदेश पुलिस को 7 दिनों के अंदर जांच करने के आदेश दिए हैं. इस बीच पुलिस ने मोना लिसा की उम्र का पता लगाने के लिए ऑसिफिकेशन टेस्ट करने का फैसला किया है. अब सवाल यह है कि किसी व्यक्ति की उम्र का पता कैसे लगाया जाता है. इसका वैज्ञानिक तरीका क्या है. आइए जानते हैं. mona_lisa_0007 इंस्टाग्राम पेज से ली गई मोना लिसा और फरमान खान की फोटो. कुंभ मेले से सोशल मीडिया में रातों-रात सनसनी बनीं मोना लिसा की उम्र की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. दरअसल, उनकी उम्र को लेकर विवाद गहरा गया है. केरल के फरमान से शादी के बाद हिन्दू पक्षों ने कई जगहें शिकायतें पहुंचाई हैं. शिकायत में कहा गया है कि कुंभ के दौरान एक वीडियो में मोना लिसा ने अपनी उम्र 16 साल बताई थी. इस हिसाब से अभी उसकी उम्र 17 साल ही होगी लेकिन उम्र से संबंधित दस्तावेजों में हेरफेर कर गलत जानकारी दी गई है. ऐसे में मोना लिसा नाबालिग है और इस हिसाब से फरमान ने नाबालिग से शादी की है. इस तरह फरमान पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाए. इसी शिकायत को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस को जांच करने का आदेश दिया है. अब सवाल है कि उम्र का पता कैसे लगाया जाता है. इसका वैज्ञानिक तरीका क्या है. क्या विज्ञान इस गुत्थी को सुलझा पाएगा कि मोना लिसा शादी के वक्त नाबालिग थी या बालिग? विज्ञान के हिसाब से उम्र का पता विज्ञान में उम्र का पता लगाने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं. यह केवल एक सामान्य चेकअप नहीं बल्कि फॉरेंसिक विज्ञान की एक जटिल प्रक्रिया है जिसे ऑसिफिकेशन टेस्ट कहा जाता है. इसमें हड्डियों के जुड़ाव की स्थिति को देखा जाता है. इसके बाद डेंटल एजिंग टेस्ट है. इसमें दांतों और उसकी जड़ों की बनावट को आंका जाता है. वहीं उम्र का पता लगाने के लिए हार्मोनल और सेकेंडरी सेक्सुअल कैरेक्टर को भी आधार बनाया जाता है. फोरेंसिक साइंस में बोन डेंसिटी टेस्ट भी प्रमुख है. इसके बाद टेलोमीयर टेस्टिंग से भी इसका पता लगाया जाता है. ओसिफिकेशन टेस्ट या बोन डेंसिटी टेस्ट-विज्ञान में उम्र का अंदाजा लगाने के लिए बोन डेंसिटी टेस्ट प्रमुख है. कोई व्यक्ति नाबालिग है या बालिग, इसका पता लगाने के लिए इस टेस्ट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. इसमें एक्स-रे के जरिए हाथ की कलाई की हड्डियों के जुड़ाव की जांच की जाती है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां आपस में जुड़ती हैं. विज्ञान के हिसाब से, जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे शरीर की हड्डियां आपस में जुड़ती हैं और उनके सिरे फ्यूज होने लगते हैं. एक्स-रे और डेंटल स्कैन के जरिए डॉक्टर इन्हीं हड्डियों के घनत्व और दांतों की बनावट का विश्लेषण करते हैं. इस विश्लेषण के आधार पर यह देखा जाता है कि व्यक्ति बालिग है या नाबालिग. हालांकि इसकी सटीकता 80% से 90% तक होती है. पोषण और बीमारियों के कारण इसमें 2-3 साल का अंतर आ सकता है. दांतों का विश्लेषण-जीवित व्यक्तियों और हाल के शवों की उम्र पता करने के लिए यह सबसे सटीक तरीका है. इसमें बच्चों में दांतों के निकलने के क्रम और वयस्कों में दांतों के घिसने या एस्पार्टिक एसिड रेसमीकरण की जांच की जाती है. बच्चों और किशोरों में यह 95% तक सटीक होता है लेकिन वयस्कों में इसमें 5-10 साल का अंतर आ सकता है. टेलोमेयर विश्लेषण-टेलोमेयर टेस्ट जेनेटिक टेस्ट है. यह उम्र पता करने की एक आधुनिक जेनेटिक विधि है. वास्तव में हमारे डीएनए के सिरों पर टेलोमेयर्स होते हैं. हर बार जब कोशिका विभाजित होती है, टेलोमेयर्स छोटे हो जाते हैं. इनकी लंबाई मापकर बायोलॉजिकल एज का पता लगाया जाता है. यह बायोलॉजिकल उम्र बताने में तो सटीक है लेकिन क्रोनोलॉजिकल उम्र (जन्म तिथि के हिसाब से) बताने में इसमें 5-8 साल का अंतर हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp,आपके सवालों का हम देंगे जवाब. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 09, 2026, 17:03 IST
डायबिटीज के मरीजों के लिए बड़ी राहत! इन दूध के सेवन से कम हो सकता है शुगर

Last Updated:April 09, 2026, 16:47 IST डायबिटीज़ के मरीज अक्सर इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि उन्हें किस तरह के दूध का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर आप अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो आपको इस बात पर खास ध्यान देना चाहिए कि आप किस तरह का दूध पी रहे हैं चाहे वह डेयरी-बेस्ड हो या प्लांट-बेस्ड. डायबिटीज़ से जूझ रहे लोगों को अक्सर अपने खाने-पीने को लेकर कई सवाल होते हैं. चाय या कॉफी पीने वालों को समझ नहीं आता कि कौन सा दूध इस्तेमाल करें. अगर आप अपने खून में शुगर लेवल कंट्रोल करना चाहते हैं, तो आपको जो दूध पीते हैं उस पर ध्यान देना चाहिए. चाहे वो डेयरी दूध हो या प्लांट बेस्ड दूध, हर तरह का दूध आपके ग्लूकोज लेवल पर अलग असर डालता है. MSN वेबसाइट और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अच्छा दूध चुनते समय तीन बातें ध्यान में रखनी चाहिए. कम कार्बोहाइड्रेट, बिना शक्कर और अच्छा प्रोटीन वाला दूध पीना चाहिए. इससे डायबिटीज़ स्पाइक कम होते हैं और एनर्जी भी बनी रहती है. दूध चुनना क्यों जरूरी है?: दूध में मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स शरीर में शुगर में बदल जाते हैं और सीधा ब्लड ग्लूकोज लेवल पर असर डालते हैं. अगर एक साथ ज्यादा कार्बोहाइड्रेट्स ले लिए जाएं, खासकर टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज़ वालों के लिए, तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. इसलिए सही दूध चुनना ही नहीं, बल्कि आप कितना पीते हैं ये भी जरूरी है. पूरे दिन कार्बोहाइड्रेट्स को बराबर मात्रा में लेना भी जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google सोया दूध: सोया दूध को खून में शुगर कंट्रोल करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. इसमें कम कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा प्रोटीन का बैलेंस होता है. एक कप दूध में करीब 8–9 ग्राम प्रोटीन होता है, जो शुगर के अवशोषण को धीमा करता है. इससे ग्लूकोज धीरे-धीरे खून में जाता है और शुगर स्पाइक नहीं होता. इसमें फाइबर भी होता है, जो शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है. लेकिन हमेशा बिना मीठा वाला सोया दूध ही चुनें. बकरी का दूध: बकरी के दूध में अच्छे पोषक तत्व होते हैं. इसमें मीडियम मात्रा में प्रोटीन भी है. लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट और नेचुरल शुगर ज्यादा होती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. इसलिए इसे पूरी तरह से छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए. बादाम दूध: बादाम दूध में कार्बोहाइड्रेट कम होते हैं, बिना मीठा वर्जन में तो शक्कर भी नहीं होती. इसलिए ये ग्लूकोज लेवल पर कम असर डालता है. लेकिन इसमें प्रोटीन भी कम होता है, जिससे पेट ज्यादा देर तक भरा नहीं रहता. इसलिए ड्राई फ्रूट्स या अंडे जैसे प्रोटीन वाले खाने के साथ लेना बेहतर है. गाय का दूध: खून में शुगर कंट्रोल करने के लिए गाय का दूध आखिरी विकल्प है. एक कप में करीब 12 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है. इसमें लैक्टोज नाम की नेचुरल शुगर भी होती है. इससे ग्लूकोज लेवल जल्दी बढ़ सकता है. प्रोटीन के अलावा, ज्यादा कार्बोहाइड्रेट की वजह से ये इस्तेमाल के लिए ज्यादा सही नहीं है. कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन का क्या रोल है?.. दूध में सिर्फ कार्बोहाइड्रेट ही नहीं, बल्कि फैट और प्रोटीन भी शुगर पर असर डालते हैं. ज्यादा कैलोरी वाला खाना पचने में टाइम लेता है, जिससे कार्बोहाइड्रेट का असर बदल जाता है. इसलिए डॉक्टर अक्सर कोलेस्ट्रॉल या कैलोरी फ्री दूध पीने की सलाह देते हैं. इससे कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं. असल खतरा तो मिलाई गई चीनी है. बिना चीनी वाले कई पैक्ड दूध, सिरप और फ्लेवर मिलते हैं. लेकिन ये आपके खून में शुगर लेवल जल्दी बढ़ा सकते हैं. इसलिए लेबल पढ़ना बहुत जरूरी है. First Published : April 09, 2026, 16:47 IST
मंडला में सड़क के बीच से हटेगा बिजली पोल:नेहरू स्मारक-बिंझिया रोड निर्माण में लापरवाही के बाद बिजली विभाग ने की कार्रवाई

मंडला में नेहरू स्मारक से बिंझिया तिराहा तक निर्माणाधीन सड़क के बीच में खड़े बिजली के पोल शिफ्ट करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। 94 लाख रुपए की लागत वाली इस सड़क के डामरीकरण में बाधा बन रहे खंभों को हटाए बिना ही काम किए जाने पर विभाग ने संज्ञान लिया है। डामरीकरण से पहले पोल नहीं हटाया नगर की 800 मीटर लंबी इस सड़क का निर्माण बिना बिजली के पोल और पेड़ों को हटाए शुरू कर दिया गया था। सड़क के बीचों-बीच खड़े इन खंभों के कारण भविष्य में गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई थी, जिसे देखते हुए अब पोल हटाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। स्थानीय निवासी आनंद प्रकाश तिवारी सहित अन्य नागरिकों ने पोल शिफ्टिंग कार्य शुरू होने पर संतोष व्यक्त किया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण के दौरान की गई इस अनदेखी से आमजन की सुरक्षा खतरे में थी, जो अब पोल हटने से सुधरेगी। बिजली कंपनी ने संभाला मोर्चा लापरवाही उजागर होने के बाद बिजली विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तकनीकी कार्य शुरू किया। हालांकि, इस संबंध में बिजली विभाग के एसई अयूब खान से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल बिना बाधाओं को हटाए सड़क निर्माण कार्य शुरू किए जाने से लोगों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अब शेष डामरीकरण का कार्य खंभे हटने के बाद निर्धारित मानकों और सुरक्षा नियमों के अनुसार पूरा किया जाएगा।









