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5 साल के बच्चे का वजन सिर्फ 5.5 किलो:SAM रोग से जूझ रहा था; भोपाल एम्स में लाइफ-सेविंग ट्रीटमेंट से मिली नई जिंदगी

5 साल के बच्चे का वजन सिर्फ 5.5 किलो:SAM रोग से जूझ रहा था; भोपाल एम्स में लाइफ-सेविंग ट्रीटमेंट से मिली नई जिंदगी

भोपाल में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने कुपोषण की गंभीरता को फिर उजागर कर दिया। 5 साल का बच्चा, जिसका वजन महज 5.5 किलो था, गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) से जूझ रहा था। हालत इतनी खराब थी कि बच्चा खाना तक नहीं खा पा रहा था और शरीर में पानी की भी कमी हो गई थी। उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कर 10 दिन तक लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट दिया गया। डॉक्टरों की टीम की निगरानी और विशेष पोषण आहार की मदद से बच्चे की हालत में सुधार हुआ और उसे नई जिंदगी मिल सकी। भोपाल एम्स में 58 माह के इस बच्चे को अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, खाना न खाने और पेशाब कम होने की शिकायत के साथ लाया गया था। जांच में सामने आया कि बच्चा गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) का शिकार है। उसका वजन केवल 5.5 किलोग्राम था, जबकि इस उम्र में सामान्य वजन करीब 18 किलोग्राम होना चाहिए। इसके साथ ही बच्चे को एनीमिया, शरीर में पानी की कमी और विटामिन D की कमी जैसी समस्याएं भी थीं। PICU में शुरू हुआ लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट बच्चे की हालत को देखते हुए उसे तुरंत पीआईसीयू (बाल गहन चिकित्सा इकाई) में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों ने लगातार निगरानी में इलाज शुरू किया। SAM प्रोटोकॉल के तहत उसे विशेष पोषण आहार F-75 और F-100 दिया गया, जिससे धीरे-धीरे उसकी स्थिति स्थिर हुई। इसके बाद ऐसा डाइट प्लान तैयार किया गया, जिसे घर पर भी जारी रखा जा सके। 10 दिन में दिखा असर, बढ़ा वजन करीब 10 दिनों के इलाज के बाद बच्चे की हालत में सुधार दिखने लगा। उसका वजन बढ़कर 6.06 किलोग्राम हो गया और वह सामान्य रूप से खाना लेने लगा। डिस्चार्ज के समय डॉक्टरों ने परिजनों को नियमित फॉलो-अप, संतुलित आहार और बच्चे की ग्रोथ पर नजर रखने की सलाह दी। एक महीने में और सुधार इलाज के एक महीने बाद जब बच्चे की दोबारा जांच की गई, तो उसका वजन बढ़कर 7.8 किलोग्राम हो गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, यह सुधार इस बात का संकेत है कि सही समय पर इलाज और पोषण मिलने से गंभीर कुपोषण को भी नियंत्रित किया जा सकता है। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने बच्चे के माता-पिता को भी प्रशिक्षित किया। उन्हें बताया गया कि घर पर किस तरह से उच्च कैलोरी और संतुलित आहार तैयार करें और बच्चे को सही तरीके से खिलाएं। इससे बच्चे के लंबे समय तक स्वस्थ रहने की संभावना बढ़ जाती है। कुपोषण को हल्के में न लें विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बच्चे का वजन उम्र के अनुसार नहीं बढ़ रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुपोषण केवल शरीर को कमजोर नहीं करता, बल्कि मानसिक और बौद्धिक विकास पर भी असर डालता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अभिभावक नियमित रूप से बच्चों का वजन जांचते रहें और जरूरत पड़ने पर आंगनवाड़ी या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

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