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The experts whose advice is not available for referrals are missing, leaving critical patients waiting for precious moments.

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सागर17 मिनट पहलेलेखक: मधुर तिवारी

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जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा जारी एक आदेश ने मरीजों, घायलों की जान संकट में डाल दी है। 6 अप्रैल को जारी इस आदेश में कहा गया है कि इमरजेंसी ड्यूटी करने वाले मेडिकल ऑफिसर किसी भी मरीज को बिना विशेषज्ञ की सहमति के रेफर नहीं करेंगे, यदि रेफर किया तो कार्रवाई होगी। अब ड्यूटी डॉक्टर हेड इंजुरी वाले अति गंभीर मरीजों को भी रेफर करने से बच रहे हैं।

मरीजों को न इलाज, न ही विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाहमिल रही है। यहां हर रोज इमरजेंसी के दौरान औसत 60-70 मरीज पहुंचते हैं, इनमें से 15-20 मरीज अति गंभीर होते हैं। इसके बाद भी जिला अस्पताल में दोपहर 2 बजे के बाद एक्स-रे, रात 8 बजे के बाद सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है, वहीं रात 9 बजे मेडिकल स्टोर में भी ताला लटक जाता है। सिविल सर्जन डॉ. आरएस जयंत का कहना है कि बेमतलब रेफर रोकने आदेश किया है। मरीज की स्थिति देख डॉक्टर रेफर का निर्णय ले सकते है।

सिर में चोट पर भी रेफर नहीं, दोपहर 2 बजे एक्स-रे, रात 9 बजे मेडिकल स्टोर पर ताला

इमरजेंसी में सीएस और आरएमओ ने फोन नहीं उठाया

शनिवार शाम 5:30 बजे बाघराज वार्ड निवासी कंचन शुक्ला अपने 4 साल के बेटे को लेकर जिला अस्पताल पहुंची। बच्चे की नाक के अंदर साड़ी, सूट आदि में लगने वाला प्लास्टिक का सितारा फंसा हुआ था। ड्यूटी पर मौजूद डॉ. वीरेंद्र ठाकुर ने प्रयास किया, लेकिन वह सितारा नहीं निकला। ओपीडी का समय था, लेकिन ईएनटी ओपीडी में डॉक्टर नहीं थे। महिला ने सिविल सर्जन व आरएमओ को फोन लगाया, लेकिन दोनों के फोन रिसीव नहीं हुए। इसके बाद महिला बच्चे को लेकर बीएमसी चली गईं। जहां डॉक्टर ने बच्चे की नाक में फंसा प्लास्टिक निकाल दिया।

विशेषज्ञ फोन के बाद भी नहीं आईं , बोलीं-सुबह आकर देख लूंगी शनिवार शाम करीब 7 बजे मकरोनिया निवासी अभय सेन अपने साढ़े तीन साल के बेटे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। बेटे की नाक में खेलते समय कंकड़ फंस गया। ड्यूटी डॉक्टर ने ईएनटी विभाग की डॉ. अंकिता को फोन करने स्थिति बताई और अस्पताल बुलाया तो उनका कहना था कि यह कोई इमरजेंसी नहीं है, आप बच्चे को भर्ती कर लो, सुबह आकर देख लूंगी। इसके बाद अभय भी वहां से बीएमसी चले गए और वहां डॉक्टर ने नाक में फंसा कंकड़ निकाल दिया।

चार घंटे सामान्य इलाज, रात 3 बजे बीएमसी रेफर किया

सोमवार 13 अप्रैल की रात नरयावली थाना क्षेत्र के मारा इमलिया गांव निवासी अजय अहिरवार सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसे एम्बुलेंस से जिला अस्पताल भेजा। अजय के सिर में गंभीर चोट थी, कान से खून निकल रहा था। रात 11 बजे ड्यूटी पर केवल मेडिकल ऑफिसर थे, विशेषज्ञ से संपर्क नहीं हुआ तो उसे वार्ड में भर्ती कर दिया। 4 घंटे सामान्य इलाज के बाद रात 3 बजे उसे बीएमसी रेफर किया गया।

शाम की ओपीडी में नहीं पहुंच रहे डॉक्टर

जिला अस्पताल में शाम 5 से 6 बजे तक ओपीडी चलती है। शनिवार शाम 5:30 बजे देखा तो केवल दो डॉक्टर ड्यूटी पर मिले। इसमें एक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. संतोष पटेल थे और दूसरे मेडिकल ऑफिसर डॉ. वीरेंद्र ठाकुर। इसके अलावा नाक-कान-गला, हड्डी रोग, सर्जिकल व मेडिसिन विभाग की ओपीडी में एक भी डॉक्टर नहीं मिला। यह स्थिति शनिवार की नहीं, बल्कि रोज ही रहती है।

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जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा जारी एक आदेश ने मरीजों, घायलों की जान संकट में डाल दी है। 6 अप्रैल को जारी इस आदेश में कहा गया है कि इमरजेंसी ड्यूटी करने वाले मेडिकल ऑफिसर किसी भी मरीज को बिना विशेषज्ञ की सहमति के रेफर नहीं करेंगे, यदि रेफर किया तो कार्रवाई होगी। अब ड्यूटी डॉक्टर हेड इंजुरी वाले अति गंभीर मरीजों को भी रेफर करने से बच रहे हैं।

मरीजों को न इलाज, न ही विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाहमिल रही है। यहां हर रोज इमरजेंसी के दौरान औसत 60-70 मरीज पहुंचते हैं, इनमें से 15-20 मरीज अति गंभीर होते हैं। इसके बाद भी जिला अस्पताल में दोपहर 2 बजे के बाद एक्स-रे, रात 8 बजे के बाद सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है, वहीं रात 9 बजे मेडिकल स्टोर में भी ताला लटक जाता है। सिविल सर्जन डॉ. आरएस जयंत का कहना है कि बेमतलब रेफर रोकने आदेश किया है। मरीज की स्थिति देख डॉक्टर रेफर का निर्णय ले सकते है।

सिर में चोट पर भी रेफर नहीं, दोपहर 2 बजे एक्स-रे, रात 9 बजे मेडिकल स्टोर पर ताला

इमरजेंसी में सीएस और आरएमओ ने फोन नहीं उठाया

शनिवार शाम 5:30 बजे बाघराज वार्ड निवासी कंचन शुक्ला अपने 4 साल के बेटे को लेकर जिला अस्पताल पहुंची। बच्चे की नाक के अंदर साड़ी, सूट आदि में लगने वाला प्लास्टिक का सितारा फंसा हुआ था। ड्यूटी पर मौजूद डॉ. वीरेंद्र ठाकुर ने प्रयास किया, लेकिन वह सितारा नहीं निकला। ओपीडी का समय था, लेकिन ईएनटी ओपीडी में डॉक्टर नहीं थे। महिला ने सिविल सर्जन व आरएमओ को फोन लगाया, लेकिन दोनों के फोन रिसीव नहीं हुए। इसके बाद महिला बच्चे को लेकर बीएमसी चली गईं। जहां डॉक्टर ने बच्चे की नाक में फंसा प्लास्टिक निकाल दिया।

विशेषज्ञ फोन के बाद भी नहीं आईं , बोलीं-सुबह आकर देख लूंगी शनिवार शाम करीब 7 बजे मकरोनिया निवासी अभय सेन अपने साढ़े तीन साल के बेटे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। बेटे की नाक में खेलते समय कंकड़ फंस गया। ड्यूटी डॉक्टर ने ईएनटी विभाग की डॉ. अंकिता को फोन करने स्थिति बताई और अस्पताल बुलाया तो उनका कहना था कि यह कोई इमरजेंसी नहीं है, आप बच्चे को भर्ती कर लो, सुबह आकर देख लूंगी। इसके बाद अभय भी वहां से बीएमसी चले गए और वहां डॉक्टर ने नाक में फंसा कंकड़ निकाल दिया।

चार घंटे सामान्य इलाज, रात 3 बजे बीएमसी रेफर किया

सोमवार 13 अप्रैल की रात नरयावली थाना क्षेत्र के मारा इमलिया गांव निवासी अजय अहिरवार सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसे एम्बुलेंस से जिला अस्पताल भेजा। अजय के सिर में गंभीर चोट थी, कान से खून निकल रहा था। रात 11 बजे ड्यूटी पर केवल मेडिकल ऑफिसर थे, विशेषज्ञ से संपर्क नहीं हुआ तो उसे वार्ड में भर्ती कर दिया। 4 घंटे सामान्य इलाज के बाद रात 3 बजे उसे बीएमसी रेफर किया गया।

शाम की ओपीडी में नहीं पहुंच रहे डॉक्टर

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