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महिला से घर में घुसकर बदसलूकी, पति पर हमला:तीन दिन बाद भी आरोपी गिरफ्तार नहीं, एसपी से शिकायत

महिला से घर में घुसकर बदसलूकी, पति पर हमला:तीन दिन बाद भी आरोपी गिरफ्तार नहीं, एसपी से शिकायत

झाबुआ के थांदला थाना क्षेत्र के वडलीपाड़ा गांव में एक महिला से घर में घुसकर बदसलूकी और उसके पति पर जानलेवा हमले का मामला सामने आया है। आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। परेशान होकर सोमवार को महिला दीतू बाई अपने पति मुकेश और परिजनों के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने एसपी डॉ. शिवदयाल से सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पीड़ित ने बताया कि घटना 3 अप्रैल की शाम करीब 5:30 बजे की है। वह अपने घर पर अकेली थीं। गांव का निवासी कानू पिता रुमाल भूरिया जबरन घर में घुस आया हाथ पकड़ लिया। जब महिला ने शोर मचाया, तो आरोपी ने मुंह दबाकर जान से मारने की कोशिश की। पीड़िता ने तत्काल थांदला थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी कानू के खिलाफ बीएनएस की धारा 296(a), 115(2) और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया। रिपोर्ट दर्ज कराकर लौटते समय उसी रात आरोपी कानू ने अपने साथियों के साथ मिलकर पीड़िता के पति मुकेश और भतीजे सुभाष पर हमला कर दिया। इस हमले में दोनों को गंभीर चोटें आईं और उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस दूसरे हमले के संबंध में भी थांदला पुलिस ने 4 अप्रैल को आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 126(2), 296(a), 115(2), 351(3) एवं 3(5) के तहत एक और मामला दर्ज किया। पीड़िता का आरोप है कि दो एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है। उन्होंने एसपी को बताया कि उनके पति और भतीजे के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। परिवार दहशत में है। एसपी डॉ. शिवदयाल ने पीड़िता को उचित वैधानिक कार्रवाई और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है।

पंजाबी सिंगर दीपा दोसांझ का निधन:इंग्लैंड में आया हार्ट अटैक, जालंधर के रहने वाले; ढोला वे ढोला गीत से मिली थी पहचान

पंजाबी सिंगर दीपा दोसांझ का निधन:इंग्लैंड में आया हार्ट अटैक, जालंधर के रहने वाले; ढोला वे ढोला गीत से मिली थी पहचान

जालंधर के दोसांझ कलां के रहने वाले और पंजाबी सिंगर दीपा दोसांझ का हार्ट अटैक आने से निधन हो गया। ढोला वे ढोला गीत से फेम दीपा इन दिनों इंग्लैंड के लीसेस्टर में रहे थे। मशहूर पंजाबी सिंगर और कंपोजर सुखशिंदर शिंदा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर गायक दीपा दोसांझ के निधन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पोस्ट शेयर कर लिखा, आज पंजाबी संगीत जगत ने एक सच्चा रत्न खो दिया। दीपा दोसांझ पंजाबी संगीत जगत और यूके भांगड़ा इंडस्ट्री से जुड़े थे। 90 के दशक के सुपरहिट सिंगर रहे हैं। दीपा ने ढोला वे ढोला जैसे सदाबहार गीतों के जरिए घर-घर में पहचान बनाई थी। जानकारी के अनुसार दीपा दोसांझ का निधन अचानक हेल्थ बिगड़ने के कारण हुआ। सोशल मीडिया और संगीत हलकों में उनके निधन का कारण दिल का दौरा बताया जा रहा है। हालांकि परिवार की ओर से अभी कारण की पुष्टि नहीं की गई है। उनके अचानक निधन से न केवल उनके फैंस बल्कि पूरा पंजाबी कलाकार भाईचारा सदमे में है। जालंधर के दोसांझ कलां से था गहरा नाता दीपा दोसांझ मूल रूप से पंजाब के जालंधर जिले के मशहूर गांव दोसांझ कलां से ताल्लुक रखते थे। हालांकि वे लंबे समय से ब्रिटेन में बस गए थे, लेकिन उन्होंने अपनी गायकी में हमेशा पंजाब की मिट्टी की महक को जिंदा रखा। गौरतलब है कि इसी गांव से मशहूर ग्लोबल स्टार दिलजीत दोसांझ भी आते हैं। दीपा ने दिलजीत से पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोसांझ नाम को बड़ी पहचान दिला दी थी। 90 के दशक के अंत में संगीत की दुनिया में आए दीपा दोसांझ को उनके हाई-पिच गायन और पारंपरिक बोलियों के लिए जाना जाता था। उन्होंने 90 के दशक के अंत में संगीत की दुनिया में कदम रखा और ढोला वे ढोला एल्बम से रातों-रात स्टार बन गए। उनके नसीबा, जी करदा, वधाइयां और दीपा बोलियां जैसे गाने आज भी शादियों और पार्टियों की जान हैं। उन्होंने बड़े म्यूजिक प्रोड्यूसर्स के साथ मिलकर यूके भांगड़ा सीन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने वालों का लगा तांता दीपा के निधन की खबर फैलते ही फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) पर प्रशंसकों और साथी कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया है। प्रशंसकों का कहना है कि दीपा दोसांझ की आवाज ने एक पूरे दौर को नई पहचान दी थी और उनके जाने से पंजाबी लोक संगीत के एक युग का अंत हो गया है।

कॉकरोच से गलत नहीं डरती लड़कियां…आज के बाद आप भी खाओगे खौफ, जानिए ये कितने खतरनाक

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Last Updated:April 06, 2026, 16:23 IST Cockroaches Caused Diseases : क्या आप भी कॉकरोच से डरने वालों का मजाक उड़ाते रहे हैं. अगर ऐसा है तो ये न करें. डॉक्टरों के हिसाब से भी कॉकरोच से डरना जरूरी है. लोकल 18 से आगरा के चिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल कहते हैं कि कॉकरोच से टाइफाइड, हैजा (कॉलरा), पेचिश, डायरिया और पेट के गंभीर संक्रमण जैसी बीमारियां हो सकती हैं. इनके मलमूत्र से गंभीर एलर्जी और अस्थमा भी हो सकता है. डॉ. आशीष के मुताबिक, कॉकरोच अपने साथ कई तरह की गंदगी लाते हैं. आगरा. घरों में कॉकरोच दिखना आम बात है. अक्सर कॉकरोच गंदी जगहों से होकर कई बार किचन तक पहुंच जाते है. ये किचन में रखे बर्तन और खाने को दूषित कर सकते हैं, जिससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल बताते हैं कि कॉकरोच से टाइफाइड, हैजा (कॉलरा), पेचिश, डायरिया और पेट के गंभीर संक्रमण जैसी बीमारियां हो सकती हैं. कॉकरोच साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया फैलाते हैंजो दूषित भोजन के माध्यम से पेट में संक्रमण, तेज बुखार, उल्टी और पेट दर्द का कारण बन सकते हैं. डॉ. आशीष बताते हैं कि इनके मलमूत्र से गंभीर एलर्जी और अस्थमा भी हो सकता है. इससे बचने के लिए खाने को ढक कर रखें. बर्तन को इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छे से जरूर धुलें. कितना जोखिम डॉ. आशीष के मुताबिक, कॉकरोच अपने साथ कई तरह की गंदगी लाते हैं. खाने के बर्तन को गंदा कर सकते हैं. खुले में रखा खाना भी कॉकरोच के संपर्क में आने से दूषित हो सकता है. ऐसे खाने से टाइफाइड होने का डर रहता है. यदि बुखार, पेट दर्द तीन दिनों से ज्यादा समय तक रहे तो अपने नजदीकी चिकित्सक से परामर्श करना बेहद जरूरी है. कई बार मरीज लापरवाही कर देते हैं जो कई बार जोखिम भरा भी हो सकता है. और क्या करें डॉ. आशीष बताते हैं कि खाना खाने से पहले इस्तेमाल करने वाले बर्तन को अच्छे से जरूर धोएं. हाथों को भी धोकर ही खाना खाना चाहिए. पका हुआ या कच्चा खाना, फल आदि को हमेशा किसी बर्तन से ढक कर रखें. घरों ने यदि कॉकरोच हैं तो उनके रास्तों को ब्लॉक कर दें.  किचन में दरार, गड्डों आदि जगहों को बंद कर दें ताकि कॉकरोच या दूसरे कोई कीट वहां छुपे न. बाहर मिलने वाले सोल्यूशन का भी इस्तेमाल कर उन्हें भगाया जा सकता है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Agra,Uttar Pradesh First Published : April 06, 2026, 16:23 IST

सीधी में 6000 वर्गमीटर में भाजपा का हाईटेक भवन:डेढ़ करोड़ की लागत से बनेगा, सांसद-विधायक ने किया भूमिपूजन

सीधी में 6000 वर्गमीटर में भाजपा का हाईटेक भवन:डेढ़ करोड़ की लागत से बनेगा, सांसद-विधायक ने किया भूमिपूजन

सीधी शहर में भारतीय जनता पार्टी के नए जिला कार्यालय के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सोमवार को भारत होटल के पास स्थित शासकीय जमीन पर विधिवत भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम सुबह 11:00 बजे शुरू हुआ, जिसमें जिले और प्रदेश स्तर के कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे। भूमिपूजन कार्यक्रम में सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा, सीधी विधायक रीती पाठक, धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम, सिहावल विधायक विश्वामित्र पाठक और भाजपा जिलाध्यक्ष देव कुमार सिंह चौहान प्रमुख रूप से मौजूद थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम से जुड़े। उन्होंने एक साथ प्रदेश के 18 जिलों में भाजपा कार्यालयों के भूमिपूजन कार्यक्रमों में सहभागिता की, जिसमें सीधी जिला भी शामिल था। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी सुरेंद्र मणि द्विवेदी ने बताया कि सीधी में बनने वाला यह कार्यालय लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा। यह भवन करीब 6000 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित होगा और आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। प्रस्तावित भवन में एक विशाल मीटिंग हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम, डिजिटल सुविधाएं, कंप्यूटर कक्ष और कार्यकर्ताओं के लिए व्यवस्थित बैठने की जगह शामिल होगी। इसमें छोटे गेस्ट रूम भी बनेगा। कार्यालय संगठनात्मक गतिविधियों के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन का केंद्र भी बनेगा। भवन का निर्माण कार्य करीब एक वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है।

राज्यसभा में 19 नए सदस्यों ने शपथ ली:शरद पवार व्हीलचेयर पर पहुंचे; 16 अप्रैल से तीन दिन का विशेष सत्र

राज्यसभा में 19 नए सदस्यों ने शपथ ली:शरद पवार व्हीलचेयर पर पहुंचे; 16 अप्रैल से तीन दिन का विशेष सत्र

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) प्रमुख शरद पवार समेत 19 नए और दोबारा चुने गए राज्यसभा सदस्यों ने सोमवार को शपथ ली। शरद पवार व्हीलचेयर पर शपथ लेने के लिए संसद पहुंचे। शपथ लेने वालों में 5 महाराष्ट्र, 3 ओडिशा, 6 तमिलनाडु और 5 पश्चिम बंगाल के सदस्य है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में सभी सदस्यों को शपथ दिलाई गई। 16 अप्रैल से तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। दरअसल, 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटें 2 अप्रैल को खाली हुई थीं। इन सीटों के 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे, जबकि बाकी 11 सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग हुई। शपथग्रहण की दो तस्वीरें… इन सदस्यों ने शपथ ली… 16 अप्रैल से राज्यसभा का विशेष सत्र सांदसों के शपथ ग्रहण का आयोजन ऐसे समय हुआ, जब संसद का सत्र नहीं चल रहा है। हालांकि इस मौके पर उप सभापति हरिवंश और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू भी मौजूद थे। किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर सभी दलों से साथ आने की अपील की। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से बुलाया जाएगा। 16, 17 और 18 अप्रैल को सदन में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े अहम बिल पर चर्चा की जाएगी। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं। प्रस्तावित 50% की बढ़ोतरी के साथ सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिसमें से 273 (करीब एक तिहाई) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार ने 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण विधेयक पेश किया था। उसी दौरान इस बिल को आधिकारिक रूप से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा गया। किरेन रिजिजू ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश का है और इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस और कुछ अन्य दल अभी आगे नहीं आए हैं, लेकिन उनसे विरोध की उम्मीद नहीं है। 16 मार्च: राज्यसभा चुनाव में NDA ने 11 में 9 सीटें जीतीं, 26 सांसद निर्विरोध चुने गए थे हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुआ था। इनमें 9 सीटों पर NDA कैंडिडेट्स या NDA समर्थित कैंडिडेट्स ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की। राज्यवार सीटों की बात करें तो बिहार की सभी पांचों सीटों पर NDA प्रत्याशी विजयी रहे। ओडिशा की 4 सीटों में से 3 NDA और 1 बीजद उम्मीदवार ने जीती। हरियाणा की दो सीटों में से एक पर भाजपा और एक पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। पूरी खबर पढ़ें… ———– ये खबर भी पढ़ें… राज्यसभा की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव:इनमें 25 सीटें विपक्ष, एनडीए की 12; पवार, सिंघवी का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव कराया जाएगा। जो सीटें खाली हो रही हैं उनमें 12 एनडीए के पास हैं, 25 पर विपक्ष का कब्जा है। पूरी खबर पढ़ें…

Health Tips: अनिद्रा और माइग्रेन से परेशान? रात को दूध में ये चीज मिलाकर पिएं, मिलेगी गहरी और सुकून भरी नींद

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Last Updated:April 06, 2026, 15:34 IST Health Tips: अनिद्रा और माइग्रेन जैसी समस्याएं आजकल आम हो गई हैं, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित होती है। ऐसे में एक आसान घरेलू उपाय काफी फायदेमंद हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में जायफल मिलाकर पीने से नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है और माइग्रेन में भी राहत मिल सकती है। जायफल में मौजूद प्राकृतिक गुण तनाव को कम करने और दिमाग को शांत करने में मदद करते हैं। नियमित रूप से इस उपाय को अपनाने से शरीर को आराम मिलता है और नींद गहरी आती है. अनिद्रा और माइग्रेन की समस्या लोगों में बढ़ती जा रही है. इसके लिए हल्दी वाला दूध बहुत फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेदिक डॉक्टर महेश कुमार ने बताया कि यह घरेलू उपाय बहुत कारगर होता है. उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में हल्दी को प्राकृतिक एंटीसेप्टिक, एंटीऑक्सीडेंट और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला तत्व बताया गया है. दूध के साथ इसका सेवन करने से शरीर को अंदर से पोषण मिलता है और मानसिक तनाव भी कम होता है, जिससे नींद बेहतर होती है. माइग्रेन और अनिद्रा के रोगियों के लिए हल्दी वाला दूध विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्व सूजन को कम करता है और सिरदर्द में राहत देता है. रोजाना सोने से पहले गुनगुना हल्दी दूध पीने से दिमाग शांत होता है, जिससे गहरी और सुकून भरी नींद आने में मदद मिलती है. यह आदत लंबे समय में नींद की कमी की समस्या को भी सुधार सकती है. इसके अलावा यह पाचन तंत्र की समस्याओं जैसे गैस, अपच और कब्ज में भी हल्दी वाला दूध फायदेमंद साबित होता है. हल्दी पाचन क्रिया को सुधारती है और आंतों को स्वस्थ रखने में मदद करती है. यदि दूध में थोड़ी सी मिश्री या शहद मिलाकर पिया जाए तो इसका स्वाद भी बढ़ जाता है और पेट से जुड़ी परेशानियों में जल्दी राहत मिलती है. इसके नियमित सेवन से पेट साफ रहने लगता है. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताया कि हल्दी वाला दूध केवल बड़ों के लिए ही नहीं बल्कि बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने में भी कारगर औषधि है. बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी-खांसी और वायरल संक्रमण का खतरा अधिक रहता है. ऐसे में रात को हल्दी वाला दूध देने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और वे बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनते हैं. इसके अलावा चोट, सूजन और शरीर दर्द में भी हल्दी दूध काफी असरकारक माना जाता है. हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो अंदरूनी चोटों और मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद करते हैं. खेल-कूद या दिनभर की थकान के बाद रात को हल्दी वाला दूध पीने से शरीर को आराम मिलता है और रिकवरी जल्दी होती है. डॉक्टर भी आमतौर पर ऐसी स्थिति में हल्दी वाला दूध पीने की सलाह देते हैं. आयुर्वेदिक डॉक्टर नरेंद्र कुमार ने बताया कि इस गैस और कब्ज की परेशानी में भी हल्दी दूध पीने से आराम मिलता है. उन्होंने बताया कि कब्ज के दौरान दूध नॉर्मल टेम्प्रेचर का होना चाहिए ज्यादा गर्म नहीं. रोज रात को हल्दी वाले दूध में 2-3 दाने चीनी या मिश्री के डालकर सोएं. कुछ ही दिनों में कब्ज और गैस की परेशानी से राहत मिल जाएगी. First Published : April 06, 2026, 15:34 IST

दिल्ली विधानसभा का बैरियर तोड़कर घुसी कार:VIP गेट से एंट्री की, ड्राइवर ने गुलदस्ता रखा और फरार हुआ

दिल्ली विधानसभा का बैरियर तोड़कर घुसी कार:VIP गेट से एंट्री की, ड्राइवर ने गुलदस्ता रखा और फरार हुआ

दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में सोमवार दोपहर चूक हुई है। अज्ञात कार सवार वीआईपी गेट नंबर 2 की बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर घुसा। सूत्रों के मुताबिक, कार चालक ने अंदर गुलदस्ता रखा और मौके से कार लेकर फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलने पर दिल्ली पुलिस कार की तलाश में जुटी गई है। घटना की 3 तस्वीरें… खबर लगातार अपडेट की जा रही है…

अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर रिलीज:राजपाल और परेश रावल के साथ पुराने अंदाज में दिखे; 16 अप्रैल से पेड प्रिव्यूज

अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर रिलीज:राजपाल और परेश रावल के साथ पुराने अंदाज में दिखे; 16 अप्रैल से पेड प्रिव्यूज

अक्षय कुमार की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘भूत बंगला’ का ट्रेलर आखिरकार रिलीज हो गया है। प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी इस फिल्म का ट्रेलर दर्शकों को पुराने दिनों की याद दिलाता है। इसमें अक्षय कुमार के साथ उनकी पुरानी कॉमेडी टीम यानी परेश रावल और राजपाल यादव भी नजर आ रहे हैं। फिल्म में हॉरर और कॉमेडी का वैसा ही बैलेंस दिख रहा है, जिसके लिए अक्षय और प्रियदर्शन की जोड़ी जानी जाती है। ट्रेलर को देखकर लग रहा है कि मेकर्स ने इसे बिना किसी तामझाम के काफी सरल और मनोरंजक रखा है। पुराने अंदाज में दिखे अक्षय और प्रियदर्शन फिल्म का ट्रेलर उस विंटेज स्पेस में ले जाता है, जिसमें अक्षय और प्रियदर्शन सालों से काम करते आए हैं। ट्रेलर की लय काफी तेज और मजेदार है। इसमें कॉमेडी के साथ स्पूकी (डरावने) एलिमेंट्स का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन कुछ भी ओवरडन या जबरदस्ती नहीं लगता। फिल्म की राइटिंग काफी सहज नजर आ रही है। ट्रेलर के आखिर तक आते-आते दर्शकों की जिज्ञासा फिल्म को लेकर काफी बढ़ जाती है। कास्ट और टीम का दिखा तालमेल फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कास्टिंग है। अक्षय कुमार एक बार फिर उसी जॉनर में लौटे हैं जो उन पर सबसे ज्यादा सूट करता है। उनके साथ परेश रावल और राजपाल यादव की टाइमिंग हमेशा की तरह दिख रही है। साथ ही असरानी ने भी अपने चिर-परिचित अंदाज में कॉमेडी का तड़का लगाया है। इन दिग्गजों के अलावा फिल्म में वामिका गब्बी, तब्बू, जिशु सेनगुप्ता और मिथिला पालकर जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं। ट्रेलर में क्या है खास ? टीजर में जहां सिर्फ फिल्म के टोन की झलक मिली थी, वहीं ट्रेलर कहानी की दुनिया से भी परिचित कराता है। यह पूरी कहानी बताए बिना दर्शकों को फिल्म के माहौल से जोड़ देता है। मेकर्स ने किसी ट्रेंड को फॉलो करने के बजाय उस क्लासिक कॉमेडी स्टाइल पर भरोसा किया है जिसमें कंफ्यूजन और कैरेक्टर-ड्रिवन मोमेंट्स होते हैं। 16 अप्रैल से शुरू होंगे पेड प्रिव्यूज फिल्म को लेकर दर्शकों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। मेकर्स ने जानकारी दी है कि 16 अप्रैल 2026 की रात 9 बजे से फिल्म के एडवांस पेड प्रिव्यूज शुरू हो जाएंगे। फिल्म में 14 साल बाद अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी साथ दिखेगी। इस जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को ‘हेरा फेरी’, ‘गरम मसाला’, ‘भागम भाग’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी कल्ट क्लासिक फिल्में दी हैं। इन दोनों ने आखिरी बार साल 2010 में आई फिल्म ‘खट्टा मीठा’ में साथ काम किया था। अब करीब 14 साल बाद दोनों फिर से हॉरर-कॉमेडी जॉनर में वापसी कर रहे हैं।

क्या कोई ऐसी दवा है, जिसे खाने के बाद तुरंत स्ट्रेस कम हो जाए? साइकेट्रिस्ट डॉक्टर प्रेरणा कुकरेती से समझिए

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Last Updated:April 06, 2026, 14:15 IST Is There Quick Fix for Stress: स्ट्रेस कई मानसिक परेशानियों की जड़ है और इसे कम करने के लिए कई लोग दवाएं लेना शुरू कर देते हैं. साइकेट्रिस्ट डॉक्टर प्रेरणा कुकरेती के अनुसार तनाव को तुरंत खत्म करने वाली कोई जादुई दवा नहीं होती. कुछ दवाएं जैसे एंटी-एंजायटी और एंटीडिप्रेसेंट स्ट्रेस से राहत दिला सकती हैं, लेकिन ये डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए. स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए सही लाइफस्टाइल, योग, ध्यान और अच्छी नींद बेहद महत्वपूर्ण है. स्ट्रेस के लिए आमतौर पर दवा नहीं दी जाती है, लेकिन यह एंजायटी में बदल जाए, तब दवा लेनी पड़ती है. Stress Relief Medicines: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक आम समस्या बन चुका है. काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंता लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर रही है. बड़ी संख्या में युवा भी स्ट्रेस से परेशान नजर आ रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो स्ट्रेस कम करने के लिए अच्छी लाइफस्टाइल, हेल्दी डाइट, योग, मेडिटेशन समेत कई तरीके होते हैं. हालांकि कई लोग स्ट्रेस के कारण कुछ काम नहीं कर पाते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या कोई ऐसी दवा है, जिसे लेने के बाद तुरंत स्ट्रेस कम हो जाए? चलिए इस बारे में डॉक्टर से हकीकत जान लेते हैं. नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि स्ट्रेस की समस्या आजकल अधिकतर लोगों को परेशान कर रही है. आमतौर पर स्ट्रेस से निजात पाने के लिए स्क्रीन से ब्रेक लेना, काम से छुट्टी लेना, पसंदीदा एक्टिविटी करना, फैमिली के साथ टाइम स्पेंड करना और बाहर घूमने की सलाह दी जाती है. कई लोग डेली एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन के जरिए स्ट्रेस को कंट्रोल कर लेते हैं. हालांकि कई मामलों में स्ट्रेस बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और एंजायटी व डिप्रेशन की कंडीशन पैदा कर देता है. अगर ऐसा होता है, तब लोगों को दवा लेने की सलाह दी जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर प्रेरणा ने बताया कि हर तरह के तनाव के लिए कोई मैजिक पिल नहीं होती है. तनाव की प्रकृति, उसका टाइम और व्यक्ति की मेंटल कंडीशन के आधार पर ही ट्रीटमेंट तय किया जाता है. कुछ दवाएं जरूर हैं, जो तेजी से असर दिखाती हैं, लेकिन उनका उपयोग विशेष परिस्थिति और डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए. कुछ मामलों में डॉक्टर एंटी-एंजायटी दवाएं देते हैं, जो घबराहट और चिंता को जल्दी कम कर सकती हैं. हालांकि इन दवाओं के साथ सबसे बड़ा रिस्क एडिक्शन का होता है. लंबे समय तक या बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है और डिप्रेशन का रूप लेने लगता है, तब डॉक्टर एंटीडिप्रेसेंट दवाएं सुझाते हैं. ये दवाएं तुरंत असर नहीं करतीं, बल्कि 2 से 4 हफ्तों में धीरे-धीरे सुधार लाती हैं. इसलिए इन्हें इंस्टेंट रिलीफ के बजाय लॉन्ग टर्म ट्रीटमेंट के रूप में देखा जाता है. डॉक्टर का साफ कहना है कि हल्के और मीडियम लेवल के तनाव के लिए दवा की जरूरत नहीं होती है. नियमित व्यायाम, योग और ध्यान, पर्याप्त नींद और अपनों से खुलकर बात करने से स्ट्रेस कम हो सकता है. अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ घबराहट, नींद की कमी, दिल की धड़कन तेज होना या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 14:15 IST

महाकुंभ वाले IITian बाबा ने शादी की:इंजीनियर पत्नी कर्नाटक की, दोनों हिमाचल में रह रहे; झज्जर में परिवार से मिलने पहुंचे

महाकुंभ वाले IITian बाबा ने शादी की:इंजीनियर पत्नी कर्नाटक की, दोनों हिमाचल में रह रहे; झज्जर में परिवार से मिलने पहुंचे

प्रयागराज महाकुंभ मेले में फेमस हुए IITian बाबा अभय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लंबे समय बाद सोमवार को वह झज्जर में स्पॉट हुए। वो भी अकेले नहीं पत्नी के साथ। उन्होंने खुलासा किया कि दोनों ने 15 फरवरी को शिवरात्रि के मौके पर हिमाचल के अघंजर मंदिर में शादी कर ली। उसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी की। भगवा कपड़े पहने अभय सिंह एडवोकेट पिता के चैंबर में आए। यहां दैनिक भास्कर एप की टीम से बातचीत में उन्होंने कहा- “हम दोनों अपनी जिंदगी से खुश हैं। फिलहाल सादगी से रह रहे हैं। अध्यात्म की तरफ रुझान होने से पहले कभी मैं भी इस चैंबर में बैठकर पिता की एप्लीकेशन चेक कर लेता था। पत्नी मूलरूप से कर्नाटक की हैं। वह भी इंजीनियर हैं। हम हिमाचल के धर्मशाला में रह रहे हैं।” अभय सिंह मूलरूप से झज्जर के सासरौली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता कर्ण सिंह वकील हैं और झज्जर बार एसोसिएशन के प्रधान भी रह चुके हैं। बॉम्बे IIT से एयरो स्पेस इंजीनियरिंग करने वाले अभय सिंह प्रयागराज महाकुंभ में संन्यासी वेश में नजर आने के बाद देश-विदेश में चर्चा में आए। जानिए IITian बाबा और उनकी पत्नी ने शादी को लेकर क्या बताया…. चैंबर में केस स्टडी करने आता था अभय सिंह ने कहा- आज पिताजी के चैंबर में आकर अच्छा लगा। मैं पहले भी यहां आकर एप्लीकेशन चेक करता था। मुझे अध्यात्मिकता का सच समझ में आ गया था, लेकिन ये नहीं था कि आगे क्या करना है। जब घर पर अकेला होता था तो सोचता था कि चैंबर में जाकर कुछ कर लेता हूं। यहां आकर मैं स्टडी करता रहता था कि कौन सा केस कैसे लगता है। 15 फरवरी को मंदिर, 19 को कोर्ट मैरिज की शादी को लेकर अभय सिंह ने कहा कि ऐसे छिपाने वाली कोई बात नहीं थी। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर हिमाचल के अघंजर महादेव मंदिर में जाकर शादी की। इसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज की। पत्नी ही आज मुझे यहां लेकर आई हैं। बैंक में KYC भी करानी थी। पत्नी बोलीं- सनातन यूनिवर्सिटी बनाएंगे अभय की पत्नी प्रतीका ने कहा- अभय काफी सरल नेचर के हैं। वो बेहद ईमानदार और सच्चे इंसान हैं। मैं कर्नाटक से हूं और इनसे एक साल पहले मिलीं थी। मैंने इंजीनियरिंग कर रखी है। अब हम सनातन को आगे बढ़ाने में काम करेंगे। हम विचार कर रहे हैं कि आगे चलकर सनातन यूनिवर्सिटी बनाए। यहां अध्यात्म से जुड़े गुरु, साधक एक जगह पर यूनाइट करने की कोशिश है। हम झज्जर में सास-ससुर और परिवार वालों से मिलने आए हैं। अब अभय सिंह के इंजीनियर से संन्यासी बनने की कहानी जानिए… कोचिंग के लिए कोटा की जगह दिल्ली गए अभय सिंह का जन्म झज्जर के सासरौली गांव में हुआ। वह ग्रेवाल गोत्र के जाट परिवार में जन्मे। अभय ने शुरुआती पढ़ाई झज्जर जिले से की। पढ़ाई में वह बहुत होनहार थे। इसके बाद परिवार उन्हें IIT की कोचिंग के लिए कोटा भेजना चाहता था। मगर, अभय ने दिल्ली में कोचिंग लेने की बात कही। IIT बॉम्बे में पढ़ाई, कनाडा में काम किया कोचिंग के बाद अभय ने IIT का एग्जाम क्रैक कर लिया। जिसके बाद उन्हें IIT बॉम्बे में एडमिशन मिल गया। अभय ने वहां से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली। इसके बाद डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री की। अभय की छोटी बहन कनाडा में रहती है। पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार ने उन्हें अच्छे फ्यूचर के लिए कनाडा भेज दिया। कनाडा में अभय ने कुछ समय एरोप्लेन बनाने वाली कंपनी में काम भी किया। जहां उन्हें 3 लाख सेलरी मिलती थी। लॉकडाउन की वजह से कनाडा में फंसे 2021 में कनाडा में लॉकडाउन लग गया। जिस वजह से अभय भी कनाडा में ही फंस गए। जब लॉकडाउन हटा तो अभय भारत लौट आए। यहां आने के बाद वह अचानक फोटोग्राफी करने लगे। अभय सिंह को घूमने का भी शौक रहा, इसलिए वह केरल गए। उज्जैन कुंभ में भी गए थे। 2024 में अभय सबके संपर्क से बाहर हो गए। परिवार ने बहुत कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई। परिवार का नंबर तक ब्लॉक कर दिया। इसके बाद 2025 में वह महाकुंभ से चर्चा में आए।