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क्या कोई ऐसी दवा है, जिसे खाने के बाद तुरंत स्ट्रेस कम हो जाए? साइकेट्रिस्ट डॉक्टर प्रेरणा कुकरेती से समझिए

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Is There Quick Fix for Stress: स्ट्रेस कई मानसिक परेशानियों की जड़ है और इसे कम करने के लिए कई लोग दवाएं लेना शुरू कर देते हैं. साइकेट्रिस्ट डॉक्टर प्रेरणा कुकरेती के अनुसार तनाव को तुरंत खत्म करने वाली कोई जादुई दवा नहीं होती. कुछ दवाएं जैसे एंटी-एंजायटी और एंटीडिप्रेसेंट स्ट्रेस से राहत दिला सकती हैं, लेकिन ये डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए. स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए सही लाइफस्टाइल, योग, ध्यान और अच्छी नींद बेहद महत्वपूर्ण है.

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स्ट्रेस के लिए आमतौर पर दवा नहीं दी जाती है, लेकिन यह एंजायटी में बदल जाए, तब दवा लेनी पड़ती है.

Stress Relief Medicines: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक आम समस्या बन चुका है. काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंता लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर रही है. बड़ी संख्या में युवा भी स्ट्रेस से परेशान नजर आ रहे हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो स्ट्रेस कम करने के लिए अच्छी लाइफस्टाइल, हेल्दी डाइट, योग, मेडिटेशन समेत कई तरीके होते हैं. हालांकि कई लोग स्ट्रेस के कारण कुछ काम नहीं कर पाते हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या कोई ऐसी दवा है, जिसे लेने के बाद तुरंत स्ट्रेस कम हो जाए? चलिए इस बारे में डॉक्टर से हकीकत जान लेते हैं.

नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि स्ट्रेस की समस्या आजकल अधिकतर लोगों को परेशान कर रही है. आमतौर पर स्ट्रेस से निजात पाने के लिए स्क्रीन से ब्रेक लेना, काम से छुट्टी लेना, पसंदीदा एक्टिविटी करना, फैमिली के साथ टाइम स्पेंड करना और बाहर घूमने की सलाह दी जाती है. कई लोग डेली एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन के जरिए स्ट्रेस को कंट्रोल कर लेते हैं. हालांकि कई मामलों में स्ट्रेस बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और एंजायटी व डिप्रेशन की कंडीशन पैदा कर देता है. अगर ऐसा होता है, तब लोगों को दवा लेने की सलाह दी जाती है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर प्रेरणा ने बताया कि हर तरह के तनाव के लिए कोई मैजिक पिल नहीं होती है. तनाव की प्रकृति, उसका टाइम और व्यक्ति की मेंटल कंडीशन के आधार पर ही ट्रीटमेंट तय किया जाता है. कुछ दवाएं जरूर हैं, जो तेजी से असर दिखाती हैं, लेकिन उनका उपयोग विशेष परिस्थिति और डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए. कुछ मामलों में डॉक्टर एंटी-एंजायटी दवाएं देते हैं, जो घबराहट और चिंता को जल्दी कम कर सकती हैं. हालांकि इन दवाओं के साथ सबसे बड़ा रिस्क एडिक्शन का होता है. लंबे समय तक या बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है.

एक्सपर्ट के अनुसार जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है और डिप्रेशन का रूप लेने लगता है, तब डॉक्टर एंटीडिप्रेसेंट दवाएं सुझाते हैं. ये दवाएं तुरंत असर नहीं करतीं, बल्कि 2 से 4 हफ्तों में धीरे-धीरे सुधार लाती हैं. इसलिए इन्हें इंस्टेंट रिलीफ के बजाय लॉन्ग टर्म ट्रीटमेंट के रूप में देखा जाता है. डॉक्टर का साफ कहना है कि हल्के और मीडियम लेवल के तनाव के लिए दवा की जरूरत नहीं होती है. नियमित व्यायाम, योग और ध्यान, पर्याप्त नींद और अपनों से खुलकर बात करने से स्ट्रेस कम हो सकता है. अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ घबराहट, नींद की कमी, दिल की धड़कन तेज होना या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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स्ट्रेस के लिए आमतौर पर दवा नहीं दी जाती है, लेकिन यह एंजायटी में बदल जाए, तब दवा लेनी पड़ती है.

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नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि स्ट्रेस की समस्या आजकल अधिकतर लोगों को परेशान कर रही है. आमतौर पर स्ट्रेस से निजात पाने के लिए स्क्रीन से ब्रेक लेना, काम से छुट्टी लेना, पसंदीदा एक्टिविटी करना, फैमिली के साथ टाइम स्पेंड करना और बाहर घूमने की सलाह दी जाती है. कई लोग डेली एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन के जरिए स्ट्रेस को कंट्रोल कर लेते हैं. हालांकि कई मामलों में स्ट्रेस बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और एंजायटी व डिप्रेशन की कंडीशन पैदा कर देता है. अगर ऐसा होता है, तब लोगों को दवा लेने की सलाह दी जाती है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

डॉक्टर प्रेरणा ने बताया कि हर तरह के तनाव के लिए कोई मैजिक पिल नहीं होती है. तनाव की प्रकृति, उसका टाइम और व्यक्ति की मेंटल कंडीशन के आधार पर ही ट्रीटमेंट तय किया जाता है. कुछ दवाएं जरूर हैं, जो तेजी से असर दिखाती हैं, लेकिन उनका उपयोग विशेष परिस्थिति और डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए. कुछ मामलों में डॉक्टर एंटी-एंजायटी दवाएं देते हैं, जो घबराहट और चिंता को जल्दी कम कर सकती हैं. हालांकि इन दवाओं के साथ सबसे बड़ा रिस्क एडिक्शन का होता है. लंबे समय तक या बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है.

एक्सपर्ट के अनुसार जब तनाव लंबे समय तक बना रहता है और डिप्रेशन का रूप लेने लगता है, तब डॉक्टर एंटीडिप्रेसेंट दवाएं सुझाते हैं. ये दवाएं तुरंत असर नहीं करतीं, बल्कि 2 से 4 हफ्तों में धीरे-धीरे सुधार लाती हैं. इसलिए इन्हें इंस्टेंट रिलीफ के बजाय लॉन्ग टर्म ट्रीटमेंट के रूप में देखा जाता है. डॉक्टर का साफ कहना है कि हल्के और मीडियम लेवल के तनाव के लिए दवा की जरूरत नहीं होती है. नियमित व्यायाम, योग और ध्यान, पर्याप्त नींद और अपनों से खुलकर बात करने से स्ट्रेस कम हो सकता है. अगर तनाव लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ घबराहट, नींद की कमी, दिल की धड़कन तेज होना या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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