Wednesday, 22 Apr 2026 | 05:27 AM

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महाकुंभ वाले IITian बाबा ने शादी की:इंजीनियर पत्नी कर्नाटक की, दोनों हिमाचल में रह रहे; झज्जर में परिवार से मिलने पहुंचे

महाकुंभ वाले IITian बाबा ने शादी की:इंजीनियर पत्नी कर्नाटक की, दोनों हिमाचल में रह रहे; झज्जर में परिवार से मिलने पहुंचे

प्रयागराज महाकुंभ मेले में फेमस हुए IITian बाबा अभय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लंबे समय बाद सोमवार को वह झज्जर में स्पॉट हुए। वो भी अकेले नहीं पत्नी के साथ। उन्होंने खुलासा किया कि दोनों ने 15 फरवरी को शिवरात्रि के मौके पर हिमाचल के अघंजर मंदिर में शादी कर ली। उसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी की। भगवा कपड़े पहने अभय सिंह एडवोकेट पिता के चैंबर में आए। यहां दैनिक भास्कर एप की टीम से बातचीत में उन्होंने कहा- “हम दोनों अपनी जिंदगी से खुश हैं। फिलहाल सादगी से रह रहे हैं। अध्यात्म की तरफ रुझान होने से पहले कभी मैं भी इस चैंबर में बैठकर पिता की एप्लीकेशन चेक कर लेता था। पत्नी मूलरूप से कर्नाटक की हैं। वह भी इंजीनियर हैं। हम हिमाचल के धर्मशाला में रह रहे हैं।” अभय सिंह मूलरूप से झज्जर के सासरौली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता कर्ण सिंह वकील हैं और झज्जर बार एसोसिएशन के प्रधान भी रह चुके हैं। बॉम्बे IIT से एयरो स्पेस इंजीनियरिंग करने वाले अभय सिंह प्रयागराज महाकुंभ में संन्यासी वेश में नजर आने के बाद देश-विदेश में चर्चा में आए। जानिए IITian बाबा और उनकी पत्नी ने शादी को लेकर क्या बताया…. चैंबर में केस स्टडी करने आता था अभय सिंह ने कहा- आज पिताजी के चैंबर में आकर अच्छा लगा। मैं पहले भी यहां आकर एप्लीकेशन चेक करता था। मुझे अध्यात्मिकता का सच समझ में आ गया था, लेकिन ये नहीं था कि आगे क्या करना है। जब घर पर अकेला होता था तो सोचता था कि चैंबर में जाकर कुछ कर लेता हूं। यहां आकर मैं स्टडी करता रहता था कि कौन सा केस कैसे लगता है। 15 फरवरी को मंदिर, 19 को कोर्ट मैरिज की शादी को लेकर अभय सिंह ने कहा कि ऐसे छिपाने वाली कोई बात नहीं थी। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर हिमाचल के अघंजर महादेव मंदिर में जाकर शादी की। इसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज की। पत्नी ही आज मुझे यहां लेकर आई हैं। बैंक में KYC भी करानी थी। पत्नी बोलीं- सनातन यूनिवर्सिटी बनाएंगे अभय की पत्नी प्रतीका ने कहा- अभय काफी सरल नेचर के हैं। वो बेहद ईमानदार और सच्चे इंसान हैं। मैं कर्नाटक से हूं और इनसे एक साल पहले मिलीं थी। मैंने इंजीनियरिंग कर रखी है। अब हम सनातन को आगे बढ़ाने में काम करेंगे। हम विचार कर रहे हैं कि आगे चलकर सनातन यूनिवर्सिटी बनाए। यहां अध्यात्म से जुड़े गुरु, साधक एक जगह पर यूनाइट करने की कोशिश है। हम झज्जर में सास-ससुर और परिवार वालों से मिलने आए हैं। अब अभय सिंह के इंजीनियर से संन्यासी बनने की कहानी जानिए… कोचिंग के लिए कोटा की जगह दिल्ली गए अभय सिंह का जन्म झज्जर के सासरौली गांव में हुआ। वह ग्रेवाल गोत्र के जाट परिवार में जन्मे। अभय ने शुरुआती पढ़ाई झज्जर जिले से की। पढ़ाई में वह बहुत होनहार थे। इसके बाद परिवार उन्हें IIT की कोचिंग के लिए कोटा भेजना चाहता था। मगर, अभय ने दिल्ली में कोचिंग लेने की बात कही। IIT बॉम्बे में पढ़ाई, कनाडा में काम किया कोचिंग के बाद अभय ने IIT का एग्जाम क्रैक कर लिया। जिसके बाद उन्हें IIT बॉम्बे में एडमिशन मिल गया। अभय ने वहां से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली। इसके बाद डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री की। अभय की छोटी बहन कनाडा में रहती है। पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार ने उन्हें अच्छे फ्यूचर के लिए कनाडा भेज दिया। कनाडा में अभय ने कुछ समय एरोप्लेन बनाने वाली कंपनी में काम भी किया। जहां उन्हें 3 लाख सेलरी मिलती थी। लॉकडाउन की वजह से कनाडा में फंसे 2021 में कनाडा में लॉकडाउन लग गया। जिस वजह से अभय भी कनाडा में ही फंस गए। जब लॉकडाउन हटा तो अभय भारत लौट आए। यहां आने के बाद वह अचानक फोटोग्राफी करने लगे। अभय सिंह को घूमने का भी शौक रहा, इसलिए वह केरल गए। उज्जैन कुंभ में भी गए थे। 2024 में अभय सबके संपर्क से बाहर हो गए। परिवार ने बहुत कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई। परिवार का नंबर तक ब्लॉक कर दिया। इसके बाद 2025 में वह महाकुंभ से चर्चा में आए।

किचन में रखी इस दाल में छुपा है हेल्थ सीक्रेट! दिल से पाचन तक करेगी कमाल, ऐसे करें इस्तेमाल

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Last Updated:April 06, 2026, 14:02 IST भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली उड़द की दाल सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है. इसमें मौजूद प्रोटीन, आयरन, फाइबर और कई जरूरी खनिज शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. यह पाचन सुधारने से लेकर दिल को स्वस्थ रखने और त्वचा-बालों को निखारने तक कई तरह से फायदेमंद मानी जाती है. उड़द की दाल (ब्लैक ग्राम) के पत्ते और दाल दोनों ही स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और अन्य खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पाचन सुधारने, हड्डियों को मजबूत बनाने, ऊर्जा बढ़ाने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद करते हैं. यह पेट के लिए भी काफी पौष्टिक मानी जाती है. डॉक्टर विनीत शर्मा ने बताया कि उड़द की दाल का सेवन, विशेषकर इसके पत्ते (पौधे का भाग) और दाल, फाइबर और खनिजों से भरपूर होने के कारण पाचन में सुधार, कब्ज से राहत और पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देने में बेहद फायदेमंद है. यह वात दोष को भी कम करती है. हालांकि, पचने में भारी (गुरु) होने के कारण इसे अदरक या लहसुन के साथ पकाना बेहतर माना जाता है. उड़द की दाल में पोटेशियम, मैग्नीशियम और फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करती है. इससे हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है. यह दाल रक्त परिसंचरण में सुधार करती है और धमनियों में प्लाक जमने से रोककर दिल को मजबूत बनाए रखने में सहायक होती है. Add News18 as Preferred Source on Google उड़द की दाल आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियम और पोटैशियम का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर एनीमिया की समस्या को कम करने में मदद करती है और ऊर्जा स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है. यह थकान कम करने, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और पाचन तंत्र को सुधारने में भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. उड़द की दाल त्वचा और बालों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि यह आयरन, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. यह रूखी त्वचा को नमी प्रदान करती है, मुंहासों को कम करने में मदद करती है और स्कैल्प को पोषण देकर बालों को घना व मजबूत बनाती है, जिससे झड़ने की समस्या भी कम होती है. उड़द की दाल का पेस्ट त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण मुंहासे, दाग-धब्बे और झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं. यह प्राकृतिक रूप से त्वचा को साफ कर डेड स्किन हटाता है, जिससे चेहरा चमकदार और मुलायम बनता है. इसे रातभर भिगोकर पीसकर इस्तेमाल किया जा सकता है. उड़द की दाल और इसके पौधे के विभिन्न हिस्से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और आंतों की सफाई में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है, जो कब्ज, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है और मल त्याग को आसान बनाता है. First Published : April 06, 2026, 14:02 IST

हिसार में शादी करने जा रहा फर्जी मेजर अरेस्ट:पुलवामा का रहने वाला, हिंदू बनकर शादी डॉट कॉम पर फंसाया; चंडीगढ़ से खरीदी ड्रेस

हिसार में शादी करने जा रहा फर्जी मेजर अरेस्ट:पुलवामा का रहने वाला, हिंदू बनकर शादी डॉट कॉम पर फंसाया; चंडीगढ़ से खरीदी ड्रेस

हरियाणा के कैथल पुलिस ने शादी के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी आर्मी मेजर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी युवक मुस्लिम है और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला है। उसके पास से आर्मी की वर्दी भी बरामद हुई है, जो चढ़ीगढ़ से खरीदी थी। वह मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर खुद को आर्मी मेजर बताकर हिंदू युवतियों को फंसाता था। गिरफ्तारी के वक्त वह हिसार की युवती से मिलने जा रहा था, जिससे वह शादी करने वाला था। कैथल पुलिस ने मामला हिसार से जुड़ा होने के कारण उसे वहां की पुलिस के हवाले कर दिया। हिसार पुलिस ने जब उसकी कुंडली खंगाली तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। पता चला कि अब तक वह 10 से ज्यादा युवतियों से मेजर बनकर ठगी कर चुका है। हिसार की रहने वाली युवती से 30 हजार रुपए भी ठग चुका था। इस मामले में रिपोर्ट भी दर्ज हुई है। फिलहाल, पुलिस उसे पूछताछ कर रही है। पता किया जा रहा है कि उसके अलावा इस अपराध में कौन-कौन शामिल है। उसका बैकग्राउंड क्या है और उसके परिवार में कौन है। इसके अलावा सबसे खास बात यह है कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि टारगेटेड बेस क्राइम से जुड़ा हो। कौन है फर्जी मेजर और कैसे पकड़ा गया, सिलसिलेवार पढ़ें… नाम मेहराजुद्दीन, पुलवामा का रहने वाला: कैथल पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी की पहचान मेहराजुद्दीन आजम निवासी गांव अवनीपुरा, जिला पुलवामा, जम्मू-कश्मीर के रूप में हुई है। कैथल में तितराम चौक पर पुलिस ने जांच के लिए के लिए एक ओला कैब को रोका। कैब में सवार युवक से पूछताछ की तो उसने अपना नाम निशांत सहारण बताया। आर्मी की वर्दी दिखाई तो पुलिस को शक हुआ: पुलिस के मुताबिक, जब युवक से पूछा गया कि वह क्या करता है तो उसने बैग से सेना की वर्दी दिखाते हुए कहा कि वह आर्मी में मेजर है। उसकी इसी बात पर पुलिसकर्मियों को शक हुआ। क्योंकि उसने बैग खोलकर वर्दी पहले दिखाई, पेशा बाद में बताया। सख्ती से पूछताछ में खुद का नाम आजम बताया : इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे कैब से बाहर बुलाकर उसकी पोस्टिंग, रेजिमेंट और कागजात आदि के बारे में पूछताछ की तो वह कोई जवाब नहीं दे सका। पेशे से जुड़े कोई कागजात भी नहीं दिखा सका। सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने अपना नाम मेहराजुद्दीन आजम बताया। हिसार में युवती से मिलने की बात की तो खुली पोल : पुलिस ने यहां आने का कारण पूछा तो बताया कि वह हिसार में एक हिंदू लड़की से मिलने जा रहा था। उससे उसकी शादी की बात चल रही थी। युवती के स्वजन अपनी बेटी से युवक से शादी करवाने की तैयारी भी कर रहे थे। पुलिस ने युवती के परिवार से संपर्क किया तो उन्होंने भी निशांत से कॉन्टेक्ट होने की बात बताई, ना कि मेराजुद्दीन से। इसके बाद कैथल पुलिस ने उसे हिसार पुलिस को सौंप दिया। यहां जानिए कैसे करता था मेहराजुद्दीन ठगी…. निशांत सहारण नाम से बनाई फर्जी प्रोफाइल : हिसार पुलिस की पूछताछ में मेहराजुद्दीन ने बताया कि उसने शादी डॉट कॉम पर फर्जी आईडी बना रखी है। इसमें उसने खुद का नाम निशांत सहारण और पेशा आर्मी मेजर बताया हुआ है। वर्दी में कुछ फोटो भी लगा रखे थे। इसी वेबसाइट पर वह हिंदू लड़कियों को फंसाता था। हिसार सहित कई जगह की युवतियों को ठग चुका : पुलिस के मुताबिक, मेहराजुद्दीन ने बताया कि हिसार की युवती को भी उसने शादी डॉट कॉम पर ही कॉन्टेक्ट किया था। खुद को मेजर बताकर उसे विश्वास में लिया और करीब 30 हजार रुपए ठग लिए। इसके अलावा वह करीब दस से ज्यादा युवतियों को भी ऐसे ही ठग चुका है। खरड़ में वेटर, चंडीगढ़ से खरीदी वर्दी : मेहराजुद्दीन ने बताया कि वह 2021 में मोहाली के खरड़ में वेटर का काम करता था। दो साल तक यहां काम करने के बाद वह गांव लौट गया। इसके बाद 2025 में फिर से खरड़ आया। इस बार उसे काम नहीं मिला तो उसने शादी डॉट कॉम पर फर्जी आईडी बनाकर खुद को सेना का अधिकारी बताया। चंडीगढ़ से ही उसने आर्मी की वर्दी भी खरीदी थी। खरड़ से ही वह कैब करके हिसार आ रहा था। युवती के परिवार ने भी दर्ज कराई शिकायत उधर, मामला सामने आने के बाद हिसार की युवती ने भी मेहराजुद्दीन के खिलाफ थाना आजाद नगर में ठगी मामला दर्ज कराया है। इसमें धर्म बदलकर और शादी का झांसा देकर रुपए ठगने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल, हिसार पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। मेहराजुद्दीन से पूछताछ भी की जा रही है। पता किया जा रहा है कि किन लड़कियों से वह ठगी कर चुका है। ठगी से बचने के लिए पुलिस की आमजन से अपील ​हिसार पुलिस प्रवक्ता दीपक कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए आमजन से अपील की कि ऑनलाइन वैवाहिक साइटों पर मिलने वाले किसी भी व्यक्ति पर बिना पूर्ण सत्यापन के विश्वास न करें। अपनी निजी जानकारी और धनराशि साझा करने से पहले सामने वाले व्यक्ति की पहचान की अच्छी तरह जांच अवश्य करें।

दतिया के पंडोखर धाम में संदिग्ध मौत:परिसर में मिला 33 वर्षीय महिला का शव; 8 महीने से रह रही थी, पुलिस कर रही पूछताछ

दतिया के पंडोखर धाम में संदिग्ध मौत:परिसर में मिला 33 वर्षीय महिला का शव; 8 महीने से रह रही थी, पुलिस कर रही पूछताछ

दतिया जिले के पंडोखर धाम परिसर में रविवार शाम 33 वर्षीय एक महिला का संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिला है। मृतका की शिनाख्त छतरपुर निवासी जनका अहिरवार के रूप में हुई है, जो पिछले 7-8 महीनों से धाम में रह रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। पंडोखर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और भांडेर अस्पताल में पोस्टमार्टम कराकर मौत के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस धाम में रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है। देर शाम हुई छतरपुर निवासी के रूप में शिनाख्त शुरुआत में महिला की पहचान नहीं हो सकी थी, लेकिन देर शाम उसकी शिनाख्त जनका (33) पत्नी मनीराम अहिरवार (निवासी छतरपुर) के रूप में हुई। बताया जा रहा है कि महिला पिछले 7-8 महीनों से पंडोखर धाम में रह रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। रविवार शाम को धाम में महिला का शव मिलने से हड़कंप मच गया था। भांडेर अस्पताल में हुआ PM, रिपोर्ट का इंतजार सूचना मिलते ही पंडोखर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भांडेर अस्पताल भेजा, जहां पीएम कराया गया है। फिलहाल महिला की मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं और पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। हर एंगल से जांच कर रही पुलिस पंडोखर थाना पुलिस के मुताबिक, मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। धाम परिसर में रहने वाले लोगों और आसपास के व्यक्तियों से पुलिस द्वारा लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई है।

असम विधानसभा चुनाव 2026: ‘महिलाओं को मिलेगा ‘नियत’, सरकार ने बुलाया संसद का विशेष सत्र, असम से पीएम मोदी ने किया बड़ा ऐलान

असम विधानसभा चुनाव 2026: 'महिलाओं को मिलेगा 'नियत', सरकार ने बुलाया संसद का विशेष सत्र, असम से पीएम मोदी ने किया बड़ा ऐलान

असम के बारापेटा में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि असम में शांति के लिए कई बलिदान दिए गए हैं, ऐसे में शांति बनाए रखने के लिए कांग्रेस को दूर रखना होगा। मोदी ने कहा कि कांग्रेस की जमीन पर जज़बे समाज को धोखा था। हमारी सरकार ज्यूबियन क्षेत्र का विकास कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि हमारी सरकार सत्यनिष्ठा से परम शांति ला पाई है। 16 अप्रैल से सरकार ने संसद का सत्र बुलाया-प्रधानमंत्री मोदीमहिला नटखट को लेकर मोदी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि नारी वंदन अधिनियम पारित किया गया है। 2029 के आम चुनाव में महिलाओं को नामांकन मिलना चाहिए। इसके लिए 16 अप्रैल से सरकार ने संसद का सत्र बुलाया है। कुछ लोग प्रकरण लेकर भम्र फैलाए हुए हैं। इस बिल से किसी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा. पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत में महिलाओं की पूरी भूमिका होनी चाहिए। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि दक्षिण के राज्य से इस महिला शीर्षक संशोधन बिल को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि दक्षिण से आने वाले पैनल को इस बात का खतरा था कि कहीं ऐसा न हो कि वहां की सदस्यता में कोई कमी हो जाए। मोदी ने कांग्रेस पर ज़ोरदार संरचनात्मक ढांचा तैयार कियाकांग्रेस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार किसानों के हक का पैसा बिचौलियों को लूटा करती थी, लेकिन भाजपा सरकार किसानों के हित में निर्णय लेती है। उन्होंने आगे कहा कि देश के लिए सिर्फ एक दूसरे की सरकार कांग्रेस की सरकार है। जनता कांग्रेस के पास रिपोर्ट कार्ड लेकर नहीं आती, जबकि बीजेपी की सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड बताती है। बीजेपी जो कहती है वो करके जाना है. असम में बीजेपी और सरकार की हैट्रिक-मोदीपीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से असम में शांति है और असम की पहचान अब दुनिया में कायम हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा संकल्प देश को विकसित करना है। हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना है। कांग्रेस के शाही परिवार के नामदार जो दिल्ली में बैठे हैं, उनके हार का सेंचुरी असम के लोग स्थापित होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि असम बीजेपी और सरकारी नौकरी की हैट्रिक। ये भी पढ़ें ईरान ने अमेरिका की दुखती नस को खलासी, स्याह की लड़की वाली खतरनाक पर वीडियो शेयर कर याद करें ऑपरेशन ईगल क्लॉक (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)असम विधानसभा चुनाव(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)पीएम मोदी(टी)असम(टी)बारापेटा(टी) पीएम मोदी(टी)कांग्रेस(टी)विधानसभा चुनाव(टी)महिला नताशा(टी)संसद

तमिलनाडु के लिए पवन कल्याण के चुनाव अभियान से एनडीए की उम्मीदें क्यों बढ़ीं; क्या विजय फैक्टर मायने रखता है? | चेन्नई-समाचार समाचार

File photo of Prime Minister Narendra Modi

आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 13:24 IST आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण 6 अप्रैल को तमिलनाडु के नागरकोइल से भाजपा उम्मीदवार एमआर गांधी के समर्थन में अभियान शुरू करेंगे। चेन्नई, कोयंबटूर और नागरकोइल में तेलुगु भाषी मतदाताओं की आबादी 15-20% है। पवन कल्याण की फैन फॉलोइंग के साथ-साथ एनडीए इसका लाभ उठाने की उम्मीद कर रहा है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव एक करीबी नजर वाला मुकाबला बनता जा रहा है, जिसमें राजनीतिक दांव ऊंचे स्तर पर हैं। सत्तारूढ़ द्रमुक दबाव का सामना कर रही है, भले ही वह क्षेत्रीय पहचान को आगे बढ़ाकर समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इस बीच, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण 6 अप्रैल को प्रचार अभियान में उतर रहे हैं। वह भाजपा उम्मीदवार एमआर गांधी के समर्थन में नागरकोइल में प्रचार करने के लिए तैयार हैं, जो 23 अप्रैल के चुनावों से पहले चुनावी कहानी में एक महत्वपूर्ण क्षण है। पवन कल्याण की एंट्री क्यों मायने रखती है? पवन कल्याण के अभियान को भाजपा और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। आंध्र प्रदेश में एनडीए के एक प्रमुख सहयोगी के रूप में, तेलुगु भाषी मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता तमिलनाडु में मतदाताओं को प्रभावित करने में भूमिका निभाने की उम्मीद है। अनुमान बताते हैं कि चेन्नई, कोयंबटूर और नागरकोइल जैसे कुछ क्षेत्रों में तेलुगु भाषी मतदाता आबादी का लगभग 15-20% हैं। एनडीए सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, कल्याण के प्रशंसक के साथ-साथ इस जनसांख्यिकीय का लाभ उठाने की उम्मीद कर रहा है। तमिलनाडु में राजनीतिक परिदृश्य तमिलनाडु का राजनीतिक मुकाबला बहुकोणीय बना हुआ है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार 2021 में मजबूत जनादेश के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन अब उसे सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है, यहां तक ​​कि कई जनमत सर्वेक्षणों में भी वह आगे चल रही है। विपक्षी एनडीए गठबंधन, जिसमें अन्नाद्रमुक, भाजपा, पीएमके और एएमएमके शामिल हैं, एक मजबूत चुनौती पेश कर रहा है। उसी समय, अभिनेता से नेता बने विजय अपनी पार्टी, तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) के साथ मैदान में उतरे हैं, जो तीसरी ताकत के रूप में उभर रही है जो युवा मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है और संभावित रूप से सत्ता विरोधी वोटों को विभाजित कर सकती है। अभियान रणनीति और संदेश अभियान से पहले बोलते हुए, पवन कल्याण ने एनडीए की संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त किया और कहा कि गठबंधन तमिलनाडु में बदलाव ला सकता है। उन्होंने राज्य में तेलुगु भाषी समुदायों के समर्थन के महत्व पर भी जोर दिया। भाजपा नेताओं ने अभियान में उनके प्रवेश को संभावित “गेम चेंजर” बताया है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भाषाई और सांस्कृतिक ओवरलैप मतदाताओं की भावना को प्रभावित कर सकते हैं। तमिलनाडु से परे क्षेत्रीय प्रभाव यह अभियान पड़ोसी राज्यों में भी ध्यान खींच रहा है। तमिलनाडु में तेलुगु भाषी आबादी का आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के साथ मजबूत सांस्कृतिक संबंध है, और कल्याण की उपस्थिति राज्य की सीमाओं से परे भी गूंजने की उम्मीद है। हैदराबाद और सभी तेलुगु मीडिया प्लेटफार्मों में, अभियान को व्यापक कवरेज मिलने की संभावना है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह आंध्र प्रदेश में एनडीए की कहानी को और मजबूत कर सकता है, जबकि तेलंगाना में मतदाताओं के बीच रुचि भी आकर्षित कर सकता है। एक व्यापक राजनीतिक संकेत पवन कल्याण की भागीदारी एक व्यापक राजनीतिक बदलाव को भी दर्शाती है, जिसमें क्षेत्रीय नेता अपने गृह राज्यों से परे भूमिका निभा रहे हैं। चेन्नई में अध्ययन करने और तमिल संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखने के बाद, उनके अभियान को एनडीए द्वारा तेलुगु-तमिल राजनीतिक जुड़ाव के प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा है। हालाँकि, इस कदम की द्रमुक नेताओं ने भी आलोचना की है, जिन्होंने इसे तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में “बाहरी हस्तक्षेप” करार दिया है। आगे क्या देखना है 6 अप्रैल को नामांकन बंद होने और 23 अप्रैल को मतदान होने के साथ, आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण होंगे। पवन कल्याण के अभियान का प्रभाव, चाहे वह एनडीए को सक्रिय करे या प्रतीकात्मक रहे, चुनाव नजदीक आने के साथ स्पष्ट हो जाएगा। हालाँकि, यह निश्चित है कि उनके प्रवेश ने पहले से ही गतिशील चुनावी लड़ाई में एक नया आयाम जोड़ दिया है, जिससे तमिलनाडु देश में सबसे अधिक देखे जाने वाले राजनीतिक मुकाबलों में से एक बन गया है। पहले प्रकाशित: 06 अप्रैल, 2026, 13:24 IST समाचार शहर चेन्नई-समाचार तमिलनाडु के लिए पवन कल्याण के चुनाव अभियान से एनडीए की उम्मीदें क्यों बढ़ीं; क्या विजय फैक्टर मायने रखता है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। इस बीच, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण 6 अप्रैल को प्रचार अभियान में उतर रहे हैं। वह भाजपा उम्मीदवार एमआर गांधी के समर्थन में नागरकोइल में प्रचार करने के लिए तैयार हैं, जो 23 अप्रैल के चुनावों से पहले चुनावी कहानी में एक महत्वपूर्ण क्षण है। पवन कल्याण की एंट्री क्यों मायने रखती है? पवन कल्याण के अभियान को भाजपा और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। आंध्र प्रदेश में एनडीए के एक प्रमुख सहयोगी के रूप में, तेलुगु भाषी मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता तमिलनाडु में मतदाताओं को प्रभावित करने में भूमिका निभाने की उम्मीद है। अनुमान बताते हैं कि चेन्नई, कोयंबटूर और नागरकोइल जैसे कुछ क्षेत्रों में तेलुगु भाषी मतदाता आबादी का लगभग 15-20% हैं। एनडीए सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, कल्याण के प्रशंसक के साथ-साथ इस जनसांख्यिकीय का लाभ उठाने की उम्मीद कर रहा है। तमिलनाडु में राजनीतिक परिदृश्य तमिलनाडु का राजनीतिक मुकाबला बहुकोणीय बना हुआ है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार 2021 में मजबूत जनादेश के

भाजपा नेता से मारपीट का कांग्रेस ने किया विरोध:एसपी कार्यालय के सामने धरना, आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग

भाजपा नेता से मारपीट का कांग्रेस ने किया विरोध:एसपी कार्यालय के सामने धरना, आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग

नरसिंहपुर जिले में भाजपा नेता पवन पटेल से मारपीट के मामले में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता पटेल सोमवार दोपहर 12 बजे एसपी कार्यालय पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं। जानकारी के अनुसार, सुनीता पटेल ने शनिवार को एसपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस से संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। धरने के दौरान सुनीता पटेल ने आरोप लगाया कि पवन पटेल को बुरी तरह पीटा गया, लेकिन अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने प्रेस नोट जारी किया, पर उनके पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। पटेल ने क्षेत्र में अवैध उत्खनन और डंपरों की आवाजाही को भी गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि गाडरवारा में लगातार हादसे हो रहे हैं, जैसे हाल ही में गांधी गांव में एक ट्रक घर में घुस गया, जिससे एक युवक की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह दिसंबर में भी पत्र लिखकर डंपरों के संचालन का समय निर्धारित करने की मांग कर चुकी हैं। सुनीता पटेल ने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, वे धरना समाप्त नहीं करेंगी। दूसरी ओर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया ने मामले पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना 1 तारीख की दरमियानी रात पलोहा थाना क्षेत्र में हुई थी। पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर ली है और दो-तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। शेष आरोपियों की भी जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। भूरिया ने बताया कि कुछ आरोपी स्थानीय हैं, जबकि कुछ बाहर के हैं। मामले की विस्तृत जानकारी एसडीओपी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि त्वरित कार्रवाई की जा रही है और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

Gut Health news: डेस्क पर खाना, बैठे रहना, ऑफिस हर साल छीन रहा आपकी उम्र में से 11 दिन!

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शहरी जीवन की तेज रफ्तार के बीच भारत में खान-पान की आदतों में एक गहरा बदलाव आया है. सुबह का नाश्ता अक्सर मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करते हुए लोग खाते हैं. दोपहर का खाना ऑफिस की मीटिंग्स के बीच डेस्क पर ही बैठे-बैठे खा लिया जाता है. रात का भोजन देर रात ऐप से मंगाकर जल्दबाजी में निपटा दिया जाता है, और फिर हम अपने काम, दफ्तर, मीटिंग में जुट जाते हैं. यह सब देखने में तो सुविधा जैसा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही ऑफिस का रूटीन और आपाधापी का भोजन हमें खा रहा है. लंबे काम के घंटे, व्यस्त दिनचर्या और फूड डिलीवरी ऐप्स की आसान उपलब्धता ने खाने को एक जरूरत से ज्यादा सुलभ और तेज प्रतिक्रिया बना दिया है. अब लोग यह नहीं सोचते कि क्या खा रहे हैं, बल्कि यह सोचते हैं कि कितनी जल्दी खा सकते हैं. हालांकि डॉक्टरों की मानें तो समस्या कभी-कभार के गलत खाने की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की इस आदत की है, जो शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है. पैसिफिक वन हेल्थ में प्रिवेंटिव वेलनेस एवं मेटाबॉलिक डिजीज एक्सपर्ट डॉक्टर ऐजाज इल्मी कहते हैं कि अक्सर लोग आंतों की सेहत को केवल पाचन से जोड़ते हैं, जबकि इसका प्रभाव इससे कहीं अधिक व्यापक है. माइक्रोबायोम में असंतुलन इम्यूनिटी, नींद और हृदय स्वास्थ्य तक को प्रभावित कर सकता है. आज जो स्थिति हम देख रहे हैं, वह रोजमर्रा के छोटे-छोटे खान-पान के फैसलों का नतीजा है, जो शरीर की प्राकृतिक जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं.’ आंतों की हेल्थ है बड़ा मुद्दा डॉ. कहते हैं कि मानव शरीर में आंतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. लगभग 70 से 80 प्रतिशत प्रतिरक्षा तंत्र आंतों में मौजूद होता है, जिसे माइक्रोबायोम नामक सूक्ष्मजीवों का जटिल तंत्र संचालित करता है. यह तंत्र न केवल पाचन को प्रभावित करता है, बल्कि इम्यूनिटी, सूजन, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य तक में भूमिका निभाता है. स्टडी में हुआ खुलासा वर्ष 2025 में शहरी कामकाजी लोगों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 39 प्रतिशत लोग कम फाइबर वाला आहार लेते हैं, 36 प्रतिशत से अधिक लोग अधिक चीनी वाले खान-पान का पालन करते हैं, और 28 प्रतिशत से ज्यादा लोग नियमित रूप से मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं. यह आदतें अब कभी-कभार नहीं, बल्कि रोजमर्रा का हिस्सा बन चुकी हैं. ऐसा आहार आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की विविधता को कम करता है, जिससे शरीर में सूजन बढ़ती है, इम्यून सिस्टम अधिक संवेदनशील हो जाता है और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. नए शोधों में यह भी सामने आया है कि खराब आंत स्वास्थ्य धमनियों में प्लाक बनने और वसा के असंतुलित मेटाबॉलिज्म से भी जुड़ा हो सकता है. हर साल छिन रहे आपके 11 दिन इसका असर केवल शरीर तक सीमित नहीं है. आंतें शरीर में सेरोटोनिन के उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं, जो नींद और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करता है. भारत के वर्कप्लेस वेलबीइंग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, खराब नींद के कारण हर कर्मचारी औसतन 11.3 कार्यदिवस प्रति वर्ष खो देता है. ये हैं लक्षण पेट फूलना दोपहर के समय थकान रात में बेचैनी आमतौर पर ये समस्याएं अक्सर सामान्य मान ली जाती हैं, जबकि विशेषज्ञ इन्हें आंतों की खराब होती सेहत के संकेत मानते हैं, जिन्हें तत्काल सुधार की जरूरत होती है. डॉ. एजाज कहते हैं कि आंतों की सेहत को सुधारना मुश्किल नहीं है, बशर्ते कुछ चीजों को कड़ाई से फॉलो किया जाए. क्या करना चाहिए? दिन में कम से कम एक बार बिना किसी स्क्रीन के शांति से भोजन करना आहार में दाल, फल और मेवों जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करना मीठे पेय पदार्थों को कम करना रात के भोजन और सोने के बीच कम से कम दो घंटे का अंतर रखना डॉक्टर कहते हैं कि तेज और सुविधाजनक जीवनशैली के इस दौर में सबसे जरूरी है जागरूकता. शरीर को परफेक्शन नहीं, बल्कि थोड़ी समझ और संतुलन की जरूरत है. रोज के छोटे-छोटे फैसले ही तय करते हैं कि हम स्वस्थ रहेंगे या धीरे-धीरे बीमार पड़ते जाएंगे.

ऊपर से नमक नहीं खाते फिर भी हाई रहता है बीपी? आपके किचन की इन 5 चीजों में छिपा है ‘असली विलेन’, आज ही करें तौबा

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Last Updated:April 06, 2026, 13:16 IST Hidden Sodium in Foods: भारत में हर चार में से एक वयस्क को हाई बीपी है. जब भी किसी को हाई ब्लड प्रेशर होता है तो डॉक्टर सलाह देते हैं कि नमक खाना कम कर दीजिए. डॉक्टरों की सलाह पर लोग नमक खाना बहुत कम कर देते हैं. यहां तक कि सब्जी, दाल या उपर से नमक लेना बंद कर देते हैं. इसके बावजूद कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर नहीं घटता है. क्या आप जानते हैं इसका कारण है. दरअसल, इसका कारण है नमक जो आपके भोजन में छिपा होता है.आइए इसके बारे में जानते हैं. किन-किन चीजों में छुपा होता है नमक. Hidden Sodium in Foods: नमक का स्वाद लोगों को ऐसा लगा है कि इसके बिना भोजन बेस्वाद हो जाता है. लेकिन नमक का ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर मरीजों के लिए मीठा जहर है. यही कारण है कि बीपी के मरीजों को डॉक्टर कम से कम नमक खाने की सलाह देते हैं. इसके बाद मरीज नमक बिल्कुल कम कर देते है. लेकिन फिर भी ब्लड प्रेशर कम नहीं होता है. क्या आप जानते हैं कि नमक से दूर रहने के बावजूद आपके शरीर में भारी मात्रा में सोडियम कहां से पहुंच रहा है. यह खतरा वास्तव में आपके भोजन में ही छिपा है. इसके बारे में आपको पता भी नहीं रहता है लेकिन खाने की ये चीजें आपके शरीर में सोडियम भर देता है. यही सोडियम ब्लड प्रेशर को आउट ऑफ कंट्रोल कर देता है. सोडियम से क्यों बढ़ जाता है बीपीपहले यह जानिए कि सोडियम से बीपी क्यों बढ़ जाता है. सोडिएम अत्यंत महत्वपूर्ण माइक्रोन्यूट्रेंट्स हैं. यह इलेक्ट्रोलाइट्स का हिस्सा है जो शरीर में नसों को एक्टिव रखने के लिए जरूरी है. सोडियम, मैग्नीशियम और जिंक मिलकर इलेक्ट्रोलाइट्स बनाता है. इसके अलावा सोडियम शरीर में तरल पदार्थों को बैलेंस रखता है. सोडिएम के कारण शरीर में पानी की संतुलित मात्रा बनी रहती है. अगर सोडियम की मात्रा कम हो जाए शरीर में पानी नहीं रुकेगा जिससे हजारों तरह की गतिविधियां बंद होने लगेगी. इसलिए सोडियम बहुत जरूरी है लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा हो जाए तो शरीर में पानी की मात्रा बढ़ने लगती है. यह पानी पहले खून की नलियों में पहुंचता है जिससे खून का वॉल्यूम बढ़ जाता है. जब खून की मात्रा नलियों में बढ़ जाएगी तो इसका प्रेशर भी ज्यादा होगा. यह अतिरिक्त प्रेशर खून की नलियों की दीवाल को नुकसान पहुंचाने लगता है. इस तरह यह ब्लड प्रेशर तो बढ़ाता ही है साथ नसों के फटने यानी हेमरेज की आशंका को भी बढ़ा देता है. किन-किन चीजों में छुपा होता सोडियमदरअसल, आप सब्जी या दाल में नमक तो कम देते हैं लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में आप कई ऐसी चीजें खाते हैं जिनमें आपको लगता है कि इनमें नमक नहीं है या बहुत कम है लेकिन उसमें बहुत ज्यादा सोडियम मिलाया जाता है. आमतौर पर ये पैकेटबंद चीजों में होता है. मसलन आप पॉपकॉर्न खाते हैं और आपको लगता है कि इसमें तो बिल्कुल नमक नहीं होगा लेकिन आप गलत हैं क्योंकि पॉपकॉर्न में कंपनियां सोडियम मिलाती है. इतना ही नहीं कुछ मीठे बिल्किट में भी सोडियम की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. अगर आप बाजार से मटर जैसी फ्रोजन सब्जियां खरीदते हैं और आपको लगेगा इसमें थोड़ा भी नमक नहीं है लेकिन इसमें बहुत अधिक नमक होता है क्योंकि किसी भी चीज को प्रिजर्व करने के लिए सोडियम मिलाया जाता है. पैकेटबंद चिप्स, कुरकुरे, बिस्किट, चॉकलेट, केक, पिज्जा, बर्गर, सॉस, नूडल्स, बेकरी आयटम, सूप, प्रोसेस्ड फूड,ब्रेड, कुकीज, फास्ट फूड आदि में बहुत अधिक सोडियम मिला रहता है. फिर बीपी कंट्रोल कैसे करेंनमक कम करना बीपी कंट्रोल करने का सबसे बेहतर तरीका होता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक एक दिन में 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए. यह 5 ग्राम आप पूरे दिन में जितनी चीजें खाते हैं सबको मिलाकर होना चाहिए. यानी आपके फूड में जितना नमक होता है सिर्फ वही नहीं बल्कि अन्य चीजें जैसे बाहर के पैकेटबंद चीजें बिस्किट, केक आदि से जो नमक आता है, उन सबको जोड़कर 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए. 5 ग्राम का मतलब एक चम्मच नमक. हालांकि भारत में करीब-करीब लोग 7 से 9 ग्राम तक नमक रोज खाते हैं. यही कारण है कि भारत में बीपी के मरीज बढ़ रहे हैं. ऐसे में नमक कम करना ही एक मात्र विकल्प है. इसके लिए थोड़ा-थोड़ा कर नमक को कम करें. शुरुआत में एक-दो सप्ताह मामूली मात्रा में नमक को घटाए और इसे धीरे-धीरे और कम करें. इसके साथ ही बाहर की चीजें जिनमें नमक की मात्रा ज्यादा रहती है, उनके बदले साबुत अनाज, फल, ड्राई फ्रूट्स, सीड्स आदि का सेवन करें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp,आपके सवालों का हम देंगे जवाब. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 13:16 IST

बास्केटबॉल चैम्पियन का ‘कैंडी’ सीक्रेट:मिलन शॉट से पहले दिमाग में दोहराते हैं ‘जेलीबीन’, ओवरथिंकिंग दूर करने का मिला अचूक फॉर्मूला

बास्केटबॉल चैम्पियन का ‘कैंडी’ सीक्रेट:मिलन शॉट से पहले दिमाग में दोहराते हैं ‘जेलीबीन’, ओवरथिंकिंग दूर करने का मिला अचूक फॉर्मूला

बड़े मैचों के दबाव में अक्सर दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों का दिमाग भी सुन्न पड़ जाता है। ऐसे में वे अपने ही खेल पर शक करने लगते हैं। अमेरिका के कॉलेज बास्केटबॉल टूर्नामेंट में इस साल के सर्वश्रेष्ठ 3-पॉइंट शूटर मिलन मोमसिलोविक भी इसी ओवरथिंकिंग का शिकार हो रहे थे। लेकिन इस 6 फीट 8 इंच लंबे स्नाइपर ने अपने दिमाग को शांत करने का एक बेहद अजीब, लेकिन 100% अचूक तरीका खोज निकाला है। यह तरीका है एक शब्द ‘जेलीबीन’। आयोवा स्टेट के मिलन इस वक्त डिवीजन-1 कॉलेज बास्केटबॉल के सबसे सटीक शूटर हैं। लेकिन एक वक्त था जब हर शॉट से पहले उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता था। मिलन बताते हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि मेरे शॉट में कुछ कमी है। शायद गेंद का आर्क सही नहीं है या मैं सही तरीके से थ्रो नहीं कर रहा हूं।’ लगातार गिरते कॉन्फिडेंस को बचाने के लिए उन्होंने एक मशहूर स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. मैथ्यू मायरविक से संपर्क किया। डॉ. मैथ्यू ने उन्हें एक बेहद आसान मनोवैज्ञानिक तरकीब बताई- ‘थ्रो करने से ठीक पहले दिमाग में किसी एक चीज, खासकर किसी खाने की चीज का नाम सोचो।’ मिलन ने इसके लिए ‘जेलीबीन’ शब्द चुना। वे कहते हैं, ‘शायद यह शब्द बोलने में थोड़ा लंबा है, इसलिए मैंने इसे चुना। मजेदार बात यह है कि जेलीबीन मेरी फेवरेट कैंडी भी नहीं है।’ मिलन यह शब्द जोर से नहीं बोलते, शॉट लेने से ठीक पहले वे इसे बस अपने दिमाग में दोहराते हैं। यह टेक्निक उनके दिमाग में आने वाले नकारात्मक ख्यालों को ब्लॉक कर देती है, जिससे उनका फोकस सिर्फ थ्रो पर रहता है। जैसे ही दिमाग ओवरथिंकिंग करना बंद करता है, शरीर की ‘मसल मेमोरी’ अपना काम बिल्कुल सटीक तरीके से करने लगती है। यह तकनीक खिलाड़ी का ध्यान नतीजे से हटाकर प्रोसेस पर ले आती है। आयोवा स्टेट के हेड कोच टीजे ओत्जेल्बर्गर इस बदलाव से बेहद खुश हैं। उनका कहना है, ‘पहले अगर वह एक-दो शॉट मिस करता था, तो अगला शॉट लेने से डरने लगता था। लेकिन अब उसका माइंडसेट बदल गया है। अब वह सिर्फ अपनी कोशिशों पर फोकस करता है, नतीजों पर नहीं।’ इस एक शब्द ने मिलन के खेल को पूरी तरह बदल दिया है। वे इस सीजन में 49.3% की सटीकता से 3-पॉइंट्स स्कोर कर रहे हैं, जो पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा है। उन्होंने अब तक 134 थ्री-पॉइंटर्स दागे हैं, जो किसी भी अन्य खिलाड़ी से अधिक है। वे 17.2 पॉइंट्स प्रति मैच के औसत के साथ अपनी टीम के टॉप स्कोरर बन गए हैं।