Wednesday, 22 Apr 2026 | 07:05 AM

Trending :

EXCLUSIVE

ऊपर से नमक नहीं खाते फिर भी हाई रहता है बीपी? आपके किचन की इन 5 चीजों में छिपा है ‘असली विलेन’, आज ही करें तौबा

authorimg

Last Updated:April 06, 2026, 13:16 IST Hidden Sodium in Foods: भारत में हर चार में से एक वयस्क को हाई बीपी है. जब भी किसी को हाई ब्लड प्रेशर होता है तो डॉक्टर सलाह देते हैं कि नमक खाना कम कर दीजिए. डॉक्टरों की सलाह पर लोग नमक खाना बहुत कम कर देते हैं. यहां तक कि सब्जी, दाल या उपर से नमक लेना बंद कर देते हैं. इसके बावजूद कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर नहीं घटता है. क्या आप जानते हैं इसका कारण है. दरअसल, इसका कारण है नमक जो आपके भोजन में छिपा होता है.आइए इसके बारे में जानते हैं. किन-किन चीजों में छुपा होता है नमक. Hidden Sodium in Foods: नमक का स्वाद लोगों को ऐसा लगा है कि इसके बिना भोजन बेस्वाद हो जाता है. लेकिन नमक का ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर मरीजों के लिए मीठा जहर है. यही कारण है कि बीपी के मरीजों को डॉक्टर कम से कम नमक खाने की सलाह देते हैं. इसके बाद मरीज नमक बिल्कुल कम कर देते है. लेकिन फिर भी ब्लड प्रेशर कम नहीं होता है. क्या आप जानते हैं कि नमक से दूर रहने के बावजूद आपके शरीर में भारी मात्रा में सोडियम कहां से पहुंच रहा है. यह खतरा वास्तव में आपके भोजन में ही छिपा है. इसके बारे में आपको पता भी नहीं रहता है लेकिन खाने की ये चीजें आपके शरीर में सोडियम भर देता है. यही सोडियम ब्लड प्रेशर को आउट ऑफ कंट्रोल कर देता है. सोडियम से क्यों बढ़ जाता है बीपीपहले यह जानिए कि सोडियम से बीपी क्यों बढ़ जाता है. सोडिएम अत्यंत महत्वपूर्ण माइक्रोन्यूट्रेंट्स हैं. यह इलेक्ट्रोलाइट्स का हिस्सा है जो शरीर में नसों को एक्टिव रखने के लिए जरूरी है. सोडियम, मैग्नीशियम और जिंक मिलकर इलेक्ट्रोलाइट्स बनाता है. इसके अलावा सोडियम शरीर में तरल पदार्थों को बैलेंस रखता है. सोडिएम के कारण शरीर में पानी की संतुलित मात्रा बनी रहती है. अगर सोडियम की मात्रा कम हो जाए शरीर में पानी नहीं रुकेगा जिससे हजारों तरह की गतिविधियां बंद होने लगेगी. इसलिए सोडियम बहुत जरूरी है लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा हो जाए तो शरीर में पानी की मात्रा बढ़ने लगती है. यह पानी पहले खून की नलियों में पहुंचता है जिससे खून का वॉल्यूम बढ़ जाता है. जब खून की मात्रा नलियों में बढ़ जाएगी तो इसका प्रेशर भी ज्यादा होगा. यह अतिरिक्त प्रेशर खून की नलियों की दीवाल को नुकसान पहुंचाने लगता है. इस तरह यह ब्लड प्रेशर तो बढ़ाता ही है साथ नसों के फटने यानी हेमरेज की आशंका को भी बढ़ा देता है. किन-किन चीजों में छुपा होता सोडियमदरअसल, आप सब्जी या दाल में नमक तो कम देते हैं लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में आप कई ऐसी चीजें खाते हैं जिनमें आपको लगता है कि इनमें नमक नहीं है या बहुत कम है लेकिन उसमें बहुत ज्यादा सोडियम मिलाया जाता है. आमतौर पर ये पैकेटबंद चीजों में होता है. मसलन आप पॉपकॉर्न खाते हैं और आपको लगता है कि इसमें तो बिल्कुल नमक नहीं होगा लेकिन आप गलत हैं क्योंकि पॉपकॉर्न में कंपनियां सोडियम मिलाती है. इतना ही नहीं कुछ मीठे बिल्किट में भी सोडियम की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. अगर आप बाजार से मटर जैसी फ्रोजन सब्जियां खरीदते हैं और आपको लगेगा इसमें थोड़ा भी नमक नहीं है लेकिन इसमें बहुत अधिक नमक होता है क्योंकि किसी भी चीज को प्रिजर्व करने के लिए सोडियम मिलाया जाता है. पैकेटबंद चिप्स, कुरकुरे, बिस्किट, चॉकलेट, केक, पिज्जा, बर्गर, सॉस, नूडल्स, बेकरी आयटम, सूप, प्रोसेस्ड फूड,ब्रेड, कुकीज, फास्ट फूड आदि में बहुत अधिक सोडियम मिला रहता है. फिर बीपी कंट्रोल कैसे करेंनमक कम करना बीपी कंट्रोल करने का सबसे बेहतर तरीका होता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक एक दिन में 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए. यह 5 ग्राम आप पूरे दिन में जितनी चीजें खाते हैं सबको मिलाकर होना चाहिए. यानी आपके फूड में जितना नमक होता है सिर्फ वही नहीं बल्कि अन्य चीजें जैसे बाहर के पैकेटबंद चीजें बिस्किट, केक आदि से जो नमक आता है, उन सबको जोड़कर 5 ग्राम से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए. 5 ग्राम का मतलब एक चम्मच नमक. हालांकि भारत में करीब-करीब लोग 7 से 9 ग्राम तक नमक रोज खाते हैं. यही कारण है कि भारत में बीपी के मरीज बढ़ रहे हैं. ऐसे में नमक कम करना ही एक मात्र विकल्प है. इसके लिए थोड़ा-थोड़ा कर नमक को कम करें. शुरुआत में एक-दो सप्ताह मामूली मात्रा में नमक को घटाए और इसे धीरे-धीरे और कम करें. इसके साथ ही बाहर की चीजें जिनमें नमक की मात्रा ज्यादा रहती है, उनके बदले साबुत अनाज, फल, ड्राई फ्रूट्स, सीड्स आदि का सेवन करें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp,आपके सवालों का हम देंगे जवाब. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 13:16 IST

बास्केटबॉल चैम्पियन का ‘कैंडी’ सीक्रेट:मिलन शॉट से पहले दिमाग में दोहराते हैं ‘जेलीबीन’, ओवरथिंकिंग दूर करने का मिला अचूक फॉर्मूला

बास्केटबॉल चैम्पियन का ‘कैंडी’ सीक्रेट:मिलन शॉट से पहले दिमाग में दोहराते हैं ‘जेलीबीन’, ओवरथिंकिंग दूर करने का मिला अचूक फॉर्मूला

बड़े मैचों के दबाव में अक्सर दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों का दिमाग भी सुन्न पड़ जाता है। ऐसे में वे अपने ही खेल पर शक करने लगते हैं। अमेरिका के कॉलेज बास्केटबॉल टूर्नामेंट में इस साल के सर्वश्रेष्ठ 3-पॉइंट शूटर मिलन मोमसिलोविक भी इसी ओवरथिंकिंग का शिकार हो रहे थे। लेकिन इस 6 फीट 8 इंच लंबे स्नाइपर ने अपने दिमाग को शांत करने का एक बेहद अजीब, लेकिन 100% अचूक तरीका खोज निकाला है। यह तरीका है एक शब्द ‘जेलीबीन’। आयोवा स्टेट के मिलन इस वक्त डिवीजन-1 कॉलेज बास्केटबॉल के सबसे सटीक शूटर हैं। लेकिन एक वक्त था जब हर शॉट से पहले उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता था। मिलन बताते हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि मेरे शॉट में कुछ कमी है। शायद गेंद का आर्क सही नहीं है या मैं सही तरीके से थ्रो नहीं कर रहा हूं।’ लगातार गिरते कॉन्फिडेंस को बचाने के लिए उन्होंने एक मशहूर स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. मैथ्यू मायरविक से संपर्क किया। डॉ. मैथ्यू ने उन्हें एक बेहद आसान मनोवैज्ञानिक तरकीब बताई- ‘थ्रो करने से ठीक पहले दिमाग में किसी एक चीज, खासकर किसी खाने की चीज का नाम सोचो।’ मिलन ने इसके लिए ‘जेलीबीन’ शब्द चुना। वे कहते हैं, ‘शायद यह शब्द बोलने में थोड़ा लंबा है, इसलिए मैंने इसे चुना। मजेदार बात यह है कि जेलीबीन मेरी फेवरेट कैंडी भी नहीं है।’ मिलन यह शब्द जोर से नहीं बोलते, शॉट लेने से ठीक पहले वे इसे बस अपने दिमाग में दोहराते हैं। यह टेक्निक उनके दिमाग में आने वाले नकारात्मक ख्यालों को ब्लॉक कर देती है, जिससे उनका फोकस सिर्फ थ्रो पर रहता है। जैसे ही दिमाग ओवरथिंकिंग करना बंद करता है, शरीर की ‘मसल मेमोरी’ अपना काम बिल्कुल सटीक तरीके से करने लगती है। यह तकनीक खिलाड़ी का ध्यान नतीजे से हटाकर प्रोसेस पर ले आती है। आयोवा स्टेट के हेड कोच टीजे ओत्जेल्बर्गर इस बदलाव से बेहद खुश हैं। उनका कहना है, ‘पहले अगर वह एक-दो शॉट मिस करता था, तो अगला शॉट लेने से डरने लगता था। लेकिन अब उसका माइंडसेट बदल गया है। अब वह सिर्फ अपनी कोशिशों पर फोकस करता है, नतीजों पर नहीं।’ इस एक शब्द ने मिलन के खेल को पूरी तरह बदल दिया है। वे इस सीजन में 49.3% की सटीकता से 3-पॉइंट्स स्कोर कर रहे हैं, जो पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा है। उन्होंने अब तक 134 थ्री-पॉइंटर्स दागे हैं, जो किसी भी अन्य खिलाड़ी से अधिक है। वे 17.2 पॉइंट्स प्रति मैच के औसत के साथ अपनी टीम के टॉप स्कोरर बन गए हैं।

क्या वेट लॉस की दवा लेने से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं? ब्रिटेन के डॉक्टर ने किया सनसनीखेज दावा

authorimg

Last Updated:April 06, 2026, 13:03 IST Weight Loss and Bone Health:वेट लॉस के लिए इस्तेमाल की जा रही GLP-1 दवाएं वजन घटाने में मदद करती हैं, लेकिन इससे बोन डेंसिटी कम हो सकती है. यूके के डॉक्टर करन राजन के अनुसार हड्डियों के घनत्व में कमी दवा के कारण नहीं, बल्कि मसल्स और शरीर के वजन घटने की वजह से होती है. हड्डियों की सुरक्षा के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पर्याप्त प्रोटीन जरूरी होता है. डॉक्टर के अनुसार तेजी से वजन घटाने से हड्डियों की डेंसिटी कम हो सकती है. How GLP-1 Impact Bone Density: दुनिया भर में इस वक्त वेट लॉस की दवाएं लोकप्रिय हो रही हैं. मोटापा और डायबिटीज से जूझ रहे तमाम लोग इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. डॉक्टर्स की मानें तो GLP-1 इंजेक्शन तेजी से वजन कम करने और बॉडी मैनेजमेंट का पसंदीदा विकल्प बन चुके हैं. सेलेब्स से लेकर आम लोग तक सभी इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. अब तक माना जा रहा है कि ये दवाएं डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं. हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स ने इन दवाओं से हड्डियां कमजोर होने की आशंका जताई है. सवाल उठ रहा है कि क्या GLP-1 दवाओं के कारण हड्डियों की मजबूती घट सकती है? इस बारे में यूके के डॉक्टर करन राजन ने हकीकत बताई है. HT की रिपोर्ट के मुताबिक यूके बेस्ड सर्जन और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर डॉक्टर करन राजन ने अपने इंस्टाग्राम पर GLP-1 दवाओं और बोन डेंसिटी के बीच कनेक्शन को लेकर कई अहम बातें बताई हैं. उन्होंने बताया कि GLP-1 दवाओं से हड्डियों की कमजोरी सीधे तौर पर नहीं होती है. वजन कम होने से बोन मिनरल डेंसिटी में कमी आ सकती है, लेकिन यह किसी भी वजन घटाने की प्रक्रिया में देखा जाता है. इन दवाओं का हड्डियों को तोड़ने वाले या बनाने वाले सेल्स पर कोई सीधा बायोलॉजिकल असर नहीं पड़ता है. सिर्फ वेट लॉस ड्रग्स को हड्डियों की कमजोरी से जोड़ना ठीक नहीं है. View this post on Instagram

अस्पताल में पहुंचकर मरीजों से मिलीं विधायक:बुरहानपुर में सुविधाओं के बारे में पूछा, बोलीं- व्यवस्थाएं बेहतर करने कलेक्टर से चर्चा करूंगी

अस्पताल में पहुंचकर मरीजों से मिलीं विधायक:बुरहानपुर में सुविधाओं के बारे में पूछा, बोलीं- व्यवस्थाएं बेहतर करने कलेक्टर से चर्चा करूंगी

बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने सोमवार सुबह 11 बजे जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मरीजों से भी बातचीत की। निरीक्षण के दौरान विधायक ने जिला अस्पताल के नोडल अधिकारी व डिप्टी कलेक्टर राजेश पाटीदार और सिविल सर्जन डॉ. दर्पण टोके से अस्पताल की व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न वार्डों में जाकर मरीजों से उनके स्वास्थ्य और मिल रहे उपचार के बारे में पूछा। मरीजों ने दी जा रही सुविधाओं पर संतुष्टि व्यक्त की। विधायक अर्चना चिटनिस ने बताया कि जिला अस्पताल में सुविधाएं और संसाधन जुटाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर से चर्चा की जाएगी। आज शाम ही जिला अस्पताल के अधिकारियों, डॉक्टरों और अन्य टीम के साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर विधायक ने एसएनसीयू कक्ष, प्रसव कक्ष और जनरल वार्ड का दौरा किया। इस दौरान जिला अस्पताल के आरएमओ भूपेंद्र गौर, प्रबंधन धीरज चौहान, डॉ. गौरव धावानी सहित अन्य डॉक्टर और स्टाफ सदस्य उपस्थित थे।

पोहरी बस स्टैंड के पीछे 7 फीट का मगरमच्छ:वन विभाग ने सफलतापूर्वक किया रेस्क्यू; राहगीर भयभीत होकर दूर से निकले

पोहरी बस स्टैंड के पीछे 7 फीट का मगरमच्छ:वन विभाग ने सफलतापूर्वक किया रेस्क्यू; राहगीर भयभीत होकर दूर से निकले

शिवपुरी शहर के पोहरी बस स्टैंड के पीछे स्थित तालाब के पास सोमवार सुबह करीब 9 बजे एक विशाल मगरमच्छ देखा गया। पुलिया के समीप बैठे इस मगरमच्छ को देखकर स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया और राहगीर भयभीत होकर दूर से निकलने लगे। स्थानीय निवासी मुकेश कुशवाह के अनुसार, मगरमच्छ की लंबाई लगभग 7 फीट थी और उसका पेट फूला हुआ दिख रहा था। आशंका जताई जा रही है कि उसने किसी जानवर, जैसे सूअर या कुत्ते का शिकार किया था, जिसके कारण वह अधिक हिल-डुल नहीं पा रहा था। घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई। जानकारी मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और लगभग 30 मिनट के सावधानीपूर्वक अभियान के बाद मगरमच्छ को पकड़ लिया। इसके उपरांत उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। रेस्क्यू अभियान के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। हालांकि, टीम ने स्थिति को नियंत्रित रखते हुए सफलतापूर्वक मगरमच्छ को पकड़ने का कार्य पूरा किया।

एफसीआरए पर पीएम मोदी के बयान से भड़के केसी वेणुगोपाल, कहा- ‘पूरे समुदाय का अपमान’ सरकार पर लगाया साज़िश का आरोप

एफसीआरए पर पीएम मोदी के बयान से भड़के केसी वेणुगोपाल, कहा- 'पूरे समुदाय का अपमान' सरकार पर लगाया साज़िश का आरोप

केरल की रेटिंग में एफसीआरए संशोधन को लेकर घमासन तेजी से हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे पत्र लिखकर कड़े विरोध की निंदा की है। उन्होंने “पूरे समुदाय का अपमान” पर बयान देते हुए कहा कि गहरे असंतोष की नींव है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अप्रैल को केरल में एनडीए की रैली के दौरान यूडीएफ पर एफसीआरए और यूनिफॉर्म सिविल कोड लेकर “झूठ फैलाने” का आरोप लगाया। इसी बयान पर अब कांग्रेस ने पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक और शिक्षण सामग्री बनाया है। “घरे दुख और ढांचे के साथ लिख रहा हूं…”केसी वेणुगोपाल ने अपने पत्र में बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने लिखा- “मैं गहरा दुख और बिखराव के साथ लिख रहा हूं। केरल में आपका बयान, जिसमें आपने यूडीएफ पर एफसीआरए को लेकर राजनीतिक लाभ के लिए झूठ फैलाने का आरोप लगाया था, बेहद समस्याग्रस्त और पूरे समुदाय के लिए विचारधारा थी। पवित्र दिन पर ऐसा बयान देना विशेष रूप से अलगाव वाला और टाला जा सकने वाला था।” वेणुगोपाल ने यह भी साफ किया कि एफसीआरए में प्रस्तावित बदलावों के “दूरगामी और खतरनाक परिणाम” हैं, जिनमें किसी भी शर्त को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। सरकार का पक्ष- ”ईमानदार एनजीओ को डरने की जरूरत नहीं”इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा, “ईसाई समुदाय को बिल्कुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। प्रस्तावित एफसीआरए बिल अच्छे एनजीओ की मदद के लिए सुझाव देता है और केवल गैर-अवैध तत्वों को सीमित रखता है जो भारत के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। अच्छे अनुयायियों को कोई नुकसान नहीं होगा, विशेष रूप से ईसाई धर्म को। मैं उन्हें पूरा समर्थन देना चाहता हूं कि यह बिल वास्तविक सिद्धांतों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से सरकारी बिल रोका गया है और इस पर आगे चर्चा होगी। खड़गे का हमला- “यह सुधार नहीं, हमला है” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्ज खुंडगे ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा, “यह सुधार नहीं है। यह हमला है, सिर्फ ईसाई अनुयायियों पर नहीं, बल्कि नागरिक समाज, एनजीओ और गरीबों की मदद करने वाली बातों पर भी।” खड़गे ने इसे ”चुनिंदा शकिंग” करार देते हुए कहा कि जैसे वक्फ कानून में बदलाव से मुस्लिम समुदाय में जन्म हुआ, वैसे ही एफसीआरए संशोधन से ईसाई समुदाय में गंभीर चिंता है। प्रभावोत्पादक और संक्षेपण संदेशकेरल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एफसीआरए की समाप्ति राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हो गई है। कांग्रेस इसे गठबंधन की सुरक्षा और अधिकारिता से बड़ा पोर्टफोलियो बना रही है, जबकि भाजपा इसे सहयोगी और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबद्धता बना रही है। इस पूरे विवाद में साफ किया गया है कि एफसीआरए संशोधन अब सिर्फ एक कानूनी या आवेदक नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे-सीधे राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

गर्मी में भूख न लगने की समस्या से हैं परेशान? तो आजमाएं यह घरेलू नुस्खे, जमकर खाने लगेंगे खाना – News18 हिंदी

arw img

X गर्मी में भूख न लगने की समस्या से हैं परेशान? तो आजमाएं यह घरेलू नुस्खे   Health Tips: मौसम में अचानक बदलाव का असर दिनचर्या और सेहत पर साफ दिख रहा है. गर्मी बढ़ते ही भूख कम हो रही है और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं. सर्दियों में जहां लोग भरपेट भोजन करते हैं, वहीं गर्मियों में खाने की इच्छा घट जाती है. ऐसे में नींबू शरबत का सेवन शरीर को ठंडक देने, पाचन सुधारने और भूख बढ़ाने में कारगर माना जा रहा है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि यह नुस्खा पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ है और दादी-नानी के समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. अगर इस उपाय को रोजाना अपनाया जाए, तो न सिर्फ पाचन बेहतर होता है बल्कि भूख भी खुलकर लगती है. इसके लिए केवल नींबू, काली मिर्च और नमक की जरूरत होती है. यह नुस्खा बेहद सरल है. एक नींबू को बीच से काट लें और उसमें काली मिर्च पाउडर और थोड़ा सा नमक डाल दें. इसके बाद इसे हल्की आंच पर थोड़ा गर्म करें ताकि इसका रस हल्का गुनगुना हो जाए. फिर इसे धीरे-धीरे चूसकर सेवन करें. यह उपाय गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करने में काफी असरदार है.

dry eyes explainer news: भूल जाओ आई ड्रॉप, अब मां के दूध से बनी गोली करेगी सूखी आंखों का इलाज, एम्‍स ने दी मंजूरी, बाजार में कब तक आएगी? जान लीजिए

authorimg

Dry Eye Treatment: जितना ज्यादा फोन, टीवी और डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ रहा है आंखों की समस्याएं भी उतनी ही बढ़ रही हैं. खासतौर पर ड्राई आई की समस्या बड़ों से लेकर बच्चों तक के लिए मुसीबत बन गई है. आंखों में जलन, खुजली, धुंधलापन और नमी की कमी को दूर करने के लिए अक्सर आई ड्रॉप्स का ही इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अब ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के आरपी सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज ने एक ऐसी गोली पर क्‍ल‍िन‍िकल ट्रायल क‍िया है जो न केवल आंखों को उनकी नमी लौटाएगी बल्कि ड्राई आइज की समस्या का स्थाई समाधान भी होगी. आरपी सेंटर नई दिल्ली ने यह टेबलेट मां के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन से तैयार की है और क्लीनिकल ट्रायल्स में इसके शानदार नतीजे मिले हैं. लैक्टोफेरिन नाम की यह टेबलेट ड्राई आंखों के इलाज में रामबाण बन सकती है. डॉक्टरों की मानें तो यह दवा जल्द ही बाजार में आ सकती है. डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल या लेसिक लेजर सर्जरी के चलते मरीजों को अक्सर आंखों में जलन, चुभन और सूखापन यानी ड्राई आई सिंड्रोम (शुष्क नेत्र या सूखी आंख) की दिक्कत होती है. खासतौर पर स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल के चलते आज की तारीख में यह आंखों की सबसे कॉमन बीमारी बन चुकी है. नवोदय टाइम्स में छपी खबर में एम्स के आरपी सेंटर की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता शर्मा और बायोफिजिक्स विभाग की डॉ. सुजाता शर्मा ने बताया कि डिजिटल युग में बढ़ते स्क्रीन टाइम ने ड्राई आई सिंड्रोम को तेजी से बढ़ाया है. लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की मैबोमियन ग्लैंड प्रभावित होती है, जिससे आंसू बनने और उनकी गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है. नतीजतन आंखों में किरकिरी, धुंधलापन और लगातार थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं, मानो आंखें अपनी ही नमी के लिए तरस रही हों. 400 आंखों पर हुआ ट्रायलडॉ. नम्रता शर्मा ने बताया कि ड्राई आई सिंड्रोम के इलाज के लिए एम्स ने ‘लैक्टोफेरिन’ दवा पर क्लीनिकल ट्रायल करने का फैसला किया. ट्रायल में ड्राई आई सिंड्रोम से पीड़ित 200 मरीजों (400 आंखों) को शामिल किया गया और उन्हें तीन महीने तक दिन में दो बार 250 एमजी लैक्टोफेरिन दिया गया. इसके बाद अगले छह महीने तक उनकी चिकित्सकीय निगरानी की गई और नतीजे शानदार रहे. इस दौरान लैक्टोफेरिन लेने वाले मरीजों की आंखों की नमी में सुधार हुआ, आंसुओं की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बेहतर हुईं और सूखापन भी काफी हद तक कम हो गया. समस्या की जड़ पर वार करती है दवाइस ट्रायल की खास बात यह है कि ‘लैक्टोफेरिन’ दवा केवल लक्षणों को दबाने के बजाय समस्या की जड़ पर काम करती है और आंखों के पूरे सिस्टम को संतुलित करती है. डॉ. सुजाता शर्मा के अनुसार, लैक्टोफेरिन कोई कृत्रिम रसायन नहीं, बल्कि शरीर में पाया जाने वाला प्राकृतिक प्रोटीन है, जो खासतौर पर मां के दूध में मौजूद होता है और इम्युनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. यही वजह है कि इसे आंखों के लिए एक प्रभावी नेचुरल हीलिंग विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. इस दवा को जापान में तैयार करवाया गया है और आरपी सेंटर ने इसको क्‍ल‍िन‍िकली परखा है, ज‍िसमें यह सफल रही है. कैसे डेवलप होती है ड्राई आई की समस्या? . मोबाइल या लैपटॉप पर लंबे समय तक देखने से आंखों का ब्लिंक रेट यानी पलक झपकने की दर कम हो जाती है. ऐसे में पलकों के किनारों पर स्थित सूक्ष्म तेल ग्रंथियां -मीबोमियन ग्लैंड पर्याप्त या सही गुणवत्ता का तेल नहीं बना पातीं और वे ब्लॉक हो जाती हैं. . यह तेल आंसुओं की बाहरी तैलीय परत बनाता है और आंसुओं को जल्दी सूखने से भी बचाता है। मीबम नामक तेल का उत्पादन न होने पर आंखों में सूखापन, जलन और ड्राई आई की समस्या बढ़ जाती है. . ड्राई आईज होने पर मरीज को आंखों में जलन, चुभन, दर्द, खुजली और थकान जैसी परेशानी होती है. अभी तक कैसे होता था इलाज?डॉ शर्मा ने कहा, अब तक ड्राई आई का इलाज मुख्य रूप से आई ड्रॉप्स और कृत्रिम आंसुओं तक सीमित रहा है, जो केवल अस्थायी राहत देते हैं और समस्या दोबारा लौट आती है. ऐसे में ‘लैक्टोफेरिन’ एक नई उम्मीद के रूप में सामने आया है, जो लंबे समय तक स्थायी राहत दे सकता है. डिजिटल युग में बढ़ती आंखों की समस्याओं के बीच यह खोज बेहतर और टिकाऊ इलाज की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है. ड्राई आई क्या होती है?ड्राई आई में आखें सूखी हो जाती हैं और उनकी नमी कम हो जाती है. ड्राई आई का इलाज क्या है?अभी तक कृत्रिम आंसू वाली आई ड्रॉप्स से ड्राई आई का इलाज होता है. लैक्टोफेरिन कैसी दवा है?आरपी सेंटर द्वारा बनाई जार ही लैक्टोफेरिन एक गोली या टैबलेट होगी जो मरीज को खानी होगी. इसे ड्राई आई सिंड्रोम की स्थाई दवा बताया जा रहा है. क्या यह मां के दूध से बनी है?यह दवा मां के दूध में पाए जाने वाले प्रोटीन लैक्‍टोफेर‍िन से बनी है. बाजार में कब तक आएगी जल्‍दी ही इसके बाजार में आने की संभावना है.

जाकिर खान बोले- धुरंधर से सबकी जली:बॉलीवुड पर कसा तंज; कहा- बम ल्यारी में फूटे, पर धुआं बांद्रा से जुहू में उड़ा

जाकिर खान बोले- धुरंधर से सबकी जली:बॉलीवुड पर कसा तंज; कहा- बम ल्यारी में फूटे, पर धुआं बांद्रा से जुहू में उड़ा

19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार रिकॉर्ड ब्रेक कर रही है। इस बीच कॉमेडियन जाकिर खान ने फिल्म की सफलता को लेकर बॉलीवुड पर चुटकी ली है। जाकिर खान ने एक अवॉर्ड शो के दौरान कहा कि इंडस्ट्री के लोग आदित्य धर की इस फिल्म से अंदर ही अंदर जल रहे हैं। जाकिर ने कहा, “कितने ही बधाई पोस्ट आप डाल दें, कितनी ही स्टोरी शेयर कर दें या इंटरव्यू में इसे अपनी पसंदीदा फिल्म बता दें, मगर सच तो ये है कि धुरंधर से सबकी जली तो है।” ल्यारी वाले सीन पर ली चुटकी जाकिर ने फिल्म के एक्शन सीन्स का जिक्र करते हुए बांद्रा और जुहू (जहां बॉलीवुड स्टार्स रहते हैं) पर निशाना साधा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “बम फिल्म में ल्यारी (कराची) में फूटे, पर धुआं बांद्रा से जुहू में उड़ा है।” उनका इशारा उन सेलेब्स की तरफ था जो फिल्म की ब्लॉकबस्टर ओपनिंग के समय चुप थे, लेकिन अब रिकॉर्ड टूटने पर इसकी तारीफ कर रहे हैं। साउथ के सितारों ने पहले की थी तारीफ ‘धुरंधर 2’ में रणवीर सिंह, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, राकेश बेदी और सारा अर्जुन जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की रिलीज के बाद सबसे पहले महेश बाबू, अल्लू अर्जुन और एसएस राजामौली जैसे साउथ के दिग्गजों ने इसकी सराहना की थी। इसके काफी समय बाद बॉलीवुड से आलिया भट्ट, करण जौहर और विक्की कौशल ने फिल्म के कलाकारों के काम की तारीफ की। मधुर भंडारकर जैसे कई लोगों का मानना है कि फिल्म को बॉलीवुड से उतना सपोर्ट नहीं मिल जितना मिलन चाहिए था। जाकिर ने बताई ब्रेक लेने की असली वजह इसी बीच, जाकिर खान ने अपने लाइव टूर से ब्रेक लेने की खबरों पर भी सफाई दी है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर उनकी सेहत को लेकर चल रही खबरें गलत हैं। जाकिर ने कहा, “ब्रेक की असली कहानी ये है कि मेरे पास बहुत सारा लिखने का काम पेंडिंग था, जिसे मैं पिछले छह साल से नहीं कर पाया था। मेरी सेहत बहुत खराब नहीं है। जो कुछ भी आप पढ़ रहे हैं वो अनावश्यक बकवास है।”

बंगाल चुनाव 2026: ‘बंगाल में बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी खुद ममता बनर्जी हैं’, कांग्रेस नेता का बयान से हंगामा

बंगाल चुनाव 2026: 'बंगाल में बीजेपी की सबसे बड़ी सहयोगी खुद ममता बनर्जी हैं', कांग्रेस नेता का बयान से हंगामा

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने ‘भाजपा का एजेंट’ कहे जाने पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी खुद बीजेपी के सबसे बड़े सहयोगी हैं. उनके रहते हुए बीजेपी को अधीर रंजन चौधरी की जरूरत नहीं हो सकती. पश्चिम बंगाल कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “जब तक ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में हैं, मैं भाजपा के करीब नहीं जा सकता। असल में ममता बनर्जी ही वही हैं जो भाजपा बंगाल लेकर आई थीं। इतना ही नहीं, वह एक समय भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी रहे हैं। पश्चिम बंगाल में जब तक ममता बनर्जी हैं, भाजपा को अधीर रंजन चौधरी की जरूरत नहीं हो सकती।” उन्होंने आगे कहा, “राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से ममता बनर्जी खुद ही उनके सबसे बड़े सहयोगी हैं। दोनों सामूहिक चुनावी कलाकार हैं। दोनों के बीच कभी ‘प्रो एस मजबूत-नो एस मजबूत’ और कभी ‘प्रो एस मजबूत-नो एस मजबूत’ बनी रहती हैं।” कांग्रेस नेताओं ने पिछले दिनों रैलियों के दौरान हुए हमलों पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने बताया, “चुनाव प्रचार के दौरान, पुराने कांग्रेस के कुछ लोगों ने मुझे अपमानित करने की कोशिश की। वहां मौजूद स्थानीय पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जबकि इस तरह की घटना की आशंका के बारे में उन्हें पहले ही सूचित कर दिया गया था। हम लोगों ने खुद का मुकाबला किया और हमारी रैली को आगे बढ़ाया।” पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के दावेदार अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “ये कार्यकर्ता नहीं बता रहे हैं. हम लोग लड़ रहे हैं, ये बड़ी बात है. हमें चुनाव से पहले तय करना है कि जो भी फैसला आएगा, वह अच्छा होगा.” इसी बीच अधीर रंजन चौधरी ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा स्टूडियो के ‘कोलकाता पर हमलों’ वाली टिप्पणी पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, “वह सिर्फ बयान ही दे सकते हैं। वह खुद भूख मार रहे हैं। जो अपने लोगों को दो वक्त की रोटी नहीं दे सकते, वह कहां किसे मार जेल। पाकिस्तान को पहले अपने लोगों के पेट की पुष्टि का इंतजार करना चाहिए।” डीसीएच/