गर्मियों में अमृत है गन्ने का रस! ऊर्जा से भरपूर… पाचन को रखता है फिट, जानें इसके कई फायदे

Last Updated:April 05, 2026, 13:26 IST Benefits of Sugarcane Juice: गर्मियों की तपती धूप में शरीर को ठंडक और तुरंत ऊर्जा देने वाले पेय की मांग तेजी से बढ़ जाती है. ऐसे में गन्ने का रस लोगों की पहली पसंद बनकर उभरता है, क्योंकि यह न सिर्फ सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी कई फायदे देता है. आयुर्वेद में भी इसे शरीर को ठंडक देने और ऊर्जा बढ़ाने वाला प्राकृतिक पेय माना गया है. वैद्य मालती देवी के अनुसार अगर गन्ने का रस साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए पिया जाए तो यह शरीर के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है. यह गर्मी में होने वाली कमजोरी, डिहाइड्रेशन और पाचन से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है. हालांकि उन्होंने यह भी सलाह दी है कि हमेशा स्वच्छ स्थान से ताजा रस ही पिएं और मधुमेह के मरीज सेवन से पहले डॉक्टर की राय जरूर लें. गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडक और ऊर्जा की जरूरत बढ़ जाती है. तेज धूप, लू और पसीने की वजह से शरीर जल्दी थक जाता है, और पानी की कमी भी हो जाती है. ऐसे में गन्ने का रस एक सस्ता प्राकृतिक और सेहतमंद पेय माना जाता है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य मालती देवी बताती है कि अगर सही तरीके से गन्ने का रस पिया जाए तो यह शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित होता है. मालती देवी बताती है कि सबसे बड़ा फायदा यह है कि गन्ने का रस शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है. इसमें प्राकृतिक शुगर (ग्लूकोज) होती है, जो शरीर में जल्दी अवशोषित होकर ऊर्जा प्रदान करती है गर्मी में जब कमजोरी या चक्कर जैसा महसूस होता है, तब एक गिलास गन्ने का रस तुरंत राहत देता है. मालती देवी बताती है कि गन्ने का रस गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक पेय है. यह शरीर के तापमान को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है और तेज गर्मी के असर को कम करता है. जब लू चलती है, तब गन्ने का रस शरीर को अंदर से ठंडक देता है और हीट स्ट्रोक से बचाने में सहायक होता है. इसमें भरपूर मात्रा में पानी और प्राकृतिक शर्करा होती है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ हाइड्रेट भी रखती है. यही वजह है कि गर्मियों में गांवों से लेकर शहरों तक लोग गन्ने का रस बड़े शौक से पीते हैं और इसे अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बना लेते है. Add News18 as Preferred Source on Google वैद्य मालती देवी बताती हैं कि गन्ने का रस डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से बचाने में बेहद कारगर होता है. इसमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है. साथ ही गन्ने के रस में पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स पाए जाते है. ये मिनरल्स शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं, जिससे कमजोरी, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं कम होती हैं. गर्मियों में नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर तरोताजा बना रहता है और पानी की कमी नहीं होने पाती. पेट के लिए फायदेमंद: वैद्य मालती देवी बताती है कि गन्ने का रस पाचन तंत्र के लिए भी काफी लाभकारी होता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करते हैं. इसके अलावा अगर किसी को पेट में जलन या एसिडिटी की परेशानी रहती है, तो गन्ने का रस उसे शांत करने में सहायक होता है. यह पेट को ठंडक पहुंचाता है और अंदरूनी गर्मी को कम करता है, जिससे व्यक्ति को आराम महसूस होता है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन करने से पाचन से जुड़ी दिक्कतों में सुधार देखा जा सकता है. लिवर के लिए फायदेमंद: गन्ने का रस लिवर की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर से विषैले तत्व (टॉक्सिन्स) बाहर निकालने में मदद करता है. जिससे लिवर की कार्यक्षमता बेहतर होती है. पीलिया (जॉन्डिस) के मरीजों के लिए भी गन्ने का रस लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह लिवर को मजबूती देता है और शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करता है. हालांकि, डॉक्टर भी इसे सीमित मात्रा में ही पीने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर को फायदा मिले और कोई नुकसान न हो. इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक: मालती देवी बताती है कि गन्ने का रस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को अंदर से मजबूत बनाते है और बीमारियों से लड़ने की ताकत देते है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में गन्ने का रस पीने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और संक्रमण का खतरा भी कम हो सकता है. यही वजह है कि गर्मियों में इसे सेहत के लिए एक फायदेमंद प्राकृतिक पेय माना जाता है. त्वचा के लिए फायदेमंद: गन्ने का रस त्वचा की सेहत के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा को अंदर से नमी प्रदान करते हैं, जिससे त्वचा मुलायम और हाइड्रेटेड बनी रहती है. इसके नियमित सेवन से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और चेहरा ताजा दिखता है. खासकर गर्मियों में होने वाली समस्याएं जैसे रूखापन, जलन और बेजान त्वचा को कम करने में गन्ने का रस मददगार साबित होता है. यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ त्वचा को भी स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है. First Published : April 05, 2026, 13:26 IST
गर्मियों में गेहूं नहीं, बल्कि इन आटे की रोटी पेट के हीरा! कैल्शियम और फाइबर से भरपूर, कई रोगों में कारगर

Last Updated:April 04, 2026, 17:51 IST सभी घरों में आमतौर पर रोटी के लिए गेहूं के आटे का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन गर्मियों के दिनों में हमें ऐसे भोजन का सेवन करना चाहिए जो आसानी से डाइजेस्ट हो सके और पेट का स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहे. इसके लिए आज हम आपको गेहूं के अतिरिक्त कुछ ऐसे आटे के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बेहद सुपाच्य होते हैं और गर्मियों के दिनों में स्वास्थ्य संबंधी समस्या से बचाव करते हैं. रोटी एक ऐसी चीज है, जो भारत के सभी घरों में खाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है या लगभग हर दिन खाने में उपयोग की जाती है. ज्यादातर लोग इस दाल या सब्जी के साथ खाना बेहद पसंद करते हैं. आमतौर पर घरों में रोटी बनाने के लिए गेहूं के आटे का उपयोग किया जाता है, लेकिन हर तरह के मौसम में हर तरह की रोटी फायदेमंद नहीं होती है. आयुर्वेदिक दवाओं के सलाहकार डॉक्टर आशीष बताते हैं कि गर्मी में खानपान का ख्याल रखना बेहद आवश्यक होता है. इस मौसम में हमें ऐसे खाने की आवश्यकता होती है, जो आसानी से पच सके और शरीर को ठंडा रखने में भी मददगार हो. गर्मी के तपिश में शरीर को अंदर से ठंडा रखने के लिए हल्के अनाज का चुनाव करना चाहिए. गर्मियों के दिनों में चावल के आटे की रोटी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. इसकी तासीर ठंडी होती है. इसके कारण इसके सेवन से शरीर अंदर से ठंडा रहता है और यह बेहद सुपाच्य होता है. खाने के बाद यह आसानी से डाइजेस्ट हो जाता है. इसके अलावा यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने में भी मददगार होता है. Add News18 as Preferred Source on Google इसके अलावा गर्मी के मौसम में जौ के आटे की रोटी खाने के लिए अच्छी मानी जाती है. इसकी तासीर भी ठंडी होती है, जो गर्मी के दिनों में शरीर के तापमान को बैलेंस करने में मदद करती है. यह रोटी फाइबर से भरपूर होती है. इसके कारण डाइजेशन बेहतर बना रहता है. रागी की रोटी बेहद हल्की और पौष्टिक मानी जाती है. इसे गर्मी के दिनों में लंच या डिनर के समय में उपयोग किया जा सकता है. इसमें कैल्शियम और फाइबर की मात्रा भरपूर होती है, जो शरीर को गर्मी के दिनों में ठंडा रखने में और हल्का महसूस करने में मददगार साबित हो सकती है. सबसे खास बात यह है कि यह वजन कंट्रोल करने के साथ-साथ शरीर को पूरा दिन एनर्जेटिक बनाए रखती है. गर्मियों के दिनों में हम अपने डाइट में मल्टीग्रेन आटे का उपयोग कर सकते हैं. इसमें कई तरह के आते मौजूद होते हैं, जैसे गेहूं, ज्वार, रागी, जौ, बेसन आदि कई तरह के ऑटो के मिश्रण के कारण इसमें फाइबर और प्रोटीन की प्रचुर मात्रा उपलब्ध होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में और शरीर को कई तरह के रोगों से बचाने में बेहद मददगार होती है. गेहूं एक ऐसा आटा है, जो भारत में रोटी के लिए सबसे अधिक उपयोग किया जाता है. इसमें फाइबर की प्रचुर मात्रा मौजूद होती है, जो डाइजेशन को बेहतर बनाने में फायदेमंद होती है. गर्मी के दिनों में इसे अपने लंच और डिनर दोनों में शामिल किया जा सकता है. यह पेट को हल्का बनाए रखने में फायदेमंद होती है. First Published : April 04, 2026, 17:51 IST
सुबह की चाय से लेकर शाम के नाश्ते तक, अगर आप हर समय खा रहे हैं ब्रेड, तो सावधान! इन बीमारियों का खतरा

Last Updated:April 04, 2026, 16:12 IST Health News: अक्सर आपने देखा होगा कि बच्चों को सुबह चाय के साथ या फिर लंच बॉक्स में ब्रेड दिया जाता है, जो अब उनकी दिनचर्या बन गई है. लेकिन एक्सपर्ट के अनुसार, ब्रेड सेहत को काफी नुकसान पहुंचाता है. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ब्रेड से सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है. चंदौली: आज के आधुनिक जीवन में लोगों की खानपान की आदतों में तेजी से बदलाव आया है. व्यस्त दिनचर्या और समय की कमी के कारण लोग ऐसे खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिन्हें बनाने में कम समय लगे. इसी वजह से ब्रेड का उपयोग बेहद आम हो गया है. सुबह की चाय के साथ ब्रेड-बटर, बच्चों के टिफिन में ब्रेड, जिम के बाद स्नैक के रूप में ब्रेड हर उम्र के लोग इसे अपनी डाइट का हिस्सा बना चुके हैं. हालांकि, हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ब्रेड के अत्यधिक सेवन को लेकर चिंता जताई है. डॉक्टर रिद्धि पांडे ने इस विषय पर बातचीत करते हुए लोकल 18 से बताया कि ब्रेड मूलरूप से सुविधा के लिए बनाया गया खाद्य पदार्थ है, न कि स्वास्थ्य के लिए है. उन्होंने कहा कि लोग रोटी बनाने में लगने वाले समय और मेहनत से बचने के लिए ब्रेड का विकल्प चुनते हैं, लेकिन यह आदत लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकती है. बीमारियों का बन सकता है कारण डॉक्टर पांडे ने बताया कि ब्रेड में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है. यदि इसे रोजाना और अधिक मात्रा में खाया जाए, तो यह शरीर में अतिरिक्त कैलोरी के रूप में जमा होने लगता है. खासकर जब लोग ब्रेड को बटर, घी या पीनट बटर के साथ खाते हैं, तो शरीर में फैट का स्तर तेजी से बढ़ता है. यह जमा हुआ फैट आगे चलकर मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है. शरीर में बढ़ाता है कोलेस्ट्रॉल कई लोग यह सोचकर ब्राउन ब्रेड का सेवन करने लगते हैं कि यह ज्यादा हेल्दी है. हालांकि डॉक्टर पांडे ने बताया कि ब्राउन ब्रेड में सफेद ब्रेड की तुलना में थोड़ा कम कार्बोहाइड्रेट हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे रोजाना बिना सोचे-समझे खाया जाए. यदि ब्राउन ब्रेड का सेवन भी नियमित रूप से बटर या अन्य फैट के साथ किया जाए, तो यह भी शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का काम करता है. पौष्टिक विकल्पों को दें प्राथमिकता इसके अलावा, ब्रेड को फ्राई करके खाना या बार-बार सेवन करना पाचन तंत्र पर भी असर डाल सकता है. लंबे समय तक ऐसी आदतें अपनाने से शरीर में ऊर्जा असंतुलन और वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है. डॉक्टर ने बताया कि लोग अक्सर सुविधा के लिए ब्रेड को अपनी दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बना लेते हैं, जो सही नहीं है. उन्होंने सलाह दी कि ब्रेड का सेवन पूरी तरह से बंद करना जरूरी नहीं है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में और कभी-कभार ही खाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके बजाय, पारंपरिक और ताजा बने खाद्य पदार्थ जैसे रोटी, दलिया या अन्य पौष्टिक विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए. बता दें कि यह समझना जरूरी है कि हर आसान विकल्प स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होता है. ब्रेड भले ही समय बचाने में मदद करे, लेकिन इसे रोजमर्रा की आदत बना लेना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है. संतुलित आहार और सही जीवनशैली ही अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Chandauli,Uttar Pradesh First Published : April 04, 2026, 14:41 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
bel juice benefits and side effects | bel juice benefits in hindi | बेल के जूस के फायदे | बेल के जूस के फायदे और नुकसान |

Last Updated:April 02, 2026, 17:03 IST तपती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच प्रकृति ने हमें ‘बेल’ के रूप में एक अनमोल वरदान दिया है. आयुर्वेद में ‘श्रीफल’ के नाम से मशहूर यह फल न केवल शरीर को बर्फ जैसी ठंडक देता है, बल्कि पुरानी से पुरानी कब्ज और डायबिटीज जैसी बीमारियों को जड़ से खत्म करने की ताकत रखता है. महज ₹20 में मिलने वाला बेल का एक गिलास जूस आपकी सेहत के लिए किसी महंगे टॉनिक से कम नहीं है. आइए जानते हैं क्यों इस मौसम में बेल का सेवन आपके लिए अनिवार्य है. गर्मियों के मौसम में कई ऐसे फल होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद माने जाते हैं. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे फल के बारे में बताने जा रहे हैं जो कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. ऐसा ही एक फल बेल है, जिसे श्रीफल भी कहा जाता है. यह एक औषधीय गुणों से भरपूर फल है, जो आयुर्वेद में प्राचीन काल से इस्तेमाल होता आ रहा है. यह गर्मियों में विशेष रूप से उपयोगी होता है. शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ कई गंभीर बीमारियों से बचाने की ताकत रखता है. बेल का फल, पत्ते, बीज और जड़ सब कुछ औषधि की तरह काम करते हैं. परंतु गर्मियों के मौसम में बेल के जूस की डिमांड अधिक रहती है क्योंकि बेल का जूस हमारे शरीर को ठंडक प्रदान करता है, जिससे कई बीमारियां ठीक हो सकती हैं. बेल का जूस हमारे पाचन तंत्र के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. बेल के फल के गूदे से बना शरबत या मुरब्बा कब्ज, गैस, एसिडिटी और दस्त जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. यह फल सिर्फ गर्मियों के मौसम में ही मिलता है. बाजारों में आसानी से ₹20 से लेकर ₹40 तक बेल के जूस का गिलास मिल जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google बेल के पत्तों का रस डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभदायक माना जाता है. यह ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. सुबह खाली पेट आप बेल के पत्तों को साफ पानी से धुलाई करने के बाद पीसकर रस निकालकर सेवन करने से डायबिटीज जैसी समस्या से राहत मिल सकती है. बेल में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ‘C’ प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं. यह संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है और मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से सुरक्षा करता है. बेल का सेवन हार्ट के लिए भी लाभकारी है. यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है. आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि बेल का जूस खून साफ करने में भी मदद करता है. बेल में मौजूद विटामिन्स और मिनरल्स त्वचा को ग्लोइंग बनाते हैं और बालों को जड़ से मजबूत करते हैं. बेल के पत्तों का रस त्वचा पर लगाने से कील-मुंहासे और फोड़े-फुंसियों से राहत मिलती है. बेल फायदेमंद होता है, लेकिन बेल का सेवन सीमित मात्रा में ही करें, क्योंकि अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन कब्ज पैदा कर सकता है. First Published : April 02, 2026, 17:03 IST
लहसुन और गुड़ खाने से क्या फायदा होता है? क्या यह कॉम्बिनेशन शरीर के लिए फायदेमंद, एक्सपर्ट से जान लीजिए

Last Updated:April 02, 2026, 15:40 IST Garlic With Jaggery Benefits: लहसुन और गुड़ का कॉम्बिनेशन एक पारंपरिक घरेलू उपाय है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और शरीर को एनर्जी देने में मदद करता है. लहसुन में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण संक्रमण से बचाते हैं, जबकि गुड़ आयरन का अच्छा सोर्स है और खून की कमी दूर करने में सहायक होता है. हालांकि इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना जरूरी है. लहसुन और गुड़ का कॉम्बिनेशन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है. (Image- AI) Lahsun Aur Gud Khane Ke Fayde: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लहसुन और गुड़ का सेवन लंबे समय से किया जा रहा है. आयुर्वेद में इन दोनों चीजों को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है. कई रिसर्च में भी लहसुन और गुड़ को शरीर के लिए लाभकारी माना गया है. लहसुन अपने एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है, वहीं गुड़ शरीर को एनर्जी देने और खून को शुद्ध करने में मदद करता है. जब इन दोनों का एक साथ सेवन किया जाता है, तो इनके फायदे बढ़ जाते हैं. यूपी के गाजियाबाद स्थित रंजना न्यूट्रीग्लो क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि लहसुन में एलिसिन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने में मदद करता है. यह संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है और शरीर को कई बीमारियों से बचाता है. दूसरी ओर गुड़ आयरन का अच्छा स्रोत होता है, जो एनीमिया को दूर करने में सहायक है. इस तरह यह कॉम्बिनेशन इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के साथ खून की गुणवत्ता को भी बेहतर करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डाइटिशियन ने बताया कि लहसुन और गुड़ का कॉम्बिनेशन पाचन तंत्र के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. लहसुन पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है, जिससे भोजन आसानी से पचता है. वहीं गुड़ आंतों को साफ रखने में मदद करता है और कब्ज की समस्या को कम करता है. नियमित रूप से इसका सेवन करने से गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है. दिल की सेहत के लिए भी लहसुन और गुड़ का सेवन लाभकारी हो सकता है. लहसुन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है. वहीं गुड़ खून को साफ रखने में सहायक होता है, जिससे दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है. यह कॉम्बिनेशन शरीर में ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी मदद कर सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक सर्दी-खांसी और मौसम बदलने पर होने वाली समस्याओं में भी यह मिश्रण कारगर माना जाता है. लहसुन में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण संक्रमण से लड़ते हैं, जबकि गुड़ गले को आराम पहुंचाता है और शरीर को गर्माहट देता है. खासतौर पर ठंड के मौसम में इसका सेवन करने से शरीर को अंदर से मजबूती मिलती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. हालांकि गर्मियों के मौसम में इसका सेवन बेहद संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए. अधिक मात्रा में लहसुन खाने से पेट में जलन या बदहजमी हो सकती है, जबकि गुड़ का ज्यादा सेवन ब्लड शुगर बढ़ा सकता है. इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 02, 2026, 15:37 IST
कई बीमारियों के लिए काल है नीम का पत्ता! रोजाना बस इतनी पत्तियों का करें सेवन, जानिए आयुर्वेदिक फायदे

Last Updated:March 31, 2026, 20:33 IST Health News: नीम की सबसे बड़ी खासियत इसकी एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक क्षमता है. यही वजह है कि गांवों में आज भी लोग दातुन करते हैं. नीम माउथ को किसी भी टूथपेस्ट से ज्यादा रिफ्रेश करता है. आइए नीम के आयुर्वेदिक फायदों के बारे में जानते हैं. नीम का पौधा आसानी से गांव में मिल जाता है, लेकिन नीम की पत्तियां हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद मानी जाती हैं. डायबिटीज के मरीजों से लेकर ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. नीम की पत्तियों से बदलते मौसम के साथ-साथ वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. वायरल फीवर के साथ-साथ टाइफाइड, मलेरिया और सामान्य बुखार से भी बचाव में नीम की पत्तियों का सेवन उपयोगी माना जाता है. वहीं इस समय गर्मियों के मौसम में सबसे अधिक समस्या फंगल इन्फेक्शन को लेकर रहती है. कई बार फंगल इन्फेक्शन के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. अगर आप भी फंगल इन्फेक्शन (दाद) की समस्या से अक्सर परेशान रहते हैं, तो सुबह खाली पेट नीम की तीन से चार पत्तियों को चबा सकते हैं. आप नीम की पत्तियों के रस का सेवन कर सकते हैं, तो फंगल इन्फेक्शन जैसी समस्या से आपको राहत मिल जाएगी. नीम की पत्तियां शरीर को अंदर से शुद्ध करने का काम करती हैं और हमारे खून को साफ करती हैं, जिससे रोग प्रतिरोध क्षमता कम होती है. वही नीम की पत्तियों का सेवन सही मात्रा में करना चाहिए. अधिक मात्रा में नीम की पत्तियों का सेवन करने से आप परेशान भी हो सकते हैं. अत्यधिक मात्रा में नीम की पत्तियों का सेवन करने से पेट में दर्द जैसी समस्या हो सकती है. गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि जो लोग फंगल इंफेक्शन से एक्शन परेशान रहते हैं, वह सुबह खाली पेट 5 से 7 देसी नीम की कोपल यह पत्तियों को सुबह खाली पेट चला सकते हैं. ध्यान रहे कि पत्तियों को पेड़ से तोड़ने के बाद अच्छी तरीके से साफ पानी में धो लें. करीब 15 दिन तक लगातार नीम की पत्तियों का सेवन करने से कई बीमारियां ठीक हो सकती हैं. नीम की सबसे बड़ी खासियत इसकी एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक क्षमता है. यही वजह है कि गांवों में आज भी लोग दातुन करते हैं. नीम माउथ किसी भी टूथपेस्ट से ज्यादा रिफ्रेश करता है. यह कैविटी, बदबू, मसूड़ों की सूजन और ओरल हेल्थ से जुड़ी कई परेशानियां दूर करता है. नीम की पत्तियां चबाने से माउथ के हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होते हैं, जिससे दांतों का दर्द और बदबू दोनों से राहत मिल जाती है. नीम के पत्तों का रस पेट को साफ और शुद्ध करता है, यही कारण है कि इसके पत्ते पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं. नीम के पत्ते ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. नीम के पत्तों का रस सुबह खाली पेट पीने से शरीर में इम्युनिटी पावर बढ़ता है, जिससे शरीर को छोटी-मोटी बीमारियों से लड़ने की क्षमता मिलती है. नीम की पत्तियों के रस या पेस्ट लगाने से बालों का झड़ना कम होता है. यही नहीं, यह रूसी से भी निजात मिलती है. First Published : March 31, 2026, 20:08 IST
शरीर के लिए ‘फिल्टर’ का काम करती हैं इस पौधे की पत्तियां! सुबह खाली पेट करें सेवन, कई बीमारियों में कारगर

Last Updated:March 31, 2026, 17:22 IST Chandauli News: ज्यादातर घरों में तुलसी की पूजा होती है और इस पौधे को पवित्र माना जाता है. इसके साथ ही तुलसी के कई औषधीय गुण भी हैं. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि तुलसी में वो कौन-कौन से गुण हैं और किन समस्याओं में यह कारगर है. चंदौली: भारत में लगभग हर घर में तुलसी का पौधा पाया जाता है. इसे धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है और नियमित रूप से पूजा भी की जाती है, लेकिन तुलसी केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि यह एक शक्तिशाली औषधीय पौधा भी है. आयुर्वेद में तुलसी के पत्तों को कई बीमारियों के उपचार में उपयोगी बताया गया है. डॉक्टर रिद्धी पांडे ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि तुलसी में एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही कारण है कि इसे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं में इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने तुलसी के उपयोग के कुछ प्रमुख तरीके बताए हैं, जो रोजमर्रा की जिंदगी में बेहद लाभकारी साबित हो सकते हैं. बेहद कारगर माना जाता है तुलसी का सेवन सबसे पहले, पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए तुलसी का सेवन बेहद कारगर माना जाता है. यदि किसी व्यक्ति को पेट साफ न होने या कब्ज की समस्या रहती है, तो सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में तुलसी के पत्तों का पेस्ट और आधा नींबू मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है. इससे शरीर का डिटॉक्स होता है, पाचन बेहतर होता है और लीवर भी साफ रहता है. नियमित सेवन से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और व्यक्ति पूरे दिन तरोताजा महसूस करता है. रोग प्रतिरोधक क्षमता को करता है मजबूत डॉक्टर रिद्धी के अनुसार, त्वचा की देखभाल में भी तुलसी का विशेष महत्व है. आजकल बाजार में मिलने वाले कई स्किन केयर उत्पादों जैसे फेस वॉश और क्रीम में तुलसी और नीम का उपयोग किया जाता है. घर पर भी तुलसी के पत्तों को पीसकर टोनर या सीरम की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. रात में इसे चेहरे पर लगाने से त्वचा साफ और चमकदार बनती है. इसके अलावा, डार्क सर्कल की समस्या में भी तुलसी के पत्तों का पेस्ट आंखों के नीचे लगाने से लाभ मिलता है. सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं में भी तुलसी बेहद प्रभावी है. काढ़ा बनाते समय इसमें तुलसी के पत्ते, तेज पत्ता, काली मिर्च और शहद मिलाकर पीने से खांसी, कफ और एलर्जी में राहत मिलती है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है. स्वस्थ रखने में निभाती है महत्वपूर्ण भूमिका डॉक्टर पांडे ने बताया कि बुखार की स्थिति में भी तुलसी का उपयोग किया जा सकता है. चाय में तुलसी के पत्ते डालकर पीने से शरीर को राहत मिलती है. हर्बल या ग्रीन टी में तुलसी मिलाकर पीना स्वास्थ्य के लिए और भी फायदेमंद माना जाता है. तुलसी एक ऐसा पौधा है, जो आसानी से हर घर में उपलब्ध होता है और इसके नियमित उपयोग से कई छोटी-बड़ी बीमारियों से बचाव संभव है. हालांकि, इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए. बता दें कि तुलसी न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह एक प्राकृतिक औषधि भी है, जो शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Chandauli,Uttar Pradesh First Published : March 31, 2026, 17:22 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
सेहत का खजाना है फलों का राजा आम, इम्युनिटी बढ़ाए और पाचन भी रखे फिट, जानें जबरदस्त फायदे

Last Updated:March 30, 2026, 10:32 IST Benefits of Eating Mango: आम को फलों का राजा कहा जाता है और यह स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. इसमें विटामिन A, C और E के साथ फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते है. आम का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत करता है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है. इसमें मौजूद विटामिन A आंखों की रोशनी के लिए लाभकारी माना जाता है. गर्मियों में आम शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है और थकान कम करता है. साथ ही यह त्वचा को निखारने और बालों को स्वस्थ रखने में भी सहायक है. सीमित मात्रा में आम खाने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और गर्मियों में ताजगी बनी रहती है. शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे आम खाना पसंद नहीं. आम, भारतीय इतिहास और संस्कृति का एक अभिन्न अंग होने के कारण सबसे पसंदीदा भारतीय फलों में से एक है और इसे ‘फलों के राजा’ के रूप में जाना जाता है. लोग आम को अचार, जैम, शेक या चटनी कई रूप में खाना पसंद करते हैं. स्वाद के अलावा, आम स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं, क्योंकि ये विटामिन सी, पोटेशियम और फाइबर से भरपूर होते हैं. आम आंखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी फल है. इसमें प्रचुर मात्रा में बीटा-कैरोटीन पाया जाता है, जो शरीर में जाकर विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है. विटामिन ए आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और रतौंधी जैसी समस्याओं से बचाव करता है. इसके नियमित सेवन से आंखों की कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं और दृष्टि तेज होती है. आम विटामिन सी का एक उत्कृष्ट स्रोत है, जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है. नियमित रूप से आम का सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा कम होता है. यह त्वचा और पाचन के लिए भी लाभकारी होता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google आम में मैंगिफेरिन नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जिसमें कैंसर विरोधी गुण मौजूद होते हैं. यह तत्व शरीर की कोशिकाओं को क्षति से बचाने में मदद करता है और फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करता है. नियमित रूप से आम का सेवन करने से कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में सहायता मिल सकती है. इसके पोषक तत्व शरीर की समग्र सेहत को बेहतर बनाते हैं और गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक होते हैं. आम दिल की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद फल है, क्योंकि इसमें पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. पोटेशियम एक महत्वपूर्ण खनिज है, जो रक्तचाप को नियंत्रित रखने में सहायक होता है और हृदय की धड़कन को संतुलित बनाए रखता है. नियमित रूप से आम का सेवन करने से हृदय रोगों का जोखिम कम हो सकता है. इसके पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ संपूर्ण हृदय स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में मदद करते हैं. आम पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में सहायक फल है, क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है. फाइबर भोजन के पाचन को आसान बनाता है और आंतों की कार्यप्रणाली को सुचारु रखता है. नियमित रूप से आम का सेवन करने से कब्ज जैसी पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत मिल सकती है. इसके प्राकृतिक एंजाइम्स पाचन प्रक्रिया को तेज करते हैं, जिससे शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित कर पाता है और समग्र स्वास्थ्य सुधरता है. डॉक्टर रिद्धी पांडे ने लोकल 18 से बताया कि आम सेहत के लिए बहुत फायदेमंद फल है. इसमें कई पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को लाभ पहुंचाते हैं. हालांकि, उन्होंने सलाह दी कि आम का सेवन भी अन्य फलों की तरह सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, ताकि इसके अधिक सेवन से होने वाले नुकसान से बचा जा सके. First Published : March 30, 2026, 10:19 IST
दांत दर्द में रामबाण है ये छोटा सा पीला फूल, मसूड़ों की सूजन में भी देता राहत; जानें कैसे करें उपयोग

Last Updated:March 30, 2026, 09:53 IST Benefits of Akarkara: अकरकरा को दांत दर्द और मसूड़ों की सूजन में बेहद लाभकारी औषधि माना जाता है. इसे पाइरेथ्रम रूट भी कहा जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम Anacyclus pyrethrum है. आयुर्वेद में लंबे समय से इसका उपयोग मौखिक समस्याओं के उपचार में किया जाता रहा है. दांत दर्द या मसूड़ों की सूजन होने पर अकरकरा के चूर्ण को सरसों के तेल या लौंग के तेल में मिलाकर मसूड़ों पर लगाने की सलाह दी जाती है. इससे दर्द में राहत मिलती है और सूजन कम होती है. अकरकरा में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और सूजनरोधी गुण संक्रमण को कम करने में मदद करते है. यह घाव को जल्दी भरने में सहायक होता है और मसूड़ों को मजबूत बनाता है. नियमित और सीमित उपयोग से मुंह की कई समस्याओं से प्राकृतिक रूप से राहत पाई जा सकती है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते है. जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते है. लेकिन कई बार लोगों को उन पौधों के बारे में जानकारी न होने के कारण उन्हें बेकार समझकर फेंक देते है. इस समय गर्मियों के मौसम में घर के आसपास या खेतों में अकरकरा का पौधा आसानी से मिल जाएगा. इसमें पीला सा छोटा फूल पाया जाता है. अकरकरा, जिसे पाइरेथ्रम रूट भी कहा जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम है Anacyclus pyrethrum. यह एक बारहमासी पौधा है. इसकी जड़ को सुखाकर चूर्ण बनाया जाता है जो कि कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. इसके जड़, पत्ते और बीजों में मौजूद तत्व दर्द कम करने, सूजन घटाने और घाव भरने में मदद करते है. अकरकरा को खासतौर पर दांत दर्द और मसूड़ों की सूजन में बहुत लाभकारी माना जाता है. इसके लिए अकरकरा के चूर्ण को सरसों के तेल यह लौंग के तेल में मिलाकर मसूड़ों पर लगाया जाता है. यह न केवल दर्द से राहत देता है बल्कि उसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण घाव को जल्दी भरने में मदद करते है. Add News18 as Preferred Source on Google कुछ लोगों को लगातार हिचकी आती रहती है. अगर आप भी हिचकी जैसी समस्या से अक्सर परेशान रहते है तो आज हम आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहे है जो हिचकी की समस्या से राहत दिला सकता है. अगर बार-बार हिचकी आ रही हो, तो अकरकरा के चूर्ण में शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन कर सकते है. बदलते मौसम के कारण गले में खराश और खांसी का प्रकोप बढ़ जाता है. ऐसे में आप भी खांसी और खराश जैसी समस्या से परेशान है तो आज हम आपको एक ऐसे पौधे के पत्तियों के बारे में बताने जा रहे है. जिसका काढ़ा पीने से गले की खराश और सुखी खांसी से राहत मिल सकती है. अकरकारा की पत्तियों का काढ़ा बनाकर पीने से जल्द राहत मिल सकती है. आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि डायबिटीज के मरीजों के लिए अकरकरा की जड़ों का चूर्ण बनाकर सेवन करना चाहिए. इससे डायबिटीज कंट्रोल रहता है. शरीर पर घाव हो जाने पर इसकी पत्तियों का लेप बनाकर लगाने से घाव जल्दी भरते है. कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. First Published : March 30, 2026, 09:53 IST
आप कितने हैं हेल्दी? इन 7 जरूरी संकेतों से जानें आपका शरीर कितना है स्वस्थ और फिट

Last Updated:March 30, 2026, 09:00 IST How to know you are healthy: अगर खानपान सही न हो, आप एक्सरसाइज ना करें तो उम्र बढ़ने के साथ आपका शरीर बीमार, बूढ़ा, कमजोर होने लगता है. फिट रहने के लिए बहुत जरूरी है कि आप हेल्दी फूड्स को डाइट में शामिल करें. रेगुलर फिजिकल एक्टिव रहें. आप बीमार होते हैं तो शरीर कई तरह के लक्षण दिखाने शुरू करता है, लेकिन जब आप हेल्दी होते हैं, निरोगी होते हैं तो शरीर कैसे संकेत देता है, ये भी जानना जरूरी है. ये 7 संकेत बताते हैं आप स्वस्थ हैं या नहीं How to know you are healthy: शरीर में किसी तरह की भी परेशानी होने पर शरीर खुद-ब-खुद संकेत देता है. शरीर में आए बदलाव बता देते हैं कि कहीं न कहीं कोई परेशानी हो रही है, लेकिन कई बार पूरी तरह स्वस्थ होने पर भी शरीर संकेत देता है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी है. आज हम आपको स्वस्थ शरीर के ऐसे 7 संकेतों के बारे में बताएंगे. अगर यह संकेत आपका शरीर भी देता है, तो समझ लीजिए कि आप बिल्कुल निरोगी जीवन जी रहे हैं. स्वस्थ शरीर का पहला संकेत है कि बिस्तर पर लेटने के बाद 15 मिनट बाद नींद आना. अगर बिस्तर पर लेटने के बाद आराम से बिना किसी परेशानी के गहरी और अच्छी नींद आ जाती है और सुबह बिना अलार्म के अपने आप नींद समय पर खुल जाती है, तो यह स्वस्थ नींद का संकेत है. गहरी और अच्छी नींद बहुत जरूरी है, क्योंकि यह समय शरीर को रिकवर करने में मदद करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. दूसरा संकेत है पूरे दिन एनर्जी से भरे रहना. अगर पूरे दिन बिना थकावट के काम हो जाता है और सुस्ती और आलस नहीं महसूस होता है, तो यह एक अच्छा संकेत है. तीसरा संकेत है, पाचन में कोई परेशानी नहीं होगी. पूरे दिन गैस, भारीपन की समस्या न होना अच्छे पाचन का संकेत है. अगर खाना खाने के बाद आलस और भारीपन महसूस नहीं होता है, तो यह अच्छी पाचन क्रिया का संकेत है. चौथा संकेत है साफ चेहरा और गुलाबी जीभ. अगर शरीर अंदर से मजबूत और पूरी तरह स्वस्थ है तो चेहरा बिल्कुल साफ रहता है. पाचन में परेशानी होने पर चेहरे पर मुहांसे और एक्ने की परेशानी बनी रहती है और जीभ पर छाले होने लगते हैं. पांचवां संकेत है मन की शांति. अगर शरीर स्वस्थ होता है तो मन भी एकाग्र और खुश रहता है. हर काम करने में मन लगता है लेकिन वहीं बीमार होने पर मन काम से भटकता है. छठा है बीमारी से जल्दी रिकवर करना. स्वस्थ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा होती है. मौसमी बदलाव भी शरीर को ज्यादा समय तक परेशान नहीं कर पाते हैं. बुखार और खांसी जैसी परेशानी कुछ ही समय में ठीक हो जाती है. सातवां और आखिरी है समय पर भूख लगना. कुछ लोगों को कम भूख लगती है. थोड़े से खाने से ही पेट भर जाता है, लेकिन अगर समय पर अच्छे से भूख लगती है तो यह स्वस्थ पाचन का संकेत है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : March 30, 2026, 09:00 IST









