Saturday, 13 Jun 2026 | 07:49 PM

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हिमंत बिस्वा सरमा 2.0: हिमंत बिस्वा सरमा दूसरी बार असम के सीएम बने, शपथ से पहले मां कामाख्या और शंकरदेव को नमन

हिमंत बिस्वा सरमा 2.0: हिमंत बिस्वा सरमा दूसरी बार असम के सीएम बने, शपथ से पहले मां कामाख्या और शंकरदेव को नमन

हिमंत बिस्वा सरमा 2.0: असम में नई सरकार का गठन हो चुका है और हिमंत बिस्वा सरमा (हिमंत बिस्वा सरमा) दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बन गए हैं। हिमंत बिस्वा सरमा ने आज गुवाहाटी में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री की शपथ ली। इसी तरह असम में लगातार तीसरी बार बीजेपी-एनडीए की सरकार बनी है. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को अपमानित किया। शपथ ग्रहण समारोह (असम सीएम शपथ) से पहले हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मां कामाख्या (कामाख्या मंदिर) और श्रीमंत शंकरदेव शंकरदेव (श्रीमंत शंकरदेव) का भी मजाक उड़ाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिमंता बिस्वा सरमा ने लिखा- ‘मां कामाख्या और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के आशीर्वाद से असम के लोगों का जीवन सुख, शांति और समृद्धि की ओर आगे बढ़े।’ उन्होंने कहा कि उनके आशीर्वाद से असम आने वाले दिनों में विकास की नई बात को चूमेगा। मुख्यमंत्री पद की शपथ से पहले जिस तरह से हिमंत बिस्वा सरमा ने मां कामाख्या और शंकरदेव को याद किया यह राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों नजरियों से अहम है। माँ कामाख्या और महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव का आशीर्वाद असम में सभी के जीवन को रोशन करे और शांति, प्रगति और समृद्धि के नए रास्ते खोले। उनके आशीर्वाद से आने वाले दिनों में असम विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा। 12.05.2026 pic.twitter.com/ocEPHSo9g1 – हिमंत बिस्वा सरमा (@himantabiswa) 12 मई 2026 हिटलर में हिमंत बिस्वा सरमा के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष समेत कई नेता भी मौजूद हैं. बता दें कि असम में हिमंत बिस्वा सरमा वर्तमान में मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख अध्यक्ष भी हैं। अब दूसरी बार वे राज्य के मुख्यमंत्री बन रहे हैं। असम चुनाव बहुमत से बहुमत था असम की 126 विधानसभा सीटों पर प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए कुल 102 सीटों पर जीत दर्ज की गई थी। बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) को 82 सीटें मिलीं, जबकि सहयोगी दल एजीपी और बीपीएफ ने 10-10 सीटें अपने नाम की रखीं. दूसरी ओर, कांग्रेस अलायंस 19 डेमोक्रेट्स पर आधारित था। जहां रायजोर पार्टी और एआईयूडीएफ को 2-2 से बढ़त मिली, वहीं टीएमसी को 1 सीट हासिल हुई। असम जाति परिषद (एजेपी) का खाता भी नहीं खुला। ये भी पढ़ें: असम चुनाव परिणाम 2026: असम में हिमंता बिस्वा सरमा की जीत, कुंडली के ग्रह दे रहे शक्ति और स्थिरता का संकेतअस्वीकरण: यहां चार्टर्ड सूचना सिर्फ अभ्यर्थियों और विद्वानों पर आधारित है। यहां यह जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह के सिद्धांत, जानकारी की पुष्टि नहीं होती है। किसी भी जानकारी या सिद्धांत को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)हिमंत बिस्वा सरमा 2.0(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम सीएम शपथ(टी)असम राजनीति(टी)मां कामाख्या(टी)असम सीएम शपथ लाइव(टी)बीजेपी(टी)कामाख्या मंदिर(टी)श्रीमंत शंकरदेव(टी)बीजेपी असम(टी)हिमंत शपथ समारोह(टी)हिमंत बिस्वा सरमा 2.0(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम सीएम शपथ(टी)असम राजनीति(टी)मां कामाख्या(टी)असम सीएम शपथ लाइव(टी)बीजेपी(टी)कामाख्या मंदिर(टी)श्रीमंत शंकरदेव(टी)बीजेपी असम(टी)हिमंत शपथ शपथ

हिमंता दूसरी बार असम के सीएम पद की शपथ लेंगे:4 मंत्री भी बनेंगे, पीएम मोदी समेत NDA के कई बड़े नेता शामिल होंगे

हिमंता दूसरी बार असम के सीएम पद की शपथ लेंगे:4 मंत्री भी बनेंगे, पीएम मोदी समेत NDA के कई बड़े नेता शामिल होंगे

हिमंता बिस्वा सरमा आज 11 बजे दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ 4 और विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। समारोह में पीएम मोदी सहित कई NDA शासित राज्यों के सीएम भी शामिल होंगे। कार्यक्रम के लिए गुवाहाटी के खानापारा वेटरनरी कॉलेज ग्राउंड में सोमवार को ही तैयारियां शुरू हो गईं। रविवार को असम में बीजेपी की विधायक दल की बैठक हुई, इसमें हिमंता को फिर विधायक दल का नेता चुना गया। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार रात ही पहुंच गए। सीएम के साथ 4 मंत्री शपथ लेंगे हिमंता ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि रामेश्वर तेली, अतुल बोरा, चरण बोरो और अजंता नेओग मेरे साथ मंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके अलावा रंजीत दास असम विधानसभा के स्पीकर होंगे। इससे पहले हिमंता ने रविवार को कहा था कि मंत्रिमंडल में लगभग 18-19 मंत्री हो सकते हैं, लेकिन हम नए चेहरों को शामिल करेंगे या अनुभवी लोगों को बनाए रखेंगे, यह हमें मिलने वाले मार्गदर्शन पर निर्भर करेगा। असम में तीसरी बार भाजपा सरकार असम में भी हिमंता सरकार की वापसी हुई है। भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी। BJP ने यहां अकेले ही 82 सीटें जीतीं, जो बहुमत के आंकड़े से 18 ज्यादा है। मौजूदा भाजपा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा। ऐसा देश में पहली बार हुआ। पूर्वोत्तर में हिमंता भाजपा का चेहरा पूर्वोत्तर भारत में भाजपा और NDA की बढ़ती ताकत के पीछे हिमंत बिस्वा सरमा महत्वपूर्ण रणनीतिकार माना जाता है। कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद, उन्होंने ‘नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ (NEDA) के संयोजक के रूप में पूरे क्षेत्र में क्षेत्रीय दलों को एक साझा मंच पर लाने में बड़ी भूमिका निभाई। सरमा की जमीनी स्तर पर पकड़ और कठिन से कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन बनाने की क्षमता ने पूर्वोत्तर में भाजपा के लिए ‘अजेय’ द्वार खोल दिए हैं। पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम) में भाजपा या एनडीए समर्थित गठबंधन की सरकारें हैं। नई विधानसभा में 7 महिलाएं, भाजपा 92.1% स्ट्राइक रेट असम में BJP की जीत के 4 बड़े फैक्टर 1. परिसीमन के बाद 36% मुस्लिम बहुल सीटें घटीं- 2023 में असम में परिसीमन हुआ और विधानसभा सीटों की बाउंड्री दोबारा तय की गई। ST, SC की रिजर्व सीटें और बोडोलैंड ट्राइबल रीजन की सीटें बढ़ीं, लेकिन मुस्लिम बहुल सीटें 41 से घटकर 26 रह गईं। राजनीतिक विश्लेषक अशोक मलिक के मुताबिक, ‘नई सीमाओं ने मुस्लिम बहुल इलाकों के प्रभाव को सीमित कर दिया। साथ ही उन सीटों को भी फिर से व्यवस्थित किया जहां असमिया मुसलमान कम हो रहे थे। इससे हिमंत को उन सीटों पर बढ़त मिली जहां पहले भाजपा कमजोर थी।’ 2. कांग्रेस और AIUDF के मुस्लिम वोट बंटे, बीजेपी को फायदा- 2021 में कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की AIUDF ने साथ चुनाव लड़ा था। उन्हें बंगाली मुसलमानों के 89% तो असमी मुसलमानों के 65% वोट मिले थे। 2026 में यह दोनों धड़े अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक डॉ. जयदीप बरुआ के मुताबिक, ‘हिमंता मुस्लिम समुदाय के भीतर दो गुट पैदा करने में सफल रहे हैं। पहले उन्होंने बांग्लादेश से आए ‘मियां मुसलमानों’ को असमी मुसलमानों के लिए खतरा बताया। फिर असमी मुसलमानों को विशेष दर्जा देकर, उन्हें अपने पाले में सुरक्षित कर लिया।’ 3. हिमंता बिस्व सरमा की पॉपुलैरिटी और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण- हिमंता बिस्वा सरमा की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ वोट में कन्वर्ट हो गई। उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाया। इससे असमी संस्कृति, परंपरा और भाषा को खतरा बताया। उन्होंने दावा किया कि हर हफ्ते 35-40 बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेज रहे हैं। इससे हिंदू वोटों में बीजेपी की पकड़ मजबूत होती चली गई। पॉलिटिकल एक्सपर्ट अदिप फुकन के मुताबिक, असम में पहली बार पूरा चुनाव हिमंता के चेहरे पर लड़ा गया। वे अपने तीखे बयानों से खुद को योगी जैसे कट्टर नेता के तौर पर स्थापित करने में सफल हुए। 4. कांग्रेस के सीनियर नेता बीजेपी में आए- चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के दो सीनियर नेता भूपेन कुमार बोराह और प्रद्युत बोरदोलोई ने बीजेपी जॉइन कर ली। इससे कांग्रेस का अंदरूनी कलह और राजनीतिक कमजोरी सामने आई। कांग्रेस ने इस बार पूर्व सीएम तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई की लीडरशिप में चुनाव लड़ा। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मई 2025 में असम कांग्रेस अध्यक्ष बने गौरव हिमंता के सामने खुद को स्थापित नहीं कर पाए। ——————————————–

हिमंता दूसरी बार असम के सीएम पद की शपथ लेंगे:4 मंत्री भी बनेंगे, पीएम मोदी समेत NDA के कई बड़े नेता शामिल होंगे

हिमंता दूसरी बार असम के सीएम पद की शपथ लेंगे:4 मंत्री भी बनेंगे, पीएम मोदी समेत NDA के कई बड़े नेता शामिल होंगे

हिमंता बिस्वा सरमा आज 11 बजे दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ 4 और विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे। समारोह में पीएम मोदी सहित कई NDA शासित राज्यों के सीएम भी शामिल होंगे। कार्यक्रम के लिए गुवाहाटी के खानापारा वेटरनरी कॉलेज ग्राउंड में सोमवार को ही तैयारियां शुरू हो गईं। रविवार को असम में बीजेपी की विधायक दल की बैठक हुई, इसमें हिमंता को फिर विधायक दल का नेता चुना गया। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार रात ही पहुंच गए। सीएम के साथ 4 मंत्री शपथ लेंगे हिमंता ने सोमवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा कि रामेश्वर तेली, अतुल बोरा, चरण बोरो और अजंता नेओग मेरे साथ मंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके अलावा रंजीत दास असम विधानसभा के स्पीकर होंगे। इससे पहले हिमंता ने रविवार को कहा था कि मंत्रिमंडल में लगभग 18-19 मंत्री हो सकते हैं, लेकिन हम नए चेहरों को शामिल करेंगे या अनुभवी लोगों को बनाए रखेंगे, यह हमें मिलने वाले मार्गदर्शन पर निर्भर करेगा। असम में तीसरी बार भाजपा सरकार असम में भी हिमंता सरकार की वापसी हुई है। भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी। BJP ने यहां अकेले ही 82 सीटें जीतीं, जो बहुमत के आंकड़े से 18 ज्यादा है। मौजूदा भाजपा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा। ऐसा देश में पहली बार हुआ। पूर्वोत्तर में हिमंता भाजपा का चेहरा पूर्वोत्तर भारत में भाजपा और NDA की बढ़ती ताकत के पीछे हिमंत बिस्वा सरमा महत्वपूर्ण रणनीतिकार माना जाता है। कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद, उन्होंने ‘नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ (NEDA) के संयोजक के रूप में पूरे क्षेत्र में क्षेत्रीय दलों को एक साझा मंच पर लाने में बड़ी भूमिका निभाई। सरमा की जमीनी स्तर पर पकड़ और कठिन से कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में गठबंधन बनाने की क्षमता ने पूर्वोत्तर में भाजपा के लिए ‘अजेय’ द्वार खोल दिए हैं। पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और सिक्किम) में भाजपा या एनडीए समर्थित गठबंधन की सरकारें हैं। नई विधानसभा में 7 महिलाएं, भाजपा 92.1% स्ट्राइक रेट असम में BJP की जीत के 4 बड़े फैक्टर 1. परिसीमन के बाद 36% मुस्लिम बहुल सीटें घटीं- 2023 में असम में परिसीमन हुआ और विधानसभा सीटों की बाउंड्री दोबारा तय की गई। ST, SC की रिजर्व सीटें और बोडोलैंड ट्राइबल रीजन की सीटें बढ़ीं, लेकिन मुस्लिम बहुल सीटें 41 से घटकर 26 रह गईं। राजनीतिक विश्लेषक अशोक मलिक के मुताबिक, ‘नई सीमाओं ने मुस्लिम बहुल इलाकों के प्रभाव को सीमित कर दिया। साथ ही उन सीटों को भी फिर से व्यवस्थित किया जहां असमिया मुसलमान कम हो रहे थे। इससे हिमंत को उन सीटों पर बढ़त मिली जहां पहले भाजपा कमजोर थी।’ 2. कांग्रेस और AIUDF के मुस्लिम वोट बंटे, बीजेपी को फायदा- 2021 में कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की AIUDF ने साथ चुनाव लड़ा था। उन्हें बंगाली मुसलमानों के 89% तो असमी मुसलमानों के 65% वोट मिले थे। 2026 में यह दोनों धड़े अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक डॉ. जयदीप बरुआ के मुताबिक, ‘हिमंता मुस्लिम समुदाय के भीतर दो गुट पैदा करने में सफल रहे हैं। पहले उन्होंने बांग्लादेश से आए ‘मियां मुसलमानों’ को असमी मुसलमानों के लिए खतरा बताया। फिर असमी मुसलमानों को विशेष दर्जा देकर, उन्हें अपने पाले में सुरक्षित कर लिया।’ 3. हिमंता बिस्व सरमा की पॉपुलैरिटी और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण- हिमंता बिस्वा सरमा की रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ वोट में कन्वर्ट हो गई। उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाया। इससे असमी संस्कृति, परंपरा और भाषा को खतरा बताया। उन्होंने दावा किया कि हर हफ्ते 35-40 बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेज रहे हैं। इससे हिंदू वोटों में बीजेपी की पकड़ मजबूत होती चली गई। पॉलिटिकल एक्सपर्ट अदिप फुकन के मुताबिक, असम में पहली बार पूरा चुनाव हिमंता के चेहरे पर लड़ा गया। वे अपने तीखे बयानों से खुद को योगी जैसे कट्टर नेता के तौर पर स्थापित करने में सफल हुए। 4. कांग्रेस के सीनियर नेता बीजेपी में आए- चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के दो सीनियर नेता भूपेन कुमार बोराह और प्रद्युत बोरदोलोई ने बीजेपी जॉइन कर ली। इससे कांग्रेस का अंदरूनी कलह और राजनीतिक कमजोरी सामने आई। कांग्रेस ने इस बार पूर्व सीएम तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई की लीडरशिप में चुनाव लड़ा। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मई 2025 में असम कांग्रेस अध्यक्ष बने गौरव हिमंता के सामने खुद को स्थापित नहीं कर पाए। ——————————————–