Thursday, 30 Jul 2026 | 11:37 AM

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PoK Assembly Election 2026 | Voting Begins in Three Phases

PoK Assembly Election 2026 | Voting Begins in Three Phases

30 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को विधानसभा चुनाव का पहला चरण हैं। पाकिस्तानी चुनाव आयोग के मुताबिक, मौजूदा सुरक्षा हालात और विरोध प्रदर्शनों के देखते हुए यह चुनाव तीन चरणों में होंगे। पहला 27 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त और तीसरा 10 अगस्त को मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान होगा। दो अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों और पाकिस्तान में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण में 10 अगस्त को पूंछ डिवीजन की 11 सीटों पर मतदान होगा। PoK में कई महीनों से चल रहा है विरोध प्रदर्शन PoK में पिछले कई महीनों से महंगाई, बिजली के बढ़े हुए बिल, सरकारी नीतियों और राजनीतिक दखल के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुआई जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) कर रही है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है। महंगाई के विरोध से शुरू हुआ ये आंदोलन, अब पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई जगह बल प्रयोग किया, रास्ते बंद किए और संचार सेवाएं रोक दीं। उनका कहना है कि इससे खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की भी कमी हो गई। कई प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी हटाने और क्षेत्र की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। PoK में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जून में प्रदर्शन करते स्थानीय लोग। (यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।) 12 शरणार्थी सीटों पर सबसे ज्यादा विवाद विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें भी हैं। ये सीटें पाकिस्तान में रहने वाले उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो दशकों पहले कश्मीर से वहां गए थे। JKJAAC और कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की सरकार चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है। इससे स्थानीय लोगों की राय कमजोर पड़ जाती है और केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस बार के चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब लोगों का बड़ा वर्ग पाकिस्तान सरकार की नीतियों से नाराज है। इसी वजह से चुनाव की निष्पक्षता और उसके नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, PoK के चुनाव आयुक्त गुलाम मुस्तफा मुगल ने बताया कि मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और सेना तैनात रहेगी। क्या चुनाव से खत्म होगी नाराजगी? एक्सपर्ट्स का मानना है कि मतदान तो हो जाएगा और वोटिंग भी हो सकती है, लेकिन इससे लोगों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। महंगाई, बिजली, राजनीतिक अधिकार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पाकिस्तान की भूमिका जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। ऐसे में चुनाव के बाद भी PoK में राजनीतिक तनाव जारी रहने की आशंका जताई जा रही है। भारत ने चुनाव पर विरोध दर्ज कराया भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत ने PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनावों पर पहले भी कई बार पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इन क्षेत्रों की तथाकथित विधानसभाओं को मान्यता नहीं दी है। मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हालात पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भी हिंसा में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK में मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। नवाज शरीफ ने PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई चुनावी माहौल के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) प्रमुख नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद की चुनावी रैली में कहा कि अगर उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे ताकि वे खुद इलाके के विकास की निगरानी कर सकें। नवाज शरीफ ने कहा कि PoK उनके लिए पंजाब जितना ही प्रिय है और उनके पूर्वज कश्मीर से आए थे। उन्होंने कहा कि यह उनका दूसरा घर है। इस चुनाव में PML-N का मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से है। खास बात यह है कि PPP इस समय केंद्र सरकार में PML-N की सहयोगी भी है। 2021 में इमरान खान की पार्टी ने बनाई थी सरकार PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

PoK Assembly Election 2026 | Voting Begins in Three Phases

PoK Assembly Election 2026 | Voting Begins in Three Phases

13 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को विधानसभा चुनाव का पहला चरण हैं। पाकिस्तानी चुनाव आयोग के मुताबिक, मौजूदा सुरक्षा हालात और विरोध प्रदर्शनों के देखते हुए यह चुनाव तीन चरणों में होंगे। पहला 27 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त और तीसरा 10 अगस्त को मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान होगा। दो अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों और पाकिस्तान में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण में 10 अगस्त को पूंछ डिवीजन की 11 सीटों पर मतदान होगा। PoK में कई महीनों से चल रहा है विरोध प्रदर्शन PoK में पिछले कई महीनों से महंगाई, बिजली के बढ़े हुए बिल, सरकारी नीतियों और राजनीतिक दखल के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुआई जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) कर रही है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है। महंगाई के विरोध से शुरू हुआ ये आंदोलन, अब पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई जगह बल प्रयोग किया, रास्ते बंद किए और संचार सेवाएं रोक दीं। उनका कहना है कि इससे खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की भी कमी हो गई। कई प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी हटाने और क्षेत्र की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। PoK में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जून में प्रदर्शन करते स्थानीय लोग। (यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।) 12 शरणार्थी सीटों पर सबसे ज्यादा विवाद विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें भी हैं। ये सीटें पाकिस्तान में रहने वाले उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो दशकों पहले कश्मीर से वहां गए थे। JKJAAC और कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की सरकार चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है। इससे स्थानीय लोगों की राय कमजोर पड़ जाती है और केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस बार के चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब लोगों का बड़ा वर्ग पाकिस्तान सरकार की नीतियों से नाराज है। इसी वजह से चुनाव की निष्पक्षता और उसके नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, PoK के चुनाव आयुक्त गुलाम मुस्तफा मुगल ने बताया कि मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और सेना तैनात रहेगी। क्या चुनाव से खत्म होगी नाराजगी? एक्सपर्ट्स का मानना है कि मतदान तो हो जाएगा और वोटिंग भी हो सकती है, लेकिन इससे लोगों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। महंगाई, बिजली, राजनीतिक अधिकार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पाकिस्तान की भूमिका जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। ऐसे में चुनाव के बाद भी PoK में राजनीतिक तनाव जारी रहने की आशंका जताई जा रही है। भारत ने चुनाव पर विरोध दर्ज कराया भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत ने PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनावों पर पहले भी कई बार पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इन क्षेत्रों की तथाकथित विधानसभाओं को मान्यता नहीं दी है। मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हालात पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भी हिंसा में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK में मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। नवाज शरीफ ने PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई चुनावी माहौल के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) प्रमुख नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद की चुनावी रैली में कहा कि अगर उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे ताकि वे खुद इलाके के विकास की निगरानी कर सकें। नवाज शरीफ ने कहा कि PoK उनके लिए पंजाब जितना ही प्रिय है और उनके पूर्वज कश्मीर से आए थे। उन्होंने कहा कि यह उनका दूसरा घर है। इस चुनाव में PML-N का मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से है। खास बात यह है कि PPP इस समय केंद्र सरकार में PML-N की सहयोगी भी है। 2021 में इमरान खान की पार्टी ने बनाई थी सरकार PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल रिजल्ट से पहले फुल एक्शन में ये बीजेपी, चुनावी पोल में जीत का अनुमान के बाद तैयार हुआ मास्टर प्लान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: बंगाल रिजल्ट से पहले फुल एक्शन में ये बीजेपी, चुनावी पोल में जीत का अनुमान के बाद तैयार हुआ मास्टर प्लान

पश्चिम बंगाल में मातृभाषा से पहले बीजेपी पूरी तरह से एक्शन मूड में आ गई है। 4 मई को वाली पार्टी से पहले, 2 मई को कोलकाता में पार्टी की एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में उन प्रवासी नेताओं को भी बुलाया गया था, जिनमें पश्चिम बंगाल चुनाव विधानसभा और जोन में प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी. इन सभी नेताओं को मातृभाषा के दिन अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। इस उच्चस्तरीय विधानसभा में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से पश्चिम बंगाल प्रभारी सुनील बैसाही और चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव शामिल होंगे. पश्चिम बंगाल में वोटिंग के बाद ज्यादातर एक्जिट पोल बीजेपी की सरकार बनी हुई हैं। अब बीजेपी का पूरा फोकस फोकस पर है। प्रतिपक्षी भाजपा में लगातार बैठकों का दौर जारी है। बंगाल के प्रभारी सुनील बैसाखी और भूपेन्द्र यादव को पश्चिम बंगाल में ही रखा गया है। पहली वोटिंग के बाद 30 अप्रैल को सुनील बैसाखी और भूपेंद्र यादव ने कोलकाता में पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक कर वोटिंग करके ग्राउंड रिपोर्ट ली। इसके बाद 1 मई को दोनों ही नेताओं ने सिलीगुड़ी में पार्टी के स्थानीय नेताओं और काउंटी एजेंटों के साथ बैठक कर काउंटी केंद्र पर एसोसिएशन के वरिष्ठों की जानकारी दी। उसके बाद 2 मई को पार्टी की ओर से इन्वेस्टमेंट डॉक्युमेंट पर प्रवासी नेताओं को कोलकाता बुलाया गया है। उनके साथ भी बैठक की जाएगी और अपने-अपने विभाग वाले क्षेत्र में स्नातक स्तर की पढ़ाई को बनाए रखने के लिए पार्टी की ओर से निर्देश दिए जाएंगे। यह भी पढ़ें:- एग्जिट पोल 2026: बीजेपी का तूफान, सर्वे में ममता बनर्जी के साथ हो ‘खेला’ इस बैठक का फोकस बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी स्तर पर कोई गलती न हो। बूथ स्तर से लेकर बैंकिंग सेंटर तक, हर व्यवस्था की शुरुआत से समीक्षा की जाएगी। किस केंद्र पर कौन सा एजेंट रहेगा, एजेंटों की भूमिका क्या होगी और हर राउंड की निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाएगी, इस बैठक में इस पर अंतिम रणनीति तय होगी। ये सभी नेता अपने-अपने क्षेत्र की जमीनी रिपोर्ट और आंकड़े भी साझा करेंगे, ताकि जमीनी स्थिति का आकलन किया जा सके। यह भी पढ़ें:- ‘बंगाल में बीजेपी सत्ता में आई तो…’ बांग्लादेश की संसद में विधानसभा चुनाव को लेकर क्या बोला बांग्लादेशी अल्पसंख्यक, मचा हंगामा बिहार, बंगाल के कई क्वार्टर फाइनल मुकाबले बेहद करीबी माने जा रहे हैं। एक ओर ओर बिल्डर अपनी इंजीनियरिंग की दम वापसी पर दावा कर रही है, तो दूसरी ओर भाजपा अपनी ग्राउंड रिपोर्ट और एलेक्टिट पोल्स के उत्साह से उत्साहित होकर अपनी जीत का दावा कर रही है। ऐसे में मातृभाषा के दिन हर राउंड, हर टेबल और हर आंकड़े पर बिजनेस की पैनी नजर रहेगी। 2 मई की इस बैठक में सिर्फ बातचीत की समीक्षा नहीं की गई, बल्कि 4 मई की अंतिम जंग के लिए बीजेपी की अंतिम नींव बाजार में बनी हुई है। (टैग्सटूट्रांसलेट)विधानसभा चुनाव 2026(टी)बीजेपी(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)बंगाल चुनाव हिंसा(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम

एग्जिट पोल: DMK-AIADMK में क्या है एग्जिट पोल?

एग्जिट पोल: DMK-AIADMK में क्या है एग्जिट पोल?

तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026: तमिल के एक्जिट पोल में एम के स्टालिन के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सरकारी फिल्म बनी हुई है। जाहिर है कि ये स्टूडेंटस के लिए संजीवनी का काम है, क्योंकि लगातार 10 साल की सरकार के बाद जो एंटी इंकंबेंसी है, स्टालिन कम करने में कामयाब रहे हैं। और वो भी तब जब विक्ट्री की टीवी के इस चुनाव में बेहद स्ट्रैटिजी लड़की है और उसका प्रदर्शन भी शानदार रहा है. इसके बावजूद अगर स्टालिन जीत की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं तो ये आने वाले दिनों में उस हिंदी विरोध को और धराशायी हो जाएंगे, जिसके जरिए वे बीजेपी को तमिल में घुमाएंगे। यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026: 15 साल बाद बंगाल में बदलेगी सत्ता? भाजपा बहुमत का जादुई पात्र हो सकती है रही बात आइआइए की, तो उद्यमियों के बाद पार्टी में जो टूट गई, उसकी पढ़ाई वो अब तक नहीं कर पाई है। बीजेपी के साथ लेने के बाद भी ई पलनीस्वामी तमिल में 30 से ज्यादा इंच की बढ़त की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं। जबकि राजनीति में नए-नए आए सुपर स्टार विजय अपनी पार्टी टीवी के जरिए न सिर्फ प्लास्टिक उपस्थिति दर्ज करवाकर ए आईए मीडियाके की जगह को खत्म करते दिख रहे हैं, बल्कि कुछ एकजुटता पोल में तो सबसे बड़ी विजय पार्टी उभरती हुई नजर आ रही हैं। एक्सिस माई इंडिया का लेक्चरर वाला तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हुए कई चुनावी सर्वेक्षण किए गए हैं। एक्सिस माई इंडिया के अनुमानों के अनुसार, अभिनेता विक्ट्री की पार्टी तमीजगा वेत्री कदमगम (टीवीके) इस बार का सबसे बड़ा उलटफेर कर सकता है, जिसमें 98 से 120 एडवेंचर मीटिंग का अनुमान लगाया गया है। दूसरी ओर, फ्रांसिस्को डीएमके को 92 से 110 फ्रेमवर्क के साथ सीक्वल की झलक दिख रही है, जबकि दूसरी ओर राज्य की दूसरी प्रमुख शक्ति एआईएडीएमके को 22 से 32 फ्रेमवर्क पर नजर आ रही है। विजय की पार्टी का प्रदर्शन न केवल द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक समीकरणों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि उन्हें सत्ता की कुंजी के रूप में यह दर्जा भी कायम रखा जा रहा है। यह भी पढ़ें- ‘मैं 1984 से चुनाव लड़ रही हूं, लेकिन इस बार…’, बंगाल में जीत को लेकर क्या बोल गईं ममता (टैग्सटूट्रांसलेट)डीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026(टी)एग्जिट पोल 2026(टी)चुनाव 2026(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)एमके स्टालिन(टी) डीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)तमिलनाडु डाकिट पोल 2026(टी)एग्जिट पोल 2026(टी)चुनाव 2026(टी)विधानसभा चुनाव 2026

Exit Poll Result 2026 LIVE Update; West Bengal Tamil Nadu Kerala

Exit Poll Result 2026 LIVE Update; West Bengal Tamil Nadu Kerala

Hindi News National Exit Poll Result 2026 LIVE Update; West Bengal Tamil Nadu Kerala | Assam Election BJP Congress TMC DMK Seats नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में वोटिंग खत्म। बारी एग्जिट पोल की। शाम 6:30 बजे के बाद। जानिए पिछले एग्जिट पोल कितने सही, कितने गलत 1. पश्चिम बंगालः 2021: 10 में से 5 एग्जिट पोल ने TMC की जीत दिखाई, 3 ने BJP की सरकार और 2 ने कड़ी टक्कर दिखाई। 2016: सभी 6 एग्जिट पोल ने ममता की वापसी की संभावना जताई। 2011: सर्वे एजेंसियां कम थीं। स्टार न्यूज-नीलसन, हेडलाइन टुडे और सीएनएन-आईबीएन-सीएसडीएस ने TMC की जीत दिखाई। 2. तमिलनाडुः 2021: सभी 4 एग्जिट पोल ने DMK की सरकार का अनुमान लगाया। 2016: पोल बंटे हुए थे, 8 में से 5 में DMK और 3 में AIDMK सरकार की संभावना जताई गई। 2011: 3 बड़े सर्वे में AIADMK की सरकार बनने की संभावना जताई थी, लेकिन पार्टी को ज्यादा सीटें मिलीं। 3. केरलमः 2021: सभी 4 एग्जिट पोल ने LDF की वापसी का अनुमान लगाया। 2016: 4 में से 3 पोल LDF के पक्ष में थे, 1 ने कड़ी टक्कर बताई। 2011: 3 सर्वे एजेंसियों के पोल में UDF की सरकार बनाई। 4. असमः 2021: सभी 5 एग्जिट पोल ने बीजेपी की सरकार का अनुमान लगाया। 2016: भी 5 में से 4 पोल बीजेपी के पक्ष में थे, 1 ने त्रिशंकु विधानसभा की संभावना जताई। 2011: 3 पोल में सभी ने कांग्रेस की सरकार का अनुमान लगाया। पांचों राज्यों में 3 से 12% मतदान बढ़ा: पांचों राज्यों में इस बार रिकॉर्ड वोटिंग हुई। सबसे बड़ा फैक्टर वोटर लिस्ट रिविजन (SIR) को बताया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए। इससे कुल वोटर्स की संख्या घट गई, लेकिन वोट डालने वाले लोगों की संख्या लगभग समान रही, जिससे प्रतिशत बढ़ गया। महिलाओं को कैश सहायता, मुफ्त यात्रा और आरक्षण जैसे वादों ने महिला वोटर्स को बड़ी संख्या में बाहर निकाला। इस बार महिलाओं का वोट प्रतिशत पुरुषों की तुलना में बंगाल-तमिलनाडु में 2%, असम में 1%, केरल में 5% और पुडुचेरी में 3% ज्यादा रहा। एग्जिट पोल से जुड़े 5 सवाल और उनके जवाब 1. एग्जिट पोल क्या होता है? जवाब: चुनाव के दौरान जनता का मूड जानने के लिए दो तरह के सर्वे किए जाते हैं। वोटिंग से पहले के सर्वे को ओपिनियन पोल कहते हैं, जबकि वोटिंग के दौरान होने वाले सर्वे को एग्जिट पोल कहा जाता है। आम तौर पर एग्जिट पोल के नतीजे आखिरी फेज की वोटिंग खत्म होने के एक घंटे बाद जारी किए जाते हैं। 2. एग्जिट पोल की शुरुआत कब और कैसे हुई? जवाब: चुनावी सर्वे की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में हुई। 1930 में जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन ने अमेरिकी सरकार के कामकाज पर लोगों की राय जानने के लिए ये सर्वे किया था। एग्जिट पोल की शुरुआत काफी बाद में हुई। टाइम मैगजीन के मुताबिक 1967 में पहली बार दुनिया में बड़े स्तर पर कोई एग्जिट पोल किया गया था। अमेरिका के पॉलिटिकल रिसर्चर वॉरेन मिटोफस्की ने केंटुकी राज्य में होने वाले गवर्नर चुनाव के दौरान पहली बार एग्जिट पोल किया था। दुनिया में पहली बार किस मीडिया कंपनी ने ये तरीका अपनाया, इसकी सटीक जानकारी नहीं है। 3. भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत कब हुई? जवाब: भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन (IIPU) के तत्कालीन प्रमुख एरिक डी कोस्टा ने की थी। 1980 के दशक में भारत में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर एग्जिट पोल को लेकर पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रणय रॉय और यूके के पॉलिटिकल एक्सपर्ट डेविड बटलर ने मिलकर काम किया। 1996 में सरकारी चैनल दूरदर्शन ने CSDS के साथ मिलकर पहली बार एग्जिट पोल जारी किए। 4. भारत में एग्जिट पोल को लेकर क्या कानून और नियम हैं? जवाब: एग्जिट पोल का मामला अलग-अलग वजहों से तीन बार सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट- 1951 के सेक्शन 126A के मुताबिक मतदान खत्म होने के आधे घंटे बाद ही एग्जिट पोल जारी किया जा सकता है। अगर कोई कंपनी या व्यक्ति मतदान खत्म होने से पहले एग्जिट पोल जारी करता है तो उसे अपराध माना जाएगा। ऐसा करने वाले को दो साल तक की जेल और जुर्माना या दोनों हो सकता है। 5. कौन-से फैक्टर्स तय करते हैं कि एग्जिट पोल कितना सटीक होगा? जवाब: एग्जिट पोल कितना स्टीक है, ये 3 मुख्य फैक्टर पर निर्भर करता है… 1. सैंपल साइज: जिस एग्जिट पोल का सैंपल साइज जितना बड़ा होता है, उसे उतना ही ज्यादा एक्यूरेट माना जाता है। मतलब ये हुआ कि सर्वे में जितना ज्यादा से ज्यादा लोगों से संपर्क किया जाए, उतना ज्यादा अच्छा है। 2. सर्वे में पूछे जाने वाले सवाल: सैंपल सर्वे में पूछा गए सवाल जितना न्यूट्रल होगा, एग्जिट पोल का रिजल्ट भी उतना ही सटीक होगा। 3. सर्वे का रेंज: सर्वे का दायरा जितना बड़ा होगा, रिजल्ट एक्यूरेट होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। मान लीजिए किसी विधानसभा में सिर्फ दो या तीन पोलिंग बूथ से सैंपल लिए जाते हैं, जहां किसी एक पार्टी के उम्मीदवार की पकड़ है। इससे एग्जिट पोल के रिजल्ट पर असर पड़ सकता है। कार्टूनिस्ट चंद्रशेखर हाडा और मंसूर नकवी की नजर से एग्जिट पोल दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

West Bengal Tamil Nadu Election 2026 Violence PHOTO VIDEO; BJP TMC DMK AIADMK

West Bengal Tamil Nadu Election 2026 Violence PHOTO VIDEO; BJP TMC DMK AIADMK

Hindi News National West Bengal Tamil Nadu Election 2026 Violence PHOTO VIDEO; BJP TMC DMK AIADMK | Mamata Banerjee नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल में पहल फेज की वोटिंग के दौरान कई विधानसभा सीटों पर BJP-TMC कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा और मारपीट हुई। मुर्शिदाबाद जिले में आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के चीफ हुमायूं कबीर और TMC कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। वहीं कुमारगंज सीट से भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु सरकार के साथ मारपीट हुई। वहीं, आसनसोल सीट से भाजपा प्रत्याशी अग्निमित्रा पॉल की कार पर हमला हुआ। 1. भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु सरकार के साथ मारपीट पश्चिम बंगाल के दक्षिण मिदनापुर में कुमारगंज सीट से भाजपा कैंडिडेट सुवेंदु सरकार पर हमला हुआ है। वीडियो में दिख रहा है कि सुवेंदु हमले से बचने के लिए भाग रहे हैं। उनका सिक्योरिटी गार्ड उनके साथ है। इसके बावजूद भीड़ सुवेंदु को पीटती है। जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग ने वीडियो में दिख रहे सभी लोगों की तुरंत गिरफ्तारी करने के आदेश दे दिए हैं। 2. आसनसोल साउथ में भी भाजपा प्रत्याशी की कार पर हमला आसनसोल साउथ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की कार पर बर्नपुर के रहमतनगर इलाके में हमला हुआ। इससे उनकी गाड़ी के पीछे का शीशा टूट गया। घटना के समय विधायक कार में ही मौजूद थीं। 3. हुमायूं कबीर समर्थकों और TMC कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट मुर्शिदाबाद के नौदा में वोटिंग से पहले बुधवार देर रात देसी बम फेंका गया था। इसमें कई लोग घायल हो गए थे। इसके बाद आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के चीफ हुमायूं कबीर सुबह घटनास्थल पर पहुंचे तो उनका विरोध हुआ। इस दौरान TMC कार्यकर्ताओं के साथ उनकी झड़प भी हुई। इसके बाद वे धरने पर बैठ गए। इस दौरान उनके समर्थकों और TMC कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट, पथराव हुआ। स्थिति संभालने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। हुमायूं की कार पर पत्थरों और लाठियों से हमला किया गया। 4. सिलीगुड़ी में भाजपा और TMC कार्यकर्ता भिड़े सिलीगुड़ी में भी वोटिंग के दौरान भाजपा और TMC कार्यकर्ताओं के बीच भी झड़प हुई। सिलीगुड़ी के जगदीश चंद्र विद्यापीठ में बने बूथ पर वोटिंग हो रही थी। इसी दौरान बूथ के बाहर दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई। विवाद बढ़ता देख सुरक्षाबलों ने दोनों पक्षों को शांत कराया। यहां से शंकर घोष भाजपा प्रत्याशी हैं। 5. मालदा में EVM खराब, भीड़ ने चुनाव अधिकारी को घेरा मालदा के एक बूथ पर ईवीएम खराब होने से हंगामा हो गया। बूथ के बाहर मौजूद लोगों ने चुनाव अधिकारी को घेर लिया और आपत्ति जताई। इसके बाद सुरक्षाबलों ने अधिकारी को भीड़ से बचाया और बूथ के अंदर भेजा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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West Bengal Tamil Nadu Election 2026 Violence PHOTO VIDEO; BJP TMC DMK AIADMK

Hindi News National West Bengal Tamil Nadu Election 2026 Violence PHOTO VIDEO; BJP TMC DMK AIADMK | Mamata Banerjee नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल में पहल फेज की वोटिंग के दौरान कई विधानसभा सीटों पर BJP-TMC कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा और मारपीट हुई। मुर्शिदाबाद जिले में आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के चीफ हुमायूं कबीर और TMC कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। वहीं कुमारगंज सीट से भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु सरकार के साथ मारपीट हुई। आसनसोल सीट से भाजपा प्रत्याशी अग्निमित्रा पॉल की कार पर भी हमला हुआ। 1. भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु सरकार के साथ मारपीट पश्चिम बंगाल के दक्षिण मिदनापुर में कुमारगंज सीट से भाजपा कैंडिडेट सुवेंदु सरकार पर हमला हुआ है। वीडियो में दिख रहा है कि सुवेंदु हमले से बचने के लिए भाग रहे हैं। उनका सिक्योरिटी गार्ड उनके साथ है। इसके बावजूद भीड़ सुवेंदु को पीटती है। जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग ने वीडियो में दिख रहे सभी लोगों की तुरंत गिरफ्तारी करने के आदेश दे दिए हैं। 2. आसनसोल साउथ में भी भाजपा प्रत्याशी की कार पर हमला आसनसोल साउथ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की कार पर बर्नपुर के रहमतनगर इलाके में हमला हुआ। इससे उनकी गाड़ी के पीछे का शीशा टूट गया। घटना के समय विधायक कार में ही मौजूद थीं। 3. हुमायूं कबीर समर्थकों और TMC कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट मुर्शिदाबाद के नौदा में वोटिंग से पहले बुधवार देर रात देसी बम फेंका गया था। इसमें कई लोग घायल हो गए थे। इसके बाद आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के चीफ हुमायूं कबीर सुबह घटनास्थल पर पहुंचे तो उनका विरोध हुआ। इस दौरान TMC कार्यकर्ताओं के साथ उनकी झड़प भी हुई। इसके बाद वे धरने पर बैठ गए। इस दौरान उनके समर्थकों और TMC कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट, पथराव हुआ। स्थिति संभालने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। हुमायूं की कार पर पत्थरों और लाठियों से हमला किया गया। 4. सिलीगुड़ी में भाजपा और TMC कार्यकर्ता भिड़े सिलीगुड़ी में भी वोटिंग के दौरान भाजपा और TMC कार्यकर्ताओं के बीच भी झड़प हुई। सिलीगुड़ी के जगदीश चंद्र विद्यापीठ में बने बूथ पर वोटिंग हो रही थी। इसी दौरान बूथ के बाहर दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई। विवाद बढ़ता देख सुरक्षाबलों ने दोनों पक्षों को शांत कराया। यहां से शंकर घोष भाजपा प्रत्याशी हैं। 5. मालदा में EVM खराब, भीड़ ने चुनाव अधिकारी को घेरा मालदा के एक बूथ पर ईवीएम खराब होने से हंगामा हो गया। बूथ के बाहर मौजूद लोगों ने चुनाव अधिकारी को घेर लिया और आपत्ति जताई। इसके बाद सुरक्षाबलों ने अधिकारी को भीड़ से बचाया और बूथ के अंदर भेजा। ———————————— चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… बंगाल के कुमारगंज में BJP प्रत्याशी को दौड़ाकर पीटा, आसनसोल में भाजपा MLA अग्निमित्रा की कार पर हमला पश्चिम बंगाल के दक्षिण मिदनापुर में कुमारगंज सीट से भाजपा कैंडिडेट सुवेंदु सरकार पर हमला हुआ है। वीडियो में दिख रहा है कि सुवेंदु हमले से बचने के लिए भाग रहे हैं। उनका सिक्योरिटी गार्ड उनके साथ है। इसके बावजूद भीड़ सुवेंदु को पीटती है। पूरी खबर पढ़ें… मोदी बोले- झालमुड़ी मैंने खाई, झाल उन्हें लग रही, बंगाल के कृष्णानगर में कहा- 4 मई को बीजेपी जीतेगी पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कृष्णानगर में चुनावी रैली की। उन्होंने कहा- आज पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग चल रही है। मैं सभी मतदाताओं से कहना चाहूंगा कि इस बार वोटिंग के नए रिकॉर्ड बनने चाहिए। यह पिछले 50 साल में पहला ऐसा चुनाव है, जिसमें हिंसा कम से कम हुई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

बंगाल चुनाव 2026: वोटिंग के बीच अग्निमित्रा पॉल का बड़ा बयान- ‘जनता को नहीं चाहिए विचारधारा की सरकार, जिताएं तो…’

बंगाल चुनाव 2026: वोटिंग के बीच अग्निमित्रा पॉल का बड़ा बयान- 'जनता को नहीं चाहिए विचारधारा की सरकार, जिताएं तो...'

बंगाल चुनाव 2026: आसनसोल दक्षिण से भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल ने पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि हम चुनाव जीत रहे हैं. पश्चिम बंगाल की जनता ने तय कर लिया है कि इस बार वैश्विक सरकार नहीं बननी चाहिए। आसनसोल दक्षिण से भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल ने गुरुवार को अपने क्षेत्र में एक मतदान केंद्र पर मतदान किया। कड़ी सुरक्षा के बीच वे वोटिंग सेंटर सेप्टें और अपने मैट का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि हमें जीत को लेकर पूरा विश्वास है। पुरासोल साउथ मेरा एक परिवार है। हम मूल्यांकन कर रहे हैं कि चुनाव में जीत होगी. इसे पूरे बंगाल में देखने को मिलेगा। राज्य में कोई भी ममता बनर्जी की सरकार नहीं चाहती-अग्निमित्रा एस दरभंगा के बाद पहली बार वोटिंग को लेकर अग्निमित्रा पॉल ने कहा, ‘असाधारण आर में गलत तरीके से नाम उजागर किया गया। आसनसोल दक्षिण विधानसभा में भी काफी नाम काटे गए हैं। हालाँकि, राज्य में कोई भी ममता बनर्जी की सरकार नहीं चाहती।’ यह भी पढ़ें: एक्सक्लूसिव: बंगाल चुनाव में हार से पहले शाह का बड़ा दावा- बीजेपी में आ गए सत्ता में चुनाव में अग्निमित्रा पॉल ने कहा, ‘बदमाशी हो सकती है। बिजली भी कट सकती है. ये बंगाल में हुआ है. इंदौर की एक मशहूर हस्ती की पार्टी है। बाहर से भी बड़ी संख्या में अपराधी आसनसोल में आये हैं। खड़गपुर का एक बड़ा अपराधी नदीम भी यहाँ आया है। चुनाव आयोग को यह सब देखना होगा। हमें स्वतंत्र और राजनेताओं का चुनाव करना चाहिए।’ आईएएनएस से बात करते हुए बीजेपी उम्मीदवार ने आगे कहा, ‘दो दिन पहले सर्वे के नाम पर मेरे खिलाफ एक पेपर में गलत आंकड़े छपवाए गए। इस पेपर में रेलवे स्टेशन पर भी लाइट की तैयारी की जा रही थी। हमने उन लोगों को पकड़ा. फ़्लोरिडा के बीच एक भ्रम की स्थिति पैदा होने की एक कोशिश की गई थी। इस तरह की राजनीति सिर्फ वैश्विक कर सकती है।’ महिला नासिक को लेकर अग्निमित्रा पॉल ने कहा, ‘इसका चुनाव में एक बड़ा असर महिलाओं की तरफ से देखा जाएगा।’ इस क्लिनिक के पास न होने से महिलाओं को बड़ा नुकसान हुआ है। इसका कारण महिलाओं की जुबानी अपना जवाब मॅगर है।’ यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल चुनाव में ईडी की छापेमारी: बंगाल में नुसरत जहां ईडी की राय पर कौन-कौन, 24 घंटे में आंध्र प्रदेश, कोलकाता के डीसीपी लापता (टैग्सटूट्रांसलेट)बंगाल चुनाव 2026(टी)अग्निमित्रा पॉल(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)बीजेपी(टी)टीएमसी(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)चुनाव 2026(टी)चुनाव(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)अग्निमित्रा पॉल(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)भाजपा(टी)टीएमसी(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)चुनाव 2026(टी)चुनाव

तमिलनाडु: जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या की संख्या बढ़ाने की मांग…भड़के सीएम स्टालिन

तमिलनाडु: जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या की संख्या बढ़ाने की मांग...भड़के सीएम स्टालिन

विधानसभा चुनाव 2026: तमिलनाडु के प्रमुख राजनीतिक दलों के विधायकों ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन अभ्यास के विरोध में स्वर मुखर कर रखा है। परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि के आधार पर जनसंख्या की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे दक्षिणी राज्यों में चिंताएं बढ़ी हैं। 1971 की वास्तविकता के अनुसार, जब भारत की जनसंख्या लगभग 550 मिलियन थी, तब मुसलमानों की वर्तमान संख्या 543 सदस्य थी। अब जब जनसंख्या 1.4 अरब से अधिक हो गई है, तो केंद्र सरकार एक नई परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से संसदीय प्रतिनिधित्व का विस्तार करने की योजना बना रही है। बौद्धों के अनुसार, प्रस्तावित परिसिमन संशोधन का उद्देश्य मोटरसाइकिलों की संख्या 543 से लगभग 850 करना है, जबकि केंद्रशासित प्रयोगशाला से प्रतिनिधित्व 20 से 35 करना है। आने वाले तीन दिनों में वाले संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में पेश होने की उम्मीद है। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित दक्षिणी राज्यों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है, उनका तर्क है कि इससे उन क्षेत्रों को नुकसान होगा, जहां जनसंख्या वृद्धि दर अधिक हो रही है। खबरों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 2002 के परिसीमन संशोधन अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से 2026 के बजाय 2011 के सिद्धांतों या उसके पहले के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन संशोधन अधिनियम पर विचार किया है, जिससे विवाद और भी बढ़ रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि इससे संसद में राज्य का प्रतिनिधित्व कम होगा और संघीय ढांचे को नुकसान होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इस योजना पर आगे बढ़ती है, तो उनकी पार्टी एक बड़ा आंदोलन फिर से पुराने और पुराने शिक्षकों को देखना शुरू कर देगी। दूसरी ओर, एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने कैंसर को कम करने के लिए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया से तमिल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा। अनुमानों के अनुसार, तमिलनाडु का निचला हिस्सा वर्तमान में 39 से 50 के बीच हो सकता है, जबकि प्रदेश का प्रतिनिधित्व 80 से 80 तक, उत्तर में 143 के करीब हो सकता है, जिससे संसद में सत्ता का संतुलन काफी हद तक बदल जाएगा। इसी बीच, केंद्र सरकार परीसीमन प्रस्ताव के साथ-साथ महिला नाचीज़ पेशावर की भी योजना बनाई जा रही है, जिसका उद्देश्य 2029 के आम चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत नॉमिनेट पेशिंग लागू करना है। यह भी पढ़ें- ‘तमिलनाडु नहीं रहेगा चुप’, स्टालिन की मोदी सरकार को खुली चेतावनी, कहा- सड़क पर उतरेगा हर परिवार (टैग्सटूट्रांसलेट)इलेक्शन(टी)विधानसभा चुनाव(टी)स्टालिन(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)स्टालिन(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव(टी)विधानसभा चुनाव 2026

बंगाल चुनाव 2026: ‘बर्दाश्त नहीं होंगे अगर मुसलमान…’, बंगाल चुनाव को लेकर ये क्या बोले बोल ओसामी, पढ़ें पूरा बयान

बंगाल चुनाव 2026: 'बर्दाश्त नहीं होंगे अगर मुसलमान...', बंगाल चुनाव को लेकर ये क्या बोले बोल ओसामी, पढ़ें पूरा बयान

बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव के प्रचार के लिए इमाम प्रमुख असदुद्दीन ओसामी ने सोमवार को रानीगंज में मीरा गोशे बंगले पर पहुंच कर करिश्मा चौधरी से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए नटखट बिल को लेकर सवाल और मीडिया के कई सवालों के जवाब दिए गए। महिला नटखट बिल ने मोदी को सबसे समर्थन मांग और इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बताया। इस पर जब इमाम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘विधायक क्या है? इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई है। ‘कम से कम कम्यूनिकेशन की एक प्रति तो भेजी जानी चाहिए।’ हमारा लक्ष्य बंगाल में आदिवासियों के लिए राजनीतिक अस्थिरता सुनिश्चित करना है हुमायूँ कबीर ने स्टेडियम और एआईएमआईएम पर समझौता करने का आरोप लगाया है। इस पर इमाम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘कभी-कभी तो कभी हुमायूं हमें बीजेपी की ‘बी टीम’ कहते हैं, लेकिन हम सिर्फ जनता की आवाज हैं और बंगाल में प्रतिष्ठा की गरिमा पर सवाल उठाने वाले किसी को भी नहीं देखेंगे। ओवैसी ने इस बार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी और बिग बॉस के शानदार प्रदर्शन की उम्मीद जताई। बंगाल में बचपन की घटना इतनी ख़राब क्यों-सोसी इससे पहले रविवार को दुर्गापुर में ओसामी ने कहा था कि ममता बनर्जी को सबसे पहले यह बताना चाहिए कि बंगाल में उनकी स्थिति इतनी खराब क्यों है और उन्हें राजनीतिक नेतृत्व क्यों नहीं दिया गया। पिछले 50-60 वर्षों से बंगाल में सेक सरकारी सत्ता में रह रहे हैं, लेकिन मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक स्थिति अभी भी बहुत खराब है। अल्पसंख्यकों को स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व करना चाहिए। (टैग्सटूट्रांसलेट)असदुद्दीन ओवेसी(टी)बंगाल(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)टीएमसी(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)असदुद्दीन सिद्दीकी(टी)बंगाल(टी)ममता(टी)पश्चिम बंगाल(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)टीएमसी