पश्चिम बंगाल में मातृभाषा से पहले बीजेपी पूरी तरह से एक्शन मूड में आ गई है। 4 मई को वाली पार्टी से पहले, 2 मई को कोलकाता में पार्टी की एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में उन प्रवासी नेताओं को भी बुलाया गया था, जिनमें पश्चिम बंगाल चुनाव विधानसभा और जोन में प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी. इन सभी नेताओं को मातृभाषा के दिन अहम जिम्मेदारी दी जाएगी। इस उच्चस्तरीय विधानसभा में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से पश्चिम बंगाल प्रभारी सुनील बैसाही और चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव शामिल होंगे.
पश्चिम बंगाल में वोटिंग के बाद ज्यादातर एक्जिट पोल बीजेपी की सरकार बनी हुई हैं। अब बीजेपी का पूरा फोकस फोकस पर है। प्रतिपक्षी भाजपा में लगातार बैठकों का दौर जारी है। बंगाल के प्रभारी सुनील बैसाखी और भूपेन्द्र यादव को पश्चिम बंगाल में ही रखा गया है। पहली वोटिंग के बाद 30 अप्रैल को सुनील बैसाखी और भूपेंद्र यादव ने कोलकाता में पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक कर वोटिंग करके ग्राउंड रिपोर्ट ली।
इसके बाद 1 मई को दोनों ही नेताओं ने सिलीगुड़ी में पार्टी के स्थानीय नेताओं और काउंटी एजेंटों के साथ बैठक कर काउंटी केंद्र पर एसोसिएशन के वरिष्ठों की जानकारी दी। उसके बाद 2 मई को पार्टी की ओर से इन्वेस्टमेंट डॉक्युमेंट पर प्रवासी नेताओं को कोलकाता बुलाया गया है। उनके साथ भी बैठक की जाएगी और अपने-अपने विभाग वाले क्षेत्र में स्नातक स्तर की पढ़ाई को बनाए रखने के लिए पार्टी की ओर से निर्देश दिए जाएंगे।
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इस बैठक का फोकस बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी स्तर पर कोई गलती न हो। बूथ स्तर से लेकर बैंकिंग सेंटर तक, हर व्यवस्था की शुरुआत से समीक्षा की जाएगी। किस केंद्र पर कौन सा एजेंट रहेगा, एजेंटों की भूमिका क्या होगी और हर राउंड की निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाएगी, इस बैठक में इस पर अंतिम रणनीति तय होगी। ये सभी नेता अपने-अपने क्षेत्र की जमीनी रिपोर्ट और आंकड़े भी साझा करेंगे, ताकि जमीनी स्थिति का आकलन किया जा सके।
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बिहार, बंगाल के कई क्वार्टर फाइनल मुकाबले बेहद करीबी माने जा रहे हैं। एक ओर ओर बिल्डर अपनी इंजीनियरिंग की दम वापसी पर दावा कर रही है, तो दूसरी ओर भाजपा अपनी ग्राउंड रिपोर्ट और एलेक्टिट पोल्स के उत्साह से उत्साहित होकर अपनी जीत का दावा कर रही है। ऐसे में मातृभाषा के दिन हर राउंड, हर टेबल और हर आंकड़े पर बिजनेस की पैनी नजर रहेगी। 2 मई की इस बैठक में सिर्फ बातचीत की समीक्षा नहीं की गई, बल्कि 4 मई की अंतिम जंग के लिए बीजेपी की अंतिम नींव बाजार में बनी हुई है।
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