Monday, 13 Apr 2026 | 05:16 AM

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Cheese Health Benefits: Nutritional Value

Cheese Health Benefits: Nutritional Value

Hindi News Lifestyle Cheese Health Benefits: Nutritional Value | Saturated Fat Sodium Health Risks 8 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक फर्ज करिए, आप किसी रेस्टोरेंट में गए हैं। मेन्यू कार्ड खोलते ही आपकी नजर ‘एक्स्ट्रा चीज बर्गर’, ‘एक्स्ट्रा चीज पिज्जा’, ‘एक्स्ट्रा चीज सैंडविच’ जैसे आइटम्स पर पड़ती है। नाम पढ़ते ही मुंह में पानी आ जाता है और बिना ज्यादा सोचे आप ‘एक्स्ट्रा चीज’ वाला ऑप्शन चुन लेते हैं। चीज का स्वाद लाजवाब होता है, इसलिए इसे पिज्जा, पास्ता, बर्गर और सैंडविच जैसे कई चीजों में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि जहां कुछ लोग इसे सिर्फ स्वाद के लिए खाते हैं तो कुछ इसे प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा सोर्स मानकर खाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या चीज सच में सेहत के लिए फायदेमंद है? चलिए, आज जरूरत की खबर में हम चीज के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- चीज में कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? रोज चीज खाने से सेहत पर क्या असर पड़ता है? इसे कितनी मात्रा में खाना सेहत के लिए सुरक्षित है? एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- चीज (Cheese) क्या है और ये कैसे बनता है? जवाब- चीज एक डेयरी प्रोडक्ट है। इसे पालतू जानवरों के दूध से बनाया जाता है। बनाने का तरीका पॉइंटर्स से समझिए- सबसे पहले दूध को हल्का गर्म किया जाता है। इसके बाद उसमें स्टार्टर कल्चर (लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया) मिलाया जाता है, जो दूध को हल्का खट्टा बनाता है। फिर दूध को जमाने के लिए रेनेट (एक एंजाइम) डाला जाता है। कुछ लोग रेनेट की जगह नींबू का रस या विनेगर भी मिलाते हैं। दूध जमने के बाद उसे छोटे टुकड़ों में काटा जाता है, जिससे उसमें मौजूद ‘व्हे’ यानी बचा हुआ पानी अलग हो सके। जो ठोस हिस्सा बचता है, वही ‘चीज’ है। इसे दबाकर आकार दिया जाता है। कुछ चीज को हफ्तों या महीनों तक एक ‘एज’ किया जाता है। यानी इसे कुछ दिनों तक एक निश्चित तापमान में रखा जाता है, जिससे उसका स्वाद और टेक्सचर डेवलप होता है। सवाल- चीज में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं? जवाब- यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) के मुताबिक, चीज प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा सोर्स है। लेकिन इसमें सैचुरेटेड फैट और सोडियम भी होता है। नीचे दिए ग्राफिक से चीज की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए- सवाल- चीज और पनीर में क्या फर्क है? जवाब- चीज और पनीर दोनों ही दूध से बनते हैं, लेकिन उनकी बनाने की प्रक्रिया, स्वाद, टेक्सचर और न्यूट्रिशन प्रोफाइल में अंतर होता है। पनीर दूध को नींबू के रस या विनेगर की मदद से फाड़कर तैयार किया जाता है। दूध के फटने के बाद उससे पानी अलग कर दिया जाता है। जो ठोस हिस्सा बचता है, वही पनीर कहलाता है। इसमें फर्मेंटेशन या एजिंग की प्रक्रिया नहीं होती। इसलिए इसका स्वाद हल्का और फ्रेश रहता है। वहीं चीज को बनाने की प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है। इसमें दूध में बैक्टीरिया या रनेट मिलाया जाता है। इससे फर्मेंटेशन और एजिंग की प्रक्रिया होती है। इसी वजह से चीज का स्वाद ज्यादा गाढ़ा, नमकीन होता है। ये कई अलग-अलग वैरायटी में भी मिलता है। न्यूट्रिशन की बात करें तो दोनों में प्रोटीन और कैल्शियम होता है। लेकिन कई तरह के चीज में फैट और सोडियम की मात्रा ज्यादा हो सकती है। इसलिए सेवन करते समय मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। सवाल- चीज के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? जवाब- संतुलित मात्रा में चीज खाने के कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। जैसेकि- इसमें हाई क्वालिटी प्रोटीन होता है, जो मांसपेशियों की मजबूती, ग्रोथ और रिपेयर में मदद करता है। चीज कैल्शियम और फॉस्फोरस का अच्छा सोर्स है, जिससे हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं। इसमें मौजूद विटामिन B12 और अन्य B-विटामिन्स एनर्जी प्रोडक्शन और नर्वस सिस्टम के लिए जरूरी हैं। एज्ड चीज में प्रोबायोटिक होते हैं, जो डाइजेस्टिव और गट हेल्थ को सपोर्ट करते हैं। चीज में मौजूद प्रोटीन और फैट लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास देते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि चीज में फैट और सोडियम की मात्रा ज्यादा हो सकती है। इसलिए इसे संतुलित मात्रा में और हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाकर ही खाना बेहतर है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके हेल्थ बेनिफिट्स समझिए- सवाल- अगर रोज चीज खाएं तो शरीर पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? जवाब- रोज सीमित मात्रा में चीज खाने से शरीर को पर्याप्त कैल्शियम और प्रोटीन मिलता है। लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने से कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। जैसेकि- पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। वजन बढ़ सकता है। कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है। ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है। सवाल- एक स्वस्थ व्यक्ति दिन में कितनी मात्रा में चीज खा सकता है? जवाब- एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए लगभग 30-40 ग्राम (करीब एक स्लाइस) चीज खाना सुरक्षित है। अगर हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर या मोटापा है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सवाल- किन लोगों को चीज नहीं खाना चाहिए? जवाब- सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि कुछ लोगाें को चीज खाने से बचना चाहिए। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- क्या बाजार में मिलने वाला हर चीज हेल्दी होता है? जवाब- नहीं, बाजार में मिलने वाला हर चीज हेल्दी नहीं होता। कई चीज प्रोसेस्ड होते हैं। इनमें नमक और सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है। कुछ में केमिकल और प्रिजर्वेटिव भी हो सकते हैं। इसलिए बाजार से चीज खरीदते समय इंग्रीडिएंट लिस्ट जरूर देखें। सवाल- बाजार से चीज खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? फूड लेबल पर लिखे किस इंग्रीडिएंट पर गौर करना चाहिए? जवाब- बाजार से चीज खरीदते समय उसकी क्वालिटी और न्यूट्रिशनल वैल्यू देखना बहुत जरूरी है। इसके फूड लेबल पर कुछ चीजें जरूर चेक करें। इंग्रीडिएंट चार्ट में दूध, स्टार्टर कल्चर, रेनेट और नमक जैसे बेसिक इंग्रीडिएंट्स देखें। ज्यादा लंबी चौड़ी इंग्रीडिएंट लिस्ट हो तो ध्यान से पढ़ें। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट देखें। फूला या फटे पैकेट वाला चीज न लें। हमेशा भरोसेमंद ब्रांड से ही खरीदें। ……………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- डेयरी प्रोडक्ट सेहत के लिए कितना फायदेमंद: जानें इनकी न्यूट्रिशनल वैल्यू, फायदे-नुकसान, किन्हें नहीं खाना चाहिए

Madhumalati plant health benefits: मधुमालती पौधा सेहत के लिए बेहद गुणकारी, जानें फायदे

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Last Updated:February 23, 2026, 00:33 IST Madhumalati plant health benefits मधुमालती सुंदर दिखने वाला एक पौधा है, जो बेहद गुणकारी होता है. मधुमालती का जिक्र प्राचीन चिकित्सा ग्रंथ सुश्रुत संहिता में मिलता है, जिसमें इस पौधे के कई प्रभावी गुण बताए गए हैं. मधुमालती को विज्ञान की भाषा में ‘रंगून क्रीपर’ कहा जाता है. इसे उगाना बहुत आसान. सेहत के लिए मधुमालती के क्या फायदे होते हैं, जानें यहां. मधुमालती का पौधा. Madhumalati plant health benefits: गुलाबी रंग की चार खूबसूरत पंखुड़ियों के साथ खुशबू देने वाला मधुमालती सभी को प्रिय है. मधुमालती का इस्तेमाल लोग अपने घरों की सजावट के लिए करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में कई रोगों को ठीक करने में किया जाता है. इतना ही नहीं, बाजार में मधुमालती का तेल भी आसानी से मिल जाता है. आज हम जानेंगे कि मधुमालती के पत्ते और फूल किस प्रकार लाभकारी हो सकते हैं. मधुमालती का जिक्र प्राचीन चिकित्सा ग्रंथ सुश्रुत संहिता में मिलता है, जिसमें इस पौधे के कई प्रभावी गुण बताए गए हैं. मधुमालती को विज्ञान की भाषा में ‘रंगून क्रीपर’ कहा जाता है, जिसे उगाना बहुत आसान है और जिसकी देखभाल भी कम करनी पड़ती है. इस पौधे के खूबसूरत दिखने वाले फूल और पत्तों का इस्तेमाल सर्दी, खांसी, बुखार, जोड़ों के दर्द (गठिया) और त्वचा रोगों में सदियों से किया जा रहा है. अगर किसी की किडनी में सूजन है या किडनी की कार्यक्षमता कम हो गई है, तो मधुमालती की छाल का काढ़ा लाभकारी माना गया है. चिकित्सक की सलाह से अगर रोजाना मधुमालती का काढ़ा लिया जाए, तो अंदरूनी अंगों से सूजन कम होती है और अंग प्रभावी तरीके से काम करते हैं. इसके अलावा, अगर मासिक धर्म में दर्द की परेशानी रहती है और पेल्विक फ्लो पर सूजन की परेशानी है, तब भी उसकी छाल का काढ़ा फायदेमंद होता है. मोटापा कम करने और हॉर्मोन संतुलित करने में भी सदियों से मधुमालती का प्रयोग होता आ रहा है. महिलाओं में सफेद पानी की समस्या होने पर मधुमालती के ताजा फूलों का प्रयोग किया जाए तो कमर दर्द और हड्डियों के रोगों से आराम मिल सकता है. इतना ही नहीं, अगर स्किन से जुड़ी परेशानी जैसे खुजली, मुहांसे और त्वचा रोग परेशान करते हैं तब भी मधुमालती की पत्तियों का लेप आराम देता है. आयुर्वेद में माना गया है कि अगर पुरानी से पुरानी खांसी ठीक नहीं हो रही है, तब भी तुलसी के साथ मधुमालती की पत्तियों को मिलाकर काढ़ा बनाएं. यह खांसी के साथ-साथ जुकाम और सर्दी से भी राहत देगा. स्वाद के लिए इसमें शहद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : February 22, 2026, 23:59 IST

Strawberry Health Benefits | Natural Immunity Booster Fruits | स्ट्रॉबेरी खाने के फायदे | स्ट्रॉबेरी में कौनसे पोषक तत्व होते हैं |

स्ट्रॉबेरी खाने के फायदे, स्ट्रॉबेरी कैसे खाएं स्ट्रॉबेरी में कौन से पोषण तत्व पाए जाते हैं, स्ट्रॉबेरी कब खाएं, स्ट्रॉबेरी कितनी मात्रा में खाना चाहिए, लोकल 18, Benefits of eating strawberries, how to eat strawberries, what nutrients are found in strawberries, when to eat strawberries, how much quantity of strawberries should be eaten, Local 18

Last Updated:February 21, 2026, 14:04 IST Strawberry Health Benefits: लाल-रसीली स्ट्रॉबेरी सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत का भी खजाना है. डॉ. विद्या गुप्ता के अनुसार, यह फल विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और खनिजों का ऐसा पावरहाउस है, जो कई घातक बीमारी से लेकर दिल की सेहत तक का ख्याल रखता है. इसके साथ ही झुर्रियों को मिटाकर त्वचा में प्राकृतिक चमक लाने से लेकर पुरुषों की शारीरिक क्षमता बढ़ाने तक, स्ट्रॉबेरी के कई ऐसे कमाल के फायदे है जो आपको हैरान कर देंगे. जानिए क्यों एक्सपर्ट्स इसे सुपरफूड मानते हैं और कैसे यह आपके दांतों, बालों और हड्डियों को फौलादी मजबूती दे सकता है. लाल और रसीली स्ट्रॉबेरी सिर्फ देखने में ही खूबसूरत नहीं होती, बल्कि यह सेहत का एक ऐसा खजाना है जिसे सुपरफूड माना रखा जाता है. इसमें मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, पोटेशियम और आयरन जैसे जरूरी खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसके अलावा यह विटामिन के, विटामिन सी और फाइबर का भी बहुत बड़ा स्रोत है. डॉ. विद्या गुप्ता के अनुसार, स्ट्रॉबेरी में मौजूद एंथोसाइनिन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर को अंदरूनी तनाव से बचाता है. यह न केवल शरीर में नई ऊर्जा भरती है, बल्कि अंदर जमे जहरीले पदार्थों को बाहर निकालकर आपको एकदम तरोताजा महसूस कराती है. गृह विज्ञान एक्सपर्ट डॉ. विद्या गुप्ता ने बताया कि स्ट्रॉबेरी का नियमित सेवन हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और बढ़ते कोलेस्ट्रॉल को काबू में रखने में बहुत मददगार है. इसमें मौजूद खास तत्व कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं और दिल की धमनियों को ब्लॉक होने से बचाते हैं. शुगर के मरीजों के लिए भी यह फल बहुत फायदेमंद माना गया है. यही नहीं, जिन लोगों को जोड़ों या गठिया का दर्द सताता है, उनके लिए स्ट्रॉबेरी सूजन और दर्द कम करने में किसी दवा की तरह काम करती है. उम्र बढ़ने के साथ अक्सर हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, लेकिन स्ट्रॉबेरी इस समस्या का बढ़िया समाधान है. इसमें मौजूद कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन के हड्डियों के घनत्व को बढ़ाते हैं. यह ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी के खतरे को काफी कम कर देती है. अगर बुजुर्गों और बढ़ते बच्चों के खाने में स्ट्रॉबेरी शामिल की जाए, तो उनकी हड्डियों का ढांचा मजबूत होता है और गिरने पर हड्डी टूटने का डर भी कम रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google स्ट्रॉबेरी में कुदरती एंटी-एजिंग गुण होते हैं जो चेहरे को लंबे समय तक जवान और बेदाग बनाए रखते हैं. यह चेहरे के दाग-धब्बों को मिटाने और नेचुरल ग्लो लाने में बहुत सहायक है. विटामिन सी की अधिकता के कारण यह स्किन के ढीलेपन और झुर्रियों को समय से पहले आने से रोकता है. बाजार के महंगे कॉस्मेटिक क्रीम के बजाय स्ट्रॉबेरी का सेवन त्वचा को अंदर से पोषण देता है, जिससे चेहरा गुलाब की तरह खिल उठता है. पुरुषों की सेहत के लिहाज से स्ट्रॉबेरी को किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता. इसमें ‘अफ्रोडीसीएक’ नाम का एक खास तत्व मिलता है, जो यौन इच्छा को बढ़ाने और एक स्वस्थ वैवाहिक जीवन को सुनिश्चित करने में मदद करता है. वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह नपुंसकता जैसी समस्याओं को जड़ से मिटाने की ताकत रखती है. यह शरीर में खून के दौरे को बेहतर बनाती है, जिससे शारीरिक क्षमता बढ़ती है और कमजोरी दूर होती है. दांतों की चमक और मजबूती के लिए स्ट्रॉबेरी एक कुदरती क्लीनर की तरह काम करती है. इसे खाने या इसके टुकड़े रगड़ने से दांतों का पीलापन दूर होता है और उनमें शानदार चमक आती है. यह मुंह के अंदर उन एंजाइमों को बनने से रोकती है जो बैक्टीरिया पैदा करते हैं. जब बैक्टीरिया कम होंगे, तो दांतों में कीड़ा लगने या सड़ने की समस्या नहीं होगी, जिससे आपके मसूड़े और दांत बुढ़ापे तक साथ देंगे. बालों के झड़ने की समस्या से परेशान लोगों के लिए स्ट्रॉबेरी किसी वरदान से कम नही है. इसमें मौजूद विटामिन C बालों की जड़ों को मजबूती देता है और उन्हें लंबा व चमकदार बनाता है. स्ट्रॉबेरी के पेस्ट को नारियल या जैतून के तेल के साथ मिलाकर हेयर मास्क के रूप में उपयोग करने से स्कैल्प को पोषण मिलता है. यह घरेलू नुस्खा बालों के प्राकृतिक सौंदर्य को वापस लाने में बेहद प्रभावी है. इसके अलावा स्ट्रॉबेरी में फाइबर की मात्रा बहुत अच्छी होती है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखती है और कब्ज जैसी परेशानियों को दूर करती है. इसके सेवन से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे आप फालतू खाना खाने से बच जाते हैं. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए यह कम कैलोरी वाला फल एक बेहतरीन डाइट प्लान साबित हो सकता है. First Published : February 21, 2026, 14:04 IST

SCSS Benefits Explained; Senior Citizen Savings Scheme Interest Rate & Rules

SCSS Benefits Explained; Senior Citizen Savings Scheme Interest Rate & Rules

Hindi News Lifestyle SCSS Benefits Explained; Senior Citizen Savings Scheme Interest Rate & Rules 30 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा सवाल होता है कि अब नियमित इनकम के बिना खर्च कैसे चलेगा? ऐसे में अगर पहले से प्लानिंग न की जाए तो आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। अगर आपने पहले से पेंशन की कोई प्लानिंग नहीं की है, तो दिक्कतें और बढ़ सकती हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि भारत सरकार ने सीनियर सिटिजन्स के लिए ऐसी कई योजनाएं बनाई हैं, जिनसे उन्हें हर महीने तय राशि मिलती है। इन्हीं में से एक स्कीम है– सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, जिसमें 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को सुरक्षित रिटर्न मिलता है। इसलिए आज ‘आपका पैसा‘ कॉलम में ‘सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- इस सरकारी योजना का लाभ किसे मिल सकता है? इसमें हर महीने कितनी पेंशन मिल सकती है? एक्सपर्ट: राजशेखर, फाइनेंशियल एक्सपर्ट सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SCSS) क्या है? जवाब- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SCSS) एक सरकारी बचत और पेंशन योजना है। यह खासतौर पर 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए बनाई गई है। इस सेविंग स्कीम में पैसे जमा करने पर ब्याज के साथ हर तीन महीने में पेंशन भी मिलती है, जिससे रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम बनी रहती है। इसमें टैक्स में छूट भी मिलती है। इसलिए यह सीनियर सिटिजंस के लिए निवेश और पेंशन का अच्छा विकल्प है। सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में कौन निवेश कर सकता है? जवाब- SCSS स्कीम में निवेश करने के लिए कुछ क्राइटेरिया को पूरा करना जरूरी होता है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में कितना निवेश कर सकते हैं? जवाब- इसमें आप एक बार में अधिकतम 30 लाख रुपए तक निवेश कर सकते हैं। अगर पति और पत्नी दोनों के खाते अलग हैं, तो कुल मिलाकर 60 लाख रुपए तक जमा किए जा सकते हैं। इस स्कीम में कम-से-कम 1,000 रुपए से निवेश शुरू किया जा सकता है। ध्यान देने की बात ये है कि पैसे हमेशा 1,000 के गुणांक में ही जमा किए जा सकते हैं। यानी 1000, 2000, 3000… इसमें पैसा एक साथ यानी एकमुश्त जमा करना होता है, किस्तों में नहीं दे सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम जैसे पीएफ (प्रोविडेंट फंड) या ग्रेच्युटी को यहां लगाकर आप हर तिमाही अच्छे ब्याज के साथ नियमित कमाई कर सकते हैं। सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में कितनी ब्याज दर और कितनी पेंशन मिलती है? जवाब- इसमें वर्तमान ब्याज दर 8.2% सालाना है। ब्याज हर तीन महीने में खाते में क्रेडिट हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, 30 लाख रुपए के निवेश पर सालाना 2.46 लाख रुपए यानी लगभग 20,500 रुपए प्रति माह के बराबर नियमित आय मिलती है। सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम की सभी विशेषताओं को विस्तार से समझते हैं। सुरक्षित निवेश: यह सरकारी योजना है। इसलिए इसमें लगाया गया पैसा सुरक्षित रहता है और तय समय पर निश्चित रिटर्न मिलता है। ब्याज दर: वर्तमान में 8.2% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज दिया जाता है (वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के लिए)। निवेश सीमा: न्यूनतम निवेश 1,000 और अधिकतम 30 लाख रुपए तक किया जा सकता है। निवेश का तरीका: एक लाख रुपए तक का निवेश नकद किया जा सकता है। इससे अधिक राशि के लिए चेक के माध्यम से भुगतान अनिवार्य है। समयावधि: योजना की मूल अवधि 5 साल है, जिसे 3 साल और बढ़ाया जा सकता है। विस्तार के लिए मैच्योरिटी के एक साल के भीतर आवेदन करना होता है। खाता ट्रांसफर सुविधा: खाता पोस्ट ऑफिस और बैंक के बीच ट्रांसफर किया जा सकता है। यह सुविधा पूरे भारत में उपलब्ध है। नॉमिनी सुविधा: खाता खोलते समय या बाद में नॉमिनी नियुक्त किया जा सकता है। सवाल- क्या सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में निवेश करने पर टैक्स में भी छूट मिलती है? जवाब- हां, SCSS में निवेश करने पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक की छूट मिलती है। यह छूट केवल मूल निवेश राशि पर लागू होती है। स्कीम में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है। सालाना ब्याज 50,000 रुपए से ज्यादा होने पर TDS कटता है। फॉर्म 15H/15G जमा करके TDS से राहत ली जा सकती है। टैक्स प्लानिंग के लिए SCSS उपयोगी है, लेकिन ब्याज पर टैक्स ध्यान रखें। सवाल- क्या मैच्योरिटी से पहले पैसा निकाल सकते हैं? जवाब- हां, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में मैच्योरिटी से पहले पैसा निकाला जा सकता है, लेकिन इस पर पेनल्टी लग सकती है। अगर खाता एक साल के भीतर बंद किया जाता है, तो मूलधन पर मिला ब्याज वापस लिया जाता है। 1-2 साल के बीच 1.5% और 2 साल बाद 1% की कटौती होती है। सवाल- SCSS खाता कहां और कैसे खोलें? जवाब- SCSS खाता किसी भी अधिकृत बैंक या पोस्ट ऑफिस में खोला जा सकता है। इसके लिए आधार कार्ड, PAN कार्ड और आयु प्रमाण जैसे डॉक्यूमेंट्स जरूरी होते हैं। निर्धारित फॉर्म भरकर और एकमुश्त राशि जमा करके खाता आसानी से खोला जा सकता है, जिससे तिमाही आय शुरू हो जाती है। सवाल- क्या एक से ज्यादा खाते खोल सकते हैं? जवाब- हां, एक व्यक्ति SCSS में एक से ज्यादा खाते खोल सकता है, लेकिन सभी खातों में कुल निवेश 30 लाख रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा जॉइंट अकाउंट केवल लाइफ पार्टनर के साथ ही खोला जा सकता है। इस खाते में जमा राशि पहले अकाउंट होल्डर के नाम पर मानी जाती है। सवाल- क्या इसमें नॉमिनी जोड़ सकते हैं? जवाब- हां, SCSS खाते में नॉमिनी जोड़ने की सुविधा उपलब्ध है। खाता खोलते समय या बाद में भी नॉमिनी नामित किया जा सकता है। एक या एक से अधिक नॉमिनी जोड़े जा सकते हैं, जिससे खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में राशि का ट्रांसफर आसान और सुरक्षित हो जाता है। सवाल- क्या ब्याज दर बदल सकती है? जवाब- SCSS की ब्याज दर सरकार द्वारा हर तिमाही तय की जाती है। इसलिए समय-समय पर इसमें बदलाव हो सकता है। हालांकि एक बार जब आप निवेश

sendha namak benefits | black salt health benefits | rock salt vs table salt

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Last Updated:February 20, 2026, 18:17 IST Sendha Namak Ke Fayde: आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोग साधारण नमक की जगह सेंधा और काला नमक को प्राथमिकता दे रहे हैं. आयुर्वेद के अनुसार सेंधा नमक पाचन सुधारने, गैस और एसिडिटी कम करने में मददगार होता है, जबकि काला नमक शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है. यह दोनों नमक ब्लड प्रेशर संतुलित रखने में भी सहायक माने जाते हैं. इनमें मौजूद प्राकृतिक खनिज तत्व शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करते हैं. सीमित मात्रा में इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है. sendha namak ke fayde जालौर: गर्मी की दस्तक के साथ ही खानपान की आदतों में बदलाव साफ नजर आने लगा है. इन दिनों पंजाब से आया सेंधा और काला नमक लोगों की थाली में खास जगह बना रहा है. आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर ये दोनों प्राकृतिक नमक न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद माने जाते हैं. आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ श्रीराम वेद के अनुसार काला नमक पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गैस, अपच व एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत देता है. वहीं सेंधा नमक शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मददगार माना जाता है. गर्मी के मौसम में जब पसीने के जरिए शरीर से जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं, तब सेंधा नमक उन खनिजों की पूर्ति करने में सहायक हो सकता है. इसके अलावा ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने और शरीर को हल्का महसूस कराने में भी इसकी भूमिका बताई जाती है. नमकों को डिटॉक्स के लिए भी उपयोगी माना गयाआयुर्वेद में इन नमकों को डिटॉक्स के लिए भी उपयोगी माना गया है. काला नमक भूख बढ़ाने, मेटाबॉलिज्म सुधारने और पेट को साफ रखने में मददगार है. यही कारण है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब साधारण नमक की जगह इन विकल्पों को अपनाने लगे हैं. सलाद, छाछ, दही और फलों में इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. गैस और एसिडिटी में भी आराम मिलाइसी बीच पंजाब से नमक लेकर आए व्यापारी सोनूराम ने लोकल 18 को बताया कि लोग अब सेहत को प्राथमिकता दे रहे हैं.हम पंजाब से शुद्ध सेंधा और काला नमक लेकर आते हैं. लोग खासकर गर्मियों में इसे ज्यादा खरीदते हैं क्योंकि इससे पाचन सही रहता है और शरीर में ताकत बनी रहती है. कई लोग बताते हैं कि उन्हें गैस और एसिडिटी में भी आराम मिला है. धीरे-धीरे लोग इसकी अहमियत समझ रहे हैं. गर्मी के मौसम में जब शरीर को संतुलित आहार की जरूरत होती है, तब सेंधा और काला नमक एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आ रहे हैं. स्वाद के साथ-साथ सेहत का ध्यान रखने वाले लोगों के बीच इन प्राकृतिक नमकों की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. About the Author Jagriti Dubey With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें Location : Jalor,Rajasthan First Published : February 20, 2026, 18:17 IST

Housework Health Benefits; Light Physical Activity List & Tips

Housework Health Benefits; Light Physical Activity List & Tips

Hindi News Lifestyle Housework Health Benefits; Light Physical Activity List & Tips | Joint Muscles 21 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक बचपन में जब मां या दादी कहती थीं “घर के काम किया करो, सेहत अपने-आप ठीक रहेगी,” तो वह बात उस समय सिर्फ नसीहत लगती थी। समय बदला तो फिटनेस की परिभाषा भी बदल गई। अब जिम और हार्ड वर्कआउट को ही फिटनेस का असली पैमाना मान लिया गया है। इस बदलाव में घर के रोजमर्रा के कामों की अहमियत पीछे छूट गई। लेकिन क्या आपको पता है कि घर के काम भी दरअसल एक तरह की एक्सरसाइज ही हैं। इतना ही नहीं, कुछ मेटाबॉलिक बीमारियों की स्थिति में घर के काम मौत का जोखिम 14 से 20% तक कम कर सकते हैं। है न मजे की बात। जर्नल ऑफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में पब्लिश हालिया स्टडी के मुताबिक, लाइट फिजिकल एक्टिविटी जैसे घर के काम, दिनभर थोड़ा-बहुत मूवमेंट करते रहने से मौत का जोखिम कम हो सकता है। स्टडी में शामिल जो लोग कार्डियोवस्कुलर-किडनी-मेटाबॉलिक (CKM) सिंड्रोम की एडवांस स्टेज से पीड़ित थे, उनमें इसका असर ज्यादा देखा गया। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि घरेलू काम करना कितना फायदेमंद है। साथ ही जानेंगे कि- लाइट फिजिकल एक्टिविटी में कौन-कौन सी एक्टिविटीज शामिल हैं? सिर्फ घर के छोटे-मोटे काम करके किन बीमारियों से बच सकते हैं? एक्सपर्ट- डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- क्या घर के कामों को लाइट फिजिकल एक्टिविटी माना जा सकता है? इसमें कौन-कौन सी एक्टिविटीज शामिल होती हैं? जवाब- हां, ये सब लाइट फिजिकल एक्टिविटीज ही हैं क्योंकि इनमें बॉडी मूवमेंट की जरूरत होती है। घरेलू काम करते रहने से हार्ट रेट नॉर्मल रहती है। अगर रेगुलर ये काम करते हैं तो कैलोरी बर्न होती है। लाइट फिजिकल एक्टिविटी जॉइंट मूवमेंट और मसल एक्टिवेशन में भी मदद करती है। ग्राफिक से समझते हैं कि इसमें कौन-कौन सी एक्टिविटीज शामिल होती हैं- सवाल- लाइट फिजिकल एक्टिविटी और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बीच संबंध को लेकर नई रिसर्च क्या कहती है? जवाब- हाल ही में जर्नल ऑफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसमें पता चला कि जिन लोगों को कार्डियोवस्कुलर-किडनी-मेटाबॉलिक (CKM) सिंड्रोम है, अगर वे घर पर सिर्फ हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग करें या सिर्फ चलें-फिरें, घर के रेगुलर काम करें तो उनमें मौत का जोखिम 14 से 20% तक कम हो जाता है। कुल-मिलाकर रिसर्च में साफ हुआ है कि स्वस्थ रहने के लिए रोज जिम जाकर हैवी वर्कआउट करना जरूरी नहीं है। इसके लिए घर की क्लीनिंग और डस्टिंग करना भी काफी है। यह सब करते हुए भी हमारी एक्सरसाइज हो जाती है। सवाल- लाइट फिजिकल एक्टिविटी दिल और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में कैसे मदद करती है? जवाब- हल्की लेकिन नियमित फिजिकल एक्टिविटी शरीर को कई स्तरों पर फायदा पहुंचाती है। इसे पॉइंटर्स से समझते हैं- लाइट फिजिकल एक्टिविटी हार्ट और ब्लड वेसल्स की फंक्शनिंग में मदद करती है। यह लिपिड प्रोफाइल (लिपिड प्रोफाइल एक ब्लड टेस्ट है, जिससे पता चलता है कि आपके खून में फैट की मात्रा कितनी है और किस तरह का फैट है) को संतुलित रखने में मदद करती है। गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को सपोर्ट करती है। लो-ग्रेड इंफ्लेमेशन को कम करती है, जो हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के प्रमुख रिस्क फैक्टर्स माने जाते हैं। सवाल- मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे लोगों के लिए लाइट फिजिकल एक्टिविटी क्यों खास तौर पर फायदेमंद मानी जाती है? लाइट फिजिकल एक्टिविटी मेटाबॉलिज्म को धीरे-धीरे एक्टिव करती है। इससे बॉडी पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता है। इससे ग्लूकोज बर्न होता है और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है। सवाल- मेटाबॉलिक सिंड्रोम के अलावा लाइट फिजिकल एक्टिविटी और किन बीमारियों के जोखिम को कम कर सकती है? जवाब- लाइट फिजिकल एक्टिविटी कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम करने में मदद करती है। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- क्या लाइट फिजिकल एक्टिविटी जिम या हार्ड एक्सरसाइज जितनी असरदार होती है? जवाब- लाइट फिजिकल एक्टिविटी जिम या हार्ड एक्सरसाइज की जगह नहीं ले सकती, लेकिन सेहत के लिहाज से इसे कम असरदार भी नहीं माना जा सकता है। लंबे समय तक बैठने से मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है। फिजिकल एक्टिविटी उसे एक्टिव रखने में मदद करती है। जिम या हैवी वर्कआउट से फिटनेस और मसल स्ट्रेंथ बढ़ती है, लेकिन लाइट फिजिकल एक्टिविटी रोजाना मूवमेंट बनाए रखकर हार्ट और मेटाबॉलिक हेल्थ को सपोर्ट करती है। इसलिए दोनों की भूमिका अलग है। सवाल- लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए बीच-बीच में हल्का मूवमेंट क्यों जरूरी माना जाता है? जवाब- लगातार बैठे रहने से मांसपेशियों की एक्टिविटी कम हो जाती है। ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त होने लगता है। उठकर थोड़ा चलना, स्ट्रेच करना या पोजिशन बदलना मसल्स को दोबारा एक्टिव करता है, जिससे ग्लूकोज का इस्तेमाल बेहतर होता है और ब्लड फ्लो सुधरता है। साथ ही यह पीठ, गर्दन और जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है। सवाल- रोजमर्रा की जिंदगी में लाइट फिजिकल एक्टिविटी को कैसे बढ़ा सकते हैं? जवाब- फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाने के लिए जिम या हार्ड एक्सरसाइज ही जरूरी नहीं होती। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में थोड़ा बदलाव करके भी शरीर को एक्टिव रखा जा सकता है। ग्राफिक से समझते हैं- दिनभर के छोटे-छोटे मूवमेंट को नजरअंदाज न करें। थोड़ी देर चलना या उठकर खड़े होना भी मायने रखता है। आखिरकार, सेहत सिर्फ एक घंटे की एक्सरसाइज से नहीं, बल्कि पूरे दिन की एक्टिव लाइफस्टाइल से बनती है। …………………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- कुर्सी पर बैठे-बैठे करें ये एक्सरसाइज:एक जगह बैठे रहना 10 सिगरेट पीने के बराबर खतरनाक, बॉडी मूवमेंट है जरूरी मेहनत करना किसे पसंद है। एक जगह पसरकर बैठे रहो। आराम से काम करना आमतौर पर हर किसी को पसंद आता है। खासकर जब आराम से कुर्सी पर बैठकर AC की हवा ले रहे हों। सही मायने में यही ‘व्हाइट कॉलर’ जॉब है क्योंकि इसमें फिजिकल वर्क की जगह AC में कम्प्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Whole Fat Dairy Product Benefits

Whole Fat Dairy Product Benefits

Hindi News Lifestyle Whole Fat Dairy Product Benefits | Milk Curd Cahach Paneer Ghee Cheese Health Nutrition Value 2 दिन पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक पीढ़ियों से डेयरी प्रोडक्ट्स भारतीय खानपान का अहम हिस्सा रहे हैं। चाहे वो शाकाहारियों की फेवरेट सब्जी पनीर हो या सेहत का खजाना दूध–दही। जीवन का शुरुआती भोजन ही दूध होता है। जब छोटा बच्चा कुछ और नहीं खाता तो सिर्फ दूध पीता है। डेयरी प्रोडक्ट्स में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो हमारी सेहत के लिए फायदेमंद हैं। कैल्शियम, हाई-क्वालिटी प्रोटीन और जरूरी विटामिन्स से भरपूर ये फूड्स शरीर की ग्रोथ, हड्डियों की मजबूती और मसल्स ग्रोथ में अहम भूमिका निभाते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा, स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग होल-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स खाते हैं, उन्हें हार्ट डिजीज का रिस्क कम होता है। लेकिन क्या डेयरी प्रोडक्ट्स उतने ही हेल्दी होते हैं, जितना दावा किया जाता है? आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- डेयरी प्रोडक्ट्स के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? किन लोगों को डेयरी प्रोडक्ट खाते समय सावधानी बरतनी चाहिए? एक्सपर्टः डॉ. अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली सवाल- डेयरी प्रोडक्ट्स क्या होते हैं? जवाब- डेयरी प्रोडक्ट्स वे सभी फूड आइटम्स हैं, जो जानवरों के दूध से बनाए जाते हैं। पोषण के लिहाज से डेयरी प्रोडक्ट्स प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन D और B12 के अच्छे सोर्स हैं। सवाल- डेयरी प्रोडक्ट्स में कौन–कौन सी चीजें आती हैं? जवाब- डेयरी सिर्फ दूध तक सीमित नहीं है। इसमें वे सभी प्रोडक्ट्स शामिल होते हैं, जो दूध से अलग-अलग प्रक्रियाओं के जरिए तैयार किए जाते हैं। यानी दूध को जमाकर, मथकर, फाड़कर या प्रोसेस करके जो भी प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं, वे सभी डेयरी की कैटेगरी में आते हैं। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- क्या डेयरी प्रोडक्ट्स सेहत के लिए अच्छे होते हैं? जवाब- डेयरी प्रोडक्ट्स को अक्सर ‘कम्प्लीट न्यूट्रिशन’ का हिस्सा माना जाता है। इनमें मौजूद प्रोटीन, कैल्शियम और जरूरी विटामिन्स बॉडी की वर्किंग को सपोर्ट करते हैं। ग्राफिक से समझते हैं कि डेयरी प्रोडक्ट्स से सेहत को कौन-कौन से फायदे मिलते हैं। सवाल– क्या सभी डेयरी प्रोडक्ट्स खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं? जवाब- नहीं, सभी डेयरी प्रोडक्ट्स सभी के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते। दूध– दूध छोटे बच्चों के लिए बेस्ट और कंप्लीट मील है, लेकिन अमूमन वयस्कों को इसकी जरूरत नहीं होती। दही, छाछ– ये सुपाच्य और हेल्दी होता है। सभी के लिए अच्छा है, सिर्फ उन्हें छोड़कर जो लैक्टोज इन्टॉलरेंट हैं। चीज, पनीर– अगर ये अल्ट्राप्रोसेस्ड नहीं है तो तीन साल से बड़ी उम्र के सभी लोगों के लिए हेल्दी है। नोट– सामान्य तौर पर पाश्चराइज्ड और सही तरीके से स्टोर किए गए डेयरी प्रोडक्ट्स सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन कच्चा (अनपाश्चराइज्ड) दूध बैक्टीरियल संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है। सवाल- उम्र के हिसाब से कौन से डेयरी प्रोडक्ट का सेवन बेस्ट होता है? जवाब- डेयरी प्रोडक्ट का चयन उम्र, पाचन क्षमता और पोषण की जरूरतों पर निर्भर करता है। शिशु (0–12 महीने) नवजात शिशु के लिए केवल मां का दूध बेहतर है। 6 महीने बाद खाने के साथ थोड़ा दही दिया जा सकता है। टॉडलर्स (1–3 साल) टॉडलर्स के लिए गाय का दूध बेहतर होता है। साथ ही इन्हेें फुल-फैट दही और चीज भी दिया जा सकता है। छोटे बच्चे (4–8 साल) 4 साल की उम्र के बाद बच्चे के लिए फुल-फैट दूध शुरू किया जा सकता है। दूध, दही और पनीर/चीज हड्डियों की मजबूती के लिए फायदेमंद होते हैं। किशोर (9–18 साल) इस उम्र में शरीर तेजी से बढ़ता है। इसलिए कैल्शियम और प्रोटीन की जरूरत ज्यादा होती है। फुल-फैट दूध, दही और चीज अच्छे विकल्प हैं। वयस्क (19–59 साल) वयस्कों के लिए फुल-फैट दूध और दही बेहतर माने जाते हैं। ग्रीक योगर्ट और पनीर भी अच्छे विकल्प हैं। वरिष्ठ नागरिक (60+ साल) इस उम्र में हल्का और पचने में आसान डेयरी प्रोडक्ट जैसे दही और पनीर लेना फायदेमंद है। सवाल- डेयरी प्रोडक्ट (दूध, दही,पनीर, घी) की न्यूट्रिशनल वैल्यू क्या है? जवाब- डेयरी प्रोडक्ट्स कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनकी न्यूट्रिशनल वैल्यू मात्रा व प्रकार पर निर्भर करती है। ग्राफिक से अलग-अलग डेयरी प्रोडक्ट्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू के बारे में समझते हैं- गट हेल्थ के लिए हेल्दी दही 100 ग्राम सादी दही में 3.5 ग्राम प्रोटीन, 3.3 ग्राम फैट और 4.7 ग्राम नेचुरल शुगर मौजूद होता है। यह फर्मेंटेड होता है, इस वजह से गट हेल्थ के लिए भी अच्छा होता है। पाचन तंत्र मजबूत करता है घी सिर्फ एक चम्मच घी में लगभग 130 कैलोरी और 15 ग्राम फैट होता है। घी में मौजूद ब्यूटिरिक एसिड आंतों की सेहत को सपोर्ट करता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है। मसल बिल्डिंग के लिए मददगार पनीर पनीर प्रोटीन से भरपूर होता है। यह खासकर मसल बिल्डिंग और लंबे समय तक पेट भरा रखने के लिए जाना जाता है। सवाल- क्या डेयरी प्रोडक्ट्स के कुछ साइड इफेक्ट्स भी होते हैं? जवाब- हां, डेयरी प्रोडक्ट्स के कुछ संभावित साइड इफेक्ट हो सकते हैं, लेकिन ये हर किसी को नहीं होते। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कोई व्यक्ति कितनी मात्रा में खा रहा है और उसके शरीर की सहने की क्षमता कैसी है। पॉइंटर्स से समझते हैं- सबसे कॉमन समस्या लैक्टोज इन्टॉलरेंस है, जिसमें दूध या कुछ डेयरी प्रोडक्ट खाने से गैस, पेट दर्द, सूजन या दस्त हो सकता है। कुछ लोगों को मिल्क एलर्जी होती है। इससे स्किन रैश, उल्टी या सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा बहुत ज्यादा मीठे डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे फ्लेवर्ड मिल्क वजन बढ़ा सकते हैं। साथ ही ब्लड शुगर पर भी असर डाल सकते हैं। सवाल- रोज कितनी मात्रा में डेयरी प्रोडक्ट लेना सही है? जवाब- हेल्दी पर्सन के लिए रोजाना 2 से 3 सर्विंग डेयरी प्रोडक्ट लेना सेफ है। इससे शरीर को आवश्यक कैल्शियम और प्रोटीन मिल जाता है। सवाल- क्या डेयरी प्रोडक्ट्स पचने में भारी होते हैं? जवाब- यह व्यक्ति की पाचन क्षमता पर निर्भर करता है। हर किसी का डाइजेशन अलग होता है। सामान्य तौर पर दही और छाछ जैसे फर्मेंटेड डेयरी प्रोडक्ट्स आसानी से पच जाते हैं। वहीं फुल-फैट दूध, क्रीम या ज्यादा फैट वाले प्रोडक्ट कुछ लोगों को भारी लग सकते

Aloe Vera Juice Health Benefits Explained; Nutrition Facts

Aloe Vera Juice Health Benefits Explained; Nutrition Facts

4 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक हम बचपन से एलोवेरा के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में सुनते आए हैं। स्किन में निखार लाने से लेकर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने तक, इसके कई फायदे बताए जाते हैं। यही वजह है कि लोग इसका खूब इस्तेमाल करते हैं। आयुर्वेद और मेडिकल साइंस दोनों ही इसे एक बेहद उपयोगी औषधीय पौधा मानते हैं। साल 2016 में इंटरनेशनल पीयर रिव्यू ओपन एक्सेस जर्नल ‘बायोसाइंस बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च कम्युनिकेशन’ में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, एलोवेरा में एंटीमाइक्रोबियल और एंटीवायरल गुण होते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव भी देखे गए हैं। इसलिए एलोवेरा घाव भरने, सनबर्न और स्किन डैमेज ठीक करने में मददगार हो सकता है। पिछले कुछ सालों में एलोवेरा जूस पीने का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग इसे पाचन सुधारने, शरीर को डिटॉक्स करने, इम्यूनिटी बढ़ाने और स्किन हेल्थ बेहतर बनाने वाले नेचुरल टॉनिक के रूप में अपना रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या रोज एलोवेरा जूस पीना वास्तव में सुरक्षित है। साथ ही इसका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है? तो आइए, आज ‘जरूरत की खबर’ में एलोवेरा जूस से जुड़े इन सभी सवालों के जवाब विस्तार से समझते हैं। साथ ही इसके फायदे, सही मात्रा, सेवन का तरीका और जरूरी सावधानियों पर भी चर्चा करेंगे। एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’ सवाल- एलोवेरा में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं? जवाब- यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) के मुताबिक, एलोवेरा में भरपूर मात्रा में पानी होता है। साथ ही कैल्शियम, सोडियम और विटामिन C जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं। एलोवेरा जूस आमतौर पर इसके पत्ते के अंदर मौजूद जेल को साफ करके तैयार किया जाता है। नीचे दिए ग्राफिक से 100 ग्राम एलोवेरा जूस की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए- सवाल- एलोवेरा जूस हमारे शरीर में क्या काम करता है? जवाब- एलोवेरा जूस मुख्य रूप से हमारे शरीर में ये काम करता है– पाचन तंत्र को सपोर्ट करता है। हाइड्रेशन बढ़ाता है। इंफ्लेमेशन कम करता है। गट हेल्थ को सपोर्ट करता है। कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। इसमें मौजूद नेचुरल एंजाइम पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाते हैं। सवाल- रोज एलोवेरा जूस पीने के क्या फायदे हैं? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए– एलोवेरा जूस में पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स और मिनरल्स इम्यूनिटी को सपोर्ट करने और ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं। इसके एंजाइम्स और बायोएक्टिव कंपाउंड्स पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं। यह हल्की कब्ज जैसी समस्याओं में भी राहत देते हैं। कम कैलोरी होने के कारण इसे पीने पर कैलोरी इंटेक का भी डर नहीं होता। एलाेवेरा जूस के बाकी हेल्थ बेनिफिट्स नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- एलोवेरा जूस पीने का सही तरीका क्या है? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए– एलोवेरा जूस को हमेशा सीमित मात्रा में पिएं। इसे हमेशा पानी में मिलाकर ही पिएं। पानी मिलाना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसमें मौजूद लेटेक्स की अधिकता दस्त, पेट में ऐंठन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का कारण बन सकती है। बेहतर है कि इसे सुबह खाली पेट या भोजन से आधे घंटे पहले पिएं। शुरुआत कम मात्रा से करें और शरीर की प्रतिक्रिया देखें। अगर पेट में दर्द, दस्त या जलन हो तो तुरंत बंद कर दें। लंबे समय तक नियमित सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है। सवाल- क्या एलोवेरा जूस खाली पेट पीना ज्यादा फायदेमंद होता है? जवाब- हां, खाली पेट लेने से इसका अवशोषण बेहतर होता है और पाचन तंत्र को एक्टिव करने में मदद मिलती है। हालांकि यह सभी के लिए सुरक्षित नहीं है। कुछ लोगों को इससे पेट दर्द, दस्त या ऐंठन हो सकती है। इसलिए पहले डॉक्टर की सलाह लें। सवाल- एलोवेरा जूस स्किन और बालों के लिए कैसे फायदेमंद है? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए- एलोवेरा जूस में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स, विटामिन C और E स्किन को फ्री-रेडिकल डैमेज से बचाने में मदद कर सकते हैं। इससे चेहरे पर निखार आता है। इसके हाइड्रेटिंग गुण स्किन को अंदर से सपोर्ट करते हैं और इंफ्लेमेशन कम करने में मदद करते हैं। इससे पिंपल्स और हल्की स्किन इरिटेशन की समस्या में राहत मिल सकती है। साल 2018, में ‘जर्नल ऑफ ड्रग डिलीवरी एंड थेरेप्यूटिक्स’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, एलोवेरा में मौजूद बायोएक्टिव कंपाउंड्स स्किन को मुलायम और हेल्दी रखने में मदद करते हैं। इसके हीलिंग और पोषण गुणों के कारण कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में इसका खूब यूज किया जाता है। एलोवेरा में पाए जाने वाले पोषक तत्व स्कैल्प हेल्थ को बेहतर बनाने, डैंड्रफ कम करने और बालों को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार और उचित हेयर केयर भी जरूरी है। सवाल- एक दिन में कितनी मात्रा में एलोवेरा जूस लेना सेफ है? जवाब- सामान्य तौर पर वयस्कों के लिए दिन में 20–30 ml एलोवेरा जूस पर्याप्त और सुरक्षित माना जाता है। इसे एक गिलास पानी में मिलाकर लेना बेहतर रहता है। सवाल- क्या एलोवेरा जूस पीने के कोई साइड इफेक्ट्स भी हैं? जवाब- हां, अधिक मात्रा में या लंबे समय तक एलोवेरा जूस पीने से कुछ लोगों में दस्त, पेट दर्द, ऐंठन या इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलन हो सकता है। इसका लैक्सेटिव प्रभाव शरीर में पोटेशियम की कमी की वजह बन सकता है। कुछ लोगों में एलर्जी या स्किन संबंधी रिएक्शन भी हो सकते हैं। सवाल- किन लोगों को एलोवेरा जूस नहीं पीना चाहिए? जवाब- कुछ लोगों को एलोवेरा जूस नहीं पीना चाहिए। जैसेकि- प्रेग्नेंट और ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाएं। छोटे बच्चे और बुजुर्ग। जिन्हें एलोवेरा से एलर्जी है। जिन्हें किडनी या लिवर डिजीज है। जिन्हें आंतों से जुड़ी समस्या है। जिन्हें कोई गंभीर बीमारी है। जिनका ब्लड प्रेशर लो रहता है। जिनका ब्लड शुगर लो रहता है। सवाल- बाजार से एलोवेरा जूस खरीदते समय किन बाताें का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इस दौरान कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- FSSAI लाइसेंस नंबर और कंपनी की पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से दी गई हो। इंग्रीडिएंट लिस्ट ध्यान से पढ़ें। उसमें एडेड शुगर, आर्टिफिशियल कलर या फ्लेवर न हों। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें। बोतल की सील