गोमांस, लोकायुक्त-नई बिल्डिंग पर 'शहर सरकार' को घेरेगा विपक्ष:₹3500 करोड़ का होगा भोपाल निगम का बजट; टैक्स बढ़ाने की संभावना कम

भोपाल नगर निगम परिषद की मीटिंग 23 मार्च को होगी। इसमें ‘शहर सरकार’ बजट भी पेश करेगी। सूत्रों की माने तो अबकी बार बजट 3500 करोड़ रुपए का होगा। वहीं, मंत्री-विधायकों की आपत्ति के बाद प्रॉपर्टी या जल कर बढ़ाने की संभावना कम ही है। पिछली बार कुल 3611 करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया था। बजट मीटिंग में गोमांस, नई बिल्डिंग और लोकायुक्त की हाल ही हुई कार्रवाई का मुद्दा भी उठेगा। निगम के स्लॉटर हाउस में 26 टन गोमांस मिलने के मामले में पिछली बैठक में भी कांग्रेस ने जमकर हंगामा किया था। वहीं, लिंक रोड नंबर-2 पर 40 करोड़ रुपए से बनी नई बिल्डिंग की अधूरी तैयारियों के बीच शुरुआत होने, बिल्डिंग से गिरकर एक बुजुर्ग की मौत होने का मामला भी गरमाएगा। पार्किंग का मुद्दा भी आएगा बैठक में 14 नई पार्किंग को लेकर प्रस्ताव आएगा। इनमें से 5 पार्किंग मेट्रो स्टेशन के नीचे प्रस्तावित की गई है। जहां 40 फोर व्हीलर और 250 टू व्हीलर्स खड़े किए जा सकेंगे। 16 मार्च को हुई मेयर इन कौंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी। अब परिषद में यह प्रस्ताव आएगा। पार्किंग को लेकर निगम ने पुलिस की भी सहमति ली है। लेगेसी वेस्ट के निपटारे का प्रस्ताव आएगा परिषद की बैठक में आदमपुर खंती लीगेसी वेस्ट के निपटान के लिए प्रस्ताव भी आएगा। दो दिन पहले एमआईसी ने इसे परिषद में लाने का निर्णय लिया था। इसमें 55.54 करोड़ रुपए खर्च होंगे। निगम के 145 वाहनों को कंडम घोषित किया जाएगा निगम के अनुपयोगी 145 वाहनों को कंडम घोषित कराए जाने के संबंध में भी प्रस्ताव परिषद की बैठक में आएगा। इसे भी एमआईसी मंजूरी दे चुकी है। मेट्रो स्टेशन बने, लेकिन पार्किंग नहीं बनाई बता दें कि भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किलोमीटर लंबा है। इसमें कुल 8 स्टेशन- सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स शामिल हैं। इनमें से एक भी स्टेशन पर पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों को अपनी गाड़ियां खड़ी करने के लिए मुश्किलें झेलनी पड़ रही है। मेट्रो स्टेशनों पर सिर्फ पिक एंड ड्रॉप की व्यवस्था ही है। यानी, यात्री किसी गाड़ी से उतर और चढ़ तो रहे हैं, लेकिन वे अपने वाहन यहां खड़ा नहीं कर सकते। इस मुद्दे पर मेट्रो अफसर दो महीने से पार्किंग के लिए व्यवस्था कर रहे हैं। नगर निगम ने इस समस्या का हल निकाला है। इन जगहों पर पार्किंग रहेगी सुभाषनगर मेट्रो स्टेशन के दोनों गेट, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, डीआरएम ऑफिस और अलकापुरी मेट्रो स्टेशन के नीचे पार्किंग बनेगी। एमपी नगर, रानी कमलापति और एम्स स्टेशन के नीचे फिलहाल को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, तीनों जगह पर दूसरी पार्किंग है। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर ही बड़ी पार्किंग है। मेट्रो से आने-जाने वाले यात्री यहां पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं। एम्स के पास मेट्रो की खुद की जमीन है। जहां पार्किंग विकसित होगी। एमपी नगर में ही निगम की एक पार्किंग है। यात्री वहां पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर सकेंगे।
AIIMS Bhopal: Guard Catches Phone Thief

ईद उल फितर का त्योहार होने से शनिवार को छुट्टी रही। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बंद है, जिससे परिसर खाली हैं। इसी को अवसर मानते हुए चोर एक्टिव हो गए हैं। शनिवार सुबह करीब 10 बजे एक चोर एम्स भोपाल में परिजनों के चार्जिंग में लगे मोबाइल को चुराने के इराद . युवक फोन चार्ज पर लगाकर सो रहा था एम्स से मिली जानकारी के अनुसार, घटना सुबह 10 बजे के करीब की है। मेडिकल वार्ड के बाहर मौजूद गलियारे में एक युवक चार्जिंग सॉकेट में फोन चार्ज पर लगाकर सो रहा था। मौके का फायदा उठाते हुए एक चोर ने उसका फोन निकाला और मौके से फरार होने की मंशा से बाहर की ओर जाने लगा। लेकिन, उसकी यह गतिविधि एक गार्ड ने देख ली। इसके बाद उसने अपने साथियों को इसकी सूचना दी और चोर को घेरकर पकड़ लिया गया। पूछताछ करने पर उसने खुद का नाम राहुल शर्मा बताया। वह गार्ड से बार-बार खुद को छोड़ देने की बात कह रहा था। उसने कहा कि वह स्टूडेंट है और पैसे की जरूरत होने पर यह कदम उठाया। हालांकि, उसके पास से कोई पहचान पत्र नहीं मिला। आरोपी को पुलिस के हवाले किया एम्स के सिक्योरिटी सुपरवाइजर ने इस पूरी घटना की रिपोर्ट एम्स के डिप्टी डायरेक्टर कार्यालय को दी है, जिसमें कहा गया कि गार्ड की मुस्तैदी के कारण चोर को पकड़ा गया। इसके बाद डायल 100 को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी आरोपी को अपने साथ लेकर चले गए। यह भी पढ़ें… भोपाल एम्स की लिफ्ट में हुई थी चेन स्नेचिंग भोपाल एम्स जैसे हाई-सिक्योरिटी स्वास्थ्य संस्थान में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। रविवार शाम लिफ्ट के अंदर महिला कर्मचारी से चेन स्नेचिंग की वारदात हुई, जिसका सीसीटीवी वीडियो सोमवार को सामने आया है। घटना ने एम्स की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वारदात ब्लड बैंक के पीछे स्थित लिफ्ट में हुई। पीड़िता वर्षा सोनी, जो स्त्री रोग विभाग में अटेंडर हैं, ड्यूटी के दौरान लिफ्ट में अकेली थीं। तभी मास्क और टोपी पहने एक युवक लिफ्ट में घुसा और बातचीत का बहाना बनाकर नेत्र रोग विभाग का फ्लोर पूछा। जैसे ही लिफ्ट तीसरे फ्लोर पर पहुंची, युवक पहले बाहर निकला और अचानक लौटकर महिला के गले पर झपट्टा मार दिया। आरोपी ने सोने की मोतियों की माला और मंगलसूत्र खींचने की कोशिश की। महिला ने विरोध किया, लेकिन युवक धक्का देकर सीढ़ियों की ओर भाग निकला। साथ में मंगलसूत्र लेकर फरार हो गया, जबकि मोतियों की माला टूटकर मौके पर गिर गई। पढ़ें पूरी खबर…
हाई-प्रोटीन डाइट शौकीन असलम का जेल में वजन घटा:22 घंटे की रिहाई के बाद NSA में दोबारा जेल भेजा गया; नई पहचान बंदी नंबर 500

भोपाल नगर निगम के स्लॉटर हाउस से निकले मांस में गोमांस की पुष्टि के बाद गिरफ्तार असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा को 70 दिन बाद सेशन कोर्ट से जमानत मिलने के बाद बुधवार (18 मार्च) रात उसकी रिहाई हो गई। हालांकि, जेल से निकलते ही उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। गुरुवार (19 मार्च) को रिहाई के महज 22 घंटे बाद असलम चमड़ा के खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की गई और दोबारा जेल में दाखिल कर दिया गया। लग्जरी लाइफ और हाई-प्रोटीन डाइट लेने वाले असलम का जेल में रहने के दौरान चार किलो वजन कम हो गया है। इसकी पुष्टि जेल में दर्ज उसके रिकॉर्ड से हुई है। 8 जनवरी 2026 को जब उसे जेल में दाखिल किया गया था, तब उसका वजन 65 किलो था। गुरुवार को दोबारा जेल में दाखिल किए जाने के बाद नए सिरे से उसका रिकॉर्ड तैयार किया गया। तब उसका वजन 61 किलो निकला। एनएसए की कार्रवाई के बाद असलम को जेल में नई पहचान विचाराधीन बंदी नंबर 500/26 के रूप में मिली है। सुरक्षा कारणों के चलते उसे जेल के ‘बी’ खंड स्थित बिल्डिंग सेंटर में रखा गया है। मंत्री और विधायक बोले- गौ हत्या करने वालों को नहीं छोड़ा जाएगा असलम चमड़े पर कार्रवाई को लेकर मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि गौ हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा। मध्यप्रदेश में मोहन यादव की सरकार है। ऐसे गौ हत्यारे, जिन्होंने गौ माता की हत्या की है, उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा। असलम चमड़े पर रासुका के तहत कार्रवाई हुई है और आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि असलम चमड़े के साथ और भी जितने “चमड़े” हैं, उनके भी चमड़े उधेड़े जाएंगे। अभी तो NSA लगा है, आगे और भी कार्रवाई बाकी है। असलम चमड़े ने जो पाप किया है, उसे उसकी सौ पीढ़ियां भी नहीं धो पाएंगी। डॉ. मोहन यादव की मध्यप्रदेश सरकार गौ माता की रक्षा के लिए समर्पित है। जेल से निकलते ही उठा ले गई थी पुलिस बुधवार रात करीब 10 बजे भोपाल सेंट्रल जेल के मुख्य द्वार से असलम के निकलते ही पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। लाल रंग की पोलो कार से उसे जेल परिसर से बाहर निकाला गया। इस कार का एक वीडियो भी सामने आया है। पहले उसे परवलिया सड़क फिर सीहोर रोड ले जाया गया। इसके बाद देर रात उसे थाने लेकर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई की। इधर गोमांस तस्करी से जुड़े पूरे मामले का खुलासा करने का दावा करने वाले भानू हिंदू का आरोप है कि पुलिस की ओर से कमजोर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी। इन्हीं खामियों का फायदा असलम को बेल मिलने में मिला। भानू के मुताबिक, पुलिस ने केस की शुरुआत से ही लापरवाही की थी। गोमांस से भरे कंटेनर को छोड़ दिया गया था। हैदराबाद जिस सैंपल को जाना था, वह खराब हो गया। मथुरा से आई सैंपल रिपोर्ट के आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई थी। जानिए कोर्ट ने जमानत आदेश में क्या कहा? अदालत ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि संबंधित अपराध न तो मृत्युदंड और न ही आजीवन कारावास से दंडनीय है और यह न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। आरोपी दो माह से अधिक समय से अभिरक्षा में है, जबकि मामले की विवेचना पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी प्रस्तुत की जा चुकी है। ऐसे में ट्रायल पूरा होने में समय लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए जमानत देना उचित है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी का यह दूसरा जमानत आवेदन था। पहला आवेदन गुण-दोष के आधार पर निरस्त नहीं हुआ था। अब परिस्थितियों में बदलाव और जांच पूरी होने के बाद जमानत दी गई। साथ ही शर्त रखी गई है कि आरोपी ट्रायल में कोई बाधा नहीं डालेगा और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएगा। इन शर्तों पर बाहर आया असलम असलम की तरफ से वकील विजय चौधरी और जगदीश गुप्ता ने कोर्ट में पक्ष रखा। कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ शर्तें भी रखी। वह केस की सुनवाई में कोई रुकावट नहीं डालेगा। बिना कोर्ट की इजाजत के वह देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेगा। सुनवाई के दौरान वह बार-बार तारीखें आगे बढ़ाने (स्थगन) की मांग नहीं करेगा। 17 दिसंबर की रात पकड़ा गया 26 टन मांस 17 दिसंबर की रात हिंदू संगठनों ने पुलिस कंट्रोल रूम के पास एक कंटेनर पकड़ा था, जो जिंसी स्लॉटर हाउस से निकला था। इसमें 26 टन मांस भरा था। जब इस मांस के सैंपल मथुरा की लैब भेजे गए, तो वहां से आई रिपोर्ट में इसमें गोमांस होने की बात सामने आई। रिपोर्ट आने के बाद 8 जनवरी 2026 को जहांगीराबाद पुलिस ने केस दर्ज कर असलम और ड्राइवर शोएब को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने निकाली थी निगम-पुलिस की अर्थी असलम चमड़ा को जमानत मिलने के बाद गुरुवार को बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते हुए नगर निगम और पुलिस प्रशासन की सांकेतिक अर्थी निकाली थी और पुतला दहन किया था। इस दौरान मौके पर जमकर नारेबाजी की हुई थी।
Bhopal Hamidiya Hospital LIVE Baby Declared Dead Controversy

भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक बार फिर नवजात को मृत घोषित करने के बाद उसमें हरकत दिखने का मामला सामने आया है, जिससे अस्पताल में विवाद की स्थिति बन गई। शुक्रवार को 6 माह की गर्भवती महिला की इमरजेंसी डिलीवरी के बाद बच्चे को मृत बताया गया, लेकिन कुछ दे . इमरजेंसी डिलीवरी के बाद मृत घोषित किया नवजात जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर करीब 4 बजे मानताशा नाम की महिला हमीदिया अस्पताल के ब्लॉक 2 में गंभीर हालत में पहुंची। महिला लगभग 6 महीने की गर्भवती थी और अस्पताल पहुंचने के समय ही शिशु का सिर बाहर आ चुका था। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत लेबर रूम में भर्ती कर इमरजेंसी डिलीवरी कराई। डिलीवरी के बाद परिजनों को बताया गया कि बच्चा मृत पैदा हुआ है। लेकिन कुछ समय बाद नवजात में हलचल जैसी स्थिति दिखने लगी, जिससे परिजनों में आक्रोश फैल गया और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया। हंगामे के बाद पुलिस को बुलाना पड़ा परिजनों के हंगामे को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और कोहेफिजा थाने से टीआई के.जी. शुक्ला को मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने पहुंचकर परिजनों को समझाने का प्रयास किया और स्थिति को नियंत्रित किया। अस्पताल प्रशासन ने तत्काल मामले को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन घटना ने एक बार फिर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला हमीदिया अस्पताल में इससे पहले भी इसी तरह का विवाद बुधवार को सामने आया था। उस मामले में एक नवजात को मृत घोषित कर मृत्यु प्रमाण पत्र दे दिया गया था। परिजनों का दावा था कि जब वे करीब चार घंटे बाद एनआईसीयू में शव लेने पहुंचे, तो बच्ची में सांस चल रही थी। उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया, जिसमें नवजात का पेट हिलता नजर आया। इस घटना के बाद भी अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे और अब दोबारा सामने आए मामले ने चिंता और बढ़ा दी है। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में नवजात अत्यंत प्रीमेच्योर होता है। जानकारी के अनुसार, पहले सामने आए मामले में बच्ची का वजन लगभग 450 ग्राम था, जो सामान्य से काफी कम है। डॉक्टरों के मुताबिक, जन्म के समय स्टेथोस्कोप से जांच में हार्टबीट नहीं मिली थी। ऐसी स्थिति में प्रोटोकॉल के तहत नवजात को मृत माना जाता है और आगे की प्रक्रिया की जाती है। ये खबर भी पढ़ें… नवजात की सांसें चल रही थीं, दे दिया डेथ सर्टिफिकेट भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक नवजात को मृत घोषित किए जाने के चार घंटे बाद उसकी सांसें चलने का दावा किया गया है। नवजात के पिता का कहना है कि उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र दे दिया गया था, लेकिन जब शव लेने एनआईसीयू पहुंचे तो बच्ची में हरकत दिखाई दी। उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया है।पूरी खबर पढ़ें
भोपाल में 36 गैस सिलेंडर जब्त:होटल में कमर्शियल की जगह घरेलू का हो रहा था उपयोग; रीफिलिंग करते पकड़ा

भोपाल में LPG संकट के बीच शुक्रवार को खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। 3 जगहों से कुल 36 गैस सिलेंडर जब्त किए गए। एक होटल में कमर्शियल की जगह घरेलू सिलेंडर का उपयोग हो रहा था। कमर्शियल सिलेंडर बीते 9 दिन से सप्लाई नहीं हुए हैं। वहीं, एक जगह पर गैस रीफिलिंग करने पर छापामार कार्रवाई हुई। फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया, न्यू मार्केट और जहांगीराबाद क्षेत्र में होटल, रेस्टोरेंट और अवैध गैस सिलेडर रीफिलिंग पॉइंट, परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। भदभदा रोड पर न्यू मार्केट स्थित आरके गैस एजेंसी की प्राप्त शिकायत के संबंध में जांच की गई। यहां गैस सिलेंडर के स्टॉक और एजेंसी में कार्यरत सभी कर्मचारियों की जानकारी ली गई। यहां भी कार्रवाई की गई
26 मार्च से इंडिमून्स आर्ट फेस्टिवल शुरू:4 दिनों तक होगा नाटकों का मंचन; नितीश, संजय मिश्रा, राकेश बेदी और शेखर सुमन देंगे प्रस्तुतियां

भोपाल में 26 से 29 मार्च तक इंडिमून्स आर्ट फेस्टिवल होगा। रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में रोज शाम 7:30 बजे नाटक मंचित होंगे। चार दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में संजय मिश्रा, राकेश बेदी और शेखर सुमन जैसे कलाकार नाटक करेंगे। फेस्टिवल के टिकट की कीमत 299 रुपए से 2999 रुपए तक रखी गई है। फेस्टिवल से पहले शुक्रवार को भोपाल हाट में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें संयोजक बिजॉन मंडल ने बताया कि रंग थिएटर, कल्चरल और सोशल वेलफेयर सोसायटी यह आयोजन कर रही है। पिछले साल दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया था, इसलिए इस बार भी नए अंदाज में फेस्टिवल लाया गया है। युवाओं को जोड़ने पर है फोसक बिजॉन मंडल ने बताया कि फेस्टिवल का मुख्य फोकस युवाओं को थिएटर से जोड़ना है। इसके जरिए उन्हें भोपाल की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि भोपाल की रंगमंच परंपरा बहुत समृद्ध रही है, यहां से हबीब तनवीर और आलोक चटर्जी जैसे बड़े नाम जुड़े रहे हैं। ओपन स्टेज पर दिखेगी युवाओं की प्रतिभा नाटक शुरू होने से पहले युवाओं के लिए ओपन स्टेज होगा, जहां वे अपनी कला दिखा सकेंगे। इसमें भाग लेने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन जरूरी है। अब तक 5 रैपर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके लिए कोई फीस नहीं रखी गई है। फेस्टिवल में भाग लेने वाले युवाओं को आगे ओटीटी और फिल्मों में काम के मौके भी मिल सकते हैं। फिल्म ‘पीकू’ में काम कर चुके बलेंद्र सिंह ने भी युवाओं को थिएटर से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा दिन में रंगमंच, सिनेमा और कला से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। इन सत्रों का संचालन सीमा रायजादा करेंगी, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के जानकार शामिल होंगे। फेस्टिवल में इन नाटको का मंचन होगा
भोपाल कोर्ट से रिहाई के बाद असलम की गिरफ्तारी:VIDEO:प्राइवेट कार में बैठा ले गए पुलिसकर्मी, एक घंटे तक कार में घुमाया, कार्रवाई की

नगर निगम के स्लॉटर हाउस से निकले मांस में गोमांस की पुष्टि के बाद गिरफ्तार असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा को जमानत मिलने के बाद बुधवार रात उसकी रिहाई हो गई। हालांकि जेल से निकलते ही उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया है। सूत्रों की मानें तो असलम पर धारा 151 के तहत कार्रवाई जोन-4 के एक थाना पुलिस ने की है। अब पुलिस उसके खिलाफ रासुका प्रतिवेदन पेश करने की तैयारी कर रही है। बुधवार रात करीब 10 बजे भोपाल सेंट्रल जेल के मुख्य द्वार से असलम के निकलते ही पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार किया था। लाल रंग की पोलो कार से उसे जेल परिसर से बाहर निकाला गया। इस कार का एक वीडियो भी सामने आया है। पहले उसे परवलिया सड़क फिर सीहोर रोड ले जाया गया। इसके बाद देर रात उसे थाने लेकर पहुंची पुलिस ने टीम ने कार्रवाई की। इधर गो मांस तस्करी से जुड़े पूरे मामले का खुलासा करने का दावा करने वाले भानू हिंदू का आरोप है कि पुलिस की ओर से कमजोर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी। इन्हीं खामियों का फायदा असलम को बेल मिलने के लिए मिला। भानू के मुताबिक पुलिस ने केस की शुरुआत से ही लापरवाही की थी। गो मांस से भरे कंटेनर को छोड़ दिया गया था। हैदराबाद जिस सैंपल को जाना था, वह खराब हो गया। मथुरा से आई सेंपल रिपोर्ट के आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई थी। पुलिस की खामियों के कारण ही असलम को कोर्ट से राहत मिली। लेकिन असलम पर रासुका की कार्रवाई नहीं की गई तो समस्त हिंदू संगठनों के साथ सड़कों पर उतरेंगे और अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन किया जाएगा। 70 दिन बाद हुई थी जेल से रिहाई करीब 70 दिन बाद एडीजे पंकज कुमार जैन की अदालत ने 35 हजार रुपए के मुचलके पर असलम को रिहा करने के आदेश दिए। हालांकि, देर रात भोपाल सेंट्रल जेल से रिहाई के बाद से असलम गायब है। असलम के भाई आसिफ के अनुसार वे असलम को लेने जेल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें उससे मिलने तक नहीं दिया गया। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि उन्हें इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। जानिए कोर्ट ने जमानत आदेश में क्या कहा अदालत ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि संबंधित अपराध न तो मृत्युदंड और न ही आजीवन कारावास से दंडनीय है और यह न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। आरोपी दो माह से अधिक समय से अभिरक्षा में है, जबकि मामले की विवेचना पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी प्रस्तुत की जा चुकी है। ऐसे में ट्रायल पूरा होने में समय लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए जमानत देना उचित है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी का यह दूसरा जमानत आवेदन था। पहला आवेदन गुण-दोष के आधार पर निरस्त नहीं हुआ था। अब परिस्थितियों में बदलाव और जांच पूरी होने के बाद जमानत दी गई। साथ ही शर्त रखी गई है कि आरोपी ट्रायल में कोई बाधा नहीं डालेगा और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएगा। इन शर्तों पर बाहर आया असलम असलम की तरफ से वकील विजय चौधरी और जगदीश गुप्ता ने कोर्ट में पक्ष रखा। कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ शर्तें भी रखी हैं। वह केस की सुनवाई में कोई रुकावट नहीं डालेगा। बिना कोर्ट की इजाजत के वह देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेगा। सुनवाई के दौरान वह बार-बार तारीखें आगे बढ़ाने (स्थगन) की मांग नहीं करेगा। एडिशनल डीसीपी बोले नहीं की कोई कार्रवाई एडिशनल डीसीपी जोन-4 मलकीत सिंह ने बताया कि उनके जोन से असलम के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्हें असलम की गिरफ्तारी के संबंध में कोई जानकारी भी नहीं है। क्या था पूरा मामला 17 दिसंबर की रात हिंदू संगठनों ने पुलिस कंट्रोल रूम के पास एक कंटेनर पकड़ा था, जो जिंसी स्लॉटर हाउस से निकला था। इसमें 26 टन मांस भरा था। जब इस मांस के सैंपल मथुरा की लैब भेजे गए, तो वहां से आई रिपोर्ट में इसमें गोमांस होने की बात सामने आई। रिपोर्ट आने के बाद 8 जनवरी 2026 को जहांगीराबाद पुलिस ने केस दर्ज कर असलम और ड्राइवर शोएब को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने निकाली निगम-पुलिस की अर्थी असलम चमड़ा को जमानत मिलने के बाद शहर में विरोध तेज हो गया है। गुरुवार को बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते हुए नगर निगम और पुलिस प्रशासन की सांकेतिक अर्थी निकाली और पुतला दहन किया। इस दौरान मौके पर जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शन को देखते हुए एहतियातन मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर स्थिति पर नजर बनाए रखी, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि इतने गंभीर मामले में आरोपी को जमानत मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। उनका कहना था कि इससे आम लोगों में गलत संदेश जाएगा और पीड़ित पक्ष के साथ अन्याय हुआ है। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
MP CM Meets Monalisa Family; Demands PFI Probe

प्रयागराज महाकुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा की फरमान खान के साथ हुई शादी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। फिल्म निर्माता सनोज मिश्रा ने मोनालिसा के परिवार के साथ भोपाल पहुंचे। सनोज ने दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मुलाकात की है और . उन्होंने कहा कि मोनालिसा बालिग नहीं है। हमने प्रशासन से यह मांग की है कि मेडिकल ग्राउंड पर जांच हो। केरल की सरकार, वहां के लोग और पीएफआई के संगठन इन सबने मिलकर इस खेल को अंजाम दिया है। सीएम से मुलाकात के बाद सनोज मिश्रा से दैनिक भास्कर ने बातचीत की…… भास्कर से बातचीत करते सनोज मिश्रा। भास्कर: आप मोनालिसा के परिवार के साथ भोपाल आए सीएम से मिले हैं क्या? सनोज मिश्रा: हमारी बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि वो लड़की नाबालिग है। उसे केरल में ले जाकर जो तमाशा हुआ है वो बहुत बड़ा क्राइम बनता है। हमने प्रशासन से यह मांग की है कि मेडिकल ग्राउंड पर जांच हो। ये ट्राइबल कम्युनिटी के घुमंतु लोग हैं, इनका कोई एक ठिकाना नहीं होता। बर्थ सर्टिफिकेट और बाकी जो चीजें दिखाई जा रही हैं, ये टोटल फर्जी हैं। इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि वहां केरल में एक घंटे के अंदर मैरिज सर्टिफिकेट इश्यू हो गया। केरल की सरकार, वहां के लोग और पीएफआई के संगठन इन सबने मिलकर इसको अंजाम दिया है। मैंने शासन से यह मांग की है कि पीएफआई के एंगल से इसकी जांच की जाए। और मेडिकल ग्राउंड पर यह तय किया जाए कि लड़की नाबालिग है? क्योंकि उसके सारे पेपर फर्जी हैं। भास्कर: आप लोगों को क्या आश्वासन दिया? सनोज मिश्रा: मुझे शासन की तरफ से पूरा सहयोग मिल रहा है। पूरा देश हमारे साथ है, क्योंकि ये सनातन और धर्म की बात है। ये बहुत बड़ी घटना है। ऐसी घटनाएं आम हैं। उनका गढ़ केरल बनता जा रहा है। जहां पर लव जिहाद की घटनाओं को प्रश्रय दिया जाता है। पिछले दिनों सबने देखा कि छांगुर बाबा किस तरह से फंडिंग करता था। जाति के आधार पर स्लैब तय होता है उसी हिसाब से पैसा दिया जाता है। भास्कर: क्या सरकार से आप लोगों ने फरमान पर धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत केस दर्ज करने की मांग की है? सनोज मिश्रा: मैंने मांग रखी है। मैं हर तरह से लगा हुआ हूं क्योंकि मैं ही इस बच्ची को यहां लेकर ट्रेनिंग दिलाई थी। उसी बीच में सुनियोजित तरीके से उन लोगों ने मुझे टेकओवर किया था। उसे साउथ में लेकर चले गए मुझे उसकी भनक तक नहीं लगने दी। क्योंकि, उन लोगों को पता था कि अगर मुझे भनक लग जाएगी तो मैं उनके मंसूबे पूरे नहीं होने दूंगा। धर्म परिवर्तन पर बनने वाली फिल्म द डायरी ऑफ मणिपुर उसका भी भविष्य उन्होंने खतरे में ड़ाल दिया। मैं करीब दस करोड़ रुपए के कर्जे में हूं। पता नहीं उस फिल्म और मेरे कर्जे का क्या भविष्य होगा? अभी अगर तत्काल कार्रवाई नहीं करवाऊंगा, उसके खिलाफ आवाज नहीं उठाऊंगा तो हमारे देश का खासतौर पर सनातन धर्म का बहुत ज्यादा नुकसान होगा। क्योंकि, इससे इंस्पायर्ड होकर और भी बहुत सारी लड़कियां धर्म परिवर्तन करने के लिए तैयार हो जाएंगी। मोनलिसा और फरमान की यह तस्वीर पिछले साल की है। भास्कर: आपने और नाजिया ने खरगोन में कहा कि मोनालिसा सीरिया भी भेजी जा सकती है? सनोज मिश्रा: सीरिया की बात मैंने इसलिए कही थी क्योंकि मुझे दो दिन का शूट यूके में रखना था तो इन ट्रायबल्स के लोगों ने मना कर दिया। चूंकि, ये आदिवासी लोग हैं तो उन्होंने कह दिया कि हम अपने बच्चे को बाहर नहीं भेजेंगे। ये करीब छह-आठ महीने पहले की बात है। उसके बाद उन्होंने अचानक पासपोर्ट बनवा लिया। कैसे बनवाया? क्योंकि वो जो मुल्ला जिहादी आया था, उसने इनको समझाया कि मैं फिल्म बनाऊंगा, तुम्हें बड़ा बनाऊंगा। और विदेश लेकर जाऊंगा। पैसों का लालच दिया होगा। उसने किस तरह से ब्रेनवॉश किया मैं पासपोर्ट नहीं बनवा पाया वो रातों रात पासपोर्ट बनवाकर ले गया। जब उसकी पिक्चर ही फर्जी है फिल्म ही नहीं बन रही। सब झूठ तमाशा और फरेब था। अर्जेंट में पासपोर्ट बनाने का मतलब क्या है? मतलब यही है कि वो विदेश में कहीं जहां पर लड़कियां सप्लाई होती हैं आज की तारीख में सीरिया उसका गढ़ बना हुआ है। आप वहां पर देखेंगे तो एनआईए और एजेसियों ने जो जांच की है और अब तक जो प्रूव किया है तो सबसे ज्यादा लड़कियां वहां से डिपोर्ट की जा रही हैं। ये जरूरी नहीं कि फ्लाइट से भेजें वहां कंटेनर से भी भेज देते हैं तो हो सकता है कि पुलिस के दबाव से बचने के लिए इस सेफ साइट को ध्यान में रखते हुए उस मुल्ले ने पहले ही पासपोर्ट बनाकर रखा हुआ था। मोनालिसा और फरमान शादी के समय केरल में। भास्कर: आप फरमान को पहले कब से जानते हैं? सनोज मिश्रा: मैं कभी नहीं जानता था। उससे कभी मिला भी नहीं। जिस दिन मीडिया में खबरें चलना शुरू हुई उस दिन मुझे पता चला। अगर मैं उसे पहले से जानता तो ये नाफरमानी तो नहीं करने देता। भास्कर: फरमान का परिवार भी यही बात कह रहा है। वही बात आप लोग कह रहे हैं। न उनकी मर्जी से शादी हुई न मोनालिसा के परिवार की मर्जी से? सनोज मिश्रा: उनका परिवार तो पूरा नौटंकी कर रहा है। अभी लट्ठ बजेगा तो सब कुबूल कर लेंगे। उनको सब जानकारी है। पीएफआई से जो फंडिंग हो रही उसके अकाउंट की जांच होगी तब पता चलेगा कि पैसा कहां से आता था। उन लोगों ने कितनी बार अपने बेटे से बात की है? और कहां-कहां लेकर गया है। उनको ये पता ही नहीं था कि इतने बडे़-बडे़ मिनिस्टर और सब लोग केरल में इकट्ठा हो गए। वो रहने वाला बागपत का पंक्चर छाप….. पंक्चर की दुकान वाला आदमी वहां जाकर केरल में मिनिस्टर के साथ रियल केरल स्टोरी रिलीज कर रहा है। मतलब सनातन धर्म का मजाक बन रहा है। बहुसंख्यक हिंदुओं के मुंह पर थूक रहा है। ये बोल रहे हैं कि हमें कुछ पता ही नहीं है। वो मुल्ला चाहता था कि हमारी फिल्म रुक जाए, इसीलिए
नसों के बीच ट्यूमर, महिला का उठना-बैठना था मुश्किल:निजी अस्पतालों ने लौटाया, एम्स में माइक्रोसर्जिकल तकनीक से डॉक्टरों ने निकाला

नसों के बीच विकसित हुए खतरनाक ट्यूमर ने एक 40 वर्षीय महिला की जिंदगी पूरी तरह बदल दी थी। हालत यह हो गई थी कि उनका उठना-बैठना तक मुश्किल हो गया और धीरे-धीरे वे बिस्तर पर निर्भर हो गईं। कई निजी अस्पतालों ने इस जटिल सर्जरी को जोखिम भरा बताकर हाथ खड़े कर दिए, जिससे परिवार की उम्मीदें टूटने लगीं। ऐसे कठिन समय में एम्स Bhopal के डॉक्टरों ने चुनौती स्वीकार की और माइक्रोसर्जिकल तकनीक के जरिए नसों के बीच मौजूद ट्यूमर को निकालकर मरीज को नई जिंदगी दी। बिस्तर तक सीमित हो गई थी जिंदगी भोपाल निवासी 40 वर्षीय महिला पिछले कई महीनों से इस न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रही थीं। स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि वे खुद से उठ-बैठ भी नहीं पा रही थीं। धीरे-धीरे उन्होंने अपने शरीर पर नियंत्रण खोना शुरू कर दिया, जिसमें सबसे बड़ी समस्या मल और मूत्र पर नियंत्रण खत्म होना था। डॉक्टरों ने बताया कि महिला को इंट्रामेडुलरी स्पाइनल ट्यूमर की समस्या थी। यह वह गांठ होती है जो रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) के अंदर विकसित होती है। यह बेहद दुर्लभ स्थिति है और कुल स्पाइनल ट्यूमर मामलों में इसका प्रतिशत बहुत कम होता है। इस तरह के ट्यूमर में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि यह सीधे नसों के बीच विकसित होता है, जिससे सर्जरी के दौरान जरा सी चूक स्थायी लकवे का कारण बन सकती है। इसके लक्षणों में शरीर के हिस्सों में कमजोरी, सुन्नपन, चलने में दिक्कत, और मल-मूत्र नियंत्रण में समस्या शामिल हैं। समय पर पहचान और विशेषज्ञ इलाज ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। एक प्रतिशत मामलों में होती है यह बीमारी यह ट्यूमर स्पाइनल श्वाननोमा के बेहद कम, लगभग 1.1 प्रतिशत मामलों में ही देखने को मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति रीढ़ की सर्जरी में सबसे जटिल मानी जाती है, क्योंकि इसमें स्पाइनल कॉर्ड के भीतर से ट्यूमर निकालना होता है। जरा सी चूक भी स्थायी लकवा जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। कई अस्पतालों ने ठुकराया, एम्स में मिली उम्मीद मरीज और उनके परिजनों ने इलाज के लिए कई अस्पतालों का रुख किया, लेकिन कहीं सर्जरी को टाल दिया गया तो कहीं इसे अत्यधिक जोखिम भरा और महंगा बताया गया। लगातार निराशा और आर्थिक संकट के बीच परिवार ने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी। ऐसे कठिन समय में उन्होंने एम्स का रुख किया, जहां उन्हें नई उम्मीद मिली। ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. पंकज मिश्रा के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण केस को स्वीकार किया। सर्जरी से पहले विस्तृत जांच और सटीक योजना बनाई गई। ऑपरेशन के दौरान माइक्रोसर्जिकल तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे स्पाइनल कॉर्ड के भीतर मौजूद ट्यूमर को सावधानीपूर्वक हटाया गया। इस प्रक्रिया में नसों को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसे टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया। ये सावधानियां जरूरी अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर की सर्जरी इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में कई विभागों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. एसआरएएन भूषण ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा। वहीं, शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग के डॉ. विट्ठल पुरी ने सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई। उनकी देखरेख में मरीज ने धीरे-धीरे अपनी शारीरिक क्षमता वापस पाना शुरू किया। आयुष्मान योजना से मिला फ्री इलाज इस पूरे इलाज की एक और खास बात यह रही कि सर्जरी और उपचार पूरी तरह आयुष्मान भारत योजना के तहत फ्री किया गया। इससे मरीज और उसके परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। यह योजना गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। तेजी से हो रहा सुधार, लौट रही सामान्य जिंदगी सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिला। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी ताकत वापस पाना शुरू कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने फिर से मल-मूत्र पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है, जो उनके लिए बड़ी राहत की बात है। अब वह धीरे-धीरे सामान्य और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही हैं।
भोपाल के बैरसिया में सुपरवाइजर के मुंह पर कालिख पोती:पाइप लाइन बिछाने पर देरी से नाराज पार्षद प्रतिनिधि; कहा-2 साल से परेशान हैं

भोपाल के बैरसिया में पानी की पाइप लाइन बिछाने में हुई देरी पर पार्षद प्रतिनिधि का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज पार्षद प्रतिनिधि रवि करोसिया ने ठेकेदार के सुपरवाइजर के मुंह पर कालिख पोत दी। कहा कि जनता दो साल से परेशान हो रही है। बैरसिया नगर पालिका में शहरी अमृत 2.0 जलप्रदाय योजना के तहत काम चल रहा है। यह शमशाबाद डेम से बैरसिया शहर तक पाइप लाइन बिछा हर घर तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से 13 सितंबर 2023 को शुरू की गई थी। इसे दो साल हो चुके हैं, लेकिन यह अधूरी है। करीब 22 करोड़ रुपए की इस योजना ने जहां लोगों को राहत देने का वादा किया था, वहीं अब यह नगरवासियों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बन गई है। कारण प्रोजेक्ट के ठेकेदार द्वारा नगर के वार्डों की सड़कों और गलियों में जगह-जगह खुदाई कर पाइप लाइन डाली गई, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया। इस नाराजगी के चलते मंगलवार को नगर पालिका में पार्षद प्रतिनिधि करोसिया सहित अन्य पार्षदों ने ठेकेदार के सुपरवाइजर के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित पार्षदों ने काम में लापरवाही को लेकर सुपरवाइजर के चेहरे पर कालिख पोतकर अपना विरोध जताया। हंगामे की देखिए 3 तस्वीरें… दो साल से आश्वासन ही मिल रहा नाराज पार्षदों का कहना है कि ठेकेदार पिछले दो वर्ष से सिर्फ आश्वासन दे रहा है, लेकिन काम पूरा करने की कोई गंभीरता नहीं दिखा रहा। अगर काम नहीं करना है तो ठेका छोड़ दें, ताकि किसी दूसरे जिम्मेदार ठेकेदार को काम सौंपा जा सके। पूरे नगर की सड़कें उखड़ी जानकारी के अनुसार, पूरे नगर के वार्डों में उखड़ी सड़कें और खुले गड्ढे अब हादसों को न्योता दे रहे हैं। आए दिन लोग चोटिल हो रहे हैं। जिससे आम जनता में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।







